इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 25 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से हो रही है। इसका समापन 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर माना जा रहा है। इस तरह से उदयातिथि के आधार पर 26 अगस्त 2025 को हरतालिका तीज मान्य है।
इस बार शिव-पार्वती की पूजा के लिए कई शुभ संयोग बने हुए हैं, जो ज्योतिष दृष्टि से भी खास है। दरअसल, हरतालिका तीज पर शनि मीन और शुक्र मिथुन राशि में विराजमान होंगे है। इस दौरान दोनों 120 डिग्री पर आकर नवपंचम योग का निर्माण करेंगे। इसके अलावा इस तिथि पर सूर्य अपनी राशि सिंह में रहकर कृपा बरसाएंगे, तो चन्द्र कन्या राशि में संचरण करेंगे। वहीं इस दिन हस्त नक्षत्र का संयोग भी रहने वाला है, जिसके स्वामी चंद्रमा है। ऐसे में ग्रहों की कृपा से कुछ राशि वालों को करियर, व्यापार और रिश्तों में शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती हैं।
हरतालिका तीज शुभ योग
ज्योतिषियों के मुताबिक हरतालिका तीज पर साध्य योग बन रहा है, जो प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 09 मिनट तक है। इसके बाद शुभ योग की शुरुआत होगी। वहीं रवि योग पूरे दिन रहने वाला है। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, गजकेसरी और पंचमहापुरुष जैसे संयोग भी रहेंगे।
हरतालिका तीज पर बन रहे 4 शुभ योग
परंपरा के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत सौभाग्यवती महिलाओं के लिए अखंड सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत उनके पति के लंबे जीवन और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना के साथ रखा जाता है। वहीं अविवाहित कन्याएं इस व्रत को मनचाहा और योग्य वर पाने की कामना से करती हैं। हरितालिका तीज पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि, शोभन, गजकेसरी और पंचमहापुरुष जैसे चार शुभ योग बन रहे हैं।
तीज व्रत में रंगों का महत्व Hartalika Teej Significance
हरितालिका तीज में रंगों का भी विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक शृंगार करती हैं और शुभ रंगों के वस्त्र धारण करती हैं। लाल रंग देवी पार्वती का प्रिय है, जो प्रेम और शक्ति का प्रतीक है। हरा रंग हरियाली और समृद्धि का संकेत देता है, जबकि गुलाबी रंग सौम्यता और आपसी समझ का प्रतीक माना जाता है, विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए जिनके बीच कोई मतभेद हो। इसके विपरीत, काला, नीला, सफेद और क्रीम रंग वर्जित माने जाते हैं।
हरतालिका तीज व्रत कथा Hartalika Teej Katha in Hindi
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार कैलाश पर्वत पर माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि उन्हें ऐसा कौन-सा पुण्य मिला, जिससे वे शिव को पति रूप में प्राप्त कर सकीं। इस पर भगवान शिव ने उन्हें उनकी ही तपस्या की स्मृति दिलाई। माता पार्वती ने बचपन से ही शिव को अपने मन में पति रूप में स्वीकार कर लिया था और इसी संकल्प के साथ उन्होंने 12 वर्षों तक कठोर तप किया। उन्होंने जंगल में रहकर पेड़ों के पत्ते खाए, अन्न का त्याग किया और हर मौसम की कठिनाइयों को सहा। उनके इस तप को देखकर उनके पिता, हिमालय राज चिंतित हो उठे। उसी समय नारद ऋषि भगवान विष्णु का रिश्ता लेकर आए, जिसे हिमालय राज ने स्वीकार कर लिया। जब पार्वती जी को यह बताया गया, तो वे अत्यंत दुखी हुईं और अपने मन की बात सखियों से साझा की। उन्होंने कहा कि वे तो पहले ही भगवान शिव को पति रूप में स्वीकार कर चुकी हैं और किसी और से विवाह नहीं करेंगी। यह सुनकर सखियों ने उनका अपहरण कर लिया और उन्हें एक गुफा में छुपा दिया। वहीं पार्वती जी ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर शिव जी की आराधना की और रातभर जागरण किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। तब से यह व्रत उन महिलाओं द्वारा रखा जाता है जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, और अविवाहित कन्याएं योग्य वर पाने की इच्छा से यह उपवास करती हैं।
हरतालिका तीज पर पूजा मुहूर्त
- हरतालिका तीज पर पहला मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त) सुबह 4 बजकर 27 मिनट से सुबह के 5:12 मिनट तक रहेगा।
- दूसरा (अभिजीत मुहूर्त) सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक मान्य है।
- तीसरा (विजय मुहूर्त) दोपहर में 2 बजकर 31 मिनट से दोपहर 3 बजकर 23 मिनट तक रहने वाला है।
हरतालिका तीज पूजा विधि Hartalika Teej Pujan vidhi
- हरतालिका तीज पर पूजा से पहले सर्वप्रथम मिट्टी से भगवान शिव, देवी पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाएं।
- अब साफ चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और इन मूर्तियों को उसपर स्थापित कर दें।
- इसके बाद शिव परिवार को साफ नए वस्त्र पहनाएं और सभी का तिलक करें।
- शिव जी को फूल, पार्वती जी को सोलह श्रृंगार और गणेश जी को आप दूर्वा अर्पित करें।
- अब सभी के समक्ष फल, मिठाई, चंदन, फूल, पान, सुपारी और नारियल रखें।
- इस दौरान महादेव को सच्चे भाव से बेलपत्र चढ़ाएं।
- फिर आप गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं।
- अब शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं और धूपबत्ती भी जला लें।
- फिर हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ करें।
- अब पूरे शिव परिवार की आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए जरूरतमंदों को दान करें।
हरतालिका शब्द की उत्पत्ति
‘हरतालिका’दो शब्दों से मिलकर बना है-‘हर’का अर्थ है हरण करना और ‘तालिका’का अर्थ है सखी। पौराणिक कथा के अनुसार, जब पार्वतीजी के पिता ने उनका विवाह भगवान विष्णु से करने का निश्चय किया, तो उनकी सखी ने उन्हें घर से हरण कर जंगल में ले जाकर भगवान शिव की तपस्या में लीन होने की प्रेरणा दी। इसी घटना के कारण इस व्रत का नाम हरतालिका तीज पड़ा।
क्यों रखा जाता है हरतालिका तीज का व्रत? Why Do we Celebrate Hartalika Teej
इस तीज पर स्त्रियां निर्जल व्रत रखकर भगवान गणेश एवं शिव-पार्वती का पूजन-अर्चन करती हैं और सुखद दाम्पत्य जीवन एवं परिवार की खुशियों के लिए मंगल कामना करती हैं। अविवाहित कन्याएं इसे मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए और सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और दांपत्य सौभाग्य की वृद्धि के लिए करती हैं।
महिलाएं इस दिन संपूर्ण श्रृंगार करती हैं, सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनकर लोकगीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और रिश्तों के लगाव के इस पर्व को उमंग और उल्लास से मनाती हैं।
व्रत का पौराणिक कथानक
शिवमहापुराण के अनुसार, माता पार्वती ने कई जन्मों तक भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। बाल्यावस्था में ही उन्होंने हिमालय पर्वत पर गंगा तट पर अधोमुखी होकर तप करना शुरू कर दिया। वह केवल सूखे पत्तों का सेवन कर कठोर तप में लीन रहती थीं। एक बार देवऋषि नारद विष्णुजी के विवाह प्रस्ताव के साथ पार्वती के पिता के पास पहुँचे। जब यह बात पार्वतीजी को ज्ञात हुई तो उनकी सखी ने उन्हें वन में जाने की सलाह दी। वहाँ उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाकर भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव की आराधना की। अंततः भगवान शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए और पार्वतीजी को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया।
व्रत के दौरान करें इन विशेष नियमों का पालन
- मान्यता है कि इस दिन महिलाओं को दिन में सोना नहीं चाहिए और रात को भी जागरण शुभ माना जाता है। भजन-कीर्तन करना और भगवान शिव-पार्वती के नाम का जाप करने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
- इस दिन महिलाओं को अपनी मांग खाली नहीं रखनी चाहिए, बल्कि सोलह श्रृंगार करना चाहिए। धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन काले रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनना वर्जित होता है। इसके बजाय हरे और लाल रंग को शुभ माना गया है।
- व्रत के समय पति-पत्नी के बीच किसी प्रकार का विवाद या झगड़ा अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्रत का प्रभाव कम हो सकता है और नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए इस दिन वातावरण को सकारात्मक बनाए रखें।
- महिलाओं को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि वे मासिक धर्म में हों तो हरतालिका तीज का व्रत न करें। अगर मन से संकल्प करना चाहें, तो केवल ध्यान, मंत्र-जाप और मानसिक पूजा करें और पूजा सामग्री को छूने से बचें।
हरतालिका तीज पर पूजा मुहूर्त
- हरतालिका तीज पर पहला मुहूर्त (ब्रह्म मुहूर्त) सुबह 4 बजकर 27 मिनट से सुबह के 5:12 मिनट तक रहेगा।
- दूसरा (अभिजीत मुहूर्त) सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक मान्य है।
- तीसरा (विजय मुहूर्त) दोपहर में 2 बजकर 31 मिनट से दोपहर 3 बजकर 23 मिनट तक रहने वाला है।
हरतालिका तीज पूजन सामग्री (Hartalika Teej Puja Samagri)
हरतालिका तीज पर पूजन के लिए इन सामग्रियों का होना आवश्यक है।
- भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा
- पीले रंग का कपड़ा
- जनेऊ, सुपारी, बेलपत्र, कलश, अक्षत, दूर्वा, घी, दही और गंगाजल
- देवी पार्वती के लिए श्रृंगार के लिए सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, कंघा, मेंहदी और कुमकुम
हरतालिका तीज 2025 चौघड़ियां मुहूर्त (Hartalika Teej Pooja Time)
चर मुहूर्त- सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे तक
लाभ मुहूर्त- सुबह 10:46 बजे से 12:23 बजे तक
अमृत मुहूर्त- दोपहर 12:23 बजे से 01:59 बजे तक
शुभ मुहूर्त- शाम 03:36 बजे से 05:13 बजे तक
चर मुहूर्त- मध्य रात्रि 01:46 बजे से 03:10 बजे तक 27 अगस्त
हरतालिका तीज के दिन करें ये उपाय (Hartalika Teej Upay)
- हरतालिका तीज के दिन विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। पूजा के बाद शिव चालीसा का पाठ करने से मनुष्य के जीवन में चल रही आर्थिक तंगी दूर हो जाती है।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव को पांच आक के फूल चढ़ाने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
- वैवाहिक जीवन में सुख और प्रेम के लिए हरतालिका तीज के दिन गुप्त रूप से भगवान गणेश की पंचोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए और उन्हें दूर्वा और मालपुआ का भोग लगाना चाहिए।
- महिलाएं अपने बच्चों के विकास के लिए भी हरतालिका तीज को उत्साह से मनाती हैं। ऐसे में उस दिन पूजा के बाद गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अलावा शिवलिंग पर 11 बिल्व पत्र भी चढ़ाएं। इससे आपके बच्चे के जीवन में खुशियां आ जाएंगी।
हरतालिका तीज पर राहुकाल में न करें पूजा (Rahu Kaal Time)
हरतालिका तीज पर राशि के अनुसार पहनें इन रंगों की साड़ी
- मेष राशि की महिलाएं हरतालिका तीज पर लाल रंग की साड़ी पहन सकती हैं। यह रंग आपके लिए शुभ साबित हो सकता है।
- वृषभ राशि की महिलाएं पीले रंग की साड़ी पहनें। इससे रिश्तों में मिठास और प्रेम बढ़ता है।
- मिथुन राशि की महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहन सकती हैं। इससे कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ रिश्ते भी बेहतर होते हैं।
- हरतालिका तीज पर राशि के अनुसार पहनें इन रंगों की साड़ी
- मेष राशि की महिलाएं हरतालिका तीज पर लाल रंग की साड़ी पहन सकती हैं। यह रंग आपके लिए शुभ साबित हो सकता है।
- वृषभ राशि की महिलाएं पीले रंग की साड़ी पहनें। इससे रिश्तों में मिठास और प्रेम बढ़ता है।
- मिथुन राशि की महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहन सकती हैं। इससे कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ रिश्ते भी बेहतर होते हैं।
- तुला राशि की महिलाएं आसमानी रंग की साड़ी पहन सकती हैं।
- वृश्चिक राशि वाली महिलाओं को गुलाबी रंग की साड़ी पहननी चाहिए, इससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- धनु राशि की महिलाएं तीज पर्व पर पीले रंग की साड़ी पहनें।
- मकर राशि की महिलाएं नीले रंग की साड़ी पहन सकती हैं। इससे रिश्तों में प्रेम बढ़ता है।
- कुंभ राशि की महिलाएं बैंगनी रंग की साड़ी पहन सकती हैं।
- मीन राशि की महिलाएं हरतालिका तीज पर गुलाबी रंग की साड़ी पहन सकती है। इससे रिश्तों में प्रेम बढ़ता है।
हरतालिका तीज का व्रत कैसे रखा जाता है? (How to do Hartalika Teej Vrat)
- हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
- हरतालिका तीज व्रत के पारण से पहले पानी की एक बूंद भी ग्रहण करना वर्जित है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है।
- व्रत के दिन सुबह-सवेरे स्नान करने के बाद "उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये" मंत्र का उच्चारण करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है।
- अगर व्रत के दौरान सूतक लग जाए तो व्रत रख सकते हैं और पूजा रात में कर सकते हैं।
- इस दिन महिलाएं 24 घंटे से भी अधिक समय तक निर्जला व्रत करती हैं।
- रात के समय महिलाएं जागरण करती हैं और अगले दिन सुबह विधिवत्त पूजा-पाठ करने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं।
- हरतालिका तीज व्रत को सुहागिनों के अलावा कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं।
हरतालिका तीज पर 4 प्रहर में इन चीजों से शिवलिंग का अभिषेक करें
हरतालिका तीज 2025 चार प्रहर पूजा
पहला प्रहर मुहूर्त - शाम 6.00 - रात 9.00
पूजा विधि - शिवलिंग को शुद्ध जल और दूध अर्पित करें।
मंत्र - 'ह्रीं ईशानाय नमः।' का जप करते हुए अभिषेक करें।
भोग - खीर का भोग लगाएं।
महत्व - पहले प्रहर की पूजा से स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
दूसरा प्रहर मुहूर्त - रात 9.00 - रात 12.00
विधि - दही से शिवलिंग का अभिषेक करें।
मंत्र - 'ह्रीं अघोराय नमः।' का जप करें।
महत्व - इससे धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
भोग - हलवा का भोग लगाएं।
तीसरा प्रहर मुहूर्त- रात 12.00 - देर रात 3.00
विधि- घी से शिवलिंग का अभिषेक करें।
मंत्र - 'ह्रीं वामदेवाय नमः।' का जप करें।
महत्व - इसे संतान प्राप्ति के लिए करें।
भोग - मालपुए का भोग लगाएं।
चौथा प्रहर मुहूर्त - देर रात 3.00 - सुबह 6.00 बजे तक
विधि - शिवलिंग पर शहद की धारा बनाकर अभिषेक करें।
मंत्र - 'ह्रीं सद्योजाताय नमः।' का जप करें।
महत्व - इस विधि से पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भोग - मौसमी फल का भोग लगाएं।
हरतालिका तीज पर करें मां पार्वती की आरती Hartalika Teej Mata Parvati Aarti
मां पार्वती की आरती
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।
हरतालिका तीज पर क्यों किया जाता है शृंगार के सामान का दान Hartalika Teej Daan
शास्त्रों के अनुसार तीज में सुहागिन महिलाएं अपने श्रृंगार का दान करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उनका श्रृंगार और सौभाग्य अखंड बना रहेग। साथ ही सदा सुहागन का आशीर्वाद मिलता है। धार्मिक शस्त्रों के अनुसार ये दान ब्राह्मणों को किया जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उनको दान में दिया गया कोई भी सामान या कार्य में भगवान तक पहुंचने के माध्यम होते हैं। उसी प्रकार भगवान को दान देना हो तो ब्राह्मण को दान दिया जाता है।
हरतालिका तीज पर मां पार्वती पर चढ़ाएं ये सोलह श्रृंगार Hartalika Teej 16 Shringar List
- पायल
- नथ
- कान की बाली
- महावर
- मेहंदी
- काजल
- फूलों का गजरा
- बिछिया
- कंगा
- कुमकुम
- बिंदी
- गले के लिए माला
- लाल चुनरी
- चूड़ियां
- इत्र
- सिंदूर
हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती को इन चीजों का लगाएं भोग Hartalika Teej Bhog
फल: फल जैसे केला, सेब, अंगूर, संतरा, आम आदि भगवान शिव और माता पार्वती को बहुत प्रिय हैं।
मिठाई: खीर, मठरी, गुजिया, पेड़ा, बर्फी आदि मिठाईयां भोग के लिए बनाई जाती हैं।
दूध: दूध को शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है।
पान: पान को भी भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।
हलवा: हलवा हरतालिका तीज का विशेष भोग है।
सूखे मेवे: बादाम, काजू, पिस्ता आदि सुखी मेवे भी भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
हरतालिका तीज पर भोग लगाने का सही नियम
- भगवान शिव और माता पार्वती को भोग लगाते समय मन को शुद्ध रखें।
- पूजा करते समय भोग हमेशा साफ-सुथरे बर्तन में ही रखें।
- भोग को भगवान के सामने रखकर आरती उतारें।
- हरतालिका तीज के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं भोग के बाद ही अपना व्रत तोड़ें।
शिव जी की आरती Hartalika Teej Shiv Ji Ki Aarti Lyrics
Jai Shiv Omkara Lyrics
ॐ जय शिव ओंकारा, प्रभु हर शिव ओमकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओमकारा
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे, स्वामी पञ्चानन राजे
हंसासन गरूड़ासन, हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे
ॐ जय शिव ओमकारा
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे, स्वामी दसभुज अति सोहे
तीनो रूप निरखता, तीनो रूप निरखता
त्रिभुवन जन मोहे
ॐ जय शिव ओमकारा
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी, स्वामी मुण्डमाला धारी
त्रिपुरारी कंसारी, कंचन बिन मन चंगा
कर माला धारी
ॐ जय शिव ओमकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे, स्वामी बाघम्बर अंगे
सनकादिक ब्रम्हादिक, ब्रम्हादिक सनकादिक
भूतादिक संगे
ॐ जय शिव ओमकारा
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी, स्वामी चक्र त्रिशूलधारी
जगहर्ता जगकर्ता, जगहर्ता जगकर्ता
जगपालन कारी
ॐ जय शिव ओमकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका, स्वामी जानत अविवेका
प्रानवाक्षर के मध्ये, प्रानवाक्षर के मध्ये
ये तीनो के धार
ॐ जय शिव ओमकारा
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे, स्वामी जो कोइ नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी, कहत शिवानन्द स्वामी
मनवान्छित फल पावे
ॐ जय शिव ओमकारा
जय शिव ओमकारा प्रभु हर शिव ओमकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओमकारा
हरतालिका तीज पर न करें ये कार्य
- हरतालिका तीज व्रत के दौरान महिलाएं गलती से भी क्रोध ना करें, अगर वह ऐसा करती हैं तो उनका व्रत अधूरा माना जाता है।
- हरतालिका तीज का व्रत रखने का संकल्प करने के बाद भूल से भी व्रत नहीं तोड़ना चाहिए ऐसा करने से सौभाग्यशाली स्त्रियों को कई तरह के अशुभ परिणाम मिल सकते हैं।
- हरतालिका तीज के दौरान महिलाओं को अपने मन में किसी तरह का गलत विचार नहीं लाना चाहिए।
- हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है, इस दिन जल या पानी तक ग्रहण नहीं किया जाता है।
- इस दिन काले रंग से परहेज करना चाहिए काले रंग की चूड़ियां और कपड़े नहीं पहनना चाहिए।
- यदि कोई भी कुंवारी या विवाहित महिला एक बार इस व्रत को रखना शुरू कर देती हैं तो जीवनभर यह व्रत रखना ही होता है।
- बीमार होने पर दूसरी महिला या पति इस व्रत को रख सकता है। जिन महिलाओं ने व्रत रखा है उन्हें व्रत नहीं तोड़ना चाहिए, ऐसा करना अशुभ माना जाता है।
हरतालिका तीज पर क्या करें What To Do On Hartalika Teej Vrat 2025
- हरितालिका तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्नान के बाद, व्रती (व्रत रखने वाली) मन में शुद्ध विचारों का संकल्प लें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा के लिए तैयार रहें ।
- पूजा के लिए मिट्टी से बने शिवलिंग, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियों का निर्माण करें या उन्हें किसी विद्वान ब्राह्मण से प्राप्त करें। इन्हें पूजा स्थल पर स्थापित करें और गंगाजल से स्नान कराकर विधिवत पूजा करें।
- विवाहित महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।
- हरितालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के दौरान शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से करना चाहिए।
- हरितालिका तीज की पूजा के बाद हरितालिका तीज व्रत की कथा का श्रवण करना अति आवश्यक है। कथा के माध्यम से माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह की पवित्र कथा सुनाई जाती है, जो इस व्रत का मूल कारण है।
हरतालिका तीज का नाम कैसे पड़ा?
माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु जी के साथ करवाना चाहते थे, जबकि माता पार्वती अपने पति के रूप में भगवान शिव को चाहती थीं। तब उनकी सखियों ने माता पार्वती का हरण कर जंगल में छिपा दिया, जहां सैकड़ों वर्षों तक कठोर जप और तप करने के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न किया और पति स्वरूप में उनको प्राप्त किया।
हरतालिका तीज का उद्यापन कैसे करें (Hartalika Teej Ka Udyapan Kaise Karen )
ज्योतिषविदों के अनुसार हरतालिका तीज व्रत का उद्यापन 13 वर्ष से पहले नहीं किया जा सकता है। माना जाता है कि अगर किसी भी व्यक्ति को हरतालिका तीज व्रत का उद्यापन करना है तो उसे 13 वर्ष तक इस व्रत को करना होगा, उसके बाद ही इस व्रत का उद्यापन किया जा सकता है।
हरतालिका तीज 2025 राशि के अनुसार दान करें ये चीजें
मेष राशि - हरतालिका तीज आप पर लाल रंग की चूड़ियां दान करें। दांपत्य जीवन में प्रेम भाव बढ़ेगा।
वृषभ राशि - हरतालिका तीज पर आप चावल और दूध का दान करें।
मिथुन राशि - मिथुन राशि की महिलाएं इस दिन हरे रंग के वस्त्र का दान करे।
कर्क राशि - हरतालिका तीज के दिन चांदी, सुहाग की सामग्री दान करने से मुसीबतें कम होती हैं।
सिंह राशि - सिंह राशि की महिलाओं को हरतालिका तीज पर फल और श्रृंगार की चीजें दान करनी चाहिए।
कन्या राशि - भगवान शिव की कृपा पाने के लिए खीरे का दान करना चाहिए।
तुला राशि - हरतालिका तीज पर जरूरतमंदों को अन्न का दान करें। इससे ग्रहों के दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं।
वृश्चिक राशि - इस दिन गरीब और असहाय लोगों को धन का दान जरूर करना चाहिए।
धनु राशि - हरतालिका तीज पर बेसन, चने की दाल और पीले रंग के वस्त्र का दान करना चाहिए।
मकर राशि - मकर राशि की स्त्रियों को इस दिन सुहागिनों को चूड़ियां, साड़ी दान करनी चाहिए।
कुंभ राशि - जिन लड़कियों की शादी में बाधा आ रही है उन्हें हरतालिका तीज के दिन नारियल का दान करना चाहिए।
मीन राशि - मीन राशि की महिलाओं को इस दिन केला और सुहाग सामग्री का दान करना चाहिए।
गणेश जी का मंत्र
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरूमे देव, सर्व कार्येषु सर्वदाः।।
भगवान शिव का मंत्र
ॐ नम: शिवाय
ॐ महेश्वराय नमः
ॐ पशुपतये नमः
माता पार्वती का मंत्र
ॐ पार्वत्यै नमः
ॐ उमाये नमः
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
मां पार्वती को सिंदूर चढ़ाने का मंत्र
सिंदूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्।
शुभदं कामदं चैव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्।।
हरतालिका तीज पर शिव पार्वती की प्रतिमा
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हरतालिका तीज पर क्यों बनाते हैं मिट्टी के शिवलिंग ?
माता सती ने देह त्यागने के बाद हिमवान और हेमावती के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। मां पार्वती ने भगवान शंकर को पाने के लिए कठिन तप किया था। इसके लिए उन्होंने अपने बाल्यकाल में ही घोर तप प्रारंभ कर दिया था। इस बात को लेकर उनके माता पिता बड़े चिंतित भी रहते थे। पार्वती जी ने सभी से कह दिया था कि वह सिर्फ महादेव को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी और किसी को नहीं। फिर एक सखी की सलाह पर पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की आराधना की। अंत में भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था। तभी से इस दिन मिट्टी के शिवलिंग बनाकर पूजा करने और व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है।
हरतालिका तीज
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हरतालिका तीज पर अपनी राशि के अनुसार करें ये उपाय
- मेष राशि के लोग हरतालिका तीज पर शिवलिंग की पूजा करें। इस दौरान आप गंगाजल से अभिषेक करें। इसके प्रभाव रिश्तों में चल रही समस्याएं दूर होती हैं।
- वृषभ राशि की महिलाएं शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें। यह आपके लिए लाभकारी उपाय हो सकता है।
- मिथुन राशि की महिलाएं हरतालिका तीज पर देवी पार्वती को हरे रंग की चूड़ियां चढ़ाएं। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।
- कर्क राशि की महिलाएं तीज के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। फिर रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें। इससे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
- सिंह राशि की महिलाएं महादेव की विधि-विधान से पूजा करें। फिर आप शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाएं। इससे घर में सकारात्मकता का वास बना रहता है।
- कन्या राशि की महिलाएं गरीब और असहाय लोगों को धन का दान करें। इससे शिव-पार्वती की कृपा जीवन पर बनी रहती है।
- तुला राशि की महिलाएं तीज पर पंचामृत से अभिषेक करें। इससे मानसिक शांति की प्राप्ति होती है और तनाव कम होता है।
- वृश्चिक राशि की महिलाएं पशु-पक्षियों को भोजन खिलाएं। यह उपाय आपके लिए शुभ रहेगा, जिसके प्रभाव से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती है।
- धनु राशि की महिलाएं पूरे विधि-विधान से शिव-पार्वती की उपासना करें। साथ ही सच्चे भाव से दान-दक्षिणा जैसे शुभ काम करें।
- मकर राशि की महिलाएं तीज पर शिवलिंग पर काले तिल चढ़ा सकती हैं।
- कुंभ राशि वाले तीज के दिन हरी चीजों का दान करें। इससे जीवन में प्रेम बढ़ता है।
- मीन राशि की महिलाएं हरतालिका तीज के दिन व्रत कथा का पाठ करें। इससे रिश्तों में समझ बढ़ती हैं।
हरतालिका तीज पर करें ये काम
- हरतालिका तीज के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, घी, शहद और गुड़ अर्पित करें। इससे सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- इस दिन पूरे परिवार के साथ शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें। इससे संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- तीज के दिन आप हरे रंग की चूड़ियां देवी को चढ़ाएं। इससे प्रेम जीवन मधुरमय और मनचाहा साथी पाने की कामना पूरी हो सकती हैं।
व्रती इन बातों का रखें ध्यान
- हरतालिका तीज पर व्रत के अगले दिन सुबह पूजा के बाद जल पीकर व्रत खोलने का विधान है।
- यदि कोई भी कुंवारी या विवाहित महिला एक बार इस व्रत को रखना प्रारंभ कर देती हैं तो उसे जीवन भर यह व्रत रखना ही होता है।
- इस व्रत में महिलाओं को रातभर जागरण करना होता है और जागकर मिट्टी के बनाए शिवलिंग की अष्ट प्रहर अनुसार पूजा करना होती है और रातभर जागकर भजन-कीर्तन या जप किया जाता है।
- हरतालिका तीज व्रत कथा को सुनना जरूरी होता है। मान्यता है कि कथा के बिना इस व्रत को अधूरा माना जाता है।
राशि अनुसार मंत्रों का करें जाप
- मेष- ॐ ह्रीं क्लीं नमः शिवाय
- वृषभ- ॐ पार्वत्यै नमः
- मिथुन- ॐ नमः शिवाय
- कर्क- ॐ गौरीशंकराय नमः
- सिंह- ॐ उमेश्वराय नमः
- कन्या- ॐ शिवगौर्यै नमः
- तुला- ॐ महादेवाय नमः
- वृश्चिक- ॐ पार्वतीपतये नमः
- धनु- ॐ शंकराय नमः
- मकर- ॐ हर हर महादेव
- कुंभ- ॐ गौरीशंकराय नमः
- मीन- ॐ उमापतये नमः
हरतालिका तीज पर ग्रहों का संयोग
हरतालिका तीज पर शनि मीन और शुक्र मिथुन राशि में विराजमान है। इसके अलावा यह दोनों 120 डिग्री पर आकर नवपंचम योग का निर्माण कर रहे हैं। वहीं सूर्य अपनी राशि सिंह में रहकर कृपा बरसाएंगे, तो चन्द्रमा कन्या राशि में संचरण कर रहे हैं। हस्त नक्षत्र का संयोग भी इस तिथि पर बना हुआ है।
हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त 2025 (Hartalika Teej Puja Muhurat 2025)
हरतालिका तीज पर पूजन का प्रदोष काल मुहूर्त शाम 06 बजकर 49 मिनट से शाम 07 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
हरतालिका तीज 2025
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हरतालिका तीज पर इन राशियों को मिल सकता है विशेष लाभ
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए समय शुभ रहेगा। हरतालिका तीज के मौके पर आपको लगभग हर क्षेत्र में शुभ संकेत मिल सकते हैं। सरकारी योजना में इन्वेस्टमेंट करना भी आपके लिए लाभकारी रहेगा। बिजनेस करने वालों को खासतौर पर व्यापार विस्तार और वेतन वृद्धि का अवसर मिल सकता है।
सिंह राशि
राजनीति से जुड़े लोगों को विशेष फायदा मिल सकता है। हालांकि नौकरीपेशा लोगों की आय में वृद्धि होने से उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर रहने वाली है। कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय शुभ और संतुलित रहेगा। रिश्तों में प्रेम का संचार आपके मन को प्रसन्न रखेगा।
मीन राशि
मीन राशि वालों को विवाह के कुछ अच्छे प्रस्ताव प्राप्त होंगे। निवेश से अच्छा खासा रिटर्न मिलेगा। वाहन ले सकते हैं। घर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। इस दौरान आपका कोई पुराना लेनदेन चुकता होगा।
हरतालिका तीज पर शाम के समय क्या करें ?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक हरतालिका तीज पर शाम के समय मंडप सजाकर शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए। साथ ही भजन, कीर्तन, पाठ व गीत-जागरण जैसै शुभ काम करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं।
हरतालिका तीज की पूजा सामग्री
पूजा में पंचामृत, मिठाई, फल, फूल, नारियल, कपूर, कुमकुम, सुपारी, सिंदूर, अबीर, चन्दन, लकड़ी की चौकी, पीतल का कलश, साथ ही कर्पूर, अगरु, केसर, कस्तूरी और कमल के जल, आम, गन्ने का रस, सुहाग के 2 पिटारा, भोग, प्रसाद, गुड़, घी कई तरह की पत्तियां आदि सामग्री होती है।
पूजा विधि
- हरतालिका तीज पर पूजा से पहले सर्वप्रथम मिट्टी से भगवान शिव, देवी पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाएं।
- अब साफ चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और इन मूर्तियों को उसपर स्थापित कर दें।
- इसके बाद शिव परिवार को साफ नए वस्त्र पहनाएं और सभी का तिलक करें।
- शिव जी को फूल, पार्वती जी को सोलह श्रृंगार और गणेश जी को आप दूर्वा अर्पित करें।
- अब सभी के समक्ष फल, मिठाई, चंदन, फूल, पान, सुपारी और नारियल रखें।
- इस दौरान महादेव को सच्चे भाव से बेलपत्र चढ़ाएं।
- फिर आप गणेश जी को मोदक का भोग लगाएं।
- अब शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं और धूपबत्ती भी जला लें।
- फिर हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ करें।
- अब पूरे शिव परिवार की आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए जरूरतमंदों को दान करें।
हरतालिका तीज व्रत कथा
हरतालिका तीज हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसके प्रभाव से महिलाओं को पति की लंबी उम्र और उनका जन्मों-जन्मों के साथ का आशीर्वाद मिलता है। इस व्रत को देवी-पार्वती और उनकी तपस्या से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा की मानें तो देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहते हैं कि माता पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या बाल्यावस्था में हिमालय पर्वत पर गंगा तट की थी। इस दौरान वह केवल सूखे पत्तों का सेवन किया करती थी और इसी में अपनी तप में लीन रहती थीं। फिर एक समय की बात है जब देवर्षि नारद भगवान विष्णु के विवाह प्रस्ताव लेकर देवी पार्वती के पिता के पास पहुचे। यहां आकर देवऋषि नारद जी ने भगवान विष्णु के विवाह प्रस्ताव की बात की। इस दौरान यह बात देवी पार्वती को पता चली और वह इसकी चर्चा अपनी सखी से की। इसके बाद सखी ने उन्हें वन में जाने की सलाह दी। इसके बाद देवी वन में आ गई और उन्होंने रेत से शिवलिंग बनाकर भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव की आराधना की।माना जाता है कि देवी की भक्ति से प्रसन्न महादेव प्रकट हुए और पार्वती जी को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। तभी से ऐसी मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया पर हरतालिका तीज का व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही सभी इच्छाएं भी पूरी होती हैं।
हरतालिका तीज पर करें इन मंत्रों का जाप
पति के दीघार्यु के लिए मंत्र
नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
हरतालिका तीज पर कन्याएं इस मंत्र का करें जाप
मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए
हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा माम कुरु कल्याणी कांतकांता सुदुर्लाभाम्।।
Shiv Ji Ki Aarti
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शिव जी की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
मां पार्वती की आरती
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं
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चंदन की खुशबू, बादलों की फुहार
आप सभी को मुबारक हो हरतालिका तीज का त्योहार
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएं
हरतालिका तीज व्रत का पारण कब किया जाएगा?
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व्रत पारण का समय
पंचांग के मुताबिक इस वर्ष हरतालिका तीज के व्रत का पारण 27 अगस्त को होगा। इस दिन सुबह 5 बजकर 57 मिनट पर सूर्योदय होगा, जिसके बाद आप व्रत का पारण कर सकती हैं।
पारण में क्या खाएं ?
व्रत का पारण करते समय मीठा खाने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि मीठे से ही पारण करना चाहिए। इससे जीवन में मधुरता और सकारात्मकता आती है। इसलिए व्रत खोलते समय खीर, हलवा, सेवई, लड्डू, मालपुआ या मिठाई जैसे प्रसाद का सेवन करना चाहिए।