अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चलाएं बुलडोजर-आदेश गुप्ता
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जहांगीरपुरी हिंसा के मामले में आज सबसे ज्यादा जरूरी है कि देश में एनआरसी कानून को लाना चाहिए। हर देश में अपना एक पहचान पत्र है। भारत में भी होना चाहिए, नहीं तो आने वाले दिनों में भारत की सामाजिक सरंचना को तोड़ने की एक साजिश है।
दिल्ली पुलिस ने जहांगीरपुरी इलाके में कई सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। साथ ही पुलिस अस्थायी निगरानी स्टेशन भी लगाएगी।
जहांगीरपुरी में बुलडोजर की कार्रवाई मामले में बोलते हुए आरजेडी चीफ तेजस्वी यादव ने आज कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी जहांगीरपुरी में तोड़फोड़ होती रही। चीन हमारे देश में घुसकर गांव बसा रहा है लेकिन वहां सरकार को कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है और यहां धर्म के आधार पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं।
समाजवादी पार्टी भी अब दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में पीड़ितों से मिलने आएगी। पार्टी ने बयान जारी करते हुए कहा है कि, दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के संबंध में समाजवादी पार्टी का 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल कल दिल्ली पहुंचेगा।
जहांगीरपुरी में आम आदमी पार्टी के तीन विधायक करीब अपने 50 समर्थकों के साथ पीड़ितों से मिलने पहुंचे। पुलिस ने विधायकों और उनके समर्थकों को घटनास्थल से पहले रोक लिया और आगे जाने की अनुमति नहीं दी। बाद में पुलिस ने केवल 5 लोगों को ही कुशल चौक पर आने की अनुमति दी।
जहांगीरपुरी हिंसा के पीड़ितों से मिलने पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने समझाकर वापस भेज दिया। जब वह यहां पहुंचे तो इलाके की सुरक्षा व्यवस्था में कई लेयर बढ़ा दिए गए। किसी भी हाल में कांग्रेस नेताओं को पीड़ितों से नहीं मिलने दिया गया और शांति व्यवस्था का हवाला देकर उन्हें पुलिस ने वापस भेज दिया। इस तरह कांग्रेस के नेता किसी पीड़ित से नहीं मिल सके।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में इमरान प्रतापगढ़ी भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा, हम पीड़ित परिवारों से मिलेंगे। बाद में हम सोनिया गांधी को रिपोर्ट सौंपेंगे।
यूपीए सरकार में केंद्रीय शहरी विकास मंत्री रहे अजय माकन ने कहा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री होने के नाते मैं ये कह सकता हूं कि किसी को बिना नोटिस के उजाड़ा नहीं जा सकता। जब तक लोगों के पुनर्वास का इंतजाम न हो तब तक उनके घरों को नहीं तोड़ा जा सकता।
कांग्रेस के 16 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल इस वक्त जहांगीरपुरी के हिंसाग्रस्त इलाके में लोगों से मिलने पहुंचा है। यहां पहुंचकर दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि यह सब ठीक नहीं हो रहा है। ये लोग बुलडोजर चलाकर अशांति फैलाना चाहते हैं। वहीं केजरीवाल की चुप्पी भी समझ से परे है। आखिर इतनी बड़ी घटना के बाद भी वह चुप क्यों हैं?
एनडीएमसी के मेयर राजा इकबाल सिंह ने कोर्ट के आदेश पर कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे। कोई भी कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद ही होगी।
अदालत ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद कहा है कि हम अब इस मामले में दो हफ्ते बाद सुनवाई करेंगे और तब तक जहांगीरपुरी में यथास्थिति बरकरार रखनी होगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि उनका यह आदेश सिर्फ जहांगीरपुरी के लिए है न कि देश के दूसरे हिस्सों के लिए। अगर तब तक निगम ने जहांगीरपुरी में कोई कार्रवाई की तो उसे अदालत गंभीरता से लेगी और इससे अवमानना माना जाएगा।
कपिल सिब्बल ने भी मामले में दलील रखते हुए कहा कि, अतिक्रमण और अवैध निर्माण पूरे देश की समस्या है। लेकिन इसकी आड़ में एक समुदाय को निशाना बना रहे हैं। मध्य प्रदेश के मंत्री ने कहा कि अगर मुसलमान शांत नहीं हुए तो कोई रियायत नहीं दी जाएगी। कोर्ट को यह संदेश देना चाहिए कि यहां कानून का शासन है।
दवे ने अपनी दलील में ये भी कहा कि यह कार्रवाई आनन-फानन हुई और वो भी भाजपा अध्यक्ष द्वारा मेयर को पत्र लिखने के बाद। दवे ने बताया कि सुबह 9 बजे ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई थी और अदालत का आदेश आने के बाद भी कार्रवाई जारी रही।
कोर्ट के पूछने पर वकील दवे ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए धारा 343 के तहत 5 से 15 दिन का नोटिस मिलना चाहिए था। ऐसे मामलों में कई बार कोर्ट ने नोटिस की मियाद को बढ़ाया है। लोगों को बिना नोटिस के नहीं हटाया जा सकता। यह उनके राइट टू लाइफ का उल्लंघन है।
दवे ने कहा कि जहांगीरपुरी में लोगों ने 30 साल से भी पुराने घर और दुकान हैं। हम एक सांविधानिक समाज में रहते हैं। इन सबकी इजाजत कैसे दी जा सकती है। इस बेंच ने दवे से यह कहा कि आप अतिक्रमण वाले मामले तक ही सीमित रहिए और ये बताइए कि नोटिस जारी करने के क्या प्रावधान हैं।
दुष्यंत दवे ने दलील रखी कि जिस शोभायात्रा को इजाजत भी नहीं थी उसे पुलिस ने कैसे निकलने दिया। बिना जांच शुरू हुए लोगों को गिरफ्तार किया गया और निगम ने सुबह 9:00 बजे से पहले ही बुलडोजर की कार्रवाई शुरू कर दी। दवे ने ये भी कहा कि यह सिर्फ जहांगीरपुर तक ही सीमित नहीं है ये हमारे सामाजिक ताने-बाने पर प्रहार है।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील रखी है कि दिल्ली में 731 कॉलोनियां हैं जिसमें लाखों लोग रहते हैं लेकिन निगम ने एक ही कॉलोनी चुना क्योंकि आपने एक समुदाय को टारगेट किया।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है। इसमें अतिक्रमण हटाने के खिलाफ जो याचिका डाली गई है उस पक्ष के वकील दुष्यंत दवे ने पूरे देश में बलडोजर की किस तरह से कार्रवाई हो रही है उसकी दलील कोर्ट में रखी। इस पर अदालत ने कहा कि आप पूरे देश की नहीं बल्कि जहांगीरपुरी की बात करिए।
हर कोई निगम द्वारा की गई बुलडोजर की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है, ऐसे में इसे लेकर उत्तरी नगर निगम ने सफाई दी है। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके से अतिक्रमण हटाने का काम हो रहा है। इससे पहले भी इसी साल फरवरी में दो और 17 तारीख को अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया था। यही नहीं 11 अप्रैल को भी ऐसी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी।
जहांगीरपुरी में जिस इलाके में हिंसा हुई और बुधवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान चला वहां अब भी भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं। यहां पीसीआर की हर कॉल पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह की अनहोनी को टालने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है।
जहांगीरपुर में चलाए अतिक्रमण हटाओ अभियान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका पर आज सुनवाई होनी है। अदालत ने बुधवार को इस मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था और आज सुनवाई की अगली तारीख तय की थी। इस मामले में अब एनडीएमसी अपना पक्ष रखने की तैयारी कर चुका है। कहा जा रहा है कि निगम कोर्ट में यह दलील देगा कि उसका अतिक्रमण हटाओ अभियान पहले से ही चल रहा है और उसकी सुनवाई भी हाईकोर्ट में चल रही है।