नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर शनिवार को सीतामढ़ी के डुमरा स्थित समाहरणालय के पास छात्रों का प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसमें पुलिस अधीक्षक अमित रंजन सहित कई महिला और पुरुष पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई चरणों में कार्रवाई की और सैकड़ों आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारी समाहरणालय परिसर की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने रोक दिया। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिस वाहन समेत कई निजी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया तथा भाजपा का झंडा लगे एक चारपहिया वाहन सहित तीन वाहनों में आग लगा दी। हालात पर काबू पाने के लिए जिले के सभी थाना प्रभारियों को जिला मुख्यालय बुलाया गया और सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों को भी मौके पर तैनात किया गया। प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है, उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है तथा लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद गया में छात्र संगठन आइसा और इंकलाबी नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने इसे छात्रों के लंबे संघर्ष और लोकतांत्रिक आंदोलन की जीत बताते हुए मिठाइयां बांटी और खुशी मनाई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह किसी व्यक्ति की हार नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज की जीत है, जिसने सरकार को बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया। आरवाईए के राज्य उपाध्यक्ष तारिक अनवर ने कहा कि यदि सरकार शुरुआत में ही छात्रों से संवाद करती तो आंदोलन इतना लंबा नहीं चलता। उन्होंने छात्रों के आंदोलन को चीन और पाकिस्तान से जोड़ने की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे थे। छात्र नेताओं ने नए शिक्षा मंत्री से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं को निष्पक्ष तरीके से आयोजित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देशभर के छात्रों, युवाओं और अभिभावकों के लंबे संघर्ष, जनदबाव तथा लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग की स्वीकारोक्ति है। यादव ने कहा कि केंद्र सरकार को अब शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार करना चाहिए, नीट पेपर लीक प्रकरण से प्रभावित छात्रों को न्याय सुनिश्चित करना चाहिए, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देना चाहिए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन के दौरान छात्रों और युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और उनकी सभी मांगों को पूरा करने की भी मांग की।
पटना में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुमन कुमार मल्लिक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवाओं और सत्य की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि छात्रों की आवाज के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हठ की हार हुई है। उन्होंने इस फैसले को प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में प्रभावित परिवारों, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के सड़क से संसद तक चले संघर्ष की जीत करार दिया। मल्लिक ने केंद्र सरकार से आंदोलन के दौरान छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा छात्रों की जायज मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कराना 'बिहार बंद' का बड़ा उद्देश्य था। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक प्रदर्शनकारियों के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर वायरल हो गई। इसके बाद प्रदर्शन की गति कम गई और प्रदर्शनकारियों ने जगह-जगह अपनी जीत का जश्न भी मनाया। हालांकि इसी आसपास पटना के गांधी मैदान के पास उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ी पलट दी और यातायात पुलिस पोस्ट पर बम से हमला किया।
भागलपुर में प्रदर्शनकारियों के तिलकामांझी पहुंचते ही माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों और वज्र वाहन (दंगा नियंत्रण वाहन) पर पथराव कर दिया। इस घटना में पुलिस की दो से तीन गाड़ियों को आंशिक क्षति पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इलाके में पत्थरबाजी में कई के घायल होने की सूचना है।
राजधानी पटना में गांधी मैदान से डाक बंगला चौराहे के बीच फिर हंगामा हुआ। पहले तो कुछ घंटे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच लुकाछिपी के बीच तनाव का माहौल बना रहा। पुलिस खदेड़ती रही और समूहों में भीड़ अलग-अलग तरफ भागती रही। फिर जब भीड़ ने ताकत दिखाने के लिए रोड़ेबाजी करते हुए पुलिस को निशाना बनाया तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग गिराने वाले प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठियां बरसाईं। दोनों तरफ घायल हुए हैं। कई पुलिसकर्मी भी घायल हैं। कई प्रदर्शनकारियों को पीटने के बाद हिरासत में लिया गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के पहले इसी मांग को लेकर पूर्णिया में बिहार बंद के दौरान हिंसक झड़पें चलती रहीं। पुलिस पर लगातार रोड़ेबाजी होती रही। बाद में पुलिस ने भी रोड़ेबाज प्रदर्शनकारियों को रोड़े से ही जवाब देना शुरू किया। इस दौरान आम जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। कई वाहन क्षतिग्रस्त हैं।
बिहार बंद के समर्थन में शनिवार को समस्तीपुर जिला मुख्यालय के अलावा ताजपुर में आइसा और आरवाईए कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर प्रखंड चौक स्थित एनएच-122 को कुछ देर के लिए जाम कर दिया। इससे आवागमन प्रभावित रहा।
प्रदर्शनकारियों ने बिहार बंद के दौरान राज्य में कई जगहों पर पुलिस को निशाना बनाया, लेकिन सीतामढ़ी में एसपी अमित रंजन पर ही हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों के हमले में एसपी अमित रंजन को पैर में चोट लगी है।
मुजफ्फरपुर में दिन के साढ़े बारह बजे सैकड़ों की संख्या में अपने हाथ में बैनर पोस्टर लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा की मांग करते हुए सरकार विरोधी नारे लगाए। इस दौरान समाहरणालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखा गया। कई कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय परिसर के मुख्य मार्ग पर बीच सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया।
जनशक्ति जनता दल के प्रमुख के और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को पुलिस ने पटना में हिरासत में लिया है। तेज प्रताप यादव अपने समर्थकों के साथ विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने निकले थे। इसी दौरान पटना जंक्शन के पास पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद तेज प्रताप के समर्थकों ने आक्रोश जताया। समर्थकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
'बिहार बंद' का सहरसा में मिला-जुला असर देखने को मिला। छात्र-युवा संघर्ष मोर्चा समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र जिला परिषद प्रांगण से समाहरणालय तक मार्च निकालते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर और बिहार के विभिन्न हिस्सों में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज की निंदा करते हुए भर्ती प्रक्रिया में सुधार और समय पर परीक्षाएं कराने की मांग दोहराई। छात्र नेता कुंदन यादव ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई तक आंदोलन जारी रहेगा। बंद के मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट रहा और प्रमुख चौक-चौराहों, सरकारी कार्यालयों तथा सहरसा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ-जीआरपी के साथ अतिरिक्त पुलिस बल के जवान तैनात हैं। सहरसा हेडक्वार्टर डीएसपी कमलेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि पूरे प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था सामान्य रही और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम के बीच प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है।
पटना के गांधी मैदान स्थित गेट नंबर-10 के पास काफी संख्या में छात्र प्रदर्शन करने पहुंचे है। प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। गांधी मैदान में मोना सिनेमा के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने खदेड़ दिया। सभी लोग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान तेज प्रताप यादव भी हाथ में तिरंगा लिए दिखे। पटना पुलिस ने सभी छात्रों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की।
बिहार बंद के आह्वान का असर शनिवार सुबह से ही समस्तीपुर में देखने को मिला। शहर के पटेल गोलंबर पर बंद समर्थकों ने सड़क जाम कर केंद्र सरकार की शिक्षा नीति और नीट पेपर लीक मामले के विरोध में जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर आगजनी की, नारेबाजी की और कई लोग बीच सड़क पर बैठकर तथा लेटकर प्रतीकात्मक विरोध जताते रहे, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो गया। सूचना मिलते ही भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया और सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली। एहतियात के तौर पर क्यूआरटी टीम, टीयर गैस लॉन्चर और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई।
बिहार बंद का असर मधेपुरा में भी देखने को मिला। विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे और कॉलेज चौक पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्र टीपी कॉलेज गेट से जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट घेराव के लिए बढ़ रहे थे, लेकिन कॉलेज चौक पर पहले से तैनात पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 17 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा, हालांकि पुलिस की मुस्तैदी से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।
पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर पर्याप्त पुलिसकर्मी की तैनाती कर दी गई है। अनिसाबाद, इमारते शरिया समेत कई जगहों पर दुकानें सुबह से ही खुली हैं। सबकुछ सामान्य लग रहा है। फुलवारीशरीफ में प्रदर्शन की आशंका है। यहां पर कुछ देर में प्रदर्शनकारी जमा होंगे। हालांकि पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है।
बिहार बंद का असर नालंदा में भी देखने को मिला। आइसा और आरवाईए (RYA) के नेतृत्व में करीब 20 प्रदर्शनकारियों की टीम सड़कों पर उतरी और बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में "शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" और "राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करो" जैसे नारों वाले बैनर लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
गया में बंद का मिला जुला असर देखने को मिला। शहर में आइसा और आरवाईए के कार्यकर्ता सड़क पर उतर गए हैं। सुबह से यह लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। गया पुलिस की ओर से पर्याप्त संख्या में जवानों की तैनाती की गई है।
बिहार बंद में वामदलों की भूमिका को देखते हुए एक दिन पहले यानी 24 जुलाई की शाम में पटना पुलिस ने भाकपा माले के विधायक संदीप सौरभ, AISA के प्रदेश अध्यक्ष धनंजय समेत 19 लोगों को गिरफ्तार किया। संदीप सौरभ को पुलिस ने उन्हें वीरचंद पटेल पथ स्थित उनके आवास से उठाया लिया था। इसके अलावा पटना पुलिस हॉस्टल में भी छापेमारी की थी। पटना डीएम ने स्पष्ट कहा है अशांति फैलाने वालों पर कार्रवाई करेंगे।
नीट पेपर लीक के कारणों की पड़ताल कर दोषियों को सजा देते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन ने बुधवार को पटना में हंगामा किया था। इस प्रदर्शन के दौरान जमकर तोड़फोड़ और पुलिस-मीडियाकर्मियों से मारपीट की गई थी। इसी कड़ी में आज बिहार बंद है। इस बंद को वामदलों के साथ ही महागठबंधन के राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी आदि ने समर्थन दिया है।
बिहार के गया जिले में अभी बड़ा प्रदर्शन शुरू नहीं हुआ है, लेकिन 10 बजे से सड़कों पर परेशानी हो सकती है। दस बजे सुबह गया कालेज के छात्र सड़क पर उतरेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बलों की तैनाती की गई है। किसी भी तरह के हंगामे को रोकने के लिए पुलिसकर्मियों को सख्त हिदायत दी गई है।