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Chhath Puja 2025: अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का तीसरा दिन संपन्न, जानिए छठ पर्व का महत्व

Mon, 27 Oct 2025 06:10 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Chhath Puja 2025 Sandya Argya Time Subh Muhurat Live Updates in Hindi: आज देशभर में लोक आस्था का महापर्व छठ का त्योहार मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व होता है। यह चार दिनों तक चलता है, जिसमें तीसरे दिन का विशेष महत्व होता है। जहां पर संध्या अर्घ्य देकर सूर्य उपासना और छठी मईया की पूजा होती है। इस दिन व्रती घाट पर एकत्रित होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। पंचांग के अनुसार आज सूर्यास्त शाम 05 बजकर 40 मिनट पर होगा।
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Chhath Puja 2025 Sandhya Arghya - फोटो : adobe
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विस्तार
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छठ पूजा का तीसरा दिन आज- संध्या अर्घ्य

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हिंदू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व होता है। यह त्योहार हर वर्ष दीपावली के छठवें दिन मनाया जाता है। छठ पूजा का उत्सव चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से होती है और समापन शुक्ल पक्ष सप्तमी को होता है। छठ पर्व के तीसरे दिन यानी कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को शाम के समय सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन शाम को बांस की टोकरी में कई तरह के फल, ठेकुआ और चावल के लड्डू को एकत्रित करते हैं। फिर सूप में इसे सजाया जाता है। इसके बाद शाम को सूर्यास्त पर व्रती अपने परिवार के सदस्यों के साथ सूर्य को अर्घ्य देते हैं। अर्घ्य के समय सूर्यदेव को दूध, जल और गंगाजल अर्पित करते हैं। साथ ही प्रसाद से भरे सूप से छठी मैया की पूजा की जाती है। दीपक जलाकर सूर्यदेव और छठी मईया की आरती करते हुए गीत गाया जाता है व्रत कथा सुनी जाती है। 

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Chhath Puja Wishes: छठ पर्व की शुभकामनाएं

Happy Chhath Puja 2025 Wishes - फोटो : अमर उजाला
आज छठ महापर्व है। हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर छठ पूजा का त्योहार मनाया जाता है। इस तिथि पर सूर्य के अस्त होने पर अर्घ्य देने की परंपरा होती है। छठ पूजा चार दिनों का पर्व होता है। छठ पर्व पर व्रती 36 घंटे तक चलने वाले निर्जला उपवास में सूर्यदेव की उपासना और छठ मैया की पूजा करने विशेष महत्व होता है। छठ पर्व पक दोस्तों, रिश्तेदारों और परिजनों को छठ की शुभकामनाएं भेजी जाती है। 

छठ का व्रत देता संतान को दीर्घायु का वरदान
ये छठ आपके जीवन में भी लाए उमंग अपार।
उल्लास और खुशियां हो जीवन में सदा बरकरार
मुबारक हो आपको छठ का पावन त्योहार

सूरज की पूजा, जल की धार,
छठ का त्योहार लाए खुशियों की बहार।
छठ मईया का आशीर्वाद मिलें बार-बार,
हर मन में हो उमंग, हर घर में प्यार।
छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

गेहूं का ठेकुआ, चावल के लड्डू,
खीर, अन्नानास, नींबू और कद्दू,
छठी मैया करे आपकी हर मुराद पूरी।
छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

मंदिर की घंटी, आरती की थाली
नदी के किनारे सूरज के लाली,
जिंदगी में आएं खुशियों की बहार,
शुभ हो छठ के त्योहार

Chhath Puja 2025: आज षष्ठी तिथि पर छठ पूजा

आज सूर्योपसना का सबसे बड़ा त्योहार छठ पूजा का पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार षष्ठी तिथि का आरंभ आज यानी 27 अक्तूबर को सुबह 06 बजकर 04 मिनट तक है। इस तिथि का समापन 28 अक्तूबर 2025 को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर होगा। 

Chhath Puja 2025 :जानिए छठ पर्व का महत्व

हिंदू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व होता है। लोक आस्था का महापर्व छठ चार दिनों तक चलता है। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन छठ पूजा का खास दिन होता है जिसमें छठी मईया की पूजा और डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है, जिसे संध्या अर्घ्य कहते हैं। इसके बाद चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटों तक चलने वाले निर्जला व्रत का पारण होता है।

सूर्यदेव की आराधना और छठा मईया का पावन छठ महापर्व आज, जानिए महत्व, विधि और नियम


 

Chhath Puja 2025: आज छठ पूजा का संध्या अर्घ्य का समय

आज देशभर में छठ पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। छठ पूजा के तीसरे दिन संध्या अर्घ्य का होता है। आज के दिन व्रती घाट पर अपने परिवार के सदस्यों संग किसी पवित्र नदी के किनारे आकर शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देती हैं और छठी मईया की पूजा करती है। पंचांग के अनुसार आज सूर्यास्त का समय 05 बजकर 40 मिनट का है। इस दौरान सभी व्रती अस्त होते सूर्यदेव की पूजा और अर्घ्य देती हैं। 

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chhath puja 2025: संध्या अर्घ्य का महत्व

छठ पर्व पर सूर्यदेव और उनकी बहन छठी माता की पूजा-आराधना होती है। छठ पर्व चार दिनों तक चलता है जिसमें तीसरे दिन छठ पूजा का सबसे खास दिन माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं किसी पवित्र नदी या तालाब में खड़े होकर अस्त होते सूर्यदेव और छठी माता को जल और दूध अर्पित करते हुए उनको बांस के सूप में मौसमी फल, सब्जियां और ठेकुआ अर्पित करती हैं। छठ पर्व पर व्रती करीब 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं। 

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Chhath Puja 2025: छठी माई से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

  1. - छठी माता को ब्रह्राा जी की मानस पुत्री माना जाता है।
  2. - छठी माता को देवी दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी का रूप भी माना जाता है। 
  3. - छठी माता को सूर्य देव की बहन माता माना गया है। ऐसे में छठ पर्व पर सूर्यदेव के साथ छठ माता की पूजा करने का विधान होता है।
  4. - धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छठ माता को संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। इस कारण से संतान की लंबी आयु, बेहतर सेहत और सौभाग्य की कामना के लिए छठ पूजा का खास महत्व होता है। 
  5. - सबसे पहले छठ का व्रत बिहार में देवी सीता, कुंती और द्रौपदी ने किया था। जिसके कारण इनके जीवन में आने वाले सभी तरह के कष्ट दूर हो गए थे। 

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Chhathi Maiya Aarti Lyrics in Hindi: छठ पूजा में छठी मईया की आरती का महत्व

छठी मईया की आरती 

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

अमरुदवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

Chhath Puja 2025: छठ पर्व में इन फलों को जरूर करें शामिल

छठ पूजा सामग्री - फोटो : amar ujala
छठ पर्व में डूबते और उगते सूर्य दोनों को ही अर्घ्य देने का खास महत्व होता है। छठ पर्व का तीसरा दिन यानी संध्या अर्घ्य सबसे खास दिन होता है जिसमें डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठी माता को फल, फूल और ठेकुआ अर्पित किया जाता है। छठ पूजा में इन पांच फलों को जरूर शामिल करना चाहिए- केला, अनानास, नींबू, डाभ,गन्ना और सिंघाड़ा।

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Chhath Puja 2025: छठ पूजा पर सूर्य उपासना का महत्व

आज बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में लोक आस्था का महापर्व छठ मनाया जा रहा है। सूर्यउपासना का सबसे बड़ा दिन छठ का त्योहार होता है। भविष्य पुराण के अनुसार श्री कृष्ण ने सूर्य को संसार के प्रत्यक्ष देवता बताते हुए कहा है कि इनसे बढ़कर दूसरा कोई देवता नहीं है। सम्पूर्ण जगत इन्हीं से उत्पन्न हुआ है और अंत में इन्हीं में विलीन हो जाएगा। जिनके उदय होने से ही सारा संसार चेष्टावान होता है एवं जिनके हाथों से लोकपूजित ब्रह्मा और विष्णु तथा ललाट से शंकर उत्पन्न हुए हैं।

सूर्योपनिषद के अनुसार सूर्य की किरणों में समस्त देव, गंधर्व और ऋषिगण निवास करते हैं। सूर्य की उपासना के बिना किसी का कल्याण संभव नहीं है,भले ही अमरत्व प्राप्त करने वाले देवता ही क्यों न हों।

स्कंद पुराण में सूर्य को अर्घ्य देने के महत्व पर कहा गया है कि सूर्य को बिना जल अर्घ्य दिए भोजन करना भी पाप खाने के समान है और सूर्योपासना किए बिना कोई भी मानव किसी भी शुभकर्म का अधिकारी नहीं बन सकता है।
 

Chhath Puja 2025: पुराणों में सूर्य पूजा का महत्व

सूर्योपासना का लोकपर्व छठ, छइठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। छठी मैया के इस त्योहार को साल में दो बार मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले इस त्योहार को चैती छठ कहा जाता है और कार्तिक शुक्लपक्ष की षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ त्योहार को कार्तिकी छठ कहा जाता है।

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर नहाय-खाय के साथ छठ पर्व का आरंभ होता है और अगले चार दिनों तक यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत कर के संतान प्राप्ति और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। छठ पर्व पर सूर्य को अर्घ्य देकर और छठ मईया की पूजा और आरती करके आभार व्यक्त किया है।
 

Chhath Puja Rules 2025: छठ पूजा के नियम

छठ पूजा कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। यह चार दिनों तक चलते है जो दिवाली के बाद छठे दिन मनाया जाता है। इस व्रत में व्रती 36 घंटों तक निर्जला व्रत करते हुए विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। छठ पूजा के दौरान शुद्धता, स्वच्छता का खास ध्यान रखा जाता है। छठ पर्व के दौरान प्याज, लहसुन और मांस का सेवन नहीं करना चाहिए। व्रती को मिट्टी या फिर कांसे के बर्तनों में ही प्रसाद तैयार करना चाहिए। छठ पूजा की सामग्री में फल और बांस की टोकरी को जरूर शामिल करना चाहिए। 

Chhath Puja 2025 : छठ पूजा 2025 का कैलेंडर

  • छठ पूजा पहला दिन (नहाय खाय)- 25 अक्टूबर 2025
  • छठ पूजा दूसरा दिन (खरना)- 26 अक्टूबर 2025
  • छठ पूजा तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य)- 27 अक्टूबर 2025
  • छठ पूजा चौथा दिन (उषा अर्घ्य)- 28 अक्टूबर 2025

Chhath Puja 2025 Sandhya Arghya Time: छठ पूजा पर आज संध्या अर्घ्य का समय 

छठ पूजा के तीसरे दिन का विशेष महत्व होता है। इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य और छठी मईया की पूजा करने का विधान होता है। पंचांग के अनुसार छठ पूजा का संध्या अर्घ्य का समय 27 अक्तूबर सोमवार को शाम 5 बजकर 10 मिनट लेकर शाम 05 बजकर  48 मिनट तक रहेगा।

Chhath Puja Ka Saman Ka List: छठ पूजा के लिए पूजन सामग्री

आज छठ पूजा का पर्व है। शाम को जैसे ही सूर्यदेव अस्त होंगे उनको दूध और जल से अर्घ्य अर्पित करते हुए उनकी पूजा उपासना और छठी मैया की गीत और कथा सुना जाएगा। लेकिन उसके पहले छठ पूजा के लिए सभी तरह के पूजन की सामग्रियों को एक जगह एकत्रित कर लेना चाहिए। आइए जानते हैं छठ पूजा में किन-किन चीजों की जररूत होगी। 
  • व्रती और परिवार के लिए नए कपड़े
  • दो बड़ी बांस की टोकरियां (डावरी) -प्रसाद रखने के लिए
  • सूप
  • सूर्य देव को अर्घ्य देने हेतु बांस या पीतल का बर्तन
  • अर्घ्य के लिए दूध और गंगाजल रखने वाला गिलास, लोटा और थाली
  • पानी से भरा नारियल
  • पांच पत्तेदार गन्ने के तने
  • चावल, गेहूं और गुड़
  • 12 दीपक, अगरबत्ती, बत्तियां, कुमकुम और सिंदूर
  • केले का पत्ता (पूजन स्थल सजाने के लिए)
  • फलों में केला, सेब, सिंघाड़ा, शकरकंद, सुथनी (रतालू), अदरक का पौधा
  • हल्दी की गांठें और सुपारी
  • शहद और मिठाइयां
  • गंगाजल और दूध (अर्घ्य व स्नान हेतु)
  • प्रसाद में बनाने के लिए ठेकवा, गुड़ और गेहूं के आटे की सामग्री

Chhath Puja 2025 Sandhya Arghya Time: कब है संध्या अर्घ्य का समय 

Chhath Puja 2025 - फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा का पर्व भगवान सूर्य देव और छठी मईया को समर्पित होता है। यह त्योहार चार दिनों का होता है। छठ पूजा मुख्य रूप से महिलाएं अपनी संतान और परिवार की लंबी आयु और सुख -समृद्धि के लिए करती हैँ। छठ पूजा का तीसरा दिन मुख्य रूप से निर्जला व्रत रखते हुए अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। यह एकमात्र त्योहार है जिसमें अस्त होते हुए सूर्यदेव की पूजा और उनको अर्घ्य देने की परंपरा होती है। फिर अगले दिन सूर्योदय पर अर्घ्य देकर व्रत का पारण होता है। 

आज सूर्यास्त का समय- शाम 05 बजकर 40 मिनट पर 


 

Chhath Puja Story In Hindi: जानिए क्या है छठ पूजा की कथा ?

आज देशभर में छठ पूजा का उत्सव मनाया जा रहा है। छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। षष्ठी तिथि के दिन जब सूर्य अस्त होता है, तब डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत पूर्ण किया जाता है। इस अवसर पर विधि-विधान से पूजा कर छठी मैया की कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है। यहां पढ़ें:  छठ पूजा की पूरी कथा


 

Chhath Puja 2025: छठ पर्व पर सूर्यास्त और सूर्योदय पर अर्घ्य देने का महत्व

छठ पर्व चार दिनों तक चलता है जिसमें तीसरे दिन का खास महत्व होता है। इस दिन को संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। ऐसे में आज शाम सूर्य को अर्घ्य दिया जात है। जिसमें व्रती निर्जला व्रत रखते हैं। इस दिन प्रसाद में ठेकुआ अर्पित किया जाता है। शाम को सूर्यास्त पर सूर्यदेव को अर्घ्य और छठी मैया की पूजा का विधान होता है। फिर चौथे दिन यानी सप्तमी तिथि पर सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण होता है। 

आज सूर्यास्त पर अर्घ्य का समय- शाम 05 बजकर 40 मिनट पर 


Chhath Puja Evening Arag Time: आज शाम इतने बजे दें सूर्यदेव को अर्घ्य

आज छठ महापर्व है। आज सूर्यास्त के समय सूर्य देव और छठी मैइया की पूजा-आराधना का खास महत्व होता है। छठ पूजा के तीसरे दिन व्रती पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को जल चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही सूप में पूजन सामग्री को रखकर छठी मईया की पूजा की जाती है फिर कथा और आरती की जाती है। आज शाम को सूर्यास्त का समय 05 बजकर 40 मिनट तक है। इस मुहूर्त में संध्या अर्घ्य का मुहूर्त है। 

आज सूर्यास्त पर अर्घ्य का समय- शाम 05 बजकर 40 मिनट पर 

Suryast Time Today: देश के प्रमुख शहरों में आज सूर्यास्त का समय 

दिल्ली- शाम 05 बजकर 40 मिनट पर

नोएडा- शाम 05 बजकर 40 मिनट पर 

पटना- शाम 05 बजकर 11 मिनट पर 

लखनऊ- शाम 05 बजकर 27 मिनट पर 

गोरखपुर- शाम 05 बजकर 18  मिनट पर 

आगरा- शाम 05 बजकर 18 मिनट पर 

गाजियाबाद- शाम 05 बजकर 39 मिनट पर 

मेरठ- शाम 05 बजकर 37 मिनट पर 

रांची- शाम 05 बजकर 13 मिनट पर 

प्रयागराज- शाम 05 बजकर 25 मिनट पर 

देवघर- शाम 05 बजकर 06 मिनट पर 

सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय जाप करें ये मंत्र

छठ महापर्व पर उगते और डूबते हुए सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व होता है। छठ महापर्व पर सूर्यदेव को अर्घ्य देते हुए मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए।  तांबे के लोटे में जल, रोली, लाल फूल, चावल और शक्कर डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय "ॐ घृणि सूर्याय नमः" या "आदित्याय नमः" मंत्र का जाप करें।
 

Chhath Puja 2025: लंबा सिंदूर सुखी दांपत्य और पति की लंबी उम्र का प्रतीक

छठ पूजा के दौरान सुहागिन महिलाएं नाक से लेकर मांग तक लंबा सिंदूर भरती हैं। इसे पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान महिलाएं लाल की बजाय नारंगी रंग का सिंदूर लगाती हैं। इसका कारण यह है कि नारंगी रंग सूर्य का प्रतीक है और छठ पर्व सूर्य की उपासना का पर्व है। इसलिए नारंगी सिंदूर लगाने से सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही यह माना जाता है कि सुहागिन महिला का जितना लंबा सिंदूर होगा, उसका दांपत्य जीवन उतना ही लंबा और सुखी होगा।

Chhath Puja 2025: छठ पर्व पर न करें ऐसी गलतियां

  • जब तक सूर्यास्त न हो जाए उसके पहले अर्घ्य न दें।
  • सूर्यदेव को अर्घ्य देने से पहले कुछ भी ग्रहण न करें। 
  • प्रसाद की शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • अर्घ्य के समय को नजरअंदाज न करें। 

Chhathi Maiya Aarti Lyrics: छठ पूजा में छठी मईया की आरती

छठी मईया की आरती 
जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

अमरुदवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

ऊ जे सेववा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए ॥जय॥

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मंडराए ॥जय॥

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ॥जय॥

chhath puja morning arag time 2025: छठ पर्व का चौथा दिन- उषा अर्घ्य का समय

चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व का आखिरी दिन उषा अर्घ्य के साथ संपन्न होता है। इस दिन व्रती महिलाएं अपने घर के पास स्थिति किसी पवित्र नदी या तलाब पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद छठ माता से संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि, लंबी आयु और पूरे परिवार की सुख-शांति का आशीर्वाद मांगा जाता है। फिर थोड़ा प्रसाद खाकर व्रत को पूरा करती हैं, जिसे पारण या परना कहा जाता है।

28 अक्तूबर 2025 को उषा अर्घ्य का समय: सूर्योदय का समय : 06:30
 
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chhath puja arghya time 2025: छठ पूजा का सूर्य अर्घ्य का शुभ मुहूर्त

आज यानी 27 अक्तूबर को अस्त होते होते सूर्य को अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त शाम 04 बजकर 50 मिनट लेकर शाम 05 बजकर 41 मिनट तक। 
 
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