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Build 2026 Lucknow Live: विकास का नया इतिहास लिख रहा है यूपी, मंत्री नंदी ने गिनाईं भविष्य की बड़ी योजनाएं

Fri, 09 Oct 2026 02:55 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

खास बातें

UP infrastructure conclave 2026 Live Updates in Hindi: लखनऊ में अमर उजाला बिल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा पर मंथन जारी है। स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा, औद्योगिक निवेश, रियल एस्टेट, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं। प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर विचार रख रहे हैं।
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लाइव अपडेट

02:54 PM, 09-Oct-2026

विकास का नया इतिहास लिख रहा है यूपी

मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि यह सम्मेलन केवल भवन निर्माण या रियल एस्टेट तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य, उसकी आर्थिक संभावनाओं और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश की भूमिका पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच भी है।

उन्होंने कहा कि आज हम ऐसे दौर में खड़े हैं, जब नए भारत और नए उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी नए आत्मविश्वास, नई आकांक्षाओं और नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, औद्योगिक विस्तार, निवेश और रोजगार सृजन उत्तर प्रदेश के विकास के प्रमुख केंद्रबिंदु बनकर उभरे हैं।

नंदी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ आर्थिक प्रगति की नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। यह सम्मेलन प्रदेश के विकास की दिशा, आर्थिक क्षमता और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

02:37 PM, 09-Oct-2026

पहले निवेशकों को था खतरा, अब प्रदेश में बदल रहा माहौल

डिप्टी सीएम ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में निवेश करना चुनौतीपूर्ण था। निवेशकों को उद्योग स्थापित करने से लेकर उसका संचालन करने तक कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार के समय असामाजिक तत्व उद्योग संचालकों से अवैध वसूली करते थे और उन्हें अपना कारोबार चलाने में दिक्कतें आती थीं।

उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया है। इससे निवेश के लिए नए अवसर तैयार हुए हैं। निवेश के प्रस्ताव अब केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बुंदेलखंड और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी निवेशक रुचि दिखा रहे हैं।

बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक निवेश की संभावनाएं

केशव मौर्य ने कहा कि प्रदेश में विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य राजमार्ग निवेश के नए रास्ते खोल रहे हैं। लखनऊ में डिफेंस कॉरिडोर के तहत ब्रह्मोस मिसाइल के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश की भूमिका बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में निवेश के प्रस्ताव मिल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि अब तक प्राप्त सभी निवेश प्रस्ताव वास्तविक निवेश में तब्दील नहीं हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रस्तावित निवेश को धरातल पर उतारा जाए। इसके लिए आने वाले समय में एक और ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह आयोजित करने की तैयारी है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रदेश में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, मजबूत कनेक्टिविटी और निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। इससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

बैलेट पेपर से होने वाले चुनाव में भी भाजपा जीतेगी

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव चुनाव में पूरा जोर लगा लें, लेकिन शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी का खाता खुलने वाला नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बैलेट पेपर से होने वाले चुनाव में भी भाजपा जीत दर्ज करेगी।

केशव मौर्य ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वह लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की तीसरी बार सरकार बनेगी। उनके मुताबिक, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी की पार्टियां गठबंधन कर लें और अन्य दलों को भी साथ ले आएं, तब भी भाजपा की जीत का रास्ता नहीं रोक पाएंगी। मौर्य ने दावा किया कि जब जनता विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहती है तो वह समाजवादी पार्टी की साइकिल को पंचर कर देगी।
 

02:36 PM, 09-Oct-2026

एक्सप्रेसवे निर्माण में देश में अग्रणी है यूपी

नेशनल ब्यूरो, पॉलिटिकल एडिटर राजकिशोर के साथ बातचीत में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया है। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। प्रदेश केवल आबादी के मामले में ही सबसे बड़ा नहीं है, बल्कि एक्सप्रेसवे निर्माण में भी अग्रणी है। सरकार का प्रयास है कि बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे सहित अन्य मार्गों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने का काम किया गया है। सड़क कनेक्टिविटी के साथ रेल और हवाई संपर्क को भी बेहतर बनाया गया है। सरकार आगे भी इन सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।

केशव मौर्य ने कहा कि प्रदेश में हर घर तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है, जबकि घरों तक पाइपलाइन से पीने का पानी उपलब्ध कराने का काम अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि शहरों की तरह गांवों में भी लोगों को पाइपलाइन से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, ताकि ग्रामीणों को हैंडपंप और कुओं पर निर्भर न रहना पड़े।

उन्होंने बताया कि जिन परिवारों के पास रहने के लिए पक्का घर नहीं था, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उनके अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 65 लाख आवास दिए जा चुके हैं। आगे भी पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी की गई है।

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02:22 PM, 09-Oct-2026

विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य जरूर पूरा होगा

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का विषय भी आज जनचर्चा का केंद्र बन गया है। लोगों को विश्वास रखना चाहिए कि वर्ष 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य जरूर पूरा होगा। उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों के शासन को समाप्त करने के लक्ष्य पर विश्वास नहीं किया होता और संघर्ष से पीछे हट गए होते, तो देश को आजादी मिलने में मुश्किल होती। उनके संघर्ष के परिणामस्वरूप ही देश स्वतंत्र हुआ। इसी तरह आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य भी प्रयासों से हासिल किया जा सकता है।

उत्तर प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है

डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को व्यापक आकार देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों और ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध के कारण पैदा हुए पेट्रोलियम संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद देश मजबूती से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है।

उन्होंने विपक्षी दलों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा है तो वे उस पर खुलकर चर्चा करें। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि देश अब विकास के रास्ते पर आगे बढ़ चुका है और तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा।

विपक्षी दल तुष्टीकरण की राजनीति करते रहे हैं

केशव मौर्य ने कहा कि वे इस बात के पक्ष में नहीं हैं कि कौन व्यक्ति कौन-सा तिलक लगाए या किस मंदिर में दर्शन करने जाए। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल पहले तुष्टीकरण की राजनीति करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास से यदि रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, तो ऐसे विकास कार्यों को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों के सहारे राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी मतदाता की मृत्यु हो चुकी है तो क्या उसका नाम मतदाता सूची में बने रहना चाहिए। उनका कहना था कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना जरूरी है। अंत में उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अभी मुंगेरीलाल के सपने न देखें। यूपी में फिर भाजपा की सरकार बनेगी। 
 

02:19 PM, 09-Oct-2026

विकसित गांवों से ही साकार होगा विकसित भारत का सपना

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश के हित में कृषि के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाने की जरूरत है और इस दिशा में प्रयास भी किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार रुकने वाली नहीं है। इस बार प्रदेश के कई जिलों में अधिक बारिश हुई है तो कई जगह बाढ़ की समस्याएं भी सामने आई हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों में सामान्य वर्षों की अपेक्षा कम बारिश हुई है। इन चुनौतियों के बावजूद प्रदेश सरकार विकास के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का लक्ष्य रखा है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में काम कर रही है। विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब गांवों का विकास होगा। गांवों को उनकी बदहाली पर नहीं छोड़ा जा सकता। वहां के लोगों की जरूरतों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पूरा करना होगा।

कोरोना काल में लौटे श्रमिकों का डाटा सरकार के पास

केशव मौर्य ने कहा कि गांवों में भी अनेक प्रतिभाएं हैं, लेकिन रोजगार के अवसरों की कमी के कारण पहले लोगों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था। कोरोना काल में जब महामारी का संकट आया तो दूसरे प्रदेशों में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के श्रमिक बड़ी संख्या में अपने घर लौटे। उस समय उनकी सूची तैयार की गई और यह जानकारी जुटाई गई कि वे दूसरे राज्यों में किस तरह का काम करते थे। इसका पूरा डाटा सरकार के पास है।

उन्होंने कहा कि पहले रोजगार की तलाश में लोगों को महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में जाना पड़ता था। अब उसी तरह के रोजगार के अवसर उत्तर प्रदेश में भी पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश आज हर दृष्टि से आगे बढ़ रहा है।

कनेक्टिविटी के विस्तार से बदली प्रदेश की तस्वीर

डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और सुशासन के लिए कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाना जरूरी है। पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में इस दिशा में काम किया गया है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे क्षेत्र थे, जिनके विकास के बारे में पहले सरकारों की ओर से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता था। पिछले वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार ने कनेक्टिविटी के विस्तार पर बड़े पैमाने पर काम किया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़क और अन्य संपर्क सुविधाओं का विस्तार हुआ है। दूसरे राज्यों में रहने वाले उत्तर प्रदेश के लोग जब अपने घर लौटते हैं तो उन्हें प्रदेश में आए बदलाव का एहसास होता है। हालांकि, अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा, "अभी तो यह झांकी है, पूरी पिक्चर बाकी है।"

युवाओं को रोजगार देने के लिए निवेश और स्टार्टअप पर जोर

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि लोगों को भरोसा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार विकास, सुशासन और गरीबों के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम करेगी। किसानों की आमदनी बढ़ाने, महिलाओं के सशक्तीकरण और युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश में करीब 10 लाख सरकारी नौकरियां देने में सफलता मिली है। हालांकि, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में केवल सरकारी नौकरियों से सभी युवाओं की जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं। इसलिए बड़े पैमाने पर निवेश लाने और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने अवसर उपलब्ध कराए हैं। इसके लिए बजट में भी व्यवस्था की गई है।

परिवार और गांव को आगे बढ़ाने का किया आह्वान

डिप्टी सीएम ने लोगों से अपने परिवार और गांव को आगे बढ़ाने के साथ प्रदेश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार से जनता की जो अपेक्षाएं हैं, उन्हें पूरा करने के लिए सरकार समर्पित भाव से काम कर रही है। युवाओं को रोजगार, किसानों को बेहतर अवसर, महिलाओं को सशक्तीकरण और गरीबों के जीवन में बदलाव लाने के प्रयासों से प्रदेश के भविष्य को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।
 

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02:12 PM, 09-Oct-2026

एक जिला-एक उत्पाद से वैश्विक बाजार तक पहुंचेंगे स्थानीय उत्पाद

डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में विशिष्ट उत्पादों की लंबी शृंखला है। फिरोजाबाद में कागज से बने आकर्षक उत्पादों और मूर्तियों का काम होता है, जबकि मुरादाबाद पीतल के उत्पादों और धातु शिल्प के लिए प्रसिद्ध है। इसी तरह कन्नौज के इत्र और आगरा के पेठे की अपनी अलग पहचान है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों में देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की क्षमता है। एक जिला-एक उत्पाद जैसी पहल से इन उत्पादों को पहचान दिलाने और उनके बाजार का विस्तार करने के अवसर मिले हैं। प्रदेश में खरीदने की क्षमता बढ़ने के साथ निर्यात की संभावनाएं भी विकसित हो रही हैं। स्थानीय कारीगरों, छोटे उद्यमियों और उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मददगार होगा।

'सबका साथ, सबका विकास' से आगे बढ़ेगा प्रदेश

केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि सात अक्तूबर को प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित किया था। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदेश का विकास तभी व्यापक रूप से संभव है, जब योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, कौशल विकास और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने के क्षेत्र में अभी और काम करने की जरूरत है। हालांकि, प्रदेश में विकास को लेकर पैदा हुआ उत्साह आने वाले समय के लिए सकारात्मक संकेत है।

डिप्टी सीएम के अनुसार, विकास का लक्ष्य केवल बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमियों के लिए अवसर और स्थानीय उत्पादों के लिए बड़े बाजार तैयार करना भी है। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश अपनी आर्थिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर सकता है।

02:10 PM, 09-Oct-2026

अब जातिवाद नहीं, विकास के मुद्दे पर हो रही राजनीति

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब विकास राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है। पहले जो राजनीतिक दल जातिवाद और तुष्टीकरण के सहारे चुनाव लड़ते थे, वे भी अब विकास की बात करने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात से शुरू हुई विकास की यात्रा देशभर में आगे बढ़ी है। केंद्र और राज्यों में डबल इंजन की सरकार होने से विकास कार्यों को गति मिली है और गरीबों के जीवन में बदलाव आया है।

‘प्रदेश विकास का पर्याय’ कार्यक्रम में इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रदेश की विकास यात्रा पर चर्चा करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की दिशा में काम करना जरूरी है। प्रदेश में बड़ी युवा आबादी है। यदि युवाओं को विभिन्न उद्योगों और क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए तो उन्हें अपने ही जिले और प्रदेश में रोजगार मिल सकता है। इससे उद्योगों को कुशल श्रमिक मिलेंगे और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।

काशी-अयोध्या से लेकर प्रयागराज तक इंफ्रास्ट्रक्चर का महत्व

केशव मौर्य ने धार्मिक पर्यटन का उल्लेख करते हुए कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ धाम, गंगा घाटों के विकास और सड़क, रेल व हवाई कनेक्टिविटी में सुधार से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। इसी तरह अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मथुरा-वृंदावन सहित प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों पर भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

उन्होंने वर्ष 2025 में आयोजित प्रयागराज महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 60 करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने के दावे के संदर्भ में व्यवस्थाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका महत्वपूर्ण रही। यदि श्रद्धालुओं के आवागमन, स्नान और सुरक्षा के लिए समुचित इंतजाम नहीं किए जाते तो इतने बड़े आयोजन का प्रबंधन मुश्किल होता। उन्होंने कहा कि बड़े आयोजनों की सफलता के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा और बेहतर व्यवस्थाएं आवश्यक हैं।

02:07 PM, 09-Oct-2026

अयोध्या में भी बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

केशव प्रसाद मौर्य ने अयोध्या का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण के बाद यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया से श्रद्धालुओं के आने से अयोध्या की पहचान और धार्मिक पर्यटन का दायरा बढ़ा है।

उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को प्रदेश की आर्थिक प्रगति, निवेश और पर्यटन से जोड़ते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में उपलब्ध संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए सड़क, रेल, हवाई संपर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक है।

डिप्टी सीएम के वक्तव्य का मुख्य संदेश यह रहा कि विकास की योजनाओं और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रदेश की आर्थिक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। काशी और अयोध्या के उदाहरणों के जरिए उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी और धार्मिक स्थलों के विकास से पर्यटन को नई गति मिल सकती है।

02:06 PM, 09-Oct-2026
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य - फोटो : अमर उजाला

इंफ्रास्ट्रक्चर से बदली यूपी की तस्वीर

कार्यक्रम में पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बुनियादी सुविधाओं के विकास से ही बड़े पैमाने पर निवेश और पर्यटन की संभावनाओं को गति मिलती है। ‘प्रदेश विकास का पर्याय’ कार्यक्रम में उन्होंने गुजरात के विकास मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद तमाम चुनौतियों का सामना किया। बाद में गुजरात का विकास मॉडल देशभर में चर्चा का विषय बना।

उन्होंने कहा कि गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा उत्तर प्रदेश में भी हुई। उस समय प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण प्रमुख थे, लेकिन विकास को केंद्र में रखकर राजनीति करने की आवश्यकता महसूस की गई। मौर्य के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भी विकास की अपार संभावनाएं हैं। आबादी की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ यहां हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता है। इन संभावनाओं को साकार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी है।

इंफ्रास्ट्रक्चर से बढ़ा काशी का आकर्षण

उपमुख्यमंत्री ने वाराणसी का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2014 और 2017 से पहले की काशी और आज की काशी में बड़ा अंतर आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बाबा विश्वनाथ धाम का निर्माण, गंगा घाटों का विकास और सड़क, रेल व हवाई कनेक्टिविटी में सुधार से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ी है।

मौर्य ने दावा किया कि पहले काशी में प्रतिदिन लगभग 10 हजार लोग आते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब एक से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। उनके मुताबिक, बेहतर बुनियादी सुविधाओं ने वाराणसी को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
 

01:00 PM, 09-Oct-2026

सोलर सब्सिडी खत्म होने के बाद भी बनी रहेगी मांग?

चर्चा में इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा पर दी जाने वाली सब्सिडी को लेकर भी सवाल उठे। वक्ताओं ने इस बात पर विचार किया कि सरकारी सहायता से शुरुआती दौर में तकनीक को बढ़ावा मिलता है, लेकिन सब्सिडी कम होने या समाप्त होने के बाद भी उसकी मांग बनाए रखना जरूरी है।


घरेलू सोलर सिस्टम का उदाहरण देते हुए बताया गया कि तीन किलोवाट का प्लांट लगाने पर करीब दो लाख रुपये का खर्च आ सकता है, जिसमें लगभग एक लाख रुपये की सब्सिडी मिलने का उदाहरण दिया गया। इससे उपभोक्ता की शुरुआती लागत कम होती है। हालांकि, वास्तविक लागत और सब्सिडी उपभोक्ता की पात्रता, योजना और स्थापना की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

चर्चा में यह भी कहा गया कि सौर ऊर्जा की लागत, बिजली बिल में होने वाली बचत और रखरखाव का खर्च उपभोक्ता के फैसले को प्रभावित करते हैं। इसलिए तकनीक को इस स्तर तक किफायती बनाना जरूरी है कि सरकारी सहायता कम होने पर भी लोग इसे अपनाते रहें।

स्वच्छ तकनीक के साथ आर्थिक व्यवहार्यता भी जरूरी

वक्ताओं ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केवल सब्सिडी पर्याप्त नहीं है। इनके लिए जरूरी बुनियादी ढांचे का विकास, तकनीक की लागत और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी महत्वपूर्ण हैं।

भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करनी होगी रीसाइक्लिंग व्यवस्था

चर्चा का निष्कर्ष रहा कि सोलर ऊर्जा का विस्तार पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से किया जा रहा है, इसलिए उसके उपयोग के बाद पैदा होने वाले कचरे का सुरक्षित प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। उत्पादकों की जवाबदेही, आधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीक और आर्थिक रूप से सक्षम व्यवस्था विकसित करके ही सोलर वेस्ट की चुनौती से निपटा जा सकता है।

12:56 PM, 09-Oct-2026

2050 तक लाखों टन सोलर वेस्ट पैदा होने की आशंका

वक्ता ने कहा कि जिस गति से सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, उसे देखते हुए वर्ष 2050 तक प्रदेश में लाखों टन सोलर वेस्ट पैदा होने की आशंका है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में सोलर पैनलों के लिए समर्पित रीसाइक्लिंग प्लांट उपलब्ध हैं या नहीं और भविष्य में बढ़ने वाले कचरे का निस्तारण कैसे किया जाएगा।

ई-वेस्ट की 108 सुविधाओं का उल्लेख

चर्चा में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण और रीसाइक्लिंग के लिए करीब 108 यूनिट स्थापित हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद कुछ भारी धातुएं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए पुराने उपकरणों से उपयोगी सामग्री निकालने और शेष कचरे का सुरक्षित निस्तारण करना जरूरी है।

सोलर पैनलों की रीसाइक्लिंग के लिए भी मौजूदा सुविधाओं को तकनीकी रूप से उन्नत करने की संभावना है। हालांकि, इसके लिए सोलर पैनलों की संरचना और उनसे निकलने वाले कचरे की प्रकृति के अनुरूप तकनीक विकसित करनी होगी।

उत्पादकों की जिम्मेदारी तय करेगा ईपीआर

सोलर वेस्ट के प्रबंधन में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व यानी एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) को महत्वपूर्ण बताया गया। इस व्यवस्था के तहत उत्पादकों को अपने उत्पादों से पैदा होने वाले कचरे के प्रबंधन और रीसाइक्लिंग की जिम्मेदारी निभानी होती है।

चर्चा के अनुसार, इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से उत्पादकों और रीसाइक्लिंग इकाइयों को जोड़ा जाता है। उत्पादकों को निर्धारित नियमों के तहत रीसाइक्लिंग से संबंधित दायित्व पूरे करने होते हैं। इससे रीसाइक्लिंग इकाइयों को वित्तीय सहायता मिलने और उनके कारोबार को व्यवहार्य बनाने में मदद मिल सकती है।

12:38 PM, 09-Oct-2026

ग्रीन इंडस्ट्री को मिल सकती है नियामकीय प्रक्रिया में राहत

चर्चा के दौरान बताया गया कि उद्योगों का रेड, ऑरेंज और ग्रीन श्रेणियों में वर्गीकरण उनके प्रदूषण की संभावना और इस्तेमाल होने वाले ईंधन समेत अन्य मानकों के आधार पर किया जाता है।

ग्रीन श्रेणी के उद्योगों में प्रदूषण की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। ऐसे उद्योगों को संचालन की सहमति की अधिक अवधि और तुलनात्मक रूप से कम निरीक्षण जैसी नियामकीय सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे स्वच्छ तकनीक अपनाने वाले उद्योगों को कारोबार चलाने में सहूलियत होती है। 

50 से 100 किलोवाट के सोलर प्लांट पर भी फोकस

चर्चा में छोटी औद्योगिक इकाइयों के लिए सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया का सवाल भी उठा। उदाहरण के तौर पर गोरखपुर में आटा-चक्की चलाने वाले या कानपुर और उन्नाव में छोटी औद्योगिक इकाई स्थापित करने वाले कारोबारी को 50 से 100 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाना हो तो उसके लिए कर्ज हासिल करना कितना आसान होगा।

इस सवाल के केंद्र में यह था कि छोटी इकाइयों को भी बड़े कॉरपोरेट की तरह ग्रीन फाइनेंसिंग का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए बिजली के बिल, परियोजना की लागत और कर्ज चुकाने की क्षमता के आधार पर वित्तीय सहायता की प्रक्रिया को सरल बनाने की जरूरत है।

आठ करोड़ रुपये तक के कर्ज पर बिना गारंटी की सुविधा का उल्लेख

चर्चा में आठ करोड़ रुपये तक के कर्ज पर बिना कोलेटरल यानी अतिरिक्त संपार्श्विक गारंटी के वित्त उपलब्ध कराने की सुविधा का उल्लेख किया गया। इससे छोटी औद्योगिक इकाइयों के लिए सौर ऊर्जा में निवेश करना आसान हो सकता है।

ग्रीन फाइनेंसिंग से उद्योगों को मिल सकती है नई गति

चर्चा का प्रमुख निष्कर्ष यह रहा कि उत्तर प्रदेश में हरित ऊर्जा का विस्तार केवल बड़े सोलर पार्कों और कॉरपोरेट परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छोटी फैक्ट्रियों, दुकानों और स्थानीय उद्यमों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए आसान कर्ज और सरल प्रक्रियाओं की जरूरत है।

यदि बैंकिंग सहायता, नियामकीय प्रक्रियाओं और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, तो इससे उद्योगों की बिजली लागत कम करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। प्रदेश में ग्रीन फाइनेंसिंग के वास्तविक विस्तार का आकलन करने के लिए बैंकों के ऋण आंकड़े और छोटी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंच से जुड़े तथ्य भी महत्वपूर्ण होंगे।

12:34 PM, 09-Oct-2026

इन मुद्दों पर विस्तार से हुई चर्चा

उत्तर प्रदेश में उद्योगों को ग्रीन एनर्जी की ओर ले जाने के लिए सस्ती और आसान वित्तीय सहायता के साथ पर्यावरणीय मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है। सोलर प्लांट, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी परियोजनाओं के विस्तार में बैंकों की ग्रीन फाइनेंसिंग और सरकारी नियामक संस्थाओं की भूमिका अहम है। खासकर छोटी औद्योगिक इकाइयों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए कर्ज की प्रक्रिया आसान बनानी होगी। अमर उजाला के मंच पर आयोजित चर्चा में इन मुद्दों पर विस्तार से बात हुई।

एनर्जी सिक्योरिटी सबसे बड़ी चिंता

चर्चा के दौरान कहा गया कि देश के सामने ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। उद्योगों की बिजली की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सौर ऊर्जा समेत नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों का विस्तार महत्वपूर्ण हो जाता है। उत्तर प्रदेश में भी सोलर सिस्टम और अन्य हरित ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं हैं।

इस दिशा में बैंकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यूनियन बैंक समेत वित्तीय संस्थानों की ग्रीन लोन फाइनेंसिंग से जुड़े सवाल उठे। उद्योग जगत यह जानना चाहता है कि उत्तर प्रदेश में ग्रीन लोन का दायरा कितनी तेजी से बढ़ रहा है और छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों को इसका कितना लाभ मिल रहा है।

पर्यावरणीय मंजूरी में छह से सात महीने का समय

चर्चा में बताया गया कि सोलर पार्क, बैटरी परियोजनाओं और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे प्रोजेक्टों के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की समयसीमा परियोजना के आकार और प्रकृति पर निर्भर करती है। जिन परियोजनाओं को केंद्र सरकार के स्तर पर पर्यावरणीय मंजूरी की जरूरत होती है, उनमें औसतन छह से सात महीने तक का समय लग सकता है। इसमें परियोजना से जुड़े अध्ययन और आवश्यक दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया भी शामिल होती है।

वहीं, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिलने वाली कुछ सहमतियों के लिए औसतन 14 दिन का समय बताया गया। हालांकि, परियोजना की प्रकृति और दस्तावेजों की स्थिति के आधार पर वास्तविक समय अलग-अलग हो सकता है

12:26 PM, 09-Oct-2026

बढ़ती शहरी आबादी के बीच स्वच्छ हवा बड़ी चुनौती

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिल सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार भी इस दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ऊर्जा उत्पादन, परिवहन, उद्योग और शहरी गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन को एक साथ नियंत्रित करना होगा।

वक्ता ने कहा कि शहरों में घरों, वाहनों और उद्योगों की संख्या बढ़ने से ऊर्जा की मांग और प्रदूषण पैदा करने वाली गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे में वायु गुणवत्ता में सुधार को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा के लिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, बेहतर निगरानी, प्रभावी नियंत्रण उपाय और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना जरूरी है। मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शहरों के लिए स्थानीय स्तर पर रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि लोगों को स्वच्छ हवा मिल सके और शहरी विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे।

12:24 PM, 09-Oct-2026

भारत स्टेज मानकों से वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण

शहरी क्षेत्रों में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत स्टेज उत्सर्जन मानकों को क्रमिक रूप से सख्त करने से वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों को नियंत्रित करने में मदद मिली है।

उन्होंने कहा कि पुराने और नए वाहनों के उत्सर्जन में अंतर को समझना जरूरी है। उत्सर्जन मानकों में सुधार से वायु प्रदूषण को कम करने में योगदान मिला है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में इसका वास्तविक प्रभाव वाहनों की संख्या, यातायात, ईंधन के प्रकार और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

सौर और जैव ऊर्जा से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने का प्रयास

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ऊर्जा की खपत में काफी वृद्धि हुई है। इसके बावजूद सौर ऊर्जा और जैव ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों के विस्तार से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

12:22 PM, 09-Oct-2026
ग्रीन एनर्जी पर पैनल डिस्कशन - फोटो : अमर उजाला

सात वर्षों में सुधरी हवा की गुणवत्ता

उत्तर प्रदेश के शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब दिखाई देने लगा है। लखनऊ को इस वर्ष स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रथम पुरस्कार मिलना इसका उदाहरण है। पिछले सात वर्षों में शहर की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्वच्छ ईंधन, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल जैसे उपायों ने प्रदूषण कम करने में योगदान दिया है। हालांकि, मौसम संबंधी परिस्थितियां अब भी वायु प्रदूषण की गंभीरता को प्रभावित करती हैं।

अमर उजाला के मंच पर चर्चा के दौरान वक्ता ने कहा कि गाजियाबाद समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरों में भी वायु प्रदूषण को समझने के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान व्युत्क्रमण (टेंपरेचर इनवर्जन) की स्थिति बनने पर प्रदूषक जमीन के पास जमा हो जाते हैं। हवा की गति कम होने से उनका फैलाव नहीं हो पाता और शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।

बेहतर मॉनिटरिंग से सामने आ रही प्रदूषण की वास्तविक स्थिति

उन्होंने कहा कि पहले वायु गुणवत्ता की निगरानी का नेटवर्क इतना विकसित नहीं था और लोगों में भी प्रदूषण को लेकर जागरूकता कम थी। अब निगरानी व्यवस्था बेहतर हुई है और स्वच्छ हवा को लेकर लोगों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। इस वजह से प्रदूषण के आंकड़ों की तुलना करते समय निगरानी व्यवस्था में आए बदलावों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शहरों में आबादी, वाहनों और उद्योगों की संख्या बढ़ने के साथ ऊर्जा की खपत भी बढ़ी है। इसके बावजूद यदि वायु गुणवत्ता में सुधार दिखाई दे रहा है तो इसके पीछे प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए उपायों की भूमिका को समझना जरूरी है।
 

11:50 AM, 09-Oct-2026

सौर ऊर्जा और बायोगैस उत्पादन पर जोर

पैनल डिस्कशन के चर्चा में सामने आया कि उत्तर प्रदेश अब नवीकरणीय ऊर्जा, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन और औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। वहीं, गोरखपुर में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश से कई परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है। प्रदेश में पहली बार लौह अयस्क का खनन कर उससे स्टील उत्पादन तक का एकीकृत तंत्र विकसित करने की दिशा में भी काम हो रहा है। यह बातें अमर उजाला के मंच पर वक्ता ने कहीं।

सौर ऊर्जा और बायोगैस उत्पादन पर जोर

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। इसके साथ ही कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, देश में सीबीजी उत्पादन करने वाली इकाइयों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है।

उन्होंने कहा कि कृषि अपशिष्ट और अन्य जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन कर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस दिशा में अभी काफी संभावनाएं हैं और प्रदेश को इनका लाभ उठाने के लिए व्यवस्थित प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री की नई औद्योगिक नीति से भी इस क्षेत्र को गति मिलने की उम्मीद है।

अनियोजित शहरी विस्तार पर नियंत्रण जरूरी

वक्ता ने कहा कि प्रदेश में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में केवल नगर निगमों ही नहीं, बल्कि नगर पालिकाओं और टाउन एरिया में भी क्षमता निर्माण और नियोजन पर ध्यान देना होगा। शहरों के बाहरी क्षेत्रों में हो रहे अनियोजित विकास को नियंत्रित करना जरूरी है, ताकि आधारभूत सुविधाओं का विस्तार व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। शहरी विकास के लिए योजनाएं बनाने के साथ जमीन पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर परिणामों पर भी जोर देना होगा।

कानून-व्यवस्था में सुधार से बढ़ा निवेशकों का भरोसा

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। पहले उद्योगों और कारोबारियों के सामने सुरक्षा को लेकर जो चिंताएं थीं, उनमें कमी आई है। अब निवेशक प्रदेश में कारोबार और औद्योगिक परियोजनाएं स्थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मुंबई और अहमदाबाद जैसे वित्तीय केंद्रों में भी उत्तर प्रदेश, खासकर गोरखपुर को लेकर निवेशकों के बीच उत्साह दिखाई देता है। बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों से बातचीत में भी प्रदेश के प्रति बदला हुआ नजरिया सामने आता है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय सरकार के उन प्रयासों को दिया, जिनके तहत कानून-व्यवस्था और औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए मिशन मोड में काम किया गया।

गोरखपुर में 25 हजार करोड़ के निवेश की योजना

वक्ता ने बताया कि गोरखपुर में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी कई परियोजनाओं पर योजना बनाई जा रही है। इनमें लौह अयस्क के खनन से लेकर स्टील उत्पादन तक की पूरी औद्योगिक शृंखला विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उपलब्ध लौह अयस्क का इस्तेमाल कर प्रदेश में ही लोहा और स्टील तैयार करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। इससे कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद तक की औद्योगिक व्यवस्था विकसित होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक विकास पर जोर

उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक परियोजनाओं की योजना बनाते समय पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है। प्रस्तावित परियोजनाओं में टिकाऊ विकास, पर्यावरण अनुकूल तकनीक और कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।

प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सौर ऊर्जा, बायोगैस, खनन और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में निवेश उत्तर प्रदेश को औद्योगिक विकास की नई दिशा दे सकता है।
 

11:44 AM, 09-Oct-2026

एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर

अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा तक सीमित नहीं है। इनका इस्तेमाल औद्योगिक विकास, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए भी किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में विकसित किए गए 27 औद्योगिक क्लस्टर पूरी तरह बुक हो चुके हैं। इससे राज्य में निवेशकों की रुचि और औद्योगिक इकाइयों के लिए विकसित हो रहे अवसरों का पता चलता है।

जेवर एयरपोर्ट के आसपास भी बढ़ रहीं औद्योगिक गतिविधियां

उन्होंने जेवर में बन रहे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक परिदृश्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में विभिन्न कंपनियां निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही हैं। ट्रैक्टर निर्माण समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी कंपनियों की रुचि बढ़ रही है।

अवस्थी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में जिलों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा होती है। सरकार की कोशिश है कि औद्योगिक विकास का लाभ केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश या एनसीआर तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी निवेश पहुंचे।

हर जिले तक पहुंच रहा निवेश

अवनीश अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश परियोजनाओं का विस्तार अलग-अलग जिलों तक हो रहा है। मिर्जापुर समेत कई क्षेत्रों में बड़े निवेश की संभावनाएं हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना है।

उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, औद्योगिक क्लस्टर और बेहतर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मिलकर उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए मजबूत आधार दे रहे हैं। औद्योगिक विकास के इस मॉडल से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

11:35 AM, 09-Oct-2026
अपनी बात रखते सीएम के सलाहकार अवनीश अवस्थी। - फोटो : अमर उजाला

13 हजार से बढ़कर 33 हजार हुईं पंजीकृत फैक्ट्रियां

अमर उजाला के मंच पर मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से लेकर एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और निवेश परियोजनाओं तक बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। वर्ष 2017 में प्रदेश में करीब 13 हजार पंजीकृत फैक्ट्रियां थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर लगभग 33 हजार हो गई है। प्रदेश में विकसित किए गए 27 औद्योगिक क्लस्टर पूरी तरह बुक हो चुके हैं। यह बातें अवनीश अवस्थी ने अमर उजाला के आयोजन में कहीं।

उन्होंने अपनी बात की शुरुआत अमर उजाला से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि वह अमर उजाला नियमित रूप से पढ़ते हैं और दिन की शुरुआत में सबसे पहले इसी अखबार को पढ़ना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि अखबार में जमीनी स्तर से जुड़ी खबरें महत्वपूर्ण होती हैं।

13 हजार से बढ़कर 33 हजार हुईं पंजीकृत फैक्ट्रियां

अवनीश अवस्थी ने कहा कि किसी प्रदेश में औद्योगीकरण की स्थिति का आकलन वहां पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या से भी किया जा सकता है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में लगभग 13 हजार फैक्ट्रियां पंजीकृत थीं, जबकि अब इनकी संख्या करीब 33 हजार हो गई है। यह प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत है।

उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों के साथ मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और औद्योगिक गलियारों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार निवेश परियोजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।

ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह से निवेश परियोजनाओं को गति

उन्होंने बताया कि प्रदेश में निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उनके अनुसार, करीब 20 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम जमीन पर उतर चुका है। इनमें से 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं और रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार लगातार समीक्षा कर रही है। आने वाले ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में भी नई परियोजनाओं की शुरुआत की तैयारी है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।

11:07 AM, 09-Oct-2026

सरकार ने आज स्वास्थ्य को अपनी प्रायोरिटी बनाया है

अनुप्रिया पटेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 15 करोड़ आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। लगभग 13 करोड़ लोगों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड इन आईडी से जोड़े जा चुके हैं। प्रदेश में छह लाख से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों और सुविधाओं तथा 12 लाख से अधिक डॉक्टरों के पंजीकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 100 माइक्रोसाइट विकसित करने की घोषणा की है। इनके माध्यम से छोटे अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक, फार्मेसी और जांच केंद्रों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।

एंटीबायोटिक के दुरुपयोग से बढ़ रहा खतरा

केंद्रीय मंत्री ने एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोग मामूली बीमारी या संक्रमण होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना खुद दवाएं लेने लगते हैं। कई बार एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स भी नहीं करते। इससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ती है, जो भविष्य में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

उन्होंने कहा कि लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए और निर्धारित उपचार को लेकर चिकित्सकीय निर्देशों का पालन करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन और नए रोगजनकों से पैदा होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए भी तैयारी जरूरी है।

बीमारी की निगरानी और जांच नेटवर्क मजबूत करना जरूरी

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए रोग निगरानी तंत्र और प्रयोगशालाओं के नेटवर्क को मजबूत करना होगा। कोरोना महामारी ने देश में जांच सुविधाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की जरूरत स्पष्ट की। इसी दिशा में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में पब्लिक हेल्थ लैब स्थापित करने, जांच सुविधाओं का विस्तार करने और स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इन व्यवस्थाओं को मजबूत करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

सरकारी प्रयासों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी भी जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसमें निजी अस्पतालों, विशेषज्ञ संस्थानों, डायग्नोस्टिक सेंटर, मेडिकल डिवाइस निर्माताओं और फार्मा क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में सरकारी निवेश के साथ निजी क्षेत्र की पूंजी, विशेषज्ञता और नवाचार को जोड़ना होगा। इससे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। हर नागरिक को किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना साझा लक्ष्य होना चाहिए। सरकार, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

10:56 AM, 09-Oct-2026

यूपी में विकास का पहिया तेजी से घूमा है- अनुप्रिया पटेल

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में विकास का पहिया तेजी से घूमा है। कभी बीमारू राज्य की छवि से पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने अब अपनी पहचान बदली है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण जरूरी है। इसके लिए प्रदेश में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और हर नागरिक तक किफायती इलाज की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी। 

उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने इस आयोजन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के व्यापारिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र और राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। मानव संसाधन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। देश का विकास उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़ा है। यदि उत्तर प्रदेश विकसित होगा तो देश भी विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

स्वस्थ उत्तर प्रदेश से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब प्रदेश स्वस्थ होगा। इसके लिए विश्वस्तरीय हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना आवश्यक है। करीब 26 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में प्रत्येक नागरिक तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। स्वस्थ नागरिक ही मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव होते हैं।

उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार असंभव दिखने वाले लक्ष्यों को हासिल करने के संकल्प के साथ काम करती है। इसी सोच के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि 9.12 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट में स्वास्थ्य के लिए करीब 55 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार ने भी स्वास्थ्य बजट को कुल बजट के ढाई प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज से बढ़ीं सुविधाएं

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि सरकार ने मेडिकल शिक्षा और उपचार की सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया है। वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज की नीति से प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूती मिली है। उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ी है और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के विस्तार पर काम हो रहा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों से देश में एम्स की संख्या सात से बढ़कर 23 हो गई है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के साथ विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्रों और अस्पतालों का विस्तार किया जा रहा है। विधानसभा क्षेत्रों के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए भी प्रयास जरूरी हैं।

आयुष्मान भारत से करोड़ों लोगों को मिला इलाज

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य ढांचे के निर्माण के साथ लोगों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सरकार के लिए केवल चुनावी नारा नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता है। इसी उद्देश्य से आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू की गई है।

उन्होंने बताया कि देश में करीब 62 करोड़ लोग इस योजना के दायरे में हैं। लगभग 50 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं और 13 करोड़ से अधिक लोग योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज करा चुके हैं। इस पर केंद्र सरकार दो लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी योजना का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। प्रदेश में करीब 1.80 करोड़ परिवार योजना के लाभार्थी हैं और इसके तहत लगभग एक करोड़ लोगों का इलाज हो चुका है। सरकार का प्रयास है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी योजना से जुड़े निजी अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे आम लोगों को मुफ्त इलाज आसानी से मिल सके।

डिजिटल हेल्थ मिशन में यूपी की उल्लेखनीय प्रगति

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से देश में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक की विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान यानी आभा आईडी बनाई जा रही है। इससे मरीज अपनी जांच रिपोर्ट, एक्स-रे, दवाओं और अन्य मेडिकल रिकॉर्ड को एक ही डिजिटल पहचान से जोड़ सकते हैं। डॉक्टर के पास उपचार के लिए जाने पर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री उपलब्ध होने से इलाज में सुविधा होगी।

10:33 AM, 09-Oct-2026
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक - फोटो : अमर उजाला

पहले यूपी में लॉ एंड आर्डर की बड़ी समस्या थी-ब्रजेश पाठक

इस अवसर पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि यूपी में पहले भी बड़ी संभवनाएं थीं। लेकिन, लॉ एंड आर्डर की बड़ी समस्या थी। व्यापारियों की दृष्टि से भी ये बहुत खराब स्थिति थी। इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत खराब था। आज हमने सभी 75 जिलों को फोर लेन से जोड़ा है। सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे यूपी में है। रेलवे के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम किया है। आज यूपी में 17 हवाई अड्डे संचालित हैं। कुछ समय में ये 21 हो जाएंगे। जेवर में एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा शुरू हो जाएगा। 



डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि बिजली के मामले में हम आत्मनिर्भर हो रहे हैं। आज बिजली की कोई कमी नहीं है। बिजली के मामले में विश्व में भारत और देश में यूपी सबसे आगे है। सबसे ज्यादा सोलर पैनल यूपी में लगे हैं। ट्यूबवेलों को सोलर पैनल से जोड़ने का काम चल रहा है। परिषदीय स्कूलों की बुरी स्थिति थी। बाउंड्रीवाल टूटी रहती थी। हमने कायाकल्प के तहत स्कूलों की स्थिति बदली। आज दुनिया के निवेशक चाहते हैं कि यूपी में निवेश करें। उन्होंने निवेशकों को सरकार की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया। कहा कि आज यूपी बीमारू राज्य नहीं है।  

बिजली लाइन से जुड़ा हर जिला, जेवर में बना एशिया में सबसे बड़ा एयरपोर्टः पाठक

ब्रजेश पाठक ने कहा कि सड़कों के साथ-साथ हमने रेलवे के ढांचा में बेहतरी की है। अब हर शहर बिजली की लाइन से जुड़ा है। मेल एक्सप्रेस के साथ वंदे भारत, अमृत भारत जैसी हाईस्पीड ट्रेनें तेजी से बढ़ाई जा रही हैं। ट्रेन के साथ विमान सेवाओं ने भी प्रदेश ने तरक्की की है। प्रदेश में लगातार एयरपोर्ट खुलते जा रहे हैं। जेवर में एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट खुल चुका है। आने वाले दिनों में यहां से देश-दुनिया की हर फ्लाइट उपलब्ध होगी। यह सब बदलाव प्रदेश में निवेश और रोजगार के रास्ते खोलेंगे।

10:27 AM, 09-Oct-2026

यूपी को एक्सप्रेसवे वाला प्रदेश भी कह सकते हैं

इस मौके पर अमर उजाला लखनऊ के संपादक विजय त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज केवल बड़ा बाजार ही नहीं है, बल्कि नई जमाने की तकनीक के उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज यूपी को एक्सप्रेसवे वाला प्रदेश भी कह सकते हैं। प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए छह कॉरिडोर बनाए गए हैं। यूपी में निवेशकों का बढ़ता भरोसा इस बात का उदाहरण है।  

उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ हमारे सामने चुनौतियां भी हैं। हमें यह ध्यान रखना होगा कि कितने लोगों को नौकरियां मिलीं। एमओयू से निकलकर चीजें धरातल पर दिखें। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि हम सब मिलकर इस पर चर्चा करें। 2047 तक यूपी को देश का ग्रोथ इंजन बनाने की दिशा में सहयोगी बनें।

10:25 AM, 09-Oct-2026

प्रदेश के विकास गलियारों पर होगी चर्चा

आयोजन में आगे यूपीपीसीबी के सचिव संजय सिंह सौर और नवीकरणीय ऊर्जा से टिकाऊ उत्तर प्रदेश की संभावनाओं पर बात करेंगे। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के माध्यम से प्रदेश के विकास गलियारों पर चर्चा करेंगे। 

10:08 AM, 09-Oct-2026

इन प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा

कॉन्क्लेव में स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा और औद्योगिक निवेश जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर एक-एक करके गहन चर्चा होनी है। रियल एस्टेट, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी चर्चा के मुख्य बिंदु रहेंगे। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग पर भी विशेषज्ञ विचार साझा कर रहे हैं।

09:46 AM, 09-Oct-2026

Build 2026 Lucknow Live: विकास का नया इतिहास लिख रहा है यूपी, मंत्री नंदी ने गिनाईं भविष्य की बड़ी योजनाएं

उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़ी परियोजनाओं और बदलती जरूरतों पर अमर उजाला बिल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव का आयोजन होटल ताज में शुक्रवार को किया जा रहा है। सुबह 9:30 बजे से शुरू होने वाले आयोजन में स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा, निवेश और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर विचार-विमर्श जारी है।

इस कार्यक्रम में हमारे सहयोगी- 

  • पावर्ड बाय : अदाणी
  • को-पावर्ड बाय : एफिल ग्रुप स्पेशल
  • पार्टनर : गैलेंट टीएमटी सरिया एवं
  • सीमेंट एसोसिएट पार्टनर्स : ओमैक्स, गौर संस, फिरोजाबाद एवं शिकोहाबाद विकास प्राधिकरण
  • ड्रिवेन बाई : किआ
  • डेवलपमेंट पार्टनर : यूपीसीडा
  • ग्रीन एनर्जी पार्टनर : सोलर स्क्वायर
  • बैंकिंग पार्टनर्स : भारतीय स्टेट बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 
  • पार्टनर्स : श्री वृंदा, गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर, वेल्थ क्लीनिक, महिंद्रा, एल्डिको, ट्रविजरी रियल्टी, लखनऊ विकास प्राधिकरण, रिशिता डेवलपर्स, बुलंदशहर-खुर्जा विकास।
  • रेडियो पार्टनर : बिग प्राधिकरण एम लखनऊ 94.31

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