अंकुर: जाे कुछ भी आपने कॉपी नहीं किया बस वहीं रियल कंटेंट है। आप अगर कुछ ऑब्जर्व करके उसे कंटेंट बना रहे हो और वो दूसरे से अलग हैं तो ही काम का है। थोड़ा बहुत मिर्च-मसाला लगाना भी ठीक है कंटेंट के लिए।
राघव: आप अगर खुद पर भरोसा ही नहीं कर सकते तो ट्रेंड फाॅलो करने का भी कोई फायदा नहीं। तो खुद पर भरोसा रखना सबसे पहले जरूरी है। बाकी आप ट्रेंड फॉलो करिए और उसमें कुछ नया जोड़ते रहिए।
जवाब प्रवीन: जब आप क्रिएटिव लोगाें से घिरे होते हैं तो आपका मूड कभी ऑफ ही नहीं होता। इस फील्ड में खुशमिजाज लोग ही मिलते हैं। हमारे अंदर एंटरटेनमेंट के लिए कीड़ा हमेशा से था। सोशल मीडिया हमारे लिए काफी कुछ नया लेकर आया। अब हम वीडियो बनाकर लोगों को एंटरटेन करते हैं।
जेपी नड्डा ने कहा, उत्तराखंड की बात करूं तो एम्स ऋषिकेश ने हेल्थ सेक्टर में लीड है। बहुत जल्द ऊधमसिंह नगर में सेटेलाइट सेंटर आ जाएगा, जो लगभग 500 करोड़ की लागत से बन रहा है। क्रिटिकल केयर ब्लॉक में 124 करोड़ रुपये खर्च करके एम्स ऋषिकेश में स्थापित किया है। उसी तरह से अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़, हरिद्वार में चार नए मेडिकल कॉलेज एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करके आगे इसे आगे बढ़ाया है।
जेपी नड्डा ने कहा, सबके सामने एक कॉमन लक्ष्य है कि 2047 में विकसित भारत हो। हर एक आदमी का यह कॉमन गोल बन चुका है।
जवाब- राहुल सिंघल (सदस्य, भारतीय उद्योग परिसंघ- सीआईआई, उत्तराखंड) ने कहा कि कुछ इनसेंटिव पहाड़ के आदमी को पहाड़ में रोकने के लिए दिया जाए। उसके साथ बॉन्ड हो कि कम से कम 10 साल रहेंगे ही यहां।
विनय शंकर पांडेय (सचिव, उद्योग, उत्तराखंड सरकार): राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों और विजन पर अपना पक्ष रखेंगे।
हेमंत कोचर (उत्तराखंड हेड, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री): निवेशकों के नजरिए और राज्य में व्यापारिक सुगमता पर बात करेंगे।
राहुल सिंघल (सदस्य, भारतीय उद्योग परिसंघ- सीआईआई, उत्तराखंड): राज्य में कॉरपोरेट निवेश की स्थिति और एमएसएमई की चुनौतियों के समाधान पर अपने विचार साझा करेंगे।
शोषण हर इंडस्ट्री में होता है। जहां भी पावर है, वहां शोषण है। यह आज से नहीं है। हमसे पहले भी चलता आ रहा है। आपको यह समझना और सीखना है कि आपको शोषण करवाना है या नहीं। या आपको कोई लालच देकर रोल देना चाहता है तो क्या आप उसमें पड़ेंगे? अगर कोई शोषण कर रहा है तो शिकायत करिए। आप किसी के घर मत जाइए। कोई इंसान इतना बड़ा नहीं है कि आपको बैन कर देगा तो आपको काम नहीं मिलेगा। इंडस्ट्री में इतनी भी यूनिटी नहीं है कि एक बैन कर देगा तो आपको काम नहीं मिलेगा।
जवाब- बिजनेसमैन के बेटे-बेटी बिजनेसमैन बनेंगे। यह उनके ऊपर है, वह उसे आगे बढ़ा पाते हैं कि नहीं। कई सारे बिजनेस इस चक्कर में बंद भी हो जाते हैं। नेपोटिज्म में भी वही चीज है। जब आप उस तरह के खानदान से फैमिली से आते हैं तो उनको अवसर तो खूब मिलते हैं।
अभिषेक: शायद इंडस्ट्री में मैं ही इकलौता हूं जो कास्टिंग के बाद एक्टिंग कर पाया है। मैं यह मानना चाहूंगा कि उसका कारण प्रतिभा है। सिर्फ मेरी पहुंच नहीं हैं। कोई भी डायरेक्टर सिर्फ पहचान के चक्कर में रोल नहीं देता। उनके पैसे लगे होते हैं। अगर ऐसे रोल मिल भी गया तो खराब एक्टिंग होती है और उसके बाद दूसरा रोल नहीं मिलेगा। आउटसाइडर को समझना पड़ेगा कि आपको हर रोल में खुद को साबित करना पड़ेगा। यह शिकायतें तो हमेशा रहेंगी। हिंदुस्तान ऐसा देश है जहां 90 प्रतिशत आबादी को लगता है कि वह क्रिकेट खेल सकते हैं और 90 फीसदी को लगता है कि वह एक्टिंग कर सकती है।
जवाब- एक तरह की एचआर कंपनी है। यह लोग एक ब्रिज हैं जो बाहरी दुनिया और इंडस्ट्री की दुनिया के बीच में। जब भी मैं फिल्म इंडस्ट्री से बाहर के लोगों से मिलता हूं तो वह लोग भी यही बोलते हैं।
अमर उजाला संवाद के मंच पर अभिनेता अभिषेक बनर्जी पहुंच गए हैं। 'नए दौर के सिनेमा' विषय पर उनसे चर्चा की जा रही है।
अमर उजाला मंच पर भारतीय सेना के मंच पर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता (सेवानिवृत्त) पहुंच गए हैं। 'राष्ट्र रक्षा की बात' विषय पर उनसे चर्चा होगी।
आकाश चोपड़ा ने कहा कि एक और चीज जो बदली है वो ये कि बड़े शहरों में डिस्ट्रेक्शन बहुत है। बच्चों के पास करने के लिए बहुत चीजें होती हैं। साउथ मुंबई का बच्चा क्रिकेट नहीं खेलता, वो फुटबॉल देखता है। जो ठाणे में रहता है वो क्रिकेट खेलता है। ऐसा ही दिल्ली में भी होता है। छोटे शहरों में आग अभी भी है और बड़े शहरों में आग खत्म हो गई है।अब धूप में खड़े होने का मन उतना करता नहीं है। कम बच्चे खड़े होते हैं अब। गांव या छोटे शहरों में ये चीज ज्यादा है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने कहा कि आज के दौर में युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के खिलाड़ियों को अपने शुरुआती करियर में खेल से जुड़ी जानकारी, प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं हासिल करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदली हैं।
पिच की गपशप सत्र में पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ और आकाश चोपड़ा भी संवाद के मंच पर मौजूद है। आकाश चोपड़ा ने कहा कि काफी अच्छा लग रहा है देहरादून आकर। मेरे दोस्त कैफ भी साथ में हैं। जब आपने खेलना शुरू किया था तो कुछ लोग ही होते थे जो छोटे शहरों से खेलने आते थे। अब कहानी बदल चुकी है तो क्या बदला है। पहले इतना मुश्किल क्यों था और अब इतना आसान कैसे हो गया है? हमारा कप्तान रांची से आया, उसने उसे विश्व के नक्शे पर डाला, एक बच्चा ताजपुर से आता है उसका नाम वैभव सूर्यवंशी होता है। एक गोपालगंज से आता है उसका नाम साकिब हुसैन होता है। अब सारे छोटे शहरों से आते हैं तो ऐसा क्या बदला?
तेजस्वी घनशाला ने कहा कि एआई किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल में आ रहा है। कृषि आर्किटेक्ट प्रबंधन अध्ययन आदि क्षेत्रों में भी इन्हीं से जानकारी दी जा रही है।
तेजस्वी ने कहा कि भविष्य की यूनिवर्सिटी एआई पर आधारित होगी । एआई बेस्ट टीचर हो सकता है, बेस्ट मार्गदर्शक हो सकता है । बशर्ते उसे हम कैसे काम ले सकते हैं यह हमें खुद सोचना होगा। शिक्षकों के लिए एआई को अपनाना ज्यादा मुश्किल है। क्योंकि छात्र अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि उनका काम बहुत आसान हो रहा है।
तृप्ता ठाकुर ने कहा कि एआई का सबसे बड़ा लाभ एक झटके में बहुत सारा कंटेंट मिलना और खतरा है डिपेंड रहेंगे तो दिमाग से सोचना बंद कर देंगे।
शिक्षा, AI और तकनीकी सत्र में आज वीर माधो सिंह भंडारी, उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति तृप्ता ठाकुर, ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के सीटीओ तेजस्वी घनशाला अपनी बात रख रहे हैं। तृप्ता ठाकुर बोलीं, "बच्चों के पास स्मार्टफोन एक उम्र से पहले नहीं आना चाहिए। यूके, यूरोप समेत बहुत सारे देशों ने 16 वर्ष की उम्र से पहले स्मार्टफोन के इस्तेमाल को सीमित किया है।" उन्होंने आगे कहा, "टीचर के द्वारा आप बहुत सारी चीजें समझते हैं। सबसे बड़ा चैलेंज टीचर्स के लिए हैं। टीचर्स अभी बिल्कल भी इसके लिए तैयार नहीं हैं। एआई के आने के बाद जो बदलाव
जगद्गुरु ने कहा कि अमर उजाला ने पत्रकारिता को जिंदा रखा और जिसमें गणेश शंकर विद्यार्थी और पराड़कर जैसी पत्रकारिता की झलक दिखती है। उन्होंने कहा अमर उजाला की यात्रा लगातार बढ़ती रही।
जगतगुरु ने कहा कि जब विश्व में कहीं समस्याएं आईं तो कहीं खुदा आ गए, कहीं ईसा आए, कहीं मूसा आ गए, भगवान के बेटे आए, लेकिन भारत भूमि वह है जहां जब भी समस्याएं आईं तो कभी राम तो कभी कृष्ण बनकर भगवान स्वयं आए।
जगतगुरु गुरु स्वामी स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि यह मंदिरों का देश है। अच्छी बात है मंदिर बन रहे हैं, मंदिर तो भव्य बन रहे हैं। प्रचार भी खूब हो रहा है। पत्रकारों का एक वर्ग जो है स्वर्णिम भारत भी दिखा रहा है। शरीर बहुत स्वस्थ्य हो, अंदर की सूक्ष्म चेतना चली जाए तो शरीर मृत हो जाता है। सबकुछ हो रहा है, लेकिन वही जो भारत की मूल आत्मा, प्राण, अध्यात्म है वो कहीं खोया हुआ है उसको ढूंढने की जरूरत है। जब तक वो नहीं मिलेगा तब तक भारत, भारत नहीं।
जगतगुरु गुरु स्वामी स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि राजा है इस देश की प्रजा। जो राजनेता हैं वो उनके प्रतिनिधि हैं। आज दुर्भाग्य है कि जो राजा है वो सोया हुआ है(यानि प्रजा)। जो सेवक है वो अपने आपको राजा समझे हुए है। यह मैं किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं कह रहा हूं। सारे राजनेताओं के लिए कह रहा हूं। सारे राजनैतिक दलों के लिए कह रहा हूं।
अमर उजाला संवाद के मंच पर जगतगुरु गुरु स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि जिसके पास कुछ नहीं है वही संत है.. संत होने का मतलब बड़े आश्रम और बड़ी गाड़ियां होना नहीं है।
सनश्योर एनर्जी के संस्थापक कार्तिकेय एन शर्मा ने उत्तराखंड को एक 'पावर सरप्लस' राज्य बताते हुए यहां ऊर्जा उत्पादन की बड़ी संभावनाओं का जिक्र किया। राज्य में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर पर फोकस को उन्होंने एक बेहतरीन कदम बताया, लेकिन भौगोलिक सीमाओं के कारण सुझाव दिया कि जमीन की कमी से निपटने के लिए उत्तराखंड को राजस्थान से सोलर पावर खरीदनी चाहिए। औद्योगिक बिजली की बढ़ती दरों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पांच साल पहले जो पावर सबसे सस्ती थी, वह अब 9 रुपये प्रति यूनिट के उच्च स्तर तक पहुंच गई है। उन्होंने कोयले पर निर्भरता कम करने वाली नीतियों की वकालत करते हुए बताया कि बैटरी स्टोरेज अब घरों में भी संभव है और उनकी कंपनी शाम के समय भी किफायती दरों (6.65) पर बिजली उपलब्ध करा रही है।
सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के निदेशक संजय शर्मा ने राज्य में जलविद्युत (हाइड्रो पावर) की अपार संभावनाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बड़े प्रोजेक्ट्स लगाने के बजाय सरकार ने 'स्मॉल हाइड्रो स्कीम' लॉन्च की है, जिसके तहत नदियों के बहाव (रन ऑफ द रिवर) पर आधारित छोटी परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं। एसईसीआई की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीमित मानव संसाधन के बावजूद यह पीएसयू पिछले 10-14 वर्षों में 50-60 गुना बढ़कर 36-37 हजार (मेगावाट) ऊर्जा जनरेट कर रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। संजय शर्मा ने सुझाव दिया कि हम ब्राजील के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों से सीख लेकर बड़े शहरों की नगर पालिकाओं का आर्थिक बोझ कम कर सकते हैं।
अमर उजाला संवाद के 'सतत विकास की नई राह' सत्र में राज्य की ऊर्जा नीतियों और रिन्यूएबल इकॉनमी पर अहम चर्चा जारी है। उत्तराखंड सरकार के ऊर्जा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि राज्य ने सोलर एनर्जी पॉलिसी के तहत 1000 मेगावाट का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात और राजस्थान की तरह उत्तराखंड में बंजर जमीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए सरकार का मुख्य फोकस 'डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर एनर्जी' पर है, जिसके लिए पुरानी गाइडलाइंस को आसान बनाकर फिर से लॉन्च किया गया है। पीक डिमांड के समय सौर ऊर्जा का उपलब्ध न होना और महंगी बैटरी स्टोरेज एक बड़ी चुनौती है, जिसका समाधान खोजने के लिए रिसर्च जारी है। मीनाक्षी सुंदरम ने 2070 के 'नेट-जीरो' लक्ष्य के लिए सोलर एनर्जी को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि हाइड्रो पावर और कार्बन क्रेडिट राज्य के लिए कमाई का नया जरिया बन सकते हैं और बेस व पीक लोड को संतुलित करने के लिए 'एनर्जी मिक्स' की सख्त जरूरत है।
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि हरिद्वार में चार महीने का कुंभ होता है। बाकि तीन जगह जो कुंभ होता है वो एक से डेढ़ महीने का होता है। इन चार महीने में हमें 20 से 25 लाख की आबादी की व्यवस्थान करनी होती है। अमृत स्नान के दिन यह संख्या डेढ़ से दो करोड़ हो जाती है। इन सबकी व्यवस्था को लक्ष्य रखकर हम तैयारी करते हैं।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि सर्वप्रथम तो पूरे अमर उजाला को बधाई देना चाहता हूं , इस तरह के संवाद को आयोजित करने के लिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में 2027 में जनवरी से अप्रैल के बीच में कुंभ का आयोजन होना है। मैं सिर्फ ये बताना चाहूंगा कि कुंभ है क्या। कुंभ के बारे में सब सामान तौर पर हम जानते हैं। चार जगह कुंभ होता है। कुंभ क्या है और किसको कुंभ कहते हैं तो मृत्यु से अमृत तक का जो पराक्रम है वो कुंभ होता है। बुराई से अच्छाई की ओर, पाप से पुण्य की ओर। ये जो पराक्रम है ये वास्तव में कुंभ होता है। कुंभ का जो आयोजन है ये शाश्वत काल और सनातन काल से चला आ रहा है। इसमें सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ये संगम है। इसका समागम होता है कुंभ के दौरान।
श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कहा कि 1939 में यह मंदिर समिति बनी थी, ब्रिटिश काल के समय पर। दो बड़े अधिष्ठान हमारे श्रीबदरीनाथ और केदारनाथ धाम हैं इसके अधीनस्थ। ये चारों धाम हैं, ये सनातन धर्म के प्राण वायु हैं। ये हमारे आध्यात्मिक चेतना के केंद्र हैं। इस बार सारे रिकॉर्ड टूट गए। 19 अप्रैल को जहां मां गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुले थे। 22 अप्रैल को बाबा केदार के कपाट खुले। 23 में भगवान बदरीनाथ जी के कपाट खुले। एक बहुत बड़ी चुनौती है। बहुत सारे लोग, बहुत सारे तीर्थयात्री आते हैं, वो धामों से तुलना करते हैं। मैं आपको बताना चाहूंगा चाहे जितने भी धाम हों, उन सब में ये चार धाम बिल्कुल अलग हैं। इनकी तुलना किसी भी धाम से नहीं की जा सकती है। यहां की व्यवस्था, भौगोलिक परिस्थितियां हैं, प्राकृतिक चुनौतियां हैं उन सबसे से सामना करते हुए भी हमारी सरकार, हमारा प्रशासन व्यवस्था करता है। उन्होंने कहा हर छह महीने बाद वहां पर दोबारा से सारी व्यवस्था को बनाना पड़ता है। इन दो महीने के अंदर 26 लाख श्रद्धालु बदरीनाथ और केदारनाथ में आए हैं। चारों धामों में 40 लाख लोगों ने दर्शन किए हैं। 50 लाख लोगों ने पंजीकरण किया है। यात्रा को चले हुए सिर्फ दो माह हुए हैं।
प्रेम गिरि जी महाराज, जूना अखाड़ा ने हरिद्वार कुंभ पर कहा कि आज उत्तराखंड की पावन धरती पर ऋषि मुनि महर्षियों का देवस्थान। देवभूमि उत्तराखंड को इसलिए कहते हैं, आपने सुना होगा कि हमारे महादेव की 12 ज्योतिर्लिंग हैं और 12 ज्योतिर्लिंग में उत्तराखंड में केदारनाथ के रूप में विराजमान रहते हैं। इस उत्तराखंड भूमि को भगवान शिव का निवास स्थान मानते हैं। इसलिए जहां देवों के देव महादेव हों, उनका क्षेत्र हो, जिसमें साधु-संन्यासी तपस्या कर रहे हों, तो आप लोग बताइए कि उसका नाम क्या हो। देवभूमि कहा जाएगा। एक देवभूमि उत्तराखंड है, देवश्रीदेवभूमि हिमाचल भी है। हिमाचल में मां पार्वती का वास है। जहां शिव का वास वो देवभूमि। जहां मां भगवती का वास हो वो भी देवभूमि भारत में कही जाती है।
कुंभ की तैयरियों को लेकर नितिन गौतम ने कहा कि मां गंगा को प्रणाम। मां गंगा की यह पावन धरा देवभूमि, हरिद्वार कुंभ की चर्चा के लिए आपने आमंत्रित किया, आपका हार्दिक आभार। हमारी जो अभी कुंभ जो कि विश्व की एक अनुपम धरोहर है, उसके लिए हम पूरे विश्व के सनातियों को हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड पर आमंत्रित करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री धामी ने, जो उनको लगता था 2021 में जो कुंभ हुआ, कोरोना की वजह हमारे सनातनी वहां पहुंच नहीं पाए। सीएम धामी ने इस अर्द्धकुंभ को दिव्य, भव्य करने की जो योजना बनाई है, निश्चित रूप से उनकी इस आस्था, इस योजना और सनात के प्रति प्रेम। जब करोड़ों सनाती बिना किसी निमंत्रण के बिना किसी बुलावे के हर की पौड़ी में गंगा स्नान के लिए आते हैं, तो मुझे लगता है कि वह उनकी भाव है। आपने अभी प्रयागराज का कुंभ देखा, वहां 70 करोड़ श्रद्धालु आए।
आस्था का संगम कुंभ 2027 सत्र का शुभारंभ हो गया है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन मंच पर चर्चा कर रहे हैं। उनके साथ में हेमंत द्विवेदी वर्तमान में श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के चेयरमैन, नितिन गौतम, अध्यक्ष, श्रीगंगा सभा मैनेजमेंट कमेटी, हर की पैड़ी भी इस चर्चा में शामिल हुए हैं।
आपका 'मसाज' नाटक है। दो दशक से अधिक वक्त से चला आ रहा है। क्या बात है इस प्ले में कि ये अब तक प्रासंगिक है। आप शो करते हैं तो हॉल भर जाते हैं? आप इसमें 20 से ज्यादा किरदार अदा करते हैं।
राकेश बेदी: वह नाटक हिंदुस्तान के या कहें कि दुनिया के शानदार नाटककार विजय तेंदुलकर का लिखा हुआ है। वह वन एक्टर प्ले है, जिसे मोनोलॉग कहते हैं। उसका असर कैसा होता है, यह तो आपको देखकर ही पता चलेगा। देहरादून में भी इस नाटक को कर चुका हूं। इस नाटकर को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। पहले लोग सोचते हैं कि अकेला कैसे बांध कर रखेगा? खत्म होते-होते समय देखकर कहते हैं कि अरे बाप रे दो घंटे निकल गए।
राकेश बेदी ने कहा कि शुरू में बहुत तकलीफ हुई। आदित्य धर ने बहुत रिक्वेस्ट की थी कि राकेश जी प्लीज किसी को मत बताना। फिर ये भी है कि बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी। इसलिए मैंने छिपाकर रखा।
अर्जुन रामपाल आपसे कहते हैं कि सर आप तो सबको खा गए। ऐसे कॉम्प्लीमेंट सुनकर कुछ फील आता है?
राकेश बेदी: नहीं! ऐसा फील आ जाएगा तो एक शेर है:
शोर नदी का नहीं, आबशार का है
यहां से जो भी सफर है उतार का है
अगर कोई तुमसे ये कहे कि बच्चा है तू मेरा
उससे बचकर रहो, वो आदमी बेकार का है।
उन्होंने जो कॉम्प्लीमेंट दिया था, वह एक तारीफ थी। काम अच्छा है। अब उस पर मेरा दिमाग खराब हो जाए तो बेकार है।
आज की पीढ़ी बहुत जल्दी डिप्रेशन में चली जाती है। नौकरी में किसी ने कुछ कह दिया, तनाव में चले गए। आप अपनी जिंदगी का वो किस्सा साझा करिए, जब लगा हो कि छोड़ दूं मगर हिम्मत नहीं हारी?
अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि सबकी जिंदगी में ऐसा दिन आता है। मैंने यह बात कम मंचों पर बोली है। एक दिन मेरी जिंदगी में ऐसा आया कि काम नहीं था और पैसे भी नहीं थे। मैंने लेकिन एक बात तय की थी कि अपनी मजबूरियां परिवार तक नहीं जाने दूंगा। मेरी मां घबरा जाती कि मेरा बेटा रात को भूखा सोया। वापस बुला लेगी घर। मुझे वापस नहीं जाना। ऐसा वक्त आया कि बैंक भी खाली। घर भी खाली। सिर्फ 50 पैसे थे। तब 50 पैसे कि छह केले आते थे। मैंने सोचा कि सबसे पहले तो यह तय करूं कि जरूरी क्या है? आज की भूख या करियर? एक शेर था मुझे बहुत अच्छा लगता था
माना कि लौटकर आना है नामुमकिन
घर पलटा बियाहब से बहारें साथ लाऊंगा।
मैंने छह केले खाए और सो गया कि कल का कल देखेंगे।
अभिनेता राकेश बेदी ने कहा कि जब मैं कुछ भी नहीं था। तब यहां से गुजर रहा था। कुछ लोग आए और मेरा ऑटोग्राफ लेना शुरू कर दिया। फिर पता चला कि ये है जिंदगी बहुत बड़ा हिट हो गया है। कई फिल्में आईं। श्रीमान श्रीमती अपने आप में कामयाब कार्यक्रम था। मगर, धुरंधर आते-आते जो रीच है वह करोड़ों तक जाने लगी है। फिल्म बहुत बड़ी हिट है। कह नहीं सकते कि यह हिट है, सुपरहिट है या सुपर-डुपर हिट है। लोगों के मन से उतर नहीं रही। कल एयरपोर्ट पर एक शख्स मिले वो बोले कि उन्होंने 13 बार फिल्म देख ली है।
अमर उजाला संवाद के मंच पर अभिनेता राकेश बेदी से चर्चा जारी है। उन्होंने उत्तराखंड से कोई यादों के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि मैंने अपना बचपन बहुत देहरादून में बिताया है। मेरी दादी के साइड के बहुत लोग थे, तो हर साल आता था। मेरे दादाजी ने भी यहां अपना बिजनेस शुरू किया था। मैं हर साल गर्मियों में यहां आता था। लीची के बाग होते थे तो लीची खाते थे, तब तक जब तक कि मालिक आकर डंडे मारकर हमें नहीं भगाता था।
चारधाम यात्रा एक सामान्य यात्रा नहीं है। यह बहुत ही आस्था और श्रद्धा की यात्रा है। मैं हमेशा से एक बात कहता हूं कि चारधाम यात्रा आज तो हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जिस तरह से रोडे बन गई हैं। केदारनाथ का नवनिर्माण हो गया। बद्रीनाथ के लिए प्लान बन गया। एक समय ये यात्राएं काफी कठिन हुआ करती थीं, आज यात्रा का स्वरूप बदल गया है। ऐसे में कई समस्याएं भी हो गई है, ज्यादा लोगों का आना, मार्ग में परेशानी हो जाना। पहले क्या होता था इन यात्राओं की तैयारी की समीक्षा यात्रा शुरू होने के पहले होती थी। हम लोगों ने एक नई संस्कृति शुरू की है कि जैसे ही 2025 की यात्रा समाप्त हुई हमने 2026 की यात्रा की तैयारी शुरू कर दी और उसका परिणाम भी सामने आया । छोटी मोटी बातों को छोड़ दिया जाए तो इस बार यात्रा ने रिकॉर्ड कायम किया है। मतलब अभी तक 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा अबतक 40 लाख लोगों ने कर ली है। हेमकुंड साहब की यात्रा 1 लाख 25 हजार पहुंच गई जो पिछले पूरे सालभर से 20 से 25 हजार ज्यादा है। सीमांत क्षेत्र आदि कैलाश जहां पूर वर्षभर में 400 से 500 लोग पहुंचते थे वहां अभी तक 45000 लोग पहुंच चुके हैं और अभी तो यात्रा आधी भी नहीं हुई है। इसी प्रकार शीतकाल में लोगों लगता था कि कपाट बंद हो गए है देव लोगों की मान्यता है उनके कपाट बंद हो जाते हैं लेकिन उनके गद्दी स्थलों के लिए श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लगातार उपलब्धता उपलब्ध कराई गई है।
सवाल: मुख्यमंत्री बनने पर बढ़ती मजारों पर नकेल, 10 हजार एकड़ भूमि पर कब्जा मुक्त, लव जिहाद,लैंड जिहाद, थूक जिहाद ताकि बनी रहे देवभूमि की पवित्रता। ये पुष्कर सिंह धामी जी कहां छुपे हुए थे। आपको इन विषयों पर इतने अग्रेसिव होने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
आपको लगता है मैं अग्रेसिव हूं। जब उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में मुझे जिम्मेदारी मिली है तो देव भूमि का मूल स्वरूप बना न रहे, यहां देवत्व कायम रहे। हम कहीं भी जाते हैं तो कहते हैं कि हम देवभूमि उत्तराखंड से आए हैं या देवभूमि उत्तराखंड से हमारा नाम जुड़ा है तो सामने वाले जो भाव बदल जाते हैं। क्योंकि लोग मानते हैं भगवान के सबसे नजदीक का स्थान देवभूमि है। तो क्या देवभूमि की आस्था, श्रद्धा कम होनी चाहिए यहां का देवत्व कम होना चाहिए। यहां का जो मूल अस्तित्व है उसको कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। कल का उत्तराखंड कैसा होगा यह हमारी जिम्मेदारी है और मुझे लगता है उतराखंड के सारे लोग बल्कि पूरे देश के लिए ये सोचते हैं कि देवभूमि का स्वरूप बना रहना चाहिए। हमारी भावी पीढ़ी को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं मिलना चाहिए। यह अवैध कब्जे नहीं मिलने चाहिए, अवैध अतिक्रमण नहीं मिलना चाहिए। किसी को टारगेट करने जैसा इसमें कुछ भी नहीं है। अवैध कब्जे का मतलब अवैध कब्जा वो चाहे किसी का भी हो। हमने वोटर लिस्ट देखकर नहीं, हमारे राजस्व के अभिलेखों को देखकर उन पर कार्रवाई की है। मैं कहना चाहता हूं और मैं बार बार कह रहा हूं, मेरे भी दो बेटे हैं और मैं जब उनको देखता हूं तो मैं सोचता हूं कि जैसे मेरे दो बेटे हैं वैसे ही मेरी देवभूमि के सभी बच्चे हैं। मैं मानता हूं कि मेरे देवभूमि के सभी बच्चों को सुरक्षित उत्तराखंड मिलना चाहिए।
यूसीसी लाने वाला देश का पहला राज्य उत्तरखंड बना, इसके पीछे क्या प्रेरणा थी?
यूसीसी एक श्रेष्ठ भारत की कल्पना को साकार करने की शुरुआत है। यह हमारी जो विचारधारा है उस विचारधारा की तीन चार प्रमुख अवधारणाएं थी कि उनको धरातल पर उतारना है। उनमें से एक यूसीसी था। हमने 2022 के चुनाव में उत्तराखंड की जनता को वचन दिया था कि हमारी सरकार बनेगी तो हम यूसीसी को लागू करेंगे। उस समय लोग कहते थे कि कैसे लागू होगा ये तो बस घोषणा में बोल दिया है। हमने जो वचन दिया था उस वचन को हमने हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में धरातल पर उतारा और आज यूसीसी उत्तराखंड में लागू हो गया और लागू होने के बाद पूरे देश में लागू होने की दिशा में आगे बढ़ गया है।
जिस दिन यूसीसी का ड्राफ्ट हम बना रहे थे, जिस दिन हमने विधेयक प्रस्तुत किया था उस दिन हमने कहा था कि ये यूसीसी की जो गंगा है वो मां गंगा की तरह आने वाले समय में पूरे देश की सभी राज्यों को लाभ देगी।
नकल माफिया पर बोलते हुए सीएम धामी ने कहा, हमारे यहां पिछले चार वर्षों में एक भी नकल का मामला सामने नहीं आया है। कोई पेपर लीक का मामला नहीं आया है। पिछले चार वर्षों में 33 हजार नियुक्तियां हमारे राज्य के युवाओं को मिली हैं। बिना नकल के यह सब हुआ है। हमारे यहां देश का सबसे सख्त नकल का कानून है। 100 से ज्यादा नकल माफियाओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजने का काम किया।'
सीएम धामी ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए किसी भी प्रशासन के लिए आपदा एक ऐसा विषय होता है। आपदा आती चाहे जैसे भी हो और इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं होता है लेकिन उस समय जो लोग सरकार में है, प्रशासन में हैं या जिम्मेदारी के लिए चुने गए हैं। कई बार उन पर गुस्सा भी निकलता है, लेकिन कई बार इस घड़ी में लोगों ने यह भी देखा कि किस तरह सभी ने मिलकर काम किया।
सीएम धामी ने कहा कि अभी जो पिछले वर्ष की आपदाएं आई हैं। इसको लेकर भारत सरकार के सामने मैंने अपनी बात रखी थी कि ये अलग प्रकार की आपदाएं हैं। ऊपर कहीं पहाड़ों में किसी जगह बादल फटता है और अचानक से बड़ी भीषड़ा मात्रा में सैलाब नीचे आ जाता है और उसमें कुछ ही सबकुछ नष्ट हो जाता है। यह एक शोध का विषय है और हमने भारत सरकार के सामने भी इसे रखा है। जो पुरानी समय में नदी नाले होते तो उन्होंने अपना मार्ग भी बदला है और वहां पर कई जगहों पर बसावट भी आ गई है और कुछ समय वो नदी नाले अपने पुराने मार्ग पर वापस भी आ गए। इन चीजों का ध्यान रखते हुए। राज्य सरकार की ओर से जो करना है और आपदा के लिए तत्काल राहत पहुंचाने और क्विक सिस्टम जो है उन सभी को हम एक्टिवेट कर रहे हैं।
सीएम धामी ने कहा कि अब हमारा विकास का मॉडल आगामी 25 से 50 वर्षों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। सीएम धामी ने कहा, 'सिलक्यारा टनल का रेस्क्यू 17 दिन चला था। उस रेस्क्यू मॉडल को ब्रिक्स सम्मेलन में भी उदाहरण के रूप में पेश किया गया। आपदा की घड़ी में सबने मिलकर काम किया। इसे सब ने सराहा भी।' चारधाम यात्रा को लेकर सीएम ने कहा कि चारधाम यात्रा एक समय बहुत कठिन यात्रा हुआ करती थी। आज यात्रा का स्वरूप काफी बदल गया है, लेकिन नई चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। किसी यात्री को कोई परेशानी नहीं हो, उसके लिए सरकार एक यात्रा खत्म होते ही अगले साल की यात्रा की तैयारी शुरू कर देती है।
सीएम ने कहा, 'पहले के समय होता था कि जब यात्रा शुरू होने वाली होने वाली होती थी तब उसकी समीक्षा होती थी, यात्रा की तैयारियां होती थी। हमने एक नई संस्कृति शुरू की। जैसे ही 2025 की यात्रा समाप्त हुई, 2026 की यात्रा की हमने तैयारी शुरू कर दी। उसका परिणाम भी सामने आया। इस वर्ष यात्रा ने रिकॉर्ड कायम किया है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा। दो महीने कुछ दिन में 40 लाख यात्री पहुंचे। हेमकुंड साहिब भी 1 लाख 25 हजार हमारी यात्रा पहुंच गई। जो पिछले पूरे साल से 20 से 25 हजार से ज्यादा है। आदि कैलाश, जहां पूरे वर्ष भर में 400 से 500 लोग पहुंचते थे। इस वर्ष वहां भी 45 हजार के लगभग लोग पहुंच चुके हैं, अभी तो यात्रा आधी भी नहीं हुई है।'
सीएम ने आगे कहा, 'हमने उत्तराखंड में जीईपी (ग्रॉस एनवायरमेंट प्रोडक्ट) सबसे पहले लागू किया। मतलब हम कितना विकास के लिए कितनी चीजों को किस प्रकार से समन्वय स्थापित करते हैं। इकोलॉजी और इकोनॉमी और साथ में हमने टेक्नॉलॉजी को भी हमने जोड़ा है। तीनों का समन्वय करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। क्योंकि राज्य के अंदर भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी कठिन हैं। कभी अत्यधिक बरसात होती है, भूस्खलन होता है, हिमस्खलन होता है। अत्यधिक जलभराव हो जाता है। उन सबका सामना करना पड़ा है। 2025 का वर्ष हम लोगों को लिए कष्टकारी रहा है।'
संवाद के अगले सत्र 'कल, आज और कल' सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला को मैं बधाई देता हूं कि इस प्रकार के कार्यक्रम वो आयोजित करते हैं। मैं बहुत सामान्य परिवार में पैदा हुआ। लेकिन बचपन से मुझे कक्षा पांच और छह के बाद मुझे अखबार पढ़ने का एक शौक जैसा हो गया। मेरा गांव नगला तराई है खटीमा में बिल्कुल शरादा नदी के पास। वहां गर्मियों में स्कूल से आते ही बस्ता फेंकते थे और छह-छह घंटे शारदाजी में गोते लगाते थे। जैसे ही शाम होती थी तो हम अखबार पढ़ने के लिए चाय की दुकान पर जाते थे। लेकिन अखबार उनको मिलता था जो लोग उस चाय की दुकान पर चाय पीते थे या फिर समसोसा खाते थे। एक ही अखबार आता था। शाम तक उसे सैकड़ों लोग पढ़ते थे और अमर उजाला ही आता था। जिन लोगों ने आभाव में अखबार पढ़ा वो सब जानते थे कि पहले अखबार के जितने भी पेज होते थे वो आपस में बांट दिए जाते थे। एक एक करके। उस समय मैं अमर उजाला के अलावा किसी भी अखबार को नहीं जानता था। अमर उजाला के अब इस कार्यक्रम में आना और फिर आप लोगों से संवाद करना और फिर ये हरे की बात करना सच में बड़ा अद्भुत है। हमारी जो थीम है और प्रधानमंत्री मोदी जी की भी 'विरासत और विकास' दोनों साथ-साथ बढ़ें, इसलिए हमने उत्तराखंड में जीईपी (ग्रोस इनवायरमेंट प्रोडक्ट) लागू किया।
अमर उजाला के संपादक डॉक्टर इंदुशेखर पंचोली ने कहा कि उत्तराखंड और अमर उजाला का रिश्ता बहुत पुराना है उत्तराखंड के जन्म से। इसे हिंदी में हम गर्भनाल का संबंध कहते हैं। जब इस प्रदेश के वासियों ने अपने राज्य का सपना देखा, उसके लिए संघर्ष की शुरुआत की थी। अमर उजाला उनके साथ खड़ा था। स्थानीय निवासियों को जहां जरूरत हुई, अमर उजाला को हर दम साथ पाया। इस राज्य के हर दर्द और पीड़ा को अमर उजाला ने अपना दर्द समझा। इसी तरह इसकी हर खुशी अमर उजाला की खुशी होती है। उन्होंने कहा कि राज्य की विकासधारा में एक जागरूक समाचार पत्र होने के नाते अमर उजाला ने हमेशा अपनी जागरूकता का निर्वहन किया है। आप सभी के प्यार और स्नेह से ही 78 साल पूरे कर लिए हैं। आगे भी हमारे प्रयास जारी रहेंगे। आज का आयोजन निरंतरता में चौथा संवाद है। अमर उजाला ने सच और सनसनी की होड़ में हमेशा सच को चुना है। कीमत और मूल्य की दौड़ में कीमत आधारित पत्रकारिता को अहमियत दी है। हमारा यकीन समस्या के समाधान में ज्यादा रहता है और जब समाज और सरकार में सेतु की भूमिका निभाने की बात हो तो तब हम आगे खड़े नजर आते हैं।
आगे कहा कि समय के साथ नये बदलाव के साथ कदम ताल तो करते हैं। लेकिन ईमानदारी से कोई समझौता नहीं करते हैं। यही मूल्य आपके विश्वास की ढाल बने हैं। अमर उजाला यह भी मानता है कि किसी भी प्रदेश की विकास यात्रा ऐसी हो जिसमें पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन हो। प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा इस्तेमाल हो। जिसमें वर्तमान के संसाधनों की आवश्यकता पूरी हो और आने वाली पीढ़ी के लिए संसाधन बन रहें। इसलिए इस संवाद का फोकस थीम पर रखा गया है। हम सभी का प्रयास होना चाहिए कि हम इस सदी को कैसे स्वर्णिम बना सकते हैं। इसके लिए सक्रिय हों। आइए हम सब मिलकर बढ़ें स्वर्णिम शताब्दी की ओर...
अमर उजाला संवाद उत्तराखंड कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई। मंच पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पहुंच गए हैं। अमर उजाला के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्वागत किया।
देवी चित्रलेखा ने कहा कि कमाई करना जरूरी है, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि समाज से जो कुछ हमें मिला है, उसके प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना भी उतना ही आवश्यक है। जीवन की हर चीज को केवल धन के रूप में नहीं देखना चाहिए। इस संसार में दान के कई रूप हैं, जैसे कन्यादान, अन्नदान, रक्तदान और सेवा।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास सबसे बड़ी पूंजी हमारा शरीर और यह मानव जीवन है, इसलिए इसकी महत्ता को समझना जरूरी है। आज के समय में लोग धन कमाने की दौड़ में इस तरह उलझ गए हैं कि जीवन के अनमोल रिश्तों और अपनों के लिए समय ही नहीं बचता। इंसान पैसे कमाने निकल जाता है और जब तक धन आता है, तब तक बहुत कुछ पीछे छूट चुका होता है। कई बार बच्चों के साथ बैठने का समय नहीं मिलता और जब समय मिलता है, तब बच्चे खुद अपनी जिंदगी की दौड़ में निकल चुके होते हैं।
देवी चित्रलेखा ने सभी को गंगा दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, हमें अपने जीवन को केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसा जन्म, भारत जैसा देश और सनातन जैसा धर्म मिलना अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है। इससे अधिक भाग्यशाली स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।
देवी चित्रलेखा ने कहा कि खुश होने में और आनंदित होने में अंतर है। खुशी आती है चीजों से। आनंद आता है अंदर से। आनंद एक ऐसा जीवन का गुण है जो किसी के जीवन में आ गया तो उसके अलावा कुछ नहीं आएगा।
ठीक उसी तरह भगवान ने हमें इस संसार में एक अवसर देकर भेजा है। देवी चित्रलेखा ने कहा कि जब मनुष्य इस संसार को छोड़कर ईश्वर के पास जाएगा, तब भगवान उससे दो महत्वपूर्ण प्रश्न करेंगे। पहला प्रश्न होगा, मैंने तुम्हें इतना अनमोल जीवन दिया, क्या तुमने इसे आनंद के साथ जिया? उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के जीवन में सच्चा आनंद आ जाता है, उसका जीवन अपने आप सार्थक बन जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान का दूसरा प्रश्न होगा , जो आनंद तुम्हें मिला, क्या तुमने उसे दूसरों के साथ बांटा? यदि इन दोनों प्रश्नों का उत्तर हां में होगा, तभी भगवान को लगेगा कि उन्होंने मनुष्य को जीवन देकर सही निर्णय लिया और वह उस व्यक्ति से प्रसन्न होंगे।
देवी चित्रलेखा ने 'सुप्रभात देवभूमि' के साथ सत्र की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने 'हरे कृष्ण हरे राम' मंत्र का जाप करते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने सबसे पहले अमर उजाला का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कोई भी कार्य हो, उसकी शुरुआत हमेशा अध्यात्म से ही होनी चाहिए। जीवन के महत्व पर बात करते हुए देवी चित्रलेखा ने कहा कि मनुष्य के सामने दो तरह का जीवन होता है, सफल जीवन और सार्थक जीवन। सफल होना आवश्यक है, लेकिन उससे कहीं अधिक जरूरी जीवन को सार्थक बनाना है। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग सफलता को नाम, प्रसिद्धि और धन से जोड़कर देखते हैं। सोशल मीडिया पर बढ़ते फॉलोअर्स की संख्या को भी लोग सफलता का पैमाना मानने लगे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भगवान ने हमें यह अनमोल मानव जीवन किसी उद्देश्य के लिए दिया है। जिस व्यक्ति का जीवन सार्थक होता है, उसके भीतर आनंद स्वतः दिखाई देता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे विद्यालय में अवकाश के दौरान विद्यार्थियों को कार्य दिया जाता है, कुछ लोग उसे समय पर पूरा करते हैं और आगे बढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग उसे टाल देते हैं और पीछे रह जाते हैं।
देवी चित्रलेखा पहुंची अमर उजाला संवाद उत्तराखंड के कार्यक्रम में पहुंच गई हैं। वो कुछ ही देर में मंच पर पहुंचेंगी।
अपनी सहज शैली, बेबाक अभिव्यक्ति और श्रोताओं से जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले आरजे प्रवीण रेडियो जगत का एक जाना-माना नाम हैं। वर्ष 2006 में रेडियो जॉकी के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने वाले आरजे प्रवीण आज देशभर में लोकप्रिय पहचान बना चुके हैं। आरजे होने के साथ-साथ वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आपको सोशल मीडिया पर 1.2 मिलियन से अधिक लोग फॉलो करते हैं। रेड एफएम में रहते हुए आरजे प्रवीण ने न सिर्फ ‘रेड मुर्गा’ और ‘एक कहानी ऐसी भी’ जैसे चर्चित शो किए, बल्कि आईपीएल और महिला क्रिकेट विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों को भी कवर किया है।
सोशल मीडिया की दुनिया में ‘बीइंग सुकू’ के नाम से लोकप्रिय साक्षी केसवानी भी अमर उजाला संवाद उत्तराखंड 2026 का हिस्सा होंगी। कॉमेडी, डेली लाइफ सिचुएशन्स, फैशन और लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट के जरिए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी अलग पहचान बनाई है। करीब 90 लाख फॉलोअर्स के साथ सुकू आज देश की लोकप्रिय डिजिटल क्रिएटर्स में शुमार हो चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अमेजन प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘सिनेमा मरते दम तक’ से अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा। संवाद के मंच से सुकू डिजिटल कंटेंट क्रिएशन, सोशल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं के लिए उभरते अवसरों पर अपने विचार साझा करेंगी।
श्री गंगा सभा प्रबंधकारिणी, हरिद्वार के अध्यक्ष नितिन गौतम संवाद में गंगा संरक्षण, धार्मिक पर्यटन और अर्धकुंभ की तैयारियों जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। गंगा तट की परंपराओं और व्यवस्थाओं से लंबे समय से जुड़े होने के कारण उन्हें इस क्षेत्र का व्यापक अनुभव है। वे बताएंगे कि आस्था, पर्यावरण संरक्षण और व्यवस्थागत सुधारों के बीच संतुलन स्थापित कर भविष्य की चुनौतियों का सामना कैसे किया जा सकता है।
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के सीटीओ तेजस्वी घनशाला संवाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल नवाचार और उभरती तकनीकों की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे। वे बताएंगे कि तकनीक केवल उद्योगों को ही नहीं, बल्कि शिक्षा, शासन और सामाजिक जीवन को भी तेजी से बदल रही है। साथ ही उत्तराखंड जैसे राज्यों में तकनीक आधारित विकास के अवसरों पर भी चर्चा करेंगे।
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप और नई शिक्षा नीति के प्रभाव पर चर्चा करेंगी। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबे अनुभव रखने वाली प्रो. ठाकुर तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, उद्योग-अकादमिक सहयोग और युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगी।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी संवाद में धार्मिक पर्यटन और तीर्थ प्रबंधन से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखेंगे। चारधाम यात्रा और देवस्थान प्रबंधन के क्षेत्र में उनके अनुभव उत्तराखंड की धार्मिक पहचान को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देंगे। वे बताएंगे कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास की राह कैसे प्रशस्त की जा सकती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर पूर्वी कमान के पूर्व जीओसी-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राणा प्रताप कलिता अपने अनुभव साझा करेंगे। वहीं सनश्योर एनर्जी के को फाउंडर एवं चीफ बिजनेस ऑफिसर कार्तिकेय एन. शर्मा ऊर्जा क्षेत्र में उभरते अवसरों और हरित विकास की दिशा पर बात करेंगे। इस मंच पर नीति निर्माता, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, युवा और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। मकसद स्पष्ट है-उत्तराखंड को लेकर नए विचारों, नई संभावनाओं और नए रास्तों पर गंभीर चर्चा।
देवी चित्रलेखा भारत की प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता, भागवत कथा वाचिका और भजन गायिका हैं। वे देश-विदेश में अपनी ओजस्वी वाणी और आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए जानी जाती हैं। हरियाणा के पलवल में जन्मी देवी चित्रलेखा जी महज चार वर्ष की आयु से आध्यात्मिक साधना और दीक्षा के मार्ग पर अग्रसर हो गई थीं। उनकी पहली कथा सात वर्ष की आयु में वृंदावन में हुई थी। वे अब तक 35 से अधिक देशों में 600 से ज्यादा कथाओं का आयोजन कर चुकी हैं। संवाद में वे सुप्रभात देहरादून सत्र के जरिये जीवन मूल्यों, आध्यात्मिकता, भारतीय संस्कृति और वर्तमान समय में नैतिकता के महत्व पर अपने विचार साझा करेंगी।
मनोरंजन जगत का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अभिनेता राकेश बेदी करेंगे। रंगमंच, टेलीविजन और सिनेमा के लंबे अनुभव के साथ वे बदलते मनोरंजन उद्योग पर अपने विचार साझा करेंगे। अभिनेता और कास्टिंग डायरेक्टर अभिषेक बनर्जी भी इस संवाद का हिस्सा होंगे।
खेल जगत से पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ और क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा भाग लेंगे। दोनों अपने अनुभवों के जरिए युवाओं से नेतृत्व, अनुशासन और निरंतरता की बात करेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी होंगे। वे राज्य की विकास योजनाओं, निवेश और युवाओं के लिए बन रहे अवसरों पर अपने विचार रखेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
देवभूमि के विकास पर एक बार फिर मंथन करने जा रहा है अमर उजाला संवाद का मंच। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियां शामिल होंगी। 24 जून को देहरादून में आयोजित होने जा रहा अमर उजाला संवाद का यह मंच विचारों और अनुभवों को जोड़ने का प्रयास करेगा। हरिद्वार बाईपास रोड स्थित होटल गेटवे (सरोवर प्रीमियर) में होने वाला यह आयोजन उत्तराखंड के वर्तमान और भविष्य पर केंद्रित रहेगा। दिनभर चलने वाले 8 से अधिक सत्रों में राज्य के विकास मॉडल, निवेश, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, खेल, मनोरंजन, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े अवसरों पर चर्चा होगी। उद्देश्य केवल बात करना नहीं, बल्कि उन प्रश्नों को सामने लाना है जो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की दिशा तय करेंगे।