कभी नामीबिया जाएं, तो वहां ‘नामीब जनजाति’ के लोगों के साथ एक शाम जरूर बिताएं। उनकी तरह जीवन जीने का अलग ही अनुभव होगा। बुशमैन गाइडों का सत्कार मिलेगा।
कितना जरूरी होता है अपनी संस्कृति को ही अपनी पहचान बना लेना। कई लोग अपने पूर्वजों को भूल आगे बढ़ जाते हैं। अपनी संस्कृति को छोड़ पाश्चात्य जीवन जीते हैं। लेकिन वे लोग आज भी अपनी संस्कृति को संजोए हुए हैं। देश आगे बढ़ गया, लेकिन उनका अपनी मिट्टी से जुड़ाव अभी भी है।
बात हो रही है दक्षिणी अफ्रीका के एक देश 'नामीबिया' की। यहां की 'नामीब जनजाति' रेगिस्तान में अपना पूरा जीवन बिताती है और इन्हें 'बुशमेन' भी कहा जाता है।
एटोशा नेशनल पार्क से घिरा नामीबिया, प्राकृतिक सौंदर्य से भरा एक क्षेत्र है। इस जाति के लोग बिल्कुल वैसा जीवन नहीं जीते जैसा हम जीते हैं, लेकिन फिर भी खुश रहते हैं। ये लोग पीढ़ियों से प्रकृति के साथ सहज हैं।