अमरनाथ गुफा के पास फटे बादल की घटना में पुणे के दो लोगों की मौत हुई है। एनसीपी के एक नेता ने दावा किया है कि इनमें से एक की मौत भूस्खलन में हुई है।
राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने अमरनाथ हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए सरकार से आग्रह किया है कि वह इस त्रासदी के बारे तथ्य देश के सामने रखे। अपनी उम्मीदवारी के समर्थन में यहां पहुंचे सिन्हा विपक्षी दलो के साथ बैठक में बोल रहे थे। सिन्हा ने कहा, मैं अमरनाथ त्रासदी में जानमाल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त करता हूं। हम नहीं जानते कि कितने लोग मारे गए हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि कई लोगों की जान चली गई है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करें। सरकार को त्रासदी के बारे में देश के सामने तथ्य रखना चाहिए और कुछ भी नहीं छिपाना चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सुरक्षाबल अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव व राहत अभियान में लगे हैं। प्रभावित लोगों की मदद के लिए सभी प्रकार के उपाय किए जा रहे हैं। अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से हुए अमूल्य जीवन के नुकसान से गहरा दुख पहुंचा है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने सरकार से प्रश्न किया है कि यह हादसा कैसे और किन परिस्थितियों में हुआ। इतनी जोखिम भरे स्थान पर जिस तरीके से आधार शिविर बनाकर टेंट लगाए गए थे, उसकी जांच होनी चाहिए। यह पहली बार है जब वहां टेंट लगाए गए हैं। यह एक मानवीय भूल हो सकती है।
अमरनाथ हादसे में जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए जम्मू में हवन किया गया। लोगों ने घायलों के जल्द ठीक होने की कामना भी की। इसके अलावा कई संगठनों ने मृतकों को श्रद्धांजलि भी दी।
इनमें से ज्यादातर अमरनाथ यात्री हैं। घायलों को एयरलिफ्ट किया गया है। लापता लोगों की संख्या काफी है, जिसके चलते अंधेरा होने के बावजूद रात को भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। वहीं, यात्रा मार्ग भी कई जगहों पर बह गया है। ऐसे में फंसे हुए यात्रियों को अलग-अलग रेस्क्यू दल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर रही हैं।
आपदा प्रबंधन दलों ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया। बाढ़ से बचने के लिए यात्री टेंट छोड़ पहाड़ की ढलान पर चढ़ गए। पुलिस के अनुसार तमाम एजेंसियां रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हैं। घायलों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने बताया कि रेस्क्यू दल ने अभी तक 16 शव निकाल लिए हैं।
पवित्र गुफा के ठीक सामने यात्रियों के लिए टेंट सिटी (यात्री शिविर) बनाई गई है। यहां एक टेंट में चार से छह लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। तेज बहाव में आया पानी दर्जनों टेंटों को साथ बहा ले गया। हादसे के समय बारिश हो रही थी और ज्यादातर यात्री टेंट के भीतर थे। बाढ़ के साथ तीन लंगर और 40 के करीब टेंट बह गए। यात्रियों में भगदड़ के साथ चीख-पुकार मच गई।
हजारों लोगों को सुरक्षित स्थान और घायलों को एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया है। प्रशासन ने हादसे को देखते हुए यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार शाम 5.30 बजे अमरनाथ गुफा से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर बादल फटा। इससे गुफा के सामने से बहने वाले नाले में आई बाढ़ ने तबाही मचा दी।
भारी बारिश की चेतावनी के बीच अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से 16 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है, जबकि करीब 40 लोग लापता हो गए हैं। बादल फटने के बाद पहाड़ से आया सैलाब श्रद्धालुओं के लिए लगाए गए 3 लंगरों समेत करीब 40 टेंट बहा ले गया। सैलाब गुफा के सामने श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए टेंटों के बीचों-बीच निकला। सेना, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ समेत आपदा प्रबंधन से जुड़ीं कई टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। बाढ़ की चपेट में आए शिविर के टेंटों से निकालकर लोगों को फौरन पहाड़ की ढलान तक सुरक्षित पहुंचाया गया। कई लोगों को बचाया गया है। घायलों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। हादसे के समय गुफा के पास करीब पांच हजार लोग मौजूद थे। यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। सेना, एनडीआरएफ व एसडीआरएफ समेत आपदा प्रबंधन से जुड़ीं कई टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।