झांकियों के साथ शहर के प्रमुख अखाड़ों की प्रस्तुतियां भी हो रही हैं। इनमें महिलाओं और पुरुषों के साथ बच्चे भी जबरदस्त करतब दिखा रहे हैं। कृष्णपुरा छत्री से लेकर पूरे झांकी मार्ग पर अखाड़ों के करतब चर्चा का विषय हैं। पहलवानों के साथ महिलाओं और बच्चियों ने भी शस्त्र कला और पारंपरिक करतब दिखाकर लोगों को आश्चर्य में डाला।
कृष्णपुरा छत्री पर निर्णायक मंच लगाया गया है। निर्णायक कमेटी के सदस्य अंकों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ झांकियों को तय करेंगे। इसके अलावा अखाड़ों को भी तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। इस बार प्रशासन अखाड़ों को नकद राशि के पुरस्कार भी देगा। अखाड़ों को प्रस्तुति के लिए तीन मिनट का समय दिया जा रहा है।
झांकी के चल समारोह में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेता मौजूद हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भजनों की प्रस्तुति देते हुए चल रहे हैं, उनके साथ भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय भी मौजूद हैं।
झांकी के चल समारोह में पेपर लीक, शिक्षा अधिकार, शिक्षा में ईमानदारी के पोस्टर भी नजर आए। जब नारायण उस्ताद व्यायम शाला का अखाड़ा निर्णायक मंच के समीप पहुंचा तो अखाड़े के तीन पहलवान पोस्टर लेकर मंच के सामने खड़े हो गए। जिस पर वे मुद्दे उठाए गए, जो दिल्ली में जेन जी के आंदोलन में नजर आए थे। पेपर लीक, शिक्षा का अधिकार सहित अन्य बातों का जिक्र पोस्टरों पर था। अखाड़े के पहलवानों ने तीन मिनट तक बनेठी घुमाई और शस्त्र कला का प्रदर्शन किया। तब तक पोस्टर अखाड़े में लहराते गए। कुछ सदस्यों की नजर पोस्टरों पर भी पड़ी। बाद में ये पोस्टर पूरे चल समारोह में अखाड़े के पहलवानों ने हाथ में थामे रखे।
रात 9 बजे झांकियों का कारवां अपने सबसे सुंदर दौर में पहुंच गया है। लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है और अखाड़ों के पहलवान भी उत्साह से लबरेज नजर आ रहे हैं। झांकियों के आसपास बच्चे, बुजुर्गों, महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा है।
अखाड़ों ने रोमांचक करतब दिखाए। शहर के प्रमुख अखाड़ों ने झांकियों में प्रदर्शन के लिए एक महीने से भी ज्यादा समय तक अभ्यास किया। अखाड़ों में युवा, बुजुर्गों के साथ बालिकाओं ने भी खूब करतब दिखाए। झांकी देखने आए लोगों के लिए अखाड़ों के करतब सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रहे।
झांकियों के कारवां में नगर निगम की झांकी सबसे अधिक सुर्खियां बटोरती दिखी। नगर निगम ने इस बार जेन जी पर आधारित झांकी बनाई। इसमें युवाओं को स्कूल जाते दिखाया गया। साथ में गणेशजी की मूर्ति रखी और देशभक्ति और संस्कारों से ओतप्रोत चित्रों को सजाया गया।
इस बार अनंत चतुर्दशी पर झांकियों और अखाड़ों के लिए निर्धारित समय का अनिवार्य रूप से पालन कराने पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए मंचों के समक्ष अखाड़ों को निर्धारित समय में ही अपना प्रदर्शन पूरा करना होगा। निर्णायक मंच के समक्ष निर्धारित समय से अधिक प्रदर्शन करने पर निगेटिव मार्किंग और अंक काटे जाने की व्यवस्था भी रहेगी।
झांकियों के आने के चलते पोलोग्राउंड क्षेत्र में लंबा जाम लग रहा है। ट्रैफिक पुलिस जाम खुलवाने का प्रयास कर रही है। शाम के 7 बजे बड़ी संख्या में लोग दफ्तरों और दुकानों से घरों की ओर जाते हैं। शाम 7 बजे से 9 बजे तक ट्रैफिक जाम की संभावना सबसे अधिक बनी रहती है। झांकियों के कारण पुलिस ने कई मार्गों के ट्रैफिक को भी डायवर्ट किया है। कुछ रास्तों पर अधिक वाहन आने के कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
झांकी मार्ग पर वाहनों के लिए प्रवेश बंद कर दिया गया है। शनिवार सुबह सात बजे तक मार्गों पर वाहनों की नो एंट्री रहेगी। पूरे झांकी मार्ग पर दो हजार से ज्यादा पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस जवानों ने मिल परिसरों में भी मैदान संभाल लिया है, ताकि वे समय पर झांकी संचालकों पर झांकियां निकालने के लिए दबाव बना सकें।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने खजराना गणेश की झांकी का पूजन किया। पहले क्रम पर यही झांकी रहेगी। इसके पीछे मिल, नगर निगम, विकास प्राधिकरण व अन्य संस्थाओं की झांकियां रहेंगी। ज्यादातर झांकियां डीआरपी लाइन में आकर कतार में खड़ी हो चुकी हैं। झांकी रूट पर बैरिकेड लगाकर ट्रैफिक रोक दिया गया है। राजवाड़ा, जवाहर मार्ग, कृष्णपुरा, एमजी रोड, स्वदेशी मिल, मालवा मिल की तरफ से वाहन आ-जा नहीं सकेंगे। पुलिस झांकियों में शामिल वाहनों को चलाने वाले चालकों की भी जांच कर रही है कि वे शराब पीकर वाहन तो नहीं चला रहे हैं।
इंदौर की सड़कों पर आज रात झांकियों की भव्य परंपरा जीवंत होगी। श्रमिक क्षेत्र और शहर के मध्य हिस्से से अखाड़ों के साथ 22 झांकियां निकलेंगी, जो राजवाड़ा और गोराकुंड का चक्कर लगाकर वापस मिल परिसरों की ओर लौटेंगी। थोड़ी देर में झांकियों का कारवां निकलना शुरू होगा। अभी से लोग इंदौर की सड़कों पर नजर आने लगे हैं। बच्चे-महिलाएं भी बढ़-चढ़कर इसमें शामिल होते हैं।
103 साल पहले इंदौर में मिल श्रमिकों ने झांकियां निकालने की परंपरा शुरू की थी, जो अब उत्सव का रूप ले चुकी है। अब से कुछ ही देर में इस उत्सव में लोग जुटने लगेंगे। सूरज ढलते ही झांकियां सड़कों पर होंगी और उन्हें निहारने के लिए लाखों लोग घरों से निकलेंगे। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। श्रमिक क्षेत्र की तरफ जाने वाले रास्तों का ट्रैफिक दूसरे मार्गों पर डायवर्ट कर दिया गया है।
बता दें कि हुकुमचंद मिल गणेश उत्सव का यह 103वां वर्ष है। मिल चालू थी, तब सभी श्रमिक, कर्मचारी और अधिकारी अपना एक दिन का वेतन देते थे और गणेश महोत्सव पर्व मनाते थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इंदौर की सभी कपड़ा मिलें बंद हो गईं, लेकिन परंपरा नहीं टूटी। जनसहयोग से धार्मिक झांकियों का निर्माण श्रमिक करते हैं। नगर निगम, इंदौर विकास प्राधिकरण और खजराना मंदिर के अलावा अन्य संस्थाओं की झांकियां भी इसमें हिस्सेदारी करती हैं। रात से सुबह तक दस घंटे झांकियां सड़कों पर रहेंगी। लगभग पूरी रात इंदौर की सड़कों पर हजारों-लाखों लोग इन झांकियों का कारवां निहारने जुटेंगे। चल समारोह के बाद तीन दिन तक झांकियां मिल परिसरों में खड़ी रहेंगी और लोग इन्हें देखने आएंगे।