इन तीन घटकों की भाषा लोक संस्कृति और खानपान ब्रिटेन से बहुत अलग है । इनमें भी आयरलैंड अनूठा है । आयरलैंड दो भागों में बंटा है, उत्तरी आयरलैंड ब्रिटेन का हिस्सा है, तो दक्षिणी स्वतंत्र गणराज्य का । इन दोनों के बीच सांप्रदायिक वैमनस्यता के कारण कई बार खून बहा, लेकिन साथ ही एकता की ललक भी कम जोरदार नहीं ।
खैर, यहां हम बात खानपान की कर रहे हैं, तो जो बात सबसे पहले याद रखने लायक है कि आयरलैंड में अनाज की जगह आलू ले चुका है । दिलचस्प बात यह है कि आलू भले ही आयरलैंड में पुर्तगालियों के साथ 16वीं शताब्दी में पहुंचा, पर बहुत जल्द बर्तानवी आकाओं ने आयरलैंड से अनाज और मांस का निर्यात ब्रिटेन के लिए जबरन करवाना आरंभ कर दिया, क्योंकि इनसे उनकी साम्राज्यवादी सेना के जवानों का भरण-पोषण होता था ।
कुछ ही वर्षों में आयरलैंड के निवासियों की आलू पर निर्भरता इतनी बढ़ गई कि एकबार आलू की फसल खराब होने से क्रांति का माहौल पैदा हो गया । आयरलैंड के घरों में रसोई में सबसे मशहूर ‘आयरिश इस्टू’ है, जिसे बकरी या भेड़ के मांस अथवा कभी-कभार पोर्क और चिकन से भी बनाया जाता है ।
इसमें मांस की मात्रा कम रहती है और आलू की अधिक। कहीं-कहीं आलू के साथ शलजम या गाजर भी मिलाए जाते हैं । मसाले नाममात्र के होते हैं और इस इस्टू को धीमी आंच में घंटों तक पकाया जाता है । आजकल आयरलैंड वासियों में खासकर ब्रिस्केट के बाद राष्ट्रीय स्वभिमान जागरित हुआ है । वह काफी तामझाम के साथ अधिक संपन्न वर्ग का भोजन भी अपने तरीक से बनाने लगे हैं ।
मसलन, बतख की हड्डी रहित सीने को, तले अंडे, बेकन और हिरण के मांस के छोटे टुकड़ों के साथ परोसा जाने लगा है । आलू से बनाए मोटे चीले या उत्पम को ‘बॉक्सटी’ कहते हैं । और चोखे की तरह बने आलुओं में सॉसेज और बेकन मिलाकर काले या बंद गोभी के पत्तों के साथ कॉडल एवं कॉलकानोन तैयार किया जाता है ।
आयरलैंड के उलस्टर प्रांत में सोडाफारी नामक डबलरोटी बनाई जाती है, जिसमें खमीर का इस्तेमाल नहीं किया जाता और आटे को उठाने के लिए छाछ का प्रयोग किया जाता है । आयरलैंड में ही मैदे की जगह आलू के आटे का प्रयोग कर एक विशेष डबलरोटी भी बनाई जाती है । यह आजकल उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है, जो ग्लूटेन के कारण मैदे से परहेज करते हैं ।
डबलरोटी को दूध में चीनी और मसालों के साथ मिलाकर गुली नामक मिठाई तैयार की जाती है, जो कुछ-कुछ हैदराबादी डबल के मीठे या डबलरोटी की खीर की तरह होती है । आयरलैंड में समुद्र से मिलने वाली मछलियों और छोटी नदियों से प्राप्त होने वाली मैकरेल और ट्राउट मछलियों को भी आम आदमी के खाने में जगह मिलती है, पर इनका प्रयोग सीमित मात्रा में ही होता है । वह भी अक्सर अचारी अवतार में ।