मुख्तार अंसारी का पार्थिव शव शनिवार की दोपहर में आने की संभावना है। परिजनों के मुताबिक उनके शव को गाजीपुर के पैतृक कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। यह कब्रिस्तान उनके घर से करीब चार सौ मीटर दूर है। इसी कब्रिस्तान में उनके पार्थिव शव को सुपुर्दे खाक किया जाएगा
मुख्तार की मौत के दो घंटे बाद यानि साढ़े बारह बजे के आसपास उसके शव को मेडिकल कॉलेज से पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया गया। शव के पोस्टमार्टम पहुंचते ही सारा फोर्स भी वहीं तैनात हो गया। पूरे पोस्टमार्टम हाउस की घेराबंदी कर दी गई। बैरिकेडिंग भी लगा दी गई। रात में पोस्टमार्टम शुरू नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि मुख्तार के परिजन के सामने आज यह प्रकिया की जाएगी।
मुख्तार पहली बार मऊ सदर विधानसभा से 1996 में बसपा के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचा था। इसके बाद 2002 और 2007 में निर्दल विधायक बना। फिर, कौमी एकता दल के नाम से अपनी नई पार्टी बनाया और 2012 का विधानसभा चुनाव जीता। वर्ष 2017 में मुख्तार अंसारी बसपा से चुनाव जीता। विधानसभा के आखिरी तीन चुनाव वह जेल में रहते हुए जीता।
मुख्तार का एक बेटा अब्बास इस वक्त कासगंज जेल में सजा काट रहा है तो दूसरा और छोटा बेटा उमर अब्बास दो दिन पहले ही मेडिकल कॉलेज पिता को देखने आया था। परिवार के करीबियों ने बताया कि जैसे ही उमर को प्रशासन की ओर से उसके पिता की मौत की सूचना दी गई वह धड़ाम से अपनी कुर्सी पर गिर पड़ा। करीबियों के मुताबिक उमर कुछ ही देर में बांदा पहुंच भी जाएगा। उसने भरे गले से कहा कि दो दिन पहले इन पुलिस वालों ने अस्पताल में भर्ती पिता को शीशे से भी देखने नहीं दिया और आज जब वह इस दुनिया में नहीं है तो वही पुलिस प्रशासन उनके जनाजे को कंधा देने के लिए बुलावा भेज रहा है। ऐसे में एक बेटे के दिल पर क्या गुजर रही होगी, इन अधिकारियों को क्या मालूम। बकौल उमर जबसे उम्र संभाली तब से कई साल बिना पिता के बिताए हैं, भरोसा था कि कभी तो पिता का कंधा सिर रखने के लिए मिलेगा, लेकिन क्या पता था कि वह कंधा अब उसे कभी नसीब नहीं होगा।
गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की मृत्यु के बाद फ़िरोज़ाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने इलाके में फ्लैग मार्च भी निकाला।
कभी जिसके नाम से गुंडे माफिया और बिल्डर्स भी कांपा करते थे, किसी ने नहीं सोचा था कि कभी वह माफिया भी खौफ के साए में जिंदगी बिताएगा। कुछ ऐसा ही हाल था पूरब के डॉन कहे जाने वाले माफिया मुख्तार अंसारी का, जिसकी मौत हुई तो बीमारी की वजह से लेकिन उसके पीछे कानून का खौफ भी शामिल था, जो उसको उसके गुनाह याद कर रहा था। जब से मुख्तार पंजाब से बांदा जेल आया था, शायद ही कोई ऐसा दिन रहा हो, जब उसने यूपी की जेल से दूसरी जेल भेजे जाने की इच्छा न की हो। यही वजह थी कि कब वह ब्लड प्रेशर, शुगर और पेट की बीमारी की गिरफ्त में आ गया, उसे खुद ही नहीं पता चला। इसके अलावा उसे लगातार दो तीन मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। वहीं, जिस दिन से प्रदेश में अतीक और उसके भाई की हत्या हुई है, तभी से मुख्तार के दिल में कानून और मौत खौफ और पैदा हो गया था। यही वह हालात थे कि जेल में उसका एक-एक दिन एक-एक साल के बराबर बीत रहा था। आखिर में वह घड़ी भी आ गई, जब खौफ ही उसकी मौत बन गई और उसकी धड़कनों ने साथ छोड़ दिया।
दो दिन पहले जब मुख्तार की हालत बिगड़ने पर उसे जेल से मेडिकल कॉलेज लाया गया था, तभी उसे भाई अफजाल और बेटे उमर अब्बास ने पिता की मौत की आशंका जताई थी। जेल प्रसासन पर गंभीर आरोप लगाए था। अफजाल ने तो यह तक कहा था कि उसके भाई की हत्या का सातवीं बार प्रयास किया गया है। इस बार भी 19 मार्च को उन्हें खाने में जहर दिया गया था। वहीं बेटे उमर ने भी प्रशासन पर आरोप मढ़ते हुए कहा था कि उसे पिता से मिलना तो दूर शीशे से देखने तक नहीं दिया गया था।
वहीं, मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी ने है कि पोस्टमार्टम सुबह होगा। इसके बाद हम आगे की प्रक्रिया (अंतिम संस्कार) करेंगे। लगभग पांच डॉक्टरों का पैनल बनाया गया है (पोस्टमार्टम करने के लिए)।'
जेल सूत्रों के मुताबिक गुरुवार दोपहर से मुख्तार की तबीयत बिगड़ने लगी थी। सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के तीन डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुंच कर उसकी सेहत की जांच की थी। गुरुवार को मुख्तार ने सिर्फ थोड़ी सी खिचड़ी ही खाई थी।
करीब ढाई साल से बांदा जेल में बंद पूरब के माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर रात हार्ट अटैक (कार्डियक अरेस्ट) से मौत हो गई। भले ही बांदा जनपद में मुख्तार के तमाम समर्थक थे, लेकिन जबसे उसके समर्थकों के घरों पर जेसीबी गरजी थी, तभी से सभी ने उससे दूरी बना रखी थी। जनपद से गिने चुने लोग भी जेल में उससे मिलने नहीं जाते थे।
शायद यही वजह थी कि जब वह अपनी जिंदगी के अंतिम क्षण जी रहा था, उस वक्त भी जेल तो दूर की बात है उसका कोई अपना मेडिकल कॉलेज के आसपास भी नहीं दिखाई दिया। मुख्तार के कुछ समर्थक उसके परिजनों के संपर्क में जरूर रहे और उन्हें प्रशासन से बचकर मेडिकल कॉलेज से बाहर के हालातों की खबर देते रहे। देर रात 11 बजे तक उसके समर्थकों में से कोई भी मेडिकल कॉलेज के आसपास नहीं दिखाई दिया। बता दें कि अतीक हत्याकांड के बाद जनपद में मुख्तार के करीबी दो लोगों के मकानों पर भी प्रशासन ने जेसीबी चलाई थी।
- 20 मार्च को माफिया मुख्तार अंसारी के वकील ने 19 मार्च को जेल के खाने में जहर देने का आरोप लगाया।
- 24 मार्च को शासन के निर्देश पर लापरवाही के आरोप में जेल के दो डिप्टी जेलर समेत तीन का निलंबन हुआ।
- 25 मार्च की देर रात 3 बजे अचानक मुख्तार के पेट में दर्द उठा।
- 26 मार्च को तड़के 5.30 बजे उसे एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
- 26 मार्च की शाम 6.30 बजे मुख्तार को मेडिकल कॉलेज से वापस मंडलीय कारागार भेज दिया गया।
-27 मार्च को परिजनों ने एमपी-एमएलए कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर हत्या की साजिश का आरोप लगाया।
- 27 मार्च की शाम को बांदा एमपी-एमएलए कोर्ट जेल प्रशासन से मुख्तार की सेहत की रिपोर्ट तलब की।
- 28 मार्च की दोपहर 2.30 बजे के आसपास मुख्तार को फिर से तकलीफ हुई। इस पर करीब 3.30 बजे डॉक्टरों की टीम ने उसका चेकअप किया।
- 28 मार्च की शाम 5 बजे एडीएम राजेश कुमार ने जेल पहुंचकर मुख्तार के बारे में अधिकारियों से जानकारी की।
- 28 मार्च की देर शाम 7.30 बजे डीएम और एसपी भी काफिले के साथ जेल पहुंचे।
- रात 8.15 बजे एंबुलेंस मंगाकर मुख्तार को बेहोशी की हालत में मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया गया।
- 8.30 बजे मेडिकल कॉलेज में मुख्तार का आईसीयू में इलाज शुरू किया गया।
- 9.20 बजे उसे आईसीयू से सीसीयू में शिफ्ट किया गया।
- देर रात 10.30 बजे प्रशासन ने मुख्तार की मौत की सूचना को सार्वजनिक किया।
- देर रात 11 बजे कमिश्नर और डीआईजी भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
- देर रात 12.30 बजे शव को पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया।
मुख्तार अंसारी का बेटा उमर मेडिकल कॉलेज पहुंच गया है।
माफिया मुख्तार अंसारी को लेकर ‘बांदा’ जेल हमेशा सुर्खियों में रहीं है। वर्ष 2017 में प्रोटक्शन वारंट पर पंजाब भेजने के मामले में तत्कालीन जेलर रंजीत सिह व डिप्टी तारकेश्वर प्रताप सिह को निलंबित कर दिया गया था। 30 सात जून 2022 को तत्कालीन डीएम अनुराग पटेल, एसपी अभिनंदन ने कारागार का औचक निरीक्षण किया तो मुख्तार की बैरिक में वीवीआईपी ट्रीटमेंट व बाहर से मंगाया गया खाने का सामान मिला। इस मामले में डिप्टी जेलर वीरेश्वर प्रताप सहित चार बंदी रक्षक निलंबित कर दिए गए। मार्च 2023 को कारागार अधीक्षक अविनाश गौतम को मुख्तार अंसारी के गुर्गों की मुलाकात कराने सहित आपत्तिजनक समान पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया है। 19 मार्च 2024 को मुख्तार की सुरक्षा में लापरवाही पर जेलर योगेश कुमार, डिप्टी जेलर अर्विंद कुमार व राजेश कुमर को निलंबित कर दिया गया था।
मुख्तार की मौत के दो घंटे बाद यानि साढ़े बारह बजे के आसपास उसके शव को मेडिकल कॉलेज से पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया गया। शव के पोस्टमार्टम पहुंचते ही सारा फोर्स भी वहीं तैनात हो गया। पूरे पोस्टमार्टम हाउस की घेराबंदी कर दी गई। बैरिकेडिंग भी लगा दी गई। अभी पोस्टमार्टम शुरू नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि कुछ ही देर में मुख्तार के परिजन पहुंच जाएंगे, इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्तार अंसारी का दिल का दौरा पड़ने से बांदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हो गई। मुख्यमंत्री आवास पर देर रात बैठक बुलाई गई है।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'जिस तरीके से आरोपी मुख्तार अंसारी की जेल में मौत हुई है वो उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है...इस घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए और हाई कोर्ट के जज की सुपरविजन में यह जांच होनी चाहिए।'
तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा, 'यूपी से पूर्व विधायक श्री मुख्तार अंसारी के इंतकाल का दुःखद समाचार मिला। परवरदिगार से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति तथा शोकाकुल परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। कुछ दिन पूर्व उन्होंने शिकायत की थी कि उन्हें जेल में जहर दिया गया है फिर भी गंभीरता से नहीं लिया गया। प्रथम दृष्टया ये न्यायोचित और मानवीय नहीं लगता। संवैधानिक संस्थाओं को ऐसे विचित्र मामलों व घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए।'
जिंदा मुख्तार तो पुलिस प्रशासन के सिर का दर्द रहा और मौत के बाद भी अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए। प्रशासन रात 11 बजे से ही शव के पोस्टमार्टम की तैयारी में जुट गया। अधिकारियों के मुताबिक मुख्तार के परिजनों के मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद ही पांच डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया कराई जाएगी। इसके अलावा पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। प्रयास किया जाएगा कि देर रात ही शव को परिजनों के सुर्पुद कर उसे गाजीपुर के लिए रवाना कर दिया जाए। इस बीच चर्चा यह भी रही कि मुख्तार के परिवार के कई सदस्यों से बांदा की सीमा पर ही रोका गया है। सिर्फ भाई अफजाल को ही मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया गया है।
पप्पू यादव ने एक्स पर लिखा, 'पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी जी की सांस्थानिक हत्या। कानून, संविधान, नैसर्गिक न्याय को दफन कर देने जैसा है।'
गुरुवार की देर रात जैसे ही मेडिकल कालेज द्वारा मुख्तार अंसारी की मौत को सूचना की पुष्टि की गई। वैसे ही पूरे जिले में प्रशासन ने 144 धारा लगाने के साथ नगर सहित पूरे जिले में पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई। इसी बीच मुख्तार के धुर विरोधी ने भाजपा नेता अशोक सिंह ने कहा कि यह भगवान की सजा है। उनके भाई मन्ना सिंह का हत्या का फैसला अभी आना बाकी है लेकिन इससे पहले ही भगवान ने एक अपराधी को उसके किये को सजा मुकर्रर कर दी।
मुख्तार अंसारी का दिल का दौरा पड़ने से बांदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में निधन हो गया।
माफिया मुख्तार अंसारी की मौत हो गई है। डॉक्टरों के मुताबिक मुख्तारी की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई। जिसके बाद मऊ, गाजीपुर और बांदा जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है।
जेल सूत्रों के मुताबिक गुरुवार दोपहर से उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ने लगी थी। सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के तीन डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुंच कर उसकी सेहत की जांच की थी। इसके बाद बांदा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मुख्तार की मौत के बाद यूपी के कई जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है।
बांदा जेल में माफिया मुख्तार अंसारी की तबीयत बिगड़ गई है। उसे एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। दिल का दौरा पड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था।