हिंदु धर्म में शादी की कई रस्में निभाई जाती है लेकिन सबसे अहम भूमिका कन्यादान का होता है
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हिंदु धर्म में शादी की कई रस्में निभाई जाती हैं लेकिन इन सब में सबसे अहम होती है कन्यादान की रस्म।कहते है अगर शादी की सारी रस्में हो और कन्यादान ना किया जाए तो शादी अधूरी समझी जाती है।
।कन्यादान के वक्त लड़की के पति को सात जन्म तक हाथ थामने का वचन देना होता है।
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शास्त्रों में कहा गया है कि जब कोई पिता शास्त्रों में बताए गए विधि-विधान के अनुसार, कन्यादान की रस्म निभाता है तो कन्या के माता-पिता के साथ उसके परिवार को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।किसी पिता के लिए अपनी बेटी को किसी को सौंपना मतलब एक बहुत बड़ी संपत्ति दूसरे व्यक्ति को सौंपने जैसा होता है।कन्यादान के वक्त लड़की के पति को सात जन्म तक हाथ थामने का वचन देना होता है।
कन्यादान की रस्म हर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग तरीके से निभाई जाती है
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कन्यादान की रस्म हर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अलग तरीके से निभाई जाती है।दक्षिण भारत में कन्या अपने पिता की हथेली पर अपना हाथ रखती है और वर अपने ससुर की हथेली के नीचे अपना हाथ रखता है। फिर इसके ऊपर जल डाला जाता है। पुत्री की हथेली से होता हुआ जल पिता की हथेली पर जाता है और इसके बाद वर की हथेली पर।
कन्यादान की रस्म के दौरान वर-वधू के परिवार वालों के अलावा पंडित और रिश्तेदार भी मौजूद होते हैं। यह रस्म लोगों को भावुक कर देने वाली होती है। कन्यादान को महादान कहते हैं जो भी व्यक्ति अपने जीवन में एक बार कन्यादान कर लेता है उसका पूरा जीवन सफल हो जाता है।