फाइलेरिया में पांव बहुत ज्यादा सूज जाते हैं। इसमें कोई भी दवा कुछ हद तक ही कारगर होती है। इससे पीड़ित व्यक्ति को वायुकारक तत्वों से परहेज करना चाहिए। हमेशा गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए। रोजाना सुबह उद्गीत प्राणायाम लाभकारी है।
सुखपूर्वक बैठकर सामान्य गति से लंबी-गहरी सांस अंदर लें और ऊं के उच्चारण के साथ सामान्य गति से ही सांस छोड़ें। ऊं के उच्चारण में 'ओ' से तीन गुना अधिक समय 'म' के उच्चारण पर हो।
सांस लेते समय अपने आसपास सकारात्मक ऊर्जा की मौजूदगी महसूस करें। ध्यान अग्निचक्र पर हो। प्रतिदिन तीन से चार मिनट तक या औसतन सात बार तक अभ्यास करें। उद्गीत प्राणायाम और भोजन के बीच तीन से पांच घंटे का अंतराल रखें।