भारत में तीन तरह के कुंभ लगते हैं।
कुंभ आस्था और परंपरा का मामला है
कुंभ का शाब्दिक अर्थ कलश होता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना था कि हिंदू दर्शन में कुछ भी अधूरा नहीं है। इसलिए अर्ध शब्द फिट नहीं बैठता है। हालांकि कई साधु-संतों को भी अर्धकुंभ को कुंभ बुलाना में एतराज है और उनका मानना है कि कुंभ, कुंभ की जगह और अर्धकुंभ, अर्धकुंभ की जगह रहेगा। दरअसल, अर्धकुंभ हर छह साल और कुंभ 12 साल में होता है जबकि महाकुंभ 144 साल में होता है।
क्या होता है कुंभ का अर्थ?
भारतकोश के मुताबिक, कुंभ का शाब्दिक अर्थ कलश होता है। कलश के मुख को भगवान विष्णु, गर्दन को रुद्र, आधार को ब्रह्मा, बीच के भाग को समस्त देवियों और अंदर के जल को संपूर्ण सागर का प्रतीक माना जाता है। यानी कुंभ हमारी सभ्यता और सभ्यता का संगम है।