Shardiya Navratri 2024: हस्त नक्षत्र और इन्द्र योग में शारदीय नवरात्रि प्रारंभ
आज गुरुवार 3 अक्त्तूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो गए हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का पर्व 3 से 11 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ विधि-विधान मां दुर्गा का स्वागत होगा। इस बार हस्त नक्षत्र और इन्द्र योग मां का आगमन हुआ। इस बार गुरुवार नवरात्रि शुरू होने के कारण माता रानी का आगमन डोली पर हुआ है।
Navratri Kalash Sthapana Subh Muhurat Timing: कलश स्थापना मुहूर्त 2024
पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त है। पहला शुभ मुहूर्त प्रातः काल 6 बजकर 2 मिनट से लेकर प्रातः काल 7 बजकर 7 मिनट तक रहने वाला है। इसके बाद नवरात्रि के घटस्थापना के लिए दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर के समय का है। यह मुहूर्त सुबह 11 बजकर 34 मिनट से लेकर दोपहर 12:21 तक रहेगा। इस दौरान भी कलश स्थापना कर सकते हैं।
Navratri 2024: माता का आगमन डोली पर हुआ
आज, 3 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि पर माता राना का आगमन हो चुका है। लगातार 9 दिनों तक माता दुर्गा अपने भक्तों पर कृपा बरसाएंगी।इस बार गुरुवार नवरात्रि शुरू होने के कारण माता रानी का आगमन डोली पर हुआ। जब माता धरती पर डोली या पालकी में आती हैं तो इसे बहुत अच्छा संकेत नहीं माना जाता है. दरअसल माता रानी का पालकी में आना चिंता का विषय बन सकता है। इससे अर्थव्यवस्था में गिरावट, व्यापार में मंदी, हिंसा, देश-दुनिया में महामारी के बढ़ने और प्राकृतिक आपदाओं के संकेत मिलते हैं।
Navratri Day 1 Maa Shailputri Puja : नवरात्रि के पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा
शारदीय नवरात्रि प्रतिपदा तिथि- मां शैलपुत्री
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आदिशक्ति की पूजा का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि आज से प्रारंभ हो गया है। नवरात्रि के 9 दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा का महत्व होता है। मां शैलपुत्री की पूजा से भक्तों को जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। यह देवी प्रकृति और ऊर्जा की अधिष्ठात्री हैं और इनकी कृपा से भक्तों को मानसिक और शारीरिक शक्ति प्राप्त होती है। शैलपुत्री मां की कृपा से मनुष्य का जीवन सुरक्षित और संतुलित रहता है। यह देवी साधकों को आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती हैं और उनकी साधना को सफल बनाती हैं।
Navratri 2024: कलश स्थापना पूजा विधि
कलश स्थापना करने से पहले आप एक मिट्टी के पात्र को लें। फिर एक साफ थाली में थोड़ी सी मिट्टी को डाल दें। अब उसमें जौ के बीज को मिलाएं। इसके बाद इसे मिट्टी के पात्र में डालें और पानी से छिड़काव करें। एक तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। फिर उसके ऊपरी भाग में मौली बांध लें। अब कलश में साफ जल के साथ उसमें थोड़ा गंगाजल भी मिला लें। फिर उसके ऊपर दूब, अक्षत, सुपारी और कुछ पैसे रख दें। इसके बाद आप आम या अशोक की पत्तियां कलश के ऊपर रख दें।एक नारियल को लाल चुनरी से लपेटकर मौली बांध दें।फिर इस नारियल को कलश के बीच में रख दें, और बाद में इसे पात्र के मध्य में स्थापित कर दें।इस दौरान माता रानी के मंत्रों का जाप करते रहें, इससे देवी प्रसन्न होती हैं।
आज से शुभ योग में शारदीय नवरात्रि शुरू हो गई है। इस बार पंच महायोग में नवरात्रि पर मां का आगमन हुआ है। इस पंच महायोग में घटस्थापना और आराधना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। कलश स्थापना को घटस्थापना भी कहते हैं। देवीपुराण में उल्लेख मिलता है कि भगवती देवी की पूजा-अर्चना की शुरुआत करते समय सबसे पहले कलश की स्थापना की जाती है। नवरात्रि पर मंदिरों और घरों में भी कलश स्थापित कर परमब्रह्म देवी दुर्गा के नौ शक्ति स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश को ब्रह्मा,विष्णु, महेश और मातृगण का निवास बताया गया है।
Navratri 2024: नवरात्रि पर क्यों की जाती है कलश स्थापना ?
Shardiya Navratri 2024
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आज से शुभ योग में शारदीय नवरात्रि शुरू हो गई है। इस बार पंच महायोग में नवरात्रि पर मां का आगमन हुआ है। इस पंच महायोग में घट स्थापना और आराधना करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती है और शुभ फलों में वृद्धि होती है। नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है।
कलश स्थापना को घटस्थापना भी कहते हैं। देवीपुराण में उल्लेख मिलता है कि भगवती देवी की पूजा-अर्चना की शुरुआत करते समय सबसे पहले कलश की स्थापना की जाती है। नवरात्रि पर मंदिरों और घरों में भी कलश स्थापित कर परमब्रह्म देवी दुर्गा के नौ शक्ति स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कलश को ब्रह्मा,विष्णु, महेश और मातृगण का निवास बताया गया है। नवरात्रि के पावन पर्व पर कलश स्थापना करने का अर्थ है ब्रह्रांड में समाहित सभी ऊर्जा तत्व का कलश में आह्नान करना। इससे घर में मौजूद होने वाली हर एक तरह की नकारात्मक शक्ति खत्म हो जाती है।
Maa Durga Aarti: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी...
Shardiya Navratri 2024 Durga Mantra Jaap
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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी
Navratri 2024: कलश स्थापना के नियम
- नवरात्रि के नौ दिनों के लिए अखंड ज्योति प्रज्वलित करें और कलश स्थापना के लिए सामग्री तैयार कर लें।
- कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी के पात्र में या किसी शुद्ध थाली में मिट्टी और उसमें जौ के बीज डाल लें।
- मिट्टी के कलश या फिर तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और मौली बांध लें।
- इसके बाद लोटे में जल भर लें और उसमें थोड़ा गंगाजल जरूर मिला लें।
- फिर कलश में दूब, अक्षत, सुपारी और सवा रुपया रख दें।
- आम या अशोक की छोटी टहनी कलश में रख दें।
- एक पानी वाला नारियल लें और उस पर लाल वस्त्र लपेटकर मौली बांध दें।
- दुर्गा चालीसा का पाठ करें
Shardiya Navratri 2024: नौ देवियों के नौ बीज मंत्रों से करें देवी की आराधना, धन दौलत और सुखों में होगी वृद्धि
Navratri 2024: नवरात्रि पर क्यों जलाई जाती है अखंड ज्योति ?
नवरात्रि का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है। इसमें नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ विधि-विधान पूर्वक माता का स्वागत किया जाता है और अखंड ज्योति जलाई जाती है। अखंड ज्योति दुर्गा के प्रति समर्पण, आस्था और भक्ति का प्रतीक है। अखंड ज्योति का अर्थ है 'निरंतर जलने वाला दीपक'। इसे देवी की कृपा और आशीर्वाद का स्रोत माना जाता है।
Shardiya Navratri 2024: नवरात्रि पर क्यों जलाई जाती है अखंड ज्योति, जानिए महत्व और नियम
Kalash Sthapana Puja Vidhi: कलश स्थापना के लिए पूजा स्थल की दिशा
आश्विन माह की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो जाते है। नवरात्रि के पहले दिन देवी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व होता है। कलश स्थापना के साथ नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि आरंभ हो जाते हैं। कलश स्थापना में दिशा का विशेष महत्व होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, देवी दुर्गा की पूजा के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) सबसे शुभ मानी जाती है। यह दिशा स्वच्छता, पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। यदि इस दिशा में पूजा की जाती है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और पूजा का प्रभाव अधिक शक्तिशाली होता है।
Navratri Bog 2024: नवरात्रि पर माता को लगाएं भोग
- मां शैलपुत्री- दुर्गाजी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को सफेद और शुद्ध भोग्य खाद्य पदार्थ पसंद हैं। मां को गाय के शुद्ध घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगाएं।
- मां ब्रह्मचारिणी- नवरात्रि के दूसरे दिन यानी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना के दिन उन्हें मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं।
- मां चंद्रघंटा- मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजें पसंद हैं।
- मां कूष्मांडा- मां कुष्मांडा को मालपुआ पसंद है। मां को शुद्ध देसी घी में बने मालपुए का भोग लगाएं।
- मां स्कंदमाता- पंचमी तिथि की देवी मां स्कंदमाता को प्रसाद के रूप में केला पसंद है।
- मां कात्यायनी- षष्ठी तिथि की देवी मां कात्यायनी को भोग में शहद पसंद है। शहद का भोग लगाकर देवी का पूजन करें।
- मां कालरात्रि- सप्तमी तिथि की देवी मां कालरात्रि को भोग में गुड़ के नैवेद्य अर्पित करें।
- मां महागौरी- अष्टमी का दिन मां महागौरी की पूजा-अर्चना का दिन है। मां को नारियल का भोग लगाएं।
- मां सिद्धि दात्री- नौंवे दिन यानी महानवमी को हलवे, चने और पूरी का भोग लगाना चाहिए।
Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि 2024 तिथि
शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं
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- पहला दिन- मां शैलपुत्री की पूजा - 3 अक्तूबर 2024
- दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी की पूजा- 4 अक्तूबर 2024
- तीसरा दिन- मां चंद्रघंटा की पूजा- 5 अक्तूबर 2024
- चौथा दिन- मां कूष्मांडा की पूजा- 6 अक्तूबर 2024
- पांचवां दिन- मां स्कंदमाता की पूजा- 7 अक्तूबर 2024
- छठा दिन- मां कात्यायनी की पूजा- 8 अक्तूबर 2024
- सातवां दिन- मां कालरात्रि की पूजा- 9 अक्तूबर 2024
- आठवां दिन- मां सिद्धिदात्री की पूजा- 10 अक्तूबर 2024
- नौवां दिन- मां महागौरी की पूजा- 11 अक्तूबर 2024
- विजयदशमी- 12 अक्तूबर 2024, दुर्गा विसर्जन
Navratri Maa Shailputri Katha: जानिए मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की कथा
शारदीय नवरात्रि प्रतिपदा तिथि- मां शैलपुत्री
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3 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गए हैं। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में मां के आगमन का स्वागत करते हैं और कलश स्थापना करते हुए विधिवत रूप से 9 दिनों तक चलने वाला नवरात्रि का पर्व शुरू हो जाता है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-आराधना की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री का आराधना की जाती है। देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को हिमालय की पुत्री माना जाता है। मान्यता है इससे पूर्व उनका जन्म राजा दक्ष की पुत्री सती के रूप में हुआ था। जिनका विवाह भगवान शिव से हुआ था।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन किया और उसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया। जब देवी सती को इसके बारे में पता चला तो वह अपने पिता के घर बगैर निमंत्रण के ही पहुंच गईं। जहां पर महादेव के प्रति अपमान महसूस होने पर उन्होंने स्वयं को महायज्ञ में जलाकर भस्म कर लिया। जब यह बात भगवान शिव को पता चली तो उन्होंने यज्ञ को ध्वंश करके सती को कंधे पर लेकर तीनों में विचरण करने लगे।
इसके बाद भगवान विष्णु ने भगवान शिव के मोह को दूर करने के लिए सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से काटकर 51 भागों में विभक्त कर दिया। मान्यता है कि माता सती के टुकड़े जहां-जहां पर गिरे वे सभी शक्तिपीठ कहलाए। इसके बाद देवी सती ने शैलराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में दोबारा जन्म लिया, जिन्हें माता शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है।
Navratri 2024 Today Kalash Sthapana Timing Subh Muhurat: दोपहर में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आज से शारदीय नवरात्रि आरंभ हो चुके हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती फिर माता के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना करते हुए, माता को भोग अर्पित होते हैं। इसके बाद मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ और दुर्गा आरती की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त को ध्यान में करना चाहिए। इस बार शारदीय नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त है। जिसमें एक आज सुबह का है जबकि दूसरा अभिजीत शुभ मुहूर्त है। इन दोनों ही मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए पूजा संपन्न करनी चाहिए। लेकिन आपको आज राहुकाल के समय को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि राहु काल में कोई भी शुभ काम की शुरुआत करना अच्छा नहीं माना जाता है। आज का राहुकाल का समय दोपहर 13: 37 -15: 05 मिनट तक रहेगा। ऐसे में अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करते हुए पूजा करें।
नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 2 मिनट से लेकर 7 बजकर 7 मिनट तक
नवरात्रि अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक
Durga Mantra: शारदीय नवरात्रि पर 9 देवियों के 9 बीज मंत्र
| शारदीय नवरात्रि के दिन |
देवी |
बीज मंत्र |
| पहला दिन |
शैलपुत्री |
ह्रीं शिवायै नम:। |
| दूसरा दिन |
ब्रह्मचारिणी |
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:। |
| तीसरा दिन |
चन्द्रघण्टा |
ऐं श्रीं शक्तयै नम:। |
| चौथा दिन |
कूष्मांडा |
ऐं ह्री देव्यै नम:। |
| पांचवा दिन |
स्कंदमाता |
ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:। |
| छठा दिन |
कात्यायनी |
क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:। |
| सातवाँ दिन |
कालरात्रि |
क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:। |
| आठवां दिन |
महागौरी |
श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:। |
| नौवां दिन |
सिद्धिदात्री |
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:। |
Om Jai Ambe Gauri Ambeji Ki Aarti: अंबे जी की आरती
Durga Maa Ki Aarti
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥
Navratri Day 1 Maa Shailputri: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना, जानिए महत्व और पूजा विधि
Shardiya Navratri Ghatasthapana Puja Samagri: कलश स्थापना पूजा सामग्री
- 7 तरह के अनाज
- मिट्टी का बर्तन
- मिट्टी
- कलश
- गंगाजल या सादा जल
- आम,अशोक या पान के पत्ते
- सुपारी
- सूत
- मौली
- एक जटा वाला नारियल
- माता की चुनरी
- अक्षत
- केसर
- कुमकुम
- लाल रंग का साफ कपड़ा
- फूल- माला
Durga Saptashati Path: नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व
नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना गया है। मार्कण्डेय पुराण में दुर्गा सप्तशती उल्लेख किया गया है। मां शक्ति की उपासना के लिए दुर्गा सप्तशती श्रेष्ठ ग्रंथ माना है। इसमें 700 श्लोक और 13 अध्याय है।
1. प्रथम अध्याय : इस अध्याय में मेधा ऋषिका राजा सुरथ और समाधि को भगवती की महिमा बताते हुए मधु कैटभ का प्रसंग
2. द्वितीय अध्याय : दुर्गा सप्तशती के दूसरे अध्याय में देवताओं के तेज से देवी मॉं का प्रादुर्भाव और महिषासुर की सेना का वध
3. तृतीय अध्याय : इस अध्याय में मां दुर्गा द्वारा सेनापतियों सहित महिषासुर का वध
4. चतुर्थ अध्याय : इंद्र समेत सभी देवी- देवताओं द्वारा देवी मां की स्तुति
5. पंचम अध्याय : देवी की स्तुति और चण्ड-मुण्ड के मुख से अम्बिका के रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत भेजना और फिर दूत का निराश लौटना
6. षष्ठम अध्याय : धूम्रलोचन- वध
7. सप्तम अध्याय : चण्ड-मुण्ड का वध
8. अष्टम अध्याय : रक्तबीज का वध का वर्णन
9. नवम अध्याय : विशुम्भ का वध
10. दशम अध्याय : शुम्भ का वध
11. एकादश अध्याय : सभी का वध करने के बाद देवताओं के द्वारा देवी की स्तुति और फिर देवी द्वारा देवताओं को वरदान देना
12. द्वादश अध्याय : देवी-चरित्रों के पाठ का माहात्म्य
13. त्रयोदश अध्याय : सुरथ और वैश्य को देवी का वरदान
Happy Navratri 2024: नवरात्रि पर क्या करना चाहिए
- नवरात्रि पर अखंड ज्योति जरूर जलाएं
- देवी मां को प्रतिदिन जल अर्पित करें
- नवरात्रि पर हर रोज जाएं मंदिर
- नौ दिनों तक देवी दुर्गा की विशेष पूजा और श्रृंगार करें
- नवरात्रि पर नौ दिनों तक रखें उपवास
- अष्टमी-नवमी तिथि पर विशेष पूजा और कन्या पूजन करें
- ब्रह्राचर्य का पालन करें
नवरात्रि पर क्या नहीं करना चाहिए
1- नवरात्रि पर घर में सात्विक भोजन ही बनाना चाहिए।
2- नवरात्रि पर खाने में मांसाहार, लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
3- नवरात्रि के दिनों में अगर आपने घर में कलश स्थापना किया हुआ है तो घर को खाली छोड़कर नहीं जाना चाहिए।
4- नवरात्रि पर दाढ़ी,नाखून और बाल नहीं कटवाना चाहिए।
5- नवरात्रि पर बेवजह किसी वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहिए।
Shardiya Navratri 2024 : नवरात्रि में क्यों बौया जाता है जौ
कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा भी होती है। जौ को प्रतीकात्मक रूप से सुख, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। इसे मिट्टी के पात्र में बोया जाता है और इसके बढ़ने को शुभ संकेत माना जाता है।
Ghatasthapana Muhurat: कलश स्थापना के बाद की पूजा
कलश स्थापना के बाद नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। प्रतिदिन देवी के एक रूप की पूजा होती है और साधक नियमपूर्वक व्रत, ध्यान और आराधना करता है। नौ दिनों की पूजा के बाद दशमी के दिन 'विजयादशमी' के पर्व पर कलश विसर्जन किया जाता है।
नवरात्रि के पहले दिन की पूजा का महत्व
नवरात्रि का पहला दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की आराधना का महत्व होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री का पूजन करते हैं, उन्हें जीवन में स्थिरता और शांति मिलती है। शैलपुत्री मां की पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और मनुष्य की भक्ति शक्ति में वृद्धि होती है।
नवरात्रि पर ध्यान और मंत्रोच्चार का महत्व
नवरात्रि पर ध्यान और मंत्रोच्चार के लिए भी ईशान कोण सबसे उत्तम होता है। यह स्थान मानसिक शांति और ध्यान के लिए आदर्श माना गया है। यहां बैठकर मंत्र जप करने से मन शांत होता है और पूजा का फल तुरंत प्राप्त होता है।
Shailputri Aarti Lyrics: मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
शारदीय नवरात्रि पर डोली पर आईं माता रानी
आज से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गए हैं। इस बार माता का आगमन डोली पर हुआ है। गुरुवार से नवरात्रि के शुरू होने पर माता डोली पर सवार होकर आईं हैं। शास्त्रों में जब माता नवरात्रि पर डोली पर आती है इसको अच्छा नहीं माना जाता है। इससे देश-दुनिया में महामारी और प्राकृतिक आपदाएं आना का संकेत माना जाता है।