उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि देश की अखंडता के साथ कोई खिलवाड़ हो उसकी इजाजत किसी को नहीं दी जाती है। यहां से पांच लोग संसद में काम कर रहे हैं। पंचायती राज देश में सबसे बाद में जम्मू कश्मीर में शुरू किया है। फिर भी जम्मू कश्मीर आगे है। अब यहां पर पंचायतों को चुनाव भी होंगे। विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि जिस दिन गृहमंत्री ने संसद में ये बिल प्रस्तुत किया था उस दिन मैंने लोगों को विश्वास दिया था। चुनाव कब होगा इसका अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है। जो जानकारी मांगी गई वह जम्मू कश्मीर प्रशासन भेज चुका है। जब भारत निर्वाचन आयोग बताएगा तब चुनाव होगा।
उन्होंने कहा कि जिन्हें पहले पथराव और बंदूक पकड़ाए गए थे अब वह हाथ काम कर रहे हैं। पहले कुछ लोगों ने बनिहाल तक देश को सीमा बना दिया था। बनिहाल से आगे कश्मीर शुरू होता है। अब श्रीनगर में भी नाइट लाइफ का आनंद लोग लेते हैं। जिन लोगों ने जमीनों पर कब्जा कर लिया था, उन जमीनों को गरीबो को दिया जा रहा है। प्रदेश E गवर्नेंस में यूटी में पहले नम्बर पर हैं। जब आए तो दरबार मूव होता था, जिस पर अब वीराम लगाया गया है। शोपियां और पुलवामा, घाटी समेत अन्य जगहों पर तिरंगा लहरा रहा है। हर दिन खेल, सब के लिए खेल, ये नारा अब हकीकत बन गया है, सात नए मेडिकल कॉलेज, दो नए एम्स बन रहे हैं। अब शेर जम्मू में दहाड़ने लगा है। जम्मू के ज़ू में शेर लाए गए हैं।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू कश्मीर अब वैभव का पर्याय बनता जा रहा है। आंकड़ों को महज विकास की कसौटी नहीं मानता हूं। G-20 के बाद विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। 350 से ज्यादा छोटी-बड़ी फिल्मों की शूटिंग जम्मू कश्मीर में हुई है। सब साथ मिलकर चलें तो हमारे लिए विकास और दरबार खुले हैं।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी मुल्क के इशारों पर होने वाले आंदोलन अब बंद हो गए। इंडस्ट्रियां लगाई जा रही हैं और अब लोगों को काम दिया जा रहा है। अब एक नागरिक अपनी मर्जी से जी सकता है। जहां नदियों के किनारे लोग दहशत से कंपाते थे, वो आज संगीत से गूंज रहे हैं। प्रयास हो रहा है सुविधाओं में बढ़ोतरी हो। पीएम नरेंद्र मोदी के कारण आज हाईवे भी जम्मू में बन रहे हैं। जम्मू कश्मीर को करीब से जोड़ने के साथ यूनियन टेरिटरी को भी साथ जोड़ा जा रहा है। महिलाओं और किसानों के जीवन में व्यापक बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है। टूरिज्म की क्षमता शिखर पर पहुंच चुकी है। जी20 समिट के बाद जम्मू कश्मीर में विदेशी यात्रियों की संख्या 350 प्रतिशत की वृद्धि कर चुकी है।
जम्मू कश्मीर का पूरा समाज आगे बढ़े, लोगों को ताकतवार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन व अन्य क्षेत्रों में विकास हो रहा है। बाकी राज्यों की तरह विकसित भारत में जम्मू कश्मीर भी अपना योगदान दे रहा है। यहां के लोग भी खुलकर जी सकते हैं। सभी का सपना पूरा हो रहा है। वह जिस प्रकार का जीवन जी रहे हैं, उनमें बदलाव आया है। जागीदारों के काले धंधे भी काफी हद तक बंद हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में संबोधित किया। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सात सौ श्लोकों का संवाद श्रीकृष्ण और अर्जुन के साथ हुआ। इसके बाद कोई संवाद देखने को मिला नहीं। अमर उजाला ने सोच समझकर इस कार्यक्रम का नाम संवाद रखा है, यह बहुत अच्छा किया। उन्होंने कहा कि सही मार्ग पर चलते हुए जो खुद को समर्पित करते हैं, उनका कभी विनाश नहीं होता है। कहा कि फाइलों को सिर्फ कागजों की तरह देखने की जरूरत नहीं है, फाइलों के पीछे एक इंसान के सपने हैं। अगर मैं चार साल को देखूं तो जम्मू कश्मीर एक अंधेरे से निकलकर तेज गति से उजाले की तरफ अग्रसर हो रहा है। समाज को फिर से नया प्राण मिले, इसके दीप जले हैं नागरिकों की भी आकांक्षाएं जगी हैं। अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।
बातचीत के बाद अमर उजाला ने अभिनेता विक्की कौशल को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
विक्की कौशल ने कहा कि पहले हीरो के लिए कहानियां लिखी जाती थीं। आज कहानी के लिए हीरो ढूंढा जाता है। कैटरीना को लेकर पूछे गए सवाल पर विक्की ने कहा कि प्यार कभी सक्सेस और फेलियर से नहीं होता है, प्यार उस इंसान के अंदर दिल है उससे होता है। हमारा प्यार उनके दिल और आत्मा से है।
विक्की ने बताया कि जितना बाहर निकल सकें, डायरेक्टर से मिल सकें, कास्ट्यूम डायरेक्टर से मिले उतना ही अच्छा होगा। एक बार मेरी मां ने कहा था कि 'यार देख तुझे न कैसे होगा उसकी चिंता करना तेरा काम नहीं, ये होगा इसमें विश्वास रखना तेरा काम है'।
निंदक को लेकर पूछे गए सवाल पर विक्की कौशल ने कहा कि मेरा परिवार सबसे बड़ा मेरा निंदक है, वह साफ-साफ बता देते हैं कि क्या करना है क्या नहीं करना है। रमन राघव के बाद मेरी मां ने मेरे रोल को एकदम बकवास बता दिया था और पिता ने उन्हें हमेशा सराहा है। मैंने एक एक्टिंग कोर्स किया और फिर तीन-चार साल थियेटर किया है। मैं हमेशा से ही रटने में जीरो रहा हूं। मैं रोज कम से कम उस स्क्रिप्ट को पढ़ता रहता हूं। डायरेक्ट के साथ उसको लेकर बातचीत करता हूं। एक-दो महीने में वो चीजें याद हो जाती हैं।
फिल्मों में आने के सफर को लेकर विक्की कौशल ने कहा कि वह स्टेज पर हमेशा से एक्टर रहे हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान वह यही सोचते थे उन्हें नौकरी करनी है। ग्रेजुएशन के बाद उन्हें एक्टिंग करने का शौक हुआ। कई बार वह ऑडिशन के दौरान असफल भी हुए। पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद जब हम बस और रिक्शा में घूम रहे थे। व्हाट्सएप ग्रुप में दोस्तों की कार और घर के साथ फोटो आ रहे थे, तब लगता था यार हम क्या कर रहे हैं। लेकिन धीरे-धीरे सब सही होता चला गया, और यहां तक पहुंचा। शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कश्मीर में शूटिंग को लेकर विक्की कौशल ने कहा कि मैंने राजी की शूटिंग वहां पर की, अब सैम बहादुर की शूटिंग की है। कश्मीर जाने का मैं मौका ढूंढता रहता हूं। एक बार तो एक रेस्टोरेंट में मुझे एक शख्स ने अपने घर का खाना तक खिला दिया। बहुत प्यारे लोग हैं कश्मीर के और अब तो जम्मू आना भी हो गया। विक्की ने कहा कि उन्हें हर किस्म की फिल्में देखना पसंद है। गोविंदा और शाहरूख की फिल्में उन्हें काफी पसंद थी। उन्हें एक्शन करने में काफी मजा आता है। उरी में एक्शन करने को मिला था। मैं बहुत फिल्मों से प्रभावित हुआ। मुझे फिल्म 'लगान' बहुत पसंद है वो फिल्म देखकर मुझे बड़ा मजा आता है।
निर्देशक और निर्माता मेघना गुलजार के साथ काम करने को लेकर अभिनेता विक्की कौशल ने कहा कि उनमें सहजता है, सादगी है जो अपनी कहानियों में लेकर आती हैं। उनके अंदर एक डिग्निटी है, जिसे वो लिखती है और ऑथेंसिटी उनकी बेस्ट है।
अमर उजाला संवाद में विक्की कौशल से पूछा गया कि क्या लोग देशभक्ति से जुड़ी फिल्में अब ज्यादा पसंद करने लगे हैं? इसपर अभिनेता ने जवाब देते हुए कहा, मैं इसे सिर्फ देशभक्ति के सांचे में नहीं रखना चाहूंगा। हमारे देश का बहुत समृद्ध इतिहास है। दूसरे देशों को एवेंजर्स क्रिएट करने की जरूरत है, लेकिन हमारे देश में तो एवेंजर्स जैसी हस्तियां रही हैं। हमें क्रिएट करने की जरूरत नहीं है, हमें उनका योगदान दिखाने की जरूरत है। मेरे काम के जरिए मुझे जब भी ऐसा मौका मिलेगा, तब मैं सीखूंगा, लोगों को भी उस बारे में बताऊंगा और वह किरदार अदा कर देश की सेवा करना चाहूंगा।
अभिनेता विक्की कौशल ने कहा कि देश के रियल हीरो फौजी से मिलने का मौका मिला, इसकी बहुत खुशी है। उनको जानना, उनको साथ बातें करना मुझे बहुत मोटिवेट करता है। 1971 के युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी सैम बहादुर मूवी पर विक्की ने बताया कि जितने जंग के विषय रहे हैं, उन्हें उस फिल्टर के साथ मुझे समझने का मौका मिला। 1971 अप्रैल में ही इंदिरा गांधी ने कहा था कि युद्ध कर लो और 13 दिन में युद्ध जीत लिया था। वो सारी चीजें समझना और पढ़ना अपने आप में दिलचस्प है।
अभिनेता विक्की कौशल ने कहा कि सैम मानेकशॉ के जीवन के पहलुओं के बारे में मुझे भी नहीं पता था। जब उनकी एक्टिंग करने की अपॉर्चुनिटी मिली तो बहुत खुशी मिली। उनके बारे में पढ़ने की कोशिश की उनके परिवार वालों के साथ मुलाकात की। उनके बारे में रिसर्च की। उरी के वक्त मैंने फौजियों से ट्रेनिंग ली थी। इस बार मैंने पुणे में मराठा रेजीमेंट के साथ समय बिताया उनसे सीखा। हर रैंक की अपनी क्या ड्यूटी होती है वो मैंने सीखा। अगर आर्मी आप को अपना मान ले वो बहुत बड़ा अवार्ड होता है।
बॉलीवुड अभिनेता विक्की कौशल ने कहा कि कश्मीर में कई बार शूटिंग की, लेकिन जम्मू पहली बार आया हूं। सैम बहादुर फिल्म के गाने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारी डायरेक्टर ने बहुत मेहनत की है। हमारे इंडियन सिनेमा में पहली बार ऐसा हुआ कि वर्क राइज को बांधकर गाना लिखा गया। इसमें जो फौजी हैं वो एक्टर नहीं है, वे रियल फौजी हैं। मुझे डर लगता था जब एक फौजी का रोल निभाता था। मैं फौजियों के पास पहुंच जाता था कि कुछ गलत हो जाए तो बता देना।
अब से कुछ देर में कार्यक्रम में जानी मानी फिल्मी हस्ती विक्की कौशल और नई फिल्म सैम बहादुर की अभिनेत्री व पूरी टीम रहेगी। विक्की कौशल ने अपने वीडियो संदेश में कहा था कि मैं विक्की कौशल आ रहा हूं मंदिरों के शहर जम्मू में। जम्मू और कश्मीर के लोगों से बात करने अमर उजाला संवाद में 30 नवंबर को।
प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा कि पीजी प्रोग्राम 5000 बच्चे तैयार हो रहे हैं। हम उन्हें इंटर्नशिप के माध्यम से प्रशिक्षित कर रहे हैं और उनके अनुभव को बढ़ा रहे हैं। हम आईआईटी में तीन से चार महीने के लिए उन्हें भेजते हैं। हम विश्व में इंजीनियर तैयार करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक हैं। हमें अगर विश्वगुरु बनना है तो इस पर फोकस करना ही होगा। ऐसे कई इंस्टीट्यूट है जिनको सरकार से सहायता प्राप्त हो रही है।
प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा कि मैं आपको जम्मू कश्मीर के संबंध में कुछ आंकड़े उपलब्ध करा रहा हूं ताकि आपको स्थिति का पता चल सके। जम्मू में 20 इंजीनियरिंग कॉलेज, कश्मीर में 22 इंजीनियरिंग कॉलेज, लद्दाख में 02 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। जम्मू में 20 इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट डिप्लोमा कॉलेज हैं। कश्मीर में 50 इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट डिप्लोमा कॉलेज के हैं। जबकि लद्दाख में दो इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट हैं।
उन्होंने कहा कि इसके लिए हम कई तरह की वर्कशॉप चला रहे हैं। इसके साथ ही हम कई इंजीनियर कॉलेजों के निर्माण में भी मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही हमारा उद्देश्य है कि हम छात्रों को डिजिटली भी सक्षम बनाएं। इसके लिए हम कई तरह के कार्यक्रम चला रहे हैं।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के चेयरमैन प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा कि भारत ने 1987 में इंजीनियरिंग कॉलेज की बड़ी संख्या देखी गई। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर के बच्चों के लिए इंजीनियरिंग और टेक्नालॉजी कोर्स के लिए जम्मू में संस्थान खोले जा रहे हैं। वर्कशॉप की जा रही हैं, जिसकी तरफ इंजीनियरिंग और टेक्नालॉजी कोर्स के छात्र आकर्षित हो रहे हैं।
खाने को लेकर राकेश ने कहा कि उन्हें वेज बिरयानी पसंद है। फिल्म कभी खुशी कभी गम, गेम उन्हें तीरंदाजी पसंद है। उनका सपना अभी और मेडल जीतने का है। वहीं, शीतल ने कहा कि खाने में उन्हें आइसक्रीम, मूवी में जर्सी, फेवरवेट गेम उनका तीरंदाजी, उन्हें कोच और बेंगलुरु में रह रही प्रीति मैम से उन्हें मोटिवेशन मिला। उन्होंने कहा कि उनका सपना अभी पूरा नहीं हुआ है।
पैरा खिलाड़ी की चुनौतियों को लेकर पूछे गए सवाल पर राकेश ने कहा कि व्हील चेयर आए कई साल हो गए। अब लगता है यही जिंदगी है। मुझे नहीं लगता है कि हमें चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अपने दिल और माइंड को स्ट्रांग कर लो, सब चुनौतियां खत्म हो जाएंगी। मैं एक किसान का बेटा हूं। नेम, फेम और पैसा मेरे लिए मायने नहीं रखता है। वहीं, शीतल ने कहा कि मैं स्टार नहीं हूं।
पैरा तीरंदाज राकेश कुमार ने फिटनेस को लेकर कहा कि ज्यादा एक्सरसाइज नहीं कर पाता हूं। सुबह पांच बजे उठ जाता हूं, चाहें रात में कितनी भी देर में सोऊं। सुबह व्हील चेयर चला लेता हूं। डाइट पर कंट्रोल रखता हूं और योगा करता हूं। वहीं, शीतल ने बताया कि मुझे कोच सर ने सिखाया है कि अनुशासन में रहना है मैदान में योगा करते हैं। रनिंग करते हैं। अपने गोल पर ज्यादा फोकस रखते हैं।
पैरा तीरंदाज राकेश कुमार ने कहा कि खेलो इंडिया एक अच्छी चीज है। इससे लोगों को काफी मदद मिलेगी, लोग स्पोर्ट्स में आ सकते हैं। चयन प्रक्रिया को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि हमारे जम्मू में प्रतिभा की कमी नहीं है। प्रतिभा को कैसे बाहर लाया जाए। इस पर विचार किया जाना चाहिए।
राकेश कुमार ने कहा कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी में हमारे कोच द्वारा हमें बहुत मदद मिलती है। न ही कोई कोच छुट्टी लेता है और न ही हमें छुट्टी मिलती है। मेरा एक्सीडेंट 2017 में हुआ था। मैं उससे पहले कटड़ा में था। राकेश ने कहा कि शीतल हमेशा कहती है कि कमी किसी में नहीं बस मेहनत की जरूरत है। पैरा तीरंदाजी में 27 इवेंट होते हैं, उनमें से किसी एक को चुनिए। हमेशा अपने कोच के साथ रहिए और उसकी हर एक बात मानिए।
दुनिया के तीसरे पैरा तीरंदाज राकेश कुमार का मंच पर स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि हर खिलाड़ी के लिए गर्व का विषय होता है कि वह अपने देश से बाहर जाकर देश के लिए खेले और जीत हासिल करे। इस दौरान वहां दूसरे देश में हमारा तिरंगा फहराया जाता है और राष्ट्रगान चलता है तो बहुत ही गर्व होता है।
शीतल देवी ने कहा कि मेरे गुरु बहुत अच्छे हैं। मुझे लगता है कि मेरे जितना कोई किश्मत वाला है ही नहीं इस दुनिया में। मैंने ठान लिया जो करना है वो करना है। परिवार को लेकर पूछे गए सवाल पर शीतल देवी ने कहा कि मेरे पापा बहुत खुश हैं। उन्होंने ये कभी नहीं सोचा कि हमारी बेटी कुछ नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा मेरे जैसे जितने लोग हैं सभी स्टार बन सकते हैं। अगर उन्होंने ये ठान लिया कि उन्हें कुछ करना चाहिए। साथ ही उनके माता-पिता के सपोर्ट की बहुत जरूरत है।
पैर से निशान साधने को लेकर शीतल ने कहा कि हम जो तीर चालते हैं वो बहुत भारी होता है और जो हम बनाते हैं वह बहुत हल्का होता है। शीतल के बाजू नहीं, लेकिन वो एक शानदार निशाना साधती हैं। उन्होंने देश को गोल्ड दिलाया। निशाना कैसे लगाया जाता है इस सवाल पर कहा कि पहले उनका निशाना नहीं लगता था तो उन्हें बहुत बुरा लगता था। लेकिन सर ने बताया कि अगर हिम्मत करेंगे तो एक न एक दिन कुछ बनकर रहेंगे। जैसे सर ने सिखाया वैसे ही मैंने किया। एक दिन मैं नेशनल खेलने गई थी। वहां पर मैंने सिल्वर मेडल जीता था। वहां से लगा कि मुझे और ज्यादा मेहनत करनी चाहिए और फिर मैं मेहनत करती गई और मेडल जीतती गई। उन्होंने कहा कि आज मैं एक स्टार बन गई हूं। दोनों कोच का धन्यवाद भी किया।
शीतल ने कहा कि मेरा गांव किस्तवाड़ में है। मुझे स्कूल जाना बहुत पसंद था। बेंगलुरु में एक मैम ने बताया कि तुम्हें स्पोर्ट्स में जाना चाहिए। मेरा सपना टीचर बनने का था। लेकिन मैम ने मेरे जैसे लोगों से मुझे मिलाया। बाद में मुझे लगा कि मैं कर पाऊंगी। अभिलाषा मैम ने मुझे बुलाया। उन्होंने मुझे सिखाया। मैं देखती थी कि और लोगों का निशाना लगता था मेरा नहीं लगता था। मेरे कुलदीप सर ने मोटिवेट किया, जिसके बाद मैं निशाना लगा सकी।
गोल्डन गर्ल शीतल देवी के साथ अगल सत्र शुरू हो गया है। पैरा तीरंदाज खिलाड़ी शीतल पैरा में विश्व में टॉप पर हैं। उनसे पूछा गया कि आप विश्व में टॉप पर हैं, इस पर पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने कहा कि उन्हें अभी तक पता नहीं है कि वन रैंकिंग हो चुकी है उनकी।
इरफान और युसूफ की केमिस्ट्री को लेकर इरफान पठान ने कहा कि लगभग कोई बात छुपी नहीं है। जम्मू कश्मीर में क्रिकेट के लिए मुझे लड़कों को ढूंढना था। मुझे कुपवाड़ा जाना था। उसके एक दिन पहले जवानों की आतंकियों से मुठभेड़ हुई थी। शायद कोई और होता तो वहां न जाता है, लेकिन मैं गया वहां और उस लड़के की गेंदबाजी देखी वहां पर, और एक-दो साल में उसे आप आईपीएल में खेलते हुए देखेंगे। संवाद के अंत में छात्रों के साथ इरफान पठान और सुरेश रैना ने मंच पर डांस किया। इसके बाद उन्होंने छात्रों के साथ सेल्फी भी ली।
वहीं, इरफान ने कहा कि अगर धोनी की जगह वो होते तो कभी भी सुरेश रैना को नहीं छोड़ते। सुरेश रैना ने कहा कि अगर मैं क्रिकेटर नहीं होता तो शेफ होता। सुरेश रैना ने कहा कि उन्हें कश्मीरी खाना बहुत पसंद है। जम्मू का राजमा चावल बहुत पसंद है। वहीं, इरफान ने कहा कि अगर वो क्रिकेटर न होते तो सिंगर होते। उन्होंने कहा कि खुशियां फैलाने वाला इंसान हमेशा खुशियां फैलता है। जो मां-बाप ने वैल्यूज दी है, उनको साथ में लेकर चलता हूं। पठान हूं तो थोड़ा खून गर्म है। हमारी जो कमजोरियां हैं उनको साथ में रखता हूं। मंच पर सुरेश रैना और इरफान ने गाना भी गाया।
चेन्नई सुपर किंग्स के साथ न खेलने पर सुरेश रैना ने कहा कि वह आईपीएल खेलने के लिए मोटिवेट नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने कहा कि दाल रोटी खानी बाकी सब यहीं रह जाता है। उन्हें लगता था कि आईपीएल में वह पैसे के लिए खेलते हैं, देश के लिए नहीं।
इरफान पठान ने कहा कि एक बॉल डालने पर खुद के वजन से आठ किलो ज्यादा वजन घुटने पर आता है। इंजर्ड नहीं होंगे तो क्या होंगे। लेकिन कामयाब होने के लिए ये सब करना पड़ता है। अगर कामयाब होंगे तो ग्लेमर और पैसा अपने आप ही आएगा।
इरफान पठान ने कहा कि जम्मू से दो लड़के आए, ये सिर्फ हीरो ही नहीं बने उनकी फैमिली लाइफ भी सेटल हो गई। उनके परिवार से मिला तो उनकी आंखों में अलग ही सुकून था। मोहम्मद सिराज को लेकर उन्होंने कहा कि उनके पिता रिक्शा चलाते थे आज वो एक शानदार खिलाड़ी हैं।
पैसे को लेकर सुरैश रैना ने कहा कि पैसे जरूरी नहीं हैं अगर हम मेहनत नहीं करेंगे... अच्छा नहीं खेलेंगे तो अगली बार आप हमें नहीं बुलाएंगे। इरफान ने कहा कि आज तक हमें प्यार मिलता है। अब बहुत सारी अलग-अलग टीम आ गई हैं। अब युवाओं के लिए चैलेंज है कि अगर वो पैसे के लिए खेलेंगे तो अच्छा नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में इतना पैसा मिलेगा उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था।
युवा क्रिकेटरों को मौके देने पर सुरेश रैना कि कहा कि युवाओं को बिल्कुल चांस मिलना चाहिए। यशस्वी जायसवाल अच्छा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लीड कौन करेगा यह जरूरी है। 2013 से आईसीसी ट्रॉफी नहीं आई अभी तक। हमें देखना होगा की कमी कहां पर है। हमें जोश और जुनून पैदा करना होगा।
वर्ल्ड कप को लेकर रैना ने कहा कि सभी ने अच्छा खेला। बहुत मेहनत की है उन लोगों ने। अगर रोहित नहीं आउट होते तो और भी रन बन जाते। पिच की रीडिंग को लेकर उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की टीम अच्छी खेली, उस दिन शायद इसीलिए वो जीत गए। बाकी हमारी टीम ने भी काफी मेहनत की। वहीं, इरफान ने कहा कि पूरी टीम शायद यही सोच रही थी टॉस जीतकर बैटिंग करेंगे। उन्होंने कहा कि उस पिच पर हल्की सी नमी आती है तो भी जरूरी नहीं है कि गेंद गीली हो। हमारी टीम पूरी तरह लड़ने के लिए तैयार थी। मलाल इस बात का है कि हमारी टीम पीछे की तरफ देख रही थी, इसीलिए आगे का गेम थोड़ा स्लो खेल रही थी।
वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ अफगानिस्तान की जीत पर राशिद खान के साथ डांस करने पर पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने कहा कि हम में और पड़ोसी की मानसिकता में फर्क है। हमने अफगान की जीत पर जश्न मनाया। पर पाकिस्तान ने हमारी हार पर जश्न मनाया।
इरफान ने कहा कि मैं विदेश जाने की तैयारी में थे लेकिन फिर कपिल देव जी के प्रेरित करने पर जम्मू कश्मीर में क्रिकेट को बढ़ाने के लिए काम किया। दो साल प्रदेश में क्रिकेट के लिए काम करना उनके लिए सबसे यादगार है।
पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मैंने और सुरेश ने जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोशिएशन के साथ काम किया। यहां पर 60 हजार बच्चों को क्रिकेट खिलाया। हम चाहते हैं यहां के हर जिले का बच्चा क्रिकेट खेले। मैंने दिल्ली के ताज होटल में भी एक मीटिंग के दौरान ये बात रखी थी। करीब चार लीग मेरे हाथ में थी, लेकिन कपिल देव ने कहा कि आपने बहुत समय तक क्रिकेट खेला, अगर आप जम्मू कश्मीर में क्रिकेट के साथ जुड़ते हैं तो वहां के लोगों के लिए बहुत अच्छा रहेगा। इसके बाद वह सुरेश रैना के साथ दो साल तक जम्मू में क्रिकेट के लिए काम किया।
एमओयू को लेकर पूछे गए सवाल पर पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना ने कहा कि पापा कश्मीर से हैं। पापा आर्मी रहे हैं। कश्मीर से रिश्ता है। उन्होंने मैंने जम्मू में पहला मैच खेला था। खेलने के दौरान सियासी चीजें काफी रहती हैं। मैं चाहता हूं जम्मू का बच्चा देश के लिए भी खेले और राजनीति में भी खेले।
अमर उजाला डॉट कॉम के संपादक जयदीप कार्णिक ने स्विंग के किंग बॉलर इरफान पठान और क्रिकेटर सुरैश रैना से अमर उजाला संवाद में बातचीत शुरू की। माता रानी के जयकारे के साथ अमर उजाला डॉट कॉम के संपादक ने संवाद की शुरूआत की।
एसबीआई के पूर्व चेयरमेन और मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने कहा कि भारत का बैंकिक सिस्टम आज बहुत मजबूत है। बैंकिक क्षेत्र के लिए इससे अच्छा समय पहले कभी नहीं रहा। ग्लोब्लिंग के समय समस्याएं आती रहती हैं। लोन की ईएमआई को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि छोटा लोन लेकर बड़ा लोन लीजिए। उन्होंने कहा कि उन्हें हिंदी मूवीज पसंद हैं, स्पोर्ट्स काफी पसंद है। 2024 में भारत की संभावनाओं को लेकर कहा कि विकास की ओर आगे बढ़ रहा है।
शिकायतों को लेकर पूछे गए सवाल पर एसबीआई के पूर्व चेयरमेन और मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने कहा कि कई शिकायतें आती रहती हैं। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नोटबंदी के दौरान कानपुर के एटीएम में किसी ने दो हजार का नकली नोट डाल दिया, फिर दिल्ली तक पूरा हड़कंप मच गया। उस समय कई तरह की दिक्कतें सामने आईं। नोटबंदी पर उन्होंने कहा कि उस समय सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी उनके ऊपर। बैंक की शाखाओं पर बहुत प्रेशर था, वो एक अगल ही तरह का चैलेंज था। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का कोई आइडिया नहीं था। वो डिनर पर गए थे। जब उन्हें पता चला उसके बाद आगे का काम शुरू किया गया।
एसबीआई के पूर्व चेयरमेन और मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने कहा कि भारत में जो इको सिस्टम है वह बहुत फेवरेवल है। आज की तारीख में टेक्नालॉजी भारत में उपलब्ध है। टैलेंट यहां पर मौजूद है। भारत का मार्केट बहुत बड़ा है। पिछले दो तीन वर्षों में लोगों का स्टार्टअप में इंटरेस्ट कम हुआ, लेकिन एक बार फिर लोग आगे आ रहे हैं।
एसबीआई के पूर्व चेयरमेन और मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने कहा कि स्टार्टअप को लेकर उन्होंने कहा कि आपको जो आइडिया आता है वह सफल भी हो सकता है और असफल भी। फेलियर से आप लर्न कर सकते हैं आप टर्न नहीं कर सकते हैं। ऐसा कुछ नहीं होता, जिसमें आप को बहुत सफलता मिल जाए। आपको रिस्क लेना पड़ेगा। फेलियर से डरना नहीं चाहिए। एक आइडिया फेल हुआ तो दूसरे आइडिया पर काम करना चाहिए।
एसबीआई के पूर्व चेयरमेन और मैनेजिंग डायरेक्टर रजनीश कुमार ने अमर उजाला की टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट एक शब्द जुड़ गया है उम्र के हिसाब से। हमारे देश में कई हस्तियां हैं जो अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। अगर कोई आदमी कुछ अचीव करता है तो वह लोगों के लिए प्रेरणा बनता है। रजनीश कुमार ने अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि सबसे बड़ी बात अगर आपको तरक्की करनी है तो पहली जरूरत है शांति की, दूसरी जरूरत कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर और तीसरी जरूरत है कैपेसिटी की। अगर ये सब चीजें होंगी तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी और व्यापार भी बढ़ेगा। जम्मू कश्मीर 26वें स्थान पर आता है। हिमाचल और जम्मू का इकॉनमी साइज बराबर है। जम्मू की कैपिटल इनकम कम है। अगर शांति रहती है तो बहुत बड़ा इंवेस्टमेंट, कनेक्टिविटी हो सकती है।
तन्मय माहेश्वरी ने कहा कि संवाद एक मिलन है आशा का और उम्मीद का प्यार का हमारे आपके साथ का। संवाद एक सीरीज है जिसके जरिए हम एक नई राह ढूंढते हैं, जो हमें नई ऊर्जा देती है, जिससे हम अपना आने वाला कल बना सकते हैं। उत्तराखंड के सफल आयोजन के बाद हम उत्साहित हैं इसे जम्मू कश्मीर में करने के लिए। संवाद के जरिए अपने-अपने क्षेत्र के लीडर आज आपके साथ साझा करेंगे अपने अनुभव और जम्मू कश्मीर को देंगे एक नई दिशा।
अमर उजाला के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी जी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आज एक नई इकॉनमी और इंटीग्रेशन विद नेशन यहां की थीम हैं। 1970 में जम्मू में इंडस्ट्री की शुरुआत हुई थी। आज यहां पर 51 इंडस्ट्रियल स्टेट हैं। नई इंवेस्टमेंट पाॉलिसी न केवल यहां इंवेस्टमेंट लेकर आएगी, बल्कि दस हजार नौकरियां लेकर आएगी। जम्मू कश्मरी कदम बढ़ा चुका है, देश के साथ इकोनॉमिक इंटीग्रेशन के लिए और हमेशा की तरह अमर उजाला आप लोगों के साथ खड़ा है।
तन्मय माहेश्वरी जी ने कहा कि जम्मू कश्मीर और अमर उजाला का रिश्ता बहुत पुराना है। बड़ी मात्रा में हिंदी भाषी होने के बाद भी यहां अंग्रेजी अखबारों का दबदबा रहा। 2005 में अमर उजाला ने आप सभी लोगों के दिलों में दस्तक दी और बहुत ही जल्द आपके प्यार ने हमें यहां का नंबर वन अखबार बनाया। ये जीत केवल आपके प्यार की थी और इस प्यारी हिंदी भाषा की थी। उसके बाद एक नए आंदोलन और एक नए प्यार की शुरूआत हुई, फिर चाहे वो 2008 का अमरनाथ आंदोलन का मुद्दा हो, डिलिमिटेशन का मुद्दा हो, कश्मीरी शरणार्थियों का मुद्दा हो, अनुच्छेद 370 का हटना, लगातार घटनाओं का होना या तो कर्फ्यू या तो बंद।इन सब चीजों के बावजूद हमने कोशिश की कि हमारा अखबार आप लोगों तक पहुंचे। हमने निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता से आपके दिलों में जगह बनाई। आप लोगों के प्यार ने अमर उजाला को देश का नंबर वन अखबार बनाया है। इसके साथ ही हमारी टीम ने यह भी कोशिश रही कि आपके पास रोजमर्रा की चीजें भी समय से पहुंचे। आपके इस प्यार देश के इस प्यार ने अमर उजाला को एक लीडिंग समाचार पत्र और लीडिंग पोर्टल बनाया है।
राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलित के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। अमर उजाला के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी जी ने शुरुआती संबोधन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संवाद...संवाद एक मिलन है, आशा का, उम्मीद का, प्यार और विश्वास का और सबसे ज्यादा हमारे और आपके साथ का। संवाद एक सीरीज है जिसके जरिए हम ढूंढते हैं एक नई राह जो जन्म देती है एक नई ऊर्जा को एक नई सोच को जिससे हम अपने आना वाला कल बेहतर बना सकें। उत्तराखंड और पंजाब के सफल सम्मेलन के बाद में हम लोग बहुत उत्साहित हैं इसे जम्मू कश्मीर में करने के लिए। संवाद के जरिए अपने -अपने क्षेत्र के लीडर आज आपके साथ साझा करेंगे अपने अनुभव और जम्मू कश्मीर को देंगे एक नई दिशा।
अमर उजाला डॉट कॉम के संपादक जयदीप कर्णिक ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में आए लोगों का अभिनंदन और स्वागत किया।
कुछ ही देर में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। पंजीकरण के लिए लोग पहुंच रहे हैं। संवाद कार्यक्रम में शामिल होने के लिए छात्र भी पहुंच रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन से वैश्विक स्तर पर कई प्रभाव देखे जा रहे हैं। खासतौर पर देश के विभिन्न राज्यों में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। जम्मू में प्रदूषण का स्तर अभी उतना नहीं है, लेकिन पर्यावरण को साफ और स्वस्थ बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास को बढ़ावा देने की जरूरत है। उम्मीद है कि अमर उजाला संवाद से जम्मू-कश्मीर की भविष्य की नीतियों को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। -डॉ. यशपाल, पर्यावरण विशेषज्ञ
संवाद कार्यक्रम से जम्मू-कश्मीर में शिक्षा के साथ तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के विकास पर बात की जाएगी। विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों द्वारा अनुभव साझा करने और नए विचारों को सुनने के बाद जम्मू-कश्मीर के सामने नई तस्वीर आएगी। विशेषज्ञों के टिप्स से खासतौर पर युवा वर्ग को लाभ मिलेगा। उन्हें जीवन में सफलता को हासिल करने में मदद मिलेगी। विद्यार्थियों और युवाओं को ऐसे संवाद को सुनने का मौका नहीं छोड़ना चाहिए। -आरुषि पुरी, उपनिदेशक, सेंटर ब्यूरो ऑफ कम्युनिकेशन जम्मू
जम्मू-कश्मीर भौगोलिक भारत का मस्तक नहीं है, अनादि काल से कई हस्तियां दुनिया को आकर्षित करती रही हैं। पिछले कुछ वर्षों से जम्मू-कश्मीर में नया सवेरा हुआ है। शिक्षा में अमूल्य परिवर्तन हो रहा है। उपराज्यपाल के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। किसी भी समाज के निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका होती है। शिक्षा से ही समाज में परिवर्तन होगा। यह विकास का आधार है। -प्रो. बेचन लाल, उपकुलपति, क्लस्टर विश्वविद्यालय जम्मू
संवाद के लिए अमर उजाला परिवार की सराहना करता हूं। कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक क्षेत्र में नए आयाम को जोड़ने के लिए मदद करेगा। सरकार को नई औद्योगिक इकाइयों के साथ मौजूदा इकाइयों के प्रोत्साहन पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का प्राथमिकता पर निदान किया जाए, ताकि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।-अनिल सूरी, उद्योगपति
जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए संवाद को आयोजित करना सराहनीय है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक मंच पर अनुभव साझा करेंगे। संबंधित क्षेत्रों के विकास में मदद मिलेगी। इसमें नीतिगत चर्चा होती है। ऐसे संवाद से स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास को लेकर शानदार नीतियां बनाने में सहायता मिलती है। -डॉ. एसके बाली, वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट
जम्मू में पहली बार इस तरह का संवाद देख रहा हूं। ऐसे संवाद में होने वाली चर्चाओं का आम लोगों के साथ नीतिगत नेतृत्व पर बेहतर प्रभाव पड़ता है। भविष्य की नीतियों को अच्छे ढंग से बनाने में मदद मिलती है। जम्मू-कश्मीर में इस तरह के कार्यक्रम नियमित तौर पर होने चाहिए। -डॉ. जगदीश थापा, वरिष्ठ मनोचिकित्सक
जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण है। ऐसी चर्चाओं में स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने पर मंथन किया जाता है। जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ साल में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है, लेकिन और सुधार लाने की जरूरत है। उम्मीद है कि ऐसे संवाद से बेहतर परिणाम सामने आएंगे। -सुशील सूदन, सदस्य, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया
जम्मू में इतने बड़े स्तर का संवाद होना खुशी की बात है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया जा रहा है, जिससे जम्मू-कश्मीर के विकास को नई गति देने में मदद मिल सकती है। ऐसी चर्चाओं से नीतिगत फैसलों में महत्वपूर्ण पहलुओं को जोड़ा जाता है। इस तरह का पहली बार बड़ा आयोजन देख रहा हूं। जो भी प्रमुख लोग आ रहे हैं वे अपने क्षेत्र में अनुभवी हैं। इससे समाज को बेहतर सीखने को मिलेगा। -रिजवान उद्दीन, ईपीएफओ आयुक्त
औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं को आगे लाने की जरूरत है। नए रोजगार सृजन करने में महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर में नई औद्योगिक संपदाओं का निर्माण किया जा रहा है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक क्षेत्र की नई तस्वीर होगी। ऐसे संवाद से विचारों का आदान-प्रदान होने से उद्योग के साथ अन्य क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा।-राधे महाजन, उद्योगपति
ऐसे संवाद कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर होने वाली चर्चा काफी मायने रखती है। विशेषज्ञों के अनुभवों और राय व सुझावों के साथ जम्मू-कश्मीर के भविष्य के लिए नई नीतियों पर बेहतर ढंग से मंथन किया जाएगा। पिछले कुछ साल में जम्मू-कश्मीर के लगभग क्षेत्रों में विकास हुआ है। उम्मीद है कि नया जम्मू-कश्मीर और उपलब्धियां जोड़ेगा।- मदन लाल मगोत्रा, उप आयुक्त, फूड सेफ्टी जम्मू संभाग
जम्मू में पहली बार देश की जानी-मानी हस्तियों का अमर उजाला संवाद जम्मू-कश्मीर में सजे मंच को लेकर जम्मूवासियों में जबर्दस्त उत्साह है। सभी इस अभियान का हिस्सा बनने को आतुर दिख रहे हैं। कार्यक्रम को लेकर कई लोगों ने उत्सुकता जताते हुए जानकारी भी हासिल की है।
मनोरंजन जगत की नई दिशाएं सत्र के तहत फिल्म कलाकार विक्की कौशल जम्मूवासियों से रूबरू होंगे। केंद्रीय खेल, युवा मामलों तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनुराग ठाकुर प्रदेश के युवाओं खासकर खिलाड़ियों में जोश भरेंगे। उन्हें बेहतर कल की तस्वीर भी दिखाएंगे।
बियांड बाउंड्रीज सत्र में क्रिकेट जगत के सितारे पूर्व क्रिकेटर इरफान और सुरेश रैना युवाओं में जोश भरेंगे। जिद्द और जुनून सत्र में एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट पैरा आर्चर शीतल कुमारी व पैरा आर्चर राकेश कुमार उभरती खेल संस्कृति व मौजूदा चुनौतियों से जम्मूवासियों को परिचित कराएंगे। मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास सार्थक जीवन की राह बताएंगे।
संवाद कार्यक्रम में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा जम्मू कश्मीर में हो रहे बदलावों से लोगों को परिचित कराएंगे। साथ ही उभरते जम्मू-कश्मीर की तस्वीर पेश करेंगे। जम्मू-कश्मीर में उभरते उद्योग तथा वित्तीय परिदृश्य पर मास्टर कार्ड व भारत पे के चेयरमैन तथा एसबीआई के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार रोशनी डालेंगे तो रोशन राहें सत्र में एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रो. टीजी सीताराम जम्मू-कश्मीर के शिक्षा परिदृश्य पर रोशनी डालते हुए युवाओं को सफलता की राह दिखाएंगे।
स्वर्णिम शताब्दी की ओर बढ़ रहा जम्मू-कश्मीर कैसे विकसित होगा, इसका रोड मैप वीरवार को कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में तैयार होगा। सुबह साढ़े नौ बजे शुरू होने वाले कार्यक्रम में देशभर से शिक्षा, बैंकिंग, खेल, सिनेमा जगत की हस्तियां जुटेंगीं। मोटिवेशनल स्पीकर भी सफल जीवन की राह बताएंगे। नीति नियंता, विचारक और विशेषज्ञ अपने अपने क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं की रूपरेखा रखेंगे।