ऑपरेशन सिलक्यारा पूरे जोर शोर के साथ आगे बढ़ रहा है। हालांकि अधिकारी अब फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं। ड्रिलिंग के दौरान कई बार मशीन में कंपन तेज होने लगी, जिसके चलते मशीन को रोका गया, फिर चेक किया गया। ऐसे में कई खतरे की घंटी महसूस होने लगी। अभी तक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार अगर कोई बड़ी बाधा सामने नहीं आती है तो आज रात तक ऑपरेशन सिलक्यारा को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया जाएगा।
रुड़की से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है जो टनल के अंदर होने वाली वाइब्रेशन पर अपनी रिपोर्ट देगी। इससे टनल के भीतर खतरे का आकलन किया जा सकेगा। - भास्कर खुल्बे, पीएमओ के पूर्व सलाहकार
पहले सुरंग में 900 मिमी पाइप को ऑगर मशीन के माध्यम से भेजा था, जो 22 मीटर जाने के बाद अटक गया था। इस पाइप में 800 मिमी का पाइप भेजने का फार्मूला काम आ गया। एक तो 22 मीटर तक 800 मिमी पाइप पर मलबे का दबाव नहीं था। दूसरे मलबे के 25 से 45 मीटर हिस्से में जहां दबाव था, उसे बुधवार शाम को पार कर लिया गया।
ऑगर मशीन के आगे कुछ सरिया आ जाने से काम रुका जिन्हें कटर से काटकर मशीन फिर आगे बढ़ गई। रेस्क्यू बचाव अभियान से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, रात ऑगर मशीन के सामने जो सरियों की बाधा आई थी उसे एनडीआरएफ की टीम की मदद से गुरुवार सुबह करीब 3 बजे हटा दिया गया था। जल्द मजदूरों के बाहर आने की संभावना है।
सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को आज 264 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है। 12 नवम्बर की सुबह 5:30 बजे हादसा हुआ था। जब अचानक ऊपर से मलबा गिरने की वजह से 41 मजदूर टनल में फंस गए थे। उम्मीद है कि आज मजदूर बाहर निकल पाएंगे।