जयपुर में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आवास पर गहमागहमी का माहौल देखने को मिला। विधायक प्रताप सिंह सिंघवी और गोपीचंद मीणा भी 13 सिविल लाइंस पहुंचे। वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री बनाने के सवाल पर विधायक गोपीचंद मीणा ने कहा कि हमारी और जनता की यही जन भावना है कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाए। वसुंधरा राजे के नेतृत्व में मेवाड़ में अपार जनसमर्थन मिला है। वहीं, विधायक बहादुर सिंह कोली ने भी वसुंधरा राजे को सीएम बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता की मांग है वसुंधरा राजे को ही सीएम बनाना चाहिए। हम उनको मजबूत करने के लिए आए हैं। विधायक दल की बैठक में भी हम अपनी बात रखेंगे। मनोहरपुर थाना विधायक गोविन्द रानीपुरिया, किशनगंज से ललित मीणा, अंता से कंवरलाल मीणा, बारां से राधेश्याम बैरवा और डग से कालूलाल मीणा भी सिविल लाइंस पहंचे। इसके साथ ही गुढ़ा मलानी से विधायक केके विश्नोई, पुष्कर से विधायक सुरेश रावत और बांदीकुई से विधायक भागचंद टाकड़ा भी आवास पर पहुंचे।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हुई हार को लेकर वरिष्ठ नेता सचिन पायलट का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि हार पर जयपुर और दिल्ली में मंथन करेंगे। मेरा मानना है कि इस हार पर मंथन होना जरूरी है। वहीं, लोकसभा चुनावों को लेकर भी उन्होंने कहा कि मैं हमेशा ही कांग्रेस कार्यकर्ता रहा हूं। मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी उसका हर संभव निर्वहन करूंगा। पायलट ने आगे कहा कि सीएम के ओएसडी का बयान मैंने भी देखा है, उस पर भी पार्टी को मंथन करना जरूरी है।
राजस्थान विधानसभा का चुनावी रण जीतने के बाद भाजपा अब आगे की तैयारी में जुट गई है। भाजपा ने जबरदस्त मुकाबले में शानदार जीत हासिल की है। पार्टी के सभी सदस्यों ने जबरदस्त मुकाबला किया तो वहीं कुछ सीटें ऐसी भी रहीं, जहां पार्टी के प्रत्याशी भरोसा नहीं जीत पाए। ऐसी ही एक सीट रही बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट। शिव विधानसभा सीट पर भाजपा अपने ही बागी से मात खानी पड़ी।
बता दें बाड़मेर की शिव विधानसभा सीट पर चतुष्कोणीय मुकाबला था। इस वजह से ये सीट भी हॉट सीट के रूप में देखी जा रही थी। यहां से भारतीय जनता पार्टी ने स्वरूप सिंह खारा को उतारा था तो वहीं कांग्रेस से अमीन खान मैदान में थे। इसके अलावा इस सीट की खास बात ये रही कि यहां दो निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से एक प्रत्याशी फतेह खान ने निर्दलीय मैदान में थे। वहीं, दूसरे निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा के ही बागी छात्र नेता रविंद्र सिंह भाटी थे।
बता दें कि भाटी के नाम पर शुरू से ही मुकाबला रोचक हो गया था। जब से वह चुनाव मैदान में उतरे तभी से उनकी जीत का दावा किया जाने लगा था, और हुआ भी ऐसा ही। छात्र नेता रविंद्र सिंह भाटी ने भाजपा-कांग्रेस को जबरदस्त मात देते हुए तीन हजार वोटों के अंतर से ये जीत हासिल की। 2018 के चुनाव में शिव विधानसभा सीट पर कांग्रेस के अमीन खान ने जीत हासिल की थी। उन्हें 84 हजार से अधिक वोट मिले थे।
जबरदस्त मुकाबले में शानदार जीत के बाद भाजपा में जश्न का माहौल है। अब भाजपा में सरकार बनाने की तैयारी को लेकर मंथन शुरू होगा। इस जश्न के साथ ही पार्टी के लिए सीएम चेहरा भी एक बड़ा सवाल है। सीएम चेहरे को लेकर भी पार्टी में जबरदस्त होड़ है। अब देखना है कि इतने सारे चेहरों में पार्टी किसको मौका देती है। जानकारी के अनुसार आज नए मुख्यमंत्री को लेकर दिल्ली में मंथन की तैयारी हो रही है। खबर है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जोशी आज दिल्ली रवाना हो रहे हैं। अधिकांश दिग्गज नेताओं के दिल्ली जाने की बात सामने आ रही है। साथ ही जीते हुए विधायकों को मंगलवार को जयपुर पहुंचने के निर्देश जारी किए गए हैं। फिलहाल अभी आधिकारिक रूप से विधायक दल की बैठक का एलान नहीं हुआ है।
इनमें से कौन
राजस्थान में मुख्यमंत्री चेहरे के लिए कई बड़े नाम चर्चा में शामिल है। मुख्यमंत्री के लिए काफी होड़ मची हुई है। ऐसे में इतने सारे नाम में एक नाम का चयन करना पार्टी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहेने वाल है। राजस्थान भाजपा में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर वसुंधरा राजे, दीयाकुमारी, गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुनराम मेघवाल, सीपी जोशी, अश्वनी वैष्णव, बाबा बालकनाथ, ओम बिरला, ओम माथुर, प्रकाश चंद, भूपेंद्र यादव, सुनील बंसल के नाम फिलहाल चर्चा में हैं।
राजस्थान विधानसभा के चुनावी रण में बहुमत से जीत हासिल करने के बाद भाजपा में जश्न का माहौल है। भाजपा की इस जीत से ये तो साफ हो गया है कि राजस्थान में अभी भी कई वर्षों पुराना हार-जीत का रिवाज आज भी कायम है। इस चुनावी रण में भाजपा ने जबरदस्त मुकाबले में शानदार जीत हासिल की है। पार्टी के सभी सदस्यों ने जबरदस्त मुकाबला किया है। अब भाजपा में सरकार बनाने की तैयारी को लेकर मंथन शुरू होगा। सीएम चेहरे को लेकर भी पार्टी को जबरदस्त होड़ है। अब देखना है कि इतने सारे चेहरों में पार्टी किसको मौका देती है। वहीं कांग्रेस में करारी हार के बाद आपस में सिर फुटव्वल शुरू हो गया है। गहलोत के चेहरे और सरकार की योजनाओं को लेकर कांग्रेस ने जीत का जो दम भरा था वो बेकार हो गया।