गर्भाशय और पीरियड्स संबंधी रोग पृथ्वी, आकाश और अग्नि तत्वों के असंतुलन का परिणाम होते हैं। इन समस्याओं में अपान मुद्रा बहुत ही उपयोगी है। अपान मुद्रा मूलाधार और स्वाधिष्ठान चक्र को प्रभावित करती है। इससे पेट के सभी अंग सक्रिय होते हैं।
शरीर से विजातीय तत्व बाहर निकलता है और नस-नाड़ियों का शोधन होता है। वहीं अपान मुद्रा से मासिक धर्म संबंधी पीड़ा, ऐंठन, मेनोपॉज के दौरान होने वाली समस्याएं भी दूर होती हैं। अगर यह मुद्रा मूलबंध और उड्डियान बंध के साथ की जाए, तो लाभ बढ़ जाता है। यह मुद्रा दो तरीकों से की जाती है। अंगूठे, मध्यमा और अनामिका के शीर्ष को मिलाएं। तर्जनी और कनिष्ठा उंगलियां सीधी रहें। इसे 45 मिनट तक करें। लाभ जरूर होगा।