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Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी के दिन भी कर सकते हैं विसर्जन , जानें आज के गणेश विसर्जन का मुहूर्त

Wed, 27 Aug 2025 06:52 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ganesh Chaturthi Puja Muhurat, Wishes Visarjan in Hindi : गणेश चतुर्थी पर घर में स्थापित गणपति बप्पा की मूर्ति का विसर्जन पूरे विधि-विधान से करना जरूरी होता है। यह विसर्जन आप अपनी सुविधा अनुसार चतुर्थी के दिन, अगले दिन, या फिर तीसरे, पांचवे, सातवें दिन कर सकते हैं।
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Ganesh Chaturthi Live - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Ganesh Chaturthi Puja muhurat  : आज 27 अगस्त 2025 को पूरे देश में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला यह उत्सव हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहारों में गिना जाता है। इस दिन भक्तजन बड़े ही प्रेम और भक्ति भाव से भगवान गणेश की पूजा करते हैं और उन्हें अपने घरों में स्थापित करते हैं।

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Happy Ganesh Chaturthi: गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया...गणेश चतुर्थी पर अपनों को दें ये शुभकामना सन्देश
ऐसा माना जाता है कि घर में गणपति बप्पा की स्थापना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। यदि आप भी इस शुभ अवसर पर गणेश स्थापना की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि आज के दिन गणेश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा है और पूजा का सही समय क्या रहेगा।
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Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के इन नामों का जाप, घर में आएगी समृद्धि

Ganesh Chaturthi Panchang: गणेश चतुर्थी पंचांग

  • अमृत काल- 07:33 से सुबह 09:09 
  • शुभ चौघड़िया- सुबह 10:46 AM से दोपहर 12:22 PM तक
  • गणेश जी की मूर्ति को घर में स्थापित करने का सबसे शुभ मुहूर्त- 11:05 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:40 तक
     

Ganesh Chaturthi Rahukaal Time: गणेश चतुर्थी पर राहुकाल का भी रखें ध्यान

27 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से राहुकाल शुरू हो रहा है, इसलिए गणेश जी की मूर्ति स्थापना इससे पहले कर लेना शुभ माना जाता है। राहुकाल के समय कोई भी मंगल कार्य करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ काल माना गया है।
 

Ganesh Sthapna Muhurat: गणेश स्थापना मुहूर्त

गणेश स्थापना का उत्तम मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक रहेगा। इस अवधि को बेहद मंगलकारी और फलदायक माना जाता है।


Ganesh Pujan Samagri List: गणेश पूजन सामग्री लिस्ट

  • मौसमी फल, धूप, दीप
  • गंगाजल, कपूर, जनेऊ
  • सिंदूर, गणेश मूर्ति, कलश, मोदक
  • केला, आरती की किताब, सुपारी
  • चंदन, फूल, अक्षत, पान का पत्ता
  • लकड़ी की चौकी, केले के पौधे
  • पीला और लाल रंग का कपड़ा, नए वस्त्र
  • दूर्वा, नारियल, सुपारी, लाल चंदन, पंचमेवा, मोदक
  • प्रसाद के लिए कुछ मिठाई भी मंगा लें।
Ganesh Chaturthi 2025: इन चीजों के बिना अधूरी है गणेश जी की स्थापना, जानें संपूर्ण पूजन सामग्री

Ganesh Chaturthi Live: गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है ? 

गणेश चतुर्थी इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। एक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर के उबटन से एक बालक को बनाया और उसे द्वार पर खड़ा कर दिया, ताकि कोई अंदर न आए। उसी दौरान भगवान शिव वहाँ पहुँचे और जब उस बालक ने उन्हें रोक दिया, तो शिव जी क्रोधित हो गए और उसका सिर काट दिया।

यह देखकर माता पार्वती बहुत दुखी हुईं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने बालक को फिर से जीवित किया और एक हाथी के बच्चे का सिर उसके धड़ पर लगाकर उसे नया जीवन दिया। तभी से यह बालक गणेश कहलाया और भगवान शिव ने घोषणा की कि संसार में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी।

इसी कारण से गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्म और उनके प्रथम पूज्य बनने के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विघ्नों को दूर करने वाले देवता के स्वागत और पूजन का पर्व है।

Ganesh Chaturthi 2025: भाद्रपद महीने में ही क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी? जानिए कारण

Mumbai Siddhi Vinayak Mandir: मुंबई सिद्धिविनायक मंदिर

गणेशचतुर्थी 2025 पूजा के उत्सव की शुरुआत।

Shri Ganesh Mandir Tekdi: श्री गणेश मंदिर टेकड़ी

नागपुर, महाराष्ट्र | #गणेशचतुर्थी 2025 के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त श्री गणेश मंदिर टेकड़ी में पूजा-अर्चना करते हुए।
 

वस्त्रपुर का गणेश मंदिर

अहमदाबाद, गुजरात #गणेशचतुर्थी2025 के अवसर पर वस्त्रपुर के गणेश मंदिर में आरती की गई।
 

The Pillayarpatti Vinayagar Temple पिल्लयारपट्टी, तमिलनाडु

पिल्लयारपट्टी, तमिलनाडु | #गणेशचतुर्थी2025 के अवसर पर पिल्लयारपट्टी विनयगर मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है।
 

गणेश जी के प्रिय भोग: Ganesh Ji Priya Bhog

  • मोदक – मीठा और नरम होने के कारण गणेश जी को बहुत प्रिय है; चढ़ाने से धन और समृद्धि मिलती है।
  • मोतीचूर के लड्डू – मिठास से भरे और पूरण से युक्त लड्डू गणेश जी को खुश करते हैं; इच्छाएं पूरी होती हैं।
  • पूरन पोली – पारंपरिक मिठा भोग है जो बप्पा को प्रिय है; इसे चढ़ाने से घर में शांति और सुख आता है।
  • खीर – दूध और मेवे से बनी खीर गणेश जी को प्रिय है; अर्पण करने से परिवार में प्रेम और आनंद बढ़ता है।
Ganesh Chaturthi 2025: गणपति बप्पा को चढ़ाएं ये भोग, हर संकट होगा दूर, आएगी समृद्धि

 

मनिका विनयगर मंदिर

तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु: गणेश चतुर्थी 2025 के अवसर पर, मनिका विनयगर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।

Ganesh Chaturthi Upay: गणेश चतुर्थी के विशेष उपाय

  • गणेश जी की पूजा करते समय पीला वस्त्र पहनें, जिससे घर में शांति और शुभ ऊर्जा बनी रहती है।
  • मदार के फूल की माला बनाकर जल से धोकर गणेश जी को चढ़ाएं, इससे अचानक धन लाभ होता है।
  • गणेश जी की मूर्ति के सामने एक पैर पर खड़े होकर आंख से आंख मिलाकर दर्शन करें, इससे घर में बरकत और रुके हुए काम बनते हैं।
  • गणेश जी के सामने पद्मासन में बैठकर हल्दी मिलाकर हवन करें, तो रोग दूर होते हैं और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • दोनों हाथ ऊपर उठाकर गणेश जी को साष्टांग प्रणाम करें, इससे पूरे परिवार को सुख-समृद्धि और बप्पा की कृपा मिलती है।
  • गणेश चतुर्थी के 10 दिनों में वाहन, सोना, वस्त्र या संपत्ति खरीदने से घर में धन, शांति और सौभाग्य बढ़ता है।

Ganesh Ji Ki Sthapna DIsha: गणेश जी की स्थापना दिशा 

घर में गणेश जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, में स्थापित करनी चाहिए। इस दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है और इसे सबसे पवित्र दिशा माना गया है। जब गणेश जी की प्रतिमा इस दिशा में रखी जाती है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है। ईशान कोण में गणेश जी की उपस्थिति से ऐसा माना जाता है कि भगवान का आशीर्वाद पूरे घर में फैलता है और वातावरण शांत तथा मंगलमय बना रहता है। यही वजह है कि वास्तु शास्त्र भी यही सलाह देता है कि गणपति की मूर्ति इस दिशा में स्थापित की जाए।

Ganesh Chaturthi Shubh Yog: गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं 3 शुभ योग 

आज गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग, शुक्ल योग और शुभ योग एक साथ बन रहे हैं, जो बहुत ही दुर्लभ माना जा रहा है।
  • ब्रह्म योग- ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं की शक्तियाँ एक साथ सक्रिय रहती हैं। यह योग किसी भी पूजा को बेहद शक्तिशाली और फलदायक बना देता है।
  • शुक्ल योग- जो भी लोग इस दिन गणेश जी की पूजा, आरती और उपासना करते हैं, उनके जीवन में शुभता बढ़ती है। घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • शुभ योग- यह योग भक्तों के जीवन में शुभ लाभ लाता है। आमदनी में वृद्धि होती है, नुकसान कम होता है और घर में रहने वाले लोग स्वस्थ रहते हैं।

इन राशियों के लिए शुभ रहेगी गणेश चतुर्थी 

मिथुन राशि
गणेश चतुर्थी का दिन आपके लिए शुभ संकेत लेकर आएगा। कार्यक्षेत्र में मेहनत रंग लाएगी और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। अधूरे काम पूरे हो सकते हैं और कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सुधार होगा और परिवार के साथ समय सुखद रहेगा।
उपाय: भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाएं, इससे मानसिक शांति और पारिवारिक सुख मिलेगा।

 कन्या राशि
आज आपका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा, जिससे काम में तेजी और सफलता दोनों मिलेंगी। ऑफिस या बिजनेस में प्रगति के संकेत हैं। विद्यार्थी वर्ग के लिए भी दिन अच्छा है – परीक्षा या रिजल्ट से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है।
उपाय: गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करें, इससे बुद्धि और भाग्य दोनों मजबूत होंगे।

तुला राशि
गणेश चतुर्थी आपके लिए नई शुरुआत का अवसर लेकर आ रही है। आप किसी नए काम की योजना बना सकते हैं या कुछ नया सीखने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। लव लाइफ में मिठास बनी रहेगी और पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। आर्थिक दृष्टि से भी लाभ के योग हैं।
उपाय: माता दुर्गा को लाल पुष्प अर्पित करें, जिससे जीवन में सौभाग्य और स्थिरता बनी रहे।

धनु राशि
आज भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। जो काम लंबे समय से रुके हुए थे, वे अब गति पकड़ सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को लाभ मिलेगा। समाज में आपकी पहचान और सम्मान बढ़ सकता है।
उपाय: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और गणेश जी की पूजा करें, आपके सभी काम सरलता से पूरे होंगे।

कुंभ राशि
गणेश चतुर्थी का दिन आर्थिक रूप से राहत और अवसर दोनों ला सकता है। पुराने कर्ज या जिम्मेदारियों से छुटकारा मिल सकता है। करियर में उन्नति और तरक्की के योग हैं। परिवार और दोस्तों का पूरा सहयोग आपको मिलेगा।
उपाय: शनि देव को सरसों के तेल का दीपक चढ़ाएं, जिससे जीवन में स्थिरता और सफलता बनी रहे।

Ganesh Sthapana Se Pehle Kya Kare: गणपति स्थापना से पहले क्या करना है? 

  • सबसे पहले एक साफ बर्तन में पानी लें और पूजा के स्थान पर रख दें।
  • जहाँ आपने पूजा का मंडप या स्थान तैयार किया है, वहां एक चटाई या आसन बिछाकर शांत मन से बैठ जाएं।
  • फिर हाथ में थोड़ी सी कुशा (घास) और जल लें, और यह मंत्र बोलें:
"ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः।।"
 
  • इसके बाद, उस जल को हल्के से अपने ऊपर और पूजा की सभी चीजों पर छिड़क दें, ताकि वे भी शुद्ध हो जाएं।
  • फिर तीन बार कुल्ला करें ताकि मुख भी स्वच्छ हो जाए।
  • अब हाथ में थोड़ा जल लें और यह मंत्र बोलते हुए तीन बार थोड़ा-थोड़ा जल अपने मुंह में डालें:
"ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ हृषीकेशाय नमः"
  • इसके बाद हाथ धो लें।
  • अब पूजा स्थल पर जहां गणेश जी को स्थापित करना है, वहां थोड़े से साबूत (बिना टूटे) चावल रखें।
  • फिर उस चावल पर गणेश जी की मूर्ति को आदरपूर्वक स्थापित करें।

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों नहीं करना चाहिए?

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन अगर कोई व्यक्ति चंद्र दर्शन करता है तो उसे "मिथ्या दोष" लग जाता है। इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति पर बिना कारण के झूठे आरोप, खासकर चोरी जैसे इल्ज़ाम लग सकते हैं। इसलिए, लोग इस दिन चंद्र दर्शन से बचते हैं ताकि उन्हें किसी तरह की बदनामी या अपयश का सामना न करना पड़े।

चंद्र दर्शन वर्जित समय 
27 अगस्त 2025 (गणेश चतुर्थी): सुबह 09:28 बजे से रात 08:57 बजे तक
इन समयों में चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। अगर भूल से देख लिया जाए, तो "सिंह पुराण" के अनुसार गणेश चतुर्थी व्रत की कथा या गणेश जी के किसी मंत्र का जाप करने से दोष कम हो सकता है।

गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
क्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ,
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं



आते बड़े धूम-धाम से गणपति जी
जाते बड़े धूम-धाम से गणपति जी
आखिर सबसे पहले आकर
हमारे दिलों में बस जाते हैं गणपति जी।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

 

हे देवो के देव गणेश
वर दो हमको मिटे क्लेश
सुखी हो संसार और हमारा देश
दुख संकट ना रहे कोई शेष
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

Ganesh Chaturthi Par Karein Naam Mantra Jaap; भगवान गणेश नाम मंत्र जाप

ॐ गणेशाय नमः - फोटो : amarujala
  • ऊँ सुमुखाय नम:
  • ऊँ एकदंताय नम:
  • ऊँ कपिलाय नम:
  • ऊँ गजकर्णाय नम:
  • ऊँ लंबोदराय नम:
  • ऊँ विकटाय नम:
  • ऊँ विघ्ननाशाय नम:
  • ऊँ विनायकाय नम:
  • ऊँ धूम्रकेतवे नम:
  • ऊँ गणाध्यक्षाय नम:
  • ऊँ भालचंद्राय नम:
  • ऊँ गजाननाय नम:।

गणेशोत्सव के सुंदर वाॅलपेपर - फोटो : amar ujala
ॐ गं गणपतये नमो नमः 
श्री सिद्धिविनायक नमो नमः 
अष्ट विनायक नमो नमः 
गणपति बप्पा मोरया। 


ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रे
सर्व विघ्न प्रशमनाय सर्वार्जाय वश्यकर्णाय
सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रृीं ॐ स्वाहा।

Ganesh Chaturthi Rashi Anusar Upay: गणेश चतुर्थी राशि अनुसार उपाय

मेष: गणेश जी को लाल फूल और मोदक चढ़ाएं, करियर में सफलता मिलेगी।
वृषभ: सफेद फूल और पंचामृत से स्नान कराएं, पारिवारिक सुख-शांति मिलेगी।
मिथुन: दूर्वा और हरी मिठाई अर्पित करें, धन संबंधी रुकावटें दूर होंगी।
कर्क: नारियल और दूध की मिठाई चढ़ाएं, मानसिक तनाव कम होगा।

Ganesh Sthapna Niyam: गणेश स्थापना नियम

  • घर में गणेश भगवान की स्थापना के लिए हमेशा ऐसी मूर्ति चुनें, जिसमें भगवान गणेश की सूंड बाईं ओर झुकी हो। इसे अत्यंत शुभ माना गया है। 
  • गणपति जी की बैठी हुई प्रतिमा को घर लाना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इससे सुख और समृद्धि का वास होता है।
  • मूर्ति का चेहरा प्रसन्न और हंसमुख होना चाहिए। साथ ही यह भी देखें कि उनके एक हाथ में आशीर्वाद की मुद्रा हो और दूसरे हाथ में मोदक होना चाहिए।
  • गणपति स्थापना के लिए प्रतिमा को हमेशा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखें। ध्यान रहे उनका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • मूर्ति को चौकी पर रखने से पहले चौकी को अच्छी तरह से साफ करें और गंगाजल से पवित्र करें।
  • प्रतिमा के पास रिद्धि-सिद्धि का स्थान अवश्य दें। अगर मूर्तियां उपलब्ध न हों, तो उनकी जगह आप सुपारी रख सकते हैं।
  • गणेश जी की दाईं ओर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। इसके बाद फूल और अक्षत हाथ में लेकर गणपति बप्पा का ध्यान करें।

Ganesh Chaturthi Rashi Anusar Upay: गणेश चतुर्थी राशि अनुसार उपाय

  • सिंह राशि: गणेश जी को लाल चंदन और गुड़ चढ़ाएं, इससे करियर में तरक्की और मान-सम्मान बढ़ेगा।
  • कन्या राशि: हरी मूंग और दूर्वा अर्पित करें, इससे सेहत में सुधार और काम में स्थिरता मिलेगी।
  • तुला राशि: गणपति को इत्र और गुलाब चढ़ाएं, इससे रिश्तों में मिठास और दांपत्य जीवन में तालमेल बढ़ेगा।
  • वृश्चिक राशि: अनार और लड्डू चढ़ाएं, इससे अचानक धन लाभ के योग बन सकते हैं।
Ganesh Chaturthi Wishes: गणपति बप्पा मोरया,मंगल मूर्ति मोरया...गणेश चतुर्थी पर अपनों को दें ये शुभकामना सन्देश

Shri Ganesh Aarti : श्री गणेश आरती

सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना

जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव

शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी

जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के इन नामों का जाप, घर में आएगी समृद्धि

अथर्वशीर्ष पाठ : Ganesh Chaturthi Par Karein AtharvSheersh Paath

ॐ नमस्ते गणपतये

॥ शांति पाठ ॥

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः ।
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवाग्ँसस्तनूभिः ।
व्यशेम देवहितं यदायूः ।

स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः ।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः ।
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ॐ नमस्ते गणपतये ॥
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ।
त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ।
त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ।
त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥१॥

ऋतं वच्मि । सत्यं वच्मि ॥२॥

अव त्वं माम् । अव वक्तारम्।
अव श्रोतारम्। अव दातारम्।
अव धातारम्। अवानूचानमव शिष्यम्।
अव पश्चात्तात्। अव पुरस्त्तात्।
अवोत्तरात्तात् । अव दक्षिणात्तात्।
अव चोर्ध्वात्तात्। अवाधरात्तात्।
सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥३॥

त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मय:।
त्वमानंदमयस्त्वं ब्रह्ममय:।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितीयोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥४॥

सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते॥
सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति॥
सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति॥
सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति॥
त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः॥
त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥५॥

त्वं गुणत्रयातीतः त्वमवस्थात्रयातीतः॥
त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः॥
त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्॥
त्वं शक्तित्रयात्मकः॥
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं॥
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं
इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं
ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥६॥

गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादि तदनंतरम्॥
अनुस्वारः परतरः ॥ अर्धेन्दुलसितम् ॥
तारेण ऋद्धम्॥ एतत्तव मनुस्वरूपम् ॥
गकारः पूर्वरूपम्॥ अकारो मध्यमरूपम् ॥
अनुस्वारश्चान्त्यरूपम्॥ बिन्दुरुत्तररूपम् ॥
नादः संधानम्॥ संहितासंधिः ॥
सैषा गणेशविद्या॥ गणकऋषिः ॥
निचृद्गायत्रीच्छंदः॥ गणपतिर्देवता ॥
ॐ गं गणपतये नमः॥७॥

एकदंताय विद्महे ।
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥८॥

एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।
रदं च वरदं हस्तैर्ब्रिभ्राणं मूषकध्वजम्।
रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।
रक्तगंधानुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।
भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।
आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृतेः पुरुषात्परम्।
एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:॥९॥

नमो व्रातपतये।
नमो गणपतये।
नम: प्रमथपतये।
नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।
विघ्ननाशिने शिवसुताय।
श्री वरदमूर्तये नमो नमः॥१०॥

॥ फल श्रुति॥

एतदथर्वशीर्षं योऽधीते। स ब्रह्मभूयाय कल्पते।
स सर्वतः सुखमेधते । स सर्वविघ्नैर्नबाध्यते।
स पञ्चमहापापातप्रमुच्यते ॥११॥

सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।
प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।
सायंप्रातः प्रयुञ्जानो अपापो भवति।
सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।
धर्मार्थकाममोक्षं च विन्दति ॥१२॥

इदम् अथर्वशीर्षमऽशिष्याय न देयम्।
यो यदि मोहाद्दास्यति स पापीयान् भवति।
सहस्रावर्तनात् यं यं काममधीते।
तं तमनेन साधयेत्॥१३॥

अनेन गणपतिमभिषिञ्चति स वाग्मी भवति।
चतुर्थ्यामनश्नञ्जपति स विद्यावान् भवति।
इत्यथर्वण वाक्यं। ब्रह्माद्यावरणं विद्यात्।
न बिभेति कदाचनेति ॥१४॥

यो दूर्वाङ्कुरैर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति।
यो लाजैर्यजति स यशोवान् भवति।
स मेधावान् भवति।
यो मोदकसहस्रेण यजति।
स वाञ्छितफलमवाप्नोति।
यः साज्यसमिद्भिर्यजति।
स सर्वं लभते स सर्वं लभते ॥१५॥

अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा
सूर्यवर्चस्वी भवति।
सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ
वा जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।
महाविघ्नात्प्रमुच्यते।
महादोषात्प्रमुच्यते।
महापापात् प्रमुच्यते।
स सर्वविद्भवति स सर्वविद्भवति।
य एवं वेद इत्युपनिषत् ॥ १६॥

ॐ शान्तिश्शान्तिश्शान्तिः ॥

॥ अथर्ववेदीय गणपति उपनिषद समाप्त ॥


 

शहरों के अनुसार गणेश चतुर्थी स्थापना मुहूर्त 2025: Shubh Muhurat For Ganesh Chaturthi 2025)

  • पुणे - प्रातः 11:21 से दोपहर 01:51  
  • नई दिल्ली -प्रातः 11:05 से दोपहर 01:40  
  • चेन्नई - प्रातः10:56 से दोपहर 01:25  
  • जयपुर - प्रातः11:11 से दोपहर 01:45  
  • हैदराबाद -प्रातः 11:02 से दोपहर 01:33  
  • गुरुग्राम - प्रातः11:06 से दोपहर 01:40  
  • चण्डीगढ़ -प्रातः 11:07 से दोपहर 01:42 
  • कोलकाता - प्रातः10:22 से दोपहर 12:54  
  • मुम्बई - प्रातः 11:24 से दोपहर 01:55  
  • बेंगलूरु - प्रातः 11:07 से दोपहर 01:36 

Ganpati Sthapna Muhurat: गणपति प्रतिमा स्थापना मुहूर्त

शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त को गणेश प्रतिमा की स्थापना का शुभ समय सुबह 11:05 से दोपहर 12:42 तक है। लेकिन दोपहर 12:22 से राहुकाल शुरू हो जाएगा, जो अशुभ माना जाता है। इसलिए गणपति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा पूजन के लिए सबसे उत्तम समय 11:05 से 12:22 बजे तक रहेगा।


घर पर गणेश स्थापना पूजा विधि : Ganesh Sthapana Puja Vidhi In Hindi

  •  “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते हुए भगवान गणेश को घर में आमंत्रित करें।
  • उन्हें फूलों की माला पहनाएं और ताजे फूल अर्पित करें।
  • फिर गंगाजल या दूध से प्रतीकात्मक स्नान कराएं, फिर साफ जल से शुद्ध करें।
  • बप्पा के माथे पर चंदन और रोली लगाएं, फिर हल्दी और अक्षत चढ़ाएं।
  • अब घी का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप अर्पित करें।
  • परिवार के साथ मिलकर गणेश जी की आरती करें और हाथ जोड़कर विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करें।
  • विसर्जन तक रोज़ विधिपूर्वक पूजा करें।
  • दिन में कम से कम एक बार भजन या आरती अवश्य करें।

Ganesh Sthapana Kitne Din Ke Liye Kare:  गणेश स्थापना कितने दिन के लिए करें?

आप अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार गणपति बप्पा को 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन तक घर में विराजमान रख सकते हैं। यह पूरी तरह से आपकी श्रद्धा, समय और व्यवस्था पर निर्भर करता है। जिस दिन आप विसर्जन करना चाहें, उस दिन विधिवत पूजन और आरती के बाद बप्पा को विदा करें।

व्रत के दौरान किन चीजों को खाना से बचना चाहिए

  • सामान्य नमक (केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें)
  • अनाज और दालें
  • मांसाहार और मदिरा
  • तामसिक चीजें (जैसे लहसुन, प्याज)
  • गरम मसाले, हल्दी, लाल मिर्च
  • कटहल

गणेश चतुर्थी पर कैसे करें व्रत का पारण

गणेश चतुर्थी का व्रत समाप्त करने के लिए व्रती को पहले भगवान गणेश को अर्पित किए गए भोग को ग्रहण करना चाहिए। व्रत खोलने से पहले पूजा करके गणपति बप्पा को भोग लगाना आवश्यक होता है। इस दिन गणेश जी को जिन चीज़ों का भोग लगाया जा सकता है, उनमें प्रमुख हैं – मोदक, मोतीचूर के लड्डू, केले, जामुन, नारियल के लड्डू, तिल-गुड़ के लड्डू, सूजी का हलवा, पंचमेवा, पंचामृत, बेसन के लड्डू और गुड़-चावल की खीर। व्रत खोलते समय इन्हीं में से किसी एक भोग प्रसाद को सबसे पहले ग्रहण करके व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

Ganesh Chaturthi Vrat Niyam: गणेश चतुर्थी व्रत के नियम

  • व्रत का संकल्प लेने के बाद उसे अधूरा न छोड़ें और पूरा नियमपूर्वक निभाएं।
  • व्रत के दिन गणेश चतुर्थी की कथा अवश्य पढ़ें या सुनें।
  • इस दिन क्रोध, ईर्ष्या, और नकारात्मक सोच से दूरी बनाए रखें।
  • पूजा के समय शुद्ध वस्त्र पहनें और बिना कुछ खाए या मुंह में झूठ लगाए ही पूजा करें।
  • व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • भगवान गणेश को ताजे और शुद्ध भोग अर्पित करें, बासी या अशुद्ध चीजें न चढ़ाएं।
  • दिन में सोने से बचें, कोशिश करें कि दिनभर सतर्क और ध्यानमग्न रहें।
  • इस दिन बाल और नाखून न काटें।
  • पूजा करते समय सिर ढक कर रखें, यह सम्मान और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।

भगवान गणेश को अर्पित करें ये 5 फूल

  • गेंदे के फूल: आरोग्य और धन की प्राप्ति हेतु, रोग व आर्थिक समस्या दूर होती है।
  • गुड़हल के फूल: शत्रु पर विजय के लिए, जीवन में समृद्धि और सुरक्षा मिलती है।
  • पारिजात के फूल: संतान सुख के लिए, संतान से जुड़ी बाधाएं समाप्त होती हैं।
  • कंद के फूल: पारिवारिक शांति के लिए, घर में प्रेम और सुख बना रहता है।
  • अपराजिता के फूल: विवाह की सफलता हेतु, शादी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

Today Ganesh Visarjan Muhurat 2025: गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन मुहूर्त 2025

  • गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन बुधवार, अगस्त 27, 2025 को
  • अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ) -  दोपहर 03:35 से सायं 06:48 तक 
  • सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - रात्रि 08:12 से अगस्त 28 देर रात 12:23
  • उषाकाल मुहूर्त (लाभ) - 28 अगस्त तड़के 03:10  से प्रातः  04:33 
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भगवान गणेश को बप्पा और मोरया क्यों कहा जाता है

गणेश विसर्जन से जुड़ी एक रोचक कथा महाराष्ट्र के चिंचवाड़ गांव से जुड़ी है, जहां करीब 600 वर्ष पहले मोरया गोसावी नाम के एक महान गणेश भक्त का जन्म हुआ था। माना जाता है कि वे स्वयं गणेशजी के अंशावतार थे और उनका जन्म 1375 ई. में वामन भट्ट और पार्वती के घर हुआ था। मोरया बचपन से ही भगवान गणेश की भक्ति में लीन रहते थे और गणेश चतुर्थी के अवसर पर चिंचवाड़ से 95 किलोमीटर दूर स्थित मयूरेश्वर मंदिर तक पैदल यात्रा करते थे। यह सिलसिला उन्होंने 117 वर्षों तक जारी रखा। वृद्धावस्था में जब उनके लिए मंदिर तक जाना कठिन हो गया, तब एक रात उन्हें स्वप्न में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और कहा कि अब तुम्हें मंदिर आने की आवश्यकता नहीं, मैं स्वयं तुम्हारे पास आऊंगा। अगले दिन स्नान के बाद मोरया को कुंड से निकलते ही अपने सामने वही मूर्ति दिखाई दी, जो उन्होंने स्वप्न में देखी थी। उन्होंने उस दिव्य मूर्ति को चिंचवाड़ में स्थापित किया, जो बाद में एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बन गया। यहीं से “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे की परंपरा शुरू हुई, जिससे भक्त और भगवान के बीच की दूरी और भी कम हो गई। मान्यता है कि चिंचवाड़ की गणेश प्रतिमा मयूरेश्वर भगवान के अंश स्वरूप है, इसलिए हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर वहां से मयूरेश्वर मंदिर तक डोली यात्रा निकाली जाती है।

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