घरों से बनती है दुनिया। आप मकान को बनाती हैं घर। ये घर आपका मंदिर है। ये जगह आपकी कार्यशाला है। ... तो फिर आप अपनी सोच को कुछ विस्तार दें और खुद को नए रूप और नए नाम से पुकारें- होममेकर! हमारे यहां एक कहावत है, खासकर घरेलू महिलाओं को लेकर- ‘सगाई हुई, आधी गई, शादी हुई पूरी गई, बच्चा हुआ, मर गई।’
ऐसी महिलाएं जिनमें अपने व्यक्तित्व के प्रति ललक खत्म हो जाती है। जो खुद को लेकर सपने बुनना छोड़ देती हैं, वो मायूस, लक्ष्यरहित और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाती हैं। इससे उनका आत्म-विश्वास भी कम होने लगता है। और कहीं-न-कहीं इसका असर आपके बच्चों पर भी पड़ता है।
आज बच्चे अच्छी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। वे उन बच्चों के पेरेंट्स को भी देखते रहते हैं, जो वर्किंग हैं। संभव है कि वे आपकी तुलना उन मांओं से भी करते हों, जिनकी पर्सनैलिटी आकर्षक होती हो। और वे चाहते होंगे कि आप भी वैसा ही दिखें। वैसे पढ़ी-लिखी तो आप भी हैं, यह अलग बात है कि आप परिवार की खातिर नौकरी नहीं करती। मगर इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आप अपनी जिंदगी जीना छोड़ दें। लोग क्या कहेंगे? घर में ही तो रहना है? शादी हो गई, अब क्या करना...।
ये सोचकर खुद पर ध्यान न देना, यह महज एक बहाना है। अब क्या करना है नया सीखकर’ जैसा विचार अपने पास फटकने न दें। आप हाउसवाइफ नहीं, हाउसमेकर हैं। आपकी भी एक दुनिया है। उसमें कई सुनहरे रंग हैं। सपने हैं, उम्मीदें हैं। भले ही आप किसी ऑफिस में काम नहीं करतीं, मगर आपकी भी एक पर्सनैलिटी है?
घर-परिवार की जिम्मेदारी के बीच खुद पर ध्यान न देना समझदारी नहीं, बल्कि जिंदगी के प्रति आपकी लापरवाही है। याद रखें, सिर्फ घर-परिवार की जिम्मेदारियां संभालकर ही आप परफेक्ट हाउसवाइफ नहीं बन सकतीं, बल्कि आपको अपनी पूरी पर्सनैलिटी पर भी ध्यान देने की जरूरत है। तभी आप आज की पीढ़ी के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चल पाएंगी।
हर उम्र में आकर्षक
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अक्सर देखने में आता है कि घर की महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारी में इस कदर व्यस्त हो जाती हैं कि खुद पर ध्यान ही नहीं दे पाती हैं। इस वजह से वे कई मामलों में पीछे रह जाती हैं। वहीं कुछ घरेलू महिलाओं का तर्क होता है कि उन्हें कौन-सा बाहर जाना है कि रोजाना तैयार हों?
इस कारण से वे अपनी बाहरी व्यक्तित्व पर ज्यादा गौर नहीं करतीं। अगर आपकी सोच भी यही है, तो आप गलत हैं। अच्छा दिखने या सजने-संवरने का यह मामला सीधे आपकी पर्सनैलिटी से जुड़ा है, न कि आॅफिस से। इसलिए अपने पहनावे के साथ-साथ त्वचा, बाल और दूसरी जरूरी चीजों पर भी ध्यान रखें। आपके आस-पास के लोगों पर आपके पहनावे का भी असर पड़ता है।
कहने का मतलब यह है कि आपका ड्रेसअप भी पर्सनैलिटी का अहम हिस्सा है, इसलिए आपके पहनावे में सलीका होना चाहिए। चूंकि पहनावे का असर आपके व्यक्तित्व पर पड़ता है, इसलिए उम्र और अवसर के हिसाब से सही कपड़े का चुनाव करें। इसमें सिर्फ फैशन ही नहीं बॉडी शेप का भी ध्यान रखें।
अपनी उम्र के हिसाब से आधुनिक स्टाइल की पोशाकें बनवाएं। अपनी वार्डरोब को समय-समय पर बदलती रहें। यह न सोचें कि घर में रहना है, तो कोई भी कपड़ा चलेगा। घर में हों या किसी पार्टी में जा रही हों, आपका ड्रेसअप प्रभावित करने वाला होना चाहिए। इससे अपने आप में एक आत्म-विश्वास पैदा होता है।
कुछ नया सीखें
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ऐसा नहीं है कि घरेलू काम की कोई अहमियत नहीं है। आपकी प्राथमिकता घर-परिवार ही है, लेकिन इससे इतर अपने शौक को भी अपनी जिंदगी में जगह दें। अगर डांस करना जानती हैं, तो आप घर बैठे-बैठे बच्चों को इसकी ट्रेनिंग दे सकती हैं। सिलाई-कढ़ाई जानती हैं, तो आप इस हुनर को दूसरों को सीखा सकती हैं।
यदि आपको कुछ नया सीखने का मन है, तो इसमें भी पीछे न रहें। उम्र कोई भी हो, आप कुछ-न-कुछ सीखती रहें। टीवी, यूट्यूब आदि से नई-नई रेसिपी सीख सकती हैं। इसके अलावा यूट्यूब से आप और भी कई चीजें सीख सकती हैं। टेक्नो-फ्रेंडली बनिए। इससे आप में आत्म-विश्वास, एक जोश पनपेगा। अपने वक्त को सकारात्मक और अच्छे कामों में लगाएं। अच्छी किताबें पढें।
सोसायटी या आपके शहर में कोई कार्यक्रम हो, तो रुचि अनुसार उसमें हिस्सा लें। इससे आपके अंदर पॉजिटिव एनर्जी आएगी और आप हर काम को बेहतर तरीके से कर पाएंगी। अपने लिए कोई-न-कोई, चाहे छोटा ही सही, लक्ष्य चुनती रहें आैर उसे पूरा करें।
पड़ाेस में कामकाजी या घरेलू महिलाओं का ग्रुप बनाएं। उनसे अच्छी बातें सीखें। उनके साथ कुकिंग या घरेलू नुस्खे शेयर करें और सीखें। सामाजिक मुद्दे पर भी जानकारियां एक-दूसरे से बांट सकती हैं। इससे आपको नया सीखते रहने में मदद मिलेगी। यदि आप अपनी रुचि का, अपने मन का काम करेंगी, तो निश्चित ही वह आपकी खुशियों के पल को बढ़ाएगा।
अपनी नॉलेज बढ़ाएं
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पर्सनैलिटी ग्रूमिंग का पहला नियम होता है खुद को अपडेट रखना। बेशक आप घर में रहती हैं, लेकिन अपने आप को अपडेट रखना जरूरी है। गली-मोहल्ले की जानकारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश-दुनिया की खबरों से भी वास्ता बनाए रखना जरूरी है।
ये सारी जानकारी आपको आत्म-विश्वास से भर देगा और खुशी भी मिलेगी। खुद की नॉलेज बढ़ाने का कोई भी मौका न छोड़ें। लोगों से बातचीत करें और अपनी जानकारी बढ़ाती रहें। इसके साथ भाषाई ज्ञान भी बढ़ाएं। इंग्लिश स्पीकिंग का कोर्स करें। इससे आपकी पर्सनैलिटी में निखार आएगा।
किसी भी पुरानी आदत को स्वयं से चिपकाए न रखें, बल्कि समय के साथ इसमें बदलाव लाएं। नई पीढ़ी के साथ सोच में बदलाव लाएं। ग्रूमिंग की और भी कई छोटी-छोटी राहें हैं, जिनके द्वारा आप अपने व्यक्तित्व में निखार ला सकती हैं। आदमी अपनी आदतों से बंधा होता है और किसी भी नई आदत या शैली को अपनाने में वक्त लगता है।
मजबूत इच्छा हर उपलब्धि का शुरुआती बिंदु है। जिस तरह आग की छोटी लपटें अधिक गर्मी नहीं दे सकती, वैसे ही कमजोर इच्छा बड़े नतीजे नहीं दे सकती। इसलिए खुद में बदलाव के लिए खुद से ही वादा करें। कहने का अर्थ यही है कि “हर दिन अपनी जिंदगी को एक नया ख्वाब दो, चाहे पूरा न हो पर आवाज तो दो। एक दिन पूरे हो जाएंगे सारे ख्वाब तुम्हारे, सिर्फ एक शुरुआत तो दो।”
दिनभर में लगभग 16 घंटे काम करती हैं महिलाएं
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ग्लोबल एनजीओ हेल्थ ब्रिज द्वारा कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक, भारतीय महिलाएं दिनभर में लगभग 16 घंटे काम करती हैं। इसमें घरेलू कार्यों के अलावा बच्चों को पढ़ाना और कुछ बाहरी कार्य भी शामिल हैं। शहरी महिलाओं की तुलना में ग्रामीण महिलाओं को अधिक काम करना पड़ता है। यदि इन घरेलू कार्यों का मूल्यांकन करें, तो भारतीय महिलाएं वर्षभर में यूएस के 612.8 बिलियन डॉलर्स के बराबर काम करती हैं।
छोटी-छोटी बातें
कहा जाता है कि जिन घरेलू महिलाओं की छवि मुखर नहीं होती, उनको हर कोई डोमिनेट करता है। इसलिए अपनी पर्सनैलिटी को निखारना जरूरी है। पर्सनल ग्रूमिंग पर ध्यान दें। पर्सनल ग्रूमिंग में नहाने, ड्रेसिंग, मेकअप, हेयर केयर, स्किन से लेकर टूथ केयर तक की बातें आती हैं। इसलिए हाथ, पैर और बाल की साफ-सफाई का ध्यान रखें। बालों को सही आकार में रखें। बोलते समय शब्दों का चयन सही ढंग से करें। ऐसी बातें करें, जिससे दूसरों को आपकी बातें सुनने में रुचि पैदा हो।
पसर्नल ग्रूमिंग के साथ फिटनेस पर भी ध्यान दें। इसके लिए योग और व्यायाम करें। मॉर्निंग वॉक या एक्सरसाइज से शरीर में फील गुड हार्मोन्स रिलीज होते हैं, जो आपको शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रखते हैं। खानपान का खास ध्यान रखें। फल खाएं और संतुलित डाइट लें। सुबह उठने के बाद गर्म पानी पिएं।