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International day of charity 2020: क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल चैरिटी डे? जानिए इसका इतिहास और महत्व

Sat, 05 Sep 2020 10:09 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अंतरराष्ट्रीय चैरिटी दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
कहते हैं कि दान से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। यह इंसानों और अन्य प्राणियों को खुशी देता है और जब आप दूसरों को खुशी देते हैं, तो बदले में आपको भी खुशी मिलती है। इसी दान के महत्व को बताने के उद्देश्य से हर साल दुनियाभर में पांच सितंबर को इंटरनेशनल चैरिटी डे यानी अंतरराष्ट्रीय दान दिवस मनाया जाता है। दरअसल, पांच सितंबर को मदर टेरेसा की पुण्यतिथि होती है। उन्होंने समाज से गरीबी दूर करने, जरूरतमंदों की मदद करने और उनकी परेशानियों को दूर करने में अपना पूरा जीवन लगा दिया था। उन्ही की याद में यह दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत यूनाइटेड नेशन यानी संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2012 में की थी।  
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अंतरराष्ट्रीय चैरिटी दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
कैसे हुई थी इंटरनेशनल चैरिटी डे की शुरुआत? 

वैसे तो भारत में युगों-युगों से दान की परंपरा रही है, लेकिन इसके लिए कोई खास दिन नहीं बनाया गया था। साल 2012 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इंटरनेशनल चैरिटी डे की आधिकारिक तौर पर घोषणा की, जिसका समर्थन सभी देशों ने किया। 
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अंतरराष्ट्रीय चैरिटी दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
इंटरनेशनल चैरिटी डे से क्या फायदा? 

दरअसल, यह दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर होने वाले चैरिटी कार्यक्रमों के लिए एक शानदार मंच है। यह बताता है कि लोगों को अपनी भागदौड़ भड़ी जिंदगी से कुछ समय निकालकर जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए, ताकि उनका जीवन स्तर भी सुधर जाए। 

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अंतरराष्ट्रीय चैरिटी दिवस 2020 - फोटो : Pixabay
कैसे मनाया जाता है इंटरनेशनल चैरिटी डे? 

इस दिन संयुक्त राष्ट्र सभी सदस्य राष्ट्रों, विभिन्न संगठनों और दुनियाभर के लोगों ये यह अपील करता है कि वो भी दान में अपना योगदान देकर इंटरनेशनल चैरिटी डे बनने के मकसद को सफल बनाएं। इस दिन चैरिटी के महत्व को समझाया जाता है और लोगों को दान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।  
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मदर टेरेसा - फोटो : Facebook/The New Vision
कौन थीं मदर टेरेसा, जिनकी याद में मनाया जाता है इंटरनेशनल चैरिटी डे 

मदर टेरसा एक रोमन कैथोलिक नन थीं, जिन्होंने साल 1948 में स्वेच्छा से भारत की नागरिकता ले ली थी। उन्होंने 1950 में कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी और सालों तक गरीब, बीमार, अनाथ और मरते हुए लोगों की उन्होंने मदद की थी। बाद में उन्हें रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा कलकत्ता की संत टेरेसा के नाम से नवाजा गया। इतना ही नहीं, उन्हें 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार और 1980 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' प्रदान किया गया था। पांच सितंबर 1997 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। 
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