सवालः लखनऊ में आप होस्टल में रहे। यहां से जुड़ी सबसे खूबसूरत याद कौन सी थी? आप होस्टल छोड़कर भी चले गए थे। वह क्या वजह थी?
रैनाः तब बहुत रैगिंग होता थी। किसी भी इंस्टीट्यूट में किसी भी स्पोर्ट्स के कल्चर में रैगिंग नहीं होनी चाहिए। वो मुश्किल था, क्योंकि कभी रहे नहीं परिवार से दूर, मम्मी पापा से दूर तो मेरे लिए मुश्किल था। तो जब मैं घर गया तो पापा ने कहा कि आपने ही कहा था कि आपका सपना है भारत के लिए खेलना, लेकिन अब आप वापस आ गए। तो मुझे थोड़ा निराशा हुई कि परिवार ने मुझे इतना समर्थन दिया और फिर मैंने वापसी की। जैसे लक्ष्य मूवी में ऋतिक रोशन ने वापसी की, मैंने भी ठीक वैसी ही वापसी की।
संवाद के मंच पर पहुंचे कवि मनोज मुंतशिर
अमर उजाला संवाद के मंच पर गीतकार एवं कवि मनोज मुंतशिर पहुंच गए हैं। वह 'राष्ट्रवाद पर सवाल क्यों?' सत्र पर अपने विचार रखेंगे।
संवाद के मंच पर व्हाइट ओक कैपिटल मैनेजमेंट के ईडी और सीईओ आशीष पी. सोमैया
कोटक म्यूचुअल फंड के प्रबंध निदेशक, नीलेश शाह और व्हाइट ओक कैपिटल मैनेजमेंट के ईडी और सीईओ आशीष पी. सोमैया अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। वह बाजार: क्या करें, क्या न करें सत्र पर अपने विचार साझा करेंगे।
हां मैं देखता हूं, क्योंकि मैं जो जीवन में काम कर रहा हूं। मैंने सपना देखा था तो मुझे गाइड करने वाले बहुत कम लोग थे। गलतियां होंगी इसकी संभावना बहुत ज्यादा थीं। ऐसे में एक ही रास्ता था कि मुड़-मुड़े के देख, ताकि पता चले कि पिछले तीन महीने में क्या किया। पिछले छह महीने में ऐसा क्या हुआ कि ग्रोथ नहीं हो रही। उसका मुझे बहुत फायदा मिला। बचपन से एक कंडीशनिंग रही है परिवारों में कि अपनी कमियों को छिपाएइए। अगर मोजा फटा है तो एक बच्चा बचपन से ही उसे छिपाकर रखता है। घर की बैठक एकदम चकाचक रखने की कोशिश होती है, बेशक घर का हाल बेकार हो। मेरा कहना है कि खोल दो, परदा हटा दो।
'फिल्म में एक शख्स हैं, वो इंग्लैंड से हैं। उन्होंने जनरल डायर का रोल किया है। बहुत इमोशनल रोल था फिल्म का। जनरल डायर कहता है, 'मैंने ऐसा क्या खास कर दिया। सारे कीड़े-मकौड़ों को मारा। सीन खत्म होने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि अमित क्या हमने सही में ऐसा किया है। मैंने उन्हें कहा कि आपने ऐसा नहीं किया आप परेशान मत होइए'। अगर आप लोगों को कभी मौका मिले तो उनकी हिस्ट्री पढ़िएगा। वो थोड़े से मेंटल डिसऑर्डर से ग्रसित थे। वो ऐसे आदमी थे, जिनका बचपन बहुत गंदा गुजरा था। उसने वो भड़ास बड़े होकर हिंदुस्तानियों पर निकाल दी, लेकिन उन्हें नहीं निकालनी चाहिए थी। ऐसी फिल्में करने का अपना मजा है'।
संवाद का अलग सत्र है "सिनेमा का बदलता दौर", इस सत्र में अभिनेता अमित सियाल यहां पहुंचे हैं। एक्टर ने कहा, 'आप इंसान को कानपुर से निकाल सकते हो। उसके अंदर से कानपुर नहीं निकाल सकते हो। कानपुर मेरा जन्मस्थान है। वहां पला-बढ़ा है। यहां पैदा हुआ तो हिंदी भी अच्छी है। अपने जन्मस्थान से आपकी बहुत सारी यादें जुड़ी होती हैं। आप वहां बड़े हुए हैं। मैं कानपुर और कानपुरियों का बहुत आभारी हूं'।
इस सवाल पर पाठक ने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि अपने अस्पतालों को डाउन द लाइन हम देखें और ऐसे देखें कि ये न लगे कि विजिट घोषित है। जब घोषित विजिट होती है तो प्रशासन लग जाएगा, पुलिस खड़ी हो जाएगी, चूना डालेंगे, दरी बिछाएंगे। हमें भैया कुछ नहीं चाहिए हम साधारण कार्यकर्ता हैं और प्रदेश की जनता ने मुझ पर भरोसा किया है तो अपने मरीजों को किस तरह से दवा मिल रही है ये मैं खुद जाकर देखूंगा। इसमें कोई भी आरोप लगाए मैं स्वीकार करता हूं कि मैं औचक निरीक्षण के लिए जाता हूं और भी अधिक जाऊंगा। अभी मैं चार दिन पहले अयोध्या के दौर पर गया था, रुदौली एक छोटा सा कस्बा है, उसके पास में एक छोटा सा अस्पताल था। लोग सोच रहे थे कि इतने छोटे अस्पताल में मैं नहीं जाऊंगा। मैं गया नीचे बहुत अच्छा था, ओपीडी चल रही थी लेकिन जब मैंने कहा बेड दिखाओ ये तो 30 बेड का अस्पताल है तो एक भी बेड नहीं मिला मुझे। चार बेड बगैर गद्दे के पड़े थे। हमने जांच बैठाई और कड़ी कार्रवाई करूंगा। कोई भी किसान अगर खेत की मेड़ पर सुबह नहीं जाता है तो खेती उसके बस की बात नहीं है। इसलिए मैं अपने अस्पतालों को जिम्मेदार हूं और मैं जाऊंगा।
इस सवाल पर पाठक ने कहा कि हमारे पास दवाई की कोई कमी नहीं है। आज हमने एक एप डेवलप किया है। जो डॉक्टर स्टोर से दवाई उठाएगा, हम मानते हैं वो ही मरीज देख रहा है तो हमारे स्टोर को हमने ऑनलाइन किया है, जो हमारे औषधी कक्ष हैं, पहले लखनऊ से सप्लाई होती थी, हर जिले में हमने औषधी कक्ष बनाए हैं, स्टोर रूम, गोदाम बनाए हैं, हम वहां से सप्लाई करते हैं, जो डॉक्टर रेगुलर दवाई ले जा रहा है हम मानते हैं यही मरीजों को देख रहा है, बाकियों को हम नोटिस देते हैं। मेरे पास जो आंकड़े हैं, उनमें दवाइयों की कमी नहीं है।
आप ये सवाल उनसे पूछिए कि उन्होंने किस यादव जी को काम दिलाया था और वो यादव जी बीच में काम छोड़कर क्यों भाग गए। उनसे पूछिए और न हो तो उनको मेल कर दीजिए किस टाटा कंपनी को आपने काम दिया था। काम किसने दिलाया था, मुख्यमंत्री आवास में बैठक हुई थी और टाटा कंपनी पर दवाब डालकर काम लिया गया था। आप टाटा कंपनी के उस मैनेजर का इस मंच पर इंटरव्यू कीजिए और दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
इस सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि हमारे पास पैसे से अधिक महत्व इंफ्रास्ट्रक्चर का है। मान लीजिए आपने पैसे रखे हुए हैं, आपके पास दाल-चावल है, प्रेशर कुकर बनाने के लिए नहीं है तो क्या करोगे। पहले तो हम डॉक्टर बनाएंगे। फिर भवन बनाएंगे। फिर उसके बाद पैसे खर्च करेंगे। जिस गति से स्वास्थ्य का इंफ्रास्ट्रक्चर उत्तर प्रदेश में बढ़ा है, तुलनात्मक अध्यन 2017 से पहले की और आज की करें तो आप मानेंगे कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आमूलचूल परिवर्तन हेल्थ सेक्टर में किया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा अगर आप कोई कंपनी शुरू करते हैं तो क्या पहले दिन से ही वो टॉप पर हो जाती है क्या? अगर अमर उजाला का प्रकाशन 1948 में शुरू हुआ और आज अमर उजाला समाचार जगत में वट वृक्ष है। अब आप बताइए 1948 में क्या स्थिति रही होगी जरा बताइए मुझे? आप देश की जनता से जानिए। जब कोई बच्चा कंसीव होता है तो 9 महिने में उसको जन्म मिलता है, फिर धीरे-धीरे बड़ा होता है। क्या कोई भी शुरूआत भी नहीं करेगा। समाजवादी पार्टी की सोच क्या है कि केवल 17 ही मेडिकल कॉलेज स्टेट में हो या 12 ही मेडिकल कॉलेज स्टेट में हो। किसी को तो आगे आना पड़ेगा और जहां तक संसाधनों की बात है पहले से लाख गुना बेहतर संसाधन पूरे प्रदेश में हैं। समाजवादी पार्टी के शासन काल में, मैं तो आरोप लगाना नहीं चाहता लेकिन आपने छेड़ा है तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि प्रदेश की जनता को खुद मौके पर जाकर प्रदेश में देखना चाहिए, जौनपुर मेडिकल कॉलेज की चर्चा उन्होंने की अच्छा हुआ उन्होंने हमें मुद्दा दे दिया। आप इसको जरूर समाचार पत्र में लेना, जौनपुर मेडिकल कॉलेज समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में शुरू हुआ। टाटा को काम मिला, टाटा को जबरदस्ती किसको काम दिलाया ये उनसे पूछिए और वो ठेकेदार बीच में से छोड़कर भाग गया। हमने एसआईटी बनाई और कैबिनेट से अतिरिक्त पैसे स्वीकृत कराकर काम पूरा करा रहे हैं। ये जनता के पैसों को लूटने के लिए प्रोजेक्ट लाते थे, हम प्रदेश की जनता के हित के लिए प्रोजेक्ट लाते हैं।
इस सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि लोगों को पता नहीं है, जो समाजवादी पार्टी के लोग हैं या अन्य इस प्रकार की जो चर्चा चलाते हैं, हम 60 और 40 के आधार पर काम करते हैं। 60 फीसदी भारत सरकार देती है, 40 फीसदी हम देते हैं। जो भी प्रोजेक्ट भारत सरकार हमें पैसा भेजती है, उसके लिए 40 फीसदी धनराशि हम आरक्षित ऑलरेडी हम बजट में रखते है और ये सभी केंद्रीय योजनाओं में होता है। ये वो पैसा है जैसे ही केंद्र सरकार से पैसा आता है, हम अपना 40 फीसदी बजट उसमें मिलाकर काम शुरू कर देते हैं। आज आयुष्मान आरोग्य योजना में नौ हजार करोड़ रुपये का पेमेंट यूपी सरकार ने उन मरीजों के लिए किया है जिनको पांच लाख तक के निशुल्क इलाज के लिए गारंटी दी है। ये 40 फीसदी पैसे वही हैं जो हम अपने सुरक्षित अपनी निधि में रखते हैं।
मेडिकल कॉलेज कोई पॉकेट में रखी हुई चीज नहीं होती। मेडिकल कॉलेज पूरी दुनिया देख रही है, एमबीबीएस की सीटें तीन गुना हुई हैं और इन सीटों को उत्तर प्रदेश सरकार क्रियेट नहीं करती है। नीट की परीक्षा होती है और पूरे देश में एक साथ होती है, हमने इसकी संख्या में तीन गुना की बढ़ोत्तरी की है।
उत्तर प्रदेश की बदलती सेहत सत्र में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि 2017 के बाद से अब तक यूपी का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से बदल गया है। सबसे पहले मैं मेडिकल एजुकेशन की तरफ आऊंगा। जब 2017 में हमें काम करने का अवसर मिला, हमारे पास 12 मेडिकल कॉलेज सरकारी क्षेत्र में थे। निजी क्षेत्र में भी कुछ मेडिकल कॉलेज थे। हमारे सामने सबसे पहले ये चुनौती थी कि चिकित्सकों की तैनाती और उनकी उपलब्धता। पूरे देश के पैमाने पर इस बात की चर्चा है कि चिकित्सकों की भारी कमी थी। लेकिन मैं कह सकता हूं, 2017 से आदरणीय प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हर जिले में मेडिकल कॉलेज बने उस दिशा में हमारी सरकार ने गंभीर काम किया है। आज 2017 से तुलना की जाए तो आज 80 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं और यह कार्य मात्र 8 वर्षों में हुआ। कुछ जिले बचे हैं उन पर भी हम प्रदेश की जनता के समक्ष जाने वाले हैं पीपीपी मोड पर, हमने टेंडर कर दिया है और एग्रीमेंट भी कर दिया है।
प्रो. राजीव ने बताया कि साढ़े चार लाख से अधिक शिक्षकों को एआई का प्रशिक्षण दिया गया है, जो बच्चों को पढ़ाने के लिए तैयार हैं। इनमें से कुछ शिक्षक बच्चों को एआई पढ़ा भी रहे हैं। इसके अलावा, आईआईटी, एनआईटी से करार किया गया है। शिक्षक यहां जाकर फिजिकल रूप से रहते हैं। आईआईटी, एनआईटी के शिक्षक इन प्रशिक्षकों को तैयार कर रहे हैं कि अपने कोर ब्रांच में एआई को लाया जा सकता है।
तकनीकी शिक्षा में एआई पर फोकस किया जा रहा है। वहीं, स्कूली स्तर पर भी एआई पढ़ाया जा रहा है। हर विषय और पाठ्यक्रम को एआई से इंटीग्रेट कर दिया गया है। हालांकि, इसमें एक बड़ी चुनौती यह थी कि एआई पढ़ाने वाले शिक्षक उपलब्ध नहीं थे। हालांकि, अब लाखों शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
उन्होंने कहा एनईपी लागू होने के बाद से ही हमने तकनीकी शिक्षा की जरूरतों को समझा। इसके लिए आईआईटी, एनआईटी और आईआईएससी जैसे संस्थानों की कमेटी बनाकर छात्रों की जरूरतों और करिकुलम में संशोधनों पर चर्चा की गई। इसका नतीजा यह हुआ कि आज छात्र उच्च कोटि की तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि भारत ने चीन से भी पहले अपनी स्कूली शिक्षा में उनको एआई पढ़ाया जाता है। एआई पढ़ना स्कूल में इनोवेशन सिखाना, एआई का प्रयोग करते हुए वो किस तरह से इनोवेशन करते हैं। जहां तक उच्च शिक्षा का सवाल है, कोई ऐसा करिकुलम नहीं है, कोई ऐसा विषय नहीं जिसको एआई से इंटीग्रेट न किया गया हो।
प्रो. राजीव कुमार ने एआई पर बात करते हुए कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि एआई इंटीग्रेट तो कर दिया, लेकिन उसे पढ़ाएगा कौन...? टीचर्स की ट्रेनिंग कैसे होगी? इसी चैलेंज को समझते हुए टीचर्स को ट्रेंड किया गया। पिछले चार वर्षों में करीब 4.50 लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है, जो इमर्जिंग एरियाज़ में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
तकनीकी शिक्षा के नए आयाम सत्र में एआईसीटीई के सचिव प्रो. राजीव कुमार ने कहा कि देश में करीबन तीन हजार इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) इन कॉलेजों को रेगुलेट करता है। जब से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 लागू हुई है। उससे पहले से ही एआईसीटीई ने अपने इंजीनियरों को क्योंकि इंडस्ट्रीज का हमेशा एक आरोप रहा है कि मोस्ट ऑफ दा इंजीनियर्स दे आर नोट एम्प्लॉयमेंट। हमने इस चीज को समझा। इंडस्ट्रीज को अपने साथ बैठाया। देश के आईआईटी, एनआईटी और आईआईसी जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों को बुलाकर एक कमेटी बनाई। जिसने ये समझा की हमारी तकनीक क्षेत्र में पढ़ने वाले छात्रों की आवश्यकताएं क्या है?
किस तरीके से उनको करिकुलम को रिवाइज किया जा सकता है। आज की तारीख में जो करिकुलम देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में चल रहा है वो विश्व का अति उत्तम करिकुलम है। इसमें स्किल्स, इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज, एआई, एमएल रोबोटिक्स और जितनी भी नई-नई तकनीक थी, उनका समावेश किया गया है। इसको समावेश करने के बाद ये करिकुलम देश के सभी संस्थानों में चल रहा है। आज इसका परिणाम ये हुआ कि हमारा एम्प्लॉयमेंट रेट काफी बढ़ा है। देश के संस्थानों से 60 फीसदी छात्र कैंपस प्लेसमेंट से प्लेसमेंट पा रहे हैं।
एआई पर बोलते हुए विज ने कहा कि यह डर सही है कि एआई आपकी जॉब ले लेगा। अगर आप अपने आपको एआई के लिए प्रशिक्षित नहीं करें तो आपके बिजनेस में भी दिक्कत आएगी। आपकी जॉब में भी दिक्कत आ जाएगी। आप सबको यह जानना है कि आप एआई का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं। आप एआई से बड़ी से बड़ी कंपनी बना सकते हैं। आप दो से तीन महीने के समय में एआई सीख सकते हैं। भारत की बात करें तो हमें इस तकनीक पर बहुत काम करना पड़ेगा। नहीं तो हमें पेट्रोल की तरह एलएलएम के लिए भी भुगतान करना पड़ेगा। बायजू प्रकरण पर विज ने कहा कि नजर हटी दुर्घटना घटी। कैश फ्लो से नजर हटी दुर्घटना घटी। कॉरपोरेट गवर्नेंस से नजर हटी दुर्घटना घटी।
शेयर बाजार में जारी गेनसोल (ब्लूस्मार्ट) प्रकरण पर विज ने कहा कि हर क्लास में शरारती बच्चा होता है। हर ग्रुप में एक ऐसी एंटटी होती है, जहां पर आपको बैड एक्टर्स मिल जाते हैं। यह मामला कुछ ऐसा ही है।
उन्होंने कहा कि जब कोई नया बिजनेस शुरू करता है तो शुरुआत में आइडिया कुछ और होता है और आगे चलकर वह पहुंचता कहीं और है। यहां इमानदारी के अलावा एक और फीचर है वह है उसमें सुनने की क्षमता होनी चाहिए। उन्हें एब्जॉर्ब करनी चाहिए। उद्यमियों को अपने अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। असफलता के बाद उद्यमी को उससे निकलने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसे ही लोग सफल होते हैं जो सुनते हैं, एब्जॉर्ब करते हैं और प्रयोग करते हैं। उद्यमियों में छोटे बाजार से बड़ा बाजार ढूंढने का जज्बा होना चाहिए। उद्यमियों को व्यापार में अपना दृष्टिकोण बदलते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरे करियर में कुछ फैसले सही भी रहे और कुछ सही नहीं भी रहे।
देश के वाणिज्य मंत्री के बयान के बाद शुरू हुए विवाद पर विज ने कहा कि मोदी जी और गोयल जी हमारे मेंटर हैं। उनकी स्पीच में उन्होंने जो कहा उन्हें एनकरेज मानना चाहिए। उनकी स्पीच के अंदर कहीं न कहीं एक उत्साहवर्धन छिपी हुई है। शायद वे कह रहे हैं कि हमें और तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। हमारे स्टार्टअप भी एक इवेलुएशन के दौर से गुजर रहे हैं। हम चीन की गति से नहीं बढ़ रहे हैं, लेकिन हम चीन से प्रेरणा ले सकते हैं। काम यहां पर भी बहुत हो रहा है। पीयूष जी की बात उत्साह बढ़ाने वाला है। हमें हर चीज पर काम करना होगा। काम हो भी रहा है। हमारी सरकार को रिसर्च पर फोकस करना चाहिए।
मनीष विज ने कहा कि यह सही बात है कि भारत में बहुत चुनौतियां है। लेकिन कमल तो कीचड़ में ही खिलता है और एक्सप्रेस वे का रास्ता सिर्फ सर्विस रोड से ही निकलता है। पिछले नौ वर्षों में कम से कम 130 अरब डॉलर का निवेश हुआ है। आज उनकी मार्केट वैल्यू 400 अरब डॉलर है। जल्द ही यह एक ट्रिलियन डॉलर होगा। जरूरी नहीं है कि सब आईआईटी या आईआईएम से निकले हैं। ये उद्यमी छोटी शुरुआत कर इस स्तर पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि चुनौतियों के बीच ही अवसर है। उन्होंने कहा कि पैसे हैं सपने देखने वाला आदमी चाहिए। शुरुआत हर चीज की छोटे से कमरे से होती है। सपने बड़े होने चाहिए।
स्टार्टअप... टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के सत्र में स्माइल ग्रुप के मैनेजिंग पार्टनर मनीष विज पहुंचे। मनीष विज एक उद्यमी नहीं एक पूरा इकोसिस्टम हैं। वे डिजिटल स्पेस में नए समय के स्टार्टअप क्रिएट करते रहे हैं। जूपी सिटी मॉल जैसी कंपनियों में उनका निवेश है। उन्होंने अमर उजाला के मंच पर स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर बात की।
उन्होंने कहा कि हमारी चर्चा के बाद यहां से एक सफल उद्यम निकले यह मेरी इच्छा है। उन्होंने कहा कि असफलता के समय सबसे महत्वपूर्ण चीज है कि आप अपने आपको कैसे मोटिवेट करते हैं। इसमें सबसे अधिक जरूरी है कि आप ऐसे लोगों के बीच रहें जो आपको रे ऑफ होप देता रहे। सबसे जरूरी है आपका माइंडसेट। इस दुनिया में जीवन का सफर सिर्फ माइंडसेट से जीता जा सकता है।
स्नेहल दीक्षित ने कहा कि कॉन्टेंट तय करना तो बहुत मुश्किल है और इंस्टाग्राम और यूट्यूब की खूबी है ये है कि आपको दो मिनट में पता चल जाता है कि ये चल रहा है कि नहीं। मौके भी हजार हैं और फीडबैक भी आपको हजार मिल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि मैं टाइम मैनेजमेंट का बहुत ख्याल रखती हूं। पहले से एक कैलेंडर बनाकर रखती हूं। खुद को डेडलाइन देती हूं। आज मैं लखनऊ में हूं और आज मैं कोई दूसरा काम नहीं करने वाली हूं। आज मैं पूरी तरह से यहां हूं। यही गुरू मंत्र है कि जो काम कर रहे हैं, उस वक्त पूरा मन लगाकर वो करें। मैं जिस पर जो कर रही हूं, उसी में स्पेशलाइज्ड हूं उस चीज में जो मैं उस पल में जो मैं कर रही हूं। टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। दूसरा घरवालों का बहुत सपोर्ट है। मेरे पति और मेरा बेटा कॉन्टेंट में आइडिया देते हैं। मेरे करीबी मित्र जैनम बोहरा मेरे साथ यहां भी आएं हैं, वो मेरा पूरा सोशल मीडिया हैंडल करते हैं। दोस्त, फैमिली, जब आप कुछ अचीव करने लग जाते हैं तो सब आपको सपोर्ट करने लग जाते हैं।
एक्टर और कॉटेंट क्रिइएटर स्नेहल दीक्षित ने कहाकि अमूमन जैसा कि होता है जो आप बनना चाहते हैं, वैसा बन नहीं पाते। हमें भी घरवालों ने मना कर दिया और इंजीनियर बना दिया। नेचुरल जो प्रोग्रेसन था सिनेमा से जुड़ जाओ। मैंने इंडस्ट्री में 18 साल काम किया और अलग-अलग विषयों पर लिखा। टेलीविजन राइटिंग में मेरी बहुत अच्छी पकड़ बन गई थी। मुझे पता चला मैं बहुत अच्छी स्टोरीटेलिंग हूं। अपहरण सीरीज में मैं क्रिएटिव डायरेक्टर थी। वहां एक लाइन थी, 'एजी, गाली दे रहा है कोई'। वह मैंने बोली। मैंने उस मौके को हाथ से नहीं निकलने दिया। अपहरण की वजह से कैमरे के सामने आई। ऊपर वाले की कृपा रही कि ऐसा हुआ। इंटरनेट की जनता ने नाम दिया 'बीसी आंटी'। यह श्रेय उन दर्शकों को जाता है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर मुझे देखा और सराहा। और आज इतने बड़े मंच पर मैं यहां बैठी हूं'।
उन्होंने कहा कि हमने सपा को उपचुनाव में भी सपा को हराया है और अब 2027 की जोरशोर से तैयारी कर रहे हैं। जनता हमारे काम का समर्थन कर रही है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने राणा सांगा विवाद पर कहा कि किसी भी महापुरुष पर बयान नहीं देना चाहिए। सपा सांसद रामजी लाल सुमन को अपना बयान वापस लेना चाहिए। मैं ऐसी अपेक्षा करता हूं। डिप्टी सीएम केशव ने कहा कि वक्फ संशोधन कानून को लेकर तुष्टिकरण करने वाले सपा-कांग्रेस परेशान हैं। इन लोगों ने कभी मुसलमानों का भला नहीं किया। ये कानून गरीब मुसलमानों के पक्ष में है।
इस सवाल पर मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को जो सियासत मिली है वो विरासत में मिली है। उनको संघर्ष के कारण नहीं मिली। उनको जमीनी हकीकत का कुछ अता-पता नहीं है। वो हर समय अहंकार के आकाश में रहते हैं। उनको लगता है कि उनके इशारे पर उत्तर प्रदेश चलना चाहिए। मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटे हुए आठ साल से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन उनको अभी भी लगता है कि वो मुख्यमंत्री हैं, वो फर्जी पीडीए की बात करते हैं। पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक की बात करते हैं।
कोई भी आपराधिक घटना घटती है तो वो दुखद है। हमारी कोशिश होती है कि अपराध न हो लेकिन अगर हो जाता है तो हमारी कोशिश होती है कि हम अपराधी को ऐसी सजा दें कि वह एक नजीर बन जाए। मैं अपराधियों को बता देना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश में अपराध किया तो भूल जाइए कि आपको सत्ता का संरक्षण मिलेगा।
मौर्य ने आगे कहा कि अब 2027 में विधानसभा चुनाव आ रहे हैं, मैं अमर उजाला के संवाद मंच से कह सकता हूं कि 2027 में हम फिर से 300 पार सीटें जीतेंगे। 2027 में हम 2017 को दोहराएंगे। फिर से सरकार बनाएंगे। मुझे कोई कन्फ्यूजन नहीं है। 2024 में चूक हुई है। हम लोगों को विश्वास था कि हम ज्यादा सीटें जीतेंगे। लेकिन परिणाम विपरित आया।
इस सवाल पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देखिए आज आप नोट कर लीजिए। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी जब लोकसभा चुनाव होंगे तो 60 से 80 सीट के बीच में हमेशा जीतेगी, जब विधानसभा चुनाव होंगे तो 300 से पार ही रहेगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में मैंं एक एक्सीडेंट मानता हूं क्योंकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा ने मिलकर बहुत दुष्प्रचार किया। फर्जी पीडीए की बात की, संविधान खत्म करने की बात की, आरक्षण खत्म करने की बात की। इस प्रकार के बहुत दुष्प्रचार किए। हमारे युवा, हमारे गरीब, हमारे पिछड़ी जाति के लोग, हमारे अनुसूचित जाति के लोग उनके दुष्प्रचार से गुमराह हो गए। जिसके कारण से हमारी सीटों की संख्या घटी। इसका हमने बहुत अच्छे तरीके से अध्यन किया। अध्यन करने बाद इस निष्कर्ष पर हैं कि जो गलती है भविष्य में नहीं होगी।
इस सवाल पर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मीडिया में जो चलता रहता है वो भाजपा में होता नहीं है। जो भाजपा में होता है वो मीडिया में होता नहीं।
इस सवाल पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि ये हमारी पार्टी परिवारवादी पार्टी नहीं है कि पांच लोगों की पार्टी है, पांच लोग मिलकर तय कर देंगे कि कौन अध्य्क्ष रहेगा, यह प्रक्रिया है, पूरी हो रही है। मुझे लगता है सही समय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मिलेंगे और यूपी के अध्यक्ष भी मिलेंगे।
सवाल- लेकिन जब पहले जल्दी फैसले हो जाते थे, जब पार्टी परिवारवादी थी क्या?
पहले जल्दी हो जाते थे, या देर में होते थे, ये तो एक प्रक्रिया है। आज भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। देश के 70 फीसदी भू-भाग पर भाजपा और एनडीए का शासन है और हमारी पार्टी देश का कोई ऐसा राज्य नहीं जिस राज्य में नहीं है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव 50 प्रतिशत राज्यों के चुनाव के बाद संविधान के अनुसार होते हैं। वह प्रक्रिया पूरी हो रही है। मुझे लगता है कि कार्यकर्ताओं और आप सभी का ये सवाल जल्द खत्म होने वाला है।
बदलता प्रदेश... बदलता उत्तर प्रदेश सत्र में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने चर्चा के दौरान कहा कि जब मुझे पार्टी ने इस पद के लिए योग्य समझा, तो आप की तरह मैं भी चौंका था, कि मुझे उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी देगा और वह जिम्मेदारी मिली तो मैंने अपनी पूरी क्षमता के साथ इस पर काम किया। इसके बाद जनता जर्नादन की कृपा हुई, 325 सीटों के साथ भारतीय जनता पार्टी का 14 वर्ष का यूपी में वनवास खत्म हुआ और समाजवादी पार्टी के कुशासन से मुक्ति मिल गई।
जब आप अध्यक्ष बने तो 40 सीटें थे, आपके सामने चुनौती बड़ी थी
माननीय मोदी जी को देश प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता था। उत्तर प्रदेश ने फिर इसके लिए रिकॉर्ड 73 सांसद दिए थे।
कॉन्टेंट क्रिएटर हर्षवर्धन वर्मा ने कहा कि अयोध्या में महौल इस बहुत अच्छा है। मंदिर पूरा होने की कगार पर है। दूसरी प्राण प्रतिष्ठा का हम इंतजार है। जब हमारे रामलला अब राजाराम होकर विराजमान होंगे। उन्होंने कहा कि 2020 से पहले जब मंदिर बनने की शुरुआत नहीं हुई थी, उसे विवाद के रूप में देखा जाता था। सब लोग वाराणसी जाना है, केदारनाथ जाना है, लेकिन अयोध्या कोई आना नहीं चाहता था। अयोध्या नाम लोग विवाद की तरह लेते थे लेकिन अयोध्या हमारे लिए आस्था है।
अखिलेश यादव ने राणा सांगा विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि ऐसा इतिहास जो लोगों के बीच विवाद पैदा करे उसका जिक्र नहीं करना चाहिए। वहीं, सपा नेता अबू आजमी के औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने कहा कि मुझे ये नहीं पता कि उन्होंने किस संदर्भ में ये बात कही है। हमें इतिहास को लेकर विवाद नहीं करना चाहिए। सपा में परिवारवाद के आरोप पर उन्होंने कहा कि सभी को अपनी योग्यता साबित करनी पड़ती है। परिवारवाद तो भाजपा में भी है। कई ऐसे नेता हैं जो भाजपा में काम कर रहे हैं। जो अपनी योग्यता साबित करेगा वो आगे जाएगा। उन्होंने कहा कि हम लोग संविधान से चलने वाले लोग हैं। भाजपा जाति के आधार पर भेदभाव करती है। हम संविधान के लिए लड़ रहे हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी जातिवादी पार्टी, वो जातिवादी लोग हैं।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, 'मैं इसलिए इस गमछे को पहनकर आया, क्योंकि मैं जगन्नाथ पुरी गया था। मुझे जानकारी मिली कि वहां अभी तक योगी जी गए ही नहीं हैं। मैं गमछा इसलिए पहना हूं, ताकि मैं उन्हें (सीएम योगी) ये बात याद दिला सकूं। वो गए नहीं तो इसका मतलब मैं ये कहूं कि वो हिंदू नहीं हैं, लेकिन मैं यह नहीं कह सकता। अगर मैं भाजपा का होता तो कहता कि वो हिंदू ही नहीं हैं, वे खराब हिंदू हैं।' अखिलेश यादव ने कहा, 'जो सच्चा हिंदू है वह स्वामी विवेकानंद जी को मानता है। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस और टॉलरेंस हमें ज्यादा धर्म सिखाता है। उन्होंने शिकागो में भाषण दिया कि हम उसे देश आते हैं, जो देश और जिस देश का धर्म हमें सब को स्वीकार करना सिखाता है। यूनिवर्सल एक्सेप्टेंस और टॉलरेंस हमारा धर्म सिखाता। बताइए विवेकानंद जी की कितनी बात मानते हैं, केवल वस्त्र पहन लेते हैं और बोलते हैं हम हो गए विवेकानंद। वस्त्र से कोई योगी नहीं हो सकता है, बल्कि विचार से योगी हो सकता है' अखिलेश ने कहा, 'उत्तर प्रदेश में जीरो पावर्टी हो गई जीरो पावर्टी हो गई। कहते हैं न्याय को लेकर जीरो टॉलरेंस है और आप किसी के भी साथ अन्याय कर दे रहे हो। आप किसी पर झूठे मुकदमे लगा रहे हो, किसी को भी जेल भेज रहे हो और किसी का भी एनकाउंटर कर रहे।
'राजनीतिक लोगों को झूंठा फंसाया जा रहा'
अखिलेश ने कहा, 'दुनिया के 100 इन्फ्लुएंसर की सूची आई है। इस सूची में भारत का कोई इन्फ्लुएंसर नहीं है, वो इसलिए नहीं क्योंकि दुनिया जान रही है कि यहां की डेमोक्रेसी खतरे में है। नकारात्मक काम हो रहे हैं यहां पर, बुल्डोजर चल रहे हैं यहां पर, यहां पॉलिटिकल लोगों को झूंठा फंसाया जा रहा है। दुनिया देख रही है कि फ्रीडम ऑफ प्रेस में हम कहां खड़े हैं, इक्वलिटी ऑफ इंडेक्स में हम कहां खड़े हैं, भूखमरी के इंडेक्स में हम कहां खड़े हैं, हमारा रुपया दूसरे की तुलना में कहां है ये तमाम मानक हैं। भाजपा के काम करने के तरीके की वजह से हम लोग दुनिया में कहीं दिखाई नहीं दे रहे।'
'अल्पसंख्यकों पर हमला हो रहा'
अखिलेश यादव ने आगे कहा, 'अल्पसंख्यकों पर हमला हो रहा है, जैन समाज पर हमला कर दिया। जैन समाज शांतिपूर्ण ढंग से रह रहा था, अब उनकी जमीनों पर भी कब्जा शुरू कर दिया। ये पता नहीं क्या है भाजपा के अंदर की वे अगर जमीन देख लें तो बस कब्जा कर लेंगे। ये भारतीय जनता पार्टी नहीं है, ये भारतीय जमीनी पार्टी है। ये जमीन देखकर कब्जा करने वाली पार्टी है।'
अखिलेश यादव ने कहा कि जिस समय समाजवादी पार्टी की सरकार में एक्सप्रेस-वे बन रहा था आगरा से लखनऊ वाला। उस समय इंडियन रोड कांग्रेस के मानक नहीं आए थे। जो इंडिया रोड कांग्रेस के मानक हैं, उसके तहत एक्सप्रेसवे बनने चाहिए। उस समय एक्सप्रेस-वे नहीं आया था। उस समय समाजवादी पार्टी ने रिकॉर्ड टाइम में नेताजी की वजह से 21 महीने में 323 किलोमीटर का सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे बनाकर दिखाया। मैं एयरफोर्स का धन्यवाद देना चाहता हूं, एयरफोर्स ने उत्तर प्रदेश की सरकार के साथ मिलकर काम किया। देश का वो पहला एक्सप्रेस-वे बना, जो इमरजेंसी में कोई भी बड़े से बड़ा एयरक्राफ्ट उतार सकते हैं। जिस दिन उद्घाटन हुआ था, उस दिन सुखोई ने, मिराज ने टच डाउन किया। बाद में हरक्यूलिस विमान उतरा।
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि आपका धन्यवाद, जो आपने 2012 से 2017 की उपलब्धियों के बारे में पूछ लिया, एकवादी लोगों का मैंने भाषण सुना था। वो अभी भी गुम है, किस दुनिया में पता ही नहीं है। किस दुनिया में चले जाते हैं, ये भी नहीं पता लगता कई बार। एक बार मैंने एक बहुत प्रतिष्ठित अखबार में पूरा विज्ञापन था। उस विज्ञापन में लिखा था कि उत्तर प्रदेश में 17 एक्सप्रेस-वे बने हैं, या बन रहे हैं। मैंने वहीं से बात निकालकर ट्विट किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मैंने वो बात कही और उसके बाद में देखा जब मैं एयरपोर्ट से आ रहा था, तो एकर्डिंग लगी थी, उस होर्डिंग में लिखा था 7 एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। छह प्रस्तावित हैं। मैंने तभी सोचा कि ये सपने में बना रहे थे। अगर प्रतिष्ठित अखबार में 17 एक्सप्रेसवे की बात कही जाए और होर्डिंग लगानी पड़ जाए सात और छह की। हमारे मुख्यमंत्री जी समझते नहीं है कि एक्सप्रेस-वे क्या है? वो चार लाइन सड़क को भी एक्सप्रेस वे समझते हैं। कोई सड़क बन जाए उसे एक्सप्रेस-वे मान लेते हैं।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि कभी-कभी वो कन्फ्यूज हो जाते हैं, सैनिक स्कूल और में और मिलिट्री स्कूल में। मुझे नेताजी ने मिलिट्री स्कूल में पढ़ने का मौका दिया। मिलिट्री स्कूल की वजह से आज हम राजनीति में सफल हैं। दूसरा, हमें समाजवादी विचारधारा जो नेताजी ने दी, डॉ. भीमराव आंबेडकर जी का जो संविधान है, उसके जो प्रेमबल में चीजें लिखीं हैं। कि जो हमारा "वी दा पीपुल" और हमें देश कैसा बनाना है। जो हमारा देश कैसा बने। सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, कंट्री हो। जो हमारे प्रेमबल में है समाजवादी, उस विचारधारा को लेकर चल रहे हैं। जो हमारे और आपके सामने चुनौतियां हैं। वो चुनौतियां कि हम किस तरीके से समाजिक न्याय की राज्य की स्थापना करें ।
अखिलेश यादव ने कहा कि फौज हमारे देश की वो फौज है, जो कठिन परिस्थितों में हमारे देश की रक्षा कर रही है। एक एक फौजी यहां जानता होगा कि नेताजी के समय में वो फैसला लिया गया था कि अगर किसी भी सीमा पर फौजी शहीद होगा तो उसे घर परिवार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार निभाएगी। जिस समय ये फैसला लिया जा रहा था, सरकार कह रही थी कि बजट कम है, बजट पर्याप्त नहीं है, हम कितने लोगों को घर पहुंचाएंगे तो नेताजी ने उसी समय कहा था कि अगर फौजी हमारे देश की रक्षा करता है। उसको सम्मान के लिए घर पहुंचाने के लिए कितना भी बजट खर्च होगा, सरकार खर्च करेगी। नेताजी का यह फैसला आज भी है। नेताजी का बहुत इमोशनल रिश्ता फौज से जुड़ा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि हम लोग तो संवादी लोग हैं, दूसरी तरफ एकवादी लोग हैं। हम सब लोग संविधान से चलना चाहते हैं, कुछ लोग मन विधान से चलाना चाहते हैं। नेताजी हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने विरासत में जो हम लोगों को समाजवाद दिया है और समाजवादी आंदोलन दिया है। हम सभी समाजवादियों की जिम्मेदारी है कि हम लोगों की अगले कई वर्षोंं तक उस आंदोलन को ले जाने की जिम्मेदारी है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संवाद के मंच पर अमर उजाला के पूरे परिवार का बहुत धन्यवाद और आभार प्रकट किया। जैसा कि आपने बताया कि आज, स्थापना दिवस है आपका। मुझे खुशी है इस बात की आप लखनऊ में हैं। अमर उजाला, सबसे पहले उन्होंने मुझे बच्चों के कार्यक्रम में बुलाया था। टॉपर्स को सम्मान करने के लिए मुझे बुलाया था। मैं आपके इस संवाद के कार्यक्रम के लिए बहुत बहुत धन्यवाद और बधाई देना चाहता है।
संवाद के मंच पर पूर्व सेना प्रमुख मनोज पांडे ने नेशनल ओलंपियाड के दस विजेताओं का सम्मान किया। अमर उजाला की ओर से नेशनल ओलंपियाड का आयोजन किया गया था। इसमें लाखों छात्रों ने प्रतिभाग किया। इनमें से 38 छात्र विजेता बने थे। संवाद के मंच पर विजेता राघव, अंश चौधरी, अंश रंजन सिंह, दर्शन सिंह बिष्ट, वंश बिष्ट, अद्विक, आर्यन कुमार, चिराग नेगी, माधव धीमान, स्नेहा जोशी और अनिशु गुप्ता का सम्मान किया गया।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि सबसे पहले तो मैं बताना चाहूंगा कि जब हम किसी भी कार्य क्षेत्र में बदलाव लाना चाहते हैं तो उसको लेकर सवाल होते हैं। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया अब इसकी आशंकाओं का समय निकल गया है। मैं एक मुद्दे पर खास ध्यान देना चाहूंगा, अग्निवीर जब चार वर्ष के कार्यकाल के बाद सेना से बाहर आएंगे तो सेना के मूल्य उनके साथ होंगे। इन युवाओं के साथ एक अच्छा व्यवहार लेकर निकलेगा। जब चार साल में यह युवा बाहर निकलेगा तो उसके पास काफी धनराशि रहेगी जिससे वह अपना उद्योग शुरू कर सकता है। उसके साथ ही उसके पास स्किल रहेगी उससे वो बहुत कुछ कर सकता है। इसके साथ ही मैं राज्य सरकारों से अनुरोध करूंगा कि वो इनके स्किल का प्रयोग करें।
धन्यवाद, आपने जो निमंत्रण दिया यहां आने के लिए उसके लिए। आपके प्रश्न के दो भाग हैं। मैं एक गैर सैनिक पृष्ठभूमि से आता हूं, मेरे परिवार में कोई फौज में नहीं था। जब मैं स्कूल में था तो वो स्कूल एयरफोर्स स्टेशन में था, मैं वहां का अनुशासन देखकर उससे प्रेरित होकर मैंने सेना में आने का निर्णय लिया। इंजीनियरिंग से सेना में आने पर मैं कहना चाहता हूं कि यह बताता है कि सेना में सबके लिए है। सेना सभी विभागों को समान अवसर प्रदान करता है। एक तरीके से मैं मानता हूं यहां पर आपकी प्रतिभा ही सबकुछ है।
पूर्व सेना प्रमुख मनोज पांडे ने कहा कि 'आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार सशस्त्र बल देश के विकास में योगदान देते रहेंगे। भारतीय सेना ने देश के नागरिकों के दिल में एक विशेष स्थान बनाया है। देशवासियों द्वारा सेना पर जताया गया भरोसा सशस्त्र बलों के विश्वास को और मजबूत बनाता है। ये सेना को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।'
उन्होंने यह भी कहा कि सेना में कार्यरत सैनिकों में 14 प्रतिशत उत्तर प्रदेश से हैं। सेना की 12 फीसदी संख्या उत्तर प्रदेश में तैनात है। 3.06 लाख सेवानिवृत्त सैनिक और उनके परिवार उत्तर प्रदेश में निवासरत है। दो वर्ष के बाद हर साल सेना से औसतन पांच से छह हजार अग्निवीर जो उत्तर प्रदेश के डोमेसाइल हैं, चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर समाज से जुड़ेंगे।
जनरल मनोज पांडे ने कहा कि 'मेरे परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि नहीं है, लेकिन स्कूल के माहौल से मैं सेना में जाने के लिए प्रेरित हुआ। सेना में सभी को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं। सेना में मेरिट के आधार पर तरक्की मिलती है।'
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि 'सेना एक विशाल परिवार है, जो सेवा के बाद भी उतने ही प्रभावी होते हैं। युवाओं के लिए मेरा संदेश होगा कि कार्यक्षेत्र में लीडरशिप रोल निभाने के लिए तैयार करें। इसके लिए कैरेक्टर, कंपटीशन, कंडक्ट पर ध्यान दें। कोई भी राष्ट्र युवाओं की आस्था और बलिदान के बिना तरक्की नहीं कर सकता। युवा ही देश के विकास के ध्वज वाहक होते हैं। बड़े सपने देखें और नए अवसरों की तलाश करें। आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करें और देश के अच्छे नागरिक बनें। सेना भी राष्ट्रीय प्रयासों को आगे बढ़ाने और समर्थन देने की अच्छी स्थिति में हैं। आज सीमावर्ती क्षेत्रों में भी सड़क कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। लोगों का सशक्तिकरण सेना का उद्देश्य है। डिफेंस डिप्लोमैसी के माध्यम से मित्र देशों के साथ अपने संबंधों को मजूबत करने, संयुक्त सैन्याभ्यास और यूएन पीस कार्यक्रमों में सेना के प्रयास केंद्रित हैं।'
जनरल मनोज पांडे ने कहा कि 'साल 2047 तक हमने विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है तो सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है ताकि विकास की यात्रा प्रभावित न हो। पिछले कुछ दशकों में युद्ध के चरित्र और प्रकृति में बड़ा बदलाव आया है। तकनीक के आने से युद्ध का स्वरूप बदला है। पारंपरिक युद्ध को हाइब्रिड युद्ध से बदला जा रहा है। साइबर स्पेस डोमेन का महत्व भी बढ़ा है। हमारी सुरक्षा और रक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना अपरिहार्य जरूरत के रूप में उभरा है। एकेडमिक, रिसर्च, रक्षा उद्योगों का विकास और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बेहद अहम है। इससे हमारी रक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार की नीतियों से भी सुरक्षा बलों को फायदा मिला है। यूपी में डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। ड्रोन्स और सैटेलाइस के निर्माण के लिए भी निवेश की दिशा में काम जारी है।'
विकसित भारत की यात्रा में सशस्त्र बलों की भूमिका और योगदान सत्र में सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे ने कहा कि आज मैं एक ऐसे विषय पर अपने विचार रखूंगा, जो भारत के भविष्य की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह विषय विकसित भारत की यात्रा में सशस्त्र बलों की भूमिका और योगदान है। जब हम विकसित भारत की बात करते हैं तो हम एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं, जो संगठित हो, स्थिर हो, समृद्ध हो, सुरक्षित हो और आत्मनिर्भर हो और हर नागरिक या देशवासी जो सम्मान, न्याय और अवसर देता हो। इस लक्ष्य को हासिल करने में मैं मानता हूं सशस्त्र बल एक मजबूत स्तंभ और आधारशिला है।
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि आप सब जानते हैं हमारा आज कई क्षेत्रों में अच्छी प्रगति कर रहा है। विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है। हमारा आर्थिक विकास मजबूत हो रहा है और हम बेहतर कंज्यूमर इन्फ्लुएंस और अच्छे जीवन स्तर, उच्च साक्षरता और देश वासियों की बढ़ती आकांक्षाओं के साक्षी हैं। आज हम विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में खड़े हैं। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हम अपने आइडिया के कारण एक नई क्रांति के साक्षी हैं। इसमें एक मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमी कंडेक्टर और स्पेस की उपलब्धियां शामिल हैं। हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के बढ़ते कद को भी देखते रहे हैं। वैश्विव समस्याओं के समाधान में हम पहल करते रहे हैं।
अमर उजाला समूह के निदेशक वरुण माहेश्वरी ने कहा कि माननीय मनोज पांडे जी, भारत की यशस्वी सेना के यशस्वी पूर्व अध्यक्ष। सभागार में उपस्थित सभी सम्माननीय जन, अतिथिगण और प्रिय साथियों। नमस्कार, आज का दिन हमारे लिए गर्व और आत्मचिंतन का अवसर है, आज ही के दिन अमर उजाला की यात्रा 18 अप्रैल 1948 को आगरा से शुरू हुई। जब मुरारी लाल जी माहेश्वरी और डोरी लाल जी अग्रवाल ने एक सपने को साकार करने की ठानी। ये सपना सिर्फ अखबार छापने का नहीं था बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना का था जो सशक्त हो, जागरूक हो और विचारशील हो। उनकी इसी दूरदृष्टि और संपादकीय कौशल की बुनियाद पर अमर उजाला खड़ा हुआ और आज 77 वर्ष पूरे कर हम स्वर्णिम शताब्दी की ओर आत्मविश्वास से कदम बढ़ा रहे हैं।
सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेकर अमर उजाला ने बीते आठ दशक में न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत में पाठकों के दिलों तक पहुंच बनाई। वहीं अमर उजाला डॉट कॉम के माध्यम से हम ये पहुंच पूरे विश्व में हर हिंदीभाषी तक ले जाने में सक्षम हैं। बीते 77 वर्षों में अमर उजाला न केवल समाचार देने वाला माध्यम रहा बल्कि प्रदेश और देश को जोड़ने वाला, उन्हें जागरूक करने वाला और उनकी लोकतांत्रिक सोच को मजबूती देने वाला एक सशक्त मंच बन गया। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर निरंतर संवाद कायम रखते हुए, हमने पत्रकारिता को जनसेवा का माध्यम बनाया है।
विचारों के आदान प्रदान के लिए संवाद का सिलसिला हमने इसलिए शुरू किया था, ताकि एक बेहतर राष्ट्र का निर्माण किया जा सके। हम हर साल प्रदेशों की राजधानी में 'संवाद' कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। इसी क्रम में तहजीब के शहर लखनऊ में इस दो दिवसीय आयोजन की शुरूआत हुई। प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने इसका आरंभ किया। शिक्षा, कला, अभिनय और राजनीति की शख्सियतों से कल आप रूबरू हुए। आज दूसरे दिन जनरल मनोज पांडे जी सत्र का आरंभ कर रहे हैं। विचारों की ठंडी और नई हवाएं आज भी आप तक पहुंचे। वहीं बतौर समाचार पत्र हम विश्वास दिलाते हैं आगे भी सच, संतुलन और समाज सेवा के मूल्यों के साथ लेकर चलेंगे। आप सभी का समर्थन, विश्वास और स्नेह ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। धन्यवाद, जय हिंद।
अमर उजाला संवाद 2025 कार्यक्रम 18 अप्रैल को 11 बजे से शुरू होगा।
अमर उजाला संवाद 2025 कार्यक्रम कहां आयोजित होगा?
अमर उजाला संवाद 2025 कार्यक्रम लखनऊ के गोमती नगर के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होगा।
अमर उजाला संवाद कहां देख सकते हैं?
अमर उजाला संवाद 2025 कार्यक्रम आप अमर उजाला के यूट्यूब चैनल, अमर उजाला उत्तर प्रदेश के यूट्यूब चैनल, अमर उजाला के इंस्टाग्राम पेज, अमर उजाला के फेसबुक पेज और अमर उजाला के एक्स/ट्विटर पेज पर लाइव देख सकते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग अतिथियों से जुड़े वीडियोज भी आप इन चैनलों पर देख सकते हैं। इस कार्यक्रम से जुड़े लाइव अपडेट्स और इंटरव्यू आप Amarujala.com पर भी पढ़ सकते हैं।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सियासी सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1989 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 1990 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके 12 साल बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और 2002 के विधानसभा चुनाव में मल्लावां विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और 130 वोटों के करीबी अंतर से चुनाव हार गये थे। पाठक 2004 में कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गए। 2004 के लोकसभा चुनाव में वह बसपा के टिकट पर उन्नाव से सांसद चुने गए। बसपा ने उन्हें सदन में उपनेता बनाया, वहीं 2009 में मायावती ने ब्रजेश पाठक को राज्यसभा भेज दिया। वह सदन में बसपा के मुख्य सचेतक रहे। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में ब्रजेश पाठक उन्नाव लोकसभा सीट से दूसरी बार मैदान में थे, लेकिन यह चुनाव हार गए थे। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 22 अगस्त 2016 को ब्रजेश पाठक बीजेपी में शामिल हो गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता और कानून मंत्री बनाया गया। योगी सरकार 2.0 में उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली।
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा ने पहली बार वर्ष 2002 में प्रयागराज शहर पश्चिमी से माफिया अतीक के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा था। इस चुनाव में केशव प्रसाद हार गए। वर्ष 2007 में भाजपा ने फिर केशव को शहर पश्चिमी से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने फिर से केशव को उनके गृह नगर सिराथू से प्रत्याशी बनाया और वह भारी मतों से जीतकर विधायक बने। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में केशव को भाजपा ने फूलपुर संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया। इसमें केशव करीब तीन लाख मतों से सपा प्रत्याशी धर्मराज सिंह पटेल से चुनाव जीते। वर्ष 2016 में प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती और केशव को डिप्टी सीएम का दायित्व सौंपा गया। 2022 में फिर से डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी गई।
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से शुरू होती है, जहां साल 2000 में हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल की और फिर लोकसभा में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण कमेटी के सदस्य भी बने। साल 2004 तक 13वीं लोकसभा के सदस्य रहे अखिलेश यादव ने बतौर सांसद आचार समिति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वन एवं पर्यावरण कमेटी के सदस्य की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद अखिलेश यादव का लोकसभा पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा, साल 2004 और 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर अखिलेश यादव फिर से लोकसभा पहुंचे। साल 2012 में उत्तर प्रदेश के 20वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री रहे।
इसके अलावा संवाद के दूसरे दिन अभिनेता विनीत कुमार सिंह व अभिनेता अमित सियाल सिनेमा के बदलते दौर की कहानी अपनी जुबानी सुनाएंगे। इसके अतिरिक्त क्रिकेटर सुरेश रैना कामयाबी की कहानियां सुनाएंगे। स्माइल ग्रुप के मैनेजिंग पार्टनर मनीष विज स्टार्टअप...टेक्नोलॉजी...इनोवेशन...पर विचार रखेंगे।
शुक्रवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बदलता प्रदेश...उत्तर प्रदेश व ब्रजेश पाठक उत्तर प्रदेश की बदलती सेहत पर चर्चा करेंगे। क्रिकेटर सुरेश रैना, गीतकार मनोज मुंतशिर, छावा फेम अभिनेता विनीत कुमार सिंह दर्शकों को बांधकर रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अमर उजाला संवाद के दूसरे दिन यानी आज इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्श प्रेक्षागृह में सपा प्रमुख अखिलेश यादव प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी बात रखेंगे। इसके अतिरिक्त विज्ञान की उपलब्धियों, देश की रक्षा से जुड़े मुद्दों, वित्तीय प्रबंधन पर नामचीन हस्तियां विचार रखेंगी।