बाबा महाकाल की द्वितीय सवारी के दौरान आज पालकी में भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर ने भक्तों को दर्शन दिए। वहीं हाथी पर भगवान श्री मनमहेश विराजमान रहे। बाबा महाकाल के ये दोनों मुखौटे एक जैसे हैं जिनके दर्शन करने से एक समान फल की प्राप्ति होती है। जो श्रद्धालु पालकी में भगवान के दर्शन नहीं कर पाते उन्हें हाथी पर विराजमान श्री मनमहेश के दर्शन करने से भी पुण्य लाभ अर्जित होता है।
बाबा महाकाल की सवारी के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मित्र मंडलियों से भी मिले। इस दौरान उन्होंने सिर पर मुकुट पहना जिसमें ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संदेश था। वहीं लाडली बहना को लेकर भी संदेश दिया। स्वामी मुस्कुरा के मित्रमंडली के पंडित दिनेश रावल और पं मोहित गुरु सीएम के साथ नजर आए।
सवारी के दौरान आज पुलिस बैंड ने प्रस्तुति दी, जो कि आकर्षण का केंद्र रही। बाबा महाकाल की पालकी के आगे-आगे पुलिस बैंड चला ।
बाबा महाकाल की द्वितीय सवारी के रामघाट पर पहुंचने पर बाबा महाकाल के चंद्रमोलेश्वर स्वरूप का पूजन अर्चन किया गया। इस दौरान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। जिन्होंने पंडित आशीष गुरु के आचार्यत्व में बाबा महाकाल का पूजन अर्चन कर आरती की जिसके बाद यह सवारी फिर नगर भ्रमण के लिए रवाना हो गई।
बाबा श्री महाकाल की सवारी में 8 जनजातीय कलाकारों के दल सहभागिता कर रहे हैं। कलाकारों द्वारा झाबुआ का भगोरिया नृत्य, महाराष्ट्र के नाशिक का जनजातीय सौगी मुखोटा नृत्य , गुजरात जनजातीय राठ नृत्य , राजस्थान का गैर और घूमरा जनजातीय नृत्य प्रस्तुत किया गया। |
बाबा महाकाल की दूसरी सवारी के दौरान आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव डमरू बजाते हुए देखे गए तो वहीं उपमुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ल ने झांज बजाई। नगरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय व प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल तालियां बजाते हुए देखे गए। कुल मिलाकर सवारी के दौरान सभी बाबा महाकाल की भक्ति में लीन दिखाई दिए।
मुख्यमंत्री ने सभा मंडप में बाबा महाकाल का पूजन अर्चन किया। इस दौरान मंदिर के शासकीय पुजारी पंडित घनश्याम पुजारी द्वारा पूजन अर्चन करवाया गया। पूजन अर्चन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के साथ उपमुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ल, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, निगम सभापति कलावती यादव मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव व अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
भगवान श्री महाकालेश्वर चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में रजत पालकी में बैठे जबकि मनमहेश स्वरूप ने गजराज पर सवारी की। भगवान दोनों स्वरूप में प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर शाम 4 बजे निकले। श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का विधिवत पूजन-अर्चन किया। पूजन के बाद सवारी में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ल और भाजपा के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए।
आठ जनजातीय एवं लोक नृत्य कलाकारों के दल सहभागिता करेंगे
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप बाबा श्री महाकालेश्वर की सवारी को भव्य स्वरूप देने के लिए आठ जनजातीय कलाकारों का दल श्री महाकालेश्वर भगवान की दूसरी सवारी में सहभागिता करेगा। इसमें अज्जू सिसोदिया के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में झाबुआ का भगोरिया नृत्य, छवीलदास भावली के नेतृत्व में नाशिक महाराष्ट्र के जनजातीय सौगी मुखोटा नृत्य, बनसिंह भाई गुजरात जनजातीय राठ नृत्य, खेमराज राजस्थान का गैर-घूमरा जनजातीय नृत्य सम्मिलित है। यह सभी दल श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी के साथ सम्पूर्ण सवारी मार्ग में अपनी प्रस्तुति देते हुए चलेंगे। इन दलों के अतिरिक्त ओडिशा के लोकनृत्य शंख ध्वनि सुनील कुमार साहू के नेतृत्व में व छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य लोकपंथी का दल दिनेश कुमार जागड़े के नेतृत्व में श्री महाकालेश्वर भगवान के सवारी के आगमन पर रामघाट पर प्रस्तुति दी जाएगी।
Ujjain Mahakal Sawari Today Live : ऐसा रहेगा सवारी मार्ग
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने बताया कि सवारी परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होती हुई रामघाट पहुंचेगी। जहां मां क्षिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुन: श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
Ujjain Mahakal Sawari Today Live: पुजारी महेश गुरु ने कही ये बात
पुजारी महेश गुरु ने बताया कि दोनों मुखारविंद एक समान होते हैं। ऐसे में जिन श्रद्धालुओं को पालकी में विराजित महाकाल राजा के दर्शन नहीं हो पाते, वे हाथी पर सवार महाकाल के दर्शन करके भी समान पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। दुर्भाग्यवश, अधिकतर श्रद्धालुओं को इस बात की जानकारी नहीं होती और वे केवल पालकी की ओर ध्यान केंद्रित करते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंध समिति इस विषय का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार करे, जिससे श्रद्धालुओं को यह जानकारी मिल सके।
श्रावण-भाद्रपद मास के दूसरे सोमवार को भगवान श्री महाकालेश्वर की भव्य सवारी आज परंपरागत रूप से नगर भ्रमण पर निकलेगी। इस अवसर पर भगवान श्री महाकालेश्वर चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में रजत पालकी में, जबकि मनमहेश स्वरूप में गजराज पर सवार होकर अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर शाम 4 बजे प्रस्थान करेंगे। सवारी से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगवान चंद्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन करेंगे। इसके पश्चात भगवान पालकी में विराजमान होकर मंदिर से बाहर निकलेंगे, जहां मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवान उन्हें सलामी देंगे। प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक ने जानकारी दी कि सवारी परंपरागत मार्ग — महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर माँ क्षिप्रा नदी के पवित्र जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन संपन्न होगा।
इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर लौटेगी। सवारी के दौरान पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं। यह आयोजन श्रद्धा, परंपरा और भक्ति का अद्वितीय संगम होगा, जिसमें लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी।