अक्सर कार या बस में सफर करते वक्त आपको बेचैनी, उल्टियां, घबराहट जैसी किसी भी दिक्कत का सामना आपको करना पड़ जाता होगा। इस समस्या को मोशन सिकनेस कहते हैं।
मोशन सिकनेस कोई बीमारी नहीं है बल्कि वह स्थिति है जब हमारे दिमाग को भीतरी कान, आंख और त्वचा से अलग-अलग सिग्नल मिलते हैं जिससे सेंट्रल नर्वस सिस्टम दुविधा में पड़ जाता है। मसलन, कार में ट्रैवलिंग के वक्त आपके कान रफ्तार का संदेश दें और आंखें किताब पढ़ने का।
कई बार आपको सफर के दौरान न सिर्फ कुछ घंटों बल्कि तीन-चार दिनों तक चक्कर, घबराहट, जी मचलने या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं लेकिन अगर आप थोड़ी सावधानी बरतेंगे तो मोशन सिकनेस से निपटना बेहद आसान है।
खाली पेट न करें सफर
अक्सर जो लोग बिना कुछ खाए सफर पर निकल जाते हैं उन्हें मोशन सिकनेस अधिक होता है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि आप बहुत हेवी डाइट लें। हमेशा कहीं जाने से पहले घर से हल्का नाश्ता करके ही निकलें।
दूर के बिंदु पर रखें नजर
अक्सर ट्रैवलिंग के दौरान हम खिड़की के बाहर के नजारे लगातार देखते रहते हैं। इससे भी मोशन सिकनेस हो सकता है। अगर आपको सफर के दौरान जरा भी बेचैनी हो तो खिड़की से आस-पास की चीजों के बजाय किसी दूर के बिंदू पर केंद्रित हो जाएं या फिर थोड़ी देर तक आंखें बंद रखें।
पीछे की सीट से बचें
अगर आपको बस में सफर करते वक्त अक्सर ऐसी दिक्कत होती है तो बैठने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां रफ्तार का एहसास कम से कम हो। किसी भी बड़े वाहन की पीछे की सीट पर बैठने से गति का एहसास अधिक होता है। सबसे अच्छा होगा कि आप बीच की सीट पर ही बैठें। इसी तरह कार में फ्रंट सीट पर ही बैठें।
ताजा हवा
अधिक दिक्कत होने पर खिड़की का शीशा खोल लें और बाहर की ओर मुंह करके बैठें। आप अच्छा महसूस करेंगे।
न पढ़ें किताब
सफर के दौरान किताब न पढ़ें। इससे दिमाग को गलत संदेश मिलता है।
इन्हें ट्राइ करें
सफर के दौरान जी मचलने या चक्कर जैसा लगने की स्थिति में कोला ड्रिंक, अदरक, मिंट, कैंडी, च्वींग गम आदि के सेवन से आपको आराम मिल सकता है।