शिक्षाविद और सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार और भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी व अर्जुन अवार्डी शमशेर सिंह संवाद के मंच पर पहुंचे।
कांग्रेस के युवा नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अमर उजाला संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। वे युवा शक्ति और विकास विषय पर अपनी बात रख रहे हैं।
अग्निवीर योजना एक बहुत अच्छी योजना है। इस पर कांग्रेस ने दुष्प्रचार किया है। हमने बच्चों को सरकारी नौकरी और अपना काम करने के विकल्प दे रखे हैं। इसके लिए हमने दस प्रतिशत का आरक्षण अग्निवीर के लिए किया है ताकि वो आए और नौकरी पा सकें।
बगावत किस बात की? हमारा केंद्रीय नेतृत्व इसका ध्यान रखता है कि उन्हें किन पहलुओं को लेकर चर्चा करनी है। हमारे सभी कार्यकर्ता अनुशासित हैं जो भी निर्णय आएगा हम उसे स्वीकार करेंगे।
बगावत किस बात की? हमारा केंद्रीय नेतृत्व इसका ध्यान रखता है कि उन्हें किन पहलुओं को लेकर चर्चा करनी है। हमारे सभी कार्यकर्ता अनुशासित हैं जो भी निर्णय आएगा हम उसे स्वीकार करेंगे।
हम किसान भाइयों के साथ ही हैं। आप एमएसपी को ही देख लीजिए, हमने इसे बढ़ाया है और हम सौ फीसदी फसल इस पर खरीद रहे हैं। हमारे यहां किसान को तकलीफ नहीं है कांग्रेस को तकलीफ है। किसान सम्मान निधि जैसी इतनी ऐसी योजनाएं है कि अगर बताना प्रांरभ करें तो समय कम पड़ जाएगा। कांग्रेस को देखना चाहिए कि 2014 में वो कितने हेक्टेयर पर पैदावार करती है और आज देखें कि कितने हेक्टेयर पर पैदावार हो रही है।
विकास जी मैं एक बात बताना चाहता हूं। मुझे काम करने के लिए बहुत कम समय मिला है। लेकिन इन दिनों में हमने 156 निर्णय लिए। हमारे डबल इंजन की सरकार अपना काम करती है और इसे हम जनता के बीच रखते हैं। इसके बाद जनता निर्णय करती है। विपक्ष कहता है कि हम हिसाब मांग रहे हैं, अरे हम तो कह रहे हैं कि आप हिसाब मांगों ताकि हम अपने कामों के बारे में जानकारी दे सकें। मैं मानता विपक्ष झूठ का बवंडर लेकर घूम रहे हैं और इसका इनको कोई लाभ नहीं मिलेगा।
देखिए विपक्ष ने अफवाहों के कारण लोगों को धोखा दिया है। संविधान खत्म हो जाएगा, ऐसा हो जाएगा, वैसा हो जाएगा। इसका असर दिखा, लेकिन अब लोग जागरूक हो चुके हैं और उन्हें समझ में आ रहा है कि किस प्रकार उन्हें गुमराह किया जा रहा है। आप निश्चंत रहें हम तीसरी बार सरकार बनाने जा रहे हैं। बहुत बड़े नंबर से।
सीएम सैनी ने कहा कि भ्रष्टाचार के कारण पहले तो संतुलन खराब हो गया था लेकिन अब ये सब नहीं चलता। अब चाहे शिक्षा की बात कर लीजिए और चाहे स्वास्थ्य की आपको हर जगह अंतर नजर आ जाएगा। इस दस वर्षों में आपको हर जगह अंतर नजर आ जाएगा। हम हेल्थ के इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो हमने वहां भी कई काम किए है, हम मेडिकल की सीटें और कॉलेज बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं और आप आज मेडिकल कॉलेज की संख्या आप देख सकते हैं।
सीएम सैनी ने कहा कि आप नौकरी की बात कीजिए, पहले युवा सरकारी नौकरी के लिए नेताओं के चक्कर लगाते थे और आज देखिए युवाओं को उनके घर ऑफर लेटर जाता है। अब युवा किसी विधायक या मंत्री के चक्कर नहीं काटता, हमने ये पर्ची सिस्टम को पूरी तरह से बंद कर दिया है। इन दस वर्षों के अंदर आम बच्चे में भी यह भावना है कि वह अच्छे से पढ़ेंगे तो सरकारी नौकरी उन्हें मिलेगी। हम खेलों में बच्चों को ग्राउंड जीरो से तैयार कर रहे हैं कि जब ये मेडल जीतते हैं तो हमें भी खुशी होती है। हमारा हरियाणा का युवा सबसे ज्यादा मेडल लेकर आता है। ये हमारे लिए गर्व की बात है।
हमारी बच्चियां पहले दसवीं और बारहवीं तक पढ़कर रह जाती थीं। आज हमारी सरकार ने ही प्रयास किए हैं कि हर 20 किलोमीटर के अंदर एक कॉलेज हो। आज हमारी बच्चियां इसका फायदा उठा रही है। आज आप कॉलेजों की संख्या देखिए, स्कूलों की बात करें तो आपको साफ अंतर समझ में आएगा। आप किसानों की एमएसपी की बात कीजिए, हमने सबसे ज्यादा दाम दिए है। हरियाणा देश का ऐसा राज्य है जो किसानों की फसलों को 100 प्रतिशत सरकार खरीदती थी। हमने इस पूरे सिस्टम को ठीक किया है। डबल इंजन की सरकार का ही यह फायदा है। लोग सिर्फ घोषणापत्र में लिख देते थे कि हम सौ प्रतिशत बिजली देंगे लेकिन ऐसा करते नहीं थे। आज ज्यादातर गांवों और शहरों में सौ प्रतिशत बिजली दी जा रही है। हमारी सरकार को पूरे सिस्टम को सुधारने का काम किया।
सैनी ने कहा कि अगर कोई किसान पीछे रह गया है तो उसको आगे करने की जिम्मेदारी सरकार की बनती है। हमने ऐसा किया है और हम इसके आंकड़े भी प्रस्तुत कर सकते हैं। अगर जमीन पर विकास होगा तो दुनिया की कोई ताकत हमें आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती है। हमारी नीति और नियत साफ होना बहुत जरूरी है। अब झूठ का सहारा लेकर आप अफवाहें फैलाएंगे तो उससे क्या ही होगा। अब संविधान को खतरे का झूठ फैलाया गया, जबकि केंद्र सरकार और हमारी डबल इंजन की सरकार ने हमेशा संविधान की रक्षा की है। आज विकास हो रहा है, हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का काम हमारी सरकार कर रही है।
सीएम सैनी ने कहा कि पिछला अगर हम अपना दस साल कार्यकाल देखे तो हरियाणा प्रदेश के समस्याओं के साथ साथ इसे आगे गति से आगे बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है। आज मुझे आपके इस चैनल के माध्यम से बताते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है कि हमारा प्रमुख उद्देश्य जीवन के लोगों को सरल करना है। बिजली, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं अगर लोगों को आसानी से मिलेंगी तो वह निश्चित रूप से आगे बढ़ेंगे। इससे पहले जिन मूलभूत आवश्यकताओं का आभाव था, हमने उसे बहुत तेज गति से पूरा किया है। अगर अच्छा काम सरकार करती है तो विपक्ष को भी उसकी सराहना करनी चाहिय। अगर अच्छे काम की विपक्ष बुराई करता है तो वह ठीक नहीं है। अगर कोई योजना आती है और सुधार होता है तो उसका लाभ आम जन को होता है। प्रधानमंत्री किसान योजना जब लागू कि तो एक अभिनेत्री ने कहा था कि सरकार ने ये नया लूटने का धंधा बना लिया है। अब दस साल हो गए देखिए यह किस प्रकार से किसानों को लाभ पहुंचा रही है। अगर कोई किसान मुसीबत में है तो सरकार उसके साथ खड़ी है। बिना कुछ सोचे समझे आरोप लगाना गलत है। अगर योजना में कोई बुराई है तो आप उसका आप जरूर विरोध कीजिए, हमें कमियां बताइए हम उन्हें भी दूर करेंगे।
अमर उजाला 'संवाद' के मंच पर हरियाणा के सीएम नायब सैनी पहुंचे। अमर उजाला के डायरेक्टर वरुण माहेश्वरी ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का स्वागत किया। वो 'विकास की बात' सत्र में बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो मैं अमर उजाला का धन्यवाद करता हूं, आज अमर उजाला के इस कार्यक्रम को लेकर बधाई देता हूं। आज अमर उजाला इस कार्यक्रम में मुझे आने का अवसर मिला है। चुनाव भी चल रहा है और इस दौरान बहुत सारे सवाल होते हैं। लोग यह देखते हैं कि इनके कार्यकाल में क्या हुआ है और इसके पहले जो कार्यकाल चला है उसमें क्या हुआ है।
कॉलेज देखो के सह संस्थापक और सीईओ डॉ. रुचिर अरोरा ने कहा कि बुनियादी दिक्कत यह है कि जिसे लेखक बनना है, वह इंजीनयर बन रहा है। फिर वह अच्छे संस्थान में भी नहीं पढ़ पा रहे। हमने सोचा कि क्यों न बच्चों की अच्छे पाठ्यक्रम में मदद करें। हम युवाओं के बीच बेरोजगारी की दिक्कत को दूर करने की दिशा में प्रयासरत हैं।
डॉक्टर बजाज ने कहा कि सरकारें अगल सिंगल विंडो क्लेयरेंस दे दे तो निजी क्षेत्र के अस्पताल भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सरकारों की मदद कर पाएंगे। जिस परीक्षा से डॉक्टरों की बुनियाद रखी जा रही है, वह निष्पक्ष होनी चाहिए। सरकार को इसके लिए सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि परीक्षाएं न सिर्फ निष्पक्ष तरीके से हों, बल्कि निष्पक्ष होती दिखाई भी दें।
डॉक्टर सचिन बजाज ने कहा कि 2019 में हमारी बहुत अच्छी किस्मत थी कि अमर उजाला ने ये मॉडल देखा और देखते ही फैसला किया कि ये उनकी सोच से मिलता है। गरीब लोगों की सेवा करना, गरीब मरीजों का अच्छा इलाज करना, कम पैसों में। 2019 में हम बहुत छोटे थे। हरियाणा में हम अस्पताल चलाते थे। अमर उजाला की मदद से अब पांच प्रदेशों में 23 अस्पताल हैं। जम्मू-कश्मीर में भी अस्पताल चलाते हैं। अब हमारा फोकस उत्तर प्रदेश पर है। यूपी के 75 में से 20 से 25 जिलों में अस्पताल खोलने का लक्ष्य है।
देखिए पिछले कुछ सालों में देखने में आया है। प्रधानमंत्री की आयुष्मान कार्ड योजना जैसी स्कीमों से काफी फायदा हुआ है। लेकिन हमें सरकारी अस्पतालों की हालत को सुधारना होगा, वहां पर हमें अच्छे डॉक्टर ओर सुविधाओं को बढ़ाना होगा। रेवाड़ी जैसी जगह पर अगर किसी व्यक्ति को हार्डअटैक आ जाए तो वो सरकारी अस्पताल में इलाज नहीं करा सकता है। बड़े शहरों में अस्पताल होते हैं, लेकिन छोटे शहरों में अस्पताल नहीं होते।
'अगला सत्र कारोबार की उड़ान' में डॉक्टर सचिन बजाज एक प्रसिद्ध समाज उद्यमी चर्चा कर रहे हैं। उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के फाउंडर सचिन बजाज ने कहा कि परीक्षा पास कर मैं परिवार का पहला डॉक्टर बना। गांव में मेरा परिवार आज भी रहता है। गांव से बहुत सारे फोन आते थे, क्योंकि मैं पहला ही डॉक्टर था फैमिली से। किसी को हार्ट अटैक हो गया है, किसी को सिर में चोट है, किसी का एक्सीडेंट हुआ है, दिल्ली लेकर आ रहे हैं, क्या आप मदद कर सकते हो। कुछ बेड अरेंज कर दो। कुछ मदद कर दो।
जवाब: नहीं मैं तो किसी तरह का बदलाव नहीं देखना चाहता। टेस्ट क्रिकेट एक ऐसा फॉर्मेट है, जिसे लोग दिलचस्पी से देखने आते हैं, भले ही वह पांच दिन का हो।
जवाब: मुझे लगता है कि भारतीय टीम के लिए तो नहीं, लेकिन आईपीएल टीम के लिए किसी के लिए मौका आता है तो जरूर मैं देख सकता हूं। क्योंकि मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो वापस से वही रुटीन होगी जो मैंने 15 साल में किया है। 15 साल आप भारतीय टीम के लिए खेले, साल में आठ महीने घर से बाहर रहे। अभी मेरे बच्चे 14 और 16 साल के हैं और उन्हें मेरी जरूरत है। दोनों क्रिकेट खेलते हैं। एक ऑफ स्पिनर है और एक ओपनिंग बल्लेबाज है। उन्हें क्रिकेट सिखानी है और खिलानी है। उनके साथ समय बिताना है। अगर मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो टीम इंडिया के खिलाड़ी आठ महीने बाहर रहते हैं तो ये मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती हो जाएगी। फिर मैं अपना समय बच्चों को नहीं दे पाऊंगा। लेकिन हां अगर आईपीएल में किसी कोच की या मेंटर का रोल मुझे मिलता है तो जरूर मैं इस पर सोचूंगा।
जवाब: मुझे लगता नहीं कि ज्यादा कुछ चुनौती है, क्योंकि वहां और भी प्रोफेशनल्स हैं। हाल ही में खिलाड़ियों ने टी20 विश्व कप जीता है, खिलाड़ियों को पता है कि उनका रोल क्या है। गंभीर के आने से खिलाड़ियों को एक क्लैरिटी मिल जाएगी कि ये रोल है, आपको ये करना है। तो ये एक बेनिफिट मिलेगा भारतीय टीम को। गंभीर की चुनौतियां कम होंगी और खिलाड़ियों की चुनौतियां ज्यादा होंगी क्योंकि उन्हें लगेगा कि हमने टी20 विश्व कप जीता है तो अब हम चैंपियंस ट्रॉफी जीतें या फिर वनडे विश्व कप जीतें या फिर टेस्ट चैंपियनशिप जीतें। तो खिलाड़ियों पर ज्यादा चुनौतियां होंगी बजाय कोच के। क्योंकि गंभीर उनकी मदद करने के लिए वहां हैं।
जवाब: बल्लेबाजों का माइंड जरूर चेंज हुआ है टी20 से, क्योंकि टी20 में आप 20 ओवर में 200 रन बनाते हो। तो ये माइंडसेट टेस्ट क्रिकेट में जरूर बदला है। पहले तीन रन प्रति ओवर बनते थे और अब पांच या छह रन प्रति ओवर भी बनने लगे हैं। जिससे कि जल्दी रन बनते हैं और खिलाड़ी आउट भी होते हैं। इससे विकेट भी बहुत मिल रहे। तीन दिन में मैच भी खत्म हो रहे। ये एंटरटेनिंग भी है क्योंकि आप अगर एक टेस्ट मैच खेलने जा रहे हो तो मजा आ रहा है क्योंकि रन भी बन रहे हैं विकेट भी गिर रहे हैं तो मजा आ रहा है। मुझे भी टेस्ट क्रिकेट देखने में मजा आ रहा और जब ये मैच होते हैं तो टीवी के आगे बैठ जाता हूं।
जवाब: ज्यादा तो नहीं कहूंगा, लेकिन एक अच्छी चीज है कि जो सैलरी भारतीय पुरुष खिलाड़ियों को मिलती है, उतनी ही भारतीय महिलाओं क्रिकेटरों को भी मिलती है। अगर वह बेहतर क्रिकेट खेलेंगी और विश्व कप जीतेंगी तो उनका नाम और होगा। भारत में जो लड़कियां हैं वह इस खेल को अपनाएं ताकि बेहतर करियर बन सके।
इस सवाल पर वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि व्हाइट बॉल क्रिकेट अधिक होने के कारण ऐसा हो सकता है। स्पिन को खेलने का मौका अब खिलाड़ियों को कम मिलता है। डोमेस्टिक क्रिकेट में खिलाड़ी के कम खेलने के कारण ऐसा हो सकता है। हमारे समय में राहुल द्रविड़, गांगुली, तेंदुलकर, युवराज, लक्ष्मण हम सब लोग डोमेस्टिक क्रिकेट खेलते थे, क्योंकि उस समय टी-20 फॉर्मेट नहीं था। डोमेस्टिक क्रिकेट में काफी स्पिनर्स को खेलते थे। लेकिन आजकल इंटरनेशल खिलाड़ी को समय कम मिल रहा है। क्योंकि वो खिलाड़ी इतना बिजी हैं कि उसका आईपीएल है, बिजी शेड्यूल है।
जवाब: क्रिकेट में बहुत बदलाव आया है। क्रिकेट बहुत फास्ट हो गई है, देखने में मजा आने लगा है। क्रिकेट फाइनेंशियली भी मजबूत हो गई है। भारतीय टीम सबसे ज्यादा मजबूत है, भारतीय खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा पैसे मिलते हैं। बहुत बदलाव है। भारत के घरेलू क्रिकेट में भी बदलाव आया है। अब सेलेक्टर्स के पास ज्यादा ऑप्शंस हैं। आईपीएल से भी भारतीय क्रिकेट मजबूत हुई है। अब इसका प्रदर्शन भी मायने रखता है और चयन के लिए अहम पैमाना है। हालांकि, अभी भी कुछ लोग बोलते हैं कि इसका चयन हुआ और उसका चयन नहीं हुआ है। तो ये कुछ बदलाव हैं जो मैंने पिछले 10 वर्षों में देखे हैं।
जवाब: सोशल मीडिया को पहले इतना अहमियत कोई देता नहीं था। लेकिन अब सोशल मीडिया एक्टिव हो गया है। फिर मैंने भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना शुरू किया। फिर मैंने सोचा कि सोशल मीडिया पर मैं क्या कर सकता हूं, किस तरह लोगों का मनोरंजन कर सकता हूं। मैंने ऐसी विशेष सत्र शुरू की ताकि लोगों को लगे कि हां ये कुछ नया है। तो मैंने पहला पोस्ट रोहित शर्मा को लेकर किया। उसमें लिखा कि जब रोहित पैदा हुए तो डॉक्टर ने कहा लड़का नहीं हुआ है, हिटमैन हुआ है। तो ये काफी चर्चित हुआ। तो लोगों को लगा हां यार ये कुछ नया है। तो पांच छह मिलियन की फॉलोइंग हुई। मुझे नहीं पता था कि लोग इतना पसंद करेंगे और उन्हें खुशी मिलेगी। तो मैंने इसी को आगे बढ़ाने की कोशिश की। तो मेरे मन में जो आता है उसे लिख देता हूं। मैं वो पोस्ट करता हूं, जो मुझे लगता है कि ये सही है और ये लोगों को पसंद आती है। कई विवाद भी हुए, क्योंकि अच्छी चीजें कम हाइलाइट किया जाता है, खराब चीजें ज्यादा हाइलाइट की जाती हैं।
जवाब: ऐसा नहीं है। 16-17 साल की उम्र से जब खेलना शुरू करता है तो उसे अनुशासन में रहना पड़ता है। सुबह उठना पड़ता है, व्यायाम के लिए जाना पड़ता है, प्रैक्टिस करनी पड़ती है क्योंकि वह एक अनुशासन में रहता है। हालांकि, जब उसे टीम इंडिया के लिए खेलना होता है तो उसे अलग तरह के अनुशासन का सामना करना पड़ता है। तब उसे स्कूल नहीं जाना पड़ता, ताकि शरीर बेहतर रहे और मैच में बेहतर प्रदर्शन कर सके। जब एक खिलाड़ी रिटायर होता है, तो उसके बाद लाइफ में बदलाव होता है। तब भी आप भी व्यस्त होते हैं। लेकिन आजकल कमेंटेटर बॉक्स में भी बहुत स्कोप है। इतने सारे लैंग्वेज में कमेंट्री होती है तो बहुत सारे क्रिकेटरों को आना पड़ता है। तो बहुत व्यस्त जिंदगी हो गई है। हालांकि, मैं 35 साल की उम्र में रिटायर हुआ और जो काम मैं खेलते हुए नहीं कर सका, मैं चौके छक्के मारकर लोगों को खुशी जरूर देता था, लेकिन लोगों को हंसा नहीं पाता था, कमेंट्री बॉक्स में जरूर किस्से कहानियां सुनाता हूं, जिससे लोग आनंद भी लेते हैं और हंसते भी हैं।
संवाद कार्यक्रम में भारत के पूर्व ओपनर और मुल्तान के सुल्तान के नाम से मशहूर वीरेंद्र सहवाग भी पहुंचे और क्रिकेट से जुड़ी कुछ दिलचस्प घटनाओं पर बातचीत कर रहे हैं। वर्ष 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट में तिहरा शतक लगाते हुए 319 रन बनाने वाले भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर सहवाग से अमर उजाला के मंच पर खेलों पर विस्तार से चर्चा हो रही है।
बीके शिवानी ने कहा कि मेहनत करने के लिए शरीर का ध्यान रखना होता है। 30-40 साल पहले मन का ख्याल रखने की जरूरत नहीं होती थी। अब हमारे पास टीवी-मोबाइल जैसे खिलौने हैं, जो हमें सोने नहीं देते। मनोरंजन के नाम पर हम ईर्ष्या, द्वेष की सामग्री को देखते हैं। इसलिए नींद नहीं आने की बीमारी आज सबसे बड़ी बीमारी है।
अपने आप को पहले किस और अब किस तरह से देखते हैं, मुझे आज भी पहले की तरह ही अनुभव लगता है। मैं एक इंस्ट्रूमेंट हूं जो ऊपर वाला मेरा उपयोग करता है।
बीके शिवानी ने कहा कि जो धन कमाते हैं वो दुआ नहीं कमाते लेकिन सौ प्रतिशत लिखकर रख लीजिए कि जो दुआ कमाएगा वो धन अपने आप कमाएगा। धन जिस तरह से आता है उसी तरह से जाता है।
बीके शिवानी ने कहा कि धन, अन्न ,मन और तन सबसे पहले आते हैं। मतलब धन की देवी भी कीचड़ में रहते हुए कमल पर बैठे हुए दिखाया गया है। धन के साथ किसी की दुआ घर आए तो बेहतर होगा। धन कमाना बुरा नहीं है, पर कैसे कमाते है ये सोचने के बात है।
उन्होंने कहा कि चार गाड़ियां लीजिए, कोई मना नहीं कर रहा। अध्यात्म धन कमाने से मना नहीं करता। धन, मन, अन्न और तन। मन और तन को शक्तिशाली बनाना है तो धन बनाना होगा। इसलिए धन को लक्ष्मीजी कहा गया है। कमाने का तरीका कमल पुष्प की तरह हो, वह दुआओं के साथ। ऐसा करेंगे तो धन सेहत और सुकून लेकर आएगा। धन बहुत कमाएं, लेकिन दुआओं के साथ कमाएं। क्या कभी कोई ऐसा दुकानदार मिलता है, जो कहता हो कि आज मुझसे मत खरीदो, सामान ताज़ा नहीं है। उसने आपके बारे में सोचा, धन नहीं कमाया, लेकिन आपकी दुआएं कमाईं।
बीके शिवानी ने कहा कि हमारे लिए एक बाह्य जगत और एक बाह्य तरक्की। एक और छोटी से गलती जो हमने की है, हमने बाह्य तरक्की को सफलता की परिभाषा माना है। स्कूल में भी जो बच्चा फर्स्ट आता है, उसको सक्सेसफुल माना जाता है। अगर दूसरे बच्चे के नंबर कम हों लेकिन संस्कार बहुत अच्छे हों तो उसे फेलियर कहा जाता है। ये हमारा फेलियर है, हमने संस्कारों को नहीं सिर्फ बाह्य उपलब्धियों को सफलता कहा। संस्कारों के साथ रखकर आगे बढ़ेगे तभी सफल हो सकेंगे। आज का समाज हमें नहीं लगता है कि सफल है। चालीस से पचास साल पहले था कि आप कैसे कमाते हैं आज है कितना कमाते हैं।
बीके शिवानी ने कहा कि विज्ञान हमें बुद्धिमान बनाता है, अध्यात्म हमें विवेकपूर्ण बनाता है। तो हमें ज्ञान और विज्ञान, दोनों चाहिए। विज्ञान बहुत पारवरफुल है। विज्ञान बहुत इम्पोर्टेंट है। जीवन पहले बहुत आसान था। आप याद कीजिए कि आप लोग जब स्कूल में रहे होंगे तो कितने लोगों को अवसाद, मधुमेह होता था। कितने तलाक होते हैं। ये सब बदलाव हमारे जीवनकाल में हम देख रहे हैं। विज्ञान ने हमें साधन दिए, लेकिन विज्ञान के साथ हम इतना खेलने लगे कि बाकी सब भूल गए। परमात्मा कहते हैं कि साधनों का उपयोग करो, लेकिन साधना मत भूलो। परमात्मा हमें एक बहुत इम्पोर्टेंट लाइन सिखाते हैं, साधनों का उपयोग करो, लेकिन साधनों का उपयोग करते-करते अपने साधना को नहीं भूलना है। साधनों को मालिक बनकर उपयोग करना है। साधनों का गुलाम मत बन जाना। हम साधनों के गुलाम बन गए। सुबह उठते हैं फोन के साथ, रात को सोते हैं फोन के साथ। यहां के लिए हमने समय ही नहीं निकाला। आज हम किसी से कहते हैं कि 15 से 20 मिनट रोज मेडिटेशन कीजिए, वो कहते हैं कि मरने की फुर्सत नहीं है, आप बोलते हो सुबह-सुबह आंख बंद करके ऐसे बैठ जाओ। तो ये हमारी सोच है।
अमर उजाला के निदेशक वरुण माहेश्वरी ने मोटिवेशनल स्पीकर ब्रह्मकुमारी शिवानी जी का स्वागत किया। इस सत्र में शिवानी जी ने कहा कि सीधा होकर बैठ जाइए और एक बहुत छोटी सी एक्सरसाइज है, जिसको आप कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं। इस एक्सरसाइज से सोच बदलती है, सोच से संस्कार बदलते हैं, संस्कार से संसार बदलता हैं।
बीके शिवानी ने कहा कि स्वाभाविक है कि हमें कुछ अच्छा लगे तो हम सोचते हैं कि परिवार को भी मिले। जब मेरे परिवार ने कहा तो मुझे लगा कि मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है, न ही दिलचस्पी है। जितना ज्यादा उन्होंने मुझसे कहा, उतना मैं दूर होती गई। मुझे तार्किकता की तलाश थी। मैंने कहा कि साबित करो। असल में मैं समय बर्बाद कर रही थी। विज्ञान कहता है कि साबित करो, अध्यात्म कहता है कि अनुभव करो। अध्यात्म में भी प्रयोग होते हैं, लेकिन विज्ञान से उलट यह प्रयोग आंतरिक होता है।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की शुरुआत में अमर उजाला के संपादक डॉक्टर इंदुशेखर पंचोली ने कहा कि हम एक बार फिर अमर उजाला संवाद आप लोगों के बीच में है। आगरा से शुरू हुआ सफर आज उत्तर प्रदेश ही नहीं अन्य राज्यों में काफी प्यार मिला। निरंतर लोगों का भरोसा जीत रहे हैं। खबर हमारे लिए सूचना नहीं बल्कि काम है। अमर उजाला की कोशिश रही है कि आम लोगों की आवाज को सरकार तक पहुंचाना। अमर उजाला लगातार अपने काम के साथ आगे बढ़ रहा है। लोगों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान, साहित्यकारों को सम्मान देने, युवाओं को सम्मान देने के लिए मेधावी छात्र सम्मान कार्यक्रम किए जाते हैं। इस कार्यक्रम के जरिए हमारा मकसद है कि हर क्षेत्र के लोग एक मंच पर आए और लोगों को प्रेरित करें। आज जो लोग यहां शामिल होंगे। वह अपने क्षेत्र में माहिर है, लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। आप भागीदारी के लिए आए। आपका धन्यवाद।
कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी सशक्त हरियाणा पर अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ अपना विजन भी सामने रखेंगे। वहीं, दूसरे दिन का कार्यक्रम मंगलवार को नई दिल्ली में होगा। इनमें ऑन स्पॉट पंजीकरण भी कराया जा सकता है। दो दिवसीय महामंथन के अलग-अलग सत्रों में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत, पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग, मोटिवेशनल स्पीकर नित्यानंद चरण दास, शिक्षाविद व सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार और स्टैंडअप कॉमेडियन सुमेध शिंदे विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखेंगे।
अमर उजाला संवाद हरियाणा कार्यक्रम में शिक्षा, खेल, धर्म, फिल्म व कारोबार जगत की नामचीन हस्तियां शामिल हो रही है। यह कार्यक्रम गुरुग्राम स्थित होटल क्राउन प्लाजा में है।
सचिन पायलट ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के एयर फोर्स बाल भारती स्कूल में पूरी की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका स्थित पेंसिलवानिया विश्वविद्यालय के व्हॉर्टन स्कूल से एमबीए की डिग्री भी हासिल की। उनकी शिक्षा ने उन्हें एक व्यापक दृष्टिकोण और आधुनिक सोच दी, जो उनकी राजनीति में झलकती है।
सचिन पायलट का राजनीतिक जीवन 2004 में शुरू हुआ। 2004 में अपने पिता के निधन के बाद राजनीति में कदम रखा। उन्होंने दौसा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्हें दौसा सीट से चौदहवीं लोकसभा के लिए चुना गया। वे भारतीय सांसद बनने वाले सबसे युवा व्यक्ति बने। सचिन पायलट ने केंद्र सरकार के गृह विभाग के स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी काम किया है। दिसंबर 2018 में उन्हें राजस्थान का 5वां उप मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन आंतरिक विवादों के चलते 14 जुलाई 2020 को उन्हें उप मुख्यमंत्री और राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था।
सुमेध को मनोरंजन की दुनिया से भले ही प्यार हो, लेकिन पढ़ाई-लिखाई में भी वह कई कलाकारों से काफी आगे हैं। वह पेशे से दांतों के डॉक्टर हैं, यानी वह स्टैंडअप कॉमेडी और अपनी डॉक्टरी से लोगों की मुस्कान का खास ख्याल रखते हैं। डॉक्टर होने के बावजूद वह लोगों का मनोरंजन करने का अपना पैशन फॉलो करने में जरा भी नहीं हिचकिचाते हैं।
सुमेध गाना भी बहुत अच्छा गा लेते हैं। सबसे पहले उन्हें सिंगिंग रियलिटी शो में ऑडिशन के दौरान देखा गया था। इस दौरान वहां मौजूद जजों के पैनल को उनका गाना उतना पसंद नहीं आया, लेकिन अपनी मिमिक्री से उन्होंने सभी का दिल जीत लिया था। इंडियन आइडल 4 में वह बतौर गायक अपनी किस्मत आजमाने पहुंचे थे। इस शो में अनु मलिक, अलका याग्निक, जावेद अख्तर और सोनाली बेंद्रे जैसे दिग्गज जज की भूमिका में थे। इस ऑडिशन में सुमेध ने 'कहो न कहो' गाना गया था, जो जजों को प्रभावित नहीं कर सका, लेकिन इसके तुरंत बाद जब उन्होंने सितारों की मिमिक्री शुरू की तो सभी उनकी इस अद्भुत कला के कायल हो गए।
आनंद कुमार का जन्म 1 जनवरी, 1973 को पटना, बिहार में एक साधारण से परिवार में हुआ था। उनके पिता डाक विभाग में क्लर्क के रूप में काम करते थे। छोटी उम्र में ही कुमार की गणित में गहरी रुचि बन गई। उन्होंने हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त की और कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ऐसे पेपर लिखे, जो मैथमेटिकल स्पेक्ट्रम जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।
फिल्मी दुनिया के बाद अब वह राजनीति के क्षेत्र में भी कामयाबी के झंडे गाड़ रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर उन्होंने हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से अपनी किस्मत आजमाई और जीत हासिल कर संसद पहुंचीं। लोकसभा में उन्हें कई बार क्षेत्र की समस्याओं को उठाते हुए देखा जा चुका है।
कंगना रणौत अपने अभिनय के दम पर लोगों के दिलों में राज करती हैं। साल 2008 में आई फिल्म फैशन में उन्होंने एक नशे की लत वाली सुपर मॉडल की भूमिका निभाई थी। मधुर भंडारकर की इस फिल्म में उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को चौंका दिया था। वहीं,क्वीन, तनु वेड्स मनु, मणिकर्णिका और तुन वेड्स मनु रिटर्न्स से उन्होंने लोगों पर अपनी अदाकारी से गहरी छाप छोड़ी है।
कंगना को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है। उनका जन्म हिमाचल के मंडी जिले के भांबला में हुआ था। वह राजपूत परिवार से ताल्लुक रखती हैं। अपने अभिनय के दम पर कंगना लंबे समय से अपने प्रशंसकों के दिलों में जगह बनाई हुई है। करियर की शुरुआत उन्होंने भट्ट कैंप की फिल्म गैंगस्टर से की थी। साल 2006 में बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म सफल रही और उनके काम को भी लोगों ने खूब सराहा। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ फीमेल डेब्यू का अवॉर्ड मिला था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं।
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बतौर विशेषज्ञ हिस्सा लेने वाले सहवाग हरियाणा में खेलों की संभावनाओं और विकास पर भी अपने विचार रखेंगे। विश्व क्रिकेट के सबसे विस्फोटक ओपनर्स में शुमार रहे सहवाग आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स और घरेलू क्रिकेट में दिल्ली और हरियाणा के लिए भी खेल चुके हैं। नजफगढ़ के नवाब और आधुनिक क्रिकेट के जेन मास्टर के रूप में पहचाने जाने वाले सहवाग दाएं हाथ के आक्रामक सलामी बल्लेबाज रहे हैं। वह टेस्ट मैच की एक पारी में 300 या उससे अधिक रन बनाने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने यह कारनामा दो बार किया है।
धर्मेंद्र प्रधान एक भारतीय राजनेता हैं जो वर्तमान में 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद नवगठित सरकार में शिक्षा मंत्री और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान ने ओडिशा के संबलपुर निर्वाचन क्षेत्र के 2024 के लोकसभा चुनावों में 49.48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ जीत हासिल की।
इससे पहले, वे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री और इस्पात मंत्री भी रह चुके हैं। संसद सदस्य (एमपी) के रूप में, प्रधान राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हैं और पहले 14वीं लोकसभा के सदस्य थे। जुलाई 2021 में कैबिनेट फेरबदल के बाद रमेश पोखरियाल की जगह प्रधान दूसरे नरेंद्र मोदी मंत्रालय में शिक्षा मंत्री बने।
दो दिवसीय महामंथन के अलग-अलग सत्रों में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत, पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग, मोटिवेशनल स्पीकर नित्यानंद चरण दास, सिस्टर शिवानी, शिक्षाविद व सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार और स्टैंडअप कॉमेडियन सुमेध शिंदे विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखेंगे।
इस कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी सशक्त हरियाणा पर अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ अपना विजन भी सामने रखेंगे। वहीं, दूसरे दिन का कार्यक्रम मंगलवार को नई दिल्ली में होगा। इनमें ऑन स्पॉट पंजीकरण भी कराया जा सकता है।
देश और हरियाणा के बहुआयामी विकास पर महामंथन अमर उजाला संवाद हरियाणा सोमवार से होने जा रहा है। कार्यक्रम में शिक्षा, खेल, धर्म, फिल्म व कारोबार जगत की नामचीन हस्तियां शामिल होंगी। पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत गुरुग्राम स्थित होटल क्राउन प्लाजा में सुबह नौ बजे से होगी।