International Day Of Forests 2025 : जीवन के लिए ऑक्सीजन, भोजन, ईंधन समेत तमाम प्राकृतिक संसाधनों की जरूरत होती है जो हमें वनों से प्राप्त होता है। ऐसे में वन का महत्व बहुत ज्यादा है। हालांकि राष्ट्र विकास की दिशा में इतने अग्रसर हैं कि वनों की कटाई बढ़ती जा रही है और जंगलों के स्थान पर ऊंची-ऊंची बिल्डिंग और सड़कों आदि ने ले ली है।
प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और वनों के महत्व को उजागर करने के लिए हर साल 21 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस (International Day of Forests) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य वनों के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह दिन हमें यह याद रखने का अवसर देता है कि हमारी पृथ्वी के लिए वन कितने महत्वपूर्ण हैं।
अगर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वायु, जल और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करना चाहते हैं तो हमें वनों के संरक्षण के प्रति गंभीर होना पड़ेगा।
आइए जानते हैं अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस मनाने की आवश्यकता कब और कैसे महसूस की गई। वन दिवस का इतिहास, महत्व और साल 2025 की थीम क्या है।
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस का इतिहास
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 दिसंबर 2012 को घोषणा की कि हर साल 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय वन दिवस मनाया जाएगा। पहला आधिकारिक आयोजन 21 मार्च 2013 में किया गया था।
21 मार्च को ही क्यों मनाते हैं वन दिवस?
वन दिवस मनाने के लिए 21 मार्च की तारीख तय करने का एक कारण था। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में वसंत विषुव और दक्षिणी गोलार्ध में शरद विषुव के आसपास आता है। 21 मार्च को दिन और रात बराबर होते हैं, जो प्रकृति और पारिस्थितिकी संतुलन का प्रतीक है।
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अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 2025 की थीम
संयुक्त राष्ट्र हर साल वन दिवस के लिए एक थीम निर्धारित करता है। 2024 की थीम "वन और नवाचार" (Forests and Innovation) थी। वहीं अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 2025 की थीम "वन और खाद्य" (Forests and Food) है। ये थीम खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है।
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस का महत्व
- जंगल हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, जलवायु को नियंत्रित करते हैं और लाखों जीव-जंतुओं का घर हैं।
- वन वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में मदद करते हैं।
- वनों में दुनिया की 80% स्थलीय प्रजातियां निवास करती हैं। यह जैव विविधता का संरक्षण करता है।
- लाखों लोगों की आजीविका वनों पर निर्भर करती है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की।
- वन्य जल संरक्षण में सहायक हैं। जंगल वर्षा को आकर्षित करते हैं और जल संसाधनों की सुरक्षा में योगदान देते हैं।