27 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से राहुकाल शुरू हो रहा है, इसलिए गणेश जी की मूर्ति स्थापना इससे पहले कर लेना शुभ माना जाता है। राहुकाल के समय कोई भी मंगल कार्य करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ काल माना गया है।
गणेश स्थापना का उत्तम मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक रहेगा। इस अवधि को बेहद मंगलकारी और फलदायक माना जाता है।
गणेश चतुर्थी इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। एक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर के उबटन से एक बालक को बनाया और उसे द्वार पर खड़ा कर दिया, ताकि कोई अंदर न आए। उसी दौरान भगवान शिव वहाँ पहुँचे और जब उस बालक ने उन्हें रोक दिया, तो शिव जी क्रोधित हो गए और उसका सिर काट दिया।
यह देखकर माता पार्वती बहुत दुखी हुईं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने बालक को फिर से जीवित किया और एक हाथी के बच्चे का सिर उसके धड़ पर लगाकर उसे नया जीवन दिया। तभी से यह बालक गणेश कहलाया और भगवान शिव ने घोषणा की कि संसार में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी।
इसी कारण से गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्म और उनके प्रथम पूज्य बनने के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विघ्नों को दूर करने वाले देवता के स्वागत और पूजन का पर्व है।
Ganesh Chaturthi 2025: भाद्रपद महीने में ही क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी? जानिए कारण
नागपुर, महाराष्ट्र | #गणेशचतुर्थी 2025 के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त श्री गणेश मंदिर टेकड़ी में पूजा-अर्चना करते हुए।
अहमदाबाद, गुजरात #गणेशचतुर्थी2025 के अवसर पर वस्त्रपुर के गणेश मंदिर में आरती की गई।
पिल्लयारपट्टी, तमिलनाडु | #गणेशचतुर्थी2025 के अवसर पर पिल्लयारपट्टी विनयगर मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है।
तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु: गणेश चतुर्थी 2025 के अवसर पर, मनिका विनयगर मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
घर में गणेश जी की मूर्ति उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, में स्थापित करनी चाहिए। इस दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है और इसे सबसे पवित्र दिशा माना गया है। जब गणेश जी की प्रतिमा इस दिशा में रखी जाती है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है, विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि बनी रहती है। ईशान कोण में गणेश जी की उपस्थिति से ऐसा माना जाता है कि भगवान का आशीर्वाद पूरे घर में फैलता है और वातावरण शांत तथा मंगलमय बना रहता है। यही वजह है कि वास्तु शास्त्र भी यही सलाह देता है कि गणपति की मूर्ति इस दिशा में स्थापित की जाए।
आज गणेश चतुर्थी पर ब्रह्म योग, शुक्ल योग और शुभ योग एक साथ बन रहे हैं, जो बहुत ही दुर्लभ माना जा रहा है।
- ब्रह्म योग- ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं की शक्तियाँ एक साथ सक्रिय रहती हैं। यह योग किसी भी पूजा को बेहद शक्तिशाली और फलदायक बना देता है।
- शुक्ल योग- जो भी लोग इस दिन गणेश जी की पूजा, आरती और उपासना करते हैं, उनके जीवन में शुभता बढ़ती है। घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
- शुभ योग- यह योग भक्तों के जीवन में शुभ लाभ लाता है। आमदनी में वृद्धि होती है, नुकसान कम होता है और घर में रहने वाले लोग स्वस्थ रहते हैं।
मिथुन राशि
गणेश चतुर्थी का दिन आपके लिए शुभ संकेत लेकर आएगा। कार्यक्षेत्र में मेहनत रंग लाएगी और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। अधूरे काम पूरे हो सकते हैं और कोई अच्छी खबर भी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सुधार होगा और परिवार के साथ समय सुखद रहेगा।
उपाय: भगवान विष्णु को तुलसी दल चढ़ाएं, इससे मानसिक शांति और पारिवारिक सुख मिलेगा।
कन्या राशि
आज आपका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ रहेगा, जिससे काम में तेजी और सफलता दोनों मिलेंगी। ऑफिस या बिजनेस में प्रगति के संकेत हैं। विद्यार्थी वर्ग के लिए भी दिन अच्छा है – परीक्षा या रिजल्ट से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है।
उपाय: गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करें, इससे बुद्धि और भाग्य दोनों मजबूत होंगे।
तुला राशि
गणेश चतुर्थी आपके लिए नई शुरुआत का अवसर लेकर आ रही है। आप किसी नए काम की योजना बना सकते हैं या कुछ नया सीखने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। लव लाइफ में मिठास बनी रहेगी और पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। आर्थिक दृष्टि से भी लाभ के योग हैं।
उपाय: माता दुर्गा को लाल पुष्प अर्पित करें, जिससे जीवन में सौभाग्य और स्थिरता बनी रहे।
धनु राशि
आज भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। जो काम लंबे समय से रुके हुए थे, वे अब गति पकड़ सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को लाभ मिलेगा। समाज में आपकी पहचान और सम्मान बढ़ सकता है।
उपाय: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और गणेश जी की पूजा करें, आपके सभी काम सरलता से पूरे होंगे।
कुंभ राशि
गणेश चतुर्थी का दिन आर्थिक रूप से राहत और अवसर दोनों ला सकता है। पुराने कर्ज या जिम्मेदारियों से छुटकारा मिल सकता है। करियर में उन्नति और तरक्की के योग हैं। परिवार और दोस्तों का पूरा सहयोग आपको मिलेगा।
उपाय: शनि देव को सरसों के तेल का दीपक चढ़ाएं, जिससे जीवन में स्थिरता और सफलता बनी रहे।
- सबसे पहले एक साफ बर्तन में पानी लें और पूजा के स्थान पर रख दें।
- जहाँ आपने पूजा का मंडप या स्थान तैयार किया है, वहां एक चटाई या आसन बिछाकर शांत मन से बैठ जाएं।
- फिर हाथ में थोड़ी सी कुशा (घास) और जल लें, और यह मंत्र बोलें:
"ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः।।"
- इसके बाद, उस जल को हल्के से अपने ऊपर और पूजा की सभी चीजों पर छिड़क दें, ताकि वे भी शुद्ध हो जाएं।
- फिर तीन बार कुल्ला करें ताकि मुख भी स्वच्छ हो जाए।
- अब हाथ में थोड़ा जल लें और यह मंत्र बोलते हुए तीन बार थोड़ा-थोड़ा जल अपने मुंह में डालें:
"ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः, ॐ हृषीकेशाय नमः"
- इसके बाद हाथ धो लें।
- अब पूजा स्थल पर जहां गणेश जी को स्थापित करना है, वहां थोड़े से साबूत (बिना टूटे) चावल रखें।
- फिर उस चावल पर गणेश जी की मूर्ति को आदरपूर्वक स्थापित करें।
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन अगर कोई व्यक्ति चंद्र दर्शन करता है तो उसे "मिथ्या दोष" लग जाता है। इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति पर बिना कारण के झूठे आरोप, खासकर चोरी जैसे इल्ज़ाम लग सकते हैं। इसलिए, लोग इस दिन चंद्र दर्शन से बचते हैं ताकि उन्हें किसी तरह की बदनामी या अपयश का सामना न करना पड़े।
चंद्र दर्शन वर्जित समय
27 अगस्त 2025 (गणेश चतुर्थी): सुबह 09:28 बजे से रात 08:57 बजे तक
इन समयों में चंद्रमा को नहीं देखना चाहिए। अगर भूल से देख लिया जाए, तो "सिंह पुराण" के अनुसार गणेश चतुर्थी व्रत की कथा या गणेश जी के किसी मंत्र का जाप करने से दोष कम हो सकता है।
गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं
- फोटो : amar ujala
क्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ,
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं
आते बड़े धूम-धाम से गणपति जी
जाते बड़े धूम-धाम से गणपति जी
आखिर सबसे पहले आकर
हमारे दिलों में बस जाते हैं गणपति जी।
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
हे देवो के देव गणेश
वर दो हमको मिटे क्लेश
सुखी हो संसार और हमारा देश
दुख संकट ना रहे कोई शेष
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
गणेशोत्सव के सुंदर वाॅलपेपर
- फोटो : amar ujala
ॐ गं गणपतये नमो नमः
श्री सिद्धिविनायक नमो नमः
अष्ट विनायक नमो नमः
गणपति बप्पा मोरया।
ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रे
सर्व विघ्न प्रशमनाय सर्वार्जाय वश्यकर्णाय
सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रृीं ॐ स्वाहा।
मेष: गणेश जी को लाल फूल और मोदक चढ़ाएं, करियर में सफलता मिलेगी।
वृषभ: सफेद फूल और पंचामृत से स्नान कराएं, पारिवारिक सुख-शांति मिलेगी।
मिथुन: दूर्वा और हरी मिठाई अर्पित करें, धन संबंधी रुकावटें दूर होंगी।
कर्क: नारियल और दूध की मिठाई चढ़ाएं, मानसिक तनाव कम होगा।
सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी पर करें भगवान गणेश के इन नामों का जाप, घर में आएगी समृद्धि
ॐ नमस्ते गणपतये
॥ शांति पाठ ॥
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः ।
भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवाग्ँसस्तनूभिः ।
व्यशेम देवहितं यदायूः ।
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः ।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः ।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः ।
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
ॐ नमस्ते गणपतये ॥
त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ।
त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ।
त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ।
त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ।
त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ।
त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥१॥
ऋतं वच्मि । सत्यं वच्मि ॥२॥
अव त्वं माम् । अव वक्तारम्।
अव श्रोतारम्। अव दातारम्।
अव धातारम्। अवानूचानमव शिष्यम्।
अव पश्चात्तात्। अव पुरस्त्तात्।
अवोत्तरात्तात् । अव दक्षिणात्तात्।
अव चोर्ध्वात्तात्। अवाधरात्तात्।
सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥३॥
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मय:।
त्वमानंदमयस्त्वं ब्रह्ममय:।
त्वं सच्चिदानंदा द्वितीयोऽसि।
त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।
त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥४॥
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते॥
सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति॥
सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति॥
सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति॥
त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः॥
त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥५॥
त्वं गुणत्रयातीतः त्वमवस्थात्रयातीतः॥
त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः॥
त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम्॥
त्वं शक्तित्रयात्मकः॥
त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं॥
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं
इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं
ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥६॥
गणादि पूर्वमुच्चार्य वर्णादि तदनंतरम्॥
अनुस्वारः परतरः ॥ अर्धेन्दुलसितम् ॥
तारेण ऋद्धम्॥ एतत्तव मनुस्वरूपम् ॥
गकारः पूर्वरूपम्॥ अकारो मध्यमरूपम् ॥
अनुस्वारश्चान्त्यरूपम्॥ बिन्दुरुत्तररूपम् ॥
नादः संधानम्॥ संहितासंधिः ॥
सैषा गणेशविद्या॥ गणकऋषिः ॥
निचृद्गायत्रीच्छंदः॥ गणपतिर्देवता ॥
ॐ गं गणपतये नमः॥७॥
एकदंताय विद्महे ।
वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥८॥
एकदंतं चतुर्हस्तं पाशमंकुशधारिणम्।
रदं च वरदं हस्तैर्ब्रिभ्राणं मूषकध्वजम्।
रक्तं लंबोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्।
रक्तगंधानुलिप्तांगं रक्तपुष्पै: सुपुजितम्।
भक्तानुकंपिनं देवं जगत्कारणमच्युतम्।
आविर्भूतं च सृष्टयादौ प्रकृतेः पुरुषात्परम्।
एवं ध्यायति यो नित्यं स योगी योगिनां वर:॥९॥
नमो व्रातपतये।
नमो गणपतये।
नम: प्रमथपतये।
नमस्तेऽस्तु लंबोदरायैकदंताय।
विघ्ननाशिने शिवसुताय।
श्री वरदमूर्तये नमो नमः॥१०॥
॥ फल श्रुति॥
एतदथर्वशीर्षं योऽधीते। स ब्रह्मभूयाय कल्पते।
स सर्वतः सुखमेधते । स सर्वविघ्नैर्नबाध्यते।
स पञ्चमहापापातप्रमुच्यते ॥११॥
सायमधीयानो दिवसकृतं पापं नाशयति।
प्रातरधीयानो रात्रिकृतं पापं नाशयति।
सायंप्रातः प्रयुञ्जानो अपापो भवति।
सर्वत्राधीयानोऽपविघ्नो भवति।
धर्मार्थकाममोक्षं च विन्दति ॥१२॥
इदम् अथर्वशीर्षमऽशिष्याय न देयम्।
यो यदि मोहाद्दास्यति स पापीयान् भवति।
सहस्रावर्तनात् यं यं काममधीते।
तं तमनेन साधयेत्॥१३॥
अनेन गणपतिमभिषिञ्चति स वाग्मी भवति।
चतुर्थ्यामनश्नञ्जपति स विद्यावान् भवति।
इत्यथर्वण वाक्यं। ब्रह्माद्यावरणं विद्यात्।
न बिभेति कदाचनेति ॥१४॥
यो दूर्वाङ्कुरैर्यजति स वैश्रवणोपमो भवति।
यो लाजैर्यजति स यशोवान् भवति।
स मेधावान् भवति।
यो मोदकसहस्रेण यजति।
स वाञ्छितफलमवाप्नोति।
यः साज्यसमिद्भिर्यजति।
स सर्वं लभते स सर्वं लभते ॥१५॥
अष्टौ ब्राह्मणान् सम्यग्ग्राहयित्वा
सूर्यवर्चस्वी भवति।
सूर्यग्रहे महानद्यां प्रतिमासंनिधौ
वा जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।
महाविघ्नात्प्रमुच्यते।
महादोषात्प्रमुच्यते।
महापापात् प्रमुच्यते।
स सर्वविद्भवति स सर्वविद्भवति।
य एवं वेद इत्युपनिषत् ॥ १६॥
ॐ शान्तिश्शान्तिश्शान्तिः ॥
॥ अथर्ववेदीय गणपति उपनिषद समाप्त ॥
शास्त्रों और पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त को गणेश प्रतिमा की स्थापना का शुभ समय सुबह 11:05 से दोपहर 12:42 तक है। लेकिन दोपहर 12:22 से राहुकाल शुरू हो जाएगा, जो अशुभ माना जाता है। इसलिए गणपति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा पूजन के लिए सबसे उत्तम समय 11:05 से 12:22 बजे तक रहेगा।
आप अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार गणपति बप्पा को 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन तक घर में विराजमान रख सकते हैं। यह पूरी तरह से आपकी श्रद्धा, समय और व्यवस्था पर निर्भर करता है। जिस दिन आप विसर्जन करना चाहें, उस दिन विधिवत पूजन और आरती के बाद बप्पा को विदा करें।
गणेश चतुर्थी का व्रत समाप्त करने के लिए व्रती को पहले भगवान गणेश को अर्पित किए गए भोग को ग्रहण करना चाहिए। व्रत खोलने से पहले पूजा करके गणपति बप्पा को भोग लगाना आवश्यक होता है। इस दिन गणेश जी को जिन चीज़ों का भोग लगाया जा सकता है, उनमें प्रमुख हैं – मोदक, मोतीचूर के लड्डू, केले, जामुन, नारियल के लड्डू, तिल-गुड़ के लड्डू, सूजी का हलवा, पंचमेवा, पंचामृत, बेसन के लड्डू और गुड़-चावल की खीर। व्रत खोलते समय इन्हीं में से किसी एक भोग प्रसाद को सबसे पहले ग्रहण करके व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।
गणेश विसर्जन से जुड़ी एक रोचक कथा महाराष्ट्र के चिंचवाड़ गांव से जुड़ी है, जहां करीब 600 वर्ष पहले मोरया गोसावी नाम के एक महान गणेश भक्त का जन्म हुआ था। माना जाता है कि वे स्वयं गणेशजी के अंशावतार थे और उनका जन्म 1375 ई. में वामन भट्ट और पार्वती के घर हुआ था। मोरया बचपन से ही भगवान गणेश की भक्ति में लीन रहते थे और गणेश चतुर्थी के अवसर पर चिंचवाड़ से 95 किलोमीटर दूर स्थित मयूरेश्वर मंदिर तक पैदल यात्रा करते थे। यह सिलसिला उन्होंने 117 वर्षों तक जारी रखा। वृद्धावस्था में जब उनके लिए मंदिर तक जाना कठिन हो गया, तब एक रात उन्हें स्वप्न में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और कहा कि अब तुम्हें मंदिर आने की आवश्यकता नहीं, मैं स्वयं तुम्हारे पास आऊंगा। अगले दिन स्नान के बाद मोरया को कुंड से निकलते ही अपने सामने वही मूर्ति दिखाई दी, जो उन्होंने स्वप्न में देखी थी। उन्होंने उस दिव्य मूर्ति को चिंचवाड़ में स्थापित किया, जो बाद में एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बन गया। यहीं से “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे की परंपरा शुरू हुई, जिससे भक्त और भगवान के बीच की दूरी और भी कम हो गई। मान्यता है कि चिंचवाड़ की गणेश प्रतिमा मयूरेश्वर भगवान के अंश स्वरूप है, इसलिए हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर वहां से मयूरेश्वर मंदिर तक डोली यात्रा निकाली जाती है।