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Pushkar Kumbh Mela 2025: भारत के पहले गांव में लगा 12 साल बाद पुष्कर कुंभ, जानिए कैसे पहुंच सकते हैं आप

Thu, 22 May 2025 06:27 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

पुष्कर कुंभ मेला भारत का पहला गांव कहा जाने वाला उत्तराखंड के माणा गांव में लगा हुआ है। इस गांव को देवभूमि का द्वार भी कहा जाता है। पुष्कर कुंभ का आयोजन 16 मई से 25 मई 2025 तक हो रहा है। 
 
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देश के प्रथम गांव में पुष्कर कुंभ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Pushkar Kumbh Mela 2025 : हाल ही में भव्य महाकुंभ का आयोजन संगम नगरी प्रयागराज में हुआ था, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर दिन आस्था की डुबकी लगाने पहुंच रहे थे। वहीं अब पुष्कर कुंभ का आगाज हुआ है। पुष्कर कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार लगता है। पुष्कर कुंभ मेला भारत का पहला गांव कहा जाने वाला उत्तराखंड के माणा गांव में लगा हुआ है। इस गांव को देवभूमि का द्वार भी कहा जाता है। पुष्कर कुंभ का आयोजन 16 मई से 25 मई 2025 तक हो रहा है। 

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कहां लगा है पुष्कर कुंभ मेला 2025

भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित माणा गांव समुद्रतल से करीब 3200 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। बद्रीनाथ धाम से केवल 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि यह महाभारत कालीन स्थल है, जहां से पांडव स्वर्ग के लिए लिए गए थे। यह गांव कई प्राकृतिक गुफाओं और धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है, जैसे व्यास गुफा, गणेश गुफा, भीम पुल, और सरस्वती नदी का उद्गम स्थल।

पुष्कर कुंभ 2025 का महत्व

पुष्कर कुंभ का आयोजन द्वादशवर्षीय चक्र में होता है और यह देश के पांच पुष्कर क्षेत्रों में से एक माणा गांव में आयोजित किया जाता है। यह कुंभ न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का अवसर होता है, बल्कि यहां साधु-संतों, योगियों, और तीर्थयात्रियों का विशाल जमावड़ा भी देखने को मिलता है। कुंभ के दौरान विशेष स्नान पर्व, हवन, पूजन, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। यह मेला परंपरा और भक्ति के रंगों से सराबोर होता है।
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माणा की यात्रा कैसे करें

अगर आप पुष्कर कुंभ मेला जाना चाहते हैं तो माणा गांव के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो कि 300 किमी की दूरी पर है। हवाई मार्ग के जरिए आप देहरादून एयरपोर्ट पहुंचकर यहां से 315 किमी सड़क मार्ग यात्रा कर सकते हैं। ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक बस या टैक्सी सेवा उपलब्ध है, वहां से माणा गांव की दूरी मात्र 3 किमी है।

सुविधा

कुंभ के दौरान आसपास धर्मशालाएं, टेंट सिटी और स्थानीय होमस्टे की व्यवस्था की जाती है। स्थानीय व्यंजन जैसे मंडुवे की रोटी, पहाड़ी सब्जियां और गरम चाय का स्वाद अलग ही अनुभव देता है।

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