शोधकर्ताओं का दावा है कि जब डॉक्टर रक्तचाप मापते हैं तो वह ज़्यादा आता है, जबकि जब नर्स माप लेती हैं वह ठीक आता है।
कुछ मामलों में तो यह माप इतनी अधिक होती है कि मरीज को तुरंत इलाज कराने का परामर्श देना ज़रूरी लगने लगे।
एक्जीटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का मत है कि ऐसा इसलिए हो सकता है, क्योंकि जब भी मरीज चिकित्सक के पास जाता है, उसकी बेचैनी बढ़ जाती है।
इसे 'सफेद कोट का प्रभाव' भी कहा जाता है। यह शोधपत्र बीजेजीपी डॉट ओआरजी वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने क़रीब 1,000 मरीजों का अध्ययन किया, जिनका रक्तचाप चिकित्सकों और नर्सों द्वारा एक ही समय जांचा गया था।
इस शोध के अगुवा डॉ. क्रिस्टोफर क्लार्क ने कहा कि अध्ययन के नतीजों से पता चलता है कि रक्तचाप की जांच में चिकित्सक संभवतः सबसे उपयुक्त नहीं साबित होते हैं।
उन्होंने कहा, ''चिकित्सकों को रुटीन चेकअप के दौरान मरीजों का रक्तचाप जांचना ही चाहिए, लेकिन जहां चिकित्सकीय परामर्श की ज़रूरत हो वहां उन्हें इसे नर्स पर छोड़ देना चाहिए।''
घर पर जांच
उन्होंने कहा, ''रीडिंग में जो अंतर हमें मिला, वो मरीज को दवाएं देने के लिए पर्याप्त आधार मुहैया कराता है और अनावश्यक इलाज से दुष्प्रभाव का ख़तरा हो सकता है।''
रक्तचाप दिन में कई बार ऊपर नीचे होता रहता है। जांच में एक बार उच्च रक्तचाप पाए जाने का मतलब यह नहीं कि आप बीमार हैं।
चिकित्सक से मिलने पर तनाव और बेचैनी भी आपके रक्तचाप को बढ़ा सकता है।
सटीक माप के लिए चिकित्सकों द्वारा मरीजों को टेस्टिंग किट दिए जाने का प्रचलन बढ़ रहा है ताकि वे घर पर भी किसी समय रक्तचाप की जांच कर सकें।
हालांकि उच्च रक्तचाप की जांच करना भविष्य में संभावित हृदयाघात जैसी बीमारियों के ख़तरे को कम करने के लिए ज़रूरी होता है।
ब्लड प्रेशर यूके से जुड़ीं कैथरीन जेनर का कहना है कि रक्तचाप की जांच घर और क्लीनिक दोनों जगह की जानी चाहिए।