अब लिवर का ट्रांसप्लांट और अधिक प्रभावी व आसान हो सकेगा। लंदन में पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट की एक ऐसी तकनीक को सफलता मिली है जिसमें लिवर को शरीर के सामान्य तापमान वाली मशीन में जिंदा रखा गया और फिर उसे दूसरे शरीर में लगाया गया।
अभी तक लिवर को बर्फ में स्टोर किया जाता रहा है जिससे अधिकतर मामलों में लिवर बर्फ से निकालने के दौरान ही खराब हो जाता था लेकिन इस नई तकनीक की मदद से अब लिवर को बर्फ में रखने की जरूरत नहीं होगी और जिंदा लिवर को शरीर से निकालने के बाद भी शरीर से जैसा तापमान देने में आसानी होगी।
लंदन के किंग्स कॉलेज अस्पताल में 62 वर्षीय इयान क्रिस्टी नामक व्यक्ति के लिवर ट्रांसप्लांट में इस नई तकनीकी का उपयोग कर सफलता पाई गई है।
इस तकनीकी को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 15 साल के शोध के बाद विकसित किया।
इस तकनीकी के बारे में सर्जन प्रोफेसर पीटर फ्रेंड ने बताया, 'हमने ऐसी तकनीक विकसित की है जिसमें शरीर से निकाले गए लिवर के लिए ऐसा वातावरण होगा जैसा शरीर के भीतर होता है।'
इसके तहत डोनर के शरीर से लिवर को निकालकर एक ऐसी मशीन में रखा जाएगा जिसमें ट्यूब के जरिए ऑक्सीजन युक्त रक्त और पोशक तत्व लिवर तक पहुंचाए जाएंगे और लिवर अपना काम करता रहेगा।
वर्तमान में लिवर ट्रांसप्लांट में अधिकतर मामलों में पूरी तरह सफलता इसलिए नहीं मिल पाती है क्योंकि कभी फैट की वजह से बर्फ में स्टोर लिवर खराब हो जाता है या फिर ऑक्सीजन की कमी से यह काम करना बंद कर देता है।