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Mahashivratri 2026 : महाशिवरात्रि पर कब खोलें व्रत ? यहाँ जानें पारण का सही समय

Sun, 15 Feb 2026 05:45 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mahashivratri Puja Vidhi, Shubh Muhurat Live Updates: महाशिवरात्रि पर जितना महत्व व्रत रखने का है, उतना ही महत्व सही समय और विधि से पारण करने का भी माना गया है। मान्यता है कि नियमपूर्वक व्रत खोलने से ही पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है, अन्यथा साधना अधूरी मानी जाती है।
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महाशिवरात्रि 2026 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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महाशिवरात्रि का पावन पर्व हर वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का स्मरण किया जाता है। इसी दिन भगवान शिव पहली बार शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का विशेष अभिषेक करने का विधान है। कहा जाता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, ग्रह दोष शांत होते हैं और धन-समृद्धि में वृद्धि होती है। 

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महाशिवरात्रि 2026 शुभ तिथि

इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 04 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी की शाम 05 बजकर 34 मिनट तक चलेगी। 

दिल्ली के छतरपुर श्री आद्या कात्यायनी शक्तिपीठ मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आरती की जा रही है

महाशिवरात्रि 2026 के मौके पर मेरठ के काली पलटन मंदिर में भक्तों ने की पूजा-अर्चना

उज्जैन के महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों ने की पूजा-अर्चना

महाशिवरात्रि पर जूनागढ़ में भक्त भवनाथ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए नजर आए

महाशिवरात्रि के मौके पर मुंबई के बाबुलनाथ मंदिर में भक्तों ने की पूजा-अर्चना

महाशिवरात्रि पर दिल्ली के चांदनी चौक के गौरी शंकर मंदिर में भक्तों ने की पूजा-अर्चना

महाशिवरात्रि पर अहमदाबाद के मिनी सोमनाथ मंदिर में भक्तों ने पूजा-अर्चना की

महाशिवरात्रि 2026 शुभ योग


आज महाशिवरात्रि पर कई तरह के शुभ योग और राजयोगों का निर्माण हुआ है। पंचांग की गणना के अनुसार आज महाशिवरात्रि पर शिव योग, सर्वार्थसिद्धि योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, प्रीति योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, वरियान योग और व्यतिपात जैसे योग बना हुआ है। वहीं महाशिवरात्रि पर बुधादित्य राजयोग, शुक्रादित्य राजयोग, नवपंचम राजयोग, लक्ष्मी नारायण, शुक्रादित्य और चतुर्ग्रही राजयोग का निर्माण हो रहा है. ज्योतिष में इस तरह के योग और राजयोग को बहुत ही शुभ माना जाता है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को कौन सा फूल चढ़ाएं और कौन सा नहीं, यहां जानें


 

महाशिवरात्रि 4 प्रहर पूजा मुहूर्त 

Mahashivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला

 

  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:39 से 09:45
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -शाम 09:45 से 12:52
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - सुबह 12:52 से 03:59
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - सुबह 03:59 से 07:06 

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का मुहूर्त 


भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका शिवलिंग पर जलाभिषेक होता है। महाशिवरात्रि पर सुबह 08 बजकर 24 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक जलाभिषेक कर सकते हैं। वहीं शाम को जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त 06 बजकर 11 मिनट से लेकर 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। 

महाशिवरात्रि पूजन सामग्री

  • शहद, चीनी, गुड़, शक्कर, तिल, 
  • दही, मिट्टी के दीपक, भस्म,  केसर, तिल, जौ
  • पीली सरसों, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के फूल
  • शिव परिवार की तस्वीर, शिवलिंग, नारियल
  • रक्षासूत्र, कुमकुम, सिंदूर,अक्षत , केसर, लौंग
  • भगवानों के वस्त्र, सुपारी
  • इलायची, आभूषण
  • जनेऊ,गुलाब जल,
  • मिठाई और फल, आम का पल्लव, सुपारी
  • पीला कपड़ा, हवन सामग्री
  • गाय का दूध,पान के पत्ते
  • दान के लिए सफेद चीजें और सामग्री
  • गाय का दूध, गुलाब जल, इत्र

महाशिवरात्रि पूजा विधि

  • महाशिवरात्रि पूजन के लिए सबसे पहले शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शक्कर, घी और गन्ने के रस से अभिषेक करें।
  • अब आप कुछ बेलपत्र लेकर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर लें और इसे प्रभु को अर्पित कर दें।
  • महादेव को भांग और धतूरा व शमी का फूल चढ़ाएं।
  • अब शिवलिंग पर चंदन लगाएं और त्रिपुंड बना लें।
  • शिव जी को बेर, फल, मिठाई फूल आदि सामान अर्पित कर दें।
  • घी का एक दीप जलाकर शिवलिंग के सामने रखें और ॐ पार्वतीपतये नमः का जाप करें।
  • देवी पार्वती का श्रृंगार से जुड़ी चीजें आप चढ़ा सकते हैं।
  • भोलेनाथ भगवान की चालीसा पढ़ें और धूप जला लें।
  • शिव भगवान और और उनके पूरे परिवार की आरती करें।
  • अंत में क्षमा प्रार्थना करें और अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।

जलाभिषेक विधि

महाशिवरात्रि - फोटो : adobe
  • महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए सबसे पहले शिवलिंग पर दूध, शक्कर, दही, शहद, घी और गन्ने के रस से अभिषेक करें।
  • अब तांबे के लोटे में साफ जल लेकर उसे ऊँ नम: का जप करते हुए उसे चढ़ाएं। 
  • ध्यान रखें जल की धारा तेज नहीं बल्कि धीमी और पतली रहे।
  • अब आप गंगाजल में काले तिल डालें और ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।' मंत्र का जाप करें।
  • अब आप शिवलिंग पर इस गंगाजल को चढ़ाएं और प्रभु का नाम जप करें।
  • शंकर जी को चंदन लगाएं और फिर 11 या 21 बेलपत्र अर्पित कर दें।
  • शमी के फूल अर्पित करें व गेहूं भा चढ़ा दें।
  • शिव परिवार को फूलों की माला अर्पित करें और दूर्वा चढ़ाएं।
  • शिव जी के सामने आटे का चौमुखी दीपक जलाएं।
  • शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
  • आप सफेद चीजों का दान कर सकते हैं।
 

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की रात करें शमी के पत्तों का ये सरल उपाय, होगा सारी समस्याओं का हल

रुद्राभिषेक क्यों किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन किया गया रुद्राभिषेक अत्यंत फलदायी होता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से मन की अशांति दूर होती है और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। रुद्राभिषेक के माध्यम से भक्त अपने दुख, कष्ट और नकारात्मक भावों को भगवान शिव को अर्पित करता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई यह पूजा भगवान को प्रिय होती है और वे भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

गुजरात में श्री सोमनाथ मंदिर को महाशिवरात्रि2026 के अवसर पर बहुत अच्छे से सजाया गया है

रुद्राभिषेक का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व


शास्त्रों में भगवान शिव को ‘रुद्र’ कहा गया है, जिसका अर्थ है दुखों का नाश करने वाला। एक प्रसिद्ध वाक्य है—“रुतम् दुखम् द्रावयति इति रुद्र:” यानी जो दुखों को दूर करे वही रुद्र है। ऐसा माना जाता है कि हमारे जीवन में आने वाली कई बाधाएं हमारे पूर्व कर्मों का परिणाम होती हैं। रुद्राभिषेक और रुद्रार्चन से इन पाप कर्मों का क्षय होता है और साधक के भीतर शिव तत्व का जागरण होता है।रुद्रहृदयोपनिषद में भी उल्लेख मिलता है कि भगवान रुद्र सभी देवताओं के मूल हैं और समस्त सृष्टि में उनका ही स्वरूप व्याप्त है। इसलिए
रुद्राभिषेक को शीघ्र फल देने वाला अनुष्ठान माना गया है। कालसर्प दोष, ग्रह पीड़ा, पारिवारिक कलह, व्यापार में हानि या शिक्षा में बाधा जैसी समस्याओं से राहत के लिए भी इसे अत्यंत प्रभावी पूजा बताया गया है।

हरिद्वार में महाशिवरात्रि2026 के अवसर पर भक्तों ने दक्षेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की।

तेलंगाना में महाशिवरात्रि के मौके पर हजारों भक्त खैरताबाद इलाके में भगवान शिव मंदिर में दर्शन के लिए आ रहे हैं।

राजस्थान के राजसमंद में दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर में पूजा-अर्चना की

महाशिवरात्रि के मौके पर तीर्थ नगरी ऋषिकेश के नीलकंठ महादेव समेत विभिन्न शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचने लगे।

Shiva's Favorite Things: भगवान शिव को अर्पित वस्तुओं का महत्व

  • गंगाजल: मानसिक अशांति से मुक्ति
  • दूध: उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
  • दही: जीवन में स्थिरता और गंभीरता
  • घी: पौरुष, बल, बुद्धि और विवेक में वृद्धि
  • मधु: वाणी में मधुरता
  • गुड़: दुख, कष्ट और दरिद्रता का नाश
  • इत्र: मन, कर्म और विचारों की पवित्रता
  • केसर: यश, वैभव और सौम्यता
  • भांग: रोग-शोक और नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • चंदन: मान-सम्मान और यश-कीर्ति में वृद्धि
  • बिल्वपत्र: चल-अचल संपत्ति की प्राप्ति

उत्तर प्रदेश के CM योगी आदित्यनाथ ने महाशिवरात्रि के मौके पर गोरखनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक किया।

Mahadev Favourite Flower: महादेव को अर्पित करने चाहिए ये फूल

  • महाशिवरात्रि के शुभ दिन पर भोलेनाथ को धतूरा और उसका फूल अर्पित करना चाहिए। इसे बेहद शुभ माना जाता है। 
  • शिव जी को आप आक के फूल चढ़ाएं। इससे प्रभु प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। यही नहीं साधक की मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं।
  • मान्यता है कि, सफेद फूल महाकाल को अर्पित करने से अटके कार्यों को गति मिलती हैं। साथ ही देवी पार्वती की कृपा भी बनी रहती हैं।
  • महाशिवरात्रि पर आप शिव जी को शमी के फूल अवश्य चढ़ाएं। यह प्रभु को अति प्रिय है। इससे वह शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।
  • प्राजक्ता के फूल महादेव को अर्पित करें। इससे धन लाभ और सुख बढ़ता है। 
  • सफेद कनेर के फूल चढ़ाने से प्रेम जीवन सुखमय होता है।

Shiv Ji Ko Konsa Phool Na Chadhaye: शिव जी को न चढ़ाएं ये फूल

  • केतकी, केवड़ा व चंपा चमेली के फूल महादेव को नहीं चढ़ाने चाहिए। ऐसा करना अशुभ होता है। 
  • आप लाल रंग के फूल, कांटेदार व मुरझाए फूल भी पूजा में शामिल न करें।
  • तुलसी का पत्ता भी पूजा में उपयोग नहीं करना चाहिए अन्यथा मानसिक शांति प्रभावित हो सकती हैं।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन क्रिकेट फैन भारत की जीत के लिए प्रार्थना करने के लिए उमड़ पड़े हैं।

Mahashivratri 2026: शिवलिंग पर कौन सा अनाज चढ़ाना होगा लाभकारी ?

Mahashivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
  • गेहूं चढ़ाने से संतान सुख और सौभाग्य बढ़ता है। साथ ही रिश्तों में प्रेम बढ़ता है।
  • दालें शिवलिंग पर चढ़ाना फलदायी माना गया है। इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले तिल शिवलिंग पर चढ़ाने से पापों का नाश होता है। साथ ही सभी तरह के दोषों से राहत मिलती हैं।
  • काली उड़द दाल चढ़ाने से शनि दोष दूर होता है।
  • चावल चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। साथ ही सुख-शांति बढ़ती हैं।
  • जौ शिवलिंग पर अर्पित करने से जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही धन-धान्य बढ़ता है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का भोग

  • मौसमी फल
  • बेर
  • मिठाई
  • साबूदाना खिचड़ी
  • पंचामृत 
  • दूध और गुड़

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार शिवलिंग का अभिषेक


मेष:  गाय के कच्चे दूध में शहद मिलाकर अभिषेक करें।
वृष: दही से अभिषेक। सफेद पुष्प, फल और वस्त्र चढ़ाएं।
मिथुन: गन्ने के रस से अभिषेक करें। धतूरा, पुष्प, भांग व हरा फल चढ़ाएं।
कर्क: दूध में शक्कर मिलाकर अभिषेक करें। सफेद वस्त्र, मिष्ठान्न व मदार का पुष्प चढ़ाएं।
सिंह: शहद या गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक करें। लाल पुष्प, वस्त्र और रोली अर्पित करें।
कन्या: गन्ने के रस से अभिषेक करें। भांग, धतूरा, मंदार का पत्र व पुष्प चढ़ाएं।
तुला: शहद से अभिषेक करें। भाग, मंदार पुष्प और सफेद वस्त्र चढ़ाएं।
वृश्चिक: शहद युक्त तीर्थ जल से अभिषेक करें। लाल पुष्प, फल और मिष्ठान चढ़ाएं।
धनु: गाय के दूध में केसर मिलाकर अभिषेक करें। पीला वस्त्र, फल, भांग व धतूरा चढ़ाएं।
मकर: गंगाजल या गन्ने के रस से अभिषेक करें। शमी पत्र, भांग, धतूरा चढ़ाएं।
कुंभ: गन्ने के रस से अभिषेक करें। दूर्वा, शमी, मंदार पुष्प चढ़ाएं।
मीन: केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें। केला और पीला पुष्प, फल व मिष्ठान चढ़ाएं।

Mahashivratri 2026: केतकी पुष्प का वर्जित होने की कथा


केतकी पुष्प के संबंध में जो कथा प्रचलित है, उसका उल्लेख शिव पुराण तथा अन्य आगम ग्रंथों में मिलता है। कथा के अनुसार एक बार सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। तभी एक अनंत अग्नि-स्तंभ प्रकट हुआ, जो भगवान शिव का दिव्य ज्योतिर्लिंग स्वरूप था। उस स्तंभ का न आदि था न अंत। भगवान विष्णु वराह रूप लेकर नीचे की ओर गए और ब्रह्मा हंस रूप धारण कर ऊपर की ओर उड़े। विष्णु ने स्वीकार किया कि वे अंत तक नहीं पहुँच सके। किंतु ब्रह्मा को भी शिखर नहीं मिला। उसी समय उन्हें मार्ग में केतकी का पुष्प मिला, जो उस ज्योति-स्तंभ से नीचे गिर रहा था। ब्रह्मा ने केतकी से आग्रह किया कि वह साक्षी दे दे कि वे शिखर तक पहुँच गए हैं। केतकी ने असत्य का साथ दिया।

जब दोनों देवता वापस आए तो ब्रह्मा ने झूठी गवाही प्रस्तुत की। तब शिवजी प्रकट हुए और उन्होंने सत्य को उद्घाटित किया। असत्य बोलने और अहंकार के कारण शिवजी ने क्रोधित होकर अपने रौद्र रूप कालभैरव को प्रकट किया। कालभैरव ने ब्रह्मा का पंचम सिर काट दिया। इसीलिए ब्रह्मा चतुर्मुख कहलाए। यह प्रसंग अहंकार के दंड और सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है।। साथ ही केतकी पुष्प को भी श्राप दिया कि वह शिव पूजा में कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
 

Mahashivratri 2026: किन लोगों को नहीं रखना चाहिए महाशिवरात्रि का व्रत

गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति

  • डायबिटीज, हाई या लो ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या किसी भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों को व्रत रखने से बचना चाहिए।
  • लंबे समय तक भूखे रहना उनकी सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। 
  • ऐसे लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के व्रत नहीं रखना चाहिए। 
  • बुजुर्गों को भी अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही व्रत या पूजा करनी चाहिए।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं

  • गर्भावस्था और स्तनपान की अवस्था में महिलाओं के शरीर को पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है। 
  • ऐसे समय में कठिन उपवास रखना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। 
  • इसलिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं निर्जला या कठोर व्रत से बचें।
  • डॉक्टर की सलाह लेकर फलाहार या बिना नमक वाला हल्का भोजन ग्रहण करें और मन से शिव आराधना करें।

मासिक धर्म के दौरान महिलाएं
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के समय महिलाओं को मंदिर या शिवलिंग का स्पर्श नहीं करना चाहिए। 
  • इस दौरान महिलाएं व्रत रख सकती हैं और भगवान शिव का मानसिक जाप, ध्यान और मंत्र स्मरण कर सकती हैं। 
  • यह भी एक प्रकार की साधना मानी जाती है।

 

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पूजा विधि

  • शिव-पार्वती की पूजा के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल, फल, चंदन, रोली, अबीर आदि तैयार करें।
  • मंदिर या घर में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें।
  • दिन भर व्रत का पालन करें और समय मिलने पर भगवान शिव का ध्यान करते रहें।
  • दिन में संभव हो तो रुद्राभिषेक कराएं; यदि यह संभव न हो, तो शाम को स्वयं शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • शाम में पुनः शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें और उन्हें धतूरा, भांग, बेलपत्र आदि चढ़ाएं।
  • महाशिवरात्रि व्रत की कथा सुनें और भगवान शिव की कपूर से आरती करें।
  • आरती के बाद भोग अर्पित कर पूजा संपन्न करें।
  • यदि संभव हो तो रात्रि भर जागरण करें और शिव भक्ति में लीन रहें।

निशिता काल में सिद्धि योग

महाशिवरात्रि पर निशीथ काल की पूजा का समय  रात 11 बजकर 57 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा और इस काल में शिव साधना का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। इस समय में शिव पूजा के लिए किए जाने वाले सभी उपाय बहुत ही असरदार माने जाते हैं और भोले बाबा बहुत जल्द आपसे प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करते हैं। आपके सुख में वृद्धि होती है और सभी कार्य सरलता से पूर्ण हो जाते हैं।

Maha Shivratri Vrat Food: महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए? 

 
  • फल 
  • दूध 
  • दही 
  • साबूदाना
  • कुट्टू या सिंहाड़े का आटा
  • पूड़ी 
  • मखाना
  • बेर

Maha Shivratri 2026: मनचाहा जीवनसाथी पाने के उपाय

Maha Shivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
  • महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध अर्पित करें। इस दौरान आप ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। फिर माता पार्वती को लाल चुनरी और चूड़ियां चढ़ाएं। मान्यता है कि, इस उपाय से मनचाहा वर पाने की कामना पूर्ण होती हैं।
  • महाशिवरात्रि पर जल में दूर्वा शामिल करें और शिवलिंग का अभिषेक करें। इस दौरान महादेव को चंदन लगाएं और अपनी मनोकामनाओं का स्मणर करें। इससे सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती हैं।
  • इस दिन आप उपवास रखें। जलाभिषेक के बादॐ गौरीशंकराय नमः मंत्र का जाप करें। शिव और पार्वती की चालीसा का पाठ करें। इससे प्रेम जीवन सुखमय बनता है। 
  • इस दिन आप अपनी क्षमतानुसार चीजों का दान करें। इससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं।

MahaShivratri 2026: जल चढ़ाने की क्या है सही दिशा

शिवलिंग पर जल हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके चढ़ाना चाहिए। जल अर्पित करते समय उसे सीधे लिंग पर धीरे-धीरे गिराएं। शास्त्रों में कहा गया है कि शिवलिंग की जलाधारी (जहां से जल बाहर निकलता है) को कभी पार नहीं करना चाहिए। उसे लांघना अशुभ माना गया है।

Mahashivratri: किस जल से करें अभिषेक ?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग पर गंगाजल सर्वोत्तम माना गया है। यदि गंगाजल उपलब्ध न हो तो स्वच्छ शुद्ध जल का प्रयोग करें। जल में थोड़ा सा कच्चा दूध, शहद या गंगाजल मिलाकर भी अभिषेक किया जा सकता है। परंतु दूषित या अशुद्ध जल चढ़ाना वर्जित है।

Mahashivratri 2026: जल चढ़ाते समय मंत्रोच्चार

सिर्फ जल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। जलाभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप अवश्य करें। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी विशेष फलदायी माना गया है। मंत्रों के साथ किया गया अभिषेक मन और आत्मा को शुद्ध करता है।

Mahashivratri 2026: जलाभिषेक का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करना मन की तपन और जीवन की कठिनाइयों को शांत करने का प्रतीक है। जैसे जल अग्नि को शांत करता है, वैसे ही शिवाभिषेक जीवन के कष्टों को शीतल करता है। महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में जलाभिषेक करने से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
 

MahaShivratri: महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का मुहूर्त 

भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका शिवलिंग पर जलाभिषेक होता है। महाशिवरात्रि पर सुबह 08 बजकर 24 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक जलाभिषेक कर सकते हैं। वहीं शाम को जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त 06 बजकर 11 मिनट से लेकर 7 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। 

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर इन मंत्रों का जाप

पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

रुद्र मंत्र
ॐ नमो भगवते रुद्राय॥

Mahashivratri: महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजन मुहूर्त 

पहला प्रहर पूजा का मुहूर्त-15 फरवरी को शाम 06.20 मिनट से लेकर रात 09. 20 मिनट तक रहेगा।

दूसरा प्रहर पूजा का मुहूर्त-रात 09.21 से लेकर 12.21 मिनट तक।

तीसरा प्रहर पूजा का मुहूर्त- रात 12.22 से लेकर 03.22 मिनट तक।

चौथा प्रहर पूजा का मुहूर्त- रात 03. 23 से सुबह 06. 23 मिनट तक।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि में उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग 

महाशिवरात्रि को शाम 7 बजकर 47 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा।उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में भगवान शिव की पूजा करना सुख, समृद्धि और वैवाहिक सुख के लिए अत्यंत फलदायी है। महाशिवरात्रि के दिन 11 बेलपत्र और धतूरे के साथ शिवजी का जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह दिन कार्य में सफलता और सौभाग्य लाता है। यह नक्षत्र सूर्य की ऊर्जा (तेज, सफलता) और शिव की शक्ति का मिश्रण है, जो जीवन में स्थिरता, स्वास्थ्य और सुख प्रदान करता है।

श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ शाम 7 बजकर 48 मिनट पर होगा। श्रवण नक्षत्र अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह चंद्रमा से संबंधित है। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरे से अभिषेक करना, “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करना और शिव-पार्वती की कथा सुनना विशेष पुण्यदायी होता है। यह पूजा मानसिक शांति और सुख-समृद्धि लाती है।

Mahashivratri Vrat 2026: पहली बार व्रत रखने के नियम

महाशिवरात्रि व्रत नियम - फोटो : amar ujala

 

  • व्रत से एक दिन पहले हल्का और सात्विक भोजन करें। ज्यादा तला-भुना या मसालेदार भोजन न लें ताकि व्रत के दिन कमजोरी महसूस न हो।
  • फलाहार करें। फल, दूध, दही, नारियल पानी और साबूदाना, कुट्टू के आटे की चीजें खा सकते हैं। व्रत में अनाज, प्याज, लहसुन और मांसाहार से बचें।
  • पहली बार व्रत रख रहे हैं तो पूजा को सरल रखें। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” का जाप सच्चे मन से करें।
  • शिवरात्रि में रात्रि जागरण आवश्यक है। यदि पूरी रात जागना संभव न हो तो कम से कम कुछ समय भजन, शिव चालीसा या मंत्र जाप अवश्य करें।
  • व्रत केवल भोजन से परहेज़ नहीं है। इस दिन क्रोध, झूठ, बुरा बोलना और नकारात्मक सोच से दूर रहें। मन को शांत और पवित्र रखें।
  • यदि कोई बीमारी है, कमजोरी है या डॉक्टर ने मना किया है तो व्रत अपने अनुसार रखें। भगवान शिव भावना देखते हैं, कठिन व्रत नहीं।
  • व्रत खोलते समय अगले दिन सुबह स्नान करें और भगवान शिव की पूजा के बाद हल्का भोजन करें। अचानक भारी भोजन से बचें।
  • नियमों से अधिक श्रद्धा और विश्वास महत्वपूर्ण है। सच्चे मन से किया गया छोटा सा व्रत भी भगवान शिव को प्रसन्न करता है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि चार प्रहर अभिषेक विधि


प्रथम प्रहर (सुबह)
पहले प्रहर में दुध से ईशान मूर्ति का अभिषेक करें और इस दौरान मंत्र का जाप करें: “ह्रीं ईशानाय नम:”।

द्वितीय प्रहर (दोपहर)
दूसरे प्रहर में दही से अघोर मूर्ति का अभिषेक करें और साथ ही मंत्र “ह्रीं अघोराय नम:” का उच्चारण करें।

तृतीय प्रहर (संध्या)
तीसरे प्रहर में घृत (घी) से वामदेव मूर्ति का अभिषेक करें और मंत्र “ह्रीं वामदेवाय नम:” का जाप करें।

चतुर्थ प्रहर (रात्रि)
चौथे प्रहर में शहद से सद्योजात मूर्ति का अभिषेक करें और मंत्र “ह्रीं सद्योजाताय नम:” का उच्चारण करते हुए पूजा संपन्न करें।

Mahashivratri 2026: शिव पूजन में शंख का प्रयोग वर्जित

शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना पूर्णतः वर्जित है। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था और उसके शरीर की अस्थियों से शंख उत्पन्न हुआ। इसी कारण से शिवलिंग पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता। शिवलिंग पर जल, दूध, दही या अन्य पवित्र द्रव सीधे पात्र से अर्पित करना ही शास्त्रानुसार सही माना गया है।

Mahashivratri 2026:  महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का महत्व

महाशिवरात्रि के दिन वैसे तो पूरे दिन और रात को पूजा कर सकते हैं। लेकिन इस पर्व पर रात्रि के चार प्रहर की पूजा करने का विशेष विधान और महत्व होता है। स्कंद, शिव और लिंग पुराण में महाशिवरात्रि पर रात के चार प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक करना बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। एक प्रहर 3 घंटे का होता है। 

Mahashivratri 2026: भगवान भोलेनाथ को क्यों नहीं चढ़ाया जाता केतकी पुष्प?

केतकी पुष्प से जुड़ी कथा के अनुसार, ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद के समय, भगवान शिव का दिव्य ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ। ब्रह्मा और विष्णु ने इसके शिखर तक  पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। रास्ते में ब्रह्मा को केतकी का पुष्प मिला और उसने झूठी गवाही देने के लिए पुष्प को भी साथ लिया। शिवजी ने ब्रह्मा के अहंकार और असत्य बोलने पर क्रोधित होकर कालभैरव प्रकट किया और ब्रह्मा का पंचम सिर काट दिया। इसी कारण ब्रह्मा चतुर्मुख कहलाए। साथ ही, केतकी पुष्प को श्राप दिया गया कि यह कभी शिव पूजा में स्वीकार नहीं होगा, जो सत्य की विजय और अहंकार के दंड का प्रतीक है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को अर्पित करें प्रिय भोग

  • मौसमी फल
  • बेर
  • मिठाई
  • साबूदाना खिचड़ी
  • पंचामृत 
  • दूध और गुड़
     

MahaShivratri 2026: महाशिवरात्रि पर करें इन चीज़ों का दान

  • महाशिवरात्रि पर सफेद वस्तुओं का दान करना बेहद शुभ होता है। इससे मन को शांति मिलती है। साथ ही महादेव प्रसन्न होते हैं।
  • इस दिन आप काले तिल का दान कर सकते हैं। यह सभी तरह के ग्रह दोषों को शांत करता है।
  • काली दाल का दान करने से शनि और राहु से जुड़े दोष दूर होते हैं।
  • वस्त्र दान सदैव श्रेष्ठ कर्म माना गया है। इसके प्रभाव से जीवन में शांति और संतोष बढ़ता है।
  • आप महाशिवरात्रि के दिन घी और गुड़ का दान भी कर सकते हैं। इससे भाग्योदय होता है।
  • इस दिन पर सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार सामग्री का दान करना पुण्यदायी होता है।
  • चावल का दान करने से घर में अन्न-धन बढ़ता है।

MahaShivratri 2026: महादेव को अर्पित करने चाहिए ये फूल

  • महाशिवरात्रि के शुभ दिन पर भोलेनाथ को धतूरा और उसका फूल अर्पित करना चाहिए। इसे बेहद शुभ माना जाता है। 
  • शिव जी को आप आक के फूल चढ़ाएं। इससे प्रभु प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। यही नहीं साधक की मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं।
  • मान्यता है कि, सफेद फूल महाकाल को अर्पित करने से अटके कार्यों को गति मिलती हैं। साथ ही देवी पार्वती की कृपा भी बनी रहती हैं।
  • महाशिवरात्रि पर आप शिव जी को शमी के फूल अवश्य चढ़ाएं। यह प्रभु को अति प्रिय है। इससे वह शीघ्र ही प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।
  • प्राजक्ता के फूल महादेव को अर्पित करें। इससे धन लाभ और सुख बढ़ता है। 
  • सफेद कनेर के फूल चढ़ाने से प्रेम जीवन सुखमय होता है।

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर करें भोलेनाथ की आरती

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय 

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
 

Mahashivratri 2026: श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्र का करें पाठ

॥ श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,
तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥

मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,
तस्मै म काराय नमः शिवाय ॥२॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,
तस्मै शि काराय नमः शिवाय ॥३॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,
तस्मै व काराय नमः शिवाय ॥४॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय,
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,
तस्मै य काराय नमः शिवाय ॥५॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥

Mahashivratri 2026: शिवचालीसा पाठ

शिव चालीसा | Shiv Chalisa in Hindi


दोहा ॥
श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥
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Mahashivratri 2026: व्रत पारण समय

महाशिवरात्रि व्रत का पारण अगले दिन 16 फरवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक किया जाएगा।
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