ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की दो दिवसीय यात्रा आज से शुरू हो रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस रथ यात्रा में जुटे हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, गजपति दिव्यसिंह देब द्वारा रथों का छेरापहंरा शाम 4 बजे तक किया जाएगा। रथों पर लकड़ी के घोड़े लगाने के बाद शाम 5 बजे से रथ खींचने का काम शुरू होगा। भगवान बलभद्र तालध्वज पर सवार होकर रथ यात्रा का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद देवी सुभद्रा दर्पदलन में होंगी। अंत में भगवान जगन्नाथ नंदीघोष पर सवार होकर जाएंगे। गर्मी और उमस के बावजूद लाखों श्रद्धालु रथ यात्रा में हिस्सा लेने के लिए यहां बडाडांडा में एकत्र हुए।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी बड़ादंडा पहुंच गए हैं, जबकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के भी शाम 4.40 बजे मंदिर के बाहर ग्रैंड रोड पर पहुंचने की उम्मीद है।
रत्न सिंहासन, यानी रत्न सिंहासन से उतरते हुए, तीनों देवताओं को सिंह द्वार से होकर 'बाइसी पहाचा' नामक 22 सीढ़ियों से नीचे मंदिर से बाहर ले जाया गया। मंदिर के गर्भगृह से पीठासीन देवताओं के बाहर निकलने से पहले 'मंगला आरती' और 'मैलम' जैसे कई अनुष्ठान किए गए।
देवताओं के साथ तीन राजसी रथ अब मंदिर के सिंह द्वार के सामने गुंडिचा मंदिर की ओर पूर्व की ओर मुख करके खड़े हैं। पहांडी अनुष्ठान पूरा होने के बाद, पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती अपने रथों पर पवित्र त्रिदेवों को नमन करेंगे। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और कई राज्य मंत्रियों ने शंकराचार्य से मुलाकात की।
रविवार को पुरी के जगन्नाथ मंदिर में तीन घंटे तक चली 'पहांडी' रस्म पूरी होने के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने रथ पर चढ़े। 'जय जगन्नाथ' के नारों के बीच, पुरी मंदिर के सिंहद्वार पर घंटे, शंख और झांझ की ध्वनि गूंज उठी, जब सुबह करीब 11.15 बजे 'पहांडी' शुरू हुई और भगवान सुदर्शन को सबसे पहले देवी सुभद्रा के रथ, दर्पदलन तक ले जाया गया।
भगवान सुदर्शन के बाद, भगवान बलभद्र को उनके तलध्वज रथ पर ले जाया गया। भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा को सेवकों द्वारा एक विशेष जुलूस में उनके दर्पदलन रथ पर लाया गया। आखिर में, भगवान जगन्नाथ को घंटियों की ध्वनि के बीच एक औपचारिक जुलूस में नंदीघोष रथ पर ले जाया गया। 'पहांडी' अनुष्ठान, जिसमें देवताओं को मंदिर से रथों पर लाया जाता है, दोपहर करीब 2.15 बजे पूरा हुआ।
अहमदाबाद की डीसीपी कोमल व्यास ने जगन्नाथ रथयात्रा आयोजन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कहा, 'अहमदाबाद स्मार्ट सिटी के कैमरे शहर में पहले से ही लगे हुए हैं, और रथ यात्रा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्हें समायोजित और ज़ूम किया गया है। जब एक जगह पर बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है और अपने मोबाइल नेटवर्क का उपयोग करती है, तो कनेक्टिविटी प्रभावित होती है। ऐसे में पुलिस का काम बिना किसी बाधा के हो, इसके लिए हम अपने वीएचएफ सेट का उपयोग करते हैं। हम बंधे हुए हीलियम गुब्बारों का भी उपयोग कर रहे हैं। हमने जुलूस का विहंगम दृश्य प्राप्त करने के लिए हीलियम गुब्बारे पर एक कैमरा लगाया है। हमने सभी पुलिस वाहनों में जीपीएस लगाया है। अहमदाबाद की मुख्य रथ यात्रा के अलावा, शहर में 7 और रथ यात्राओं की योजना बनाई गई है। रथ यात्रा के अलावा, हमने राज्य में आयोजित की जा रही 4 विभिन्न प्रकार की भर्ती परीक्षाओं का भी प्रबंधन और सुचारू संचालन सुनिश्चित किया है। रथ यात्रा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 24000 कर्मियों की भर्ती की गई है।'
महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए पहांडी रस्म शुरू हो गई है। इसके साथ ही महाप्रभु को परंपरा के अनुसार, राघवदास मठ द्वारा तैयार किया गया ताहिया पहनाया जाएगा। ताहिया फूलों का बना मुकुट होता है, जिसे रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को पहनाया जाता है। 'पहांडी' परंपरा के अनुसार, सबसे पहले श्री चक्रराज सुदर्शन को रथ पर चढ़ाया जाता है। उनके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को रथ पर चढ़ाया जाता है। नृत्य हॉल से सात सीढ़ियों वाले उत्तरी निकास पर, तीनों देवता एकत्रित होते हैं और फिर रथयात्रा शुरू होगी।
धार्मिक पुराणों के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की इस रथयात्रा में शामिल होने से 100 यज्ञों के बराबर पुण्य का फल मिलता है। यही वजह है कि दुनियाभर से लोग इस यात्रा में शामिल होने पहुंचते हैं और भगवान का आशीर्वाद लेते हैं। इसके अलावा, रथ यात्रा के दौरान नवग्रहों की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने मात्र से ही अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है और शुभ ग्रहों का प्रभाव बढ़ता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पवित्र रथ यात्रा की शुरुआत पर लोगों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, 'पवित्र रथ यात्रा की शुरुआत पर बधाई। हम महाप्रभु जगन्नाथ को नमन करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि उनका आशीर्वाद हम पर हमेशा बना रहे।'
गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल ने कहा, 'रथ यात्रा उत्सव के अवसर पर नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं। अहमदाबाद की यह रथ यात्रा जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा के बाद सबसे बड़ी रथ यात्रा मानी जाती है। इस पवित्र दिन पर भगवान स्वयं नागरिकों को दर्शन देने के लिए निकलते हैं। रथ यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रूप से आयोजित हो, इसके लिए सभी इंतजाम किए गए हैं। यह पवित्र उत्सव गुजरात और पूरे देश में सुख, शांति और समृद्धि लाए।'
पुरी के एसपी पिनाक मिश्रा ने कहा, 'आज हम भगवान श्री जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा मना रहे हैं। जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, इस रथ यात्रा में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पुरी आएंगे। हमने व्यापक पुलिस व्यवस्था की है। हमने पुलिस व्यवस्था को कई महत्वपूर्ण खंडों में विभाजित किया है। भीड़ नियंत्रण और विनियमन के लिए व्यवस्था की गई है। यातायात और पार्किंग से संबंधित मामलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भारत की राष्ट्रपति पुरी का दौरा करेंगी। इसलिए राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, कई अन्य गणमान्य व्यक्ति पुरी का दौरा करेंगे। हम कई एजेंसियों के संपर्क में हैं और हम उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम तटरक्षक बल, तटीय सुरक्षा, रेलवे सुरक्षा के साथ समन्वय में हैं।'
गुजरात में सीएम भूपेंद्र पटेल और गृह मंत्री हर्ष सांघवी अहमदाबाद में जगन्नाथ रथयात्रा में हुए शामिल
थोड़ी देर में शुरू होगी जगन्नाथ रथयात्रा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी होंगी शामिल
अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर में तीनों विग्रहों के श्रृंगार के बाद रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत हुई।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इस्कॉन की तरफ से रथयात्रा की तैयारियां हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मिंटो पार्क के पास 3सी अल्बर्ट रोड स्थित इस्कॉन मंदिर में रथ यात्रा का उद्घाटन करने वाली हैं। इस वर्ष की रथ यात्रा 53वां संस्करण है। यहां 46 साल पुराने रथ पर यात्रा निकाली जाती है। रथ के पहियों का वजन 250 किलो बताया जाता है, जबकि भगवान जगन्नाथ के रथ की ऊंचाई 46 फीट और बलभद्र का रथ 38 फीट ऊंचा है। पुरी के बाद कोलकाता की रथ यात्रा दुनिया की सबसे बड़ी रथ यात्रा मानी जाती है। पिछले साल 9 दिवसीय उत्सव में 20 लाख से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया था।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी रथयात्रा निकाली जाती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हर साल महाकाल की नगरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ से प्रदेश के लिए आशीर्वाद की कामना भी की। उन्होंने कहा कि इस साल भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को तीन अलग-अलग रथों में रथारुढ़ किया जाएगा, जिसका विशेष उत्साह है। उन्होंने कहा कि साल में एक बार भगवान शिव और कृष्ण के मिलने का मौका विशेष होता है। हरिहर मिलन के इस मौके पर उज्जैन की छटा देखने लायक होगी।
रथ यात्रा 2024 से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार तड़के अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर में 'मंगला आरती' की। जगन्नाथ मंदिर में पूजा अर्चना के दौरान शाह के साथ उनकी पत्नी सोनल शाह भी थीं। मंगला आरती के बाद गृह मंत्री शाह को मंदिर प्रबंधन की तरफ से आशीर्वाद के तौर पर पगड़ी, स्मृति चिह्न और पटका भी दिया गया। शाह और उनकी पत्नी का पुरोहितों ने माला पहनाकर स्वागत किया।
रथयात्रा का 147वां संस्करण; सुरक्षा में 15 हजार से अधिक पुलिसकर्मी
गौरतलब है कि अहमदाबाद में इस साल भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा का 147वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। स्थानीय पुलिस के अनुसार लाखों भक्तों के आने की उम्मीद है। अहमदाबाद पुलिस के संयुक्त आयुक्त नीरज बडगुजर ने बताया कि प्रशासन ने सुरक्षा के लिए 15,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। भक्तों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए हरसंभव व्यवस्था की गई है। सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी जैसी तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
ओडिशा के पुरी में रथयात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जगन्नाथपुरी के नाम से विख्यात इस शहर में रथयात्रा के दिन दुनियाभर से श्रद्धालु उमड़ते हैं। इस साल लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के रथयात्रा में शामिल होने का अनुमान है। पुरी के अलावा गुजरात के अहमदाबाद, पूर्वोत्तर में त्रिपुरा, झारखंड की राजधानी रांची और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत कई अन्य राज्यों में भी रथयात्राएं निकाली जाती हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रथयात्रा शामिल होने के लिए भुवनेश्वर पहुंच चुकी हैं। ओडिशा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दयाल गंगवार ने बताया कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) फीचर से लैस कैमरों और ड्रोन से निगरानी की जाएगी।
पुरी में रथयात्रा की तैयारियों के मद्देनजर एडीजी (कानून व्यवस्था) संजय कुमार ने बताया कि पुलिस पहली बार एआई कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। इससे भीड़ का पता लगाने, वाहन की गिनती करने और सही समय पर सही जानकारी प्राप्त करने की दिशा में मदद मिलेगी। इसके अलावा, रैपिड एक्शन फोर्स की तीन कंपनियां, सीआरपीएफ की दो कंपनियां और एसओजी ग्रुप की आठ प्लाटून हर कदम पर यात्रा के साथ होंगी।