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Vat Savitri Puja 2025: कोई 500 तो कोई 250 साल, ये हैं भारत के सबसे पुराने वटवृक्ष

Mon, 26 May 2025 07:37 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Vat Savitri Puja 2025  देशभर में कुछ ऐसे वटवृक्ष हैं जो सैकड़ों वर्षों से खड़े हैं और आज भी पूरी भव्यता के साथ मौजूद हैं। आइए जानते हैं भारत के कुछ सबसे पुराने और प्रसिद्ध वटवृक्षों के बारे में।
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सबसे पुराने वटवृक्ष - फोटो : adobe
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विस्तार
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Vat Savitri Puja 2025 : 26 मई को 2025 को वट सावित्री की पूजा की जाएगी। इस पर्व पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के साथ वट सावित्री व्रत करती हैं। इस दौरान वह वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। कच्चे धागा या सूत बांधकर बरगद के पेड़ की परिक्रमा करती हैं। मान्यता है कि बरगद के पेड़ पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों भगवान का वास होता है। इसलिए इसकी पूजा करने से त्रिदेव का आशीर्वाद मिलता है।

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बरगद का पेड़ भारत में सिर्फ एक वृक्ष नहीं बल्कि आस्था, आयुर्वेद और पर्यावरण का प्रतीक है। देशभर में कुछ ऐसे वटवृक्ष हैं जो सैकड़ों वर्षों से खड़े हैं और आज भी पूरी भव्यता के साथ मौजूद हैं। आइए जानते हैं भारत के कुछ सबसे पुराने और प्रसिद्ध वटवृक्षों के बारे में।

नैनीताल में 200 साल पुराना बरगद का पेड़

उत्तराखंड में नैनीताल के पास लगभग 200 साल पुराना बरगद का पेड़ है। किसी हिल स्टेशन पर इतने पुराने वटवृक्ष का होना दुर्लभ है। नैनीताल घूमने आने वाले लोग जब इस वटवृक्ष की मजबूत और लंबी भुजाओं को देखते हैं तो उन्हें इसकी ऐतिहासिकता और महत्व का आभास होता है। 
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Vat Savitri Puja 2025: वट सावित्री पूजा के लिए करनी है खरीदारी, बना लें जरूरी सामान की सूची


गुजरात में वड तालुका वटवृक्ष

गुजरात के आनंद जिले के पास वड तालुका नाम का वटवृक्ष मौजूद है। इस वटवृक्ष की आयु लगभग 300 वर्ष बताई जाती है। इतना प्राचीन होने के कारण यह पेड़ स्थानीय समुदाय के लिए आध्यात्मिक केंद्र के रूप में माना जाता है। वट सावित्री पूजा पर यहां विशेष आयोजन होता है।

प्रयागराज में अक्षयवट

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में संगम तट पर प्राचीन बरगद का पेड़ है। यहां के वटवृक्ष को अक्षयवट कहा जाता है, जो अनादिकाल से मौजूद माना जाता है। मान्यता है कि इस पेड़ के दर्शन मात्र से ही पाप समाप्त हो जाते हैं।

पश्चिम बंगाल का ग्रेट बनयान ट्री

पश्चिम बंगाल में आचार्य जगदीन चंद्र बोस बोटैनिकल गार्डन में ग्रेट बनयान ट्री है। इस बरगद के पेड़ की आयु लगभग 250 साल बताई जाती है। यह पेड़ अपनी जड़ों के फैलाव के कारण किसी जंगल जैसा प्रतीत होता है। यह बरगद का पेड़ लगभग 3.5 एकड़ भूमि पर फैला हुआ। यह पेड़ इतना फैला है कि इसके अंदर सड़कों और रास्तों का जाल बना हुआ है।

आंध्र प्रदेश का थिमम्मा मरिमानु

आंध्र प्रदेश में बेहद प्राचीन बरगद का पेड़ है। यह पेड़ अनंतपुर जिले के गुटी मंडल में स्थित है। इस पेड़ की आयु 550 साल से अधिक बताई जाती है। कहते हैं कि यह दुनिया के सबसे बड़े वटवृक्षों में से एक है। यह एक ही पेड़ लगभग 5 एकड़ ज़मीन पर फैला है। कहा जाता है कि जहां यह पेड़ उगा, वहां थिमम्मा नामक महिला ने सती होकर जान दी थी।

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