सर्दी में आमतौर पर त्वचा में होने वाली खुश्की को नजरअंदाज न करें। वेस्ट यूपी में सोरायसिस नामक बीमारी तेजी से पैर पसार रही है। इस बीमारी को गंभीरता से न लिया जाए तो इसका प्रभाव आनुवांशिक लक्षणों तक पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एंटीबायटिक दवाओं के बेतहाशा प्रयोग से ये बीमारी ज्यादा अटैक कर रही है।
सर्दी में त्वचा की खुश्की बड़ी समस्या रहती है। महिलाओं को दिक्कतें ज्यादा रहती हैं। एड़ी का फटना, होंठों में रुखापन, हाथों में पपड़ी उछलना जैसी बीमारियों से महिलाएं पूरे मौसम में परेशान रहती हैं। अब ऐसी परेशानियों से पुरुषों को भी दो चार होना पड़ रहा है। चर्म रोग विशेषज्ञ डा. रुचि पटवर्धन का कहना है कि स्टेट सोरायसिस को आमतौर पर लोग पहचान ही नहीं पाते हैं।
इसे लोग खुश्की के तौर पर ही लेते हैं, लेकिन ये बीमारी आनुवांशिक लक्षणों पर भी असर डालती है। यदि इसका इलाज वक्त पर न हो तो इससे मौत तक हो सकती है। नीमा के चेयरमैन व आयुर्वेद चिकित्सक डा. एसके शर्मा का कहना है कि सोरायसिस के संक्रमण के बाद गले में छाले व सूजन की भी शिकायत रहती है। होम्योपैथ व आयुर्वेद दवाओं के कोर्स से इस बीमारी को काबू में किया जा सकता है।
महिलाओं पर ज्यादा अटैक करता है सोरायसिस
गर्भावस्था के दौरान व डिलीवरी के बाद महिलाएं लगातार दवाओं का सेवन करती रहती है। इसके अलावा हरी सब्जियों के उत्पादन में अंधाधुंध प्रयोग होने वाले कीटनाशकों के प्रयोग से सोरायसिस के खतरे बढ़ जाते हैं। इसके चलते महिलाओं में सोरायसिस का खतरा ज्यादा रहता है।
यदि आप सोरायसिस का संक्रमण झेल रहे हैं, तो शराब, केमिकल युक्त भोज्य पदार्थ न लें। अपनी डाइट में हाई प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें। डाक्टर को तुरंत दिखाएं, उनकी सलाह के अनुसार ही अपना टाइम टेबिल निर्धारित करें। ठंड से बचाव बेहद जरूरी है।
आनुवांशिक संक्रमण नहीं है सोरायसिस
सोरायसिस एक ऐसा संक्रमण है जो ज्यादा एंटी बायटिक व कीटनाशक के सेवन से पैदा होता है। ये रोग आनुवांशिक लक्षणों पर तो असर डालता है लेकिन अगली पीढ़ी में इसका संक्रमण नहीं पहुंचता है।
ये हैं सोरायसिस के लक्षण
- नाखून व अंगुलियों पर लाल चकत्ते पड़ना, उनमें खुजली होना।
- इन चकत्तों से कभी खून या मवाद जैसा पदार्थ निकलना।
- हर 15-20 दिन में त्वचा से पपड़ी सी उतरना।
- लगातार पाचन क्रिया बिगड़ना, भूख कम लगना, घबराहट होना।