भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पार्टी मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने देश से विकसित भारत बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की अपील की। इस समारोह में पार्टी के कार्यकर्ता भी उनके साथ मौजूद रहे। ध्वज फहराने से पहले राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' गाया गया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ।
नितिन नवीन ने कहा, 80वें स्वतंत्रता दिवस पर मैं यहां मौजूद सभी देशवासियों, अपने परिवार के सदस्यों और भाजपा परिवार के सभी सदस्यों को दिल से शुभकामनाएं और बधाई देता हूं। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने आज 80वां स्वतंत्रता दिवस विकसित भारत बनाने के संकल्प के साथ मनाया है और हम इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने एक्स पर एक अलग पोस्ट में कहा कि स्वतंत्रता दिवस भारत की 'अमर राष्ट्रीय चेतना' का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अनगिनत बलिदानों, निरंतर संघर्ष और अटूट संकल्प के जरिये भारत ने 'आजादी का सुनहरा सूर्योदय' देखा। यह दिन न केवल हमें अपने गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि देश के प्रति हमारे कर्तव्यों के बारे में भी जागरूक करता है। आइए, अपने स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ एक मजबूत, समृद्ध और विकसित भारत बनाने में अपना पूरा योगदान देने का संकल्प लें।
लाल किले की प्राचीर से संबोधन के बाद वंदे मातरम और राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का औपचारिक समापन हुआ। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों से मिले। प्रधानमंत्री को अपने बीच देखकर बच्चे काफी खुश नजर आ रहे थे। इसी दौरान पैर छूने के एक लिए बेटी झुकी तो उसकी टोपी गिर गई, प्रधानमंत्री ने जमीन पर गिरी टोपी उठाकर दोबारा बच्ची के सिर पर रखी।
प्रधानमंत्री ने कहा, मैंने लाल किले से पंच प्राण की बात की थी। इसने हमारे संकल्पों को बड़ा बल दिया। जिस भारत का सपना, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बिरसा मुंडा, ज्योतिबा फुले ने देखा था। आइये इन संकल्पों को हम दोहराएं। मैं सभी देशवासियों से कहूंगा कि समय हमारा है, अवसर हमारा है, संकल्प हमारा है।
"आइये सपनों को संकल्प बनाएं, संकल्प को सामर्थ्य बनाएं और सामर्थ्य को सफलता में बदल कर रहें। आइये हर कदम को विकास का कदम बनाएं, कदम से कदम मिलाएं, मन से मन मिलाएं, लक्ष्य से जुड़े रहें, एक दीप से जलें दीप हजारों, आओ मिलकर विकसित भारत बनाएं।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबधन में कहा, आज मुझे एक काम के लिए आपकी मदद चाहिए। सभी नौजवानों से मैं चाहता हूं कि आप नेतृत्व करिए। आपका एक या दो घंटे देश को बहुत बड़ी शक्ति देने वाला है। इन दिनों में देश में जनगणना का काम हो रहा है। गिनती सिर्फ आंकड़ों से बात बनती नहीं है। उसकी बारीकियों से योजनाएं बनती हैं, देश के आगे बढ़ने की रूप रेखा तैयार होती है। कभी कभी सरकार के प्रतिनिधि जल्दी में होते हैं, वे कुछ गड़बड़ी कर देते हैं। इस बार निर्णय हुआ है कि आप अपनी जानकारी जनगणना में भरकर दे सकते हैं। लेकिन आप परिवार के सब बैठकर डिजिटली अपनी रजिस्ट्री करा दें। आप जितनी परफेक्ट जानकारी देंगे, देश को उससे आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इससे देश की समय और शक्ति काम आएगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, हमने संसद में महिला शक्ति को बल देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया था। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह कर रहा हूं कि महिलाओं के समार्थ्य के पुजारी बनिए। जल्द से जल्द हमारी माताओं-बहनों को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व मिले, वे भारत के विकास में योगदान दें। आइये महिला आरक्षण लागू कर के आप भी उन्हें आगे बढ़ाने का श्रेय लीजिए, लेकिन हमारी नारी शक्ति को बल दीजिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा, हमें देश की सुरक्षा के लिए नागरिकों को भी आगे लाना है। मैं लाल किले से एलान कर रहा हूं कि हम जल्द ही नागरिक रक्षा (सिविल डिफेंस) का देश में एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करेंगे, जो आधुनिक चुनौतियों का सामना करेगा। इसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, देश की सत्ता में वर्षों तक माओवादी सोच वाले लोग जगह बनाकर बैठे थे। इन लोगों ने सरकारों की नीतियों को भी प्रभावित किया था। हमें नक्सलवादियों से देश को आजाद कराने में मदद मिली है। हथियार वाले नक्सल तो गए लेकिन दिमाग वाले नक्सल देश में हैं। यह देश को हिंसा में घसीटने की कोशिश में जुटे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन्हें अलग-थलग करना होगा। सुरक्षित भारत बनाना हमारा दायित्व है। सुरक्षा सीमा के अंदर हो या बाहर हम सबके लिए तैयार हैं। जरूरी नहीं कि युद्ध सीमाओं पर हो, आज तेल रिफाइनरियों पर हमले हो रहे हैं, बैंकिग क्षेत्र हमलों का शिकार हो रहे हैं। हमें इन क्षेत्रों की सुरक्षा भी करनी है।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, माओवाद-नक्सलवाद ने देश के कई परिवारों को बर्बाद किया। चार दशक तक इसने देश की बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबोच कर रखा था। देश के नागरिकों की रक्षा में देश साढ़े तीन हजार सुरक्षाबल और पुलिस के जवानों को जान की बाजी लगानी पड़ी। नक्सलवाद ने देश की धरती को लहूलुहान कर दिया। 2014 में जब आपने हमें मौका दिया तभी हमने संकल्प किया था कि हम नक्सलवाद को देश से खत्म करेंगे। हम उसे पूरी तरह खत्म करने की दिशा में हैं। जहां पर कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं, जहां कभी धरती रक्तरंजित होती थी, आज वहां विश्वास, प्रयास और विकास का तिरंगा लहरा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आज भारत खेल की दुनिया में अपनी जगह बना रहा है। भारत का राष्ट्रगान आज दुनिया में हर पोडियम पर सुनाई देता है। टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना ने इसे काफी बढ़ावा दिया है। खेलो इंडिया गेम्स, खेलों के लिए कोचिंग, खेल चिकित्सा आदि में युवाओं के लिए काफी जगह बनी है। हम 2036 में ओलंपिक के मजबूत दावेदार बनकर उभर रहे हैं। 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों को भारत आयोजित करने वाला है।
उन्होंने कहा, ओलंपिक में इससे जुड़े 40 खेल होते हैं और 350 स्पर्धाएं होती हैं। भारत में इनमें से दो-तिहाई खेलों में हमारी मौजूदगी नहीं होती। हम उनमें योग्यता हासिल नहीं कर पाते। लेकिन मैं आपको चुनौती देता हूं। जिन स्पर्धाओं में भारत योग्यता हासिल नहीं करता, हम उनके लिए आगे बढ़ेंगे। 5 से 15 साल की उम्र के बच्चों में प्रतिभा ढूंढने के लिए गांव-गांव और स्कूल-स्कूल प्रतिभा खोज अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद इन प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा, देश में कोचिंग कक्षाओं की स्पर्धा बढ़ती जा रही है। हर परिवार को लगता है कि उन्होंने बच्चे को कोचिंग नहीं भेजा तो उनका भला नहीं हो सकता। इसलिए हमने छात्रों के लिए निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने का निर्णय लिया है। हम युवाओं को निशुल्क कोचिंग देने का नेटवर्क खड़ा करने वाले हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, देश में पहले केवल 60 हजार करोड़ का बायोइकोनॉमी का काम होता था। वह 2014 के बाद 20 लाख करोड़ पर पहुंच चुका है। 2009-10 का कालखंड था, जब सिर्फ 1.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन देश में बिके थे। 2025-26 में 25 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके हैं। विमानन क्षेत्र भी नौजवानों के लिए तेजी से आगे बढ़ा है। मेंटेनेंस ओवरहॉलिंग के कारण देश में स्किल्ड मैनपावर को बढ़ावा मिल रहा है। मेड इन इंडिया एयरक्राफ्ट को भी बढ़ावा मिला है। देश में बना पहला सी295 उड़ान भर चुका है।
प्रधानमंत्री ने कहा, लाल किले से मैं देश के नौजवानों के लिए घोषणा करना चाहता हूं। आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ लोगों को हम एआई कौशल देने के लिए काम करेंगे, ताकि हमारा युवा एआई की दुनिया में नेतृत्व का सामर्थ्य रखे।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, नई शिक्षा नीति लागू की गई है। 2004 से 2014 तक देश में 50 से कम विश्वविद्यालय थे और 10 साल में 650 विश्वविद्यालय जुड़ चुके हैं। 2014 के पहले मेडिकल की 400 सीटें थीं, आज 850 से ज्यादा सीटें हैं। अब विदेशी विश्वविद्यालय भी भारत आ रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं कि मेहनत में कोई कमी न करते हुए हम विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करके रहेंगे। हमें मिलकर आगे बढ़ना है। सुधारों को आगे बढ़ाते रहना है। हम यह दृढ़ विश्वास से कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा लाभार्थी कौन है, इसका साधक कौन है- इसका साधक देश का युवा है। देश के विकास में युवा सबसे बड़ी ताकत है और विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी भी देश का युवा है। हमें युवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाते हुए आगे बढ़ना है। स्टार्ट अप इंडिया के चलते देश में स्टार्ट अप बनते जा रहे हैं। मैं युवाओं को कहना चाहता हूं कि आप सपने लेकर आएं, हम संसाधन की कमी नहीं होने देंगे। सस्ते डेटा ने युवाओं को आगे बढ़ाया है। देश के नौजवानों को इसने नई ताकत दी है। स्किल इंडिया को हमने आगे बढ़ाया। खेलो इंडिया बढ़ाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा, क्या हम सोच नहीं सकते कि फॉर्च्युन 500 में आगे भारत की कंपनियां हों। आज बैंकिंग क्षेत्र फल-फूल रहा है। दुनिया के शीर्ष बैंकों में भारत के बैंकों का हिस्सा क्यों न हो। भारत की फार्मा ने विदेश में बहुत काम किया है। समय की मांग है कि दुनिया की बड़ी फार्मा कंपनियों में भारत की भी एक-दो कंपनियां होनी चाहिए। क्या समय की मांग नहीं है कि दुनिया का नेतृत्व हमारे हाथ में होना चाहिए। हमारी अकाउंटिंग फर्म्स दुनिया की शीर्ष फर्म्स में क्यों नहीं होनी चाहिए। हमारे ऐसे ब्रांड्स हों, जिससे दुनिया आकर्षित होती हो। मैं राज्य सरकारों को कहना चाहता हूं, मैं स्वराज संस्थाओं को कहना चाहता हूं कि हमें अपनी रफ्तार बढ़ानी होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा, सप्तधारा की यह सात शक्तियों से हमें राष्ट्र को आगे ले जाने को लेकर जो लक्ष्य लेकर चल हे हैं, उन्हें पार करना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, सप्तधारा की चौथी शक्ति है- गतिशक्ति। यह गतिशक्ति हमें देश में निर्बाध संपर्क चाहिए। हमें आधुनिक सड़क चाहिए, मल्टीमॉडल संपर्क चाहिए। बंदरगाहों को विकास और संवर्धन की दिशा में बढा़ना होगा। पांचवी शक्ति है- रक्षा शक्ति। रक्षा में आत्मनिर्भर होना, दुनिया ने समझ लिया इसके बिना कोई चारा नहीं है। हमें रक्षा के क्षेत्र में भी बाजार बनना होगा। हमें रक्षा उत्पादों की श्रृंखला बनना होगा। ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम को देखना होगा। छठी शक्ति है- ऊर्जा शक्ति। हमें हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ना है। दुनिया जब ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा करती है तो हम इस ओर आगे बढ़ते हैं। हमारी समुद्री तटरखेा बहुत मजबूत है। इसमें हम आगे बढ़ सकते हैं।
'सातवीं शक्ति है- भारत की सॉफ्ट पावर। भारत की सॉफ्ट पावर की ताकत है। आज योग ने दुनिया को भारत से जोड़कर रखा है। जिस भारत के पास आयुर्वेद हो, आस्था के केंद्र हों। हमारी फिल्में हों, हैंडलूम हों, हमारी गेमिंग हों। क्रिएटिव वर्ल्ड के अंदर भारत का लोहा माना जा रहा है। भारत का ऑडियो-वीडियो औऱ एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में दुनिया हमारी राह देखती है। हमारे पास वन संपदा है, 100 से ज्यादा राष्ट्रीय पार्क हैं। लेकिन विदेशियों को आकर्षिक करने में हम पीछे रहे हैं। हमारा काम है कि हम इस क्षेत्र में आगे बढ़ें और पूरी दुनिया को आकर्षित करें।'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, मेरी सप्तधारा की तीसरी शक्ति है तकनीक और नवाचार। उभरती हुई तकनीक हर पल हमें चुनौती दे रही हैं। इसलिए देश को दुनिया के लिए बाजार बनाना है। हमें नवाचार का केंद्र बनना है। अब भारत को डिजिटल सार्वजनिक तकनीक को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आज लाल किले की प्राचीर से मैं देश में शक्ति की सप्तधारा का आह्वान करता हूं। जो पांच दशक में नहीं हुआ, वह 5-7 साल में करने के लिए नई ऊर्जा देंगे। इसमें युवाओं की शक्ति भी जोड़ी जाएगी। सप्तधारा की शक्ति है उत्पादन की शक्ति। हमें विनिर्माण को बढ़ाना होगा। उत्पादन के साथ हमें छोटे-छोटे पुर्जे बनाने हैं और बड़े उत्पाद भी बनाने हैं। पूरी वैल्यू चेन पर हमारा अधिकार होना चाहिए। डिजाइन से उत्पादन तक भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनना होगा। उत्पादन के क्षेत्र में जो लोग हैं, यह उनके लिए अवसर है। इसलिए हमें गुणवत्ता और पैमाने में वैश्विक मानदंडों पर खरा उतरना होगा। हमारे उत्पाद यूजर फ्रेंडली हों, हमारे उत्पाद लोगों को लुभाने वाले हों। जीरो डिफेक्ट उत्पाद हमारी पहचान हों, यह तय करना होगा। वैश्विक बाजार में हमारी पहचान गुणवत्ता के आधार पर होगी। क्वालिटी से कोई समझौता नहीं। हमारा लक्ष्य गुणवत्ता, गुणवत्ता और गुणवत्ता होना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा, सुधारों को आगे बढ़ाना भी जरूरी है। यह हमारे लिए कन्विक्शन है। आने वाले दिनों में भी हम नेक्स्ट लेवल रिफॉर्म की तरफ बढ़ने वाले हैं। सभी को अपनी पारंपरिक व्यवस्था, सोच और लक्ष्यों में सुधार करना होगा। हमें अपने किसान, मजदूरों को नई दिशा में लेकर चलना होगा। विकसित भारत बनने के लिए हमें नई धारा चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, हमारे सीफूड की दुनिया में आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। हमारी सी बेल्ट इस क्षेत्र में काफी काम आ सकती है। मैंने जो भूमिका आपके सामने रखी है, उसके पीछे 2047 का लक्ष्य एक मजबूत नींव पर खड़ा है। हमने पिछले 10-12 साल में देशवासियों ने जो सामर्थ्य दिखाया है, यह आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा है। इसका एक-चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अब हमें लक्ष्य प्राप्त करके रहना है। हमें अपनी संस्कृति, सोच और काम की गति को बदलना होगा। जो काम पिछले पांच दशक में नहीं हुए हैं, वह काम हमें करने में हमें 5-7 साल लगे हैं। मुझे भरोसा है कि हम इस सपने को साकार कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, भारत आज दुनिया में स्थिर सरकार के साथ आगे बढ़ रहा है। दुनिया में हमारा सम्मान बढ़ रहा है। हम सबको दिशा देने वाला भारत का संविधान है। आज दुनिया भारत का सामर्थ्य पहचान रही है। अब देखिए कितना बड़ा अवसर आया है, लेकिन ये जो व्यापार समझौते हुए हैं। इसलिए मैं एमएसएमई को कहना चाहूंगा कि हमें इन मौकों को छोड़ना नहीं है। हमारी मशीनरी हो, टेक्सटाइल हो, दवाइयां हों, हमें मौका छोड़ना नहीं है। हमें गुणवत्ता के साथ चलना होगा। हमें वैश्विक मानकों पर चलना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को अपने संबोधन में कहा, एक समय था, जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ लोग एसी में बैठकर बात करने वाले लोग हमें बता रहे थे कि वैश्वीकरण का क्या होगा। जहां से वैश्वीकरण की आवाज आती थी, उसने बोलना ही बंद कर दिया। लेकिन इस संकट के कालखंड में कुछ लोगों ने इन संसाधनों का हथियारीकरण करने का काम किया। संसाधनों का हथियारीकरण। पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयां, तकनीक की चीजें। अगर हम आत्मनिर्भर का मंत्र लेकर आगे नहीं चले होते तो ऐसी चुनौतियों का सामना कैसे करते। ऐसी चुनौतियां आगे बढ़ती जा रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, हमने सोचा भी नहीं था कि हमें कुछ समस्याओं को झेलना पड़ेगा। 12 साल में हमने कोरोना जैसी महामारी झेली, जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया। कोरोना के बाद कहीं यूक्रेन तो कहीं पश्चिम एशिया, हर जगह तनाव का माहौल। कुछ लोगों को तो सिर्फ देश को भयभीत करने, डराने में मजा आता है। कोरोना वैक्सीन नहीं मिलेगी, यह नहीं होगा, पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी, डीजल नहीं मिलेगा, फर्टिलाइजर नहीं मिलेगा। कुछ लोगों को देश को डराने में आनंद आ रहा था। लेकिन देश ने देख लिया कि हम नागरिक देवो भवः के मंत्र को लेते हुए, जिस तरह से योजनाओं को आगे बढ़ाया था, उनसे देश को कोई समस्या नहीं हुई। आज देश में पेट्रोल भी है, गैस भी है, डीजल भी है। हम अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम 5 न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, यह हमारी गलत सोच के कारण है। हमने समुद्र तट का 99 फीसदी इलाका नो गो एरिया घोषित कर के रखा है। हमने ही समुद्र के अंदर जाकर एक्प्लोरेशन न करने का फैसला किया। हमने उस 99 फीसदी इलाका जो नो गो हुआ करते थे। हमने उसे खुला कर दिया। अब हम समुद्र के अंदर एक्सप्लोरेशन करने का प्रयास किया है। उसी दिशा में हमने समुद्र मंथन की घोषणा की थी। हाल ही में हमने 85 हजार करोड़ रुपये आवंटित कर उस काम को आगे बढ़ाने का काम किया।
लाल किले से अपने 13वें संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, जैसी चर्चा क्रिटिकल मिनरल्स की हो रही है। पूरी तकनीक इसी पर निर्भर है। भारत इसमें भी अपने आप को सुरक्षित करने में जुटा है। मिशन क्रिटिकल मिनरल्स हमने लॉन्च किया। हमने कॉरिडोर लॉन्च किया है। कई देश हम पर इसके लिए भरोसा कर रहे हैं। चाहे सेमीकंडक्टर की बात हो या क्रिटिकल मिनरल्स की। उसी तरह एनर्जी की भी बात बढ़ती जा रही है। इसके बिना दुनिया को चलाना मुश्किल है। इसलिए हमने एआई हो, डेटा सेंटर हो, हमें बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। एनर्जी सिक्योरिटी यह दुनिया की मांग है। इस दिशा में हमने मजबूत कदम उठाए हैं। इस रास्ते में एक जरूरी जरिया है परमाणु ऊर्जा। 2047 तक हम 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, बीते वर्षों में हमारा कन्विक्शन रहा है कि भारत को हमें अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। हमें अपने हितों की सुरक्षा खुद करनी है। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प दृढ़ता के साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं। वोकल फॉर लोकल से हर भारत का मन जुड़ रहा है। देश आजाद होने के बाद विश्व में तो सेमीकंडक्टर की चर्चा हुई, लेकिन हम कोई सेमीकंडक्टर प्लांट आगे नहीं बढ़ा पाए। आज स्थिति क्या है? यह सेमीकंडक्टर हर चीज के लिए अनिवार्य है। हर उपकरण में चिप लगना जरूरी है। इसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए भारत ने अपना सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू किया। आज भारत में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट हैं। आने वाले 7-8 वर्ष में और पांच सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने वाले हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, मेरे देशवासियों, अब छोटे सपनों से काम नहीं चलने वाला। हमें बड़े सपने देखने हैं, क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं, हमारी सोच की क्षितिज को विस्तृत करते हैं। कोई भी राष्ट्र तब महान बनता है, जब अपनी सिद्धियों को प्राप्त करता है। जब अपने सपनों, अपने संकल्पों और अपने सामर्थ्य के दम पर आगे बढ़ता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, पिछले दिनों देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ का प्रकोप रहा, भू-स्खलन का प्रकोप रहा, अनेक परिवार प्रभावित हुए। उनके दुःख-दर्द को हम भलीभांति अनुभव करते हैं। पीड़ित परिवारों को मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम और पूरा देश उनके साथ खड़े हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, देश आज उन महान सपूतों का पुण्य स्मरण करता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए त्याग और बलिदान की पराकाष्ठा की। अपने तप, त्याग और बलिदान से आजादी के एकमात्र लक्ष्य को लेकर अपनी पूरी जिंदगी खपा दी थी। पूज्य बापू समेत सभी स्वतंत्रता सेनानियों को, बलिदान की महान परंपरा जगाने वाले महान क्रांतिकारियों को आज मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत का एक बड़ा सपना है- 2047 तक 'विकसित भारत' बनाना। इस सपने को पूरा करने की ताकत और संकल्प 140 करोड़ भारतीयों से मिल रहा है। जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश खुद को एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य तय करता है, तो इससे पूरी दुनिया को एक मजबूत संदेश जाता है। भारत के इस लक्ष्य से दुनिया की नजर में भारत की छवि बदल रही है और दुनिया भारत को नए तरीके से देख रही है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, 2014 तक आते-आते तो पूरे विश्व ने हमें फ्रेजाइल-5 में डंप कर दिया था। उन हालात के बीच भारत ने पिछले 12 साल में रफ्तार पकड़ी है। तेज गति से अब हम आगे बढ़ रहे हैं। पिछले 12 वर्ष में रक्षा उद्योग 4 गुना बढ़ा, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन 7 गुना बढ़ा। रेलवे कोच का उत्पादन 21 गुना बढ़ा, डिजिटल-इनोवेशन की दुनिया में हमने अपना परचम लहराया। इंटरनेट कंज्यूमर चार गुना बढ़े, डिजिटल ट्रांजैक्शन करीब 100 गुना बढ़े। हर काम लगभग 15 गुना औसत से बढ़ा।
प्रधानमंत्री ने कहा, बीते 12 वर्षों में देशवासियों ने एक संकल्प के साथ, समर्पण के साथ, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में प्रयास किया है। इन्हीं प्रयासों को आदरपूर्वक स्वीकार करता हूं। यही वजह है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं। इन्हीं के साहस की वजह से हम 12 साल में फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी बन गए हैं। कभी हम फ्रेजाइल 5 का हिस्सा थे।
पीएम मोदी ने कहा कि अब देश छोटे लक्ष्यों तक सीमित रहने वाला नहीं है। बड़े सपने हमारी सोच का दायरा बढ़ाते हैं और हमारे संकल्प को मजबूत बनाते हैं। जब संकल्प दृढ़ होता है, तो कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का रास्ता मिल जाता है। इसलिए हमारे सपने और लक्ष्य दोनों ऊंचे होने चाहिए। ऊंचे सपने और मजबूत संकल्प ही हमारे सामर्थ्य को बढ़ाते हैं और हमें उन्हें साकार करने की ताकत देते हैं।
पीएम मोदी ने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है। पीएम ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए कहा, आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है। उन्होंने कहा, आज ऐतिहासिक पल है। आजादी के बाद 15 अगस्त को लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गूंज रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री के रूप में उनका यह 13वां संबोधन है।
लाल किले पर अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों से आए लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं। वे देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखने के लिए यहां पहुंचे हैं। इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने' और '2047 तक विकसित भारत बनाने में युवाओं की भूमिका' पर खास जोर दिया गया है। समारोह में पहली बार वंदे मातरम गाया गया। ध्वाजारोहण हुआ और राष्ट्रगान गाया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लाल किले पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री 13वीं बार लाल किले पर ध्वजारोहण करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले पर पहुंचे। वहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने उनका स्वागत किया। इसके बाद रक्षा सचिव ने प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी से कराई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजघाट पर पहुंचकर राष्ट्रपति महात्मा गांधी को नमन किया। इसके बाद वे राजघाट से लाल किले के लिए रवाना हो गए हैं।
Prime Minister Narendra Modi pays floral tributes to the Father of the Nation, Mahatma Gandhi, at Rajghat on the 80th Independence Day
— ANI (@ANI) August 15, 2026
Photos: PM Modi/YouTube pic.twitter.com/KU4botzCKv
लाल किले पर आगमन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक्स हैंडल पर जारी संदेश के माध्यम से 80वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अनगिनत सेनानियों को नमन करते हुए उनके साहस, बलिदान और देश के प्रति अटूट समर्पण को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपने आज भी देश को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के संदेश में कहा कि देश उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति कृतज्ञ है, जिनके साहस, बलिदान और अडिग प्रतिबद्धता ने औपनिवेशिक शासन के अंत को सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के सपने आज भी देश को प्रेरित करते हैं और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प जरूरी है।
Warm greetings on the occasion of Independence Day.
— Narendra Modi (@narendramodi) August 15, 2026
We remember with gratitude the countless freedom fighters whose courage, sacrifice and unwavering commitment ensured the end of colonial rule. Their dreams continue to inspire us as we work together to build a Viksit Bharat.…
लाल किले पर आयोजित स्वाधीनता दिवस समारोह का आधिकारिक मेजबान रक्षा मंत्रालय होता है। आज जश्न-ए-आजादी के मौके पर लाल किले पर जहां चुनिंदा मेहमानों को सशरीर मौजूद रहने का अवसर मिलता है। इसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी शामिल होते हैं। समारोह को यादगार बनाने के लिए हर साल की तरह इस वर्ष भी रक्षा मंत्रालय ने लाल किले की सजावट में फूलों का इस्तेमाल किया है। तिरंगे के रंगों वाले फूलों से लाल किले को सजाया गया है।
लाल किले पर आयोजित मुख्य राजकीय कार्यक्रम के अनुमानित शेड्यूल के मुताबिक लाहौरी गेट पर प्रधानमंत्री मोदी का आगमन लगभग सवा सात बजे होगा। इससे पहले रक्षा मंत्रालय के तमाम अधिकारी पहुंचेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी पीएम मोदी के आगमन से पहले मौजूद रहेंगे।
लाल किले पर सैन्य अधिकारियों का आगमन
इनके अलावा देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी- चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थल सेना, वायुसेना और नौसेना के प्रमुख भी मौजूद रहेंगे। इन सैन्य अफसरों का आगमन साढ़े छह बजे से सात बजे के बीच होने का अनुमान है।