स्वास्थ्य विभाग और स्टेट मेडिकल फैकल्टी की लापरवाही के कारण सूबे के सभी 10 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता समाप्त हो गई है।
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ऐसे में इनसे हर साल निकलने वाली सैकड़ों नर्सों को झोलाछाप मानते हुए एसजीपीजीआई, बीएचयू और केंद्रीय चिकित्सा संस्थान नौकरी नहीं देते।
दरअसल कई वर्षों से इनकी मान्यता के नवीनीकरण के लिए शुल्क ही जमा नहीं कराया गया। ऐसे में इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) ने इन कॉलेजों की मान्यता खत्म कर रखी है।
कॉलेजों में हैं 513 सीटें
प्रदेश में लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, बरेली, आगरा और सैफई में सरकारी नर्सिंग कॉलेज हैं।
इनमें से लखनऊ में केजीएमयू और बलरामपुर अस्पताल, कानपुर में एलएलआर हॉस्पिटल और यूएचएम हॉस्पिटल, इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज, मेरठ मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर जिला अस्पताल, बरेली जिला अस्पताल, आगरा मेडिकल कॉलेज और रिम्स सैफई में जनरल नर्सिंग मिडवाइफ (जीएनएम) का डिप्लोमा दिया जाता है।
इन सभी नर्सिंग कॉलेजों में 513 सीटें हैं। इन सभी की मान्यता का नवीनीकरण न होने के कारण इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने इन्हें गैरमान्यता प्राप्त कॉलेजों की श्रेणी में डाल दिया है। आईएनसी ने अपनी वेबसाइट पर भी इसका जिक्र किया हुआ है।
अधिकतर नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता वर्ष 1991 से ही नहीं है, इसके बावजूद महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य ने इन कॉलेजों की मान्यता का नवीनीकरण नहीं कराया, जबकि इसकी फीस मात्र 1000 रुपये थी। 20 साल से अधिक समय से आईएनसी से इनका निरीक्षण भी नहीं कराया गया।
रिम्स सैफई की सीटें भी अमान्य
सपा मुखिया के ड्रीम प्रोजेक्ट रूरल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) सैफई के नर्सिंग कॉलेज की मान्यता का नवीनीकरण कराने का ध्यान भी चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय के अधिकारियों ने नहीं रखा।
वहां की 60 सीटों को इस बार अमान्य घोषित कर दिया गया है। इस संस्थान के नर्सिंग कॉलेज को भी आईएनसी ने 2014 में अपनी वेबसाइट पर अमान्य दिखाया है।
कॉलेज-सीटें
एसवीबीपी हॉस्पिटल मेरठ-66 एसएन हॉस्पिटल आगरा-58 जिला अस्पताल बरेली-23 एसआरएन हॉस्पिटल इलाहाबाद-54 एलएलआर हॉस्पिटल कानपुर-67 यूएचएम हॉस्पिटल कानपुर-35 बलरामपुर अस्पताल लखनऊ-23 जीएम एंड एच केजीएमयू लखनऊ-77 जिला अस्पताल गोरखपुर-50 रिम्स सैफई-60
अमान्य डिप्लोमा लेने से छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग रहा है। केंद्रीय संस्थान उन्हें नौकरी पर लेने को तैयार नहीं हैं। सरकार को चाहिए कि वह नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता के लिए गंभीरता बरते, जिससे नर्सों का भविष्य बर्बाद होने से बच जाए। -अशोक कुमार महामंत्री, राजकीय नर्सेज संघ
मामला जानकारी में आने के बाद विभाग इनकी कमियों को दूर करने के लिए हम प्रयासरत हैं। आईएनसी के मानकों के अनुसार सभी कॉलेजों को सुसज्जित किया जाएगा। इसके लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। खास तौर से मानव संसाधन और उपकरणों की कमी सामने आई है, जो जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। -अरविंद कुमार प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य