एसआईआर पर भी बोले मुख्य चुनाव आयुक्त
लगभग 22 वर्षों के बाद बिहार में मतदाता सूची के शुद्धिकरण का काम पूरा हुआ। सभी राजनीतिक दलों ने यह मांग की थी कि मतदाता सूची में काफी गड़बड़ियां हैं। सोशल मीडिया में इसके बारे में काफी बढ़-चढ़कर कहा गया। लेकिन सच्चाई यह है कि 243 विधानसभाओं में 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट्स के साथ मिलकर । एसआईआर में जमीनी स्तर के अधिकारियों को जबरदस्त मेहनत करनी पड़ी है। एक नई व्यवस्था बनाई गई है। किसी भी पोलिंग स्टेशन के ठीक बाहर कोई भी मतदाता अपना मोबाइल फोन जमा करा सकता है। इसके बाद वोट करने के बाद इसे लेकर वापस जा सकता है।
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस जारी
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया जा रहा है। उन्होंने कहा- बिहार की पावन भूमि पर पांच वर्षों के बाद अब विधानसभा चुनाव का आगमन हो रहा है। जैसा कि आप सबको पता है चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और यह अपनी जिम्मेदारी दो चरणों में निभाती है। पहला चरण- मतदाता सूची बनाना और दूसरा चरण- चुनाव कराना। जून 2025 से शुरू हुए एसआईआर से मतदाता सूची का शुद्धिकरण हुआ। एक अगस्त को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित हुई और सभी राजनीतिक दलों को दी गई। एक सितंबर तक दावों और आपत्ति का समय रहा। इसमें राजनीतिक दल, बूथ एजेंट्स और नागरिकों को भरपूर समय दिया गया। उसके बाद पात्रता का परीक्षण हुआ और 30 सितंबर को फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित हुई। अभी भी उसमें कोई अधिकारियों से गलती रह गई हो तो जिलाधिकारी के पास अपील डाली जा सकती है। किसी का नाम छूट गया हो तो नामांकन के 10 दिन पहले तक नाम जुड़वा सकता है।
आगमी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिहार में चुनाव आयोग के द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर करवाया गया। इसमें नए सिरे से बिहार में मतदाताओं की गणना की गई। यह प्रक्रिया जून से शुरू हुई थी जिसकी अंतिम सूची 30 सितंबर को आयोग की वेबसाइट पर जारी कर दी गई। 30 सितंबर 2025 को आई इस सूची के अनुसार बिहार में कुल 7,41,92,357 मतदाता पंजीकृत है। 2020 में यह आकड़ा 7,36,47,660 था। यानी, 2020 के मुकाबले इस बार चुनाव में 5,44,697 मतदाताओं का इजाफा हुआ है। हालांकि, एसआईआर के बाद राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में 47,77,487 कमी आई है।
बिहार को लोकप्रिय गायिका मैथिली ठाकुर को लेकर चर्चा है कि वे 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। यह चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि उन्होंने बीजेपी के नेताओं से मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान उनके पिता भी साथ में थे। विनोद तावड़े और नित्यानंद राय के साथ जब से उनकी तस्वीर सामने आई है चुनाव लड़ने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
बिहार चुनाव के लिए NDA में सीटों के बंटवारे पर बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन ने कहा, 'सीटों के बंटवारे पर हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की NDA के सभी दलों के बड़े नेताओं के साथ बात हो रही है। बहुत जल्द इस पर निर्णय हो जाएगा। हमारे सभी दलों का नेतृत्व इस पर सही निर्णय लेने में सक्षम है। हमारा लक्ष्य 200+ सीटें जीतने का है।'
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर कहा, 'घोषणा बहुत पहले होनी थी जो आज हो रही है, हम पूरी तरह से तैयार हैं, बिहार पूरी तरह से तैयार है और निश्चित रूप से चाहे चुनाव एक चरण में हो या दो चरणों में, हमें पूरा विश्वास है कि इस बार बिहार मुद्दों पर वोट करेगा, अपराध, शिक्षा, पेपर लीक के मुद्दों पर वोट देगा... जब से भाजपा सत्ता में आई है, यह नहीं देखा जाता कि कब लोगों को सुविधा है, यह देखा जाता है कि भाजपा को कब सुविधा है।'
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा, 'बिहार में आज विधानसभा चुनावों की घोषणा होने वाली है, मैं बिहार के मतदाताओं से मतदान में भाग लेने और सही निर्णय लेने की शुभकामनाएं देता हूं। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि चुनाव शुरू होने से पहले, फर्जी मतदाताओं, घुसपैठियों या दोहराए गए नामों को हटाने के लिए SIR के तहत एक प्रक्रिया शुरू की गई थी और वह प्रक्रिया पूरी हुई। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 40 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए गए। वोट चोरी का आरोप लगाने वाले वही लोग थे जो इस SIR का विरोध कर रहे थे... इसी तरह, महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों का भी शुद्धिकरण किया जाना चाहिए क्योंकि बड़े पैमाने पर फर्जी मतदाताओं और घुसपैठियों के नाम हैं। ऐसे सभी नामों को हटाने के लिए, शिवसेना की ओर से, हम महाराष्ट्र में SIR की मांग करते हैं।'
मुख्य चुनाव आयुक्त ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, 'विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए 22 वर्षों के बाद बिहार की मतदाता सूची को अपडेट किया गया है। राज्य विधानसभा चुनावों के लिए कई नई पहल की जा रही हैं और आने वाले समय में इन्हें पूरे देश में दोहराया जाएगा। मतदाता सूची का शुद्धीकरण पूरे देश में किया जाएगा।' कुमार ने कहा, 'इन 17 पहलों में नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) शामिल है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मतदाता के रूप में पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर पहचान पत्र मिल जाए। सभी मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा मिलेगी।'
बिहार में मतदाताओं का गहन पुनरीक्षण पूरा कर मतदाता सूची जारी की जा चुकी है। बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव के लिए अमूमन सितंबर अंत तक अधिसूचना जारी होती रही है। 2010 में 27 सितंबर को पहले चरण की अधिसूचना जारी हुई थी और अंतिम छठे चरण का मतदान 20 नवंबर को कराया गया था। 2015 में तो 16 सितंबर को पहले चरण की अधिसूचना जारी कर पांचवें और अंतिम चरण का मतदान 5 नवंबर को हुआ था। 2020 में पहले चरण की अधिसूचना 1 अक्टूबर को जारी हुई थी और तीसरे-अंतिम चरण का मतदान 7 नवंबर को हुआ था।
जदयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा, 'लोकतंत्र का पर्व है। मुझे लगता है कि जनता काम पर वोट डालेगी। लोगों ने मन बना लिया है कि डबल इंजन की सरकार फिर बनाएंगे। बिहार लॉन्चिंग पैड के लिए तैयार है। ये 5 साल तय करेंगे कि आने वाले 25 साल में बिहार कहां पहुंचेगा। आज पटना में मेट्रो शुरू हो रही है। नए बिहार का सपना नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी ने दिखाया है। अब कोई भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहता।'
पटना मेट्रों के उद्घाटन को लेकर JDU नेता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 'पटनावासियों का लंबा इंतज़ार खत्म होने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में निस्संदेह राज्य के लिए बड़े फैसले लिए गए, मेट्रो उसी श्रृंखला में एक बड़ी कड़ी है, आज पटनावासियों का ये सपना साकार होने जा रहा है। इससे पटना में ट्रैफिक की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी।'
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी और महागठबंधन पूरी तरह तैयार है। महागठबंधन के नेतृत्व में सरकार बनाने के लिए सभी तैयार हैं। चुनाव आयोग से हमारी बस यही अपेक्षा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों, गरीब और वंचित वर्ग को वोट देने का अधिकार हो। चुनाव चाहे दो चरणों में हों या एक चरण में, हम तैयार हैं।'
अमर उजाला के सूत्रों के अनुसार, आयोग दो चरणों में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है। पहले चरण का चुनाव छठ यानी 27-28 अक्तूबर के तुरंत बाद कराया जा सकता है। निर्वाचन आयोग की तीन सदस्यीय टीम बिहार से दो दिवसीय समीक्षा यात्रा पूरी कर रविवार को दिल्ली लौट आई। सूत्रों के अनुसार, इस बार तीन के बदले दो चरणों का प्रस्ताव प्रवासी बिहारियों की छठ के बाद वापसी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। छठ के बाद पहले चरण में उत्तरी और मध्य जिलों को शामिल करने से मतदाता भागीदारी बढ़ सकती है।
रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 'जो प्रत्याशी खड़े हों, वह पोलिंग एजेंट्स जरूर दें। मॉक पोल अपनी आंखों के सामने जरूर देखने कहें। मतदान के खत्म होते समय पोलिंग एजेंट्स फॉर्म 17सी भी ले लें। जिन लोगों को नगर निगम ने मकान का कोई नंबर तय नहीं किया है, वहां एक ही मकान में कई लोगों के नंबर मतदाता सूची में दर्ज होने की आशंका रहती है। क्योंकि, कुछ चिह्नित करने के लिए बीएलओ यह करते हैं। चुनाव के पहले पुनरीक्षण हर बार होता है, इसलिए उसे चुनाव के बाद कराने की मांग का कोई अर्थ नहीं है। बिहार के एसआईआर में दावा-आपत्ति का पूरा अवसर दिया गया। इस प्रक्रिया की देखरेख के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपने बूथ लेवल एजेंट्स दिए थे। एसआईआर में अब भी समय है कि किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को ऐसा लगता है कि योग्य मतदाता छूट गया है या अयोग्य मतदाता का नाम सूची में है तो वह दावा-आपत्ति कर सकता है। उनके दावे-आपत्ति का निपटारा ईआरओ स्तर से हो जाएगा।'
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान होने जा रहा है, लेकिन अभी तक राजनीतिक गठबंधनों में सीटों के बंटवारे का एलान नहीं हुआ है। झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता ने कहा है कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में 12 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।