सवाल- देहरादून की आपकी कई यादें हैं। आप यहां अपने दोस्त की पासिंग परेड देखने आए थे। आपने भारतीय आर्मी में जाने का सपना भी देखा। जिस दिन वह सपना टूटा तो क्या लगा?
जवाब- पहला रिश्ता तो देहरादून से वही बना था। एसएसबी क्लियर नहीं हुआ। जीवन कभी रुकता नहीं है। आप कोई न कोई रास्ता खोजते हो। 19-20 साल का एक लड़का उस वक्त जो महसूस कर सकता था।
भारत की सेनाएं सरहद के इस पार और उस पार कार्रवाई करने में सक्षम: रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सेनाएं सरहद के इस पार और सरहद के उस पार भी कार्रवाई करने में पूरी तरह से सक्षम है। यह तो पाकिस्तान ने भी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देख लिया है। लेकिन पाकिस्तान जिद्दी बच्चे की तरह मानता ही नहीं। इसलिए पूरी दुनिया के लिए जरूरी है कि पाकिस्तान पर आतंकवाद को लेकर हर तरह का कूटनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक दबाव बनाया जाना चाहिए।
रक्षामंत्री ने उत्तराखंड से अपने जुड़ाव की बात साझा की
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पत्रकारिता एक पेशा ही नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय कर्तव्य है। जो न केवल हमें सूचना देता है बल्कि देश की सुरक्षा के प्रति हर समय सचेत, सजग और जागरूक भी करता है। आज का आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि यह उत्तराखंड में हो रहा है। उत्तराखंड से मेरा खास जुड़ाव है। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड का जब विभाजन हुआ था तो उस समय संयुक्त उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री मैं ही था।
अमर उजाला की पहुंच और पकड़ सटीक: रक्षामंत्री
करगिल युद्ध में दिखाया था शौर्य
बंकर एक ऊर्ध्वाधर, बर्फ से ढके 1000 फुट ऊंची चट्टान के शीर्ष पर थे। यादव स्वेच्छा से चट्टान पर चढ़ गए और भविष्य में आवश्यकता की संभावना के चलते रस्सियों को स्थापित किया। आधे रास्ते में एक दुश्मन बंकर ने मशीन गन और रॉकेट फायर किया, जिसमें प्लाटून कमांडर और दो अन्य शहीद हो गए। गले और कंधे में तीन गोलियां लगने के बावजूद यादव शेष 60 फीट चढ़ गए और शीर्ष पर पहुंचे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह पहले बंकर में घुस गए।
जवाब- रील और रियल लाइफ में बहुत फर्क है और फर्क हर जगह नजर आ जाता है। हमारी लाइफ सोशल मीडिया की नहीं है। हमारी लाइफ इस धरती पर कुछ और करने की है।रील बनाने का वातावरण सरहद पर खड़ा सैनिक देता हैं। जो दिन रात हर मौसम में सीमा पर खड़ा होता है। उसके पैर नहीं डगमगाते हैं, हाथ नहीं कंपकपाते हैं, नजरें नहीं झुकती हैं, बल्कि नजरों को सामने दुश्मनों पर टिका कर रखता हैं।
'संवाद' के मंच पर देशभक्ति की बात
देहरादून में अमर उजाला संवाद उत्तराखंड कार्यक्रम परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने भी शिरकत की है। योगेंद्र सिंह यादव का अमर उजाला संवाद के मंच पर स्वागत किया गया। इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने भारत माता की जय के नारे भी लगाए।
परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव
तान्या ने कहा कि हमारी मातृभाषा हिंदी है, लेकिन इंग्लिश बोलने वालों को बहुत ग्लैमरस माना जाता है। हालांकि, अब मुझे फर्क नहीं पड़ता। नीतू अब हर कोई सोशल मीडिया से कमाने की सोच रहा है। कुछ लोग तो जॉब छोड़ रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए क्या बताएंगी कि कैसे शुरुआत करें?
नीतू ने कहा, 'जो आपको पसंद हो उससे शुरुआत करें। अगर कुकिंग पसंद है तो कुकिंग से करें। गेमिंग पसंद है तो गेमिंग से। मुझे पता चला कि मुझे एक्टिंग करना पसंद है। सबसे यही कहूंगी कि आपको जो पसंद हो उससे शुरुआत करें। व्लॉगिंग पसंद है तो वह करें'।
लखन ने इस दौरान शायरी सुनाई
तेरी रजा मैं समझा ही नहीं
जब चाहा जिता दिया
जब चाहा हरा दिया
मैं क्या हूं ये खुद भी नहीं जानता मैं
कभी कहा उसने चांद मुझे कभी आसमान से गिरा दिया
नीतू ने कहा, 'हमारी शादी को दो साल हो गए हैं, लेकिन मैंने आज तक लखन को हां नहीं कहा'। लखन ने कहा, 'मैंने जिस चीज के लिए प्रपोज किया, वह काम हो गया। मैंने शादी के लिए प्रपोज किया और शादी हो गई'। लखन ने आगे बताया, 'मैं नीतू से मिला। हमने कुछ कंटेंट बनाया तो काफी नंबर मिले। हम लोगों ने साथ में मिलकर आगे बढ़ाने का सोचा। लोगों को हमारी जोड़ी पसंद आने लगी। नीतू घर आती थी तो मम्मी को वह पसंद आने लगी। उन्होने कहा कि इसे बहू बना ले। फिर साथ में हमने काम किया। मैंने इस दौरान कहा कि तू मुझे अच्छी लगती है। मुझे गर्लफ्रेंड नहीं बनाना। शादी कर ले। उसके बाद नीतू ने अपने घर बात की और सब लोग मान गए।'
नीतू ने कहा कि मेरी मम्मी चाहती थीं कि मैं सरकारी नौकरी करूं। लेकिन मैं 9 से पांच की नौकरी नहीं करना चाहती थी। मैंने इंस्टाग्राम से शुरुआत की। मैंने और लखन ने साथ में वीडियो बनाना शुरू किया। कोविड लॉकडाउन था। हमने कंटेंट बनाना शुरू किया और लोगों ने बहुत प्यार दिया। वहीं से शुरुआत हुई। लखन तो क्रिकेट खेलते थे। मैं मॉडलिंग और शूट करती थी। मुझे लगता था कि मुझे कुछ और चाहिए। अब हमारे 15 यूट्यूब चैनल हैं। हर जगह अलग कंटेंट बनाना आसान नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया ने हमें नाम दिया, लोगों ने इतना प्यार दिया। हम ब्लैस्ड हैं।
मैं क्रिकेट खेलता था। सोशल मीडिया मेरे प्लान में था ही नहीं। मुझे लगता था कि ये क्रिएटिव लोग करते हैं। अब लगता भी है कि यहां जिनता सोचते हैं उससे 10 गुना ज्यादा मेहनत लगती है। आप स्क्रिप्ट भी लिख रहे हो, एडिट भी कर रहे हो, शूट भी कर रहे हो। मैंने कभी सुना ही नहीं कि यह प्रोफेशन भी हो सकते हैं। मैं कहूं तो चैलैंज यहां उतने नहीं हैं। अगर आप अपना दिमाग अच्छे से चलाना जातने हो। संसाधन हैं तो आप बेहतर कर सकते हो। आप जो बाहर जाकर संघर्ष करते हो, उससे बहुत कम है। हां, यहां के चैलेंज हैं लेकिन अलग तरह के हैं। हमें लोगों ने अपना प्यार दिया। हम उनके लिए कंटेंट बनाकर उनके विश्वास पर खरे उतर सकते हैं।
तान्या ने कहा कि मैंने आज करीब 200 से ज्यादा लड़कियों को गोद लिया है। नौ शेल्टर होम चला रही हूं। इसके अलावा अपनी फैक्टरियों के चलते ढाई सौ से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं। जरूरतमंद बच्चों को अपने पास रखते हैं। मैं जिस परिवार से हूं, वहां लड़कियों पर बहुत बंदिश होती हैं। 23 साल की उम्र में शादी हो जाती हैं। मेरे कभी फ्रेंड नहीं रहे। मैं हाथों से कार्ड बनाती थी। ऑटो से डिलीवर करने जाती थी। छोटे-छोटे ऑर्डर लेती थी। इंस्टाग्राम आईडी इसलिए बनाई, क्योंकि मेरे पापा को इंस्टाग्राम चलाना नहीं आता था। मम्मी से बोलती की फ्रेंड के यहां पढ़ने जा रही हूं। ग्वालियर से दिल्ली के सदर बाजार आती थी। सामान खरीदती थी। रात को वापस ग्वालियर लौटती थी। मेरे पास कोई इनवेस्टर नहीं था। आज भी मेरे पास कोई पार्टनर और इनवेस्टर नहीं है। मुझे लगता है कि यह बच्चों की दुआ है। एक लड़की के लिए ग्वालियर से यहां अमर उजाला के मंच तक आना मेरे लिए चमत्कार से कम नहीं।
इस पर तान्या ने कहा, 'देवभूमि में आकर मैं बहुत उत्साहित हूं सबसे पहले तो। बाकी मुझे ऐसा लगता है कि मेरे साथ जो कंट्रोवर्सी होती हैं, वह उस लक्ष्य के सामने बहुत छोटी हैं, जो मैंने देखा है। किसी मंदिर का आपको वीडियो बनाना है तो आपको कोई पैसा नहीं मिलता। इसलिए, इस जोनर को कोई चुनता नहीं। मेरे साथ जो कंट्रोवर्सी हुई, मुझे यही लगा डर के चलते क्या ईमान की बात नहीं करोगे?'
इस पर नीतू ने कहा, 'मैं कहूंगी कि सब अपने तरीके का कंटेंट बनाते हैं तो उनके लिए वही रियल है। हम जो बनाते हैं वो हमारे लिए रियल है। लोग जो बनाते हैं वो उनके लिए रियल है। लेकिन, मुझे लगता है कि व्लॉग्स रियल कंटेंट है, जिसमें आप हर दिन की दिनचर्या दिखाते हैं'।
इस पर उन्होंने कहा, 'कुछ प्लेटफॉर्म आए जिन्होंने कहा कि आपके वीडियो बहुत हिट करते हैं। आप हमारे लिए वीडियोज डाला करो। मुझे लगता है कि क्रिकेट की वजह से ही यह सब हो पाया है'।
उद्यमिता और सोशल मीडिया की बात सत्र में उद्यमी और इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट, लखन रावत और तान्या मित्तल ने शिरकत की।
हरभजन सिंह ने कहा कि गांगुली ने वह टीम बनाई थी। धोनी ने इसे आगे बढ़ाया। आज 14 साल का लड़का वैभव सूर्यवंशी ने शतक लगाया, यह कितनी बड़ी बात है। आपने देखा या नहीं, स्टेडियम में वैभव का बैनर लिए एक लड़का बैठा था और उस पर लिखा था कि 2030 मैं आपका बैटिंग पार्टनर बनूंगा। वो कितना बड़ा ख्वाब देख रहा है। मैंने कहा न ख्वाब सच होते हैं और उनके होते हैं जो इसे देखते हैं। यह हर उस बच्चे के लिए है जो कुछ बड़ा करने का ख्वाब देखता है। जब वैभव किसी गांव से निकलकर खेल सकता है तो सिर्फ लगन होनी चाहिए और रास्ता होना चाहिए।
हरभजन सिंह ने कहा कि इस देश में क्रिकेट इतना बड़ा स्पोर्ट्स है, हम सब क्रिकेट की वजह से हैं और आप सब लोगों की वजह से हैं। आप लोग इस गेम को इतना देखते हो, इससे प्यार करते हो तभी तो यह खेल बढ़ता है। आज जब भी कोई मैच होता है और आप जुड़ते हो तो ये दिखाता है कि हम एक हैं। एकजुट हम प्रार्थना करते हैं कि भारत जीत जाए। वहां न तो कोई धर्म है, क्योंकि हर कोई भारत की जीत चाहता है। इसी तरह आम जिंदगी में भी अगर हम एक हो जाएं तो भारत तो जीतेगा ही। अब मैं आपके सवाल पर आता हूं। क्रिकेट का वो दौर जो था वहां मैच फिक्सिंग वाला स्कैंडल हुआ। आप सभी निराश हुए कि क्रिकेट में ये सब होता है। लोगों को दोबारा मैदान में लाने के लिए आपको उनका भरोसा जीतना होगा और यह दिखाना होगा कि आप जीतोगे। कहां जीतोगे, जब आप अपने से बड़े पहलवान को हराओगे। जब हमने ऑस्ट्रेलिया को हराया तो लोगों को लगा कि हमारी टीम में दम है। ये वो वाली टीम नहीं है। कुछ व्यक्तिगत लोग थे जो गलत काम करके पैसे बनाना चाहते थे, लेकिन अगर इसे ठीक तरीके से खेलें तो इससे बढ़िया कुछ नहीं है। इसमें नाम शोहरात सबकुछ है। जब देश के लिए खेलते हो तो साफ पाक रहकर खेलना है। अपनी जमीर को नहीं बेचना है। 2001 की वह सीरीज ने लोगों में यकीन जगाया कि यह टीम जीत सकती है।
हरभजन सिंह ने कहा कि मैंने क्रिकेट इसलिए खेलना शुरू किया था क्योंकि यही मेरा सपना था। पढ़ने में मैं बहुत ज्यादा होशियार था नहीं और जितना मन खेल में लगता था, उतना पढ़ाई में लगता भी नहीं था। मैं क्रिकेट से पहले जूडो खेलता था, उसमें बहुत मार खाई क्योंकि दुबला-पतला था। देखा कि इसमें तो रोज पिटाई हो रही है तो वो छोड़ दिया। बैडमिंटन खेला, लेकिन उसमें भी मन नहीं लगा। मन क्रिकेट खेलने में था और जिस दिन से मैदान जाना शुरू किया, बस एक ही सपना देखा कि कपिल देव जैसा बनना है।
पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने कहा कि आपने कहा था कि एक शब्द में अगर जिंदगी को पिरोना है तो मेरी जिंदगी के सबसे बेहतरीन लम्हें मैदान पर ही बीते हैं। जब मैदान पर जाता हूं तो मुझे खुशी होती है। टीम इंडिया की जर्सी पहनने से बड़ी चीज मेरे लिए कुछ नहीं है। बहुत कम लोगों को ऐसा मौका मिलता है, जब वो देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। मैं खुद को सौभाग्यशाली समझता हूं कि मुझे देश को क्रिकेट के जरिये सर्व करने का मौका मिला। मैंने हर बार कोशिश की है कि हमारा झंडा हमेशा ऊपर रहे। उसमें कभी कभी हम पीछे रह जाते हैं। प्रयास हमने पूरा किया। मेरे लिए सबसे बेहतरीन लम्हा विश्व कप जीतना और उस टीम का हिस्सा रहना सबसे बड़ा पल था। किसी भी खिलाड़ी के लिए विश्व कप जीतना एक गोल होता है। उससे बड़ा कुछ नहीं है, उससे ज्यादा सुकून देने वाला कुछ नहीं है। वो आप लोग की जीत है। आप सब बस टीवी पर देखते हो, लेकिन दुआ करते हो कि हरभजन अच्छा खेल जाए, जहीर अच्छा खेल जाए...तो ये दुआएं कौन किसके लिए करता है। हमारे लिए इतने सारे लोग दुआ करते हैं। जहां पर चीजें खत्म होती हैं वहां से दुआएं शुरू होती हैं। शुक्रिया आपका मेरे लिए दुआ करने के लिए।
हरभजन सिंह ने कहा कि श्रेयस अय्यर जैसा खिलाड़ी टीम के नहीं है, पता नहीं उसे क्या करना होगा। उसे जहां जहां मौका मिला उसने अच्छा किया। 2023 विश्व कप में उसने अच्छा खेला, जिस गति से उसने रन बनाए वो जीत वाले रन थे। लेकिन फिर भी उसको सेंट्रल कॉन्ट्रेक्ट नहीं मिला। उसके बाद चैंपियंस ट्रॉफी में भी शानदार खेला, कॉन्ट्रेक्ट तो मिला लेकिन मौका नहीं। आईपीएल में भी उसने अपने दम पर टीम को जिताया। कहीं न कहीं उनको भी लिया जा सकता था। शायद चयनकर्ता की सोच अलग है। हम सीमित ओवर में अलग कप्तान सोच रहे हैं और टेस्ट में अलग कप्तान सोच रहे हैं, मेरे लिहाज से जिसका फॉर्म अच्छा है, जो जब अच्छा खेल रहा है उसे तब खिलाना चाहिए। मेरे ख्याल से श्रेयस को होना चाहिए था।
हरभजन सिंह ने कहा कि बड़ी चुनौती है। इंग्लैंड, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया मुश्किल होते है। बड़े खिलाड़ी नहीं है। अनुभव की कमी खलेगी। इंग्लैंड दौरा आसान नहीं, चैलेंजिंग टीम है। यंग टीम है, लेकिन टेलेंट की कमी नहीं है। पंत और गिल की जोड़ी ने गाबा का घमंड तोड़ था, लेकिन हमारे सदस्य अच्छा करेंगे। जब जिम्मेदारी मिली है तो वो अच्छा करेंगे। अगर टीम नहीं जीते तो भी जल्दी जज नहीं करना चाहिए। क्योंकि रिवाज है जीत गए तो वह वाह नहीं तो प्लेयरों की बैंड बजा दो। जीत जाए तो सोने पर सुहागा नहीं तो सीखने को मिलेगा। टीम इंडिया का भविष्य उज्जवल है। भारत का भविष्य उज्जवल है।
इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया ये तीनों दौरे बहुत मुश्किल होते हैं। युवा कप्तान हैं शुभमन गिल और उनके साथ जो टीम है वो भी युवा है। अब तो विराट कोहली भी नहीं हैं और रोहित शर्मा नहीं हैं। बहुत सारे खिलाड़ी जिनके पास अनुभव था वो टीम के साथ नहीं हैं।
खेल की बात सत्र में पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह अपनी बात रख रहे हैं। सबसे पहले उन्होंने अमर उजाला का शुक्रिया किया। उन्होंने कहा कि आपने मुझे इस लायक समझा कि आपके सामने आ सकूं और अपनी कहानियां साझा करूं। बंगलूरू में जीत के बाद जो भगदड़ हुई, जिसमें बहुत सारी जिंदगियां गईं। एक बहुत दुख देने वाली यह घटना है। जो किसी भी तरह की जीत को पीछ छोड़ जाती हैं। जो जिंदगियां चली जाती हैं वो वापस नहीं आएंगी। उसका कारण लोग ढूंढने लगे कि क्या कारण है, किस वजह से हुआ और लोग अपनी अपनी प्रतिक्रिया देने लगे। मेरी समझ में यह बहुत गलत हुआ। जो जानें गई हैं। वो परिवार जिनके सदस्य चले गए हैं, वो वापस नहीं आने वाले हैं। ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर सियासत नहीं होनी चाहिए। दोषी ठहराना इसको या उसको सही नहीं है। मुझे लगता है जो हुआ वो बहुत गलत हुआ, लेकिन मैं यही कह सकता हूं आगे से ऐसी दुर्घटनाएं न हों उसका ध्यान में रखते हुए इंतजाम करना चाहिए।
अपूर्व रंजन ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबको समझ आ गया कि सेल्फ डिफेंस जरूरी हैं इसलिए लोगों का भरोसा इस तरह की कंपनियों पर बढ़ा। हम भी इसी तरह की कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि स्टार्टअप में निवेश हाई रिस्क हाई रिटर्न असेट क्लास है। अगर हमने रिस्क नहीं लिया होता तो आपके सामने ओयो रूम्स, भारत पे और शिप रॉकेट जैसी कंपनियां नहीं होती।
आज हमारी 11 यूनिकॉर्न हैं। भारत में 110 यूनिकॉर्न्स हैं, उसमें से 11 हमारी है। इसलिए रिस्क लेना पड़ता है। ये उनके लिए रिस्क लिया जा रहा है, हमारे फ्यूचर हैं। ये स्टार्टअप्स छोटे-छोटे शहर से आ रहे हैं। उनकी उम्मीदों को पंख देने के लिए रिस्क लेना जरूरी है। रिस्क हर क्षेत्र हैं। पर स्टार्टअप्स को सफलता मिलती है तो वे रोजगार क्रिएट करते हैं। इसमें निवेश का फायदा यह है कि हम स्टार्टअप्स के मामले में दुनिया में तीसरे देश बन चुके हैं। हालांकि, स्टार्टअप्स के निवेश के मामले में हिट रेशियो थोड़ा काम होता है।
अपूर्व रंजन ने कहा कि हाई रिस्क हाई गेन खेल है। हर तीसरे दिन एक स्टार्टअप को फंड करते हैं। उन्होंने ओयो, भारत पे, रेल लेना पड़ता है। इसी का परिणाम है कि 111 यूनिकॉर्न में से 11 हमारे हैं। हर चीज में रिस्क है। गोल्ड में निवेश में रिस्क है। 58 हजार स्टार्टअप ने अप्लाई किया। इसमें से 500 में पैसा लगाया है।
डॉ. स्वरूप मोहंती ने कहा कि हेल्थ जरूरी है लेकिन वेल्थ मन में रहता हैं आपका एक ही साथी है पैसा। इसलिए निवेश करना जरूरी हैं ना विवेश करना क्राइम है।
उत्तराखंड अमर उजाला संवाद के मंच पर स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन की बात सत्र में मिराई असेट्स के सीईओ डॉ. स्वरूप मोहंती और वेंचर कैटेलिस्ट के को-फाउंडर डॉ. अपूर्व रंजन शर्मा शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान डॉ. स्वरूप मोहंती ने कहा कि जो हम कंट्रोल कर सकते हैं, उसपर काम करते हैं। हम रात गई बात गई के आधार पर काम करते हैं। पैसा ट्रस्ट का बिजनेस है। इस भरोसे को बनाए रखना जरूरी है। यह बहुत ही डिसिप्लीन का काम है। इस देश में अगर कोई इन्वेस्ट न करें तो दिक्कत है। भारत में तीन जेनरेशन एक साथ इन्वेस्ट कर रहे हैं। तीनों के रिस्क प्रोफाइल अलग हैं। तीनों पीढ़ी की अलग-प्राथमिकताएं हैं।
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि केवल महादेव का राज है। महादेव की उपासना। आज हमने 12 हजार नए साधु बनाए। दुनिया के सभी लोग हमारे शिविर में आए। 50 लाख लोगों को भोजन कराने का भाव था, 2.27 करोड़ लोगों ने हमारे शिविर में भोजन किया। छोटा-बड़ा, हर प्राणी आया। अंत:करण में सहजता, सरसता हो तो हर प्राणी आपसे मिलने के लिए आतुर होगा।
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि मैं उन लाइब्रेरियों में गया, जहां जाना प्रतिबंधित है। हमारे शास्त्रों को अरबी-फारसी में अनूदित कर छुपा दिया गया था। हमने एक हजार साल पुरानी पुस्तकों को एकत्रित किया और संचित किया। आज हम उसके माध्यम से हवन-पूजन कर पाते हैं। हमने हिंदी-अंग्रेजी में उसका अनुवाद करवाया। धर्म की परंपरा में ग्रंथ बचेगा तो संस्कृति बचेगी।
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि जब मैंने यह साधना 35 वर्ष पहले जब प्रारंभ की तो मैं इसे पूजन कक्ष में करता था। एक-दो लोग देखते थे। आज तक इस पूजन को 200 करोड़ लोगों ने देखा है। अगर आप असली हैं तो किसी यंत्र की आवश्यकता नहीं है। ईश्वर आपके साथ है। महादेव ने मेरा चयन किया कि तुम इस कर्म को करो। नवरात्रि के एक हवन में मैंने एक जज साहब को बैठाया। वहां तापमान सौ डिग्री तापमान था। इतने तापमान में कोई कैसे हवन कर सकता है? तो भगवती कहती है कि तुम हवन तो करो, मैं कराऊंगी। भगवती सारे रोगों से दूर करने में समर्थ है। आज करोड़ लोग महादेव के उपासक हुए। ...महादेव एक बार नाराज होकर समाधि लगा लेते हैं। तजी समाधि संभु अबिनासी। फिर राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे॥ यानी सबके नाम से जब राम नाम निकला तो सब महादेव के पास आए। महादेव ने कहा कि समाधि टूट गई। तब उन्होंने कहा कि मैं राम का चिंतन कर रहा था। हर दिन 50 ग्राम और पूरे श्रावण में एक लीटर पानी हम पीते हैं, लेकिन महादेव नहीं मिलेंगे। प्रथम भगति संतन कर संगा। जब तक शरीर में प्राण रहेगा, महादेव साधना कराएंगे।
डॉ स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। भगवान कृष्ण कहते हैं कि अर्जुन युद्ध करो! अर्जुन ने कहा कि ये सब के सब मेरे सगे हैं। मैं किनसे युद्ध करूं। ...संवाद का निष्कर्ष ही पथप्रदर्शक होगा। तब भगवान कृष्ण ने कहा- सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। यानी मेरी शरण में आओ। अर्जुन का मन अशांत रहता है तो भगवान कृष्ण कहते हैं कि धर्म से स्वयं का कल्याण किया जा सकता है।
डॉ स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि जोग लगन ग्रह बार तिथि, सकल भये अनुकूल। चर अरु अचर हर्षजुत, राम जनम सुख मूल।। ये पांच जब अनुकूल हुए, तब भगवान राम आए। आज अमर उजाला संवाद जैसा संवाद हमारे माता-पिता ने किया होगा, तभी मैं संन्यास मार्ग पर आया। निषद कहते हैं वाणी को। तुलसी इस संसार में, सबसे मिलिए धाय ना जाने किस वेश में, नारायण मिल जाए। हर संन्यासी का एकमात्र उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति होता है। परमात्मा कहां नहीं है। हम अपने धर्म में नियत रहें, सिद्धि मिल जाएगी, प्रभु को प्राप्त कर लोगे। भगवान कृष्ण कहते हैं कि कोई ऐसा प्राणी नहीं है, जिसमें मैं विद्यमान नहीं हूं। जिस दिन कोई संन्यासी बनता है तो संन्यासियों के संपूर्ण कर्तव्य समाप्त हो जाते हैं। उसका पिंडदान हो जाता है। परमात्मा का आलिंगन और सबका कल्याण, यही उद्देश्य रह जाता है। केवल परमात्मा की अभिलाषा रखने वाला ही संन्यासी है।
अध्यात्म की बात सत्र में आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 परम पूज्य गुरुदेव डॉ स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज शामिल हुए हैं। स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि आभास तो केवल उत्तराखंड में ही होता है। पूज्य शंकराचार्य जी ने 16 वर्ष की उम्र में इस भूमि का चयन किया। यहां दिग्विजय किया और अंतिम समाधि यहीं ली। उत्तराखंड का चयन संन्यासियों के लिए सर्वोपरि है। देवताओं को जानने के लिए देवता बनना पड़ता है। उत्तराखंड में जो निवास करता है, वह देवताओं से कम नहीं है।
उत्तराखंड अचीवर्स फीचर का अनावरण किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड अचीवर्स फीचर का अनावरण किया। उत्तराखंड अचीवर्स के लिए आज खास पल है। उत्तराखंड अचीवर्स का मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया। ये वो अचीवर्स हैं, जिन्होंने अपने-अपने कार्य क्षेत्र में अपना अतुलनीय योगदान दिया है।
सीएम धामी ने कहा कि मैं पार्टी का सामान्य कार्यकर्ता हूं। मैंने अपने लिए कभी कोई पद नहीं मांगा। कभी ये नहीं सोचा कि कुछ बनूंगा। हमेशा सोचा कि कुछ करूंगा।
मैं खुद चुनाव हार गया था लेकिन पूरे राज्य में जनता ने हमें जीता दिया था। देवभूमि उत्तराखंड के लोग सच में बहुत दूर दृष्टि वाले हैं। हमारे प्रधानमंत्री बहुत दूर दृष्टि वाले हैं। जिन्होंने एक सामान्य परिवार के बेटे को जिम्मेदारी दी। पहली बार मुझे जब जिम्मेदारी मिली मुझे पता नहीं था। मैं विधानमंडल की बैठक में सबसे पीछे बैठा था। अचानक मेरा नाम बुला तो मेरा मोबाइल गिर गया, मैं उसे ढूंढता रहा। लोगों ने कहा कि आपको आगे जाना है, आप मोबाइल ढूंढ रहे हैं। चलिए आगे बढ़िए। आपको आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि रिजल्ट आया तो थोड़ी देर मन दुखी हुआ। लेकिन फिर मुझे लगा कि भले ही मैं चुनाव हार गया लेकिन मेरी पार्टी जीत गई।
सीएम धामी ने कहा कि हम चाहते हैं कि देवभूमि में हर व्यक्ति कानून से जिए। क्या अवैध अतिक्रमण को कोई सही ठहराएगा। हमने कोई व्यवस्था नहीं तोड़ी। जगह-जगह पर नीली, पीली चादर बिछाकर सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ था। इसे कब्जा मुक्त कराया है। कालू सिद्ध मंदिर को सड़क के लिए पीछे किया है। हम चाहते हैं कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। पहचान छिपाकर रहना गलत है। ऐसे लोगों की वजह से हमारी डेमोग्राफी भी बदल रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। ये देवभूमि है। यहां देवों ने तप किया है। हम दुनिया में कहीं भी जाते हैं तो जैसे ही उत्तराखंड का नाम बताएंगे तो सामने वाले कि धारणा बदल जाती है।
उत्तराखंड देवभूमि, चार धाम, गंगा यमुना, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगा प्रदेश है। यहां के हर परिवार कोई न कोई सेना में सेवा देता है। हर पांच में से एक सैनिक सेना में है।
यहां हर पांच साल में सरकार बदलने का मिथक था। चुनाव से ठीक पहले जिम्मेदारी दी गई थी। हमने जनता से किया था उसे वचन निभाया। हमने सबके लिए समान कानून बनाया है। किसी को टारगेट नहीं किया। देवभूमि में अगर ये काम करते हैं तो हमें गर्व है।
सीएम धामी ने कहा कि हम प्रधानममंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा 2022 में विधानसभा का चुनाव हुआ। चुनाव में जाते समय हमने देवभूमि उत्तराखंड के लोगों के सामने अपना संकल्प रखा। हमने वचन दिया कि हमारी सरकार गठित होती है, आप हमें मौका देंगे तो हम सबसे पहले उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के लिए शुरुआत करेंगे। इसके पीछे हमने कुछ कारण भी गिनवाए। हमने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है।
यूसीसी पर सीएम धामी ने कहा कि देश में पिछले कई माह से इस पर चर्चा हो रही है। समान नागरिक संहिता का प्रावधान भारत के संविधान में किया गया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में इसका प्रावधान किया गया है कि राज्य इसको लागू कर सकते हैं। हमने संविधान सम्मत काम किया है। त्वरित काम करने के लिए जनता ने हमें मैनडेट दिया। अपना आशीर्वाद दिया।
सीएम धामी ने कहा कि भू-कानून से निवेशकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लोग यहां जमीन लेकर दुरुपयोग करते थे। हमने उसे रोकने, राज्य के अस्तित्व को बनाये रखने के लिए ये कानून लाए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमने 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की थी। देश-दुनिया के उद्यमियों को बुलाया। हमने उससे पहले यहां की इंडस्ट्री के लोगों के साथ संवाद किया। उन्हें कोई परेशानी तो नहीं। उनके सुझाव के आधार पर हमने 25 नई पॉलिसी बनाई। हमें दो से ढाई लाख करोड़ की उम्मीद थी लेकिन तीन लाख 54 हजार करोड़ के एमओयू हुए। 90 हजार करोड़ की योजनाओं की ग्राउंडिंग हो गई। इससे अच्छा आंकड़ा आ सकते हैं। हम ग्राउंडिंग सेरेमनी भी करेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की हमारी क्षमता 25,000 मेगावाट बिजली पैदा करने की है लेकिन पर्यावरण के नियमों की वजह से हमारी परियोजनाएं लटक गईं। हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। रूपसिया बगड़ में स्वीकृति मिली है। जो बिजली पैदा होगी, वो पूरे देश के काम आएगी।
सीएम ने कहा कि हमने राज्य में जीईपी लागू किया है। उस पर काम कर रहे हैं। हमने इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन पर काम किया है। हम अपनी नदियों, गाड, गदेरे, श्रोत को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
सीएम धामी ने कहा कि हमारे लिए आपदा बहुत बड़ी चुनौती है। बरसात में नदी, नाली, गदेरे उफान पर आ जाते हैं। पहाड़ में एवलांच, भूस्खलन आ जाते हैं। हमारे लिए चुनौती है लेकिन हमने काम किया। हमने 28 नवम्बर 2023 को विश्व आपदा सम्मेलन कराया, उसमें चर्चा हुई। आपदा को हम रोक नहीं सकते लेकिन उसका नुकसान कैसे कम कर सकते हैं इसको सिलक्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन सभी ने देखा।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री का गंगा मैया से एक रिश्ता है। मैं उनको गंगा पुत्र भी कह सकता हूं। जैसे गंगा मैया ने उन्हें बनारस बुलाया, वैसे ही अपने मायके बुलाया। राज्य में 6 माह यात्रा बंद रहती है। शीतकाल में हमें काफी संभावनाएं लगी। शीतकालीन गद्दी स्थलों पर पूजा-पाठ लगातार चलते हैं। हमने लोगों को बताया कि इस समय में भी दर्शन कर सकते हैं। हमारे राज्य में शीतकाल में धूप ताप सकते हैं। इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने घाम तापो पर्यटन की बात कही।
विकसित राज्य होंगे तो देश विकसित होगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में तमाम योजनाएं यहां आई हैं। आने वाले समय में दिल्ली से देहरादून 2 से 2.30 घंटे में इस दूरी को पूरा कर लिया जाएगा। यह अब कुछ ही महीनों की बात है। हमने रिस्पना-बिंदाल पर एलिवेटेड सड़क 26 किमी की बनाने की योजना तैयार कर ली है। केंद्र सरकार ने भी इसमें हमारे सहयोग की बात की है। देश मे सतत लक्ष्यों को प्राप्त करने में देवभूमि उत्तराखंड को पहला स्थान मिला है। योजनाएं देश के लिए एक समान बनती हैं। हम चाहते हैं कि हमारे लिए अलग बना दें। हमारी आबादी 1.25 करोड़ है लेकिन हमें यहां आने वाले 8 करोड़ लोगों की व्यवस्था करनी पड़ती है। आने वाले समय में हेमकुंड का रोपवे स्वीकृत हो गया है इसके कारण 45 मिनट में यह यात्रा पूरी हो जाएगी। केदारनाथ में रोपवे भी स्वीकृत हो चुका, यात्रा आसान होगी।
महाराष्ट्र के एक आदिवासी क्षेत्र, जिसे वहां का कालीपानी माना जाता था, में पहुंचकर जब डॉ. अजय बंग की टीम ने वहां लोगों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में जाना। यहां के ग्रामीण लोगों ने चार प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं बताईं। 50 गांवों के लोगों ने तीन दिन चर्चा करने के बाद वोटिंग करके 35 साल पहले ये चार समस्याएं बताईं।
ये हैं वो चार समस्याएं
पहला, नवजात शिशु की मृत्यु
दूसरा, पुरुष शराब पीके पड़े रहते हैं
तीसरा, महिलाओं को बहुत कमजोरी है
चौथी, दिनभर काम करने के बाद पीठ, कमर और जोड़ों में दर्द रहता है।
डॉ. बंग ने कहा कि भारत की व्याख्या जो है अन्य किसी पर निर्भर नहीं है, जो स्व में स्थित है वह स्वस्थ्य है। यह व्याख्या महात्मा गांधी के पोते ने डाॅ. अजय बंग ने सिखाई थी।
डॉ. अभय बंग सामुदायिक स्वास्थ्य शोधकर्ता हैं, जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में काम कर रहे हैं। उन्होंने शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से पहल और कार्यक्रम विकसित किए हैं। उनके प्रयासों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने भी सराहा है। अभय ने सोसाइटी फॉर एजुकेशन, एक्शन, एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ (सर्च) की स्थापना की, जो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में काम करती है। अमर उजाला संवाद मंच से वह अपने अनुभवों को साझा करेंगे और ग्राणीण स्वास्थ्य और इसमें शिक्षा की भूमिका पर चर्चा करेंगे।
आरोग्य स्वराज के बारे में बताते हुए डॉ. बंग ने कहा कि जो स्व में स्थित है वह स्वस्थ्य है, जो दूसरों पर निर्भर है वह अस्वस्थ है। यही भारत की सेहत की व्याख्या है। भारत की हेल्थ की व्याख्या ही इतनी सुंदर है कि उसमें अन्य लोगों पर निर्भरता से मुक्ति है। उसमें निहित है। हमारी सेहत की व्याख्या जो है हम डॉक्टर लोग तो ऐसे गिनेंगे अक्सर कि वजह कितना है, बीपी कितना है? शुगर कितना है, फिर कहेंगे कि ये सेहतमंद है नहीं।
जन जन की सेहत की बात सत्र में एसईएआरसीएच के निदेशक डॉक्टर अभय बंग ने कहा कि जिस बारे में आपसे बात करना चाह रहा हूं वो है 'जन जन की सेहत' आखिर ये जन हैं कौन? दुनिया की जो सबसे बड़ी आवादी वाला जो देश है वो जन है। 140 करोड़ लोगों में से हर साल 80 लाख लोग मर जाते हैं। 140 करोड़ लोगों तक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे पहुंचे और ये 80 लाख मृत्यु कम कैसे हों। यह हमारे लिए चुनौती है। इस पर आज बात करते हैं, जब हम 140 करोड़ लोगों तक सेहत पहुंचाना चाहते हैं तो यह सेहत क्या प्रोडक्ट है, बाजार में मिलता है पैकेज। अमेरिका से जब 40 साल पहले में लौटा तो मेरी मुलाकात एक बूढ़े व्यक्ति से हुई चूंकि वो थोड़ा थोड़ा महात्मा गांधी की तरह दिखते थे तो दिमाग में रह गए, बाद में बताता हूं कि वो कौन थे। उन्हें बताया कि यह डॉक्टर अभय है और अमेरिका से आए हैं। उस व्यक्ति ने मुझसे पूछा तो बताओ कि सेहत की भारतीय व्याख्या क्या है? मैं असमंजस में आ गया, दस साल मेडिकल की पढ़ाई की थी लेकिन सेहत की भारतीय व्याख्या का कभी जिक्र ही नहीं हुआ था।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम की दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरुआत हो गई है।
तानिया मित्तल ऊर्जा, आत्मविश्वास और नवाचार की मिसाल हैं। वह भारत की सबसे तेजी से उभरती हुई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर व महिला उद्यमियों में शुमार हैं। अपने दम पर खड़ी की गई पहचान के दम पर उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाखों लोगों को न सिर्फ प्रेरित किया, बल्कि उन्हें खुद पर विश्वास करना भी सिखाया। तानिया का सफर एक सामान्य युवती से शुरू होकर एक सफल स्टार्टअप फाउंडर तक पहुंचा। उन्होंने महिलाओं के लिए फैशन और लाइफस्टाइल ब्रांड लॉन्च किया, जिसने बहुत ही कम समय में बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई। वे न सिर्फ ब्रांड प्रमोशन और डिजिटल मार्केटिंग की विशेषज्ञ हैं, बल्कि कई राष्ट्रीय मंचों पर महिलाओं के सशक्तीकरण और युवा उद्यमिता पर बोल चुकी हैं। अपने शानदार कंटेंट, नवाचारी सोच और साहसिक फैसलों के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स से सम्मान भी मिल चुका है।
स्वरूप मोहंती मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के वाइस चेयरमैन और सीईओ हैं। उनके नेतृत्व में कंपनी के पास फरवरी 2025 तक 1.9 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति प्रबंधन है, जिसमें से 70 फीसदी इक्विटी और 11 फीसदी डेब्ट में निवेश किया गया है। मोहंती बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों को सावधानी से निर्णय लेने की सलाह देते हैं। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट, बीकॉम (ऑनर्स) की पढ़ाई की है। साल 2023 में वह वाइस चेयरमैन के रूप में नियुक्त हुए। वे मौलिक विश्लेषण और सावधानीपूर्वक स्टॉक चयन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। मोहंती का मानना है कि वर्तमान बाजार मूल्यांकन एक चिंता का विषय है, खासकर स्मॉल कैप और थीमैटिक क्षेत्रों में। हालांकि, वे यह भी मानते हैं कि कई व्यवसाय निष्पक्ष मूल्य पर हैं और कुछ में विकास की संभावना है। वे निवेशकों को दीर्घकालिक निवेश रणनीति के साथ बने रहने की सलाह देते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जन्म 16 सितंबर 1975 को हुआ। साल 2021 से वे उत्तराखंड के 10वें और वर्तमान मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। वे 2022 से उत्तराखंड विधानसभा में चंपावत विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और इससे पहले 2012 से 2022 तक खटीमा से चुनाव जीते थे। वे राज्य के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने इसके निर्माण के बाद से लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला है। सीएम धामी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1990 में भारतीय जनता पार्टी की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई 1951 को वाराणसी जिले की तहसील चकिया के भभौरा गांव में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ही गांव के विद्यालय से प्राप्त की और इसके बाद बीएससी और एमएससी (भौतिक विज्ञान) की परीक्षा उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद वे केबी स्नातकोत्तर महाविद्यालय मिर्जापुर में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में नियुक्त हुए। वर्ष 1974 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और 1977 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक चुने गए। वर्ष 1991 में जब उत्तर प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार बनी तो उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया। वर्ष 1994 में वे राज्यसभा के सदस्य बने। 22 नवंबर 1999 को उन्हें केंद्रीय मंत्री नियुक्त किया गया।
भारत के हर युवा के पास एक आइडिया हो और हर आइडिया को उड़ान मिले का विजन रखने वाले डॉ. अपूर्व रंजन शर्मा भारत के अग्रणी स्टार्टअप इन्वेस्टर और इनोवेशन गाइड माने जाते हैं। वे वेंचर कैटेलिस्ट के सह-संस्थापक हैं, जो भारत का पहला एकीकृत स्टार्टअप इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म है। वे अब तक 150 से अधिक स्टार्टअप्स में निवेश कर चुके हैं, जिनमें कई यूनिकॉर्न कंपनियां भी शामिल हैं। डॉ. शर्मा ने देश में एंजल इन्वेस्टिंग को एक नया आयाम दिया और कई मिड-टियर शहरों से निकलने वाले उद्यमियों को सीधा ग्लोबल इनोवेशन इकोसिस्टम से जोड़ने का काम किया। वे बेयर्डो, भारत पे, पीसेफ जैसे कई सफल ब्रांड्स के शुरुआती मार्गदर्शकों में रहे हैं। इसके अलावा डॉ. अपूर्व रंजन शर्मा एआईसीटीई, नीति आयोग और कई केंद्रीय मंत्रालयों के साथ मिलकर स्टार्टअप इंडिया मूवमेंट को जमीनी स्तर पर विस्तार देने में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
लखन रावत एक प्रतिभाशाली और मेहनती डिजिटल क्रिएटर हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है। उनकी पहचान न केवल एक इन्फ्लुएंसर के रूप में है, बल्कि वे एक सफल यूट्यूबर, ब्रांड प्रमोटर और सामाजिक संदेशों को हास्य और रचनात्मकता के जरिए प्रस्तुत करने वाले क्रिएटिव उद्यमी हैं। अपने कंटेंट में वे न केवल हास्य और फैशन का संतुलन रखते हैं, बल्कि मानवता, रिश्ते, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन के मूल्यों पर भी काम करते हैं। उत्तराखंड की जड़ों से जुड़े लखन अपने वीडियो में अक्सर पहाड़ की भाषा, रहन-सहन और संस्कार को उजागर करते हैं। लखन रावत और नीतू बिष्ट एक जोड़ी के रूप में भी सोशल मीडिया पर मशहूर हैं। उन्होंने मिलकर डिजिटल दुनिया में एक सकारात्मक ब्रांड और कहानी खड़ी की है।
उत्तराखंड के कुमाऊं से ताल्लुक रखने वाली नीतू बिष्ट आज करोड़ों युवाओं की प्रेरणा हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि उन्होंने कंटेंट क्रिएशन को सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी में बदला है। नीतू बिष्ट ने अपने सफर की शुरुआत बहुत सीमित संसाधनों से की थी और आज वे एक सफल डिजिटल इन्फ्लुएंसर के साथ-साथ एक फैशन और लाइफस्टाइल ब्रांड की को-फाउंडर भी हैं। वे विशेष रूप से उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और बोली को अपने वीडियो में दर्शाकर पहाड़ की आत्मा को दुनिया तक पहुंचाती हैं। उनकी साफ-सुथरी छवि, परिवार के प्रति समर्पण और आत्मनिर्भरता की सोच ने उन्हें हर वर्ग के दर्शकों में लोकप्रिय बनाया है।
आध्यात्म और राष्ट्र निर्माण को समर्पित स्वामी कैलाशानंद गिरि न केवल परमार्थ निकेतन और कैलाश आश्रम के प्रतिष्ठित पीठाधीश्वर हैं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना को वैश्विक मंच पर पहुंचाने वाले युगदृष्टा भी हैं। वे आधुनिक विज्ञान और सनातन धर्म के समन्वय के पक्षधर हैं और युवाओं को धर्म से जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों का प्रभावशाली उपयोग करते हैं। 1976 में बिहार के जमुई में स्वामी कैलाशानंद गिरि का जन्म एक मध्यम परिवार में हुआ। बचपन में ही घर त्यागकर धर्म का रास्ता चुन लिया और वे भगवान की भक्ति में इस कदर रम गए कि फिर कभी परिवार की तरफ देखा ही नहीं। स्वामी कैलाशानंद गिरी का प्रभाव केवल धार्मिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी है। कई राजनेता, कलाकार और अन्य प्रसिद्ध हस्तियां उनसे आशीर्वाद लेने आते हैं।
क्रिकेट की दुनिया में फिरकी किंग कहे जाने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह सबसे सफल ऑफ-स्पिन गेंदबाजों में से एक हैं। उन्होंने 103 टेस्ट मैचों में 417 विकेट लेकर भारत को ऐतिहासिक विजय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साल 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट में ली गई उनकी हैट्रिक विकेट भारतीय क्रिकेट की सबसे यादगार मानी जाती है, जिसने उन्हें फिरकी का बादशाह बना दिया। खेल के मैदान से आगे बढ़कर हरभजन सिंह ने राज्यसभा सांसद के रूप में सामाजिक सेवा का मार्ग चुना और युवाओं, खेल विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर मुखर होकर काम कर रहे हैं। भज्जी एक प्रशिक्षित पियानो वादक हैं और उन्हें संगीत से गहरा लगाव है।
बॉलीवुड के अन्ना, सफल उद्यमी और फिटनेस प्रेरक सुनील शेट्टी भारतीय सिनेमा में अपनी दमदार अभिनय के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने मोहरा, धड़कन, बॉर्डर, हेराफेरी जैसी फिल्मों में न केवल अपनी अभिनय से प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि रियल लाइफ हीरो के रूप में भी खुद को स्थापित किया। सुनील शेट्टी का जीवन पर्दे से परे और भी प्रेरक है। वे एक सफल उद्यमी हैं, जिनकी फूड, हेल्थ, हॉस्पिटैलिटी, फिटनेस और रियल एस्टेट सेक्टर में कई कंपनियां हैं। उन्होंने देशभर में जवानों के लिए कैंप, खिलाड़ियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर और ग्रामीण युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट हब्स स्थापित किए हैं। अन्ना भारत में फिटनेस को जीवनशैली का हिस्सा बनाने वाले शुरुआती सितारों में से एक हैं।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव, आध्यात्मिक गुरु स्वामी कैलाशानंद गिरी, लाइफ कोच व मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास, कमेंटेटर व पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, आंत्रप्रेन्योर व बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी, बॉलीवुड अभिनेता जयदीप अहलावत, वेंचर कैटलिस्ट के को-फाउंडर व यूनिकॉर्न इनवेस्टर डॉ.अपूर्व रंजन शर्मा, वाइस चेयरमैन एवं सीईओ मिराई एसेट स्वरूप मोेहंती, एसईएआरसीएच के निदेशक डॉ.अभय बंग, इन्फ्लुएंसर और उद्यमी नीतू बिष्ट, इन्फ्लुएंसर और उद्यमी लखन रावत, इन्फ्लुएंसर व उद्यमी तान्या मित्तल शामिल होंगे।
एक बार फिर अमर उजाला के प्रतिष्ठित कार्यक्रम संवाद का आयोजन राजधानी देहरादून में किया जा रहा है। आज (मंगलवार को) आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के विकास समेत अन्य कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। देश की जानी-मानी शख्सियतें, नीति-नियंता, विचारक-विशेषज्ञ श्रोताओं से रूबरू होंगे। हरिद्वार रोड स्थित होटल सेफर्ट सरोवर प्रीमियर में दिनभर चलने वाले कार्यक्रम में राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर अलग-अलग सत्र आयोजित होंगे। अमर उजाला के इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण एबीपी न्यूज चैनल पर पूरे देश में देखा जा सकेगा।