बालासन को शिशुआसन भी कहा जाता है। इसको करने पर वैसी ही मुद्रा बनती है जैसी एक शिशु जब आराम करता है, तब बनती है। यह सबसे आसान आसनों में से एक है और कितनी भी थकान क्यों न हो इसके अभ्यास से खुद-ब-खुद मिट जाती है। इस आसन का अभ्यास आध्यात्मिक चेतना को विकसित करने के लिए भी किया जाता है। दिखने और करने में आसान आसन होने के बावजूद इससे होने वाले लाभ वाकई अद्भुत है। अगली स्लाइड्स से जानिए बालासन को करने का सही तरीका और इससे होने वाले लाभ।
बालासन करने का तरीका-
बालासन के लाभ-
-बालासन करने से दिमाग शांत होता है तथा गुस्से भी कम होता है।
-शरीर के अंदरूनी अंगों में लचीलापन आता है।
-कमर,कंधे, गर्दन, पीठ, जोड़ों के दर्द तथा मांसपेशियों के दर्द में इस आसन को करने से लाभ मिलता है।
-दिमाग का तनाव दूर करके शांति देता है।
-आध्यात्मिक चेतना के विकास में भी यह आसन बेहद लाभकारी है।
- मासिक धर्म के दौरान होने वाले कमर और पेट दर्द में इस आसन के अभ्यास से राहत मिलती है।
सावधानियां-
-यदि पीठ या घुटने में दर्द हो तो आसन को न करें।
-पेट दर्द या दस्त में भी इसका अभ्यास न करें।
-गर्भवती महिलाएं आसन का बिना किसी प्रशिक्षक के अभ्यास न करें।