फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Uttarakhand Samwad 2026 Live: आरजे प्रवीन बोले- कंटेंट ऐसा लेकर आओ जो रिलेटेबल हो, यही सबसे जरूरी है

Wed, 24 Jun 2026 08:01 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून

खास बातें

देवभूमि के विकास पर अमर उजाला संवाद के मंच पर मंथन चल रहा है। देहरादून में आयोजित हो रहे अमर उजाला संवाद के इस मंच पर विचारों और अनुभवों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। 'सतत विकास' की थीम पर किए गए इस खास आयोजन में खेल, राजनीति, अध्यात्म और मनोरंजन से जुड़ी दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

लाइव अपडेट

06:57 PM, 24-Jun-2026

सवाल- आरजे राघव, आपका कभी दिल टूटा

आरजे राघव (जवाब)- नहीं टूटा दिल। मैं जब जहां हूं, उसे एन्जॉय करता हूं। स्टारडम वाले लोग जब सोशल मीडिया पर आ रहे तो आम लोग क्यों न आएं। 

06:37 PM, 24-Jun-2026

रियल और ऑथेंटिक कंटेंट कैसा होना चाहिए? जो अच्छी जानकारी भी दे जाए।

अंकुर: जाे कुछ भी आपने कॉपी नहीं किया बस वहीं रियल कंटेंट है। आप अगर कुछ ऑब्जर्व करके उसे कंटेंट बना रहे हो और वो दूसरे से अलग हैं तो ही काम का है। थोड़ा बहुत मिर्च-मसाला लगाना भी ठीक है कंटेंट के लिए।

06:31 PM, 24-Jun-2026

ट्रेंड फाॅलो करना सही है या खुद पर भरोसा करना?

राघव: आप अगर खुद पर भरोसा ही नहीं कर सकते तो ट्रेंड फाॅलो करने का भी कोई फायदा नहीं। तो खुद पर भरोसा रखना सबसे पहले जरूरी है। बाकी आप ट्रेंड फॉलो करिए और उसमें कुछ नया जोड़ते रहिए।

विज्ञापन
06:30 PM, 24-Jun-2026

सवाल- कंटेंट क्रिएटिंग में लोग बच्चों को घसीट रहे हैं, यह कितना सही है?

जवाब- शायद यह किसी को सही नहीं लगता है। लेकिन इंटरनेट की दुनिया में एक होड़ सी मची हुई है, नंबर्स की होड़ मची हुई है। दूसरों के बच्चे फेमस हो रहे हैं, हमारे बच्चे क्यों नहीं। इस सब से बच्चों को दूर रखना ही चाहिए।

06:23 PM, 24-Jun-2026

आपकी यात्रा को देखते हुए नए क्रिएटर्स को क्या कहना चाहेंगे?

प्रवीन: सबसे जरूरी है कि आप कंटेंट ऐसा लेकर आओ जो रिलेटेबल हो। यही सबसे जरूरी है। दूसरा आज कल वाइब बहुत जरूरी हो गई है। अगर वाइब नहीं मिल रही तो लोग नहीं रुकते। नए कंटेंट क्रिएटर्स से इतना कहूंगा कि आप ओरिजिनल रहिए और सिर्फ पैसे कमाने के लिए यह काम मत करिए। लोगों से फीडबैक भी लेते रहें। ऐसा ना हो कि आपका कंटेंट सिर्फ आपके लिए ही फनी है।

विज्ञापन
06:21 PM, 24-Jun-2026

आप लोगों का मूड बदल देते हैं। जब अपना मूड खराब होता है तो कैसे बेहतर बनाते हैं? 

 

जवाब प्रवीन: जब आप क्रिएटिव लोगाें से घिरे होते हैं तो आपका मूड कभी ऑफ ही नहीं होता। इस फील्ड में खुशमिजाज लोग ही मिलते हैं। हमारे अंदर एंटरटेनमेंट के लिए कीड़ा हमेशा से था। सोशल मीडिया हमारे लिए काफी कुछ नया लेकर आया। अब हम वीडियो बनाकर लोगों को एंटरटेन करते हैं।

06:15 PM, 24-Jun-2026

'सोशल मीडिया से स्टारडम' विषय पर चर्चा

आरजे राघव, आरजे प्रवीन, अंकुर अग्रवाल संवाद के मंच पर पहुंच गए हैं। सोशल मीडिया से स्टारडम विषय पर चर्चा होगी। 

06:11 PM, 24-Jun-2026

उत्तराखंड में चार नए मेडिकल कॉलेज: नड्डा

जेपी नड्डा ने कहा, उत्तराखंड की बात करूं तो एम्स ऋषिकेश ने हेल्थ सेक्टर में लीड है। बहुत जल्द ऊधमसिंह नगर में सेटेलाइट सेंटर आ जाएगा, जो लगभग 500 करोड़ की लागत से बन रहा है। क्रिटिकल केयर ब्लॉक में 124 करोड़ रुपये खर्च करके एम्स ऋषिकेश में स्थापित किया है। उसी तरह से अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़, हरिद्वार में चार नए मेडिकल कॉलेज एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके आगे इसे आगे बढ़ाया है।

05:58 PM, 24-Jun-2026

बहुत समय तक मेंटल हेल्थ इग्नोर हुई: नड्डा

हमने एक इनिशिएटिव लिया है, वह दो कारणों से है। एक तो बहुत समय तक मेंटल हेल्थ इग्नोर हुआ, अब कारण उसके कुछ भी हों हम किसी पर उसकी जवाबदेही डाले यह नहीं है। लेकिन हमें यह मालूम है कि मेंटल इलनेस को कोई व्यक्ति जाहिर नहीं करना चाहता और हमें यह भी मालूम है कि मेंटल इलनेस है इसको मरीज मानने से भी इनकार करता है। इसलिए कैसे इसे दायरे में ले सकें इसके लिए हमने टेलीमानस शुरू की। जहां फ्री टोल नंबर पर हम मेंटल इलनेस से प्रभावित लोगों के प्रश्नों का हम कंसल्टेशन दे रहे हैं।

05:53 PM, 24-Jun-2026

भारत नेतृत्व की क्षमता के साथ तीव्र गति से आगे बढ़ रहा: नड्डा

जेपी नड्डा ने कहा, इससे पहले राजनीति कैसी होती थी। इससे पहले हम जीतते थे सबके प्रयास से, लेकिन सरकार सीमित हो जाती थी एक जाति के साथ एक क्षेत्र के साथ। लोग कहते थे फलाने मुख्यमंत्री बन गए हैं तो अब सिर्फ उस क्षेत्र का विकास का होगा। सरकार सबकी होती थी लेकिन सीमित हो जाती थी एक परिवार के साथ। लेकिन अब राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। अब सरकार सबका साथ-सबका विकास के साथ काम कर रही है। अब भारत नेतृत्व की क्षमता के साथ तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। 

05:49 PM, 24-Jun-2026

हेल्थ पॉलिसी के ढांचे में किया परिवर्तन: नड्डा

जेपी नड्डा ने कहा, 2017 में हम लोगों ने हेल्थ की पॉलिसी के बेसिक ढांचे में परिवर्तन किया है। पहले हेल्थ का मतलब होता था कि बीमार पड़े और इलाज करो। हमारे डॉक्टर्स बैठें हैं उनको बुरा भी लगेगा। पहले सोच थी कि कुछ भी खाओ एंटीबायोटिक्स ले लो सब ठीक हो जाए। पहले जो सोच क्यूरेटिव की तरफ जाती थी आज धीरे-धीरे प्रिवेंटिव की तरह जा चुकी है।

05:43 PM, 24-Jun-2026

सेहत अच्छी होगी तो इकोनॉमिक डेवलपमेंट होगी: नड्डा

जेपी नड्डा ने कहा, सेहत अच्छी होगी तो इकोनॉमिक डेवलपमेंट होगी, क्यों प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। इसलिए स्वास्थ्य पर ध्यान देना इसकी बहुत आवश्यकता होती है। 

05:40 PM, 24-Jun-2026

सबके सामने एक कॉमन लक्ष्य है कि 2047 तक भारत विकसित हो: नड्डा

जेपी नड्डा ने कहा, सबके सामने एक कॉमन लक्ष्य है कि 2047 में विकसित भारत हो। हर एक आदमी का यह कॉमन गोल बन चुका है।

05:35 PM, 24-Jun-2026

आज से 12-13 साल पहले आमजन ने यह मान लिया था कि कुछ नहीं बदलने वाला: नड्डा

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, मैं सबके साथ एक चर्चा जरूर करता हूं, वह मैं आपके साथ भी करना चाहता हूं। मुझे लंबा समय हो गया छात्र जीवन से राजनीतिक क्षेत्र में काम करने तक का। साथ ही यहां मौजूद हर शख्स को अपने-अपने क्षेत्र में तीन से चार दशक का काम करने का अनुभव होगा। आज से 13 साल पहले, भारत का साधारण मानवीय इस बात से एडजस्ट कर चुका था कि कुछ नहीं बदलने वाला है। यह मान चुका था कि यह तो हमारी किस्मत ही लिखा था। हम कुछ नहीं बदल सकते। लेकिन पिछले 10-13 वर्षों में पॉलिटिकल थॉट प्रोसेस भी बदल गया। पॉलिटिकल थॉट प्रोसेस के माध्यम से बोले तो अब वी कैन एंड वी शैल डू इट।

05:23 PM, 24-Jun-2026

अमर उजाला ने समाज को सतत जागरूक किया: केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, अमर उजाला को बधाई देना चाहता हूं कि वह मात्र एक पब्लिकेशन नहीं, मात्र एक अखबार नहीं। वह समाज में होने वाली घटनाएं और उसका प्रभाव और क्या दिशा और दृष्टि होने चाहिए। इसके बारे में समाज को जागरूक करना, यह अमर उजाला ने सतत किया।

05:20 PM, 24-Jun-2026

संवाद के मंच पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा

अमर उजाला संवाद के मंच पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा पहुंच गए हैं। 'स्वस्थ भारत का संकल्प' विषय पर वह विचार रखेंगे।

05:15 PM, 24-Jun-2026

सवाल- पहाड़ खाली हो रहे हैं। 10 प्रतिशत से कम मैन्युफैक्चरिंग जॉब है। सिडकुल में जो लोग काम कर रहे हैं वह बिहार और बाकी राज्यों से आते हैं। उत्तराखंड को रोजगार का हब बनाना है तो वह कौन सा फैसला आप लेंगे। 

जवाब- राहुल सिंघल (सदस्य, भारतीय उद्योग परिसंघ- सीआईआई, उत्तराखंड) ने कहा कि कुछ इनसेंटिव पहाड़ के आदमी को पहाड़ में रोकने के लिए दिया जाए। उसके साथ बॉन्ड हो कि कम से कम 10 साल रहेंगे ही यहां। 

05:06 PM, 24-Jun-2026

'उत्तराखंडः निवेश और संभावनाएं' विषय पर कारोबारी जगत के विशेषज्ञ रख रहे विचार

विनय शंकर पांडेय (सचिव, उद्योग, उत्तराखंड सरकार): राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों और विजन पर अपना पक्ष रखेंगे।
हेमंत कोचर (उत्तराखंड हेड, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री): निवेशकों के नजरिए और राज्य में व्यापारिक सुगमता पर बात करेंगे।
राहुल सिंघल (सदस्य, भारतीय उद्योग परिसंघ- सीआईआई, उत्तराखंड): राज्य में कॉरपोरेट निवेश की स्थिति और एमएसएमई की चुनौतियों के समाधान पर अपने विचार साझा करेंगे।

05:05 PM, 24-Jun-2026

'उत्तराखंडः निवेश और संभावनाएं' विषय पर चर्चा

उत्तराखंड में निवेश के नए दरवाजे खोलने और आर्थिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से कारोबारी जगत के लिए एक विशेष पैनल डिस्कशन का आयोजन किया जा रहा है। 'उत्तराखंडः निवेश और संभावनाएं' विषय पर आधारित इस सत्र में राज्य के भीतर उद्योगों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।

05:00 PM, 24-Jun-2026

कास्टिंग डायरेक्टर से शिकायत होती है... कास्टिंग काउच और शोषण के आरोप लगते हैं।

शोषण हर इंडस्ट्री में होता है। जहां भी पावर है, वहां शोषण है। यह आज से नहीं है। हमसे पहले भी चलता आ रहा है। आपको यह समझना और सीखना है कि आपको शोषण करवाना है या नहीं। या आपको कोई लालच देकर रोल देना चाहता है तो क्या आप उसमें पड़ेंगे? अगर कोई शोषण कर रहा है तो शिकायत करिए। आप किसी के घर मत जाइए। कोई इंसान इतना बड़ा नहीं है कि आपको बैन कर देगा तो आपको काम नहीं मिलेगा। इंडस्ट्री में इतनी भी यूनिटी नहीं है कि एक बैन कर देगा तो आपको काम नहीं मिलेगा।

05:00 PM, 24-Jun-2026

सवाल- नेपोटिज्म एक ऐसा टॉपिक जिस पर काफी बहस होती है। आपकी क्या राय है?

जवाब- बिजनेसमैन के बेटे-बेटी बिजनेसमैन बनेंगे। यह उनके ऊपर है, वह उसे आगे बढ़ा पाते हैं कि नहीं। कई सारे बिजनेस इस चक्कर में बंद भी हो जाते हैं। नेपोटिज्म में भी वही चीज है। जब आप उस तरह के खानदान से फैमिली से आते हैं तो उनको अवसर तो खूब मिलते हैं। 

04:59 PM, 24-Jun-2026

क्या आपका रोल किसी ने कभी छीना है?

यह तो हर दिन होता है। पहचान के लोग तो आपका कोई न कोई हक तो छीनते हैं। मगर, इसे लेकर कड़वाहट पालना मन में उसकी जरूरत नहीं है। बहुत सारे और तरीके हैं, जिससे आप अपना टैलेंट दिखा सकते हैं।

04:58 PM, 24-Jun-2026

शिकायतें ये भी होती हैं कि कास्टिंग डायरेक्टर या तो खुद को कास्ट कर लेते हैं या पहचान के लोगों को मौका देते हैं?

अभिषेक: शायद इंडस्ट्री में मैं ही इकलौता हूं जो कास्टिंग के बाद एक्टिंग कर पाया है। मैं यह मानना चाहूंगा कि उसका कारण प्रतिभा है। सिर्फ मेरी पहुंच नहीं हैं। कोई भी डायरेक्टर सिर्फ पहचान के चक्कर में रोल नहीं देता। उनके पैसे लगे होते हैं। अगर ऐसे रोल मिल भी गया तो खराब एक्टिंग होती है और उसके बाद दूसरा रोल नहीं मिलेगा। आउटसाइडर को समझना पड़ेगा कि आपको हर रोल में खुद को साबित करना पड़ेगा। यह शिकायतें तो हमेशा रहेंगी। हिंदुस्तान ऐसा देश है जहां 90 प्रतिशत आबादी को लगता है कि वह क्रिकेट खेल सकते हैं और 90 फीसदी को लगता है कि वह एक्टिंग कर सकती है।

04:51 PM, 24-Jun-2026

कास्टिंग डायरेक्टर्स एक्टर्स को चुनकर डायरेक्टर्स को दिखाते हैं

बहुत से लोग छोटे शहरों से आते हैं, उनके लिए डायरेक्टर के ऑफिस तक जाना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में हम अपने ऑडिशन करते हैं। एक्टर्स को चुनकर डायरेक्टर्स को दिखाते हैं। अगर उनका परफॉर्मेंस अच्छा है तो आजकल आप ओटीटी पर देख रहे होंगे कि कई नए कलाकार आ रहे हैं। क्योंकि कास्टिंग डायरेक्टर उन तक पहुंचने की कोशिश करते रहते हैं।

04:51 PM, 24-Jun-2026

सवाल- कास्टिंग डायरेक्टर का क्या काम होता है। उसका काम क्या एक्टर को शॉर्टलिस्ट करना होता है।

जवाब- एक तरह की एचआर कंपनी है। यह लोग एक ब्रिज हैं जो बाहरी दुनिया और इंडस्ट्री की दुनिया के बीच में। जब भी मैं फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के लोगों से मिलता हूं तो वह लोग भी यही बोलते हैं।

04:45 PM, 24-Jun-2026

सवाल- आउटसाइडर के लिए कितना संघर्ष होता है?

जवाब- जैसा कि हम किताबों में पढ़ते थे कि भारत एक ग्रामीण प्रधान देश है। बहुत सारे लोग छोटे टाउन से आते हैं। मैं खुद भी। बड़े शहर तक की यात्रा हर किसी के लिए एक संघर्ष का समय होता है। मेरे पिता जी जब अपने संघर्ष की बात बताते हैं तो मुझे अपना संघर्ष कम लगता है। सेना में होने के नाते उन्होंने जो संघर्ष देखा, हमारा संघर्ष बहुत बेसिक है। आप सपना देखकर कुछ पाएंगे, ऐसा नहीं है। उस सपने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी। पूरी शिद्दत के साथ मेहनत करनी होगी। ऐसी इंडस्ट्री में, जहां पहले से ही बहुत जाने-माने लोग मौजूद हैं। यहां प्रतिस्पर्धा के साथ आगे बढ़ना।

04:41 PM, 24-Jun-2026

देहरादून को लेकर कोई खास याद?

जवाब- बन टिक्की। देहरादून की बन टिक्की काफी खास है। मेरे दोस्तों ने खिलाई थी। मेरे कई दोस्त यहां रहते हैं। मैं शूटिंग के लिए आया था। कई जगहों पर घूमा था। बचपन में माता-पिता के साथ भी आया था। करियर में जो सोचकर आया था, वह अभी बाकी है। बहुत बड़े सपने देख लिए थे। अभी और बढ़ने की जरूरत है। प्रक्रिया चल रही है। बढ़ रहा हूं।

04:39 PM, 24-Jun-2026

संवाद के मंच पर अभिनेता अभिषेक बनर्जी

अमर उजाला संवाद के मंच पर अभिनेता अभिषेक बनर्जी पहुंच गए हैं। 'नए दौर के सिनेमा' विषय पर उनसे चर्चा की जा रही है।

04:37 PM, 24-Jun-2026

सवाल- कश्मीर हमेशा से समस्या का कारण बना रहा। उरी कैंप पर हमला हुआ, उसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक वाले ऑपरेशन में आप थे। बहुत कुछ फिल्म में आया, ऐसा क्या था जो बाहर नहीं आया।

जवाब- मेरे 40 साल के कार्यक्रम में लगभग 11 साल कश्मीर में बिताए। मेजर से लेकर मेजर जनरल रैंक तक का समय मैंने कश्मीर में बिताया। उरी का सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी, उस समय मैं ब्रेगिडेयर था। उरी में जब आतंकी हमला हुआ था, उस समय कोर कमांडर जनरल दुआ थे। इसके बाद हम दोनों तत्काल हेलिकॉप्टर से उरी गए थे। इसके बाद सेना के तमाम अफसर आए थे। उस समय हमारे कमांडर, चीफ और कोर कमांडर थे। इस घटना को लेकर सबके मन में यही था कि यह हम भुला नहीं सकते, इसका बदला जरूर लेंगे। ऐसा जगह बदला लेंगे, जिससे उग्रवादियों के संगठन को नुकसान पहुंचे। कुछ तैयारियां हम पहले से कर रहे थे, सेना में हम खुद को हर परिस्थिति के लिए तैयार करते हैं। इस घटना के बाद उस तैयारी को और तेज कर दिया गया।

04:24 PM, 24-Jun-2026

उत्तराखंड से कैसे जुड़ाव है

जवाब- सेना के जितने भी अफसर है, उनमें से ज्यादातर की ट्रेनिंग देहरादून में होती है। देहरादून से ही मैं 9 जून 1984 को सेना के अफसर के रूप में कमीशन हुआ था। सबसे पहला संबंध उत्तराखंड से यही है। उसके बाद मैं कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन हुआ। 16 साल की उम्र में मैंने असम छोड़ दिया था। मैं कुमाऊनी जवानों के साथ बड़ा हुआ। सेना की सीख कुमाऊनी भाइयों से मिली। 

04:17 PM, 24-Jun-2026

सवाल- वह कौन सा पल था जब नदी के पार के सैनिक कैंप को देखा और आपने सेना में जाने का फैसला किया?

जवाब- संवाद में शामिल होने का अवसर देने के लिए धन्यवाद। मेरा जन्म असम के तमूलपुर नाम के कस्बे में हुआ था। मेरा पिता जी स्कूल के प्रधान शिक्षक थे। हम लोग स्कूल कैंपस में ही रहते थे। हमारे घर के पीछे नदी था। नदी के दूसरी तरफ आर्मी का कैंप था। वह अभी भी है। पिछली साल दोनों जगह मैं होकर आया था। स्कूल और नदी के बीच में काफी खुला क्षेत्र था। वहां पर आर्मी के लोग ट्रेनिंग के लिए आते थे। स्कूल में जब पढ़ाई शुरू की थी तो मैं आर्मी के लोगों को देखता था। हरा यूनिफॉर्म जो वह पहनते थे, वह मुझे पसंद आता था। मैंने अपनी मां से वैसी ड्रेस सिलवाने के लिए कहा था। हर समय मैं वही ड्रेस पहनकर रखता था।

04:09 PM, 24-Jun-2026

'राष्ट्र रक्षा की बात' विषय पर चर्चा

अमर उजाला मंच पर भारतीय सेना के मंच पर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता (सेवानिवृत्त) पहुंच गए हैं। 'राष्ट्र रक्षा की बात' विषय पर उनसे चर्चा होगी। 

03:46 PM, 24-Jun-2026

आजकल फुटबॉल ज्यादा देख रहे हैं लोग: कैफ

मोहम्मद कैफ ने कहा कि दो बातें हैं एक तो। एक तो लोग दिख रहे हैं और अपनी बॉडी पर काम कर रहे हैं, ये दिखता है। फुटबॉल का विश्व कप चल रहा है, वहां 90 मिनट भागना है। वहां अलग फिटनेस चाहिए होती है। क्रिकेट कौशल आधारित खेल है। लोग आजकल फुटबॉल ज्यादा देख रहे हैं। क्रिकेट ऐसा खेल है जहां दिखने से ज्यादा आपको यह पता होना चाहिए कि आप कितने फिट हैं।

03:45 PM, 24-Jun-2026

आईपीएल में अभी हमने देखा कि 200 कैच छूटे: आकाश चोपड़ा

आकाश चोपड़ा ने कहा कि कैफ आपकी फील्डिंग कमाल की थी। शुरुआत में तो आपका नाम फील्डर के तौर पर उछला था। लोग कहते थे कि क्या कमाल का फील्डर आया है। तब भारत में फील्डिंग का उतना फैशन नहीं था, लोग इतने पापुलर नहीं थे। आईपीएल में अभी हमने देखा कि 200 कैच छूटे। भारतीय टीम में भी रहता है कि आप सबसे बेहतर फील्डर बन सकते हैं। अगर आप आईपीएल के दृष्टिकोण से देखें तो क्या गलत हो रहा है? हर मैच में चार कैच छूट रहे हैं, ऐसा क्यों हो रहा है?

03:41 PM, 24-Jun-2026

'बच्चों के पास करने के लिए बहुत चीजें होती हैं'

आकाश चोपड़ा ने कहा कि एक और चीज जो बदली है वो ये कि बड़े शहरों में डिस्ट्रेक्शन बहुत है। बच्चों के पास करने के लिए बहुत चीजें होती हैं। साउथ मुंबई का बच्चा क्रिकेट नहीं खेलता, वो फुटबॉल देखता है। जो ठाणे में रहता है वो क्रिकेट खेलता है। ऐसा ही दिल्ली में भी होता है। छोटे शहरों में आग अभी भी है और बड़े शहरों में आग खत्म हो गई है।अब धूप में खड़े होने का मन उतना करता नहीं है। कम बच्चे खड़े होते हैं अब। गांव या छोटे शहरों में ये चीज ज्यादा है।

03:32 PM, 24-Jun-2026

खेल में करियर बनाना हुआ आसान: कैफ

पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने कहा कि आज के दौर में युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के खिलाड़ियों को अपने शुरुआती करियर में खेल से जुड़ी जानकारी, प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं हासिल करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदली हैं।

03:29 PM, 24-Jun-2026

'मेरे ख्याल से सबसे बड़ी बात है एक्सपोजर'

मोहम्मद कैफ ने कहा कि मेरे ख्याल से सबसे बड़ी बात है एक्सपोजर। आजकल आईपीएल आ गया है, घरेलू क्रिकेट में मुकाबले बढ़ गए हैं। काफी मौके मिलते हैं, मतलब आजकल तो बस ऐसा हो गया है कि आप बस अपने आप को तैयार कर लो। स्काउटिंग के लोग घूम रहे होते हैं जो छोटे-छोटे शहरों में जाते हैं जो ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोजते हैं। वैभव सूर्यवंशी का नाम आपने लिया तो उनके बारे में चर्चा हुई होगी। लोगों ने उनको खेलते हुए देखा है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। मैं अगर यूपी के लिए खेला रणजी, तो मैं भारत के लिए अंडर-19 विश्व कप खेलने के बाद मेरा नाम रणजी में आया। वहां मीडिया की बहुत भूमिका थी, श्रीकांत सर हमारे कोच थे। उन्होंने कहा कि मोहम्मद कैफ अच्छे खिलाड़ी हैं, ये युवा हैं। इनका भविष्य अच्छा है। उस बयान के बाद मुझे अंडर-19 विश्व कप खेलने के बाद मुझे रणजी में खेलने का मौका मिला। मैं भारत के लिए खेलने के बाद रणजी में आया। एक्सपोजर हो गया था, मीडिया लिखने लगी थी। वो उस वक्त सभी के साथ नहीं होता था। कुछ ही लोग थे जिनके साथ ऐसा होता था। अब क्या हो रहा है कि 15 साल का लड़का भी अगर गांव में अच्छा खेल रहा है ना तो वहां पर लोग देखने पहुंच रहे हैं। तुरंत खबर फैल जा रही है। लोगों ने आईपीएल में अपने स्काउट के लोग रखे हुए हैं कि जाकर देखो। आजकल मौके इसलिए मिल रहे हैं क्योंकि अपने आप को बेहतर करो और खुद पर फोकस करो, लोग हैं जो घर से निकालकर लेकर जाएंगे। हम यहां देहरादून में बैठे हैं और यहां भी फॉर्मूला समान ही है। देहरादून में भी जो बच्चे अच्छा खेल रहे हैं वो बेहतर करें लोग पहुंच जाएंगे और घर पर आकर लेकर जाएंगे कि बॉस आप हमारे लिए खेलो क्योंकि आप अच्छे खिलाड़ी हो।

03:23 PM, 24-Jun-2026

संवाद के मंच पर मोहम्मद कैफ और आकाश चोपड़ा

पिच की गपशप सत्र में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ और आकाश चोपड़ा भी संवाद के मंच पर मौजूद है। आकाश चोपड़ा ने कहा कि काफी अच्छा लग रहा है देहरादून आकर। मेरे दोस्त कैफ भी साथ में हैं। जब आपने खेलना शुरू किया था तो कुछ लोग ही होते थे जो छोटे शहरों से खेलने आते थे। अब कहानी बदल चुकी है तो क्या बदला है। पहले इतना मुश्किल क्यों था और अब इतना आसान कैसे हो गया है? हमारा कप्तान रांची से आया, उसने उसे विश्व के नक्शे पर डाला, एक बच्चा ताजपुर से आता है उसका नाम वैभव सूर्यवंशी होता है। एक गोपालगंज से आता है उसका नाम साकिब हुसैन होता है। अब सारे छोटे शहरों से आते हैं तो ऐसा क्या बदला?

02:38 PM, 24-Jun-2026

'एआई का किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल'

तेजस्वी घनशाला ने कहा कि एआई किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल में आ रहा है। कृषि आर्किटेक्ट प्रबंधन अध्ययन आदि क्षेत्रों में भी इन्हीं से जानकारी दी जा रही है। 

02:36 PM, 24-Jun-2026

'भविष्य की यूनिवर्सिटी एआई पर आधारित होगी'

तेजस्वी ने कहा कि भविष्य की यूनिवर्सिटी एआई पर आधारित होगी । एआई बेस्ट टीचर हो सकता है, बेस्ट मार्गदर्शक हो सकता है । बशर्ते उसे हम कैसे काम ले सकते हैं यह हमें खुद सोचना होगा। शिक्षकों के लिए एआई को अपनाना ज्यादा मुश्किल है। क्योंकि छात्र अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि उनका काम बहुत आसान हो रहा है।

02:33 PM, 24-Jun-2026

एआई पर डिपेंड रहेंगे तो दिमाग से सोचना बंद कर देंगे: ठाकुर

तृप्ता ठाकुर ने कहा कि एआई का सबसे बड़ा लाभ एक झटके में बहुत सारा कंटेंट मिलना और खतरा है डिपेंड रहेंगे तो दिमाग से सोचना बंद कर देंगे। 

02:30 PM, 24-Jun-2026

'बच्चों के पास स्मार्टफोन एक उम्र से पहले नहीं आना चाहिए'

शिक्षा, AI और तकनीकी सत्र में आज वीर माधो सिंह भंडारी, उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति तृप्ता ठाकुर, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के सीटीओ तेजस्वी घनशाला अपनी बात रख रहे हैं। तृप्ता ठाकुर बोलीं, "बच्चों के पास स्मार्टफोन एक उम्र से पहले नहीं आना चाहिए। यूके, यूरोप समेत बहुत सारे देशों ने 16 वर्ष की उम्र से पहले स्मार्टफोन के इस्तेमाल को सीमित किया है।" उन्होंने आगे कहा, "टीचर के द्वारा आप बहुत सारी चीजें समझते हैं। सबसे बड़ा चैलेंज टीचर्स के लिए हैं। टीचर्स अभी बिल्कल भी इसके लिए तैयार नहीं हैं। एआई के आने के बाद जो बदलाव
 

02:13 PM, 24-Jun-2026

'अमर उजाला ने पत्रकारिता को जिंदा रखा'

जगद्गुरु ने कहा कि अमर उजाला ने पत्रकारिता को जिंदा रखा और जिसमें गणेश शंकर विद्यार्थी और पराड़कर जैसी पत्रकारिता की झलक दिखती है। उन्होंने कहा अमर उजाला की यात्रा लगातार बढ़ती रही। 

02:11 PM, 24-Jun-2026

'कभी राम तो कभी कृष्ण बनकर भगवान स्वयं आए'

जगतगुरु ने कहा कि जब विश्व में कहीं समस्याएं आईं तो कहीं खुदा आ गए, कहीं ईसा आए, कहीं मूसा आ गए, भगवान के बेटे आए, लेकिन भारत भूमि वह है जहां जब भी समस्याएं आईं तो कभी राम तो कभी कृष्ण बनकर भगवान स्वयं आए।

01:58 PM, 24-Jun-2026

यह मंदिरों का देश है: महाराज

जगतगुरु गुरु स्वामी  स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि यह मंदिरों का देश है। अच्छी बात है मंदिर बन रहे हैं, मंदिर तो भव्य बन रहे हैं। प्रचार भी खूब हो रहा है। पत्रकारों का एक वर्ग जो है स्वर्णिम भारत भी दिखा रहा है। शरीर बहुत स्वस्थ्य हो, अंदर की सूक्ष्म चेतना चली जाए तो शरीर मृत हो जाता है। सबकुछ हो रहा है, लेकिन वही जो भारत की मूल आत्मा, प्राण, अध्यात्म है वो कहीं खोया हुआ है उसको ढूंढने की जरूरत है। जब तक वो नहीं मिलेगा तब तक भारत, भारत नहीं। 

01:54 PM, 24-Jun-2026

आज दुर्भाग्य है कि जो राजा है वो सोया हुआ है: महाराज

जगतगुरु गुरु स्वामी  स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि राजा है इस देश की प्रजा। जो राजनेता हैं वो उनके प्रतिनिधि हैं। आज दुर्भाग्य है कि जो राजा है वो सोया हुआ है(यानि प्रजा)। जो सेवक है वो अपने आपको राजा समझे हुए है। यह मैं किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं कह रहा हूं। सारे राजनेताओं के लिए कह रहा हूं। सारे राजनैतिक दलों के लिए कह रहा हूं। 

01:46 PM, 24-Jun-2026

'संत होने का मतलब बड़े आश्रम और बड़ी गाड़ियां होना नहीं है'

अमर उजाला संवाद के मंच पर जगतगुरु गुरु स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जिसके पास कुछ नहीं है वही संत है.. संत होने का मतलब बड़े आश्रम और बड़ी गाड़ियां होना नहीं है। 

01:45 PM, 24-Jun-2026

कार्तिकेय एन शर्मा: जमीन की कमी के कारण राजस्थान से सोलर पावर खरीदने का सुझाव

सनश्योर एनर्जी के संस्थापक कार्तिकेय एन शर्मा ने उत्तराखंड को एक 'पावर सरप्लस' राज्य बताते हुए यहां ऊर्जा उत्पादन की बड़ी संभावनाओं का जिक्र किया। राज्य में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर पर फोकस को उन्होंने एक बेहतरीन कदम बताया, लेकिन भौगोलिक सीमाओं के कारण सुझाव दिया कि जमीन की कमी से निपटने के लिए उत्तराखंड को राजस्थान से सोलर पावर खरीदनी चाहिए। औद्योगिक बिजली की बढ़ती दरों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पांच साल पहले जो पावर सबसे सस्ती थी, वह अब 9 रुपये प्रति यूनिट के उच्च स्तर तक पहुंच गई है। उन्होंने कोयले पर निर्भरता कम करने वाली नीतियों की वकालत करते हुए बताया कि बैटरी स्टोरेज अब घरों में भी संभव है और उनकी कंपनी शाम के समय भी किफायती दरों (6.65) पर बिजली उपलब्ध करा रही है।

01:45 PM, 24-Jun-2026

संजय शर्मा: बड़े प्रोजेक्ट्स की जगह 'स्मॉल हाइड्रो स्कीम' से मिलेगी रफ्तार

सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के निदेशक संजय शर्मा ने राज्य में जलविद्युत (हाइड्रो पावर) की अपार संभावनाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बड़े प्रोजेक्ट्स लगाने के बजाय सरकार ने 'स्मॉल हाइड्रो स्कीम' लॉन्च की है, जिसके तहत नदियों के बहाव (रन ऑफ द रिवर) पर आधारित छोटी परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं। एसईसीआई की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीमित मानव संसाधन के बावजूद यह पीएसयू पिछले 10-14 वर्षों में 50-60 गुना बढ़कर 36-37 हजार (मेगावाट) ऊर्जा जनरेट कर रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। संजय शर्मा ने सुझाव दिया कि हम ब्राजील के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों से सीख लेकर बड़े शहरों की नगर पालिकाओं का आर्थिक बोझ कम कर सकते हैं।

01:37 PM, 24-Jun-2026

आर. मीनाक्षी सुंदरम: 'डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर एनर्जी' और 'एनर्जी मिक्स' पर सरकार का जोर

अमर उजाला संवाद के 'सतत विकास की नई राह' सत्र में राज्य की ऊर्जा नीतियों और रिन्यूएबल इकॉनमी पर अहम चर्चा जारी है। उत्तराखंड सरकार के ऊर्जा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि राज्य ने सोलर एनर्जी पॉलिसी के तहत 1000 मेगावाट का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात और राजस्थान की तरह उत्तराखंड में बंजर जमीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए सरकार का मुख्य फोकस 'डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर एनर्जी' पर है, जिसके लिए पुरानी गाइडलाइंस को आसान बनाकर फिर से लॉन्च किया गया है। पीक डिमांड के समय सौर ऊर्जा का उपलब्ध न होना और महंगी बैटरी स्टोरेज एक बड़ी चुनौती है, जिसका समाधान खोजने के लिए रिसर्च जारी है। मीनाक्षी सुंदरम ने 2070 के 'नेट-जीरो' लक्ष्य के लिए सोलर एनर्जी को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि हाइड्रो पावर और कार्बन क्रेडिट राज्य के लिए कमाई का नया जरिया बन सकते हैं और बेस व पीक लोड को संतुलित करने के लिए 'एनर्जी मिक्स' की सख्त जरूरत है।

01:26 PM, 24-Jun-2026

हरिद्वार में चार महीने का कुंभ होता है: मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि हरिद्वार में चार महीने का कुंभ होता है। बाकि तीन जगह जो कुंभ होता है वो एक से डेढ़ महीने का होता है। इन चार महीने में हमें 20 से 25 लाख की आबादी की व्यवस्थान करनी होती है। अमृत स्नान के दिन यह संख्या डेढ़ से दो करोड़ हो जाती है। इन सबकी व्यवस्था को लक्ष्य  रखकर हम तैयारी करते हैं।

01:23 PM, 24-Jun-2026

'कुंभ शाश्वत काल और सनातन काल से चला आ रहा है'

उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि सर्वप्रथम तो पूरे अमर उजाला को बधाई देना चाहता हूं , इस तरह के संवाद को आयोजित करने के लिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में 2027 में जनवरी से अप्रैल के बीच में कुंभ का आयोजन होना है। मैं सिर्फ ये बताना चाहूंगा कि कुंभ है क्या। कुंभ के बारे में सब सामान तौर पर हम जानते हैं। चार जगह कुंभ होता है। कुंभ क्या है और किसको कुंभ कहते हैं तो मृत्यु से अमृत तक का जो पराक्रम है वो कुंभ होता है। बुराई से अच्छाई की ओर, पाप से पुण्य की ओर। ये जो पराक्रम है ये वास्तव में कुंभ होता है। कुंभ का जो आयोजन है ये शाश्वत काल और सनातन काल से चला आ रहा है। इसमें सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ये संगम है। इसका समागम होता है कुंभ के दौरान। 

01:02 PM, 24-Jun-2026

'ये चार धाम बिल्कुल अलग हैं'

श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कहा कि 1939 में यह मंदिर समिति बनी थी, ब्रिटिश काल के समय पर। दो बड़े अधिष्ठान हमारे श्रीबदरीनाथ और केदारनाथ धाम हैं इसके अधीनस्थ। ये चारों धाम हैं, ये सनातन धर्म के प्राण वायु हैं। ये हमारे आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं। इस बार सारे रिकॉर्ड टूट गए। 19 अप्रैल को जहां मां गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुले थे। 22 अप्रैल को बाबा केदार के कपाट खुले। 23 में भगवान बदरीनाथ जी के कपाट खुले। एक बहुत बड़ी चुनौती है। बहुत सारे लोग, बहुत सारे तीर्थयात्री आते हैं, वो धामों से तुलना  करते हैं। मैं आपको बताना चाहूंगा चाहे जितने भी धाम हों, उन सब में ये चार धाम बिल्कुल अलग हैं। इनकी तुलना किसी भी धाम से नहीं की जा सकती है। यहां की व्यवस्था, भौगोलिक परिस्थितियां हैं, प्राकृतिक चुनौतियां हैं उन सबसे से सामना करते हुए भी हमारी सरकार, हमारा प्रशासन व्यवस्था करता है। उन्होंने कहा हर छह महीने बाद वहां पर दोबारा से सारी व्यवस्था को बनाना पड़ता है। इन दो महीने के अंदर 26 लाख श्रद्धालु बदरीनाथ और केदारनाथ में आए हैं। चारों धामों में 40 लाख लोगों ने दर्शन किए हैं। 50 लाख लोगों ने पंजीकरण किया है। यात्रा को चले हुए सिर्फ दो माह हुए हैं। 

12:53 PM, 24-Jun-2026

'एक देवभूमि उत्तराखंड है, एक हिमाचल भी है'

प्रेम गिरि जी महाराज, जूना अखाड़ा ने हरिद्वार कुंभ पर कहा कि आज उत्तराखंड की पावन धरती पर ऋषि मुनि महर्षियों का देवस्थान। देवभूमि उत्तराखंड को इसलिए कहते हैं, आपने सुना होगा कि हमारे महादेव की 12 ज्योतिर्लिंग हैं और 12 ज्योतिर्लिंग में उत्तराखंड में केदारनाथ के रूप में विराजमान रहते हैं। इस उत्तराखंड भूमि को भगवान शिव का निवास स्थान मानते हैं। इसलिए जहां देवों के देव महादेव हों, उनका क्षेत्र हो, जिसमें साधु-संन्यासी तपस्या कर रहे हों, तो आप लोग बताइए कि उसका नाम क्या हो। देवभूमि कहा जाएगा। एक देवभूमि उत्तराखंड है, देवश्रीदेवभूमि हिमाचल भी है। हिमाचल में मां पार्वती का वास है। जहां शिव का वास वो देवभूमि। जहां मां भगवती का वास हो वो भी देवभूमि भारत में कही जाती है। 

12:45 PM, 24-Jun-2026

'आपने अभी प्रयागराज का कुंभ देखा, वहां 70 करोड़ श्रद्धालु आए'

कुंभ की तैयरियों को लेकर नितिन गौतम ने कहा कि मां गंगा को प्रणाम। मां गंगा की यह पावन धरा देवभूमि, हरिद्वार कुंभ की चर्चा के लिए आपने आमंत्रित किया, आपका हार्दिक आभार। हमारी जो अभी कुंभ जो कि विश्व की एक अनुपम धरोहर है, उसके लिए हम पूरे विश्व के सनातियों को हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड पर आमंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री धामी ने, जो उनको लगता था 2021 में जो कुंभ हुआ, कोरोना की वजह हमारे सनातनी वहां पहुंच नहीं पाए। सीएम धामी ने इस अर्द्धकुंभ को दिव्य, भव्य करने की जो योजना बनाई है, निश्चित रूप से उनकी इस आस्था, इस योजना और सनात के प्रति प्रेम। जब करोड़ों सनाती बिना किसी निमंत्रण के बिना किसी बुलावे के हर की पौड़ी में गंगा स्नान के लिए आते हैं, तो मुझे लगता है कि वह उनकी भाव है। आपने अभी प्रयागराज का कुंभ देखा, वहां 70 करोड़ श्रद्धालु आए। 

12:42 PM, 24-Jun-2026

संवाद के मंच पर कुंभ 2027 पर चर्चा जारी

आस्था का संगम कुंभ 2027 सत्र का शुभारंभ हो गया है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन मंच पर चर्चा कर रहे हैं। उनके साथ में हेमंत द्विवेदी वर्तमान में श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के चेयरमैन, नितिन गौतम, अध्यक्ष, श्रीगंगा सभा मैनेजमेंट कमेटी, हर की पैड़ी भी इस चर्चा में शामिल हुए हैं। 


 

12:33 PM, 24-Jun-2026

'देहरादून में भी इस नाटक को कर चुका हूं'

आपका 'मसाज' नाटक है। दो दशक से अधिक वक्त से चला आ रहा है। क्या बात है इस प्ले में कि ये अब तक प्रासंगिक है। आप शो करते हैं तो हॉल भर जाते हैं? आप इसमें 20 से ज्यादा किरदार अदा करते हैं।

राकेश बेदी: वह नाटक हिंदुस्तान के या कहें कि दुनिया के शानदार नाटककार विजय तेंदुलकर का लिखा हुआ है। वह वन एक्टर प्ले है, जिसे मोनोलॉग कहते हैं। उसका असर कैसा होता है, यह तो आपको देखकर ही पता चलेगा। देहरादून में भी इस नाटक को कर चुका हूं। इस नाटकर को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। पहले लोग सोचते हैं कि अकेला कैसे बांध कर रखेगा? खत्म होते-होते समय देखकर कहते हैं कि अरे बाप रे दो घंटे निकल गए।

12:28 PM, 24-Jun-2026

कितना मुश्किल होता है इन चीजों को छिपाकर रखना?

राकेश बेदी ने कहा कि शुरू में बहुत तकलीफ हुई। आदित्य धर ने बहुत रिक्वेस्ट की थी कि राकेश जी प्लीज किसी को मत बताना। फिर ये भी है कि बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। इसलिए मैंने छिपाकर रखा।

अर्जुन रामपाल आपसे कहते हैं कि सर आप तो सबको खा गए। ऐसे कॉम्प्लीमेंट सुनकर कुछ फील आता है?
राकेश बेदी: नहीं! ऐसा फील आ जाएगा तो एक शेर है:
शोर नदी का नहीं, आबशार का है
यहां से जो भी सफर है उतार का है
अगर कोई तुमसे ये कहे कि बच्चा है तू मेरा
उससे बचकर रहो, वो आदमी बेकार का है।

उन्होंने जो कॉम्प्लीमेंट दिया था, वह एक तारीफ थी। काम अच्छा है। अब उस पर मेरा दिमाग खराब हो जाए तो बेकार है।

12:17 PM, 24-Jun-2026

'एक दिन मेरी जिंदगी में ऐसा आया कि काम नहीं था और पैसे भी नहीं थे'

आज की पीढ़ी बहुत जल्दी डिप्रेशन में चली जाती है। नौकरी में किसी ने कुछ कह दिया, तनाव में चले गए। आप अपनी जिंदगी का वो किस्सा साझा करिए, जब लगा हो कि छोड़ दूं मगर हिम्मत नहीं हारी?

अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि सबकी जिंदगी में ऐसा दिन आता है। मैंने यह बात कम मंचों पर बोली है। एक दिन मेरी जिंदगी में ऐसा आया कि काम नहीं था और पैसे भी नहीं थे। मैंने लेकिन एक बात तय की थी कि अपनी मजबूरियां परिवार तक नहीं जाने दूंगा। मेरी मां घबरा जाती कि मेरा बेटा रात को भूखा सोया। वापस बुला लेगी घर। मुझे वापस नहीं जाना। ऐसा वक्त आया कि बैंक भी खाली। घर भी खाली। सिर्फ 50 पैसे थे। तब 50 पैसे कि छह केले आते थे। मैंने सोचा कि सबसे पहले तो यह तय करूं कि जरूरी क्या है? आज की भूख या करियर? एक शेर था मुझे बहुत अच्छा लगता था

माना कि लौटकर आना है नामुमकिन
घर पलटा बियाहब से बहारें साथ लाऊंगा।

मैंने छह केले खाए और सो गया कि कल का कल देखेंगे।

12:06 PM, 24-Jun-2026

'श्रीमान श्रीमती अपने आप में कामयाब कार्यक्रम था'

अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि जब मैं कुछ भी नहीं था। तब यहां से गुजर रहा था। कुछ लोग आए और मेरा ऑटोग्राफ लेना शुरू कर दिया। फिर पता चला कि ये है जिंदगी बहुत बड़ा हिट हो गया है। कई फिल्में आईं। श्रीमान श्रीमती अपने आप में कामयाब कार्यक्रम था। मगर, धुरंधर आते-आते जो रीच है वह करोड़ों तक जाने लगी है। फिल्म बहुत बड़ी हिट है। कह नहीं सकते कि यह हिट है, सुपरहिट है या सुपर-डुपर हिट है। लोगों के मन से उतर नहीं रही। कल एयरपोर्ट पर एक शख्स मिले वो बोले कि उन्होंने 13 बार फिल्म देख ली है।

 

12:02 PM, 24-Jun-2026

उत्तराखंड से कोई यादें?

अमर उजाला संवाद के मंच पर अभिनेता राकेश बेदी से चर्चा जारी है। उन्होंने उत्तराखंड से कोई यादों के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि मैंने अपना बचपन बहुत देहरादून में बिताया है। मेरी दादी के साइड के बहुत लोग थे, तो हर साल आता था। मेरे दादाजी ने भी यहां अपना बिजनेस शुरू किया था। मैं हर साल गर्मियों में यहां आता था। लीची के बाग होते थे तो लीची खाते थे, तब तक जब तक कि मालिक आकर डंडे मारकर हमें नहीं भगाता था।

12:01 PM, 24-Jun-2026

चारधाम यात्रा को लेकर आपकी क्या तैयारी है? 

चारधाम यात्रा एक सामान्य यात्रा नहीं है। यह बहुत ही आस्था और श्रद्धा की यात्रा है। मैं हमेशा से एक बात कहता हूं कि चारधाम यात्रा आज तो हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तरह से रोडे बन गई हैं। केदारनाथ का नवनिर्माण हो गया। बद्रीनाथ के लिए प्लान बन गया। एक समय ये यात्राएं काफी कठिन हुआ करती थीं, आज यात्रा का स्वरूप बदल गया है। ऐसे में कई समस्याएं भी हो गई है, ज्यादा लोगों का आना, मार्ग में परेशानी हो जाना। पहले क्या होता था इन यात्राओं की तैयारी की समीक्षा यात्रा शुरू होने के पहले होती थी। हम लोगों ने एक नई संस्कृति शुरू की है कि जैसे ही 2025 की यात्रा समाप्त हुई हमने 2026 की यात्रा की तैयारी शुरू कर दी और उसका परिणाम भी सामने आया । छोटी मोटी बातों को छोड़ दिया जाए तो इस बार यात्रा ने रिकॉर्ड कायम किया है। मतलब अभी तक 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा अबतक 40 लाख लोगों ने कर ली है। हेमकुंड साहब की यात्रा 1 लाख 25 हजार पहुंच गई जो पिछले पूरे सालभर से 20 से 25 हजार ज्यादा है। सीमांत क्षेत्र आदि कैलाश जहां पूर वर्षभर में 400 से 500 लोग पहुंचते थे वहां अभी तक 45000 लोग पहुंच चुके हैं और अभी तो यात्रा आधी भी नहीं हुई है। इसी प्रकार शीतकाल में लोगों लगता था कि कपाट बंद हो गए है देव लोगों की मान्यता है उनके कपाट बंद हो जाते हैं लेकिन उनके गद्दी स्थलों के लिए श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लगातार उपलब्धता उपलब्ध कराई गई है।

सवाल: मुख्यमंत्री बनने पर बढ़ती मजारों पर नकेल, 10 हजार एकड़ भूमि पर कब्जा मुक्त, लव जिहाद,लैंड जिहाद, थूक जिहाद ताकि बनी रहे देवभूमि की पवित्रता। ये पुष्कर सिंह धामी जी कहां छुपे हुए थे। आपको इन विषयों पर इतने अग्रेसिव होने की आवश्यकता क्यों पड़ी? 

आपको लगता है मैं अग्रेसिव हूं। जब उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में मुझे जिम्मेदारी मिली है तो देव भूमि का मूल स्वरूप बना न रहे, यहां देवत्व कायम रहे।  हम कहीं भी जाते हैं तो कहते हैं कि हम देवभूमि उत्तराखंड से आए हैं या देवभूमि उत्तराखंड से हमारा नाम जुड़ा है तो सामने वाले जो भाव बदल जाते हैं। क्योंकि लोग मानते हैं भगवान के सबसे नजदीक का स्थान देवभूमि है। तो क्या देवभूमि की आस्था, श्रद्धा कम होनी चाहिए यहां का देवत्व कम होना चाहिए। यहां का जो मूल अस्तित्व है उसको कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। कल का उत्तराखंड कैसा होगा यह हमारी जिम्मेदारी है और मुझे लगता है उतराखंड के सारे लोग बल्कि पूरे देश के लिए ये सोचते हैं कि देवभूमि का स्वरूप बना रहना चाहिए। हमारी भावी पीढ़ी को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं मिलना चाहिए। यह अवैध कब्जे नहीं मिलने चाहिए, अवैध अतिक्रमण नहीं मिलना चाहिए। किसी को टारगेट करने जैसा इसमें कुछ भी नहीं है। अवैध कब्जे का मतलब अवैध कब्जा वो चाहे किसी का भी हो। हमने वोटर लिस्ट देखकर नहीं, हमारे राजस्व के अभिलेखों को देखकर उन पर कार्रवाई की है। मैं कहना चाहता हूं और मैं बार बार कह रहा हूं, मेरे भी दो बेटे हैं  और मैं जब उनको देखता हूं तो मैं सोचता हूं कि जैसे मेरे दो बेटे हैं वैसे ही मेरी देवभूमि के सभी बच्चे हैं। मैं मानता हूं कि मेरे देवभूमि के सभी बच्चों को सुरक्षित उत्तराखंड मिलना चाहिए।


यूसीसी लाने वाला देश का पहला राज्य उत्तरखंड बना, इसके पीछे क्या प्रेरणा थी? 

यूसीसी एक श्रेष्ठ भारत की कल्पना को साकार करने की शुरुआत है। यह हमारी जो विचारधारा है उस विचारधारा की तीन चार प्रमुख अवधारणाएं थी कि उनको धरातल पर उतारना है। उनमें से एक यूसीसी था। हमने 2022 के चुनाव में उत्तराखंड की जनता को वचन दिया था कि हमारी सरकार बनेगी तो हम यूसीसी को लागू करेंगे। उस समय लोग कहते थे कि कैसे लागू होगा ये तो बस घोषणा में बोल दिया है। हमने जो वचन दिया था उस वचन को हमने हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में धरातल पर उतारा और आज यूसीसी उत्तराखंड में लागू हो गया और लागू होने के बाद पूरे देश में लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है। 
जिस दिन यूसीसी का ड्राफ्ट हम बना रहे थे, जिस दिन हमने विधेयक प्रस्तुत किया था उस दिन हमने कहा था कि ये यूसीसी की जो गंगा है वो मां गंगा की तरह आने वाले समय में पूरे देश की सभी  राज्यों को लाभ देगी।

12:00 PM, 24-Jun-2026

'कोई पेपर लीक का मामला नहीं आया है'

नकल माफिया पर बोलते हुए सीएम धामी ने कहा, हमारे यहां पिछले चार वर्षों में एक भी नकल का मामला सामने नहीं आया है। कोई पेपर लीक का मामला नहीं आया है। पिछले चार वर्षों में 33 हजार नियुक्तियां हमारे राज्य के युवाओं को मिली हैं। बिना नकल के यह सब हुआ है। हमारे यहां देश का सबसे सख्त नकल का कानून है। 100 से ज्यादा नकल माफियाओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजने का काम किया।'

11:47 AM, 24-Jun-2026

'किसी भी सरकार के लिए किसी भी प्रशासन के लिए आपदा एक ऐसा विषय होता है'

सीएम धामी ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए किसी भी प्रशासन के लिए आपदा एक ऐसा विषय होता है। आपदा आती चाहे जैसे भी हो और इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं होता है लेकिन उस समय जो लोग सरकार में है, प्रशासन में हैं या जिम्मेदारी के लिए चुने गए हैं। कई बार उन पर गुस्सा भी निकलता है, लेकिन कई बार इस घड़ी में लोगों ने यह भी देखा कि किस तरह सभी ने मिलकर काम किया।

11:45 AM, 24-Jun-2026

'वहां पर कई जगहों पर बसावट भी आ गई है'

सीएम धामी ने कहा कि अभी जो पिछले वर्ष की आपदाएं आई हैं। इसको लेकर भारत सरकार के सामने मैंने अपनी बात रखी थी कि ये अलग प्रकार की आपदाएं हैं। ऊपर कहीं पहाड़ों में किसी जगह बादल फटता है और अचानक से बड़ी भीषड़ा मात्रा में सैलाब नीचे आ जाता है और उसमें कुछ ही सबकुछ नष्ट हो जाता है। यह एक शोध का विषय है और हमने भारत सरकार के सामने भी इसे रखा है। जो पुरानी समय में नदी नाले होते तो उन्होंने अपना मार्ग भी बदला है और वहां पर कई जगहों पर बसावट भी आ गई है और कुछ समय वो नदी नाले अपने पुराने मार्ग पर वापस भी आ गए। इन चीजों का ध्यान रखते हुए। राज्य सरकार की ओर से जो करना है और आपदा के लिए तत्काल राहत पहुंचाने और क्विक सिस्टम जो है उन सभी को हम एक्टिवेट कर रहे हैं। 

11:33 AM, 24-Jun-2026

'सिलक्यारा टनल का रेस्क्यू 17 दिन चला था'

सीएम धामी ने कहा कि अब हमारा विकास का मॉडल आगामी 25 से 50 वर्षों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। सीएम धामी ने कहा, 'सिलक्यारा टनल का रेस्क्यू 17 दिन चला था। उस रेस्क्यू मॉडल को ब्रिक्स सम्मेलन में भी उदाहरण के रूप में पेश किया गया। आपदा की घड़ी में सबने मिलकर काम किया। इसे सब ने सराहा भी।' चारधाम यात्रा को लेकर सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा एक समय बहुत कठिन यात्रा हुआ करती थी। आज यात्रा का स्वरूप काफी बदल गया है, लेकिन नई चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। किसी यात्री को कोई परेशानी नहीं हो, उसके लिए सरकार एक यात्रा खत्म होते ही अगले साल की यात्रा की तैयारी शुरू कर देती है।

सीएम ने कहा, 'पहले के समय होता था कि जब यात्रा शुरू होने वाली होने वाली होती थी तब उसकी समीक्षा होती थी, यात्रा की तैयारियां होती थी। हमने एक नई संस्कृति शुरू की। जैसे ही 2025 की यात्रा समाप्त हुई, 2026 की यात्रा की हमने तैयारी शुरू कर दी। उसका परिणाम भी सामने आया। इस वर्ष यात्रा ने रिकॉर्ड कायम किया है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा। दो महीने कुछ दिन में 40 लाख यात्री पहुंचे। हेमकुंड साहिब भी 1 लाख 25 हजार हमारी यात्रा पहुंच गई। जो पिछले पूरे साल से 20 से 25 हजार से ज्यादा है। आदि कैलाश, जहां पूरे वर्ष भर में 400 से 500 लोग पहुंचते थे। इस वर्ष वहां भी 45 हजार के लगभग लोग पहुंच चुके हैं, अभी तो यात्रा आधी भी नहीं हुई है।'

11:31 AM, 24-Jun-2026

राज्य के अंदर भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी कठिन: सीएम

सीएम ने आगे कहा, 'हमने उत्तराखंड में जीईपी (ग्रॉस एनवायरमेंट प्रोडक्ट) सबसे पहले लागू किया। मतलब हम कितना विकास के लिए कितनी चीजों को किस प्रकार से समन्वय स्थापित करते हैं। इकोलॉजी और इकोनॉमी और साथ में हमने टेक्नॉलॉजी को भी हमने जोड़ा है। तीनों का समन्वय करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। क्योंकि राज्य के अंदर भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी कठिन हैं। कभी अत्यधिक बरसात होती है, भूस्खलन होता है, हिमस्खलन होता है। अत्यधिक जलभराव हो जाता है। उन सबका सामना करना पड़ा है। 2025 का वर्ष हम लोगों को लिए कष्टकारी रहा है।'

11:15 AM, 24-Jun-2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चर्चा

संवाद के अगले सत्र 'कल, आज और कल' सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला को मैं बधाई देता हूं कि इस प्रकार के कार्यक्रम वो आयोजित करते हैं। मैं बहुत सामान्य परिवार में पैदा हुआ। लेकिन बचपन से मुझे कक्षा पांच और छह के बाद मुझे अखबार पढ़ने का एक शौक जैसा हो गया। मेरा गांव नगला तराई है खटीमा में बिल्कुल शरादा नदी के पास। वहां गर्मियों में स्कूल से आते ही बस्ता फेंकते थे और छह-छह घंटे शारदाजी में गोते लगाते थे। जैसे ही शाम होती थी तो हम अखबार पढ़ने के लिए चाय की दुकान पर जाते थे। लेकिन अखबार उनको मिलता था जो लोग उस चाय की दुकान पर चाय पीते थे या फिर समसोसा खाते थे। एक ही अखबार आता था। शाम तक उसे सैकड़ों लोग पढ़ते थे और अमर उजाला ही आता था। जिन लोगों ने आभाव में अखबार पढ़ा वो सब जानते थे कि पहले अखबार के जितने भी पेज होते थे वो आपस में बांट दिए जाते थे। एक एक करके। उस समय मैं अमर उजाला के अलावा किसी भी अखबार को नहीं जानता था। अमर उजाला के अब इस कार्यक्रम में आना और फिर आप लोगों से संवाद करना और फिर ये हरे की बात करना सच में बड़ा अद्भुत है। हमारी जो थीम है और प्रधानमंत्री मोदी जी की भी 'विरासत और विकास' दोनों साथ-साथ बढ़ें, इसलिए हमने उत्तराखंड में जीईपी (ग्रोस इनवायरमेंट प्रोडक्ट) लागू किया। 

11:09 AM, 24-Jun-2026

'उत्तराखंड और अमर उजाला का रिश्ता बहुत पुराना है'

अमर उजाला के संपादक डॉक्टर इंदुशेखर पंचोली ने कहा कि उत्तराखंड और अमर उजाला का रिश्ता बहुत पुराना है उत्तराखंड के जन्म से। इसे हिंदी में हम गर्भनाल का संबंध कहते हैं। जब इस प्रदेश के वासियों ने अपने राज्य का सपना देखा, उसके लिए संघर्ष की शुरुआत की थी। अमर उजाला उनके साथ खड़ा था। स्थानीय निवासियों को जहां जरूरत हुई, अमर उजाला को हर दम साथ पाया। इस राज्य के हर दर्द और पीड़ा को अमर उजाला ने अपना दर्द समझा। इसी तरह इसकी हर खुशी अमर उजाला की खुशी होती है। उन्होंने  कहा कि राज्य की विकासधारा में एक जागरूक समाचार पत्र होने के नाते अमर उजाला ने हमेशा अपनी जागरूकता का निर्वहन किया है। आप सभी के प्यार और स्नेह से ही  78 साल पूरे कर लिए हैं। आगे भी हमारे प्रयास जारी रहेंगे। आज का आयोजन निरंतरता में चौथा संवाद है। अमर उजाला ने सच और सनसनी की होड़ में हमेशा सच को चुना है। कीमत और मूल्य की दौड़ में कीमत आधारित पत्रकारिता को अहमियत दी है। हमारा यकीन समस्या के समाधान में ज्यादा रहता है और जब समाज और सरकार में सेतु की भूमिका निभाने की बात हो तो तब हम आगे खड़े नजर आते हैं।

आगे कहा कि समय के साथ नये बदलाव के साथ कदम ताल तो करते हैं। लेकिन ईमानदारी से कोई समझौता नहीं करते हैं। यही मूल्य आपके विश्वास की ढाल बने हैं। अमर उजाला यह भी मानता है कि किसी भी प्रदेश की विकास यात्रा ऐसी हो जिसमें पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन हो। प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा इस्तेमाल हो। जिसमें वर्तमान के संसाधनों की आवश्यकता पूरी हो और आने वाली पीढ़ी के लिए संसाधन बन रहें। इसलिए इस संवाद का फोकस थीम पर रखा गया है। हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि हम इस सदी को कैसे स्वर्णिम बना सकते हैं। इसके लिए सक्रिय हों। आइए हम सब मिलकर बढ़ें स्वर्णिम शताब्दी की ओर...

11:04 AM, 24-Jun-2026

प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने किया सीएम धामी का स्वागत

अमर उजाला संवाद उत्तराखंड कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई। मंच पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पहुंच गए हैं। अमर उजाला के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्वागत किया।

11:01 AM, 24-Jun-2026

'जीवन की हर चीज को केवल धन के रूप में नहीं देखना चाहिए'

देवी चित्रलेखा ने कहा कि कमाई करना जरूरी है, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि समाज से जो कुछ हमें मिला है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना भी उतना ही आवश्यक है। जीवन की हर चीज को केवल धन के रूप में नहीं देखना चाहिए। इस संसार में दान के कई रूप हैं, जैसे कन्यादान, अन्नदान, रक्तदान और सेवा।

10:59 AM, 24-Jun-2026

'जीवन के अनमोल रिश्तों और अपनों के लिए समय ही नहीं बचता'

उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास सबसे बड़ी पूंजी हमारा शरीर और यह मानव जीवन है, इसलिए इसकी महत्ता को समझना जरूरी है। आज के समय में लोग धन कमाने की दौड़ में इस तरह उलझ गए हैं कि जीवन के अनमोल रिश्तों और अपनों के लिए समय ही नहीं बचता। इंसान पैसे कमाने निकल जाता है और जब तक धन आता है, तब तक बहुत कुछ पीछे छूट चुका होता है। कई बार बच्चों के साथ बैठने का समय नहीं मिलता और जब समय मिलता है, तब बच्चे खुद अपनी जिंदगी की दौड़ में निकल चुके होते हैं।

10:55 AM, 24-Jun-2026

'धर्म मिलना अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है'

देवी चित्रलेखा ने सभी को गंगा दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, हमें अपने जीवन को केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसा जन्म, भारत जैसा देश और सनातन जैसा धर्म मिलना अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है। इससे अधिक भाग्यशाली स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।

10:46 AM, 24-Jun-2026

'खुश होने में और आनंदित होने में अंतर है'

देवी चित्रलेखा ने कहा कि खुश होने में और आनंदित होने में अंतर है। खुशी आती है चीजों से। आनंद आता है अंदर से। आनंद एक ऐसा जीवन का गुण है जो किसी के जीवन में आ गया तो उसके अलावा कुछ नहीं आएगा। 

10:43 AM, 24-Jun-2026

नेम, फेम और तीसरा है मनी: चित्रलेखा

ठीक उसी तरह भगवान ने हमें इस संसार में एक अवसर देकर भेजा है। देवी चित्रलेखा ने कहा कि जब मनुष्य इस संसार को छोड़कर ईश्वर के पास जाएगा, तब भगवान उससे दो महत्वपूर्ण प्रश्न करेंगे। पहला प्रश्न होगा, मैंने तुम्हें इतना अनमोल जीवन दिया, क्या तुमने इसे आनंद के साथ जिया? उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में सच्चा आनंद आ जाता है, उसका जीवन अपने आप सार्थक बन जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान का दूसरा प्रश्न होगा , जो आनंद तुम्हें मिला, क्या तुमने उसे दूसरों के साथ बांटा?  यदि इन दोनों प्रश्नों का उत्तर हां में होगा, तभी भगवान को लगेगा कि उन्होंने मनुष्य को जीवन देकर सही निर्णय लिया और वह उस व्यक्ति से प्रसन्न होंगे।

10:30 AM, 24-Jun-2026

पहले सत्र सुप्रभात देवभूमि की शुरुआत

देवी चित्रलेखा ने 'सुप्रभात देवभूमि' के साथ सत्र की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने 'हरे कृष्ण हरे राम' मंत्र का जाप करते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने सबसे पहले अमर उजाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कोई भी कार्य हो, उसकी शुरुआत हमेशा अध्यात्म से ही होनी चाहिए। जीवन के महत्व पर बात करते हुए देवी चित्रलेखा ने कहा कि मनुष्य के सामने दो तरह का जीवन होता है, सफल जीवन और सार्थक जीवन। सफल होना आवश्यक है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी जीवन को सार्थक बनाना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग सफलता को नाम, प्रसिद्धि और धन से जोड़कर देखते हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ते फॉलोअर्स की संख्या को भी लोग सफलता का पैमाना मानने लगे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भगवान ने हमें यह अनमोल मानव जीवन किसी उद्देश्य के लिए दिया है। जिस व्यक्ति का जीवन सार्थक होता है, उसके भीतर आनंद स्वतः दिखाई देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे विद्यालय में अवकाश के दौरान विद्यार्थियों को कार्य दिया जाता है, कुछ लोग उसे समय पर पूरा करते हैं और आगे बढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग उसे टाल देते हैं और पीछे रह जाते हैं।
 

10:23 AM, 24-Jun-2026

संवाद में पहुंचीं देवी चित्रलेखा

देवी चित्रलेखा पहुंची अमर उजाला संवाद उत्तराखंड के कार्यक्रम में पहुंच गई हैं। वो कुछ ही देर में मंच पर पहुंचेंगी।

10:23 AM, 24-Jun-2026

यहां देखें अमर उजाला संवाद लाइव

10:10 AM, 24-Jun-2026

रेडियो की दुनिया से युवाओं की आवाज बने आरजे प्रवीण

अपनी सहज शैली, बेबाक अभिव्यक्ति और श्रोताओं से जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले आरजे प्रवीण रेडियो जगत का एक जाना-माना नाम हैं। वर्ष 2006 में रेडियो जॉकी के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले आरजे प्रवीण आज देशभर में लोकप्रिय पहचान बना चुके हैं। आरजे होने के साथ-साथ वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आपको सोशल मीडिया पर 1.2 मिलियन से अधिक लोग फॉलो करते हैं। रेड एफएम में रहते हुए आरजे प्रवीण ने न सिर्फ ‘रेड मुर्गा’ और ‘एक कहानी ऐसी भी’ जैसे चर्चित शो किए, बल्कि आईपीएल और महिला क्रिकेट विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों को भी कवर किया है।
 

09:54 AM, 24-Jun-2026

डिजिटल दुनिया में कंटेंट से बनाई करोड़ों लोगों के दिलों में जगह

सोशल मीडिया की दुनिया में ‘बीइंग सुकू’ के नाम से लोकप्रिय साक्षी केसवानी भी अमर उजाला संवाद उत्तराखंड 2026 का हिस्सा होंगी। कॉमेडी, डेली लाइफ सिचुएशन्स, फैशन और लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट के जरिए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाई है। करीब 90 लाख फॉलोअर्स के साथ सुकू आज देश की लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर्स में शुमार हो चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अमेजन प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘सिनेमा मरते दम तक’ से अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा। संवाद के मंच से सुकू डिजिटल कंटेंट क्रिएशन, सोशल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं के लिए उभरते अवसरों पर अपने विचार साझा करेंगी।
 

09:38 AM, 24-Jun-2026

अर्धकुंभ, गंगा संरक्षण और धार्मिक व्यवस्थाओं पर मंथन

श्री गंगा सभा प्रबंधकारिणी, हरिद्वार के अध्यक्ष नितिन गौतम संवाद में गंगा संरक्षण, धार्मिक पर्यटन और अर्धकुंभ की तैयारियों जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। गंगा तट की परंपराओं और व्यवस्थाओं से लंबे समय से जुड़े होने के कारण उन्हें इस क्षेत्र का व्यापक अनुभव है। वे बताएंगे कि आस्था, पर्यावरण संरक्षण और व्यवस्थागत सुधारों के बीच संतुलन स्थापित कर भविष्य की चुनौतियों का सामना कैसे किया जा सकता है।

09:14 AM, 24-Jun-2026

एआई और उभरती तकनीकें कैसे बदलेंगी भविष्य

ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के सीटीओ तेजस्वी घनशाला संवाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल नवाचार और उभरती तकनीकों की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे। वे बताएंगे कि तकनीक केवल उद्योगों को ही नहीं, बल्कि शिक्षा, शासन और सामाजिक जीवन को भी तेजी से बदल रही है। साथ ही उत्तराखंड जैसे राज्यों में तकनीक आधारित विकास के अवसरों पर भी चर्चा करेंगे।
 

08:52 AM, 24-Jun-2026

नई शिक्षा नीति, शोध और नवाचार पर रखेंगी दृष्टिकोण

वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप और नई शिक्षा नीति के प्रभाव पर चर्चा करेंगी। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबे अनुभव रखने वाली प्रो. ठाकुर तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, उद्योग-अकादमिक सहयोग और युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगी।

08:28 AM, 24-Jun-2026

धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर होगी चर्चा

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी संवाद में धार्मिक पर्यटन और तीर्थ प्रबंधन से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखेंगे। चारधाम यात्रा और देवस्थान प्रबंधन के क्षेत्र में उनके अनुभव उत्तराखंड की धार्मिक पहचान को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देंगे। वे बताएंगे कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास की राह कैसे प्रशस्त की जा सकती है।

08:18 AM, 24-Jun-2026

ई संभावनाओं और नए रास्तों पर होगी चर्चा

राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर पूर्वी कमान के पूर्व जीओसी-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राणा प्रताप कलिता अपने अनुभव साझा करेंगे। वहीं सनश्योर एनर्जी के को फाउंडर एवं चीफ बिजनेस ऑफिसर कार्तिकेय एन. शर्मा ऊर्जा क्षेत्र में उभरते अवसरों और हरित विकास की दिशा पर बात करेंगे। इस मंच पर नीति निर्माता, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, युवा और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। मकसद स्पष्ट है-उत्तराखंड को लेकर नए विचारों, नई संभावनाओं और नए रास्तों पर गंभीर चर्चा।

08:02 AM, 24-Jun-2026

'सुप्रभात देहरादून' सत्र में जीवन मूल्यों का संदेश देंगी देवी चित्रलेखा जी

देवी चित्रलेखा भारत की प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता, भागवत कथा वाचिका और भजन गायिका हैं। वे देश-विदेश में अपनी ओजस्वी वाणी और आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए जानी जाती हैं। हरियाणा के पलवल में जन्मी देवी चित्रलेखा जी महज चार वर्ष की आयु से आध्यात्मिक साधना और दीक्षा के मार्ग पर अग्रसर हो गई थीं। उनकी पहली कथा सात वर्ष की आयु में वृंदावन में हुई थी। वे अब तक 35 से अधिक देशों में 600 से ज्यादा कथाओं का आयोजन कर चुकी हैं। संवाद में वे सुप्रभात देहरादून सत्र के जरिये जीवन मूल्यों, आध्यात्मिकता, भारतीय संस्कृति और वर्तमान समय में नैतिकता के महत्व पर अपने विचार साझा करेंगी।
 

07:43 AM, 24-Jun-2026

राकेश बेदी करेंगे सिनेमा पर बात

मनोरंजन जगत का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अभिनेता राकेश बेदी करेंगे। रंगमंच, टेलीविजन और सिनेमा के लंबे अनुभव के साथ वे बदलते मनोरंजन उद्योग पर अपने विचार साझा करेंगे। अभिनेता और कास्टिंग डायरेक्टर अभिषेक बनर्जी भी इस संवाद का हिस्सा होंगे।

07:36 AM, 24-Jun-2026

खेल जगत पर होगी चर्चा

खेल जगत से पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ और क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा भाग लेंगे। दोनों अपने अनुभवों के जरिए युवाओं से नेतृत्व, अनुशासन और निरंतरता की बात करेंगे।
 

07:20 AM, 24-Jun-2026

सीएम धामी करेंगे शुभारंभ, जेपी नड्डा समापन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी होंगे। वे राज्य की विकास योजनाओं, निवेश और युवाओं के लिए बन रहे अवसरों पर अपने विचार रखेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

06:51 AM, 24-Jun-2026

Uttarakhand Samwad 2026 Live: आरजे प्रवीन बोले- कंटेंट ऐसा लेकर आओ जो रिलेटेबल हो, यही सबसे जरूरी है

देवभूमि के विकास पर एक बार फिर मंथन करने जा रहा है अमर उजाला संवाद का मंच। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां शामिल होंगी। 24 जून को देहरादून में आयोजित होने जा रहा अमर उजाला संवाद का यह मंच विचारों और अनुभवों को जोड़ने का प्रयास करेगा। हरिद्वार बाईपास रोड स्थित होटल गेटवे (सरोवर प्रीमियर) में होने वाला यह आयोजन उत्तराखंड के वर्तमान और भविष्य पर केंद्रित रहेगा। दिनभर चलने वाले 8 से अधिक सत्रों में राज्य के विकास मॉडल, निवेश, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, खेल, मनोरंजन, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े अवसरों पर चर्चा होगी। उद्देश्य केवल बात करना नहीं, बल्कि उन प्रश्नों को सामने लाना है जो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की दिशा तय करेंगे।

विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें