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कुछ दिन नामीबिया के लिए भी निकालिए!

Mon, 06 Nov 2017 10:47 AM IST
मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला
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कभी नामीबिया जाएं, तो वहां ‘नामीब जनजाति’ के लोगों के साथ एक शाम जरूर बिताएं। उनकी तरह जीवन जीने का अलग ही अनुभव होगा। बुशमैन गाइडों का सत्कार मिलेगा।
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कितना जरूरी होता है अपनी संस्कृति को ही अपनी पहचान बना लेना। कई लोग अपने पूर्वजों को भूल आगे बढ़ जाते हैं। अपनी संस्कृति को छोड़ पाश्चात्य जीवन जीते हैं। लेकिन वे लोग आज भी अपनी संस्कृति को संजोए हुए हैं। देश आगे बढ़ गया, लेकिन उनका अपनी मिट्टी से जुड़ाव अभी भी है।

बात हो रही है दक्षिणी अफ्रीका के एक देश 'नामीबिया' की। यहां की 'नामीब जनजाति' रेगिस्तान में अपना पूरा जीवन बिताती है और इन्हें 'बुशमेन' भी कहा जाता है।
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एटोशा नेशनल पार्क से घिरा नामीबिया, प्राकृतिक सौंदर्य से भरा एक क्षेत्र है। इस जाति के लोग बिल्कुल वैसा जीवन नहीं जीते जैसा हम जीते हैं, लेकिन फिर भी खुश रहते हैं। ये लोग पीढ़ियों से प्रकृति के साथ सहज  हैं। 
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यहां के लोगों का कला के प्रति भी विशेष रुझान होता है। उनके द्वारा बनाई गईं पैंटिग्स का  अच्छा खासा संकलन आपको देखने को मिल सकता है। ये लोग अपने बच्चों को हर शिकार में साथ रखते हैं, ताकि बच्चों में डर खत्म हो सके। यहां के लोग आज भी पत्थरों से उपकरण और हथियार बनाते हैं।

यहां आने वाले आगंतुकों का भी नामीब जनजाति बड़ा सत्कार करती है। रहने और खाने की पूरी व्यवस्था आगंतुकों के लिए की जाती है। आगंतुक कैनवास में रहते हैं और अपने बुशमैन गाइडों के साथ समय बिताते हैं।

साथ ही नामीब लोग उन्हें उनके रहन-सहन के बारे में बताते और सिखाते हैं। उन्हें छोटे-मोटे शिकार करना भी सिखाया जाता है। यहां तक कि अपने पारंपरिक गीतों से कैंप फायर के दौरान लोगों का मनोरंजन करते हैं।
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