मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि यह सम्मेलन केवल भवन निर्माण या रियल एस्टेट तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य, उसकी आर्थिक संभावनाओं और विकसित भारत के निर्माण में प्रदेश की भूमिका पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच भी है।
उन्होंने कहा कि आज हम ऐसे दौर में खड़े हैं, जब नए भारत और नए उत्तर प्रदेश के विकास की कहानी नए आत्मविश्वास, नई आकांक्षाओं और नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, औद्योगिक विस्तार, निवेश और रोजगार सृजन उत्तर प्रदेश के विकास के प्रमुख केंद्रबिंदु बनकर उभरे हैं।
नंदी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ आर्थिक प्रगति की नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं। यह सम्मेलन प्रदेश के विकास की दिशा, आर्थिक क्षमता और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में निवेश करना चुनौतीपूर्ण था। निवेशकों को उद्योग स्थापित करने से लेकर उसका संचालन करने तक कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार के समय असामाजिक तत्व उद्योग संचालकों से अवैध वसूली करते थे और उन्हें अपना कारोबार चलाने में दिक्कतें आती थीं।
उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया है। इससे निवेश के लिए नए अवसर तैयार हुए हैं। निवेश के प्रस्ताव अब केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बुंदेलखंड और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी निवेशक रुचि दिखा रहे हैं।
नेशनल ब्यूरो, पॉलिटिकल एडिटर राजकिशोर के साथ बातचीत में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया है। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। प्रदेश केवल आबादी के मामले में ही सबसे बड़ा नहीं है, बल्कि एक्सप्रेसवे निर्माण में भी अग्रणी है। सरकार का प्रयास है कि बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे सहित अन्य मार्गों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने का काम किया गया है। सड़क कनेक्टिविटी के साथ रेल और हवाई संपर्क को भी बेहतर बनाया गया है। सरकार आगे भी इन सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।
केशव मौर्य ने कहा कि प्रदेश में हर घर तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है, जबकि घरों तक पाइपलाइन से पीने का पानी उपलब्ध कराने का काम अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि शहरों की तरह गांवों में भी लोगों को पाइपलाइन से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है, ताकि ग्रामीणों को हैंडपंप और कुओं पर निर्भर न रहना पड़े।
उन्होंने बताया कि जिन परिवारों के पास रहने के लिए पक्का घर नहीं था, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराए गए हैं। उनके अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 65 लाख आवास दिए जा चुके हैं। आगे भी पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी की गई है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का विषय भी आज जनचर्चा का केंद्र बन गया है। लोगों को विश्वास रखना चाहिए कि वर्ष 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का लक्ष्य जरूर पूरा होगा। उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प और लगातार प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों के शासन को समाप्त करने के लक्ष्य पर विश्वास नहीं किया होता और संघर्ष से पीछे हट गए होते, तो देश को आजादी मिलने में मुश्किल होती। उनके संघर्ष के परिणामस्वरूप ही देश स्वतंत्र हुआ। इसी तरह आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य भी प्रयासों से हासिल किया जा सकता है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश के हित में कृषि के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाने की जरूरत है और इस दिशा में प्रयास भी किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार रुकने वाली नहीं है। इस बार प्रदेश के कई जिलों में अधिक बारिश हुई है तो कई जगह बाढ़ की समस्याएं भी सामने आई हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों में सामान्य वर्षों की अपेक्षा कम बारिश हुई है। इन चुनौतियों के बावजूद प्रदेश सरकार विकास के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का लक्ष्य रखा है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में काम कर रही है। विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब गांवों का विकास होगा। गांवों को उनकी बदहाली पर नहीं छोड़ा जा सकता। वहां के लोगों की जरूरतों को सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पूरा करना होगा।
डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में विशिष्ट उत्पादों की लंबी शृंखला है। फिरोजाबाद में कागज से बने आकर्षक उत्पादों और मूर्तियों का काम होता है, जबकि मुरादाबाद पीतल के उत्पादों और धातु शिल्प के लिए प्रसिद्ध है। इसी तरह कन्नौज के इत्र और आगरा के पेठे की अपनी अलग पहचान है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्थानीय उत्पादों में देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की क्षमता है। एक जिला-एक उत्पाद जैसी पहल से इन उत्पादों को पहचान दिलाने और उनके बाजार का विस्तार करने के अवसर मिले हैं। प्रदेश में खरीदने की क्षमता बढ़ने के साथ निर्यात की संभावनाएं भी विकसित हो रही हैं। स्थानीय कारीगरों, छोटे उद्यमियों और उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मददगार होगा।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अब विकास राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है। पहले जो राजनीतिक दल जातिवाद और तुष्टीकरण के सहारे चुनाव लड़ते थे, वे भी अब विकास की बात करने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात से शुरू हुई विकास की यात्रा देशभर में आगे बढ़ी है। केंद्र और राज्यों में डबल इंजन की सरकार होने से विकास कार्यों को गति मिली है और गरीबों के जीवन में बदलाव आया है।
‘प्रदेश विकास का पर्याय’ कार्यक्रम में इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रदेश की विकास यात्रा पर चर्चा करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेश बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की दिशा में काम करना जरूरी है। प्रदेश में बड़ी युवा आबादी है। यदि युवाओं को विभिन्न उद्योगों और क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए तो उन्हें अपने ही जिले और प्रदेश में रोजगार मिल सकता है। इससे उद्योगों को कुशल श्रमिक मिलेंगे और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।
केशव प्रसाद मौर्य ने अयोध्या का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण के बाद यहां भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया से श्रद्धालुओं के आने से अयोध्या की पहचान और धार्मिक पर्यटन का दायरा बढ़ा है।
उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को प्रदेश की आर्थिक प्रगति, निवेश और पर्यटन से जोड़ते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में उपलब्ध संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए सड़क, रेल, हवाई संपर्क और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
डिप्टी सीएम के वक्तव्य का मुख्य संदेश यह रहा कि विकास की योजनाओं और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रदेश की आर्थिक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। काशी और अयोध्या के उदाहरणों के जरिए उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी और धार्मिक स्थलों के विकास से पर्यटन को नई गति मिल सकती है।
कार्यक्रम में पहुंचे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बुनियादी सुविधाओं के विकास से ही बड़े पैमाने पर निवेश और पर्यटन की संभावनाओं को गति मिलती है। ‘प्रदेश विकास का पर्याय’ कार्यक्रम में उन्होंने गुजरात के विकास मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद तमाम चुनौतियों का सामना किया। बाद में गुजरात का विकास मॉडल देशभर में चर्चा का विषय बना।
उन्होंने कहा कि गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा उत्तर प्रदेश में भी हुई। उस समय प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण प्रमुख थे, लेकिन विकास को केंद्र में रखकर राजनीति करने की आवश्यकता महसूस की गई। मौर्य के अनुसार, उत्तर प्रदेश में भी विकास की अपार संभावनाएं हैं। आबादी की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ यहां हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता है। इन संभावनाओं को साकार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी है।
चर्चा में इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा पर दी जाने वाली सब्सिडी को लेकर भी सवाल उठे। वक्ताओं ने इस बात पर विचार किया कि सरकारी सहायता से शुरुआती दौर में तकनीक को बढ़ावा मिलता है, लेकिन सब्सिडी कम होने या समाप्त होने के बाद भी उसकी मांग बनाए रखना जरूरी है।
वक्ता ने कहा कि जिस गति से सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, उसे देखते हुए वर्ष 2050 तक प्रदेश में लाखों टन सोलर वेस्ट पैदा होने की आशंका है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में सोलर पैनलों के लिए समर्पित रीसाइक्लिंग प्लांट उपलब्ध हैं या नहीं और भविष्य में बढ़ने वाले कचरे का निस्तारण कैसे किया जाएगा।
चर्चा के दौरान बताया गया कि उद्योगों का रेड, ऑरेंज और ग्रीन श्रेणियों में वर्गीकरण उनके प्रदूषण की संभावना और इस्तेमाल होने वाले ईंधन समेत अन्य मानकों के आधार पर किया जाता है।
ग्रीन श्रेणी के उद्योगों में प्रदूषण की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जाती है। ऐसे उद्योगों को संचालन की सहमति की अधिक अवधि और तुलनात्मक रूप से कम निरीक्षण जैसी नियामकीय सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे स्वच्छ तकनीक अपनाने वाले उद्योगों को कारोबार चलाने में सहूलियत होती है।
उत्तर प्रदेश में उद्योगों को ग्रीन एनर्जी की ओर ले जाने के लिए सस्ती और आसान वित्तीय सहायता के साथ पर्यावरणीय मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल बनाना जरूरी है। सोलर प्लांट, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी परियोजनाओं के विस्तार में बैंकों की ग्रीन फाइनेंसिंग और सरकारी नियामक संस्थाओं की भूमिका अहम है। खासकर छोटी औद्योगिक इकाइयों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए कर्ज की प्रक्रिया आसान बनानी होगी। अमर उजाला के मंच पर आयोजित चर्चा में इन मुद्दों पर विस्तार से बात हुई।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिल सकती है। इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार भी इस दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए ऊर्जा उत्पादन, परिवहन, उद्योग और शहरी गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन को एक साथ नियंत्रित करना होगा।
वक्ता ने कहा कि शहरों में घरों, वाहनों और उद्योगों की संख्या बढ़ने से ऊर्जा की मांग और प्रदूषण पैदा करने वाली गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे में वायु गुणवत्ता में सुधार को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा के लिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, बेहतर निगरानी, प्रभावी नियंत्रण उपाय और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना जरूरी है। मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शहरों के लिए स्थानीय स्तर पर रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि लोगों को स्वच्छ हवा मिल सके और शहरी विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे।
शहरी क्षेत्रों में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत स्टेज उत्सर्जन मानकों को क्रमिक रूप से सख्त करने से वाहनों से निकलने वाले प्रदूषकों को नियंत्रित करने में मदद मिली है।
उन्होंने कहा कि पुराने और नए वाहनों के उत्सर्जन में अंतर को समझना जरूरी है। उत्सर्जन मानकों में सुधार से वायु प्रदूषण को कम करने में योगदान मिला है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में इसका वास्तविक प्रभाव वाहनों की संख्या, यातायात, ईंधन के प्रकार और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
उत्तर प्रदेश के शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब दिखाई देने लगा है। लखनऊ को इस वर्ष स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रथम पुरस्कार मिलना इसका उदाहरण है। पिछले सात वर्षों में शहर की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्वच्छ ईंधन, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल जैसे उपायों ने प्रदूषण कम करने में योगदान दिया है। हालांकि, मौसम संबंधी परिस्थितियां अब भी वायु प्रदूषण की गंभीरता को प्रभावित करती हैं।
अमर उजाला के मंच पर चर्चा के दौरान वक्ता ने कहा कि गाजियाबाद समेत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरों में भी वायु प्रदूषण को समझने के लिए मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तापमान व्युत्क्रमण (टेंपरेचर इनवर्जन) की स्थिति बनने पर प्रदूषक जमीन के पास जमा हो जाते हैं। हवा की गति कम होने से उनका फैलाव नहीं हो पाता और शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।
पैनल डिस्कशन के चर्चा में सामने आया कि उत्तर प्रदेश अब नवीकरणीय ऊर्जा, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन और औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। वहीं, गोरखपुर में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश से कई परियोजनाओं की योजना बनाई जा रही है। प्रदेश में पहली बार लौह अयस्क का खनन कर उससे स्टील उत्पादन तक का एकीकृत तंत्र विकसित करने की दिशा में भी काम हो रहा है। यह बातें अमर उजाला के मंच पर वक्ता ने कहीं।
अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा तक सीमित नहीं है। इनका इस्तेमाल औद्योगिक विकास, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए भी किया जा रहा है। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में विकसित किए गए 27 औद्योगिक क्लस्टर पूरी तरह बुक हो चुके हैं। इससे राज्य में निवेशकों की रुचि और औद्योगिक इकाइयों के लिए विकसित हो रहे अवसरों का पता चलता है।अमर उजाला के मंच पर मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से लेकर एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों, लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और निवेश परियोजनाओं तक बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। वर्ष 2017 में प्रदेश में करीब 13 हजार पंजीकृत फैक्ट्रियां थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर लगभग 33 हजार हो गई है। प्रदेश में विकसित किए गए 27 औद्योगिक क्लस्टर पूरी तरह बुक हो चुके हैं। यह बातें अवनीश अवस्थी ने अमर उजाला के आयोजन में कहीं।
उन्होंने अपनी बात की शुरुआत अमर उजाला से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए की। उन्होंने कहा कि वह अमर उजाला नियमित रूप से पढ़ते हैं और दिन की शुरुआत में सबसे पहले इसी अखबार को पढ़ना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि अखबार में जमीनी स्तर से जुड़ी खबरें महत्वपूर्ण होती हैं।
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब 15 करोड़ आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। लगभग 13 करोड़ लोगों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड इन आईडी से जोड़े जा चुके हैं। प्रदेश में छह लाख से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों और सुविधाओं तथा 12 लाख से अधिक डॉक्टरों के पंजीकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 100 माइक्रोसाइट विकसित करने की घोषणा की है। इनके माध्यम से छोटे अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक, फार्मेसी और जांच केंद्रों को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में विकास का पहिया तेजी से घूमा है। कभी बीमारू राज्य की छवि से पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश ने अब अपनी पहचान बदली है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण जरूरी है। इसके लिए प्रदेश में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और हर नागरिक तक किफायती इलाज की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने इस आयोजन के माध्यम से उत्तर प्रदेश के व्यापारिक ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र और राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। मानव संसाधन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। देश का विकास उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़ा है। यदि उत्तर प्रदेश विकसित होगा तो देश भी विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
इस अवसर पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि यूपी में पहले भी बड़ी संभवनाएं थीं। लेकिन, लॉ एंड आर्डर की बड़ी समस्या थी। व्यापारियों की दृष्टि से भी ये बहुत खराब स्थिति थी। इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत खराब था। आज हमने सभी 75 जिलों को फोर लेन से जोड़ा है। सबसे ज्यादा एक्सप्रेसवे यूपी में है। रेलवे के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम किया है। आज यूपी में 17 हवाई अड्डे संचालित हैं। कुछ समय में ये 21 हो जाएंगे। जेवर में एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा शुरू हो जाएगा।
डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि बिजली के मामले में हम आत्मनिर्भर हो रहे हैं। आज बिजली की कोई कमी नहीं है। बिजली के मामले में विश्व में भारत और देश में यूपी सबसे आगे है। सबसे ज्यादा सोलर पैनल यूपी में लगे हैं। ट्यूबवेलों को सोलर पैनल से जोड़ने का काम चल रहा है। परिषदीय स्कूलों की बुरी स्थिति थी। बाउंड्रीवाल टूटी रहती थी। हमने कायाकल्प के तहत स्कूलों की स्थिति बदली। आज दुनिया के निवेशक चाहते हैं कि यूपी में निवेश करें। उन्होंने निवेशकों को सरकार की तरफ से हर संभव मदद का भरोसा दिया। कहा कि आज यूपी बीमारू राज्य नहीं है।
इस मौके पर अमर उजाला लखनऊ के संपादक विजय त्रिपाठी ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज केवल बड़ा बाजार ही नहीं है, बल्कि नई जमाने की तकनीक के उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज यूपी को एक्सप्रेसवे वाला प्रदेश भी कह सकते हैं। प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए छह कॉरिडोर बनाए गए हैं। यूपी में निवेशकों का बढ़ता भरोसा इस बात का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ हमारे सामने चुनौतियां भी हैं। हमें यह ध्यान रखना होगा कि कितने लोगों को नौकरियां मिलीं। एमओयू से निकलकर चीजें धरातल पर दिखें। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि हम सब मिलकर इस पर चर्चा करें। 2047 तक यूपी को देश का ग्रोथ इंजन बनाने की दिशा में सहयोगी बनें।
आयोजन में आगे यूपीपीसीबी के सचिव संजय सिंह सौर और नवीकरणीय ऊर्जा से टिकाऊ उत्तर प्रदेश की संभावनाओं पर बात करेंगे। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों के माध्यम से प्रदेश के विकास गलियारों पर चर्चा करेंगे।
कॉन्क्लेव में स्वास्थ्य, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा और औद्योगिक निवेश जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर एक-एक करके गहन चर्चा होनी है। रियल एस्टेट, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी चर्चा के मुख्य बिंदु रहेंगे। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग पर भी विशेषज्ञ विचार साझा कर रहे हैं।