संवाद के मंच पर पहुंचे अभिनेता इमरान हाशमी, सेवानिवृत्त BSF डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे और फिल्म निर्देशक तेजस प्रभा विजय देओस्कर
अभिनेता इमरान हाशमी, बीएसएफ के सेवानिवृत्त डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे, फिल्म निर्देशक तेजस प्रभा विजय देओस्कर अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। यह सभी 'सच्ची कहानियां: कितनी सच्ची' विषय पर अपने-अपने विचार रखेंगे।
सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि इंटरनेट के इस युग में सोशल मीडिया पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के कंटेट हैं। बकौल अनिरुद्धाचार्य, वे खुद पर बनने वाले मीम भी देखते हैं, ये लोगों को हंसाने का काम करते हैं। वे खुद भी इसका सकारात्मक इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं।सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः
कैसा लग रहा है आप दोनों को लखनऊ में आकर?
संवाद के मंच पर मुक्केबाज विजेंदर सिंह और निकहत जरीन पहुंचे हैं। दोनों से पूछा गया कि लखनऊ में आकर आपको कैसा लग रहा है तो विजेंदर सिंह बोले, बहुत अच्छा लग रहा है। एक बहुत अच्छी कहावत है... मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं।
निकहत: मैं पहली बार लखनऊ आई हूं। मैंने बस लखनऊ को इंस्टाग्राम रील्स पर देखा है। लखनऊ के खाने वाला रील्स देखकर मेरा मन करता था कि मैं यहां आऊं। कल मुझे खाने का मौका मिला और मैं और इस जगह को एक्सप्लोर करना चाहती हूं।
यूपीसीडा के सीईओ मयूर माहेश्वरी ने कहा कि टेक्सटाइल सबसे बड़ा एंप्लॉयमेंट जनरेटर है और उत्तर प्रदेश में हुनर की कोई कमी नहीं है। हम लोग लगभग 1500 से 2000 एकड़ में लखनऊ और हरदोई के बॉर्डर पर पीएम मित्र पार्क ला रहे हैं। माननीय प्रधानमंत्री ने माननीय मुख्यमंत्री के अनुरोध पर यूपी को एक पीएम मित्र पार्क दिया है। वह एक ऐसा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा, जिसमें कि हर तरीके की यूनिट को इंटीग्रेटिड इकोसिस्टम के तहत आप पाएंगे। गारमेंटिंग एक ऐसे सेक्टर है। आजकल यूथ में यूज एंड प्रोफेशन बहुत आ रहा है। गारमेंट्स की नीड बहुत बढ़ती जा रही है। फुटवीयर में भी गारमेंट्स लगने लग गए हैं। इस तरीके से इस सेक्टर में एंप्लॉयमेंट भी जनरेट होगा और एक इंडस्ट्रीयल इकोसिस्टम जुड़ेगा।
यूपीसीडा के सीईओ मयूर माहेश्वरी ने कहा कि इसी तरह से बुंदेलखंड में ऐसी जगह हैं, जैसे बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, यहां पर लोग जाना ही नहीं चाहते। सीएम योगी का बहुत स्ट्रोंग फोकस है कि हमें रिजनल समस्या दूर करनी हैं। जो हमारे एरिया विकास की दृष्टि से पीछे थे, उन्हें मैनस्ट्रीम में लाना है। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का एक पूरा फाउंडेशन लेकर आ गया। उसके बाद अब यूपीडी क्षेत्र में आप देखेंगे, कि नोएडा जैसी बहुत बड़ी टाउनशिप आकार ले रही हैं। मूर्त रूप ले रही है। ललितपुर में हम बल्क ड्रग्स और फार्मा पार्क बना रहे हैं। क्योंकि भारत में 65 प्रतिशत डिपेंड हैं चाइना के ऊपर। छोटी सी दवा है पैरासिटामॉल, सब लोग जानते हैं लेकिन उसका जो की मैटिरियल है वो भी बाहर से आता है। उस डिपेंडेंट्स को हम लोग दूर करना चाहते हैं। हम चाहते हैं इंडिपेंडेंट बने इसलिए ललतिपुर में एक फार्मा पार्क की स्थापना कर दी गई है। उस पर काम चल रहा है शीघ्र ही आप देखेंगे बड़े-बड़े एंकर यूनिट चालू हो जाएंगे।
यूपीसीडा के सीईओ मयूर माहेश्वरी ने कहा कि देखिए बदलाव का एक और उदाहरण देता हूं, यूपी को मुख्यत: दो तीन शहरों से जाता था इंवेस्टमेंट के लिहाज से। नोएडा, एनसीआर में चूंकि पड़ता है, तो वो गुड़गांव को टक्कर देता था। स्टेट की कैपिट्ल्स हैं साउथ की। हैदराबाद और बेंगलोर। नोएडा यूपी में है और गेटवे है। लेकिन असली विकास जो हुआ है वो छोटे टर्म में हुआ है, मैं आपको उसका उदाहरण देता हूं। जहां हम लखनऊ में बैठे हैं, वहां से 45 मिनट की दूरी पर संडीला है, उस टाउन में आज हमारे पास इतने मल्टीनेशनल है, आईटीसी वहां पर है। पेप्सीको, हल्दीराम वहां है, बालाजी वेफर्स वहां पर है। एक तहसील टाउन की ग्रोथ देखिए आप। इसी तरह से अगर कंपेरिजन करें हम तो आप मथुरा के पास कोपी चले जाइए। ये यूनिट्स हमने पिछले तीन से साढ़े तीन साल में अलॉट्स कीं और आज ये प्रोडक्शन में हैं। कोविड के समय जब हम परेशान थे तो एक फ्रांस की कंपनी ने वहां प्लाट लिया और जमीन ली। उस समय ऑक्सीजन मैनुफेक्चरिंग का संकट था तो उस समय कंपनी ने उत्पादन शुरू किया। आज वो एशिया में सबसे बड़ा प्लांट है। जो अटल टनल बनी है, उसमें जो केमिकल लगे हैं, वो इटालियन कंपनी के बाहर से आते थे, लेकिन इटली की कंपनी को हमने जमीन दी। वो केमिकल हमारे प्रदेश में बनते हैं। केमिकल यहां बनते हैं।
माहेश्वरी ने कहा कि आप देखिए सरकार ने पिछले दस वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर को फंडामेंटल ड्राइवर ऑफ ग्रॉथ माना है। चाहे सड़क हो, हाईवे हो, कनेक्टिवटी, 21 एयरपोर्ट वाला राज्य उत्तर प्रदेश है। 75 जिले हैं और आप समझिए हर तीन से चार जिलों के बीच एक एयरपोर्ट, ऐसा तो डेवलप प्रदेश का डेवलेप कंट्री में इतनी प्रिजेंश नहीं है। 56 प्रतिशत देश के एक्सप्रेसवे आज उत्तर प्रदेश में हैं। सबसे ज्यादा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जो नेटवर्क है वो उत्तर प्रदेश के पास है। इन सब का परिणाम क्या हुआ उसके बारे में अब आपको बताता हूं, प्रति व्यक्ति आय जो हमारी 48000 रुपये थी 2016-17 में जो आज 1,24,000 है। जबकि हमारी आबादी का बेस लगभग 25 करोड़ है। इतनी बड़ी आबादी के आधार को प्रति व्यक्ति आय में 2.5 का इजाफा करना वो भी 7-8 साल में, ये आउटकम है। ये हम सबके लिए एक बहुत बड़ा माइलस्टोन है।
"उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की रणनीति" सत्र में यूपीसीडा के सीईओ मयूर माहेश्वरी ने कहा कि बहुत बहुत धन्यवाद अमर उजाला परिवार का यह मंच देने के लिए। मैं उत्तर प्रदेश से आता हूं, मेरी पढ़ाई भी यही हुईं। जब हम लोग छोटे थे तो सोचते कि डेवलप स्टेट से तुलना होती थी, कि महाराष्ट्र में, मुंबई में क्या-क्या अच्छी चीज हो रही हैं। फिर उसके बाद हम लोगों ने पढ़ाई की, इंजनीयरिंग की। पढ़ाई करने के बाद जब राज्य में आए। तब उस जर्नी को मैं आज देखता हूं, तो आप अनुभव करिए कि लीडरशिप का विजन क्या ट्रांसफॉर्मेशन देता है, मैं आपको आपको इसका कुछ उदाहरण देता हूं। पिछले सात साल से उत्तर प्रदेश में इस सरकार में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो फोकस हुआ है। किसी भी सिस्टम को बनाने के लिए एक इनपुट चलता है, उसके बाद उसके आउट्स कम आते हैं।
सैंड आर्ट को दुनियाभर में पहचान मिली है। मैंने समंदर के रेत को अपना कैनवस बनाया और उसपर कुछ-कुछ बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे पर्यटकों ने इसे पसंद करना शुरू किया। कई बार लोगों के मन में सवाल आता है कि रेत पर बनी कला कितनी देर टिकेगी, एक झोंका आया तो सारा मेहनत खराब। सुदर्शन कहते हैं, इसपर मेरा मानना है कि मुझे ये नहीं पता कि अगले सेकेंड में मैं जीवित रहूंगा या नहीं तो कला के बारे में क्यों सोचना। इसी सोच पर मैंने इस कला का आगे ले जाने की कोशिश की है। मैं हमेशा ये सोचता हूं कल मुझे क्या करना है। शायद अब समंदर भी मुझे समझने लगा है और हर दिन एक नया कैनवस दे देता है। समंदर की वजह से मैं हूं। आज देश में बहुत सारे कलाकार हैं, इसके वैश्विक स्तर पर अब कई कंपटीशन होने लगे हैं।
मशहूर सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने कहा कि अभी जो ऑवर्ड मिला है, वो महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से ही मिला है। क्योंकि जब हम बचपन में पुरी की समंदर किनारे रेत पर कलाकृति बनानी शुरू किया, हमको ये पता चला कि 14वीं शताब्दी में महाप्रभु जगन्नाथ जी के भक्त थे बलराम दास, उन्होंने भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बनाकर पूजा की और जगन्नाथ के तीन रथ जाते हैं, भाई और बहन का रथ मौसी के घर चला गया, भगवान जगन्नाथ का रथ रुक गया। क्योंकि वो अपने भक्त के रथ पर बैठ गए थे तब से भारत और पुरी समंदर किनारे का रेत पवित्र हो गया।
सुदर्शन पटनायक को कहा, मैंने कई बार गणेश जी की रेत से कलाकृति बनाई और इसे दुनियाभर में सराहा गया। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं मेरी रेत कला के दौरान भी कई बार उनकी शक्ति और महिमा देखने को मिली है।
शिखा शर्मा कहती हैं, मुझे बहुत इंटरेस्ट था आर्ट में। लेकिन मुझे डॉक्टर भी बनना था। क्योंकि वो मेरे पिता का सपना था। उनका सपना मुझे पूरा करना था। क्योंकि वो डॉक्टर नहीं बन पाए तो मैं बन जाऊं, पर मैंने कला को चुना। मैंने एमबीबीएस छोड़ दिया और कला में अपना करियर चुना। बहुत मुश्किलें आईं, आपको लग रहा होगा कि यहां तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। क्योंकि जब हम घर के बाहर रंगोली बनाते हैं, और वहां एक वर्ल्ड रिकॉर्ड में एक रंगोली बनाते हैं बहुत सारी चीजें बदलती हैं, घर के बाहर रंगोली बनाना एक छोटी सी रंगोली बनाना होता है। मैंने जो वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएं हैं, वो इतना आसान नहीं थे। हमने जो सातवां वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है वो इंदौर से केदारनाथ तक का है। शिखा ने उज्जैन से केदारनाथ तक रंगोली बनाई, जोकि वर्ल्ड रिकॉर्ड है। केदारनाथ के 21 किलोमीटर के ट्रैक पर रंगोली बनाई। पूरी चढ़ाई पर रंगोली बनाई थी। वो अलग ही अनुभव था, वहां पल-पल में बारिश हो जाती है, बर्फ गिर जाती है। 15 से 20 मिनट में मौसम बदल जाता है। वहां पर रंगोली के बैग्स लेकर पहुंचे। नवरात्रि का पहला दिन था। सुबह पांच बजे उठे, वहां तेज बारिश हो रही थी। वहां के मंदिर के जो पुजारी हैं, उनसे कहा था कि हमें यहां पर रंगोली बनानी हैं। तो उन्होंने बोला कि नहीं, तीन किलोमीटर पर बर्फ गिरी है तो आप यहां पर रंगोली तो बना ही नहीं पाओगे, आप सोच भी नहीं सकते, तो हमने वहां से तिरपाल खरीदी। इसी बीच बारिश बंद हो गई। रंगोली दो दिन तक वहां पर रही। एक बारिश का कतरा भी नहीं आया। तो वहां के पुजारी ने भी कहा कि आपकी भक्ति की शक्ति को हमने देखा है।
संवाद में दुनिया में अपनी रेत कला के लिए मशहूर सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक और रंगोली आर्टिस्ट शिखा शर्मा अपने विचार साझा कर रहे हैं। शिखा शर्मा अपनी रंगोली कला के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। उन्हें सुरीली रंगोली क्वीन का खिताब भी प्राप्त है। शिखा सात बार इस कला से विश्व रिकॉर्ड बना चुकी हैं।
सबसे पहले समझने की जरूरत है कि शिक्षा एक विशेष टॉपिक क्यों है? आप शिक्षा में कुछ भी बदलाव लाते हैं, तो उसका परिणाम आपको तुरंत दिखाई नहीं देगा। इसका असर सामने आने में कम से कम 10 साल लग सकते हैं, कुछ चीजें पहले बदलेंगी, कुछ बाद में। यह एक जटिल मुद्दा है और कई समस्याएं हैं। यह समस्याएं छात्रों, सरकार और संस्थानों के स्तर पर हैं। छात्रों के स्तर पर छात्र नहीं पढ़ना चाहते, यह एक ग्राउंड रियलिटी है। अगर आप छात्र से कहेंगे कि यह पढ़ना है, यह पढ़ना है, तो उनमें एक स्वाभाविक प्रतिरोध (inherent resistance) होगा। उन्हें यह समझाना पड़ेगा कि क्यों पढ़ना है।
नई शिक्षा नीति को उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ लागू किया जा रहा है और आगे इसको बढ़ाएंगे। सरकार पहले सभी सरकारी स्कूलो को कवर करने के बाद प्राइवेट स्कूलों को भी जोड़ने का काम करेगी। कौशल विकास के लिए जो केंद्र की नीति है, उसमें सरकार अपना पूर्ण योग्यदान कर रही है। आईएएस डॉ हरिओम ने केंद्र द्वारा चल रही कौशल विकास के बारे में बताते हुए कहा कि दीनदायल कौशल विकास योजना, इसमें 1.5 लाख से अधिकांश लाभार्थी शामिल हो चुके है। पीएम इंटर्नशिप योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी स्कीम को कौशल विकास विभाग संचालित कर रहा है। आईएएस डॉ हरिओम ने कौशल विकास में आने वाली दिक्कतों के बारे में कहा कि हर इंडस्ट्री, स्किल, मार्केट की इकोलॉजी होती है। उसमें लीगल फ्रेम वर्क बेहद जरूरी है। हम स्कीम को लागू कर सकते है, लेकिन जो सोशल फ्रेम वर्क है उसको बदलना बहुत जरूरी है। जैसे हाथ से काम करना छोटा काम है, व्हाइट शर्ट पहनकर काम करना अच्छा है। लेकिन स्किल हाथ का हुनर है।
आईएएस डॉ हरिओम ने लखनऊ में आयोजित अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में शिक्षा और कौशल का समन्वय विशेष पर अपनी बात रखीं। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा को कोशल से जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने "प्रवीण" एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसकी शुरुआत 2016 से हुई थी। लेकिन अभी हमने 200 सरकारी इंटर कॉलेज है, उसमें 25 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को 2024-25 में इनरोल किया है। उसमें हमने 100 करोड़ का बजट रखा है। इसमें कक्षा 9वीं और 11वीं में पढ़ने वाले छात्रों को कोई एक स्किल देने की कैम्पैन शुरू किया है। यूपी के 60 जिलों को इसके तहत कवर किया गया है, जल्द ही पूरे उत्तर प्रदेश में इसको लागू किया जाएगा।
एआई पर बात करते हुए प्रो. अनिल ने कहा कि एआई शिक्षा पर नकारात्मक और साकारात्मक, दोनों प्रभाव डाल रहा है, लेकिन हमें साकारात्मक पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। एआई का इस्तेमाल तेजी से बेहतर सीखने के लिए एआई का इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन यह समझना जरूरी है कि कहां लक्ष्मणरेखा खीचनीं है।
राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (एनईटीएफ) के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति आई, उस समय से अब तक करीब साढ़े चार साल हो गए, धीरे-धीरे कौशल विकास योजना, या हम जो नॉर्मल एजुकेशन सिस्टम जो होती है शिक्षा व्यवस्था में कैसे लोगों को जोड़ना है कौशल के साथ, इस पर धीरे-धीरे काम शुरू हुआ है। लेकिन अभी तक संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि अभी तक बहुत सारे स्कूलों में अभी तक चिंता का विषय जरूर है। लेकिन मैं दो चीजों के बारे में बताना चाहूंगा कि एक एक्सपेरिमेंट के तौर पर नीति आयोग की तरफ से टिंकरिंग लैब्स की शुरुआत हुई, दस हजार स्कूलों में टिंकरिंग लैब्स हैं, अगले 5 वर्षों में और 50,000 टिंकरिंग लैब स्कूलों में होंगे। एनईपी छठी कक्षा से ही कौशल विकसित करने पर केंद्रित है। शिक्षा प्रणाली की पुनर्निर्माण हो रहा है। इसमें एनईपी बड़ी भूमिका में है। प्राथमिक स्तर पर जब लिखित परीक्षा के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया के अलावा क्रिटिकल थिंकिंग, एनालिटिक एबिलिटी विकसित करने पर काम किया जाएगा, तो युवा खुद नवाचार की ओर बढ़ेंगे।
संवाद में शिक्षा और कौशल (स्किल) के बीच बेहतर तालमेल या समन्वय को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस मंथन में प्रमुख रूप से अनिल सहस्त्रबुद्धे, डॉ. हरिओम और डॉ. कृष्णमूर्ति बातचीत कर रहे हैं। इस प्रेरणादायक सत्र से युवा वर्ग को अपने भविष्य की दिशा तय करने में काफी मदद मिलेगी।
प्रसाद ने कांग्रेस के बारे में कहा कि उनके पास कोई वैकल्पिक सोच नहीं है। वहां रहते हुए आप जनसेवा का काम नहीं कर सकते हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं के बारे में पूछे जाने पर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस जनता की भावनाओं को रिप्रेजेंट नहीं कर रही है, इसलिए उन्हें हर जगह हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस और भाजपा में जमीन आसमान का अंतर है। भाजपा के पास एक अलग विजन है, जनाधार है, एक व्यापक संगठन है। सभी लोगों के लिए अवसर है। नए नेतृत्व पैदा करने की पार्टी के पास क्षमता है। भाजपा देश में नया नेतृत्व देने में सक्षम है। कांग्रेस के पास ऐसा कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जो विभाजन की बात करते हैं वे कभी सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जब वोट देने की बात होगी तो लोग देश में मोदी जी को और प्रदेश में योगीजी को ही चुनेंगे।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष मुद्दा विहिन है। उनके पास कोई विजन नहीं है। यूपी की पहचान बदली है इसे पूरे विश्व ने देखा है, विपक्ष को यह नहीं दिख रहा है तो यह उनके विजन की गलती है। कानून अपना काम कर रहा है। कानून सबके लिए समान है। जो काम हो रहे हैं, उससे पूरे विश्व के सामने भारत का डंका बज रहा है। यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा में सिर्फ बातें नहीं होती बल्कि काम की बातें होती है। यहां कोई यह नहीं सोच सकता कि हम नहीं होंगे तो काम नहीं होगा। यहां की सोच है कि यदि आप काम करते हैं तो आप पद के लायक हैं और एक दिन आप आगे बढ़ेंगे।
एआई पर जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार के विजन में एआई की टॉप प्रायोरिटी है। सीधे पीएम इसे मॉनिटर करते हैं। दस हजार करोड़ की राशि का प्रबंध सिर्फ एआई मिशन के लिए किया गया है। एआई के लिए डेटा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस दौरान जैम की भी चर्चा की। जिसमें जे का मतलब जनधन खाता है। ए का मतलब आधार और एम का मतलब मोबाइल फोन हैं। ये सभी एक डेटा के रूप में भारत की पूंजी का निर्माण करते हैं। सरकार एआई मिशन पर तन्मयता के साथ काम कर रही है। भारत में भी घर-घर में गैस चूल्हा जल रहा है। भारत के प्रति धारणा को बदलने की जरूरत है। मोदी जी का नेतृत्व देश में और योगी जी का नेतृत्व प्रदेश में ठोस रणनीति के साथ काम कर रही है। हम वर्ल्ड एलएलएम मॉडल विकसित करेंगे। एआई सिर्फ भाषणों में न रहे, हमारी यह चेष्टा है। हम इसका कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल करना चाहते हैं ताकि इसका आम लोगों को लाभ मिले।
एक सवाल के जवाब में केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि डबल इंजन की सरकार की कोशिश है कि नौजवान पीढ़ी को हर सहायता मुहैया कराई जाए। इस दौरान उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत टैलेंट कैपिटल है। उनके लिए सरकार सकारात्मक माहौल मुहैया कराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार बहुत ही संवेदनशील है। सरकार अपनी कान और अपनी आंख खुली रखे हुए है और बदलावों के अनुसार नई-नई रणनीतियां बना रही है। सरकार युवाओं को दिशा देने का काम कर रही है।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार क्या है? केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि यूपी डबल इंजन की सरकार का रोल मॉडल है। उन्होंने कहा कि यूपी बड़ी चीजें करने के लिए तैयार है। हमने बड़े बदलाव किए हैं। कुंभ के आयोजन से यूपी की एक अलग पहचान बनी है। सेमीकंडक्टर के मामले में हम आगे बढ़ रहे हैं। हम डिस्प्ले चिप पर काम कर रहे हैं। यूपी की धरती पर इसका निर्माण होगा। सरकार इसके निर्माण में 50% से अधिक का योगदान देगी।
केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने अमर उजाला के मंच पर कारोबार और निर्यात बढ़ाने की चुनौतियों पर बात की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लखनऊ भारतीय राजनीति में खास महत्व रखता है। लखनऊ से मेरा बहुत अहम नाता रहा है। लखनऊ की एक अलग ही हवा है। यहां के लोग, यहां का खाना और यहां की बारीकियां यहां आकर ही पता चलती है। यहां आते ही हवा बदल जाती है।
सीएम योगी ने कहा कि जब 13 जनवरी से 26 फरवरी के बीच में महाकुंभ का आयोजन प्रयागराज की धरती पर हम सबको आयोजित करने का अवसर मिला। डबल इंजन सरकार के सामर्थ, उत्तर प्रदेश के लोगों के आतिथ्य सत्कार की परंपरा और महाकुंभ में आने वाले लोगों की उत्सुकता। पूरा भारत कुंभ में आया। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के लोग रहे हों, महाराष्ट्र या गुजरात से जुड़े श्रद्धालु रहे हों। अरुणाचल, मणिपुर, त्रिपुरा या असम से जुड़े हुए वहां के श्रद्धालु और संत रहे हों या फिर उत्तर भारत से जुड़े हुए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड से लेकर पूरे उत्तर क्षेत्र से जुड़े हुए लोग एक साथ उत्तर प्रदेश के अंदर इन 45 दिनों के आयोजनों में जुड़े। नेपाल और भूटान से भी बहुत संख्या में श्रद्धालु आए थे। दुनिया में 100 से अधिक देशों के श्रद्धालु भी महाकुंभ के साक्षी बने। मुझे लगता है दुनिया में इतने लंबे समय तक चलने वाला आयोजन इतनी बड़ी संख्या में होने वाले किसी आयोजन में इतनी बड़ी संख्या में होने वाले आयोजन में उपस्थिति हो, वह एक विहंगम दृश्य पहली बार इतने वृहद पैमाने पर देखने को प्रयागराज की धरती पर देखने को मिला। इसको लेकर हर व्यक्ति अभिभूत था। यह दृश्य हमारे सामने आया था। यह हमारा सौभाग्य था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए जो व्यवस्थाएं की थीं उन व्यवस्थाओं से अभिभूत होकर हर व्यक्ति जाता था। जो जाता था, वो त्रिवेणी का जल लेकर जाता था। जो आए थे वो तो सौभाग्य मानता ही था। जो किन्ही कारणों से नहीं आए उनके लिए उनके घर तक गंगाजल पहुंचाने का कार्य वो श्रद्धालु करते थे जो प्रयागराज महाकुंभ के साक्षी बने। आपने देखा होगा, जो आया था उन सबने फोर्स की बहुत तारीफ की और इन 45 दिनों के अंदर प्रयागराज महाकुंभ के अंदर दो चीजों की चर्चा हर व्यक्ति करता था। एक स्वच्छता और दूसरा पुलिस के बिहेवियर की। हर व्यक्ति इसकी तारीफ करता था। स्वच्छता... स्वच्छता का एक मानक कैसे होना चाहिए। एक टेम्पररी सिटी में सबकुछ अस्थायी, तब भी कहीं भी एक तिनका नहीं, स्वच्छ और सुंदर वातावरण आ रहे हैं। करोड़ों लोग आ रहे हैं। कहीं कोई गंदगी नहीं। पुलिसकर्मी लोगों के सहयोग करने में इंतजार नहीं रहे थे। पुलिसकर्मियों ने आवश्यकता पड़ने पर 16-16 घंटे ड्यूटी की जनता की सेवा की। सर्दी, गर्मी, किसी की परवाह नहीं की, जनता की सेवा में जुटे रहे। अन्य विभाग के लोग भी जनता की सेवा इसी स्फूर्ति से जुटे रहे।
डॉ मिकी ने कहा कि कहा कि नाश्ता तगड़ा होना चाहिए, यह बहुत बड़ा मिथ है। नाश्ता हल्का होना चाहिए, फल-अंकुरित आहार होना चाहिए। अगर सर्दियों का मौसम है तो ठीक है ड्राइफ्रट्स। घी वाला दूध, इसका आहर हो जाए। दोपहर को 12 बजे तक हमारी पाचन क्रिया कमजोर होती है। सुबह छह से 10 तक कफ काल और सुबह 10 से दोपहर दो तक पित्त काल होता है। कफ काल में खाया नहीं जाता। पित्त काल में खाया जाता है।
डॉ. मिकी मेहता ने कहा कि सुबह का समय आपके हाथ में है। एक बार आप बाहर निकल गए तो लाइफ शायद नियंत्रण से छूट जाए। पर सुबह आपके हाथ में हैं। अगर सुबह उठते ही यम, नियम, आसन, प्रयाध्यन, ध्यान आदि चीजों की दिनचर्या रखेंगे तो आप योगी बन सकते हो। योगी होकर भी आप सांस्कारिक जीवन जी सकते हो।
'जीवन शैली में छिपा है सेहत का राज' सत्र में डॉ. मिकी मेहता अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें सारी चीजें सुक्ष्म रूप से करनी है, तोड़-फोड़ मारपीट से दूर रहे। योग की परिभाषा है स्वयं में स्थि, स्वयं में उपस्थित, स्वयं में होना, स्वयं को होने देना, स्वयं में स्वतंत्र बनना, स्वतंत्रता का स्वामी बनना, अंतर्यामी बनना, ऊर्ध्वगामी बनना, स्वामी बाबा राम देव बनना। उन्होंने मैं 54 साल से योग कर रहा हूं। 45 साल इस व्यवसाय में हो गए हैं।
अमर उजाला संवाद 2025 कार्यक्रम आप अमर उजाला के यूट्यूब चैनल, अमर उजाला उत्तर प्रदेश के यूट्यूब चैनल, अमर उजाला के इंस्टाग्राम पेज, अमर उजाला के फेसबुक पेज और अमर उजाला के एक्स/ट्विटर पेज पर लाइव देख सकते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग अतिथियों से जुड़े वीडियोज भी आप इन चैनलों पर देख सकते हैं। इस कार्यक्रम से जुड़े लाइव अपडेट्स और इंटरव्यू आप Amarujala.com पर भी पढ़ सकते हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद 2001 में सक्रिय राजनीति में आए। वह 2004 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार शाहजहांपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और जीते। 2008 में केंद्रीय इस्पात मंत्री बने। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में लखीमपुर की धौरहरा सीट से सांसद चुने गए थे। जितिन प्रसाद यूपीए सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री रहे। इसके बाद 2014 का लोकसभा, 2017 का विधानसभा और 2019 का लोकसभा चुनाव वे हार गए। साल 2021 में जितिन प्रसाद कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने जितिन प्रसाद को उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भेजा। प्रदेश में लगातार दूसरी बार भाजपा की सरकार बनी तो जितिन प्रसाद को योगी सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री बनाया गया। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से भाजपा ने मौजूदा सांसद वरुण गांधी का टिकट काटकर जितिन को दिया। यहां से चुनाव जीतकर वह फिर सांसद बने। फिर जितिन प्रसाद ने एक दशक के बाद केंद्रीय कैबिनेट में वापसी की।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का सियासी सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1989 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद 1990 में वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। इसके 12 साल बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए और 2002 के विधानसभा चुनाव में मल्लावां विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और 130 वोटों के करीबी अंतर से चुनाव हार गये थे। पाठक 2004 में कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हो गए। 2004 के लोकसभा चुनाव में वह बसपा के टिकट पर उन्नाव से सांसद चुने गए। बसपा ने उन्हें सदन में उपनेता बनाया, वहीं 2009 में मायावती ने ब्रजेश पाठक को राज्यसभा भेज दिया। वह सदन में बसपा के मुख्य सचेतक रहे। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में ब्रजेश पाठक उन्नाव लोकसभा सीट से दूसरी बार मैदान में थे, लेकिन यह चुनाव हार गए थे। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 22 अगस्त 2016 को ब्रजेश पाठक बीजेपी में शामिल हो गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता और कानून मंत्री बनाया गया। योगी सरकार 2.0 में उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली।
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भाजपा ने पहली बार वर्ष 2002 में प्रयागराज शहर पश्चिमी से माफिया अतीक के खिलाफ उन्हें चुनाव मैदान में उतारा था। इस चुनाव में केशव प्रसाद हार गए। वर्ष 2007 में भाजपा ने फिर केशव को शहर पश्चिमी से प्रत्याशी बनाया, लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने फिर से केशव को उनके गृह नगर सिराथू से प्रत्याशी बनाया और वह भारी मतों से जीतकर विधायक बने। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में केशव को भाजपा ने फूलपुर संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया। इसमें केशव करीब तीन लाख मतों से सपा प्रत्याशी धर्मराज सिंह पटेल से चुनाव जीते। वर्ष 2016 में प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रचंड बहुमत से जीती और केशव को डिप्टी सीएम का दायित्व सौंपा गया। 2022 में फिर से डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी गई।
समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से शुरू होती है, जहां साल 2000 में हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल की और फिर लोकसभा में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण कमेटी के सदस्य भी बने। साल 2004 तक 13वीं लोकसभा के सदस्य रहे अखिलेश यादव ने बतौर सांसद आचार समिति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वन एवं पर्यावरण कमेटी के सदस्य की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद अखिलेश यादव का लोकसभा पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा, साल 2004 और 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर अखिलेश यादव फिर से लोकसभा पहुंचे। साल 2012 में उत्तर प्रदेश के 20वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। यहीं से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई। 1998 में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ संसद पहुंचे तो उस समय वह सबसे कम उम्र के सांसद थे, वो 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने। वहीं 2017 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और 2022 में दोबारा मुख्यमंत्री बने।
संवाद के पहले दिन की शाम शौर्य और मनोरंजन की गाथाओं से ओतप्रोत होगी। कीर्ति चक्र से सम्मानित बीएसएफ कमांडेंट नरेंद्र धर दुबे शौर्य और पराक्रम की गाथाओं के साथ लोगों से रूबरू होंगे। वहीं, इमरान हाशमी और फिल्म निर्देशक तेजस देओस्कर बताएंगे कि फिल्मी कहानियां कितनी सच्ची होती हैं।
पहले दिन के संवाद में बॉलीवुड डायरेक्टर विशाल फुरिया शायर अजहर इकबाल के साथ ही आलंपियन बॉक्सर विजेंदर सिंह, वर्ल्ड चैंपियन बॉक्सर निखत जरीन भी मौजूद रहेंगी। आध्यात्मिक गुरु अनिरुद्धाचार्य अपनी बात रखने के साथ ही लोगों के सवालों के जवाब भी देंगे।
उद्घाटन सत्र के बाद शिक्षाविद् प्रोफेसर अनिल सहस्रबुद्धे, हेल्थ गुरु डॉ. मिकी मेहता, अंतरराष्ट्रीय रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक, अंतरराष्ट्रीय कलाकार शिखा शर्मा और यूपीसीडा के सीईओ आईएएस मयूर माहेश्वरी मौजूद रहेंगे। बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी, अभिनेत्री नुसरत भरूचा व जूही बब्बर सोनी लोगों से रूबरू होंगी।
अमर उजाला संवाद में आज से दो दिन तक बात होगी तेजी से आगे बढ़ते देश के साथ वैश्विक पटल पर छाप छोड़ते उत्तर प्रदेश के विकास की। बात होगी प्रदेश के विकास पथ पर बढ़ने में महिला शक्ति के योगदान की। इस बातचीत में देश की नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। संवाद का शुभारंभ लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमतीनगर में सुबह 10 बजे से होगा। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के विकास का खाका खींचेंगे और संवाद के लिए मंच पर रहेंगे।