बच्चे कहानियां सुनते हैं। कुछ सीखते हैं। कहानियां बच्चों को अच्छे संस्कार देने और उन्हें बेहतर इंसान बनाने का एक खूबसूरत जरिया है, लेकिन आज के समय में उनके पास कहानियां नहीं होतीं, क्योंकि सुनाने वाले दादी-नानी ही दूर रहती हैं।
कहानियां हमें सिर्फ रोमांचित नहीं करतीं, बल्कि रचनात्मक ढंग से सोचने के कई अवसर भी देती हैं। मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था, “अगर आप बच्चे को बुद्धिमान बनाना चाहते हैं तो उसे फेयरी टेल्स सुनाइए। अगर उसे और बुद्धिमान बनाना चाहते हैं तो उसे और ज्यादा फेयरी टेल्स सुनाइए।”
दरअसल, बच्चे जब कहानियां सुनते हैं तो वे कल्पना की दुनिया में पहुंच जाते हैं। आप जिन किरदारों के बारे में उनको बताती हैं, वे उनके रंग-रूप, आकार-प्रकार की कल्पना करते हैं। इस तरह कहानियां सुनाकर आप बच्चों के कल्पनाशील मस्तिष्क में रचनात्मकता के बीज बो सकती हैं और उनमें दुनिया की समझ बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा भी अनेक ऐसे गुण हैं, जो बच्चों में कहानियां सुनकर विकसित होते हैं।
भाषा कौशल और रुचि
कहानियों में नए शब्दों का सामंजस्य होता है, जिससे बच्चे नए शब्द सीखते हैं, जिनको अपनी भाषा में शामिल करने का उन्हें अवसर मिलता है। साथ ही कहानियां बच्चों में वाक्य रचना कौशल को सुधारने में मदद करती हैं। बच्चे सीखते हैं कि कैसे वे विचारों को स्पष्ट और सही तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। कहानियां विभिन्न विषयों और किरदारों पर आधारित होती हैं, जिससे बच्चों में उनके बारे में जानने की रुचि विकसित होती है। कहानियां उन्हें विज्ञान, साहित्य, कला आदि की तरफ आकर्षित करती हैं, जिससे उनकी रुचि में सुधार होता है और उनमें अधिक जानने की जिज्ञासा पैदा होती है।
कल्पना शक्ति
कहानियां बच्चों को नए दृष्टिकोण और विचार प्रदान करती हैं, जिससे उनकी कल्पना और सोचने की क्षमता में सुधार होता है। वे कहानियां सुनते-सुनते कल्पना की दुनिया में पहुंच जाते हैं। कहानी का अंत हो जाता है, लेकिन वे तब भी कहानी में आगे क्या हुआ होगा, इस बारे में सोचते रहते हैं। इस तरह कहानियां सुनाकर आप बच्चों को कल्पनाशील और रचनात्मक बना सकती हैं।
बढ़ता है साहस
कहानियां बच्चों को नैतिक, सामाजिक और भौतिक दृष्टिकोण से विचार करने की क्षमता प्रदान करती हैं, जिससे उनकी सोच विकसित होती है। कहानियों के किरदार अपनी समस्याओं का सामना कैसे करते हैं, इससे बच्चों को समस्याओं को हल करने के तरीके आैर रास्ते मिलते हैं, साथ ही उनकी सोचने की क्षमता भी विकसित होती है।
सुनना और ध्यान-शक्ति
कहानियों को सुनना बच्चों की सुनने की क्षमता को बढ़ाता है। इससे वे अच्छे वक्ता बनने के साथ अच्छे श्रोता भी बनते हैं। बच्चों का कहानियां सुनना और समझना उनकी ध्यान-शक्ति को बढ़ा सकता है। कहानियां उन्हें लगातार ध्यान में रखने, विचार करने और बुनियादी अवस्थाओं को समझने की क्षमता में सुधार करने में मदद करती हैं।
नैतिक शिक्षा
कहानियां अक्सर नैतिक सीख देती हैं, जो बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझने में मदद करती है। किरदारों के माध्यम से बच्चे अच्छे और ईमानदार बनने की ओर प्रेरित होते हैं। ये किस्से उन्हें नैतिकता, सहानुभूति और सद्गुणों के महत्व से परिचित कराते हैं, जो उनके व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही बच्चों को कहानियों के माध्यम से धार्मिक मूल्यों और शिक्षा का परिचय होता है।
सामाजिक संबंधों में सुधार
बच्चों को कहानियों के माध्यम से सामाजिक मूल्यों, सहयोग और समर्पण की शिक्षा दी जा सकती है। कहानियां उन्हें समझदारी, सहानुभूति और सामूहिक सहयोग का अहसास कराने में मदद करती हैं, जिससे उनके सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
सेहत को लाभ
बच्चों को कहानियां सुनाने से उनमें सकारात्मक आदतें बनती हैं, साथ ही जीवन में चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके अलावा कहानियां बच्चों को दिन भर की थकान और तनाव से दूर रखती हैं, साथ ही बच्चों को सीखने में मदद करने, उनका मनोबल बढ़ाने और परिवार के साथ मधुर संबंध बनाए रखने में सहायक होती हैं।
मिट्टी से बनवाती हैं कहानियों के किरदार
भारती दीक्षित
दास्तानगो, इंदौर
इंदौर की भारती दीक्षित चित्रकार होने के साथ-साथ दास्तानगो भी हैं। उनका कहना है, “कहानियां बच्चों को मिट्टी से जोड़ती हैं। बच्चे कहानियों के माध्यम से अपनी संस्कृति और भाषा से जुड़ते हैं और किसी भी इंसान के लिए मिट्टी से जुड़े रहना बेहद जरूरी होता है। बच्चों में ये गुण बचपन से ही विकसित करने में कहानियां एक अहम भूमिका निभाती हैं।”
भारती अपने यूट्यूब चैंनल ‘टेल विथ क्ले’ के माध्यम से बच्चों को कहानियां सुनाती हैं और फिर उन्हें मिट्टी से उन सुनाई गई कहानियों में से कई चीजें बनाने को देती हैं। वह कहती हैं, “इसका उद्देश्य यही है कि बच्चे इस बात को समझ सकें कि किस प्रकार मिट्टी किसी चीज का स्वरूप लेती है। यह एक अच्छा तरीका है बच्चों को कहानियों और मिट्टी से जोड़ने का।”
आजकल भारती भारत के शूरवीरों की गाथाएं सुना रही हैं, जिनमें भगत सिंह, राम प्रसाद बिस्मिल, शिवाजी, भीमराव अंबेडकर, मीराबाई और ढेर सारे ऐसे ही शूरवीर शामिल हैं। वह कहती हैं, “अगर बच्चे इन शूरवीरों की कहानियां सुनते हैं तो वे भी इनकी तरह ही अपने चरित्र का निर्माण करने में सक्षम हो सकेंगे।” भारती का मानना है कि बच्चे इस तरह की कहानियों से अपने देश के इतिहास से भी जुड़ जाते हैं और उनसे सीख हासिल कर अपने जीवन में उनका अनुसरण कर सकते हैं। इसलिए बच्चों को कहानियों से जोड़ना बेहद जरूरी है।
बच्चों के लिए बनीं कहानी वाली नानी
सरला मिनी
बेंगलुरु
बच्चों को कहानी सुनाकर उन्हें बुद्धिमान बनाने की दिशा में बेंगलुरु की सरला मिनी भी जुटी हैं। उन्हें कहानी वाली नानी के नाम से जाना जाता है। वह बताती हैं, “कहानियां बच्चों को सिर्फ नई-नई चीजें ही नहीं सिखातीं, बल्कि उन्हें सही रास्ते पर सही ढंग से चलना भी सिखाती हैं। आज के व्यस्त जीवन में बच्चे कहानियों से दूर हो गए हैं, जिसकी वजह से उनके जीवन में एक अधूरापन आ गया है।
इसकी एक वजह संयुक्त परिवार में रहने की संस्कृति का खत्म होना भी है। इससे बच्चे अपने दादा-दारी से दूर हो गए हैं और उनकी कहानियों से भी। इसलिए मेरा बच्चों को कहानियां सुनाने का उद्देश्य यही है कि मैं उनकी नानी बन उन्हें कहानियां सुनाऊं और उन्हें नई-नई बातों से रूबरू कराऊं।” सरला मिनी ने 2017 में यह पहल की थी और आज देश के हर कोने तथा विदेश में भी कहानियों की दुनिया बना रही हैं। बच्चे भी उनकी कहानियों से बहुत कुछ सीख रहे हैं।
वह बताती हैं कि बच्चे उनकी कहानी से नए-नए शब्दों को सीखते हैं और पुरानी आदतों को बदलते हैं। कहानियों के माध्यम से बच्चों में भावनात्मक ऊर्जा का सृजन होता है। सरला मिनी को कहानियां सुनाने के अपने इस कार्य पर बहुत गर्व है, क्योंकि उनकी कहानियां बच्चों के जीवन के अधूरेपन को खत्म कर रही हैं।