संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। दुजारिक ने कहा कि पांच स्थायी सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती और संयुक्त राष्ट्र को 2026 की दुनिया के अनुरूप खुद को ढालना होगा।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की शुरुआती टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए दुजारिक ने कहा कि सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की बुनियादी जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यूएनएससी में सुधार को अब और स्थगित नहीं किया जा सकता।
दुजारिक ने एएनआई से कहा, 'अगर आप सुनें कि महासचिव पद संभालने के बाद से क्या कहते आ रहे हैं और सच कहें तो उनसे पहले के महासचिव भी यही कहते रहे हैं कि सुरक्षा परिषद में सुधार की बुनियादी जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र की शांति और सुरक्षा व्यवस्था का केंद्र सुरक्षा परिषद है।'
उन्होंने कहा, 'आज सुरक्षा परिषद जिस तरह पांच स्थायी सदस्यों के साथ बनी हुई है, वह 21वीं सदी की वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करती। चाहे सुरक्षा परिषद हो, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान हों या अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं, उन्हें 1945 की नहीं बल्कि 2026 की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए। अब समय आ गया है कि हम इस संगठन को दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप ढालें, ताकि यह वास्तव में अधिक प्रतिनिधित्व वाला और प्रभावी बन सके।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए यहां रात्रिभोज का आयोजन किया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के रात्रिभोज का मेन्यू
स्टार्टर
खंडवी मिल-फॉय
भाप में पकाए गए बेसन के रोल, जिन्हें राई, नारियल और करी पत्ते से तड़का दिया गया है। इसे केसर आम, माइक्रो-ग्रीन्स और दही की ड्रेसिंग के साथ परोसा जाएगा।
खुंब गलौटी
पैन पर हल्के से सेंके गए मुलायम मशरूम कबाब, पुदीने के मोती के साथ। इसे शीर्मल रोटी के ऊपर परोसा जाएगा।
डिनर
पनीर लबाबदार
मुलायम पनीर के टुकड़ों को प्याज और टमाटर की गाढ़ी मसालेदार ग्रेवी में पकाया गया है।
गुच्ची मार्मिक
हिमालयी गुच्ची मशरूम और मुलायम शतावरी को केसर, किशमिश और मामरा बादाम के साथ धीमी आंच पर पकाया गया है।
गाजर-फली पोरियल
गाजर और हरी फली को दक्षिण भारतीय सुगंधित मसालों में सेंककर, हाथ से निकाले गए शुद्ध नारियल तेल में पकाया गया है। इसके ऊपर ताजा कसा हुआ नारियल डाला गया है।
टमाटर बेल्ले सारू
तुअर दाल का हल्का शोरबा, जिसमें ताजे टमाटर और करी पत्ते का स्वाद मिलाया गया है।
बाजरा पुलाव
सुगंधित बासमती चावल और बाजरे को मसालों और मौसमी सुगंधित सामग्री के साथ पकाया गया है।
चुकंदर का रायता
ठंडा दही, चुकंदर और ताजी हरी जड़ी-बूटियों के साथ।
विभिन्न प्रकार की भारतीय रोटियां
मिठाई
पुरानी दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी
मौसमी फलों और हल्की फेंटी हुई क्रीम के साथ कुरकुरी मीठी जलेबी।
शहतूत फिरनी
दूध और चावल से धीमी आंच पर पकाई गई खीर जैसी मिठाई, जिसके ऊपर मीठे शहतूत और सोने की परत सजाई गई है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य वैश्विक नेता भारत मंडपम में पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए यहां रात्रिभोज का आयोजन किया है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi, Russian President Vladimir Putin and other world leaders at Bharat Mandapam
— ANI (@ANI) September 12, 2026
PM Modi has hosted gala dinner for global leaders and delegates here
(Source: DD) pic.twitter.com/lOlKp0W7Df
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत मंडपम में ब्रिक्स नेताओं के लिए आयोजित रात्रिभोज में शामिल होने के लिए पहुंचे।
#WATCH | Delhi: Russian President Vladimir Putin arrives at Bharat Mandapam for the gala dinner hosted by Prime Minister Narendra Modi for global leaders and delegates.
— ANI (@ANI) September 12, 2026
(Source: DD) pic.twitter.com/YgIXTE7rss
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, सर्बानंद सोनोवाल, अर्जुन राम मेघवाल के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अन्य मंत्री और मुख्यमंत्री बसों से भारत मंडपम के लिए रवाना हुए। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से वैश्विक नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए आयोजित रात्रिभोज में शामिल होंगे।
#WATCH | Delhi: Union Ministers Kiren Rijiju, Sarbananda Sonowal and Arjun Ram Meghwal, along with Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath and other ministers and chief ministers, travelled together in buses as they headed to Bharat Mandapam for the gala dinner hosted by… pic.twitter.com/BJfCUlCjAZ
— ANI (@ANI) September 12, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए।
दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को तीन 'परस्पर' सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित से निर्देशित होना चाहिए।
सीमा पर शांति जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के लगातार विकास का एक आवश्यक आधार है। उन्होंने सीमा से जुड़े मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन करने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने राजनीतिक दृष्टिकोण और दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों तथा दोनों देशों की जनता के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
लोगों के बीच संपर्क और व्यापार बढ़ाने पर जोर
दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संबंधों में हुई प्रगति का संज्ञान लिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कारोबारी संपर्क तथा दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को और बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया। आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया। इनमें व्यापार में संरचनात्मक असंतुलन और आपूर्ति शृंखला से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। दोनों देशों ने सार्थक और पूर्वानुमान योग्य बाजार पहुंच को सुगम बनाने पर भी जोर दिया।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों तथा विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए साझा आधार को लगातार व्यापक बनाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता में उसके योगदान की सराहना की।
#WATCH | Delhi: World Health Organization (WHO) Director-General Tedros Adhanom Ghebreyesus arrives at Bharat Mandapam for the gala dinner hosted by Prime Minister Narendra Modi for global leaders and delegates.
(Source: DD) pic.twitter.com/bHE1nnOrmM
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होने आए वैश्विक नेताओं के लिए कुछ ही देर में रात्रिभोज का आयोजन होगा। इस डिनर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत अन्य मंत्री भारत मंडपम के लिए रवाना हुए। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए विभिन्न राज्यों के केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री एक साथ भारत मंडपम के लिए रवाना हुए।
#WATCH | BRICS Summit 2026 | Delhi | Union Home Minister Amit Shah, Union Health Minister JP Nadda and Lok Sabha Speaker Om Birla, along with other ministers, depart for Bharat Mandapam.
— ANI (@ANI) September 12, 2026
Union Ministers and Chief Ministers of various states travel together for the BRICS Summit. pic.twitter.com/wfzUjNdgb5
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक खत्म हो गई। इस दौरान जिनपिंग ने कहा कि वे ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करें। जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान यह बात कही।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और साझा विकास की दिशा में मिलकर काम कर सकते हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान यह बात कही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक के दौरान पीएम मोदी ने चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। पीएम मोदी ने कहा कि अब द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का मौका है। यह संबंधों को मजबूत करने का वक्त है। बैठक में पीएम मोदी ने शी जिनपिंग के भारत दौरे का स्वागत किया और ब्रिक्स में सकारात्मक बयान के लिए आभार जताया।
#WATCH | Delhi: PM Narendra Modi holds a bilateral meeting with Chinese President Xi Jinping on the sidelines of BRICS Summit 2026.
— ANI (@ANI) September 12, 2026
(Video: DD News) pic.twitter.com/Du0myPd5Uo
ब्रिक्स की 'फैमिली फोटो' के लिए पीएम मोदी और ब्रिक्स देशों के नेता इकट्ठा हुए। इस दौरान पीएम मोदी के एक छोटे से इशारे ने सबका ध्यान खींचा। दरअसल, फैमिली फोटो के लिए सभी नेताओं एक समान दूरी पर अलग-अलग खड़े हुए थे। इस बीच पीएम मोदी ने नेताओं को एक-दूसरे का हाथ पकड़ने का इशारा किया, तो वह पल ब्रिक्स समूह में शामिल अलग-अलग देशों के बीच एकता, सामूहिक ताकत और एकजुटता की एक तस्वीर बन गया।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and BRICS Leaders pose for a Family Photo (Leaders of BRICS Member Countries).
— ANI (@ANI) September 12, 2026
(Video: DD News) pic.twitter.com/Vqatv2bbd9
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायानी दिल्ली पहुंचे।
#WATCH | BRICS Summit 2026 | Delhi: Bahrain Minister of Foreign Affairs Dr Abdullatif Bin Rashid Alzayani arrives in India. pic.twitter.com/PxZIxD1Gj4
— ANI (@ANI) September 12, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक कुछ ही देर में शुरू होने वाली है। साल 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा पर उपजे सैन्य तनाव के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक ठहराव रहा है। ऐसे में जिनपिंग के साथ यह द्विपक्षीय बैठक संबंधों को सामान्य करने के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। इस दौरे से पहले पिछले महीने 25 अगस्त को बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की बातचीत हुई थी। उस बैठक में सीमा प्रबंधन और सीमांकन पर तेजी से आगे बढ़ने को लेकर कई सहमति बनी थी।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की और बातचीत की।
Delhi | Iranian President Masoud Pezeshkian held a meeting and talks with Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan, President of the United Arab Emirates, on the sidelines of the BRICS Summit.
— ANI (@ANI) September 12, 2026
(Source: Embassy of Iran in India) pic.twitter.com/KbQ6okLbLg
ब्रिक्स देशों ने खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया। समूह ने आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया। साथ ही क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता हासिल करने के लिए संवाद और कूटनीति के अधिक इस्तेमाल की अपील की। ब्रिक्स ने वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता
ब्रिक्स ने नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा उपायों के तहत आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए गए हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई। समूह ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और आईएईए के सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ब्रिक्स देशों ने आपसी सम्मान और समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता, सहयोग और आम सहमति की ब्रिक्स भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। ब्रिक्स देशों ने कहा कि ब्रिक्स के दो दशकों के अनुभव के आधार पर विस्तारित ब्रिक्स में राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क के तीन स्तंभों के तहत सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।
नई दिल्ली घोषणा में कहा गया कि शांति, अधिक प्रतिनिधित्व वाली और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, मजबूत एवं सुधारित बहुपक्षीय प्रणाली, सतत विकास और समावेशी वृद्धि को बढ़ावा देकर लोगों के हित में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। ब्रिक्स देशों ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच/ब्रिक्स प्लस संवाद सत्र की मेजबानी के लिए भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने के प्रयासों को नई गति मिली है।
गाजा में युद्धविराम बनाए रखने की अपील
ब्रिक्स देशों ने सभी पक्षों से गाजा में युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की पूर्ण एवं निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। अक्टूबर 2025 के युद्धविराम समझौते के बावजूद जारी हिंसा पर उन्होंने गहरी चिंता जताई। ब्रिक्स ने गाजा से फलस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने की नीतियों का भी विरोध किया। समूह ने इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान तथा फलस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों के समर्थन की पुष्टि की। इनमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार भी शामिल है।
ब्रिक्स ने फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता दिए जाने के समर्थन को दोहराया। साथ ही दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 1967 की सीमाओं के भीतर गाजा और पश्चिमी तट समेत एक स्वतंत्र एवं संप्रभु फलस्तीनी राज्य हो और पूर्वी यरुशलम उसकी राजधानी हो।
लेबनान की संप्रभुता के उल्लंघन पर चिंता
नई दिल्ली घोषणा में ब्रिक्स देशों ने युद्धविराम के लगातार उल्लंघन और लेबनान की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा की। समूह ने इस्राइल से लेबनान की सरकार के साथ हुए समझौते की शर्तों का सम्मान करने और लेबनान के उन सभी क्षेत्रों से अपनी कब्जे वाली सेनाएं वापस बुलाने का आह्वान किया, जहां वे अभी भी मौजूद हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत ब्रिक्स में शामिल 10 देशों के वैश्विक नेताओं ने भारत मंडपम में पौधारोपण किया। इससे पहले पीएम मोदी ने ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and BRICS Leaders pose for a Family Photo (Leaders of BRICS Member Countries).
— ANI (@ANI) September 12, 2026
(Video: DD News) pic.twitter.com/Vqatv2bbd9
ब्रिक्स देशों ने आपसी सम्मान और समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन, समावेशिता, सहयोग और आम सहमति की ब्रिक्स भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया कि ब्रिक्स के दो दशकों के अनुभव के आधार पर विस्तारित ब्रिक्स में सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क के तीन स्तंभों के तहत सहयोग बढ़ाया जाएगा।
घोषणापत्र में कहा गया कि शांति, अधिक प्रतिनिधित्व वाली और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, मजबूत एवं सुधारित बहुपक्षीय प्रणाली, सतत विकास और समावेशी वृद्धि को बढ़ावा देकर लोगों के हित में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। ब्रिक्स देशों ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आउटरीच/ब्रिक्स प्लस संवाद सत्र की मेजबानी के लिए भारत की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस पहल से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने के प्रयासों को नई गति मिली है।
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की है। नई दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया कि आतंकवाद के पीछे कोई भी मकसद हो, वह कहीं भी हुआ हो या उसके पीछे कोई भी व्यक्ति हो, उसकी निंदा की जानी चाहिए। ब्रिक्स के साझा बयान में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
ब्रिक्स देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने के खिलाफ लड़ाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
घोषणापत्र में आतंकवाद के प्रति 'शून्य सहनशीलता' की नीति अपनाने, इसमें शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने का आह्वान किया गया। ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को जल्द अंतिम रूप देने और उसे अपनाने की भी अपील की।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सभी देशों ने साझा घोषणापत्र पर सहमति जताई। साझा घोषणापत्र जारी करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोस्तों, आज की हमारी बैठक बहुत सार्थक और रचनात्मक रही है। हमारे विचारों की विविधता के साथ-साथ ब्रिक्स सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। आज की चर्चा से स्पष्ट है कि बदलते हुए विश्व का संचालन पुराने संस्थानों से नहीं किया जा सकता। रिप्रजेंटेशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल मेकिंग... तीनों में सुधार आवश्यक है। हमने इस बात पर भी बल दिया कि भविष्य की तकनीक और उनके नियमों के निर्माण में वैश्विक दक्षिण की बराबर भागीदारी होनी चाहिए। निर्णयों और उनके परिणामों के बीच जो दूरी बनी हुई है, उसे पार्टनरशिप और कलेक्टिव एक्शन से कम करना होगा। आज स्वीकार किया गया नई दिल्ली घोषणापत्र हमारे साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा देता है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि अब इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदलें।
कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट केमेलुली टोकायेव 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने में अपनी उचित भूमिका निभाने के लिए अन्य ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने कहा कि युद्ध के कारण पूरे क्षेत्र के लोगों को गंभीर नुकसान हुआ है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ सहयोग करने को तैयार है।
Sharing my opening remarks during the BRICS Session on ‘Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism.’
— Narendra Modi (@narendramodi) September 12, 2026
https://t.co/g31TharSOc
सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'मैं प्रस्ताव रखता हूं कि हम मिलकर ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के 10 प्रपोजल तैयार करें जिसे हम अगली समिट तक एक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप कर सकते हैं। इस रोडमैप को बनाने में हमें तीन मुख्य पहलुओं- रिप्रेजेटेंशन, रिस्पॉन्सिवनेस और रूल मेकिंग का ध्यान रखना होगा। पहला- रिप्रेजेंटेशन में यूएनएससी में सुधार अब टाला नहीं जा सकता। टैक्स बेस्ड नेगोशिएशन से हमें इस जोड़ना होगा। वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, इकोनॉमिक नीति आज की असलियत के आधार पर होनी चाहिए। जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक को गति देते हैं उन्हें उचित भूमिका मिलनी चाहिए।'
ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी। ग्लोबल गवर्नेंस का वर्तमान स्ट्रक्चर एक पिरामिड जैसा दिखाई देताहै। इसके ऊपरी भाग में पावर और जिसीजन मेकिंग केंद्रित है। और नीचे वह देश स्थित हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित तो होते हैं, लेकिन अपने आकार की वजह से फैसलों में शामिल नहीं हो पाते।
ब्रिक्स ने पिछले 20 साल में वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और कंसेन्सस से आगे बढ़ते हैं। हम सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। समय है कि हम ब्रिक्स में अपनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच में ठोस परिणामों में बदलें। अगले 20 साल के लिए हमें एंबिशियस एजेंडे पर काम करना होगा। इसकी शुरुआत हमें खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है, लेकिन इसकी वजह से हमारा संस्थागत बढ़ोतरी नहीं रुकनी चाहिए।
ब्रिक्स में राष्ट्राध्यक्षों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'रेजिलियंस, इनोवेशन और कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी हमारी प्राथमिकता रही है। इसके जरिए हमने ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष बल दिया है। इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया। लगभग 30 शहरों में आपकी टीम्स का स्वागत करने का हमें मौका मिला। ब्रिक्स की अध्यक्षता के समर्थन के लिए मैं आपका हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। इस साल की ब्रिक्स समिट एक ऐतिहासिक पड़ाव पर है। हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।'
भारत मंडपम में बैठक के लिए पीएम मोदी ने पहुंचने के बाद बैठक में शामिल होने के लिए आए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रुस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन समेत सभी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया। इस दौरान प्रधानमंत्री की सभी राष्ट्राध्यक्षों के साथ कमेस्ट्री देखने के लिए मिली।
ब्रिक्स समिट समारोह की बैठक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भारत मंडपम पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही बैठक में शामिल होने के लिए आने वाले विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का वह स्वागत कर रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, समारोह के साझा बयान पर सहमति बन गई है और यह शाम 4 बजे जारी किया जा सकता है।
वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन से भारत और वियतनाम के बीच कूटनीतिक संवाद को मजबूती मिलने की उम्मीद है। सम्मेलन के दौरान वैश्विक मुद्दों, आर्थिक सहयोग, व्यापार और बहुपक्षीय संबंधों पर चर्चा होने की संभावना है। ट्रुंग विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे।
ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया। जानकारी के मुताबिक, जिनपिंग और पीएम मोदी की आज शाम पौने छह बजे बैठक प्रस्तावित है।
#WATCH | Delhi: Chinese President Xi Jinping arrives in Delhi to participate in the BRICS Summit 2026.
— ANI (@ANI) September 12, 2026
PM Modi is scheduled to hold a bilateral meeting with the Chinese President later today. pic.twitter.com/mJk6YVYt5P
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
#WATCH | Delhi: Iranian President Masoud Pezeshkian meets President Droupadi Murmu at Rashtrapati Bhavan, in Delhi. pic.twitter.com/GOmHmi93UI
— ANI (@ANI) September 12, 2026
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट 2026 में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। उनके आगमन के साथ ही शिखर सम्मेलन में भारत-चीन संबंधों पर भी नजरें टिक गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बाद में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस मुलाकात में आपसी संबंधों और साझा हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
#WATCH | Delhi: Chinese President Xi Jinping arrives in Delhi to participate in the BRICS Summit 2026. pic.twitter.com/UgZ0zVNQqG
— ANI (@ANI) September 12, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट 2026 के इतर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज इथियोपिया और मलेशिया के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों में दोनों देशों के साथ भारत के संबंधों को नई दिशा देने पर चर्चा हुई। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इथियोपिया और मलेशिया ने भारत के साथ रक्षा सहयोग मजबूत करने के साथ-साथ भारत से रक्षा उपकरणों और हथियारों की खरीद में रुचि जताई। बातचीत में दोनों देशों के सैन्यकर्मियों के संयुक्त प्रशिक्षण और रक्षा क्षेत्र में क्षमता निर्माण पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने भारतीय उद्योग और निवेश का स्वागत किया, जबकि इथियोपिया ने विशेष रूप से भारतीय खनन कंपनियों के लिए अवसरों का स्वागत किया। वहीं, मलेशिया के साथ बातचीत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग और निवेश के अवसरों पर भी चर्चा हुई। इन बैठकों को भारत के रक्षा निर्यात, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, सात साल बाद भारत आ रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का विमान इंडियन एयर स्पेस में एंटर कर चुका है और वह कुछ ही देर में दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड करेंगे। बताया जा रहा कि ब्रिक्स की बैठकों के इतर प्रधानमंत्री मोदी चीनी राष्ट्रपति के साथ शनिवार शाम 5 बजकर 45 मिनट पर द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हैदराबाद हाउस में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत और मलेशिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की। बैठक में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। ब्रिक्स सम्मेलन के इतर हुई इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेताओं ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार साझा किए।
वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग ब्रिक्स समिट 2026 में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। दिल्ली पहुंचने पर भारत सरकार में नागरिक उड्डयन एवं सहकारिता राज्य मंत्री ने उनका स्वागत किया। वियतनामी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन के दौरान सदस्य और साझेदार देश वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास और आपसी सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। भारत की मेजबानी में हो रहे इस सम्मेलन में वियतनाम की भागीदारी से दोनों देशों के बीच संबंधों और सहयोग को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने शनिवार को दिल्ली में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी से मुलाकात की। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स दोनों के मुलाकात की वीडियो जारी की। इसके साथ ही बताया कि यह बैठक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर दक्षिण अफ्रीका के कारोबारी संवाद का हिस्सा थी। इसका उद्देश्य दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच व्यापारिक एवं निवेश संबंधों को और मजबूत करना है।
दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल जर्मन मीडिया प्रतिनिधि बेन ने भारत की व्यवस्थाओं की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत उनकी उम्मीदों से कहीं बेहतर है और सम्मेलन का आयोजन अब तक बिल्कुल शानदार रहा है। उन्होंने ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स सम्मेलनों का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस बार मिला मीडिया किट सबसे बेहतरीन है, जिसमें वीगन सुपर फूड, कॉफी, हल्का मग, खूबसूरत स्कार्फ, बोतल और अन्य उपयोगी सामग्री शामिल है।
बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिजेनकोव 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार सुबह भारत पहुंचे। नई दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने उनका स्वागत किया गया। रिजेनकोव का भारत दौरा ब्रिक्स देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग से नई दिल्ली रवाना हो गए हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी जिनपिंग भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। उनके साथ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और CPC केंद्रीय समिति के सामान्य कार्यालय के निदेशक काई छी, तथा पोलित ब्यूरो के सदस्य और चीनी विदेश मंत्री वांग यी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे बड़े बदलावों, व्यापार के बदलते तौर-तरीकों, तीव्र तकनीकी विकास और जलवायु संकट के बीच ब्रिक्स समूह आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने इसे ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के लिए एक अधिक लचीला, विविधतापूर्ण और समावेशी आर्थिक भविष्य तैयार करने का सुनहरा अवसर करार दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते दुनिया भर के देशों और कंपनियों को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि वे कहां से सामान खरीदें, कहां उत्पादन करें और कहां निवेश करें। उन्होंने कहा कि यह दौर ब्रिक्स देशों को पुरानी आर्थिक सीमाओं से बाहर निकलने का मौका देता है। ब्रिक्स देशों का लक्ष्य केवल आपसी व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे उत्पादक संबंध स्थापित करना होना चाहिए।
विकासशील देश केवल उपभोक्ता न बनें
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विकासशील देशों को केवल कच्चे माल के निर्यातक या तैयार माल के उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब तक वैश्विक मूल्य शृंखला में तकनीकी विकास और उच्च मूल्य विनिर्माण कुछ चुनिंदा देशों तक ही सीमित रहा है। विस्तारित ब्रिक्स को इस पुराने ढर्रे को दोहराने से बचना होगा। उन्होंने बताया कि 2013 में दक्षिण अफ्रीका की पहली ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल का गठन किया गया था, ताकि आर्थिक सहयोग केवल सरकारों तक सीमित न रहे। रामाफोसा ने ये बातें शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स के सत्र को संबोधित करते समय कही। इस फोरम में दक्षिण अफ्रीका की 120 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।
दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दिल्ली में जुटे 20 देशों के मेहमानों समेत WHO, विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे वैश्विक संगठन की हस्तियों के लिए कई कार्यक्रम तय किए गए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में कब कौन से कार्यक्रम होंगे? बिंदुवार जानिए
आज क्या कुछ खास
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ए गेब्रेयेसस भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के लिए भारत पहुंचे हैं। खास बात ये है कि प्रधानमंत्री मोदी और गेब्रेयेसस बेहद गर्मजोशी भरे आपसी संबंध साझा करते हैं। अप्रैल 2022 में प्रधानमंत्री ने डब्लूएचओ चीफ के गुजरात दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में कहा था कि डॉ गेब्रेयेसस उनके दोस्त हैं। उन्होंने कहा था कि टेड्रोस के निवेदन पर वे डब्लूएचओ महानिदेशक को तुलसी भाई का नाम देना चाहते हैं।
भारत में आयोजित सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स बिजनेस फोरम में हुई बातचीत का जिक्र करते हुए रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा, ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, दुनिया गहरे संरचनात्मक बदलावों के दौर में प्रवेश कर चुकी है, इसका कारण यह है कि आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पुराने लीडर्स की जगह विकास को गति देने वाले नए चालक ले रहे हैं।
पीएम मोदी ने पुतिन को तमिल विद्वान और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की पुस्तक तिरुक्कुरल भेंट की है। रूसी में अनूदित इस पुस्तक में 133 अध्याय और 1330 दोहे हैं। यह पुस्तक नैतिकता, शासन और मानवीय रिश्तों पर आधारित है। अरम (धर्म): पहले 38 अध्याय सदाचार, कर्तव्य, गृहस्थ जीवन और अच्छे आचरण से संबंधित हैं। पोरुल (अर्थ): समाज, अर्थशास्त्र, राज्य-संचालन, राजनीति और शासन पर केंद्रित हैं। जबकि तीसरा विषय इन्बम (काम) विषय में प्रेम, स्नेह और रिश्तों की पड़ताल है। विशेष उपहार दिए जाने पर उपराष्ट्रपति ने खुशी का इजहार किया। तमिलनाडु से आने वाले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रूस के राष्ट्रपति को तमिल संस्कृति से जुड़ा उपहार दिए जाने पर कहा कि भारत की समृद्ध विरासत सीमाओं और भाषाओं से परे है। राधाकृष्णन ने कहा कि यह उपहार हमारी चिरस्थायी सभ्यतागत विरासत का एक सुंदर उत्सव है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने कहा, तिरुवल्लुवर का सार्वभौमिक ज्ञान भाषाओं, संस्कृतियों और सीमाओं से परे जाकर भारत के शाश्वत संदेश को दुनिया तक पहुंचाता है।
ब्रिक्स सम्मेलन में पत्रकारों, प्रतिनिधियों और विदेशी मेहमानों को खास गुडी बैग बांटा जा रहा है। इसमें बिहार का सत्तू व मखाना, केले के चिप्स, ओडिशा की कॉफी और गुजरात का स्टोल है।
ब्रिक्स समिट के दौरान जब दुनिया के प्रमुख देशों के प्रतिनिधि दिल्ली में एक साथ बैठेंगे, तो मेज पर परोसा जाने वाला भोजन ही खास नहीं होगा, बल्कि उसे परोसने के लिए इस्तेमाल होने वाला टेबलवेयर भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस खास मेहमाननवाजी में जयपुर की पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक का अनूठा मेल दिखाई देगा। ब्रिक्स समिट में विदेशी और विशेष मेहमानों के लिए खास सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी तैयार की गई है। इसे तैयार करने में करीब 300 कारीगरों की टीम ने काम किया। इन उत्पादों में पारंपरिक हस्तकला के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की महानिदेशक न्गोजी ओकोंजो-इवेला भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंची हैं। आर्थिक मामलों की जानकार इवेला अफ्रीकी देश नाइजीरिया की पहली महिला वित्त मंत्री रह चुकी हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत ग्लोबल साउथ के साझेदारों के साथ साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक ब्रिक्स शिखर बैठक में अफ्रीका और कैरेबियन देशों के इन मेहमानों की भागीदारी से समावेशी व्यापार और विकास पर संवाद आगे बढ़ेगा। यह सुनिश्चित होगा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली सभी के लिए प्रभावी हो।
ग्लोबल साउथ और व्यापार से जुड़े संवाद में भागीदारी का लक्ष्य लेकर अफ्रीकी देशों से भी कई मेहमान भारत आए हैं। ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने कैरेबियन सागर के पास बसे देश- क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पैरिला भी नई दिल्ली पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत और क्यूबा के बीच गर्म और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंध हैं। अफ्रीकी देश बुरुंडी के राष्ट्रपति इवरिस्ते नदयीशिमिये भी शिखर सम्मेलन में अफ्रीकी संघ का प्रतिनिधित्व करने आए हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री ने एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री सिहासक फुंगकेटकेओ भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शरीक होने दिल्ली पहुंचे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि थाईलैंड और भारत के बीच सदियों पुराने संबंधों पर आधारित एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी है। उप प्रधानमंत्री के दिल्ली दौरे से इस बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने में मदद मिलेगी।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। केंद्रीय कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश दुबे ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक इस दौरे पर विकास और समृद्धि के लिए द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर आसियान 2026 के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। हवाईअड्डे पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उनका स्वागत किया। भारत की एक्ट ईस्ट नीति में फिलीपींस के महत्व को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और आसियान के बीच व्यापार, समुद्री सुरक्षा तथा इंडो-पैसिफिक में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर केंद्रित अहम और व्यापक रणनीतिक साझेदारी है।
विदेश मंत्रालय ने प्रमुख हस्तियों के आगमन की आधिकारिक घोषणा एक्स हैंडल पर जारी बयानों में की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत आने वाले विशिष्ट नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा ग्लोबल साउथ को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।