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किडनी में पत्थरी के दौरान ध्यान रखें ये बातें

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उत्तर भारत को ′स्टोन बेल्ट′ के नाम से जानते हैं, क्योंकि इस इलाके में किडनी स्टोन के मामले ज्यादा मिलते हैं। 20 से 40 साल की उम्र के लोगों को यह समस्या आमतौर पर होती है। इनमें भी पुरुष स्टोन या पथरी का शिकार अधिक बनते हैं।
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किडनी स्टोन मूत्रतंत्र का एक रोग है, जिसमें किडनी के अंदर छोटे-छोटे पत्थर जैसे कठोर टुकड़े बन जाते हैं।

जब नमक और अन्य खनिज पदार्थ एक दूसरे के संपर्क में आते हैं, तो स्टोन बनना शुरू हो जाता है। कुछ स्टोन रेत के दानों की तरह बहुत छोटे होते हैं, तो कुछ का आकार काफी बड़ा होता है। आमतौर पर छोटे स्टोन मूत्र के जरिये शरीर से निकल जाते हैं।

लक्षण और जांच

पेट की निचली तरफ अचानक तेज दर्द होने के साथ पेशाब के समय जलन होना या जी मिचलाना किडनी में पथरी का संकेत हो सकता है।

पथरी, एक या दोनों ओर की किडनी में हो सकती है। पथरी की पुष्टि के डॉक्टर सबसे पहले अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं।

इसके अलावा आईबीपी, सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट या फिर यूरीन कल्चर की जरूरत भी पड़ सकती है।
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कैसा हो खानपान

पथरी से बचाव के लिए कैल्शियम का सेवन संतुलित मात्रा में करें। दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन भी बहुत अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। नॉन वेज ज्यादा खाना भी पथरी को दावत दे सकता है।

नमक का सेवन बेहद कम करे। इसके स्‍थान पर साइट्रस फ्रूट्स जैसे नीबू, संतरा और मौसमी इत्यादि का सेवन फायदेमंद होता है। चोकरयुक्त आटे का उपयोग भी भोजन में करना फायदेमंद है। सबसे ज्यादा जरूरी है हर रोज 3-4 लीटर पानी पीना। इससे छोटी-मोटी पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।

समस्या तब होती जब पथरी का आकार 4-5 मिमी. से बड़ा हो। 3-4 मिमी. की पथरी तो ज्यादा पानी पीने से निकल जाती है। पथरी निकालने के लिए लीथोट्रिप्सी, लैप्रोस्कोपी, यूरेटरोस्कोपी अथवा ओपन सर्जरी अपनाई जाती है।
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