बिहार में 77392 पोलिंग स्टेशन हैं। 53% पोलिंग स्टेशन एक बिल्डिंग में हैं। पोस्टल बैलट से वोटिंग के लिए जो आवेदन करेंगे, वहीं इसके पात्र होंगे। कहीं भी कुछ गड़बड़ी हो रही हो, तो इसकी शिकायत मतदाता सी विजिल ऐप के जरिए कर सकते हैं। यह गोपनीय रहता है। पूरे भारत वर्ष ने सबसे कम मतदान प्रतिशत बिहार में ही है। अपराधिक मामला होने पर संबधित प्रत्याशी को अखबार और टीवी के जरिए उन्हें यह बात सार्वजनिक करनी होगी। साथ ही राजनीतिक दलों को भी यह बताना होगा कि उन्होंने ऐसे प्रत्याशी का चुनाव क्यों किया है।
पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य निर्वाचन पधाधिकारी एचआर श्रीनिवासन ने बिहार वासियों से अपील है कि आप आगामी चुनाव में वोट देने जरूर आएं। बिहार में 40 लोकसभा सीट है। इसमें 34 सामान्य और 6 रिजर्व लोकसभा सीट हैं। बिहार में 7.66 करोड़ मतदाता हैं। 100 साल से ज्यादा वोटर 21 हजार के लगभग हैं। 9.26 लाख नए मतदाता इस साल बने हैं। 1.6 करोड़ मतदाता 20 से 29 साल के हैं। इस चुनाव में युवाओं की भागीदारी अधिक है। महिला वोटरों कि संख्या में भी इजाफा हुआ है। 29 साल से कम के 1.73 लाख मतदाता हैं। यूनिवर्सिटी और कॉलेज में स्कूल जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं कि वह मतदान करने जाएं। 85 वर्ष से ऊपर के लोग 6.67 लाख हैं, वह पोस्टल बैलट के लिए पात्र हैं।
बिहार में उप चुनाव की तारीख आई
बिहार विधानसभा के अगिआंव सुरक्षित सीट पर लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में चुनाव होगा। भाकपा माले के विधायक मनोज मंजिल को सजा होने के बाद उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई थी। इस खाली सीट पर अंतिम फेज में चुनाव होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के स्टार कैंपेनर पर हम गाइडलाइंस पहुंचाने के लिए कह चुके हैं, ताकि ऐसी नोटिस को यह दरकिनार नहीं करें। हेट स्पीच, प्राइवेट लाइफ पर चर्चा, गलत विज्ञापन आदि से बचने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। चुनाव कैंपेन के दौरान पहले भी लाल निशान पार करने वालों को चिह्नित किया गया है और आगे उन्हें ऐसी गलतियों से बचने के लिए ताकीद करने को कहा गया है। इसके लिए राजनीतिक दलों को अपने प्रचारकों तक यह बातें पहुंचाने कहा गया है। किसी भी हालत में बच्चों का चुनाव के दौरान किसी तरह से इस्तेमाल नहीं करें। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस समय कोई बात कहने पर वीडियो के जरिए सबकुछ हमेशा के लिए रह जाता है, इसलिए गलत कुछ कहने से बचें। किसी भी राजनीतिक दल का हिसाब-किताब डिजिटाइज्ड फॉर्म में आएंगी।
गलत सूचना या भ्रम फैलाने पर रहेगी सख्ती
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस बार एक नई चीज की गई है, ताकि सोशल मीडिया से गलत, अफवाह या भ्रम फैलाने वालों पर सख्ती होगी। हर जिले में अधिकारी को ट्रेंड किया गया है कि वह गलत और सही की पहचान करें। जो गलत होगा, उसे हटाने का अधिकार भी दिया गया है।
यादगार, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सभी की भागीदारी के साथ कराएंगे। उन्होंने बताया कि 97 करोड़ से ज्यादा वोटर इस बार देश में वोट देंगे। भौगोलिक, सांस्कृति और सामाजिक रूप से विभिन्नता के बावजूद हमारी तैयारी स्वर्णिम स्तर पर है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस प्रेस कांफ्रेंस का बेसब्री से इंतजार हो रहा था, क्योंकि इससे देश के लिए अगली सरकार का चयन होना है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े और पुराने लोकतंत्र में चुनाव एक त्योहार है। चुनाव का पर्व, देश का गर्व... का सूत्रवाक्य देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि 16 जून को मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, इसलिए अगली सरकार के गठन के लिए होने वाले चुनाव की तैयारी हो गई है।
भारत निर्वाचन आयोग की ओर से शनिवार तीन बजे संवाददाता सम्मलेन की शुरुआत हुई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू का परिचय कराते हुए लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा की शुरुआत की।
बिहार में लोकसभा की 40 सीटों के लिए अगले आधे घंटे में चुनाव की तारीखें आ जाएंगी। माना जा रहा है कि मार्च के अंत में एक चरण का चुनाव होगा और फिर अप्रैल में पांच चरण का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद भी जरूरत पड़ी तो मई के पहले हफ्ते तक मतदान को खींचा जाएगा। इसके बाद मतगणना कराई जाएगी, ताकि ससमय केंद्र की नई सरकार का गठन हो जाए।
बिहार में इस बार बदल गए गठबंधन के साथी
लोकसभा चुनाव की अधिसूचना का इंतजार सभी को है, लेकिन इस बार पिछली बार के मुकाबले स्थिति अलग है। चुनाव की घोषणा से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है, क्योंकि पिछली बार सिर्फ तीन दलों के बीच सीटों का बंटवारा हुआ था। इस बार कई दलों के बीच है। आज निर्वाचन आयोग की घोषणा के बाद एनडीए बिहार की सीटों का बंटवारा कर घोषणा करेगा। उसके बाद ही महागठबंधन पत्ते खोलेगा। फिलहाल सभी की नजर निर्वाचन आयोग के ऊपर है।
पिछले लोकसभा चुनाव का परिणाम अनूठा रहा था
सीएम के गृह जिले और राजधानी का नंबर सबसे अंत में
सीमांचल के जिलों और चर्चित सीटों पर हुआ चुनाव
38 दिनों में सात चरणों का मतदान हुआ था
सुरक्षा और संसाधन-सुविधा को देखते हुए पिछली बार बिहार में सात चरणों में मतदान कराया गया था। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को हुआ था और अंतिम चरण का 19 मई को। मतलब, एक महीने से भी ज्यादा समय तक मतदान को लेकर व्यस्तता रही थी। इस बार चूंकि चुनाव की घोषणा देर से हो रही है, इसलिए माना जा रहा है कि छह चरणों में चुनाव हो सकते हैं और पिछली बार की तरह एक महीने से ज्यादा नहीं, बल्कि एक महीने के अंदर सभी चरणों का मतदान हो जाएगा।