अब तक माना जाता था कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष ज्यादा मानसिक श्रम करते हैं और इसीलिए उन्हें भरपूर आराम की जरूरत है। दरअसल ऐसा है नहीं, पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा दिमाग का इस्तेमाल करती हैं इसीलिए उन्हें ही ज्यादा नींद की जरूरत होती है।
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साइंस वर्ल्ड में छपे नए शोध के मुताबिक विशेषज्ञों ने यह पाया है कि हम दिन में अपना दिमाग जितना ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उसी आधार पर हमारी नींद के घंटे तय होते हैं। मतलब हमारा दिमाग जितना ज्यादा काम करेगा, उसे आराम पहुंचाने के लिए भी उसी अनुपात में वक्त चाहिए।
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लागबोरो विश्वविद्यालय के निद्रा शोध केंद्र के निदेशक प्रोफेसर जिम हॉर्न ने कहा,‘पुरुषों के मुकाबले महिलाएं एक समय पर ज्यादा काम करती हैं इसीलिए वे अपने दिमाग का इस्तेमाल भी अधिक करती हैं। यही कारण है कि महिलाओं को नींद की जरूरत ज्यादा होती है। गहरी नींद के दौरान दिमाग का एक हिस्सा ‘कार्टेक्स’ रिकवरी मोड में चला जाता है। कोर्टेक्स हमारे विचारों, याददाश्त, भाषा और अन्य चीजों के लिये जिम्मेदार होता है।’
एक अन्य नींद विशेषज्ञ डॉ. माइकल ब्रीयस का मानना है, ‘जिन महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो पाती वे कभी कभी शरीर में जलन और सूजन से पीड़ित हो जाती हैं। कई बार वे नींद में भी दर्द के कारण जाग जाती हैं। नींद की कमी से जुड़ी कुछ दिक्कतों को हल्की झपकी लेकर ठीक किया जा सकता है। लेकिन यह झपकी 90 मिनट से ज्यादा की नहीं होनी चाहिये। ज्यादा देर तक लेटे रहने से फिर हमेशा उनींदे रहने की समस्या हो सकती है।’
नींद का सबसे बड़ा काम है दिमाग को आराम देना और उसे उसे मरम्मत करने का वक्त देना है। अमेरिका के ड्यूक विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के मुताबिक महिलाओं को चूंकि पुरुषों से ज्यादा नींद की जरूरत होती है इसीलिए अगर उन्हें नींद की कमी हो तो उन पर इसका असर भी अधिक होता है।
नींद की कमी होने पर महिलाओं को ज्यादा गुस्सा आता है और वे अवसाद ग्रस्त हो जाती हैं, जबकि पुरुषों को यह समस्या नहीं होती है। इससे पहले के शोधों से यह पता चला था कि नींद की कमी से दिल के रोग, मानसिक समस्याएं, स्ट्रोक और शरीर में सूजन जैसी दिक्कतें होती हैं।