रोज रोज अपनी एक ही तरह की सेल्फी डालना एक बुरा टास्क है ना। कुछ लोग खुद पर इतने फिदा हैं कि एक ही तरह की सेल्फी रोज डाल डाल कर लोगों को बोर करते हैं। अगर कुछ नया है तो जरूर डालिए....लेकिन रोज एक ही अदा से मत पकाइए प्लीज।
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कुछ यही हाल स्टेटस का है। दरअसल किसी को भी यह जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है कि आप हर दिन कहां गए, हर घंटे क्या किया, किससे मिले इसलिए फेसबुक पर हर दिन 70-80 फोटो और स्टेटस डाल कर दूसरों की न्यूज फीड न भरें तो अच्छा होगा।
अगर आपको बार बार अपना नाम बदलते रहने का शौक है तो प्लीज ऐसा न करें। लोगों की जिंदगीं में वैसे ही टेंशन क्या कम हैं जो आप बार-बार अपना नाम बदल कर उसे याद रखने का एक और टेंशन दे देते हैं।
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अपने मुंह मियां मिट्ठू ?
अपनी तारीफ... मैं ने तो नहीं की। क्यों घुमा फिरा के अपनी तारीफ करनी? आपको लगता है आपने वाकई कुछ बहुत महान किया है तो बिंदास बताओ। अगर सीधे तरीके से कहने में शरम आती है तो मतलब वह काम शायद इतना महान था ही नहीं तो साधु संत बनना छोड़ दीजिए।
अक्सर कुछ लोगों में आदत होती है कि वो खुद को सामाज सुधारक बताने की कोशिश करते हैं...इस पर कुछ दिन तारीफ जरूर आएगी लेकिन आप सामाजिक उद्धारक के रूप में लोगों को बोर करने लगे इससे बेहतर है कि अपनी तारीफ करना बंद कीजिए।
फेसबुक है, सर्च इंजन नहीं
क्या किसी को पता है आईफोन 6 का सर्विस सेंटर कहां है? फिल्म देखनी है...कौन सी देखूं, फोन लेना है ...कौन सा लूं...ऐसे स्टेटस बस एक तरीका होते हैं अपनी शेखी बघारने का कि सब लोग जान लो कि मैं क्या खरीदने जा रहा हूं। सच्चे मित्र आपको सलाह तो जरूर देंगे लेकिन अगर आप रोज ही सलाह मागेंगे तो लोग ऊबकर आपको इग्नोर करना शुरू कर देंगे। अगर कुछ पूछना हो तो गूगल बाबा की मदद लीजिए और खुद ही ढूंढ लीजिए।
यहां ज्ञान मत बघारिए फेसबुक पर अगर आप सलाह लेने वाले नहीं तो सलाह देने वाले भी मत बनिए। यहां ज्ञान मत बघारिए, यहां सब ज्ञानी है। दरअसल कुछ महानुभाव फेसबुक पर हो रहे किसी हल्के मजाक को भी अपने महान विचारों से इतना बोझिल और नीरस कर देते हैं कि लोग लिखने लगते हैं कि अंकल कहीं और जाओ..मत पकाओ....। यहां ज्ञानी अंकल कहलाने से अच्छा है कि ज्यादा नैतिकता और सामाजिक ज्ञान न बघारा जाए।
टैगिंग का खेल
किसी फोटो में किसी दोस्त की एक आंख भर दिखने का मतलब यह नहीं कि आप उसे फोटो में टैग कर दें। ना ही अपनी नई बाइक की फोटो में 55 लोगों को टैग करने की जरूरत है। बक्श दीजिए अपने दोस्तों को।
देवी देवताओं की फोटो पोस्ट करते हुए ढेरों लोगों को टैग करने से अच्छा है कि ये पुण्य आप खुद ही कमा लीजिए। क्या पता आप जिस बंदे को टैग कर रहे हैं वो नास्तिक हों। इसलिए अच्छा है कि फोटोग्राफ से संबधित लोगों को ही टैग करे और वो भी उनकी इच्छा को जानकर।
कैंडी क्रश का भूत
कैंडी क्रश का भूत है सवार अब तो मान जाइए। कैंडी क्रश की लाइफ मांगने से आपको पुनर्जीवन नहीं मिल जाएगा। रिक्वेस्ट भेजकर क्यों खुद को अनफ्रेंड करवाना चाहते हैं। फेसबुक पर अधिकतर उन लोगों को अनफ्रैंड किया जाता है जो कैंडी क्रश भेज भेज कर लोगों को परेशान करते हैं। अगर आपको खेलने का शौक है तो खुद खेलिए लेकिन दूसरों को खेलने के लिए मजबूर मत कीजिए।
केंडी क्रश के साथ साथ कन्यूनिटी और नाम की समानता वाले ग्रुप बनाने से भी बाज आइए। स्कूल कालेज के ग्रुप तो समझ आते हैं लेकिन क्राइम लवर, बैक राइडर, कानून मेरी जेब में... जैसे बेतुके ग्रुप में कोई घुसना पसंद नहीं करता।
सुंदरियों के फोटो और चुराई हुई शायरी को अगर आप पोस्ट करके ये समझते हैं कि आपने महान काम किया है तो इतना समझ लीजिए कि लाइक सुंदरी की फोटो पर आ रहे हैं, शायरी पर नहीं। अगर शायरी आपकी अपनी है तो भी ज्यादा मनहूसियत मत बिखेरिए....लोग फेसबुक पर खुशी खोजने आते हैं...दिल, जिगर के दुख खोजने नहीं।
कुछ लोग दोस्ती के नाम पर भी बड़े बड़े फोटो डाल कर पोस्ट कर डालते हैं। यकीन मानिए ये बेहद उबाऊ हैं। किसी को भी दोस्ती के कोट्स में दिलचस्पी नहीं होती। ये कोट्स बोरिंग लोगों की लिस्ट में बस शेयर होते रहते हैं।