अब कंप्यूटर बताएगा कि आप कब बीमार पड़ने वाले हैं। वह यह भी बताएगा कि रोग सामान्य है या गंभीर। इतना ही नहीं, वह आपको इसका कारण भी बताएगा। यानी आप अपने पेशे की वजह से तो इस रोग की चपेट में नहीं आए।
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यह हेल्थ रिस्क मैनेजमेंट नामक सॉफ्टवेयर के जरिए संभव होगा, जिसे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बॉयो मेडिकल साइंस विभाग के शिक्षक डॉ. लवकुश ने आईआईटीआर (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टोक्सिकोलॉजी, लखनऊ) की मदद से तैयार किया है।
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इस सॉफ्टवेयर की मदद से कोई भी व्यक्ति कुछ प्रश्नों के जवाब एवं अपनी जांच रिपोर्ट को दर्ज कर भविष्य में होने वाली बीमारी को जान सकेगा।
सॉफ्टेवयर को दो भागों में बांटा गया है, एक भाग में सामान्य बीमारियों को रखा गया है। इस श्रेणी में कोई भी अपनी दिनचर्या या शारीरिक परेशानी एवं जांच रिपोर्ट को कंप्यूटर में दर्ज कर भविष्य में होने वाले हृदय, डायबिटीज, आर्थराइटिस, बैकपेन, माइग्रेन, किडनी में खराबी, थायराइड सहित दो दर्जन से ज्यादा गंभीर बीमारियों की जानकारी प्राप्त कर सकता है।
वहीं दूसरे वर्ग में पेशे से जुड़ी बीमारियों को रखा गया है। इस श्रेणी में खास पेशे से जुड़ा व्यक्ति अपनी परेशानी एवं कार्यक्षेत्र के वातावरण को कंप्यूटर में दर्ज कर रोग के संबंध में जानकारी हासिल कर सकेगा। इस श्रेणी में इंजीनियर, रिक्शा चालक, ट्रैफिक पुलिस, वैज्ञानिक, लैब टेक्निशियन, वेल्डर्स, डाटा एंट्री ऑपरेटर आदि शामिल हैं।
डॉ. लवकुश के मुताबिक, ''कंप्यूटर दर्ज सूचनाओं के आधार पर व्यक्ति को बताता है कि अगर यह समस्या अगले एक साल, तीन साल, पांच साल, दस साल या बीस साल तक बनी रही तो कौन- कौन सी बीमारी से वह पीड़ित हो सकता है। कंप्यूटर बीमारी से बचने के लिए कुछ सामान्य सुझाव भी देता है। इंटरनेट पर www.healthrisk.com वेबसाइट में इसे पा सकते हैं।''