फालैन में दहकती होलिका के बीच से पहली बार गुजरा संजू पंडा
भक्त प्रह्लाद और होलिका दहन की लीला गांव फालैन में जीवंत हुई। शुभ मुहूर्त पर संजू पंडा पहली बार होलिका के दहकते अंगारों के बीच सकुशल गुजर गए। इसी अग्नि परीक्षा को देने के लिए गांव के संजू पंडा ने एक महीने तक कठिन तप किया था। गांव फालैन में बृहस्पतिवार से शुरू हुए पंडा मेला में शाम ढलते-ढलते आस्था की लहरें हिलोरे भरने लगीं। श्रद्धालु होलिका से संजू पंडा के बच निकलने के उस दुर्लभ चमत्कारिक क्षण को देखने को आतुर थे। शुक्रवार को सुबह करीब चार बजे मंदिर में तप पर बैठे संजू पंडा ने अखंड ज्योति पर हाथ रखकर शीतलता महसूस की। हालांकि उस समय होलिका की लपटों ने चारों ओर खड़े श्रद्धालुओं को काफी पीछे धकेल दिया। लेकिन ज्यों ही संजू पंडा प्रह्लाद की माला को धारण कर निकले भक्त प्रह्लाद के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। प्रह्लाद कुंड में स्नान के बाद चार बजकर 20 मिनट पर संजू पंडा ने धधकती होलिका की ओर दौड़ लगा दी। होलिका के अंगारों पर दस कदम रखकर पंडा होलिका से सकुशल बाहर निकले। मेला आचार्य पंडित भगवान सहाय एवं ग्रामीणों ने उन्हें अपनी गोद में भर लिया। चारों तरफ जय-जयकार के साथ गुलाल उड़ना शुरू हो गया। पंडा ने मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की। इस क्षण के हजारों श्रद्धालु गवाह बने।
बांकेबिहारी मंदिर में होली की धूम
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में होली की धूम मची रही। रंगीली होली के समापन के दिन भक्त अपने आराध्य श्रीबांकेबिहारी के साथ रंगों की बौछार में सराबोर हो गए। मंदिर में अबीर, गुलाल, केसर और रजत पिचकारी से होली खेली गई, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और आनंदमय हो गया।
वृंदावन में होली का उल्लास, जमकर भक्त खेल रहे होली
मथुरा-वृंदावन में सुबह से ही रंग बरसना शुरू हो गए हैं। विभिन्न मंदिरों पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, तो वहीं प्रेम मंदिर के बाहर भक्तों का सैलाब है। हवा में उड़ता गुलाल अपने आराध्य के सामने होली खेलने वालों की भीड़ लगी हुई है।
फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर श्री दाऊजी महाराज मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त उमड़े। श्रद्धालुओं ने दाऊजी महाराज को गुलाल अर्पित कर मनौती मांगी। हर ओर दाऊजी महाराज व रेवती मैया की जय-जयकार होती रहीं। शाम को विभिन्न झंडों के साथ चौपाई गाते हुए लोगों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर गाते नाचते होलिका पूजन किया।
होलिका की धधकती आग में से निकला सर्वानंद
मथुरा के कोसीकलां के गांव जाव में बृहस्पतिवार को होलिका की धधकती आग से होकर पहली बार सर्वानंद दास निकला। प्राथमिक विद्यालय के पास होली मैदान में होलिका रखी गई। इस दौरान दिन में महिलाओं ने होलिका का पूजन किया। शाम को ग्रामीणों ने ढप, झांझ, मजीरों के साथ रसिया और धमारों गायन किया। साधना में लीन सर्वानंद दास ने अग्नि पूजन किया और शाम करीब 7.20 बजे किशोरी कुंड में स्नान कर होलिका की धधकती आग से निकल गया। जैसे ही आग की लपटों से सर्वानंद दास निकला तो दूसरी ओर खड़े ग्रामीणों ने साधु को गले लगा लिया। पूरा मेला स्थल भक्त प्रह्लाद के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। ग्रामीण सुरेश उपमन्यु ने बताया अब तक साधु गुट्टा 10 बार धधकते अंगारों के बीच से गुजरे थे, लेकिन स्वास्थ्य कारणों के चलते उनकी स्थान पर अबकी बार सर्वानंद दास ने रस्म निभाई। राजेश सिंह, धनीराम शर्मा, पप्पू, डॉ. जीता, जवाहर, रतनलाल, हर्ष, खचेरा प्रधान, गुलाब सिंह, हरदेव, बिजेंद्र सिंह आदि थे।
बांकेबिहारी मंदिर में छाया होली का उल्लास, भक्तों पर बरसे रंग और गुलाल
वृंदावन में ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में बृहस्पतिवार को होली की धूम मची रही। रंगीली होली के समापन के दिन भक्त अपने आराध्य श्रीबांकेबिहारी के साथ रंगों की बौछार में सराबोर हो गए। मंदिर में अबीर, गुलाल, केसर और रजत पिचकारी से होली खेली गई, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और आनंदमय हो गया। देशभर से हजारों श्रद्धालु इस अनोखी होली का हिस्सा बनने के लिए मंदिर पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। जैसे ही मंदिर के पट खुले बांकेबिहारी जी के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। मंदिर के सेवायत गोस्वामी ने श्रद्धालुओं पर गुलाल और रंग बरसाया, जिससे हर कोई भक्ति और प्रेम के रंग में डूब गया। सेवायत ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने बताया कि यहां की होली भक्तों के लिए एक दिव्य अनुभव है। बांकेबिहारी जी स्वयं भक्तों के संग होली खेलते हैं और यही वजह है कि लोग दूर-दूर से यहां खिंचे चले आते हैं। इसके अलावा प्रेम मंदिर, राधावल्लभ मंदिर में भी श्रद्धालुओं का सैलाब देखने को मिला।
जाबरा में झांकियों के साथ निकाली गई होलिका शोभायात्रा
मथुरा के मांट में होली के उपलक्ष में गांव जाबरा में राधाकृष्ण एवं महादेव की झांकियों के साथ होलिका शोभायात्रा निकाली गई। महिलाओं द्वारा जगह-जगह होलिका का पूजन किया एवं पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। भव्य होलिका शोभा यात्रा बैंडबाजे, डीजे एवं राधा कृष्ण और महादेव की झांकियों के साथ निकाली गई। शोभायात्रा मेन चौराहे से शुरू होकर बैंक मोहल्ला, पथवारी मोहल्ला, पपरेला रोड होते हुए होलिका स्थल पहुंची। जानकारी देते हुए जाबरा के ग्राम प्रधान पप्पू बोहरे ने बताया कि यह कार्यक्रम वर्षों से चला आ रहा है और होली पर जाबरा में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजन होते हैं। वही सुरक्षा की दृष्टि से मांट पुलिस सहित कई थानों का पुलिस बल मौजूद रहा। इस मौके पर ओपी सिंह, हरपाल सिंह, नीरज चौधरी, साैरभ चौधरी, सन्तोष सिंह, नकुल देव, गुड्डू कुमार, भूपेंद्र सिंह, देशराज सिंह, रूपेश कुमार, जुगेंद्र सिंह, केशव देव आदि माैजूद रहे।
पागल बाबा मंदिर से निकाला गया होली का डोला
आज ब्रज में होली रे रसिया होरी रे रसिया बर जोरी रे रसिया। यह गूंज इन दिनों धार्मिक नगरी मंदिर वृंदावन के हर एक छोटे बड़े मंदिर सुनाई दे रही है। इतना ही नहीं बल्कि इस गूंज के साथ श्रद्धालु भी ठाकुर जी के रस रंग में जमकर गोते लगा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को मथुरा वृंदावन मार्ग स्थित ( लीलानंद ठाकुर) पागल बाबा मंदिर से होली का डोला निकाला गया। डोले में विराजमान भगवान राधा कृष्ण के स्वरूप भक्तों पर अबीर गुलाल की बरसा करते हुए चल रहे थे। जिसका कण कण पाने के।लिए भक्त खासे लालायित नजर आए।डोले में शामिल भक्त बैंड बाजों की धुन पर एक दूसरे को गुलाल लगाते और नाचते गाते हुए चल रहे थे।
आकर्षण का केंद्र लीलानंद ठाकुर का डोला रहा।मंदिर परिसर से शुरू हुई डोला नगर भ्रमण करता हुआ भूत गली स्थित प्राचीन पागल बाबा मंदिर पहुंचा। जहां ठाकुर जी के स्वरूपों के चरणों में गुलाल अर्पित कर एक बार फिर जमकर होली खेली गई। जिसके चलते संपूर्ण परिसर होली की मस्ती में झूम उठा।सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस कर्मी डोले के साथ कदम ताल करते हुए चल रहे थे। जिसके चलते संपूर्ण परिसर भगवान राधा कृष्ण व लीलानंद ठाकुर पागल बाबा के जयकारों से गुंजायमान हो गया। इस संबंध में मंदिर के प्रबंधक बलदेव चतुर्वेदी ने बताया कि मंदिर की यह परम्परा विगत कई वर्षों से चली आ रही है। जिसका भक्तों को वर्ष भर इंतजार रहता है।
हाईड्रोलिक पिचकारी से श्रद्धालुओं पर बरस रहे रंग
प्रियाकान्तजु मंदिर पर 13 मार्च को ब्रज की सम्पूर्ण सतरंगी होली मनाई। मंदिर पर टेसू के फूलों को भिगोंकर बनाया गया सुगंधित रंग बरसाया गया। देवकीनंदन महाराज ने हाईड्रोलिक पिचकारी से श्रद्धालुओं पर रंगों की वर्षा की। मंदिर पर सात प्रकार की होली खेली गई। हाईड्रोलिक होली ने भक्तों को आनंदित कर दिया। सैकड़ों की संख्या में यहां लोग पहुंचे। होली के रसिया पर भक्त थिरक रहे थे।
प्रियाकांतजू मंदिर में होली
वृंदावन के प्रियाकांतजू मंदिर में होली शुरू हो गई है। होलिका दहन से पूर्व सुबह 11 बजे से मंदिर प्रांगण में सात प्रकार की होली प्रारंभ हुई है। श्रद्धालुओं के बीच फूलों की होली, लड्डु-जलेबी होली, रसिया गायन होली, भजन नृत्य होली, लठामार होली, गुलाल की होली और अंत में टेसू के रंगों की होली खेली जाएगी।
30 फीट व्यास की अग्नि से निकलते हैं पंडा
होलिका दहन के दिन संजू पंडा का व्रत पूरा होगा। उस दिन मुहूर्त के अनुसार प्रह्लाद कुंड के समीप विशालकाय होलिका बनाई जाएगी। यह करीब 30 फीट व्यास से ज्यादा की होगी। मुहूर्त के अनुसार पंडा प्रह्लाद जी के मंदिर से निकलेंगे और फिर प्रह्लाद कुंड में स्नान कर सीधे जलती होली की लपटों के बीच से नंगे पैर जाएंगे।
'अग्नि परीक्षा' देने के लिए संजू पंडा तैयार
भक्त प्रह्लाद लीला को साकार करने के लिए अग्नि की जलती लपटों से निकलने की परंपरा को जीवित रखने वाले गांव फालैन के ग्रामीण होली मेले की तैयारियां करने में जुटे हैं। वहीं होलिका के दहकते अंगारों के बीच गुजरने के लिए आस्था की 'अग्नि परीक्षा' देने के लिए संजू पंडा तैयार हैं।
ऊंचागांव में सुरभि होली प्रारंभ
मैं न-न करती हार गई, रंग डाल गयौ रसिया, सुरभि होली में होत यहां रंगन की भरमार, आगे-आगे ग्वाल पीछे-पीछे ब्रजनार। इसी भाव से साढ़े पांच सौ वर्ष पहले श्रील नारायण भट्ट ने राधारानी की प्रधान सखी ललिताजी के गांव ऊंचागांव में सुरभि होली प्रारंभ कराई थी। श्रील नारायण भट्ट की समाधि स्थल पर इस होली का मंचन किया गया। इसमें ग्रामीण मद मस्त होकर नाच उठे। इस दौरान श्रील नारायण के वशंजों द्वारा उनकी समाधि पर गुलाल अर्पित कर होली प्रांम्भ की। रसियाओं की थाप पर गुर्जर समाज के महिला-पुरुषों ने लोकनृत्य किया। उड़ाए जा रहे अबीर-गुलाल में सराबोर श्रद्धालु अपने आपको धन्य मान रहे थे।
रंगों से विधवा माताओं के चेहरों पर आई मुस्कान
वृंदावन के ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में बुधवार को विधवा माताओं के लिए होली का आयोजन हुआ। रंगोत्सव के माताओं के चेहरे खिल उठे। इस दौरान उनकी खुशी देखते ही बन रही थी।
वर्षों के एकाकीपन और सामाजिक तिरस्कार को पीछे छोड़ते हुए इन महिलाओं ने गुलाल, फूलों की पंखुड़ियों और कृष्ण भजनों के साथ अपनी नई पहचान का उत्सव मनाया। वर्ष 2013 में स्वर्गीय डॉ. बिंदेश्वर पाठक की पहल से इस परंपरा की शुरूआत हुई थी। विरासत को आगे बढ़ाते हुए सुलभ इंटरनेशनल के अध्यक्ष कुमार दिलीप ने विधवाओं के उत्थान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि होली का यह उत्सव हमारी सामाजिक सोच में बदलाव का प्रमाण है।
महारास कर कृष्ण-बलराम को रिझा रहीं हुरियारिनें
मथुरा के बलदेव में श्रीदाऊजी महाराज का हुरंगा 15 मार्च को है। इसके लिए हुरियारिनें तैयारियों में जुट गई हैं। वह प्रतिदिन मंदिर प्रांगण में नृत्य महारास कर हुरंगा का पूर्वाभ्यास कर रही हैं। बैंड-बाजे की धुन पर सैकड़ों महिलाएं होली के रसिया पर परंपरागत लहंगा-फरिया व स्वर्ण आभूषण पहन कर नाच-गा रही हैं। नृत्य महारास देख श्रद्धालु आनंदित हो रहे हैं। इस समय मंदिर प्रांगण में साक्षात देवलोक दिखाई दे रहा है। श्रीकृष्ण-बलराम स्वरूपों के साथ हुरियारिनें नृत्य कर हुरंगा की तैयारी कर रही हैं। बालिका जयश्री पांडेय श्रीकृष्ण स्वरूप में आकर्षक का केंद्र बनी हुई हैं। महिलाएं श्रीकृष्ण-बलराम के स्वरूप को घेर कर नाच रही हैं। साथ ही गा रही हैं। मेरो खोए गयो बाजू बंद, रसिया होरी में, जि होरी नाय दाऊजी का हुरंगा है। सुखदेव पांडेय, भगवत पांडेय, मदन मोहन पांडेय, ब्रजवासी पांडेय, रजत पांडेय ने बताया हुरंगा से पूर्व सैकड़ों हुरियारिनें निरंतर अभ्यास कर रही हैं।
नंदगांव और गिडोह का हुरंगा 15 व 16 को
नंदगांव में लठामार होली के साथ हुरंगे का आयोजन भी होता है। हुरंगा में हुरियारों पर हुरियारिनें लाठियां बरसाती हैं। गांव गिडोह में हुरंगा का आयोजन फाल्गुन मास की समाप्ति के बाद किया जाता है। नंदगांव में 15 मार्च तथा गिडोह में 16 मार्च को हुरंगे का आयोजन किया जाएगा। दोनों गांव के लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वहीं वसंत के आगमन से नंदबाबा मंदिर में समाज गायन की शुरूआत हो जाती है। करीब सवा माह तक चलने वाले समाज गायन का धूलहोली के दिन विराम हो जाता है। गोस्वामी समाज के मुखिया छैलबिहारी गोस्वामी ने बताया कि ने बताया कि नंदबाबा मंदिर में फाल्गुन मास की समाज का अंतिम गायन धूलहोली तक होता है। इस दिन पद ढप धर दै यार का भी गायन होता है।
वृंदावन में विधवाओं की होली...रंगों के साथ लौटी जिंदगी की मुस्कान
समाज की रूढ़ियों को चुनौती देते हुए इस बार वृंदावन के ऐतिहासिक गोपीनाथ मंदिर में एक अनोखी होली खेली गई। यह होली थी उन विधवाओं की जिनके जीवन से रंग कभी छीन लिए गए थे। वर्षों के एकाकीपन और सामाजिक तिरस्कार को पीछे छोड़ते हुए इन महिलाओं ने गुलाल, फूलों की पंखुड़ियों और कृष्ण भजनों के साथ अपनी नई पहचान का उत्सव मनाया।
राधारानी-बिहारीजी मंदिर से आज निकलेगा डोला
श्रीराधारानी भक्त ब्रज मंडल समिति के तत्वावधान में गुरुवार को होली महोत्सव मनाया जाएगा। सेवायत महंत राजकुमार शर्मा ने बताया कि राधारानी पदयात्रा फूलडोल के साथ दोपहर 12 बजे गणेशबाग राधारानी मंदिर से प्रारंभ होगी। यह मथुरा रोड, कटरा बाजार, रेतिया बाजार, मांट रोड होती हुई गणेशबाग पहुंचेगी। यहां होली महोत्सव मनाया जाएगा। तीन बजे बिहारीजी मंदिर से बांकेबिहारीजी का डोला शोभायात्रा के रूप में निकाला जाएगा। यह रेतिया बाजार, मांट रोड़, कटरा बाजार होती हुई मंदिर पर पहुंचेगी। जगह-जगह गुलाल उड़ाया जाएगा।
राधा वल्लभ मंदिर में खूब उड़ा गुलाल
वृंदावन के राधा वल्लभ मंदिर में होली उत्सव का नजारा बेहद मनमोहक रहा। जैसे ही भक्तों पर रंग और गुलाल बरसाया गया, वे प्रभु की भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे। पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा। रंगों और भक्ति के इस अद्भुत संगम में श्रद्धालु मंगलगान, नृत्य और कीर्तन करते नजर आए। मंदिर में चारों ओर गुलाल उड़ रहा था, जिससे माहौल पूरी तरह ब्रज की होली के रंग में रंग गया।
होली के उल्लास में जमकर झूमे श्रद्धालु
ब्रज में होली की धूम मची हुई है। देश ही नहीं, बल्कि विदेशी श्रद्धालु भी इस होली का आनंद लेने के लिए कान्हा की नगरी मथुरा पहुंच चुके हैं। बुधवार को द्वारिकाधीश मंदिर में होली हुई। इस अवसर पर होली का उल्लास देखते ही बनता था। रंग में सराबोर श्रद्धालु कान्हा की भक्ति में लीन होकर झूम रहे थे।
बॉलीवुड अभिनेता विद्युत जामवाल पहुंचे द्वारिकाधीश मंदिर
मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर में बगीचे की होली का आनंद लेने के लिए मुंबई से बॉलीवुड अभिनेता विद्युत जामवाल पहुंचे। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड के हर अभिनेता-अभिनेत्री को भी यहां आना चाहिए। क्योंकि, ब्रज की होली का अपना अलग अनुभव है, जिसे खुद यहां पहुंचकर की महसूस किया जा सकता है। यहां उन्होंने शंख बजाकर राजाधिराज के चरणों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
द्वारकाधीश मंदिर में शुरू हुई होली
मथुरा में होली की धूम मची हुई है। मंदिरों में हर तरफ रंग और गुलाल उड़ रहा है। बुधवार को द्वारिकाधीश मंदिर में होली हुई। भक्तों ने जमकर गुलाल उड़ाया। इस दौरान रसिया गायन पर आनंदित भक्त झूमते नजर आए।
दाऊजी में हुरंगे की तैयारी
श्रीदाऊजी महाराज का विश्व प्रसिद्ध हुरंगा 15 मार्च को है, इसकी तैयारी को लेकर हुरियारिनें पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रही हैं। ऐसौ बृज आनंद भयो, जो मुख सौ कहौ न जायै, हुरंगा की तैयारी करते हुए हुरियारिनें लहंगा-फरिया और आभूषण पहनकर नाचती गाती हुई हुरंगा की तैयारी कर रही हैं।
महारास नृत्य में नृत्य करती हुई राधा कृष्ण के स्वरूप में कृष्ण बलराम के रूप में बालिकाएं नाचतीं हैं, तो महिलाएं उनको घेरकर उनके साथ नाचती हैं। हुरियारे सुखदेव पांडेय, मदनलाल पांडेय, बृजवासी पांडेय, ज्ञानेंद्र पांडेय भागवत पांडेय आदि ने बताया महिलाएं हुरंगा की तैयारी के लिए पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रही हैं। समाज गायन में विभिन्न पदों पर हुरियारे अपनी पूरी तैयारी कर रहे हैं। होली अपने यौवन की ओर बढ़ रहीं हैं। भारी भीड़ श्रद्धालुओं की दर्शनों को उमड़ रही है।
संत प्रेमानंद महाराज ने खेली होली, श्रद्धालुओं पर बरसाया गुलाल
वृंदावन में होली पर श्री राधा हित केली कुंज आश्रम में भक्ति और रंगों का अनोखे संगम में हर कोई डूबता हुआ दिखाई दिया। चहुंओर उड़ता हुआ गुलाल और गूंजता राधा नाम वातावरण को पवित्र और हर किसी की दिल में नाम जप की अलख जगा रहा था। संत प्रेमानंद महाराज ने जैसे ही श्रद्धालुओं पर गुलाल डाला तो वह खुशी में झुकने लगे।
वृंदावन में भी उमड़ रही भीड़
होली का उल्लास वृंदावन में चरम पर है। भक्तों की भीड़ा आराध्य के साथ होली खेलने के लिए लगातार उमड़ रही है। सुबह से ही बांके बिहारी मंदिर के गेट पर भक्तों की भारी भीड़ जुटना शुरू हो रही है। यहां भक्त गुलाल से होली खेल रहे हैं।
द्वारकाधीश मंदिर में होली
ब्रज की होली में अद्भुत और अनोखे आयोजन शामिल हैं। बरसाना और नंदगांव की लठामार होली के बाद गोकुल में छड़ीमार होली का आयोजन भी हो चुका है। बुधवार को मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में होली का आयोजन होगा। इसमें दोपहर 1 बजे से द्वारकाधीश रंग गुलाल और टेसू के फूलों के रंग से होली खेलेंगे। इसमें जिले के साथी अलग-अलग स्थान से आए भक्त द्वारकाधीश के साथ होली खेलेंगे। वहीं वृंदावन के मंदिरों में भी होली के आयोजन जारी रहेंगे।
इससे पूर्व मंगलवार को छटीकरा मार्ग स्थित मंदिर में चल रहे होली महोत्सव में भागवत प्रवचन करते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा कि सच्चा सुख और संतोष केवल परोपकार और सद्कर्मों में निहित है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में सबसे बड़ा पुण्य दूसरों को सुख देना है। कथा में आए भागवत पीठाधीश्वर पुरुषोत्तम शरण शास्त्री महाराज ने व्यासपीठ पूजन कर श्रोताओं को आशीर्वचन प्रदान किए।
बांकेबिहारी मंदिर में होली की धूम, रंग-गुलाल की वर्षा के बीच झूमे श्रद्धालु
ब्रज की विश्वविख्यात रंगीली होली के दूसरे दिन मंगलवार को ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के दरबार में भक्त रंग और गुलाल की बौछार के बीच भक्ति और आनंद में सराबोर हो गए। मंदिर के आंगन में श्रद्धालु भावविभोर होकर नाचते-गाते नजर आए। मंदिर परिसर में अलसुबह से ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु अपने आराध्य के हुरियारे स्वरूप के दर्शन के लिए उत्सुक दिखे। जैसे ही मंदिर में रंगों की वर्षा शुरू हुई भक्तगण प्रेम और भक्ति की इस अनोखी होली में डूब गए। टेसू के फूलों के रंग और गुलाल की बारिश के बीच जयकारे गगन को भेद रहे थे। सेवायत विप्रांश वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि इस वर्ष होली महोत्सव 13 मार्च की पूर्णिमा रात्रि तक चलेगा और 14 मार्च को डोलोत्सव मनाया जाएगा। हालांकि इस बार तिथि क्षय होने के कारण उत्सव चार दिनों तक ही चलेगा। होली के अवसर पर श्रीबांकेबिहारी के सेवायतों द्वारा ठाकुरजी को विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए गए। इनमें दहीबड़ा, गुजिया, जलेबी, चाट-चटनी, नमकीन और अन्य स्वादिष्ट व्यंजन शामिल रहे। मंदिर में ठाकुरजी के लिए छप्पन भोग की विशेष व्यवस्था की गई, जिसे भक्तों ने प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
ठंडाई पीकर होली खेल रहे ठाकुर जी
होली पर राधा-श्याम कुंड संगम स्थित गिरिराज मंदिर के साथ अन्य मंदिरों में ठाकुरजी को शाम को मेवा युक्त ठंडाई का भोग निवेदित किया जा रहा है। यह क्रम पूर्णमासी तक जारी रहेगा। प्रसाद को सेवायत तथा भक्तजन ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि ठंडाई पीने के बाद ठाकुरजी भक्तों के साथ होली खेलने में मगन हो जाते हैं। ठंडाई में काली मिर्च, सौंफ, मेवा, केसर आदि का प्रयोग किया जा रहा है।
परिक्रमा मार्ग में उड़ रहा गुलाल
होली पर 21 किलोमीटर लंबे गिरिराज परिक्रमा मार्ग में आस्था का समंदर उमड़ रहा है। मंदिर और परिक्रमा मार्ग में भक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है। श्रद्धालु एक-दूसरे पर गुलाल व फूल फेंक कर होली मना रहे हैं। परिक्रमा मार्ग में गिरिराज महाराज के जयकारों के साथ उड़ता गुलाल आसमान में इंद्रधनुष जैसी छटा बिखेर रहा है। समाज सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. बृजलाल गोस्वामी ने बताया कि होली महोत्सव के दौरान बुजुर्गों का दिल्ली वाली धर्मशाला पर सम्मान किया जाएगा।
गोकुल पहुंचे एसएसपी, सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
गोकुल में छड़ीमार होली के दौरान उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया। दोपहर बाद एसएसपी ने यहां पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था को परखा।
कान्हा की बंसी बजते ही छाया उल्लास
गोकुल में यमुना घाट के किनारे जब कान्हा के स्वरूप ने बंसी बजाई तो उल्लास छा गया। इससे पूर्व सुबह दस बजे नंद भवन नंदकिला से ठाकुर जी का डोला निकाला गया। डोला नंद भवन से बीच चौक, नंद चौक होकर मुरलीधर घाट पर पहुंचा। मंदिर सेवायत पुजारी मथुरा दास ने ठाकुर जी की आरती उतारी। गोकुल वासियों ने गली-गली में डोला का फूलों की बरसात कर स्वागत किया। डोला में गोकुलवासी मस्त होकर नृत्य कर रहे थे। गोकुल के लोग ठाकुर जी का स्वागत कर जयघोष करते हुए डोला के साथ निकले। गोकुल की ग्वालिन छड़ी लेकर डोला के साथ साथ चल रहीं थीं। हंसी ठिठोली करते हुए ग्वाल ग्वालिन गोकुल की गलियों से गुजरते हुए मुरलीधर घाट पर पहुंचे। जहां ठाकुर जी ने पहली बार बंसी बजाई, वहीं छड़ीमार होली खेली गई। गोकुल की सैकड़ों ग्वालिनों ने छड़ीमार होली ग्वालों के साथ खेली।
होली चबूतरा पर छड़ीमार होली
श्रीकृष्ण की क्रीड़ा स्थली गोकुल में यमुना किनारे होली चबूतरा पर छड़ीमार होली शुरू हो गई है। गोकुल में यमुना किनारे स्थित नंद किले के नंद भवन में ठाकुर जी के समक्ष राजभोग रखा गया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और बलराम होली खेलने के लिए मुरली घाट को निकले। बाल स्वरूप भगवान के डोला को लेकर सेवायत चल रहे थे। उनके आगे ढोल-नगाड़े और शहनाई की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते आगे बढ़ रहे थे।
श्रद्धालुओं की उमड़ने लगी भीड़
गोकुल में छड़ीमार होली एक बजे के बाद शुरू हो जाएगी। इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई है। पुलिस ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
गोदा हरिदेव मंदिर से निकली शोभायात्रा
वृंदावन के गोदा हरिदेव मंदिर की भव्य शोभायात्रा सोमवार को धूमधाम से निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भक्ति भाव से नाचते-गाते हुए यात्रा को भव्यता प्रदान की।
दूर-दराज से आते हैं श्रद्धालु
गोकुल की छड़ीमार होली खेलने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं। इस उत्सव का आयोजन यहां सदियों से चला आ रहा है। प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए आज भी हर साल यहां छड़ीमार होली का आयोजन किया है। छड़ीमार होली के दिन कान्हा की पालकी और पीछे सजी-धजी गोपियां हाथों में छड़ी लेकर चलती हैं।
कैसे शुरू हुई छड़ीमार होली की परंपरा?
बचपन में कान्हा बड़े चंचल हुआ करते थे। गोपियों को परेशान करने में उन्हें बड़ा आनंद मिलता था, इसलिए गोकुल में कान्हा के बालस्वरूप को अधिक महत्व दिया जाता है। नटखट कान्हा की याद में हर साल यहां पर छड़ीमार होली का आयोजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि बालकृष्ण को लाठी से चोट न लग जाए, इसलिए यहां लाठी की जगह छड़ी से होली खेली जाती है।
छड़ीमार होली की खास बातें:
-मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पहली होली गोकुल में खेली थी।
-इस दिन कान्हा की पालकी और पीछे सजी-धजी गोपियां हाथों में छड़ी लेकर चलती हैं।
-छड़ीमार होली कृष्ण के प्रति प्रेम और भाव का प्रतीक मानी जाती है।
-बाल गोपाल को चोट न लग जाए इसलिए लट्ठ की जगह छड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।
ओ रंग डार गयो री मोपे सांवरा...
फाग खेले तो ब्रज में आ जइयो रसिया, ओ रंग डार गयो री माेपे सांवरा, उड़त गुलाल लाल भए बदरा जैसे पारंपरिक गीत, मयूर नृत्य, श्रीराधा कृष्ण के स्वरूप में नृत्य करतीं झांकियां, चहुंओर उड़ता गुलाल, फूलों की होली, लाठी मारती हुरियारिनें और ढाल थामे हुरियारे। यह दृश्य सोमवार को रंगभरनी एकादशी पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि में लठामार होली महोत्सव में साकार हो उठा। लठामार होली में जगदीश ब्रजवासी और शालिनी शर्मा ने ब्रज के परंपरागत लोकगीत का बहुत ही सुंदर गायन कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु सांस्कृतिक कार्यक्रमों का लुत्फ उठाते और रंगों में सराबोर होकर झूमने लगे। इसके बाद फूलों की खेली गई। चारों ओर हाइड्रोजन सिलिंडर से उड़ते गुलाल ने भक्तों को अपने आगोश में ले लिया। इसके बाद गुरु शरणानंद महाराज ने मंच पर विराजमान युगल सरकार श्रीराधाकृष्ण के स्वरूप की आरती की। जिलाधिकारी सीपी सिंह और एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने भी श्रीराधाकृष्ण के स्वरूप पर फूलों की वर्षा की।
सड़क से मंदिर तक कड़ा सुरक्षा घेरा
वृंदावन में धार्मिक आयोजन को देखते हुए शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। सड़क से लेकर मंदिर तक पुलिस का कड़ा पहरा रहा। डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय और जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
राधावल्लभ लाल स्वयं अपने भक्तों पर गुलाल उड़ाते हुए चल रहे थे और श्रद्धालु इस अलौकिक क्षण का आनंद लेते हुए रंगों में सराबोर हो गए। शोभायात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर ठाकुरजी का स्वागत किया। सेवायत मोहित मराल गोस्वामी ने बताया कि इस अद्भुत दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।
रंगभरनी एकादशी पर सोमवार को ठाकुर राधावल्लभ मंदिर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह पारंपरिक प्रिया-प्रियतम की रंगीली होली शोभायात्रा अपराह्न मंदिर से प्रारंभ हुई और नगर भ्रमण के पश्चात मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। शोभायात्रा में ठाकुर राधावल्लभ लाल और श्रीजी की प्रतिमाएं सुसज्जित रथ पर विराजमान थीं। जैसे ही रथ नगर के मुख्य मार्गों से गुजरा भक्तों ने ठाकुरजी के साथ रंगों की बौछार में मग्न होकर होली खेली।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर परिसर में सोमवार को दर्शन के दौरान अव्यवस्थाओं का बोलबाला देखने को मिला। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन तो तैनात रहा लेकिन प्राइवेट गार्डों की मनमानी भी हावी रही। कई गार्डों ने श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार किया। जिससे विवाद की स्थिति भी पैदा हो गई, लेकिन पुलिस ने मामले को शांत कर दिया।
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के होली खेलने के बाद थक जाने पर उनकी इत्र से मालिश भी करने की परंपरा को निभाया गया। चार मर्तबा मौसमी इत्रों से मालिश कराने वाले बिहारीजी को सभी पांच भोगों के साथ पान के वीरा को भी धराया गया।
रंगभरनी एकादशी पर सोमवार को ठाकुर राधावल्लभ मंदिर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह पारंपरिक प्रिया-प्रियतम की रंगीली होली शोभायात्रा अपराह्न मंदिर से प्रारंभ हुई और नगर भ्रमण के पश्चात मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। शोभायात्रा में ठाकुर राधावल्लभ लाल और श्रीजी की प्रतिमाएं सुसज्जित रथ पर विराजमान थीं। जैसे ही रथ नगर के मुख्य मार्गों से गुजरा भक्तों ने ठाकुरजी के साथ रंगों की बौछार में मग्न होकर होली खेली। राधावल्लभ लाल स्वयं अपने भक्तों पर गुलाल उड़ाते हुए चल रहे थे और श्रद्धालु इस अलौकिक क्षण का आनंद लेते हुए रंगों में सराबोर हो गए। शोभायात्रा मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर ठाकुरजी का स्वागत किया। सेवायत मोहित मराल गोस्वामी ने बताया कि इस अद्भुत दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।
परिक्रमा मार्ग में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास की अनुपम छटा बिखरी
रंगभरनी एकादशी पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं की भीड़ पंचकोसी परिक्रमा के लिए उमड़ पड़ी। एक पल के लिए लोगों को महाकुंभ जैसा नजारा दिखाई देना लगा। रविवार देर रात से ही भक्तों की टोलियां जयकारों के साथ परिक्रमा मार्ग पर जुटने लगीं। राधे-राधे के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। जगह-जगह श्रद्धालु ऑडियो सिस्टम पर बज रहे रसिया की धुन पर नाचते-गाते और गुलाल उड़ाते हुए दिखाई दिए। भक्तों के उल्लास और भक्ति भाव का ऐसा नजारा हर ओर देखने को मिला। करीब 12 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी। मथुरा मार्ग, पानीगांव मार्ग, छटीकरा मार्ग सहित अन्य रास्तों से भी लाखों श्रद्धालु पैदल यात्रा कर परिक्रमा में शामिल होते रहे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिसबल की तैनाती की गई थी। सोमवार शाम तक परिक्रमा जारी रही, जिसमें भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मंदिर में भीड़ के दबाव से बिगड़ी तबीयत
वृंदावन बांकेबिहारी मंदिर में सोमवार को भीड़ के दबाव के बीच चार श्रद्धालु बेहोश हो गए। जबकि दो श्रद्धालु चोटिल हो गए। जानकारी के अनुसार दीपक मिश्रा पुत्र रामकुमार मिश्रा के जादौन पार्किंग में अचानक पैर में कुछ लग गया, जिससे खून निकलने लगा। वहीं लुधियाना पंजाब निवासी जसलीन पुत्री रविंदर की गिरने से पैर में चोट आ गई। दोनों को प्राथमिक उपचार दिया गया। इधर, खैर निवासी हेमलता पत्नी जितेंद्र मंदिर में चक्कर खाकर बेहोश हो गईं। मीरा पत्नी ओमेर सिंह भी मंदिर परिसर में अचानक बेहोश हो गईं। इसके अलावा हरियाणा करनाल निवासी सनी पुत्र ओमप्रकाश को भी चक्कर आ गए और वे बेहोश हो गए। आगरा निवासी राधिका पुत्री जगबीर भी चक्कर खाकर गिर गईं। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने बेहोश श्रद्धालुओं की सहायता की और उन्हें प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। मंदिर प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
श्री राधारमण मंदिर में भक्तों संग ठाकुरजी ने खेली होली
वृंदावन के सप्तदेवालयों में से एक श्री राधारमण मंदिर में होली महोत्सव की धूम मची रही। सोमवार को मंदिर में परंपरागत तरीके से ठाकुरजी को पीले रंग के वस्त्र धारण कराकर गर्भगृह से बाहर जगमोहन में विराजमान किया गया। सेवायत गोस्वामियों ने सोने-चांदी की पिचकारी से टेसू के फूलों का रंग आराध्य के वस्त्रों पर अर्पित किया। इसके बाद ठाकुरजी का प्रसादी रंग और गुलाल भक्तों पर बरसाया गया। होलिका अष्टमी से पूर्णिमा तक सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। ठाकुरजी के रंगों से सराबोर भक्तजन भक्ति रस में झूम उठे और जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। मंदिर के सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी ने बताया कि यह सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा है, जिसमें हर दिन ठाकुरजी को श्वेत वस्त्र धारण कराए जाएंगे और शाम की उत्सव आरती के बाद गुलाल और टेसू के रंगों से होली खेली जाएगी। भक्तों पर बरसने वाला यह प्रसादी रंग भक्ति और प्रेम का प्रतीक है, जो उन्हें ठाकुरजी के दिव्य सानिध्य का अनुभव कराता है।
लठामार होली में पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में लठामार होली के दाैरान हुरियारियों ने पुलिसकर्मियों को भी नहीं छोड़ा। हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार से बचने के लिए पुलिसकर्मी भी दाैड़ते नजर आए। हुरियारिनों के सामने पुलिसकर्मियों ने हाथ जोड़ दिए, लेकिन हुरियारिनों ने पुलिसकर्मियों को अपनी लाठियों का मजा चखा ही दिया।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में हुई लठामार होली
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में रंगभरनी एकादशी पर गुरु शरणानंद महाराज ने होली महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद लठामार होली खेली गई। लठामार होली में हुरियारनों ने हुरियारों के प्रेम भरी लाठी बरसाईं। हुरियारों ने भी लाठियों का बचाव ढाल से किया।
जन्मभूमि में कान्हा ने महादेव की भस्म-गुलाल से खेली होली
गुलाल बरस रहा था, रंग उड़ रहा था। हर कोई झूम-झूम कर रसिया की धुन पर थिरक रहा था। यह बानगी श्रीकृष्ण जन्मभूमि में थी। रंगभरनी एकादशी पर जन्मभूमि में गुरु शरणानंद महाराज ने होली महोत्सव का शुभारंभ किया। इसके बाद काशी विश्वनाथ से आई प्रसाद के रूप में गुलाल और भस्म से केशव ने होली खेली। प्रसादी रूपी यह गुलाल भक्तों में भी उड़ाया गया। लठामार होली में हुरियारनों ने हुरियारों के प्रेम भरी लाठी बरसाईं।
राधा-कृष्ण के स्वरूप संग खेली होली
मथुरा-वृंदावन में जगह-जगह रंगोत्सव मनाया जा रहा है। सोमवार को यमुना सेवा दल ने होली उत्सव का आयोजन किया। इसमें महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों ने राधा-कृष्ण के स्वरूप के साथ जमकर होली खेली। इस मौके पर लोकदल के राष्ट्रीय महामंत्री यशपाल बघेल, महानगर अध्यक्ष जितेंद्र प्रजापति, पार्षद हेमंत खंडोली, युवा व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष नरेश शर्मा, बब्बू पंडित, यमुना सेवा दल के अध्यक्ष मुनीष शर्मा, अखिलेश मिश्रा आदि मौजूद रहे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में खेली जा रही फूलों की होली
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि में होली का उल्लास छाया हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रभु श्रीकृष्ण के साथ होली खेलने के लिए पहुंचे हैं। यहां फूलों की होली खेली जा रही है। राधा-कृष्ण के स्वरूप में कलाकार नृत्य कर रहे हैं। हर ओर राधे-राधे की गूंज है। श्रद्धालु आनंदित हो रहे हैं।
मथुरा के नाैहझील में हुरियारों का स्वागत...फिर हुआ जमकर नृत्य
मथुरा के नौहझील में रंगभरनी एकादशी के अवसर पर गांव मरहला मुक्खा में भव्य होली महोत्सव मनाया गया। यमुना स्नान व पूजन करके बरौठ गांव के हुरियारे होली के रसियों पर ढप, ढोल और नगाड़े के साथ गाते-बजाते गांव मरहला मुक्खा की चौपाल पर पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने हुरियारों के माथे पर गुलाल लगाकर स्वागत किया और होली की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद गांव के हर चौक पर हुरियारों ने हुरियारिनों संग जमकर नृत्य किया।
जमकर नाचे श्रद्धालु
ब्रज में होली का उल्लास छाया हुआ है। मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में होली की भव्यता देखते ही बन रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान की केशव वाटिका में हो रही रंगारंग लठामार होली के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इस दाैरान राधा-कृष्ण के स्वरूपों के साथ श्रद्धालु भी जमकर थिरके।
भक्ति और मस्ती का अनोखा संगम
मंदिर परिसर में चारों ओर अबीर-गुलाल की सातरंगी छटा छाई हुई है। भक्तगण ठाकुरजी की रंग-प्रसादी में भीगकर भक्ति रस में डूब रहे हैं। सेवायतों द्वारा होली के रसिया भजनों का पारंपरिक गायन किया जा रहा है, जिससे वातावरण में भक्ति और मस्ती का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।
पंच दिवसीय रंगोत्सव का शुभारंभ
ब्रजमंडल में होली की धूम जोरों पर है। रंगभरनी एकादशी के पावन अवसर से ही कान्हा की नगरी में पंच दिवसीय रंगोत्सव का शुभारंभ हो चुका है। चारों ओर भक्तों के टोलियां भक्ति और उल्लास में सराबोर होकर आनंद रस में गोते लगा रही हैं।ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हर वर्ष की भांति इस बार भी भक्तों के बीच रंगोत्सव का अनूठा नज़ारा देखने को मिल रहा है। जैसे ही ठाकुर बांके बिहारी लाल धवल श्वेत वस्त्र धारण कर भक्तों को दर्शन देने पहुंचे, पूरा मंदिर परिसर 'रास रचैया' की जय-जयकार से गूंज उठा। सेवायत गोस्वामीजन ने भक्तों पर सोने-चांदी की पिचकारियों से टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों की बौछार की।
बलदेव में रंग-गुलाल की बारिश, सराबोर हुए श्रद्धालु...
आंवला एकादशी पर बलदेव में श्री दाऊजी महाराज मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने श्री दाऊजी महाराज के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। इस अवसर पर टेसू के रंग और गुलाल की बारिश से श्रद्धालु आनंदित होते रहे। होली के विभिन्न पदों का गायन हुआ। टेस के रंग व गुलाल की वर्षा हुई। समाज गायन में सेवायत श्रद्धालु नाचते गाते हुए नजर आए। होली महोत्सव की छटा देखने के लिए प्रतिदिन काफी संख्या में श्रद्धालु बलदेव पहुंच रहे हैं।
हुरंगा से पूर्व नृत्य महारास, हुरंगा का पूर्वाभ्यास देखने उमड़ा सैलाब...
बलदेव में श्रीदाऊजी महाराज का विश्व प्रसिद्ध हुरंगा 15 मार्च को है। हुरंगा की पूर्व तैयारी में प्रतिदिन हुरियारिनें नृत्य महारास कर रही हैं। पूर्वाभ्यास देखने को सैलाब उमड़ रहा है। बैंड-बाजे की धुन पर होली गीत रसिया पर सैकड़ों महिलाएं परंपरागत पोशाक लहंगा, फरिया, स्वर्ण आभूषण पहन कर नाचती गाती हैं। श्रद्धालु भी आनंदित हो रहें हैं। आधा दर्जन श्रीकृष्ण बलराम राधा कृष्ण स्वरूप में नाचती गाती हैं।
वृंदावन में काट दी जाएगी बिजली
वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आज शाम 7 बजे तक कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बंद रखने का निर्णय लिया है। परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या अधिक होने की संभावना जताई जा रही है और कुछ श्रद्धालु लाइन के पोल एवं ट्रांसफार्मर के फेसिंग को टच करते हुए गुजर रहे हैं। जनहित और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, पागल बाबा बिजली घर से जुड़े क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति पूर्ण रूप से बाधित रहेगी।
वृंदावन में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, डीआईजी और डीएम ने संभाली व्यवस्था
वृंदावन में होली के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। सड़क से लेकर मंदिर तक पुलिस की कड़ी चौकसी देखने को मिली। खुद डीआईजी शैलेश पांडे और जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुऐ हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो। मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेडिंग की गई है। श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए पुलिसकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी निगरानी रखी जा रही है। डीआईजी शैलेश पांडे ने कहा, हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो और आयोजन पूरी तरह सुरक्षित माहौल में संपन्न हो। वहीं, जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
कुंज में विराजमान होकर राजाधिराज ने अपने भक्तों को दिए दर्शन
पुष्टिमार्ग संप्रदाय के मंदिर ठाकुर द्वारिकाधीश महाराज ने कुंज में विराजमान होकर अपने भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान मंदिर ठाकुरजी महाराज अबीर गुलाल, टेसू के शुद्ध फूलों के रंग से होली खेली। इस दौरान लोग भक्ति के अद्भुत रंग में रंगे नजर आए। ठाकुरजी की रंग गुलाल की प्रसादी ग्रहण की। मंदिर के मुखिया ने पिचकारी से श्रद्धालुओं पर टेसू का रंग बरसाया और रंग बिरंगा गुलाल लुटाया।
वृंदावन में यातायात डायवर्जन प्लान लागू
श्रीधाम वृंदावन में सोमवार को रंगभरनी एकादशी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में होली रंगोत्सव का भव्य आयोजन चल रहा है। इसे देखते हुए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुगम यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए यातायात डायवर्जन प्लान लागू कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि छटीकरा से वृंदावन जाने वाले सभी कमर्शियल और भारी वाहन प्रतिबंधित रहेंगे, छटीकरा-वृंदावन मार्ग पर मल्टीलेवल पार्किंग से आगे किसी भी वाहन का प्रवेश नहीं होगा, वैष्णो देवी पार्किंग से वृंदावन की ओर बड़ी और छोटी बसों का प्रवेश पूर्णतः वर्जित रहेगा, रुक्मिणी बिहार गोलचक्कर से वृंदावन की ओर भारी वाहनों का प्रवेश निषेध रहेगा।
मथुरा में रंगभरनी एकादशी के अवसर पर सोमवार सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। वृंदावन की बात करें तो यहां के रास्तों पर जिधर नजर पड़े उधर ही रंगे हुए चेहरे और राधे-राधे की गूंज सुनाई दे रही है। ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सुबह से ही गुलाल की बौछार शुरू हो चुकी है। बांके बिहारी ने भक्तों के साथ सोने और चांदी की पिचकारी से होली खेली।