फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Navratri 2023: नवरात्रि पर जरूर करें दुर्गा सप्तशती का पाठ, प्रवेश द्वार पर क्यों बांधा जाता है बंदनवार

Sun, 15 Oct 2023 02:08 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Navratri 2023 1st Day Colour Kalash Sthapana Time in Hindi: रविवार, 15 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गए हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर देवी आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना होती है और  मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। 
विज्ञापन
शारदीय नवरात्रि 2023 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Shardiya Navratri 2023 Puja Vidhi Kalash Sthapana Timing: आज से 9 दिनों तक चलने वाला शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है। देवी दुर्गा की आराधना और साधना का महापर्व नवरात्रि इस बार पूरे नौ दिनों का होगा यानी किसी भी तिथि का क्षय नहीं होगा। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए घट स्थापना करते हुए मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री का आराधना की जाती है। इस बार रविवार को शारदीय नवरात्रि शुरू होने कारण देवी दुर्गा का वाहन हाथी होगा। नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन हाथी की सवारी पर होने से यह सुख-समृद्धि का संकेत है। नवरात्रि के 9 दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-आराधना और मंत्रोचार होगा। आइए जानते है शारदीय  नवरात्रि के 9 दिनों तक कैसे करें मां दुर्गा की साधना और उपासना की संपूर्ण पूजा विधि...
विज्ञापन

Shardiya Navratri 2023 Kalash Sthapana Timing: जानें आज कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 

शारदीय नवरात्रि का पवित्र पर्व आज से प्रारंभ हो चुके हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करके देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। घटस्थापना और देवी पूजा प्रात: काल करने का विधान हैं। लेकिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में कलश स्थापना वर्जित है। पंचांग के अनुसार, 15 अक्टूबर, रविवार, चित्रा नक्षत्र सायं 6:12 मिनट तक है और वैधृति योग सुबह 10:24 मिनट तक रहेगा। ऐसे में आज अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की जा सकती है। 15 अक्तूबर 2023 को अभिजीत मुहूर्त 11:31 मिनट से लेकर 12:17 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप घटस्थापना कर सकते हैं।

Kalash Sthapana Timing Subh Muhurat: घट स्थापना का सबसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

शुभ में आज से शारदीय नवरात्रि का महापर्व प्रारंभ हो गए हैं। घट स्थापना के साथ आने वाले 9 दिनों तक लगातार देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा उपासना की जाएगी। इस बार कलश स्थापना के लिए ज्यादा मुहूर्त नहीं मिलेंगे। घटस्थापना  का सबसे अच्छा और सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त आज सुबह 9 बजकर 27 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
 

  • शारदीय नवरात्रि 2023

दिन नवरात्रि दिन तिथि  पूजा-अनुष्ठान 
15 अक्तूबर 2023 नवरात्रि दिन 1 प्रतिपदा    माँ शैलपुत्री पूजा घटस्थापना
16 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 2     द्वितीया    माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
17 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 3     तृतीया    माँ चंद्रघंटा पूजा
18 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 4  चतुर्थी    माँ कुष्मांडा पूजा
19 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 5 पंचमी    माँ स्कंदमाता पूजा
20 अक्तूबर 2023  नवरात्रि दिन 6 षष्ठी    माँ कात्यायनी पूजा
21 अक्तूबर 2023  नवरात्रि दिन 7   सप्तमी    माँ कालरात्रि पूजा
22 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 8 अष्टमी   माँ महागौरी दुर्गा महा अष्टमी पूजा
23 अक्तूबर 2023 नवरात्रि दिन 9 नवमी     माँ सिद्धिदात्री दुर्गा महा नवमी पूजा
24 अक्तूबर 2023 नवरात्रि दिन 10 दशमी     नवरात्रि दुर्गा विसर्जन, विजय दशमी

यह भी पढ़ें-
Shardiya Navratri 2023: शक्ति उपासना का महापर्व नवरात्रि आरंभ, जानिए कलश स्थापना शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और नियम
 

Shardiya Navratri 2023: मां शैलपुत्री को समर्पित है नवरात्रि का पहला दिन

Shardiya Navratri 2023 Calendar - फोटो : अमर उजाला
आज से शारदीय नवरात्रि का त्योहार शुरू हो गया है। इस बार शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा स्वर्गलोक से हाथी की सवारी के साथ पृथ्वी लोक पर पधारी हैं। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित है। पहले दिन कलश स्थापना की जाती है और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। आप यहां पर नवरात्रि के पहले दिन की पूजा विधि जान सकते हैं। 

Shardiya Navratri 2023: मां शैलपुत्री को समर्पित है नवरात्रि का पहला दिन, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें मां दुर्गा की आराधना, जानिए संपूर्ण पूजा विधि

आज से पवित्र शारदीय नवरात्रि का महापर्व प्रारंभ हो गया है। आज से 9 दिनों के लिए देवी दुर्गा घर-घर विराजेंगी। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है आइए जानते हैं नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें मां की पूजा....
  • नवरात्रि के दिन सुबह घर को साफ-सुथरा करके मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और सुख-समृद्धि के लिए दरवाजे पर आम या अशोक के ताज़े पत्तों का तोरण लगाएं।
  • सुबह स्नानादि करके माता दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर स्थापित करना चाहिए।
  • मां दुर्गा की मूर्ति के बाईं तरफ श्री गणेश की मूर्ति रखें।उसके बाद माता के समक्ष मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं,जौ समृद्धि व खुशहाली का प्रतीक माने जाते हैं।
  • माँ की आराधना के समय यदि आपको कोई भी मन्त्र नहीं आता हो तो केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' से पूजा कर सकते हैं व यही मंत्र पढ़ते हुए पूजन सामग्री अर्पित करें। 
  •  देवी को श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरुर चढ़ाएं ।
  • अपने पूजा स्थल से दक्षिण-पूर्व की तरफ घी का दीपक जलाते हुए 'ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः। दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तुते' यह मंत्र पढ़ें और आरती करें। 
  • देवी माँ की पूजा में शुद्ध देसी घी का अखंड दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है,नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं,रोग एवं क्लेश दूर होकर सुख-समृद्धि आती है।  

Shardiya Navratri 2023 Durga Aarti in Hindi: नवरात्रि पर अंबे जी की आरती... 

Maa Durga Aarti - फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा 9 दिनों तक लगातार करते हैं। देवी का प्रसन्न करने के लिए मंत्रोंचार और विधि-विधान के साथ पूजा-आराधना की जाती है। देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए और अपनी हर एक मनोकामनाओं को पूरा के लिए देवी दुर्गा की पूजा में उनकी आरती का विशेष महत्व होता है। बिना दुर्गा आरती के मां की पूजा आधूरी मानी जाती है। आप भी नवरात्रि के 9 दिनों में रोजाना मां अंबे की आरती कर सकते हैं। 
अंबे जी की आरती 

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।
तेरे भक्त जनो पर माता भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

माँ-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि के 9 दिनों का महत्व

happy shardiya navratri 2023 - फोटो : amarujala
पितृ पक्ष की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्रि का पर्व बड़ी ही धूम-धाम के मनाया जाता है। नवरात्रि के पहले दिन आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ देवी दुर्गा की मूर्ति की स्थापित करते हैं। फिर अगले 9 दिनों तक देवी दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है। नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है और हर दिन सुबह-शाम मां दुर्गा की पूजा, आरती और दुर्गा सप्तशी का पाठ किया जाता है। नौ दिनों तक व्रत रखते हुए विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा की जाती है। 

Shardiya Navratri Pujan Samagri: नवरात्रि कलश स्थापना की पूजन सामग्री

नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करने का विधान होता है। कलश स्थापना के साथ ही पूजा आरंभ हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा की पूजा में कई तरह की पूजन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। मां दुर्गा लाल रंग बहुत ही प्रिय होता है। कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र, कलश, चुनरी, जौ, मिट्टी, मौली, कपूर, रौली, पान-सुपारी, साबुत चावल, आम के पत्ते, फल-फूल और श्रृंगार की सभी चीजें।

Shardiya Navratri: नवरात्रि के पहले दिन मां को लगाएं ये भोग

कलश स्थापना के साथ आज से देवी शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि का पर्व आरंभ हो गया है। नवरात्रि के पहले देवी के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की उपासना का महत्व होता है। माता शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, इसीलिए इनको सफेद रंग बेहद प्रिय है।इस दिन मां को गाय के घी का भोग लगाना शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री को घी का भोग अर्पित करने पर आरोग्य की प्राप्ति होती है और देवी मां अपने भक्तों को हर संकट से मुक्ति देती है।

नवरात्रि के 9 दिन के अनुसार भोग

 

शारदीय नवरात्रि 2023  नवरात्रि के दिन  माता का भोग
पहला दिन माँ शैलपुत्री देवी  देसी घी 
दूसरा दिन ब्रह्मचारिणी देवी शक्कर,सफेद मिठाई,मिश्री और फल
तीसरा दिन चंद्रघंटा देवी मिठाई और खीर
चौथा दिन कुष्मांडा देवी मालपुआ
पांचवां दिन स्कंदमाता देवी  केला
छठा दिन कात्यायनी देवी शहद 
सातवां दिन कालरात्रि देवी गुड़
आठवां दिन महागौरी देवी नारियल
नौवां दिन सिद्धिदात्री देवी अनार और तिल

Shardiya Navratri 2023 Shubh Yoga: शारदीय नवरात्रि बना शुभ योग

आज से शुभ नवरात्रि का महापर्व प्रारंभ हो गया है। आज से आने वाले 9 दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा-आराधना की जाएगी। इस बार शारदीय नवरात्रि बहुत ही शुभ योग में शुरू हुआ है। आपको बता दें कि 15 अक्तूबर, सोमवार को बुधादित्य योग, सुनफा योग, वेशी योग और लक्ष्मी योग का संयोग बना हुआ है। इसके अलावा देवी दुर्गा का आगमन हाथी की सवारी के साथ हुआ है जिसे भी बहुत शुभ माना गया है।  
 

शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों में 9 देवियों के 9 बीज मंत्र

 

शारदीय नवरात्रि के दिन देवी बीज मंत्र
पहला दिन     शैलपुत्री    ह्रीं शिवायै नम:।
दूसरा दिन   ब्रह्मचारिणी    ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
तीसरा दिन   चन्द्रघण्टा    ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
चौथा दिन कूष्मांडा   ऐं ह्री देव्यै नम:।
पांचवा दिन  स्कंदमाता ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
छठा दिन कात्यायनी  क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:।
सातवाँ दिन  कालरात्रि  क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
आठवां दिन  महागौरी   श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
नौवां दिन  सिद्धिदात्री  ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

Shardiya Navratri 2023: आज कैसे करें घटस्थापना, जानें पूरी पूजा विधि

- सबसे पहले सुबह स्नान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें और सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- फिर इसके बाद पूजा स्थल पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें।
- फिर मिट्टी के बर्तन में मिट्टी डाले और उसमें जौ मिला दें।
- भगवान गणेश का नाम लें और मां दुर्गा का स्मरण करते हुए अखंड ज्योति जलाएं।
- तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और मौली बांध दें।
- लोटे में गंगाजल मिलाकर पानी भर दें।
- फिर इस पात्र में सिक्के, सुपारी, अक्षत और फूल डालें।
- कलश में अशोक और आम के पत्ते लगाएं।
- इसके बाद सभी तरह की पूजन सामग्री को एकत्रित करते हुए पूजा आरंभ करें।

Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि पर आज इस उपाय से करें मां शैलपुत्री को प्रसन्न

नवरात्रि के पहले दिन देवी आदि शक्ति दुर्गा के पहले स्वरूप की पूजा होती है। मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं।माँ की कृपा पाने के लिए इस दिन मंदिर में त्रिशूल अर्पित करें।

Shardiya Navratri 2023: घट स्थापना पर इन पूजा सामग्री का करें प्रयोग

  • जौ
  • मिट्टी
  • जल का कलश
  • लौंग
  • कपूर
  • मौली
  • रोली
  • चावल
  • सिक्के
  • अशोक 
  • आम के पत्ते
  • नारियल
  • चुनरी 
  • फल
  • फूल

जानिए नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा से लाभ

नवरात्रि पर देवी दुर्गा की आराधना करने पर सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्रि के 9 दिनों तक देवी के नौ स्वरूप देवी शैलपुत्री, देवी ब्रह्मचारिणी, देवी चंद्रघण्टा, मां कूष्माण्डा, देवी स्कंदमाता, देवी कात्यायनी, देवी कालरात्रि, देवी महागौरी, देवी महागौरी और देवी सिद्धिदात्री की पूजा-आराधना होती है। इन नौ दिनों देवी की उपासना करने पर कई तरह के दोषों से मुक्ति मिलती है। 
 
दिन नवरात्रि दिन तिथि  पूजा-अनुष्ठान 
15 अक्तूबर 2023 नवरात्रि दिन 1 प्रतिपदा   देवी शैलपुत्री की पूजा से चंद्र दोष समाप्त होता है।
16 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 2   द्वितीया   देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल दोष खत्म होता है।
17 अक्तूबर 2023 नवरात्रि दिन 3   तृतीया   देवी चंद्रघण्टा पूजा से शुक्र ग्रह का प्रभाव बढ़ता है। 
18 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 4  चतुर्थी   माँ कूष्माण्डा की पूजा से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है। 
19 अक्तूबर 2023   नवरात्रि दिन 5  पंचमी   देवी स्कंदमाता की पूजा से बुध ग्रह का दोष कम होता है।
20 अक्तूबर 2023  नवरात्रि दिन 6   षष्ठी   देवी कात्यायनी की पूजा से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है।
21 अक्तूबर 2023  नवरात्रि दिन 7     सप्तमी    देवी कालरात्रि की पूजा से शनिदोष खत्म होता है।
22 अक्तूबर 2023  नवरात्रि दिन 8  अष्टमी   देवी महागौरी की पूजा से राहु का बुरा प्रभाव खत्म होता है।
23 अक्तूबर 2023 नवरात्रि दिन 9 नवमी     देवी सिद्धिदात्री की पूजा से केतु का असर कम होता है।
 
       

हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। एक साल में चार नवरात्रि आते हैं जिसमें शारदीय और चैत्र नवरात्रि होते है जबकि दो गुप्त नवरात्रि होते हैं। नवरात्रि पर 9 दिनों तक देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा-आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा की आराधना पर सभी तरह की मनोकामनाएं अवश्य ही पूरी होती हैं, लेकिन नवरात्रि के दौरान कुछ कार्यों को नहीं करना चाहिए नहीं तो देवी दुर्गा रुष्ट हो जाएंगी और पूजा का संपूर्ण फल नहीं प्राप्त हो सकेगा। 

- नवरात्रि के दिनों में शराब और अन्य तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए।
- नवरात्रि पर बाल और नाखून नहीं कटवाना चाहिए।
- तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए।
- महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए।
- लेदर से बनी चीजों का इस्तेमाल न करें।
- किसी को परेशान नहीं करना चाहिए।

Shardiya Navratri 2023: अभिजीत मुहूर्त में करें कलश स्थापना

हिंदू धर्म में अभिजीत मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। अभिजीत मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसे में हिंदू पंचांग के अनुसार 15 अक्तूबर को अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकती है। आज सुबह अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 44 मिनट से शुरू हो जाएगा।

Shardiya Navratri 2023: कलश स्थापना के दौरान करे इस मंत्र का जाप

कलश स्थापना पर मंत्रों के जाप का विशेष महत्व होता है। आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। 
तदुक्तं तत्रैव कात्यायनेन प्रतिपद्याश्विने मासि भवो वैधृति चित्रयो। आद्य पादौ परित्यज्य प्रारम्भेन्नवरान्नकमिति।।

Happy Navratri 2023: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व

आज से शारदीय नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है। वैदिक पंचांग के अनुसार यह शारदीय नवरात्रि 24 अक्तूबर तक चलेंगे। नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने का विधान होता है। प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ मां के पहले स्वरूप देवी शैलपुत्री की पूजा-उपासना होती है। शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इस दिन अनंत शक्तियों वाली माँ की पूजा करते समय उपासक को लाल,गुलाबी,नारंगी एवं रानी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से पूजा के लाभ के साथ माता की कृपा प्राप्त होती है।

Durga Mata Ki Aarti Jai Ambe Gauri:नवरात्रि पर जरूर करनी चाहिए मां दुर्गा की आरती

मां दुर्गाजी की आरती 

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको जगमद को।
उज्जवल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

शुंभ निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

ब्रम्हाणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

Maa Shailputri Mantra: मां शैलपुत्री के मंत्र

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और साथ में इनसे जुड़े मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति को सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशियां, सुख-समृद्धि आती हैं। इसके अलावा वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और शांति आती है।

1- ऊँ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥

2- वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

3- या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

नवरात्रि पर जरूर होनी चाहिए घर पर ये चीजें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर देवी दुर्गा 9 दिनों के लिए पृथ्वी पर वास करती हैं और अपने भक्तों आशीर्वाद प्रदान करती है। वहीं भक्त पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि पर घर पर कुछ चीजें जरूर होने चाहिए। आइए जानते हैं घर पर क्या-क्या चीजें होने चाहिए। 16 श्रृंगार की चीजें, श्रीयंत्र, दक्षिणावर्ती शंख, मोर पंख, लाल फूल, नारियल आदि।
 

Shardiya Navratri 2023 Puja Vidhi:नवरात्रि पर क्यों जलाते हैं अखंड ज्योति

आज से शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुके हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाई जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में महाशक्ति की आराधना करने वाले जातक अखंड ज्योति जलाकर मां दुर्गा की उपासना करते हैं। अखंड का अर्थ है जो खंडित न हो अर्थात ।जरूरी नहीं कि अखंड ज्योत पूरे नौ दिनों तक ही जलाई जाए,अष्टमी या नवमी के दिन पूजा के समय 24 घंटे के लिए भी अखंड दीपक जलाया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अखंड ज्योति जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है,घर के सदस्यों को यश एवं प्रसिद्धि मिलती है। सुख-समृद्धि,आयु,आरोग्य एवं सुखमय जीवन में वृद्धि होती। 

Shardiya Navratri 2023 Colour: नवरात्रि की नौ देवियां और नौ रंग

मां शैलपुत्री - मां को नारंगी रंग प्रिय है।
मां ब्रह्मचारिणी - मां को सफेद रंग प्रिय है। 
मां चंद्रघंटा - मां को लाल रंग प्रिय है।
मां कूष्मांडा - मां को नीला रंग प्रिय है।
मां स्कंदमाता - मां को पीला रंग प्रिय है।
मां कात्यायनी - मां को हरा रंग प्रिय है।
मां कालरात्रि - मां को स्लेटी रंग प्रिय है।
मां महागौरी - मां को बैंगनी रंग प्रिय है।
मां सिद्धिदात्री - मां को हरा रंग प्रिय है।
 

Navratri Ghatsthapana Importance: नवरात्रि में क्यों करते हैं कलश स्थापना ?

नवरात्रि के पहले दिन प्रदिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा के साथ-साथ नौ दिनों तक कलश स्थापना की जाती है। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि,वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह, नक्षत्रों और तीर्थों का वास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा, विष्णु,रूद्र,सभी नदियों,सागरों,सरोवरों और 33 कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं।

Navratri 2023: नवरात्रि पर प्रवेश द्वार पर क्यों बांधा जाता है बंदनवार ?

हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा की उपासना का समय होता है। नवरात्रि के पहले दिन घर की साफ-सफाई और मुख्य द्वार पर बंदनवार बांधा जाता है। देवी मां की पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेश द्वार पर आम या अशोक के ताज़े हरे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है।  क्या आपको पता है आखिर क्यों यह बंदनवार बांधा जाता है। दरअसल इससे घर में नकारात्मक या बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। माना जाता है कि देवी माँ की पूजा के दौरान देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी घर में प्रवेश करती हैं,लेकिन मुख्यद्वार पर बंदनवार लगी होने के कारण तामसिक शक्तियां घर के बाहर ही रहती हैं।

नवरात्रि का पर्व शक्ति का आराधना और साधना का पर्व माना गया है। धार्मिक मान्याताओं के अनुसार मां दुर्गा को लाल रंग बहुत ही प्रिय होता है। लाल रंग को वास्तु में भी शक्ति और शौर्य का प्रतीक माना गया है इसलिए देवी को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएं और फूल यथासंभव लाल रंग के ही होने चाहिए। 
 
विज्ञापन

जानिए नवरात्रि पर दुर्गा सप्तशती पाठ करने के फायदे

नवरात्रि पर मां की पूजा-आराधना 9 दिनों तक लगातार होती है। नवरात्रि पर्व सुबह और शाम को मां दुर्गा की विधि-विधान के साथ पूजा, भोग, आरती और मंत्रोचार करने का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि में दुर्गासप्तशी का पाठ करना बहुत ही लाभदायक माना जाता है। इसके पाठ से कई तरह के फायदे मिलते हैं। सप्तशती में कुल 13 अध्याय हैं जिन्हें 3 हिस्सों में बांटा गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से शांति, धन, सुख- समृद्धि, यश और मान- सम्मान की प्राप्ति होती है। सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्तोत्र और मंत्र हैं, जिनके विधिवत पाठ से वांछित फल की प्राप्ति होती है।

सर्वकल्याण के लिए
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।

बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए

सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः। 
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।

आरोग्य और सौभाग्य प्राप्ति के लिए

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। 
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजही ||
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें